Corruption Crime

उत्तराखंड के एक पीसीएस अधिकारी के घर विजिलेंस ने मारा छापा…

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नवीन समाचार, मेरठ (उत्तर प्रदेश), 7 मार्च 2020। उत्तराखंड के देहरादून में तैनात राज्य कर अधिकारी अनिल कुमार के मोदीपुरम की शिवनगर कालोनी में स्थित घर पर देहरादून की विजिलेंस टीम ने छापेमारी की है। वर्तमान में अनिल कुमार देहरादून जेल में बंद हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने हरियाणा के हिसार निवासी कारोबारी से 29 हजार 500 रुपये की अवैध वसूली की है।
देहरादून की भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट से सर्च वारंट लेकर विजिलेंस की टीम यहां पहुंची। विजिलेंस टीम का नेतृत्व इंस्पेक्टर प्रदीप पंत कर रहे थे, जिनके साथ एक महिला दारोगा समेत चार अन्य कर्मचारी थे। टीम ने सबसे पहले पल्लवपुरम थाने में आमद दर्ज कराई। उसके बाद थाना पुलिस को साथ लेकर शिवनगर में अनिल कुमार के घर छापा मारा। घर पर अधिकारी की पत्नी, बच्चों समेत रिश्तेदार थे। यहां पड़ोसियों की भीड़ जमा हो गई। करीब चार घंटे में टीम ने मकान के कागज से लेकर कार, बाइक, स्कूटी, एलआइसी, बैंक पासबुक और अन्य कागजों की पड़ताल कर लिस्ट तैयार की और स्वजनों के हस्ताक्षर कराए।
आरोप है कि 16 फरवरी की रात अनिल कुमार ने हरियाणा के हिसार से माल लेकर देहरादून आ रहे ट्रक ड्राइवर की जेब से जबरन 9500 रुपये निकाले थे। अनिल कुमार ने हिसार के व्यापारी से 20 हजार रुपये अपने साथी व केस में सह-आरोपित अजय मलिक के खाते में डलवाए और वाहन को छोड़ दिया। गाड़ी में लोड माल देहरादून के कारोबारी अनिल माटा के कारखाने में जा रहा था। पीड़ित व्यापारी ने प्रकरण की शिकायत सीएम पोर्टल पर दर्ज कराई थी। अनिल कुमार को निलंबित कर जांच की गई तो आरोप सही पाए गए। केस दर्ज कर आरोपित अनिल कुमार को मेरठ से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

सेना के जवान से शिक्षक और अधिकारी तक का सफर

अनिल कुमार की सेना से सेवानिवृत्त होने के कुछ महीनों बाद ही प्राइमरी स्कूल में शिक्षक के पद पर नौकरी लग गई। करीब दो वर्ष की नौकरी के दौरान ही उन्होंने उत्तराखंड पीसीएस की परीक्षा पास कर ली। वर्तमान में अनिल कुमार देहरादून में राज्य कर अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। उनकी तैनाती मोबाइल दस्ते में थी।

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नवीन समाचार, देहरादून, 23 फरवरी 2020। उत्तराखंड पुलिस ने प्रदेश के बहुचर्चित वन आरक्षी भर्ती परीक्षा की धांधली में शामिल अभ्यर्थी को पांच लाख रुपये में नकल कराने के आरोप में एक कृषि विभाग के अधिकारी को गिरफ्तार किया है। कोटद्वार में तैनात आरोपित सहायक कृषि अधिकारी सुधीर कुमार पर आरोप है कि उसने अपने ही रिश्तेदार युवक को परीक्षा में पास कराने का झांसा दिया था। साथ ही रुड़की स्थित ओजस्वी करियर सेंटर के संचालक मुकेश सैनी गिरोह से बहु उसके तार जुड़े बताए जा रहे हैं, जिसे पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।
उल्लेखनीय है कि गत 16 फरवरी को प्रदेश में विभिन्न केंद्रों पर अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से वन आरक्षी भर्ती परीक्षा हुई थी। यह परीक्षा कराई गई थी। परीक्षा संपन्न होते ही ओएमआर शीट सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी थी। कुछ घंटों के अंतराल में परीक्षा में अन्य गड़बडिय़ों की शिकायतें भी सामने आईं। पुलिस को शुरुआती जांच में पता चला कि कुछ केंद्रों पर अभ्यर्थियों को नकल कराने के लिए एक गिरोह ने पांच लाख रुपये तक में सौदा किया हुआ था। इन्हें ब्लूटूथ के जरिये प्रश्नों के उत्तर बताए जाने थे, इसके लिए बाकायदा कोड वर्ड बनाए गए थे। परीक्षा के अगले ही दिन इस मामले में पौड़ी और हरिद्वार में 11 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। जांच में पता चला कि हरिद्वार जिले के मंगलौर स्थित ओजस्वी करियर सेंटर का संचालक मुकेश सैनी गिरोह को संचालित कर रहा था। उसने कुछ युवकों को पौड़ी और हरिद्वार के सेंटरों में नकल कराने के लिए भेजा था। इसके बाद इधर रविवार देर शाम पौड़ी जिले की पुलिस ने इस मामले में कोटद्वार में तैनात सहायक कृषि अधिकारी सुधीर कुमार को गिरफ्तार कर लिया। मंगलौर निवासी गोपाल सिंह ने सुधीर समेत चार लोगों के खिलाफ पौड़ी कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। गोपाल सिंह ने शिकायत में बताया था कि हरिद्वार निवासी पंकज, संजय और सौरभ ने उनके बेटे को पांच लाख रुपये में भर्ती परीक्षा में नकल करवा कर उत्तीर्ण करवाने की बात कही थी। उसके बेटे से उक्त तीनों युवकों की बात कोटद्वार में रह रहे उनके रिश्तेदार सुधीर ने कराई थी।

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नवीन समाचार, देहरादून, 21 फरवरी 2020। विगत कई समय से उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग व प्रावधिक शिक्षा परिषद में पेपर लीक कराने व ब्लू टूथ के माध्यम से प्रतियोगिता परीक्षा मे नकल कराने वाले गिरोह की सूचना प्राप्त हो रही थी। इस सन्दर्भ में एसटीएफ उत्तराखण्ड व जनपद हरिद्वार पुलिस लगातार सक्रिय होकर काम कर रही थी इसी परिपेक्ष मे उत्तराखण्ड वन आरक्षी की परीक्षाओ मे नकल कराये जाने की सूचना के बाद गत 17 फरवरी को ब्लूटूथ के माध्यम से नकल करने के लिऐ ठगी के सम्बन्ध मे मुकेश सैनी ओजस्वी कैरियर कोचिंग सैन्टर गुरुकुल नारसन के विरुद्ध थाना मंगलौर पर धारा 420 भादवि के तहत मुकदमा पजीकृत कराया तथा। बताया कि इस परीक्षा मे पहले पेपर लीक कराने और बाद में ब्लूटूथ मे माध्यम से नकल कराने की एवज मे 4 लाख रुपये की सौदेबाजी मुकेश सैनी द्वारा की गयी थी। एक लाख एडवांस लिए गये थे।
इस घटना का सोशल मीडिया व अखबारों के माध्मय से लोगो को जानकारी होने पर इस परीक्षा मे शांमिल परीक्षार्थी व शिक्षित बैरोजगारों में काफी असन्तोष व्याप्त था तथा लगातार गिरोह के पर्दाफाश की मांग की जा रही थी। इस तरह के गिरोह के अनावरण हेतु वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार द्वारा पुलिस अधीक्षक ग्रामीण के निर्देशन मे क्षेत्राधिकारी मंगलौर तथा लक्सर के नेतृत्व में पुलिस टीमों का गठन किया गया और गिरोह की घरपकड हेतु पुलिस द्वारा अभियुक्त के ठिकाने पर छापेमारी की व मुखविर तथा सर्विलास की मदद ली गयी। आखिर 21 फरवरी को मुखविर की सूचना पर गैग के मुख्य सरगना मुकेश सैनी पुत्र स्व. जलसिह निवासी ग्राम हरचन्दपुर कोतवाली मंगलौर जिला हरिद्वार को गिरफ्तार किया गया। उसके कब्जे से ब्लूटूथ डिवाइस मोबाईल आदि बारामद हुआ। आरोपित ने पूछताछ पर बताया कि वह तथा उसके टीम के सदस्य कोचिगं सेन्टर मे पहले ग्राहको को नौकरी दिलाने के नाम पर फॅसाते है तथा कुछ अग्रिम धन लेकर उत्तराखण्ड में व एसएससी में होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओ मे पेपर लीग करके या ब्लूटूथ डिवाईस के माध्यम से नकल कराकर लोगों को नौकरी दिलाते थे। इससे पूर्व इनके द्वारा कई प्रतियोगिता परीक्षाओं में इस तरह के कार्य किये गये हैं। विवेचना में साक्ष्य के आधार पर धारा 66 (डी) की बढोतरी की गयी।

