नवीन समाचार, चंपावत, 22 मार्च 2026 (Sita Saves Geetas Life by Leopard)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के चंपावत (Champawat) जनपद के लोहाघाट (Lohaghat) क्षेत्र में जंगल से चारा लेने गई एक युवती पर गुलदार के हमले के दौरान उसकी साथी ने साहस दिखाते हुए पत्थरों से हमला कर उसे भगा दिया और उसकी जान बचा ली। इस घटना ने एक बार फिर पर्वतीय क्षेत्रों में वन्यजीवों के बढ़ते खतरे और मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human Wildlife Conflict) को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
घटना कैसे हुई और कैसे बची जान
चंपावत के लोहाघाट विकासखंड के ग्राम धौनी सिलिंग (Dhauni Siling) के डकला तोक निवासी 28 वर्षीय गीता देवी (Geeta Devi) पत्नी दिवान राम, रविवार को अपनी साथी सीता देवी (Sita Devi) के साथ जंगल में घास लेने जा रही थीं।
घर से लगभग 200 मीटर की दूरी पर ही घात लगाए बैठे गुलदार ने अचानक गीता देवी पर हमला कर दिया।
इस अप्रत्याशित स्थिति में सीता देवी ने घबराने के बजाय साहस दिखाया—
जोर-जोर से शोर मचाया
आसपास पड़े पत्थरों को उठाकर गुलदार पर लगातार प्रहार किए
लगातार प्रतिरोध से गुलदार पीछे हटने को मजबूर हुआ
कई पत्थरों की चोट और शोर के कारण गुलदार जंगल की ओर भाग गया।
घायल महिला का उपचार और स्थिति
हमले में गीता देवी के कंधे और चेहरे पर गुलदार के पंजों से चोटें आईं। ग्रामीणों और पूर्व ग्राम प्रधान युगल किशोर धौनी ने उन्हें तत्काल उपजिला चिकित्सालय (Sub District Hospital) पहुंचाया।
चिकित्सक डॉ. हिमांशु शरण (Dr. Himanshu Sharan) के अनुसार महिला अब खतरे से बाहर है और प्राथमिक उपचार के बाद उसे आगे के उपचार हेतु चंपावत चिकित्सालय भेजा गया है।
क्यों बढ़ रही हैं ऐसी घटनाएं
यह घटना केवल एक साहसिक बचाव की कहानी नहीं, बल्कि एक गंभीर चेतावनी भी है। क्षेत्र में पिछले कुछ समय से गुलदार के हमलों में वृद्धि देखी जा रही है।
बाराकोट (Barakot) क्षेत्र में पूर्व में दो लोगों की मृत्यु हो चुकी है
पुनई (Punai) और मंगोली (Mangoli) जैसे गांवों में भी हमलों की घटनाएं सामने आई हैं
जंगल और मानव बस्तियों की दूरी घटने से टकराव बढ़ रहा है
क्या वन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त है? क्या ग्रामीणों के लिए कोई स्थायी समाधान तैयार किया जा रहा है?
ग्रामीणों की मांग और प्रशासन की प्रतिक्रिया
घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने वन विभाग से—
गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने
गश्त बढ़ाने
संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने
की मांग की है।
वन विभाग के रेंजर नारायण पांडेय (Narayan Pandey) के अनुसार विभागीय टीम मौके पर भेजी गई है और लोगों को सतर्क रहने तथा सुरक्षा उपाय अपनाने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
क्या है आगे की चुनौती
मानव-वन्यजीव संघर्ष उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास सिमटना
भोजन की कमी
मानव गतिविधियों का विस्तार
इन कारणों से ऐसे हमले बढ़ रहे हैं।
ऐसे में आवश्यक है कि—
वन्यजीव प्रबंधन नीति (Wildlife Management Policy) को और मजबूत किया जाए
ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा तंत्र विकसित हो
त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली लागू की जाए
यह घटना जहां एक ओर साहस और सूझबूझ का उदाहरण है, वहीं दूसरी ओर यह संकेत भी देती है कि समस्या गहरी है और समाधान की आवश्यकता तत्काल है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।















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