नवीन समाचार, हरिद्वार, 20 अक्टूबर 2026 (Corruption-Case Against Sub-Inspectors)। उत्तराखंड (UTTARAKHAND) के हरिद्वार (Haridwar) जनपद के रुड़की (Roorkee) में किशोरी को आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़े एक पुराने मामले की विवेचना के दौरान कथित रिश्वतखोरी का मामला सामने आया है। अंतिम रिपोर्ट (Final Report—FR) लगाने के नाम पर एक तत्कालीन उपनिरीक्षक पर 3.50 लाख रुपये लेने और दूसरे पर पांच लाख रुपये मांगने का आरोप है।
शिकायतकर्ता की ओर से कथित बातचीत की ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग अधिकारियों को सौंपे जाने के बाद ग्रामीण पुलिस अधीक्षक की जांच रिपोर्ट के आधार पर दोनों तत्कालीन उपनिरीक्षकों के विरुद्ध प्राथमिकी (First Information Report—FIR) दर्ज की गई है। मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के अंतर्गत दर्ज किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपित तत्कालीन उपनिरीक्षकों के नाम मनदीप सिंह और बलवंत पवार हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि मनदीप सिंह ने मामले में अंतिम रिपोर्ट लगाने के नाम पर 3.50 लाख रुपये लिए थे। इसके बाद दोबारा विवेचना शुरू होने पर बलवंत पवार ने अंतिम रिपोर्ट लगाने के लिए पांच लाख रुपये की मांग की। आरोप यह भी है कि रकम देने से इनकार करने पर शिकायतकर्ता को गोली मारने, जेल भेजने और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई। हालांकि, इन आरोपों का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
जुलाई 2023 में दर्ज हुआ था किशोरी की आत्महत्या का मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह प्रकरण पांच जुलाई 2023 को गंगनहर कोतवाली (Gangnahar Police Station) में दर्ज आत्महत्या के लिए उकसाने की प्राथमिकी से जुड़ा है। रुड़की के गणेश विहार निवासी सुषमा सैनी (Sushma Saini) ने अपनी 17 वर्षीय बेटी की मृत्यु के संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी। किशोरी देहरादून (Dehradun) में रहकर पढ़ाई कर रही थी।
शिकायत के अनुसार, देहरादून में रहने के दौरान किशोरी की रूम पार्टनर ने उसे अपने भाई से परिचित कराया। आरोप है कि इसके बाद युवक ने किशोरी का मोबाइल सिम बदल दिया और चार लोगों ने मिलकर उसे कथित रूप से ब्लैकमेल तथा प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। इससे परेशान होकर किशोरी ने पढ़ाई छोड़ दी और रुड़की लौट आई, लेकिन शिकायत के अनुसार, प्रताड़ना जारी रही।
बताया गया है कि चार फरवरी 2023 को किशोरी ने घर में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। इस मामले में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बागपत (Baghpat) और बदायूं (Budaun) जनपदों से संबंधित व्यक्तियों के नाम सामने आए थे। मूल प्रकरण में लगाए गए आरोपों और उनकी न्यायिक स्थिति को अलग-अलग समझना आवश्यक है।
पहले विवेचक पर 3.50 लाख रुपये लेने का आरोप
उपलब्ध समाचार रिपोर्टों के अनुसार, मूल मामले की विवेचना तत्कालीन उपनिरीक्षक मनदीप सिंह को सौंपी गई थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उन्होंने अंतिम रिपोर्ट लगाने के नाम पर 3.50 लाख रुपये लिए। इसके बाद वर्ष 2024 में मामले में अंतिम रिपोर्ट भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
बाद में मामले की दोबारा विवेचना शुरू हुई और इसकी जिम्मेदारी तत्कालीन उपनिरीक्षक बलवंत पवार को सौंपी गई। आरोप है कि बलवंत पवार ने भी अंतिम रिपोर्ट लगाने के लिए पांच लाख रुपये की मांग की। शिकायतकर्ता के अनुसार, रकम देने से इनकार करने पर उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई।
ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर जांच
शिकायतकर्ता ने कथित रिश्वत मांगने और बातचीत से संबंधित ऑडियो तथा वीडियो रिकॉर्डिंग अधिकारियों को सौंपी थी। किशोरी की मां की शिकायत पर तत्कालीन पुलिस अधीक्षक-ग्रामीण शेखर चंद्र सुयाल (Shekhar Chandra Suyal) ने मामले की जांच की थी।
पुलिस अधीक्षक-ग्रामीण अभय प्रताप सिंह (Abhay Pratap Singh) ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोनों तत्कालीन उपनिरीक्षकों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। मामले में आगे की जांच की जा रही है।
विभिन्न समाचार रिपोर्टों में दोनों उपनिरीक्षकों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत अभियोग दर्ज किए जाने का उल्लेख है। हालांकि, प्राथमिकी दर्ज होना आरोपों का न्यायिक रूप से सिद्ध होना नहीं है। जांच में कथित लेनदेन, रिकॉर्डिंग और संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका का परीक्षण किया जाना शेष है।
पुलिस विवेचना की निष्पक्षता पर उठे सवाल
यह प्रकरण एक ओर किशोरी की आत्महत्या से जुड़े गंभीर मामले की विवेचना से संबंधित है, तो दूसरी ओर उसी विवेचना के दौरान कथित रिश्वतखोरी के आरोपों से भी जुड़ा है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और शिकायतकर्ता की सुरक्षा महत्वपूर्ण होती है।
फिलहाल दोनों तत्कालीन उपनिरीक्षकों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज होने के बाद आगे की जांच जारी है। जांच के निष्कर्षों और न्यायिक प्रक्रिया से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और संबंधित व्यक्तियों की क्या भूमिका रही।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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