यह भी पढ़ें : ऐसे देंगे शिक्षा ? जिले का मुखिया 15 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार

नवीन समाचार, नैनीताल, 5 फरवरी 2020। अल्मोड़ा जिले के शिक्षा विभाग के मुखिया यानी मुख्य शिक्षा अधिकारी जगमोहन सैनी बुधवार को प्रदेश की ‘जीरो टॉलरेंस’ की सरकार की मंशा को पलीता लगाते हुए 15 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किए गए हैं। उस वक्त देखने को मिला जब कुमाऊ विजिलेंस ने अल्मोड़ा के मुख्य शिक्षा अधिकारी जगमोहन सैनी को 15000 रुपये घूस ग्रहण करते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।  विजिलेंस की टीम ने सीईओ सैनी के आवास से 1 लाख 93 हजार 200 रुपए बरामद किये हैं।
शिकायतकर्ता राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सोनी ताड़ी खेत, जिला अल्मोड़ा के शिक्षक नंदन सिंह परिहार पुत्र माधव सिंह ने गत 28 जनवरी को एक शिकायती पत्र पुलिस अधीक्षक सतर्कता अधिष्ठान हल्द्वानी नैनीताल को इस आशय का दिया कि उसकी पिछली तैनाती हाई स्कूल डोनी ताकुला में थी। उक्त नियुक्ति अवधि में मध्यान्ह भोजन योजना के बिल वाउचर के संबंध में जगमोहन सोनी, मुख्य शिक्षा अधिकारी अल्मोड़ा ने एक स्पष्टीकरण मांगा। उनके द्वारा सभी कार्य नियमपूर्वक किये गए थे और ये बात स्पष्ट रूप से मुख्य शिक्षा अधिकारी को बता दी थी, फिर भी उनके द्वारा स्पस्टीकरण पत्र देकर मामले को निपटाने के एवज मे 15000 की घूस की मांग की जा रही है। उक्त प्रकरण की जांच में आरोप सही पाए जाने पर आरोपी के राजपत्रित अधिकारी होने के कारण शासन की अनुमति प्राप्त कर पांच फरवरी को आरोपी जगमोहन सोनी मुख्य शिक्षा अधिकारी अल्मोड़ा को शिकायतकर्ता से से 15000 घूस ग्रहण करते हुए रंगे हाथों समय शाम 4.40 बजे सतर्कता अधिष्ठान हल्द्वानी ट्रैप टीम द्वारा आरोपी के कार्यालय मुख्य शिक्षा अधिकारी अल्मोड़ा कार्यालय से गिरफ्तार किया गया।

सतर्कता विभाग द्वारा भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने हेतु 18001806666 टोल फ्री हेल्पलाइन की व्यवस्था की गयी है। वृहद प्रचार-प्रसार हेतु बोर्ड लगाये गये है, तथा Facebook व Whatsapp No. – 9456592300 / 05946246372पर भी सतर्कता विभाग सक्रिय है। जनता से अनुरोध है कि इस मुहिम में हमें सहयोग दें।
यह भी पढ़ें : विजिलेंस ने रिश्वत लेते सर्वे कानूनगो को रंगे हाथों किया गिरफ्तार…

नवीन समाचार, देहरादून, 28 जनवरी 2020। विजिलेंस ने देहरादून में एक सर्वे कानूनगो किशन सिंह नेगी पुत्र स्व. विजय राम नेगी निवासी ग्राम थुराऊ पोस्ट कालसी गेट तहसील व थाना कालसी को रिश्वत लेते हुए कार्यालय बंदोबस्त पटेलनगर देहरादून में तैनात रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। सर्वे कानूनगो के खिलाफ विजिलेंस को शिकायत मिली थी कि वह सेवानिवृत्त सैनिक से खतौनी में पिता का नाम सुधारने के बदले 5 हज़ार रुपये मांग रहा था। शिकायतकर्ता के इस बाबत भेजे गए शिकायती पत्र पर पुलिस अधीक्षक सतर्कता देहरादून की टीम ने पुष्टि होने पर मंगलवार को कार्यवाही की, और दोपहर 3:30 बजे उसे उसके कार्यालय से रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की सुसंगत धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया गया है। सतर्कता निदेशक ने टीम के उत्साहवर्धन हेतु नगद पुरस्कार की घोषणा की है।

यह भी पढ़ें : गणतंत्र दिवस पर इधर सम्मानित हो रहे थे उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मी, उधर रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़ा गया पुलिस कर्मी

नवीन समाचार, सितारगंज, 26 जनवरी 2020। गणतंत्र दिवस के दिन जब देश-प्रदेश से लेकर जनपदों तक पुलिस एवं अन्य विभागों के उत्कृष्ट कार्य करने वाले सरकारी अधिकारी व कर्मचारी पुरस्कृत किये जा रहे थे, उसी समय उत्तराखंड पुलिस के एक सिपाही को हल्द्वानी विजिलेंस टीम ने एसपी विजिलेंस अमित श्रीवास्तव के नेतृत्व में आई टीम के द्वारा रविवार अपराह्न करीब सवा तीन बजे 20,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। ऊधमसिंह नगर जिले के खटीमा थाने के अंर्तगत आने वाली झनकैया पुलिस चौकी में शिकायतकर्ता दयाशंकर प्रजापति की गत 24 जनवरी को हल्द्वानी स्थित विजिलेंस कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर विजीलेंस ने जाल बिछाकर झनकैया थाने में तैनात निकटवर्ती चकरपुर निवासी आरक्षी कुशल कन्याल पुत्र दीवान सिंह कन्याल को 20,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। उस पर आरोप लगाया गया था कि मकान बिक्री के हिस्से-बंटवारे में उनकी भाभी द्वारा की गई शिकायत का समाधान कर उसे लाभ पहुंचाने के ऐवज में कन्याल 20,000 रूपये की रिश्वत मांग रहा था। आरोपी सिपाही के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

यह भी पढ़ें : यहां नगर पालिका में फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्रों के आधार पर पांच लोग कर रहे नौकरी…

नवीन समाचार, अल्मोड़ा, 18 जनवरी 2020। अल्मोड़ा पालिका में वर्ष 2000 से 2004 के बीच फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्रों के आधार पर पांच लोगों द्वारा नौकरी पाने एवं पदोन्नति लेने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। सूचना के अधिकार में मांगी गई जानकारी के बाद हुए खुलासे के बाद शहरी विकास निदेशालय ने पालिका को कार्यवाही करने का निर्देश देते हुए रिपोर्ट तलब की है। पालिका प्रशासन ने पांचों कर्मचारियों पर कार्यवाही करते हुए रिपोर्ट शहरी विकास निदेशक को भेज भी दी है।
गौरतलब है कि जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष हरजिंदर
सिंह ने वर्ष 2005 में अल्मोड़ा पालिका में चतुर्थ श्रेणी
कर्मचारियों की नियुक्ति एवं सहायक लिपिक के पदों पर
पदोन्नति की जानकारी मांगी थी। इसके बाद शहरी विकास निदेशालय ने अपने स्तर से पड़ताल की तो पालिका में कार्यरत पांच कर्मचारियों के कागजात एवं शैक्षिक दस्तावेज फर्जी होने का अंदेशा हुआ। जांच कराने के बाद उनके प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए। इसके बाद शहरी विकास निदेशक विनोद कुमार सुमन ने दोषी कर्मचारियों पर अक्टूबर माह में पालिका अल्मोड़ा को नियमानुसार कार्रवाई करने के आदेश दिए थे। इसके बाद पालिका ईओ श्याम सुंदर प्रसाद ने मामले की जांच अपने स्तर से करने के बाद सभी कर्मचारियों को नोटिस देकर रिकवरी के आदेश दे दिए हैं। सूचना के अधिकार में खुलासा होने के बाद 26 सितंबर 2019 को शहरी विकास के निदेशक की ओर से प्रदेश के सभी नगर आयुक्तों व पालिका व नगर पंचायतों के अध्यक्षों व अधिशासी अधिकारियों को पत्र भेजकर सभी नियुक्तियों एवं शैक्षिक अर्हताओं की जांच के आदेश जारी किए गये थे। पत्र में स्पष्ट किया है कि हिंदी साहित्य सम्मेलन इलाहाबाद द्वारा संचालित प्रथमा, मध्यमा अथवा कोई उच्चतर परीक्षा परिषद को हाईस्कूल, इंटरमीडिएट के समकक्ष माध्यमिक शिक्षा परिषद से न तो पूर्व में मान्य थी और न ही वर्तमान में मान्य है। मामले में पालिका ईओ श्याम सुंदर प्रसाद ने बताया कि फर्जी दस्तावेज एवं अमान्य शैक्षिक योग्यता के मामले में पालिका के पांच कर्मचारी पकड़ में आये हैं। उनमें से 2004 में एक अनुसेवक सेवानिवृत्त एवं एक का तबादला अन्यत्र हो गया है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में हरीश चंद्र आर्य माली के पद पर तैनात है। इसके अलावा प्रकाश चंद्र पंत एवं दीप चंद्र जोशी जो कि दोनों चतुर्थ श्रेणी से प्रोन्नत होकर सहायक लिपिक पद पर कार्यरत हैं। सभी कर्मचारियों से रिकवरी के आदेश दे दिए हैं। साथ ही सभी पर नियमानुसार आगे की कार्यवाही अमल में लाई जा रही है। कार्यवाही की रिपोर्ट शहरी विकास निदेशालय को भी भेज दी गई है।

यह भी पढ़ें : हद है, बिजली के घरेलू कनेक्शन के लिए 75 हजार रुपए मांग रहा था घूसखोर जेई, यह हुआ हाल….

नवीन समाचार, देहरादून, 17 जनवरी 2020। विजीलेंस की टीम ने देहरादून में बिजली का घरेलू कनेक्शन लगाने के ऐवज में 75 हजार रुपए की रिश्वत मांग रहे विद्युत वितरण खंड के घूसखोर अवर अभियंता को 75 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोच लिया है। विजीलेंस को शिकायत मिली थी कि अवर अभियंता घरेलू कनेक्शन लगाने की फाइल को लंबे समय से अटकाए हुए था और 75 हजार रुपए मांग रहा था। इस पर उसे सेलाकुई क्षेत्र से जाल बिछाकर रिश्वत में दिये गए रुपयों के साथ पकड़ लिया गया। सहायक श्रम आयुक्त कमल जोशी भी विजीलेंस की टीम के साथ मौजूद रहे।
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यह भी पढ़ें : कर्मचारी ने तीन महीने अपने पास रखी 1.33 लाख की सरकारी रकम, मुकदमा हुआ दर्ज

नवीन समचार, जसपुर (ऊधमसिंह नगर), 26 दिसंबर 2019। राजस्व कर्मी ने राजकीय कोष में धनराशि जमा न करके तीन माह तक अपने पास रख ली। जांच में यह साबित होने पर तहसील प्रशासन ने डीएम के आदेश पर उन्हें पहले ही निलंबित नायब नाजिर के खिलाफ गबन का मुकदमा दर्ज करा दिया है।
घटनाक्रम के अनुसार गत 18 सितंबर को एसडीएम सुंदर सिंह को तहसील कार्यालय का औचक निरीक्षण करने के दौरान नायब नाजिर नीरज कुमार द्वारा दिखाए गए अभिलेखों में गड़बड़ी का शक हुआ। एसडीएम ने तहसीलदार विपिन पंत, नायब तहसीलदार सुदेश कुमार एवं उपकोषाधिकारी निरूपमा पांडे की तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर प्रकरण की जांच के निर्देश दिए थे। जांच में पाया गया था कि नायब नाजिर ने खनन के जुर्माने, डोलबंद, मिट्टी उठान एवं सीमांकन में आई एक लाख तैंतालिस हजार 889 रुपये की धनराशि राजकोष में जमा न कराकर अपने पास रख ली और तीन माह एवं छह माह के अंतराल में यह धनराशि सरकारी खजाने में जमा कराई। जांच समिति ने नायब नाजिर के इस कृत्य को वित्तीय अनियमितता एवं सरकारी धन का दुरुपयोग बताकर एसडीएम को रिपोर्ट सौंपी। इस पर एसडीएम ने नायब नाजिर पर कानूनी कार्रवाई के लिए डीएम को रिपोर्ट भेज दी। इस रिपोर्ट पर बुधवार को डीएम ने नायब नाजिर को निलंबित कर जिला मुख्यालय में अटैच कर दिया है। साथ ही गुरुवार को नायब तहसीलदार सुदेश कुमार ने उन पर गबन का केस दर्ज करा दिया। कोतवाल उमेद सिंह दानू के अनुसार आरोपित पर गबन का मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है। वहीं आरोपित नीरज कुमार का कहना है कि जांच समिति ने न ही उसके बयान दर्ज किए और न ही उससे स्पष्टीकरण मांगा। उसके द्वारा पैसा जमा करा दिया गया था।

यह भी पढ़ें : एमडी पर 100 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के आरोप, हाइकोर्ट ने 3 सप्ताह में मांगा जवाब

नवीन समाचार, नैनीताल, 14 दिसंबर 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने पेयजल निगम के एमडी पर भ्रष्टाचार करने के आरोप में दायर जनहित याचिका को स्वीकारते हुए एमडी सहित सभी पक्षकारों से तीन सप्ताह में जवाब पेश करने को कहा है। मामले के अनुसार मूलतः गुड़गांव दिल्ली व हाल देहरादून निवासी मुकेश कुमार सिन्हा ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि पेयजल निगम के एमडी भजन सिंह ने कई सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार किया हुआ है, इसलिए उनकी नियुक्ति को निरस्त किया जाये और भ्रष्टाचार के मामले की सीबीआई से जांच कराई जाये। याची ने अपनी याचिका में एमडी पर यह आरोप भी लगाए हैं कि उनके द्वारा नियमविरुद्ध तरीके से अपने चहेतों को निविदा आवंटित कर दी हैं जिसके कारण सरकार को सौ करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व की हानि हुई है। एमडी द्वारा 9 लाख रुपये की नमामि गंगे प्रोजेक्ट के पैसो से अपने घर के लिए पेड़-पौधे खरीदे गए।

यह भी पढ़ें : एमडी पर 100 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के आरोप, हाइकोर्ट ने 3 दिन में मांगा जवाब

यह भी पढ़ें : एमडी पर 100 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के आरोप, हाइकोर्ट ने 3 दिन में मांगा जवाबनवीन समाचार, 7 दिसंबर 2019। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एमडी पयेजल निगम के द्वारा भ्रष्टाचार करने के खिलाफ दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए याचिकर्ता से 10 दिसम्बर तक तथ्यो के साथ शपथ पत्र पेश करने को कहा है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायधिश रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खण्डपीठ में हुई।

मामले के अनुसार मुकेश कुमार सिन्हा गुड़गांव दिल्ली हाल निवासी देहरादून ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि एमडी पेयजल निगम भजन सिंह ने कई सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार किया हुआ है इसलिए उनकी नियुक्ति को निरस्त किया जाय और भ्रष्टाचार के मामले की सीबीआई से जांच कराई जाय। याचिकर्ता ने अपनी याचिका में एमडी पेयजल पर यह आरोप लगाए है कि उनके द्वारा नियम विरुद्ध तरीके से अपने चेहतों को टेंडर आवंटित कर दिए है, जिसके कारण सरकार को सौ करोड़ रुपये आए अधिक राजस्व की हानि हुई है। एमडी द्वारा 9 लाख रुपये की नमामि गंगे प्रोजेक्ट के पैसो से अपने घर के लिए पेड़-पौधे खरीदे गए ।

यह भी पढ़ें : आरटीओ ऑफिस में कर्मचारी नेता की सीट पर बैठ दलाल ले रहा था रिश्वत, 3 गिरफ्तार कर जेल भेजे

नवीन समाचार, देहरादून, 22 नवंबर 2019। देहरादून के आरटीओ कार्यालय में विजिलेंस के छापे में ट्रैक्टर का कामर्शियल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी करने के नाम पर प्रमुख सहायक की कुर्सी पर छह हजार की रिश्वत वसूलते हुए दलाल पकड़ा गया। विजिलेंस ने नेटवर्क में शामिल दो दलालों और दफ्तर के मुख्य सहायक-यशबीर बिष्ट, जो कि कर्मचारी नेता भी है, को गिरफ्तार कर आज जेल भेेेज दिया।

विजिलेंस के पुलिस उप महानिरीक्षक कृष्ण कुमार वीके ने बताया कि एक किसान ने 19 नवंबर को विजिलेंस की एसपी रेणु लोहनी से मिलकर शिकायत की थी कि ट्रैक्टर के व्यावसायिक प्रयोग के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के लिए उसने संभागीय परिवहन कार्यालय में आवेदन किया था। वह संबंधित कागजात और फीस जमा कराने के बाद आरटीओ आफिस के काउंटर नंबर चार पर पहुंचा। यह सीट मुख्य सहायक यशबीर बिष्ट की है। उस पर मोनू मलिक उर्फ संदीप बैठे हुआ था। आरोप लगाया कि उसने रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के लिए अलग से छह हजार रुपये की रिश्वत मांगी और इसके बिना कार्य होने से साफ इंकार कर दिया। उसने कहा कि यदि काम कराना है तो 21 अक्तूबर को रकम लेकर आ जाना। डीआईजी ने बताया कि गोपनीय जांच में आरोप की पुष्टि के बाद एसपी ने ट्रैप टीम गठित कर दी। शिकायतकर्ता बृहस्पतिवार दोपहर रकम लेकर काउंटर पर पहुंचा तो वहां पर मुख्य सहायक यशबीर बिष्ट के स्थान पर मोनू बैठा था। रिश्वत लेने के बाद मोनू ने फाइल पास में खडे़ अन्य एजेंट प्रदीप कुमार को दे दी। विजिलेंस टीम ने प्रदीप कुमार निवासी विकास लोक सहस्त्रधारा रोड और मोनू मलिक उर्फ संदीप कुमार निवासी मोहब्बेवाला को दबोच लिया। तीनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। आरोपियों को शुक्रवार को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया। आईजी ने ट्रैप टीम को पुरस्कृत करने की घोषणा की है।

यह भी बताया गया कि आरटीओ कार्यालय में विजिलेंस का छापा पड़ने की सूचना ऑफिस के कर्मचारियों ने अपने जिलाध्यक्ष यशवीर बिष्ट को दी तो वह भी ऑफिस पहुंच गए। वहां मोनू नाम का दलाल यशवीर बिष्ट की गैरमौजूदगी में उनकी सीट के पास खड़ा होकर रिश्वत ले रहा था। जैसे ही सूचना पर यशवीर बिष्ट वहां पहुंचे विजिलेंस टीम ने उनको भी गिरफ्तार कर दिया।

यह भी पढ़ें : लोनिवि का अधिकारी विजिलेंस के हाथों रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार

सतर्कता अधिष्ठान द्वारा पकड़ा गया लोनिवि का प्रधान सहायक।

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 24 अक्तूबर 2019। विजिलेंस यानी सतर्कता प्रतिष्ठान ने हल्द्वानी में नैनीताल जनपद के लोक निर्माण विभाग के प्रधान सहायक को भुगतान कराने के एवज में ठेकेदार से पांच हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। उसे पकड़ने वाली विजिलेंस की टीम को पुरस्कार की घोषणा भी की गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार लोनिवि द्वारा वर्ष 2015 में जनपद के लालकुआं में तहसील बनाने का ठेका एक ठेकेदार को दिया गया था। विभाग में बजट न होने के कारण यह कार्य बीच में रुका रहा, और इधर इसी वर्ष पूरा हुआ। इस पर ठेकेदार द्वारा विभाग से समय बढ़ाने की मांग की गई तो लोनिवि के अधीक्षण अभियंता द्वितीय वृत्त नैनीताल के प्रधान सहायक प्रदीप पांडे ने ठेकेदार से 10 हजार रुपए की रिश्वत मांगी। इस पर ठेकेदार ने उसे चार हजार रुपए की रिश्वत दी और इधर दो दिन पूर्व 22 अक्तूबर को पांडे ने ठेकेदार को अपेक्षित कार्य हो जाने की जानकारी देते हुए रिश्वत के शेष छह हजार रुपए की मांग की, और मिन्नतें करने पर पांच हजार रुपए लेकर कार्य करने को तैयार हुआ। ठेकेदार ने इसकी सूचना सतर्कता प्रतिष्ठान हल्द्वानी के एसपी अमित श्रीवास्तव से की, जिन्होंने जाल बिछाकर बृहस्पतिवार को पांडे को सरस मार्केट हल्द्वानी में ठेकेदार से रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। आगे उस पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा पंजीकृत करने की तैयारी की जा रही है। वहीं उसे पकड़ने वाली टीम को सतर्कता निदेशक की ओर से पुरस्कार देने की घोषणा भी की गई है।

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  • देहरादून में पीरू के सैलून में था डकैताें का ‘कंट्रोल रूम’, यहां तैयार होती थी धन्नासेठों की कुंडली  
  • पीरू ने ही लिखी थी ईश्वरन और आरटीओ कर्मी जैसे अमीरों के घर डकैती की पटकथा

नवीन समाचार, देहरादून, 5 अक्तूबर 2019। इन दिनों आरटीओ ऑफिस देहरादून खास चर्चा में है। हो भी क्यों नहीं। राजधानी में हुवे एक बड़े लूट कांड के आरोपियों को जब पकड़ा गया तो उन्होंने बताया कि इसके पहले देहरादून में ही आर टी ओ के एक कर्मचारी के यहां से उन्होंने 1 करोड़ 34 लाख रुपए लूट लिए थे। डकैती विजय पार्क एक्सटेंशन में हुई थी। उधर जिसके यहां डकैती हुई उसने इतनी बड़ी लूट की कोई भी शिकायत आज तक पुलिस से नहीं की। जब पुलिस ने आर टी ओ के उस कर्मचारी से बुला कर पूछताछ की तो उसने लूट की घटना को स्वीकार किया लेकिन कोई भी एफ आई आर लिखवाने से साफ इंकार कर रहा है। फिलहाल उनके आलोक से पूरा आर टी ओ ऑफिस जगमगा रहा है। यह है उत्तराखंड में सिर्फ एक विभाग में भ्रष्टाचार का जीता जागता नमूना। पूरे उत्तराखंड में लूट और भ्रष्ट्राचार का आलम क्या होगा इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

अब दूसरा पक्ष :

कई बार इतिहास अपने आपको दोहराता नजर आता है। फिल्म शोले में हरीराम नाई के किरदार को कौन भूल सकता है। वह जेल में होने वाली हर गतिविधि की मुखबिरी जेलर को करता था। दून में एक करोड़ 34 लाख की डकैती पड़ने के बाद उसकी रिपोर्ट दर्ज न कराने पर आरटीओ कर्मी अब आयकर विभाग के निशाने पर आ गया है, लेकिन शहर के लोगों की जुबान पर यह सवाल तैर रहा है कि आखिर डकैतों को कैसे पता चला कि एक आरटीओ कर्मी के घर इतनी बड़ी रकम मौजूद है और वह डकैती के बारे में किसी से जिक्र तक भी नहीं करेगा।
पुलिस भी इसी बात को लेकर हैरान थी कि डकैत किस ‘ज्योतिषी’ की सलाह पर इतना बड़ा हाथ मार ले गये और किसी को कानोंकान खबर तक न चल पाई। अब जाकर पुलिस ने डकैतों के जासूस ‘हरीराम’ नाई को खोज निकाला है। लोगों की हजामत बनाने वाला सैलून संचालक पीरू शहर के धन्नासेठों की लंबे समय से ‘हजामत’ बना रहा है और उसका हिस्सा अपने आप उसके पास पहुंच जाता था। वह उनकी ‘कुंडली’ डकैतों को सौंप देता था। जिसके आधार पर डकैत अपना शिकार चुनते थे।
एक तरह से पीरू का सैलून डकैतों का कंट्रोल रूम था, जहां पर शहर के अमीरों की कुंडली तैयार करने का काम होता था। छोटी-छोटी जानकारी पता करने के साथ उनकी कमजोरी पर खास फोकस किया जाता था, ताकि वारदात के समय शिकार विरोध करने की हिम्मत तक न जुटा सके। अभिमन्यु एकडेमी के मालिक आरपी ईश्वरन, आरटीओ कर्मचारी के घर डकैती, बिल्डर राकेश बत्ता और प्रमुख चिकित्सक के आवास पर डकैती के प्रयास की घटना का सूत्रधार यही सैलून संचालक मुजिब्बुर रहमान उर्फ पीरू उर्फ हरीराम नाई निकला। वह डकैतों के मुखबिर तंत्र के रूप में बड़ा किरदार निभाता था।
बरसों से राजेन्द्र नगर में सैलून की बदौलत धनाढ्य परिवारों में पीरू का खासा दखल था। ईश्वरन लूटपाट प्रकरण से पहले पीरू के इस खौफनाक चेहरे से कोई वाकिफ नहीं था। डकैती का शिकार हुए आरटीओ कर्मचारी की पत्नी करीब डेढ़ दशक से सैलून की सेवाएं ले रही थी। परिवार के शाही रहन सहन से लेकर काली कमाई तक पीरू ने पूरी जानकारी जुटाई थी। वहीं इनकम टैक्स की धरपकड़ में नाम आने के बाद आरपी ईश्वरन के परिवार का पूरा चिट्ठा पीरू ने परिचितों के माध्यम से तैयार किया था।
हालांकि ईश्वरन ने पीरू से मुलाकात से इनकार किया था। बिल्डर राकेश बत्ता पर भी उसके करीबियों की मदद से पूरा होमवर्क किया गया था। पीरू ने ही बत्ता पर विश्वास जमाने के लिए रायपुर के विधायक उमेश शर्मा काऊ के नाम का प्रयोग करने की सलाह दी थी। डकैतों ने दोनों घटनाओं में बाहर रहने वाले उनके बच्चों की जान का डर दिखाकर पीड़ित परिवाराें को घुटने टेकने को मजबूर किया था।
पीरू अपने नेटवर्क की बदौलत डकैती की रकम में बराबर का हिस्सेदार होता था। पुलिस हिरासत में हैदर ने खुलासा किया कि आरटीओ कर्मचारी के घर से मिले कैश में पीरू और उसके साथी फुरकान के हिस्से में भी 23-23 लाख रुपये आए थे। ईश्वरन लूटपाट प्रकरण में पांच-पांच लाख रुपये की हिस्सेदारी मिलने की खबर है। इसके चलते पीरू को सैलून से ज्यादा ‘हरीराम’ नाई का यह काम रास आ रहा था। ऐसे में पीरू के मुखबिर तंत्र में कुछ और लोगों के शामिल होने से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। एसएसपी अरुण मोहन जोशी का कहना है कि पुलिस तमाम पहलुओं पर काम कर रही है। पहले वांछित लोगाें की गिरफ्तारी और माल की रिकवरी पर फोकस है। अगले चरण में पर्दे के पीछे छिपे और चेहरों को भी बेनकाब किया जा सकता है। (साभार ई न्यूज़ 24X7)

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p style=”text-align: justify;”>-पिथौरागढ़ की खाद्य सुरक्षा अधिकारी को 5 वर्ष की जेल की सजा
नवीन समाचार, नैनीताल, 26 सितंबर 2019। जिला एवं सत्र न्यायाधीश-विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण राजीव कुमार खुल्बे की अदालत ने पिथौरागढ़ की तत्कालीन खाद्य सुरक्षा अभिहीत अधिकारी अर्चना सागर को अलग-अलग धाराओं में पांच व चार वर्ष की जेल की सजा तथा 15 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न भुगतने की दशा में उन्हें दो व तीन माह की अतिरिक्त सजा भी भुगतनी होगी। प्रदेश में भ्रष्टाचार के मामले में किसी महिला अधिकारी को सजा मिलने का यह अपनी तरह का पहला मामला बताया जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पिथौरागढ़ की तत्कालीन खाद्य सुरक्षा अभिहीत अधिकारी अर्चना सागर पर 11 मार्च 2013 को कैंट रोड कुमौड़ पिथौरागढ़ स्थित वर्षा स्वीट्स के स्वामी जगदीश प्रजापति पुत्र प्रेमचंद्र ने उनकी दुकान के फूड लाइसेंस का नवीनीकरण करने की एवज में रिश्वत मांगने का आरोप लगाते हुए विजीलेंस से शिकायत की थी। इस पर विजीलेंस की टीम ने 16 मई को उन्हें जाल बिछाकर 20 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से संयुक्त निदेशक डीएस जंगपांगी ने पैरवी करते हुए आठ गवाह पेश किये। फलस्वरूप शुक्रवार को विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण राजीव कुमार खुल्बे की अदालत ने अर्चना सागर को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13 (1) डी सपठित 13 (2) के तहत 5 वर्ष की जेल व 10 हजार रुपए के जुर्माने तथा जुर्माना न भुगतने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा तथा धारा 7 के तहत 4 वर्ष की जेल व पांच हजार रुपए जुर्माना एवं जुर्माना न भुगतने की स्थिति में दो माह की अतिरिक्त जेल की सजा सुनाई है। दोनों सजा साथ-साथ चलेंगी।

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p style=”text-align: justify;”>नवीन समाचार, नैनीताल, 10 सितंबर 2019। प्रदेश में भ्रष्टाचार मुक्त ‘जीरो टॉलरेंस’ के नारे का राजस्व विभाग में अजब ही तरीके से मखौल उड़ता दिख रहा है। एक मामला ऐसा प्रकाश में आया है जहां विभागीय अधिकारी चालान के जुर्मानों व विभागीय हर्जानों की धनराशि राजकीय कोष में जमा कराने की जगह ‘श्री 1008 सोमवारी बाबा ट्रस्ट पदमपुरी’ में जमा करा रहे हैं, वहीं एक मंडलीय आधिकारी की धर्मपत्नी के ब्यूटी पार्लर के 25 हजार रुपए के बिल मातहतों पर थोपने की बात इन दिनों खासी चर्चा में है। इन अधिकारी पर पूर्व में उनके मातहत उत्पीड़न का आरोप लगा चुके हैं।
ताजा मामला गत सोमवार का है। ग्रामीण गांव के स्कूल में शिक्षकों की मांग पर ओखलकांडा के खनस्यूं गये हुए थे। लौटते हुए ग्रामीण वाहनों की कमी से एक वाहन में ही लदकर, कुछ वाहन के पीछे लटककर भी आ रहे थे, तभी तहसीलदार ने वाहन को रोककर गाड़ी व चालक के कागजात ले लिये। इन्हें छुड़ाने के लिए जब वे तहसील पहुंचे तो उन्हें आरटीओ का चालान करवाकर आरटीओ हल्द्वानी से कागजात वापस प्राप्त करने और दूसरे तहसील में ही 5 हजार रुपए का जुर्माना भुगतने के दो विकल्प दिये गये। ग्रामीणों ने किसी तरह मान-मनुहार कर तहसील में ही तीन हजार रुपए का जुर्माना भुगतने का विकल्प स्वीकार लिया। लेकिन जुर्माना किसी राजकीय कोष में जमा कराने की जगह ‘श्री 1008 सोमवारी बाबा ट्रस्ट पदमपुरी’ की तीन हजार रुपए की रसीद थमा दी गयी। इस मामले में संबंधित अधिकारी अपनी गलती मान रही हैं। मामले में इससे भी बड़ा मामला यह है कि ‘श्री 1008 सोमवारी बाबा ट्रस्ट पदमपुरी’ की रसीद बुक तहसील मुख्यालय में पड़ी हुई है, और यहां तक बताया जा रहा है कि तहसील में बर्षों से बंदूकों के लाइसेंसों के रिन्यूअल का ‘सुविधा शुल्क’ व विभिन्न हर्जाने भी राजकीय कोष में जमा होने के बजाय ‘श्री 1008 सोमवारी बाबा ट्रस्ट पदमपुरी’ को दिये जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि धारी के एसडीएम ‘श्री 1008 सोमवारी बाबा ट्रस्ट पदमपुरी’ के सचिव एवं डीएम अध्यक्ष हैं। आगे यह बड़ी जांच का विषय है कि यह धनराशि ‘श्री 1008 सोमवारी बाबा ट्रस्ट पदमपुरी’ के खाते में भी जमा हो रही है अथवा कोई बाहर-बाहर ही तो इसे नहीं खा जा रहा है।
यहां हम स्पष्ट कर दें कि हमारा उद्देश्य किसी अधिकारी को टार्गेट करना नहीं है, इसी लिए हम संबंधित अधिकारी का नाम जाहिर नहीं कर रहे हैं। हमें यह भी पता चला है कि केवल ये अधिकारी ही नहीं, बल्कि इनसे पूर्व के अब तक के अधिकांश अधिकारी भी यही करते रहे हैं। इसलिए हमारा मानना है कि जो भी व्यवस्थागत तौर पर गलत चल रहा है, वह तुरंत रुके। अन्यथा हमें अधिकारियों का नाम सार्वजनिक करने से भी कोई गुरेज नहीं होगा।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 29 अगस्त 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की एकलपीठ ने प्रदेश के बहुचर्चित, भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे आईएफएस अधिकारी, नंदा देवी नेशनल पार्क के डिप्टी फॉरेस्ट कंजरवेटर किशन चंद की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। अलबत्ता उन्हें विवेचना में सहयोग करने के आदेश दिए है। मामले के अनुसार आईएफएस किशन चन्द ने हाई कोर्ट में अपनी गिरफ्तारी पर रोक लगाने के लिए याचिका दायर की है। उनका कहना है कि विजिलेंस के द्वारा बिना किसी कारण व नोटिस के उनके खिलाफ आय से अधिक सम्पति रखने व भ्रष्टाचार के मामले में एंटी करप्शन एक्ट 1988 की धारा 13(1)(ई) के तहत दर्ज किये गये मुकदमे को निरस्त किया जाय।

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नवीन समाचार, उत्तरकाशी, 21 अगस्त 2019। जनपद के चिन्यालीसौड़ तहसील के तहसीलदार चंदन सिंह राणा को बुधवार को विजिलेंस की टीम ने उनके कार्यालय में छापा मारकर 10000 रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। बताया गया है कि विजिलेंस को राणा के खिलाफ एक ग्रामीण द्वारा जमीन के दाखिल खारिज के लिए रिश्वत मांगे जाने की शिकायत मिली थी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार चिन्यालीसौड़ ब्लाक के कैंथोगी गांव निवासी नारायण सिंह पंवार ने कुछ माह पूर्व चिन्यालीसौड़ नगर पालिका क्षेत्र में जमीन खरीदी थी। जमीन का दाखिल खारिज कराने के लिए वह लंबे समय से तहसील के चक्कर काट रहे थे। तहसीलदार ने दाखिल खारिज के एवज में 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगी। काफी मिन्नत करने के बाद भी तहसीलदार 10 हजार रुपये रिश्वत मिलने तक काम करने को राजी नहीं हुआ। इस पर विजिलेंस की टीम ने विजिलेंस ने पूरा जाल बिछाकर उन्हें पीड़ित व्यक्ति से 10000 रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। प्रत्यक्षदशियों के अनुसार छापामारी की भनक लगते ही तहसीलदार ने सारे रुपए मुंह में डालकर निगलने का प्रयास किया, लेकिन विजिलेंस की टीम में शामिल अधिकारियों ने उसे दबोच कर मुंह में से रुपये बाहर निकाल दिए। विजिलेंस की टीम तहसीलदार को गिरफ्तार कर देहरादून ले गई। इस सूचना से प्रदेश के राजस्व विभाग के साथ ही प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया। विजिलेंस के द्वारा अब उन्हें न्यायालय में पेश करने के लिए आगे की कार्रवाई की जा रही है।

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p style=”text-align: justify;”>नवीन समाचार, नैनीताल, 19 अगस्त 2019। विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण एवं जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार खुल्बे की अदालत ने जसपुर नगर पालिका के पूर्व अधिशासी अधिकारी को 10 हजार रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में दोषी पाते हुए चार वर्ष की जेल व 10 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न भुगतने पर दो माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
मामले के अनुसार जसपुर नगर पालिका के तत्कालीन अधिशासी अधिकारी अजहर अली के खिलाफ सतर्कता अधिष्ठान हल्द्वानी में हाजी मोहम्मद सरफराज पुत्र हाजी मो. रफीक ने 5 दिसंबर 2012 को शिकायत दर्ज कराई कि अजहर अली उसके करीब 2 लाख रुपए के जेसीबी मशीन के कूड़ा उठान के बिल के भुगतान के ऐवज में 20 हजार रुपए की रिश्वत मांग रहा है। इस पर 7 दिसंबर को अजहर अली को रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 10 हजार रुपए लेते रंगे हाथों दबोचा। इधर न्यायालय ने आरोपित पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत 4 वर्ष के कठोर कारावास एवं 5 हजार रुपए जुर्माना तथा धारा 13-1 व 2 के तहत 4 वर्ष के कठोर कारावास व 5 हजार के जुर्माने एवं जुर्माना न चुकाने पर दो-दो माह के अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई।

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p style=”text-align: justify;”>-सतर्कता विभाग का घोषित करनी होगी भ्रष्ट व दागी अधिकारियों की सूची: हाईकोर्ट
नवीन समाचार, नैनीताल, 15 जून 2019। स्वराज व भ्रष्टाचार उन्मूलन विभाग अब गोपनीय सूचना के नाम पर भ्रष्ट अधिकारियों के नाम नही छुपा सकेंगे, बल्कि उन्हें इन्हें सार्वजनिक करना होगा। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने स्वराज व भ्रष्टाचार उन्मूलन विभाग की सूचना अधिकार अधिनियम की धारा 24 (4) के तहत ऐसी सूचनाएं सार्वजनिक न करने से संबंधित याचिका खारिज कर दी है।
उल्लेखनीय है कि सूचना अधिकार अधिनियम के तहत हल्द्वानी निवासी चन्द्रशेखर करगेती ने वर्ष 2017 में स्वराज व भ्रष्टाचार उन्मूलन विभाग से राज्य के भ्रष्ट अधिकारियों की सूचना मांगी थी। जिसमें उन्होंने बिंदुवार पूछा था कि राज्य के कितने अधिकारियों के खिलाफ जनता ने शिकायत की है। उन शिकायतों की जांच में कितनी शिकायते सही पाई गईं और कितने अफसरों के खिलाफ कार्यवाही की गई। लेकिन विभाग ने सूचना अधिकार अधिनियम की धारा 24 (4) की आड़ में ये सूचनाएं नहीं दीं, जिसमें गोपनीय सूचनाओं को सार्वजनिक न करने का उल्लेख है। स्वराज व भ्रष्टाचार उन्मूलन विभाग के प्रथम अपीलीय अधिकारी के इस फैसले को करगेती ने द्वितीय अपीलीय अधिकारी के समक्ष चुनौती दी। लेकिन अपीलीय अधिकारी ने भी यह सूचना नहीं दी। इसके खिलाफ करगेती ने सूचना आयोग में शिकायत की। सूचना आयोग ने मामले की सुनवाई में पाया कि सतर्कता विभाग धारा 24 (4) से संरक्षित है जिसके तहत जनहित व राष्ट्रहित की गोपनीय सूचनाएं सार्वजनिक नहीं की जा सकतीं। किंतु भ्रष्ट व शिकायती अधिकारियों की सूचना देने के लिए इस धारा का उपयोग नहीं किया जा सकता। इसलिए विभाग सूचना के अधिकार के के तहत मांगी गई सूचनाएं निर्धारित समय में उपलब्ध कराए। आयोग के इस फैसले के खिलाफ सतर्कता विभाग के लोक सूचना अधिकारी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसे न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की एकलपीठ ने खारिज कर दिया तथा सतर्कता विभाग को निर्देश दिए कि वह सूचना आयोग के फैसले का क्रियान्वयन छः हफ्ते के भीतर करना सुनिश्चित करे। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब सतर्कता विभाग को भ्रष्ट व दागी अधिकारियों की सूची सार्वजनिक करनी ही होगी।

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p style=”text-align: justify;”>p style=”text-align: justify;”>-बागेश्वर जिले के सीमांत क्षेत्र में जलागम प्रोजेक्ट के तहत न लगी सोलर लालटेन, न बने पशुनाद, यहां तक कि मजदूरों को मेहनताना भी नहीं मिला, बावजूद जांच में सब कुछ ‘ओके’
नवीन समाचार, नैनीताल, 31 मई 2019। एक ऐसा मामला प्रकाश में आया है, जिसमें शिकायतकर्ता की मानें तो कुमाऊं मंडल के तेजतर्रार आयुक्त राजीव रौतेला द्वारा एक घोटाले की जांच के लिए जिला स्तर पर गठित जांच समिति ने भी घोटाला कर डाला है। मामला जलागम विभाग के प्रोजेक्ट से संबंधित है, जिसके तहत बागेश्वर जिले के कपकोट विकासखंड के सीमांत ग्राम पंचायत दोबाड़ में वित्तीय वर्ष 2016-17 में ग्रामीणों को 81 सोलर लालटेन व एक पावर विडर यानी छोटा ट्रेक्टर मिलना था, तथा तीन पशुनाद यानी पशुओं के चारा खाने के हौंदे और पांच पशु आवास तथा एक टैंट हाउस बनना था। आरोप है कि इन सभी कार्यों के लिए धनराशि खर्च हो चुकी है, और कार्य पूरे दिखाये जा चुके हैं, लेकिन दो वर्ष के बाद भी न ही 21वीं सदी में भी बिजली की रोशनी से वंचित ग्रामीणों को सोलर लालटेन ही मिली हैं, न पावर विडर मिला है और न ही पशु नाद, पशु आवास और टैंट आवास ही बने हैं। बड़ा आरोप यह भी है कि मामले में मंडलायुक्त राजीव रौतेला को की गयी शिकायत पर उनके द्वारा डीएम बागेश्वर के स्तर से कराई गई जांच में सब कुछ ठीक दिखा दिया गया है।
इस मामले में शिकायतकर्ता दोबाड़ गांव के ही निवासी हुकुम सिंह बसेड़ा ने बताया कि योजना के तहत गांव के महेश चंद्र सिंह, बसंती देवी, तारा देवी के घर पशुनाद बनने थे, किंतु बने नहीं। इसकी शिकायत उन्होंने 18 जुलार्इ्र 2017 को जलागम के दून स्थित प्रोजेक्ट मैनेजर एवं बागेश्वर के डीएम से की। इस पर विभाग ने जांच कराई, जिसमें कार्य करने वाले गांव में कोई कार्य पूर्ण हुआ दिखा नहीं पाये। उन्होंने बताया कि संबंधित फर्म को पैंसा दे दिया गया है। लेकिन इसकी जांच रिपोर्ट शिकायतकर्ता को नहीं दी गयी। वहीं डीएम बागेश्वर द्वारा 24 जनवरी 2019 को सीडीओ को जांच करने के आदेश दिये गये, किंतु जांच नहीं हुई। इस पर शिकायतकर्ता ने 13 फरवरी 2019 को कुमाऊं आयुक्त श्री रौतेला से इसकी शिकायत की। आयुक्त ने एक अप्रैल को डीएम बागेश्वर को जांच के आदेश दिये। इस पर योजना के पात्रों के बजाय अन्य लोगों के पहले से बने पशुनाद, पशु आवास तथा डिब्बों में बंद पावर वीडर व सोलर लाइट आदि दिखा दिये गये। इसके अलावा बसेड़ा ने बताया कि चुकरामून नाम के स्थान पर एक धारा निर्माण का कार्य भी इस योजना के तहत होना था। यह 14वें वित्त आयोग से भी निर्मित बताया गया है और इस योजना के तहत भी। यहां तक कि इस निर्माण कार्य में मजदूरों को उनकी मजदूरी तक नहीं दी गयी, और उनके फर्जी हस्ताक्षर करा लिये गये थे, किंतु जांच टीम ने मजदूरों के बयान भी नहीं लिये। इस पर बसेड़ा ने एक बार पुनः मंडलायुक्त को बीती 29 मई को शिकायती पत्र सोंपकर पूरी योजना की निश्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

जांच प्रक्रिया पर हमेशा उठते हैं सवाल

किसी घोटाले की शिकायत चाहे प्रधानमंत्री-राष्ट्रपति के स्तर पर ही क्यों न कर दी जाए, आखिर जांच क्षेत्र के निचले स्तर के अधिकारियों के द्वारा ही की जाती है, और वे कहीं न कहीं घोटाले के लिए जिम्मेदार लोगों के संपर्क में होते हैं। ऐसे में रिपोर्टें अक्सर ठीक बना दी जाती हैं। उदाहरण के लिए यदि कोई किसी विद्यालय में मध्याह्न भोजन में बच्चों को नियमानुसार भोजन न मिलने की शिकायत चाहे जिस भी स्तर पर करता है, आखिर जांच उस विद्यालय से संबंधित शिक्षा विभाग के सबसे निचले श्रेणी के जिम्मेदारों की जानकारी में ही होती है, और वे स्वयं कहीं न कहीं इस घोटाले में शामिल होते हैं, और जांच को आसानी से प्रभावित कर लेते हैं।

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p style=”text-align: justify;”>p style=”text-align: justify;”>-हालांकि तीन वर्ष या कम की सजा होने के मद्देनजर दोनों आरोपितो को अंतरिम जमानत भी मिली
नवीन समाचार, नैनीताल, 15 अप्रैल 2019। विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण-जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र दत्त की अदालत ने सोमवार को छह वर्ष पुराने भ्रष्टाचार के एक मामले में शिक्षा विभाग के दो कर्मियों को तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास एवं 1-1 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। हालांकि सजा की अवधि तीन वर्ष के अधीन होने के दृष्टिगत आरोपितों के प्रार्थना पत्र पर नियमानुसार दोनों को अंतरिम जमानत भी मिल गयी, यानी दोनों जेल जाने से बच गये।
विदित हो कि 20 सितंबर 2013 को हल्द्वानी की विजीलेंस की टीम ने ब्लॉक संसाधन केंद्र धौलाखेड़ा के तत्कालीन समन्वयक भगवान सिंह बोरा और खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय के तत्कालीन कनिष्ठ सहायक नीरज कुमार आर्य को 25-25 हजार यानी कुल 50 हजार रुपये के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। दोनों को सोमवार को अदालत ने तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास एवं 1-1 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। इसके पश्चात आरोपितों ने सजा की मात्रा तीन वर्ष या कम होने के प्राविधानों के तहत उच्च न्यायालय से जमानत प्राप्त करने तक समय देने का अनुरोध करते हुए जमानत का प्रार्थना पत्र दिया, जिसे नियमानुसार स्वीकार कर लिया गया। फलस्वरूप आरोपित जेल जाने से बच गये। उल्लेखनीय है कि आरोपित सजा की घोषणा से पूर्व भी जमानत पर जेल से बाहर ही थे।

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p style=”text-align: justify;”>p style=”text-align: justify;”>नवीन जोशी @ नवीन समाचार नैनीताल, 6 अप्रैल 2019। लोक सभा चुनाव में जनता के मन में देश के मुद्दों के साथ जो मुद्दा सबसे अधिक मतदाताओं के मन में दिखाई दे रहा है, वह है भ्रष्टाचार व घोटाले का मुद्दा। देवभूमि के नाम से विख्यात होने और केवल 18 वर्ष की छोटी सी उम्र के बावजूद राज्य ने जितने बड़े भ्रष्टाचार के विषय सुने व देखे हैं, उनकी मिसाल पुराने व बड़े प्रदेशों में भी नहीं सुनाई देते। राज्य में करीब 200 करोड़ रुपये का गलत तरीके से मुआवजा बांटकर राज्य के कोष को नुकसान पहुंचाने वाले एनएच-74 का घोटाला और करीब 500 करोड़ रुपये का समाज कल्याण विभाग रुपये का छात्रवृत्ति घोटाला खासकर चर्चा में हैं। इसके अलावा भी कई घोटाले लगातार प्रकाश में आते जा रहे हैं।
इनके अलावा भी उत्तराखंड उच्च न्यायालय में एक 10 हजार करोड़ रुपये के घोटाले का मामला जनहित याचिका के रूप में चल रहा है, जिसमें राज्य में उद्योगों की स्थापना के लिए ट्रेड टैक्स अफसरों पर उद्योगपतियों से एक हजार करोड़ रुपये लेने पर राजकीय कोष में जमा नहीं करने के आरोप लगाये गये हैं। इस मामले में कुल 10 हजार करोड़ रुपये की टैक्स चोरी के आरोप लगाये गये हैं। राज्य के 37 अधिकारियों पर इस मामले में तलवार लटकी हुई है। वहीं यहां नैनीताल में स्वयं विधायक ने पिछली सरकार के कार्यकाल में एडीबी के माध्यम से नगर की पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए बनी योजना में 88 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप लगाये गये हैं। जबकि उनके पिता व परिवहन मंत्री यशपाल आर्य ने परिवहन निगम में पूर्ववर्ती हरीश रावत की सरकार के समय पुरानी अप्रचलित बीएस-3 मॉडल की रोडवेज की 429 बसें खरीदने में 100 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप लगाये हैं। इसके अलावा नैनीताल में दिसंबर 2014 में संयुक्त मजिस्ट्रेट के स्तर पर दिसंबर 2014 में हुई जांच में एनआरएचएम यानी राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन एवं राष्ट्रीय शिशु स्वास्थ्य मिशन कार्यक्रम में 4.67 करोड़ के दुर्विनियोग एवं एक करोड़ रुपये की शासकीय क्षति पहुंचाने के आरोप भी लगे थे। इसी तरह आईडब्ल्यूएमपी यानी समेकित जलागम प्रबंधन कार्यक्रम में सरकारी कर्मचारियों, मानसिक दिव्यांगों, संविदा कर्मचारियों और छात्रों के नाम पर करीब 70 लाख रुपये की बंदरबांट करने का मामला भी न्यायालय में चल रहा है। 2014-15 के इस मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री के ओएसडी सहित चार अधिकारियों पर मामला चलाने के अदालत आदेश दे चुकी है। इसी तरह जनपद के भीमताल स्थित औद्योगिक आस्थान में बीते 17 वर्षों में तीन दर्जन से अधिक कंपनियों के अनुदान खाकर भागने और एक भी कंपनी के खिलाफ कार्रवाई न होने एवं यहीं एक कंपनी एक्वामाल का कई बार नाम बदलकर लाभ लेने एवं इधर पिछली सरकार के दौर में ही 5 मई 2017 को एक्वामाल की दो कंपनियों को शराब बॉटलिंग प्लांट की कंपनी शीतला उद्योग इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड की सरकारी जमीन को नियमविरुद्ध बेचने सहित अरबों रुपये का घोटाला करने का मामला भी न्यायालय में विचाराधीन है, एवं समाचार पत्रों की सुर्खियां बन चुका है। इस बारे में स्थानीय लोगों, खासकर भाजपा नेताओं का कहना है कि भाजपा सरकार के दो वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी पिछली सरकार के नित नये घोटाले प्रकाश में आ रहे हैं, जबकि कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि मामले हवा-हवाई हैं। किसी मामले में जांच मुकाम तक और अदालत से दोषियों को सजा मिलने तक नहीं पहुंची है। अलबत्ता जनता इन मुद्दों को जेहन में रखकर भी वोट करने की बात कह रही है।

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p style=”text-align: justify;”>p style=”text-align: justify;”>नवीन समाचार, नैनीताल, 2 अप्रैल 2019। एसपी विजिलेंस अमित श्रीवास्तव की टीम ने एक दारोगा शैलेन्द्र चौहान को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथों गिरफ्तार किया है। उसके विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। आरोपित दारोगा को बुधवार को न्यायालय में पेश किया जाएगा। सतर्कता निदेशक ने टीम के उत्साहवर्धन हेतु नगद पुरस्कार की घोषणा की है।
सतर्कता निरीक्षक राम सिंह मेहता के नेतृत्व में गठित ट्रैप टीम ने बुधवार को गुलजारपुर वन चौकी, तराई पश्चिमी वन प्रभाग, रामनगर मंे तैनात वन दरोगा शैलेन्द्र चौहान पुत्र भारत सिंह, निवासी पट्टी चौहान, जसपुर, जनपद ऊधमसिह नगर, को रंगे हाथों एक लाख रुपये की रिश्वत के साथ रामनगर भवानी गंज चौराहे से गिरफ्तार किया। उसके विरुद्ध रामनगर के रहने वाले फईम अहमद ने पुलिस अधीक्षक सतर्कता सेक्टर नैनीताल के हल्द्वानी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके व उसके साथी नियाज अली के डम्पर बीती सात मार्च को अंदर जाने का टोकन होने के बावजूद बंजारी गेट रामनगर के अंदर वन विभाग की टीम ने गलत तरीके से सीज किये थे। बावजूद जब वह और नियाज वाहन छुड़वाने के लिए रेंजर से मिले तो उन्होंने वन दारोगा शैलेन्द्र चौहान से मिलने को कहा। दारोगा शैलेन्द्र चौहान ने उच्चाधिकारियों का हवाला देकर डंपर छोड़ने के लिए दो लाख रुपये की मांग की थी। इस शिकायत के जांच करने पर तथ्य सही पाए जाने पर विजीलेंस ने मंगलवार को कार्रवाई की।

खनन कंपनी के एमडी ने की थी एसपी को रिश्वत देने की जुर्रत, अदालत का यह रहा रुख

नवीन समाचार, नैनीताल, 1 अप्रैल 2019। विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र दत्त की अदालत ने बागेश्वर जनपद के पुलिस अधीक्षक को 20 हजार रुपये की रिश्वत देने के आरोपित एक खनन कंपनी के एमडी की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। सोमवार को आरोपित एमडी भगवान सिंह पुत्र आदित्य नारायण, मूल निवासी ग्राम बरवाड़ा जिला कटनी मध्य प्रदेश की जमानत अर्जी का जिला शासकीय अधिवक्ता-फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने विरोध करते हुए अदालत को बताया कि 9 जनवरी 2019 को आरोपित ने एसपी बागेश्वर के कार्यालय में जाकर खनन कंपनी कटियार माइन्स के खड़िया से ओवरलोडेड भरे ट्रकों को छोड़ने में सहयोग चाहते हुए 20 हजार रुपये की रिश्वत मना करने के बाद भी दी थी। इस पर एसपी ने बागेश्वर पुलिस कोतवाली से पुलिस बल बुलाकर आरोपित व उसके साथी, कंपनी के लीगल एडवाइजर इंद्र सिंह को मौके से ही तत्काल गिरफ्तार करवा दिया था। दोनों के पास से कंपनी की डायरी, रुपये एवं मोबाइल फोन आदि भी बरामद किये गये थे। इस प्रकार आरोपितों पर लगे सभी आरोप स्पष्ट हैं और उन्हें जमानत देने की कोई तुक नहीं है। इस पर न्यायालय ने दोनों की जमानत अर्जी खारिज कर दी।

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p style=”text-align: justify;”>p style=”text-align: justify;”>नवीन समाचार, नैनीताल, 15 फरवरी 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की एकलपीठ ने पिथौरागढ़ के जिला समाज कल्याण अधिकारी कांति राम जोशी की गिरफ्तारी पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है। इसके बाद जोशी पर कभी भी गिरफ्तारी की तलवार लटक गयी है।
उल्लेखनीय है कि जोशी पर लोक सेवक रहते सरकारी धन को खुर्दबुर्द करने के आरोप में भारतीय दंड संहिता की धारा 409 के तहत मुकदमा दर्ज है। आरोप है कि वर्ष 2001 मं जोशी ने अपर जिला समाज कल्याण अधिकारी रहते अपने स्तर से 28 दुकानों को बिना तय प्रक्रिया को अपनाये आवंटित किया और 15 दुकानों के आवंटन को मनमर्जी से निरस्त करके इनमें से 14 दुकानों को अपात्रों को आवंटित कर दिया था। इसकी जांच तत्कालीन डीएम ओमप्रकाश व मौजूदा डीएम एसए मुरुगेशन के साथ ही विभागीय जांच में भी समाज कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव रणवीर सिंह ने भी जोशी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की संस्तुति की थी। इधर उनके विरुद्ध सतर्कता विभाग भी जांच कर रहा है। पूर्व में 25 जून 2018 में आईटी सेल के नोडल अधिकारी अनुराग शंखधर ने भी समाज कल्याण विभाग में फर्नीचर घोटाले को लेकर जोशी के खिलाफ थाना रायपुर में प्राथमिकी दर्ज करने के लिए तहरीर दी थी।

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आईआरएस अधिकारी नारकोटिक्स विभाग में एडिशनल कमिश्नर के पद पर तैनात सहीराम मीणा एसीबी की गिरफ्त में

नवीन समाचार, नैनीताल, 29 जनवरी 2019। जी हां, उत्तराखंड की आईएएस अधिकारी व टिहरी की डीएम सोनिका के पिता का नाम तो सहीराम मीणा है, किंतु वे ‘आंख के अंधे-नाम नैन सुख’ की तर्ज पर ‘गलत राम’ निकले हैं, और वह भी 400 करोड़ रुपये के। राजस्थान के आईआरएस अधिकारी सहीराम के ठिकानों से अब तक की जांच में 400 करोड़ रुपये की संपत्ति का पता चला है। खास बात यह भी है कि आईआरएस अधिकारी सही राम को इसी साल जुलाई में सेवानिवृत्त होना था। लेकिन उनका इरादा राजस्थान के राजेश पायलट की सीट रही दौसा से लोकसभा चुनाव लड़ने का भी था। उन्होंने हाल ही में हुए राजस्थान विधानसभा के चुनाव में गंगानगर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी कर ली थी लेकिन वीआरएस का आवेदन मंजूर नहीं हो पाने के कारण उनका इरादा पूरा नहीं हो सका।

टिहरी की डीएम सोनिका

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p style=”text-align: justify;”>p style=”text-align: justify;”>गौरतलब है कि गणतंत्र दिवस समारोह में 1989 बैच के इस आईआरएस अधिकारी नारकोटिक्स विभाग में एडिशनल कमिश्नर के पद पर तैनात सहीराम मीणा जनता को सदाचार का पाठ पढ़ा रहे थे, किंतु इसके कुछ देर बाद ही उन्हें एसीबी यानी राज्य भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के द्वारा उनके कोटा स्थित आवास से चित्तौडगढ़ निवासी एक व्यक्ति को अफीम का पट्टा जारी करने के एवज में एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए उनके लिए दलाली करने वाला कमलेश नाम के व्यक्ति के साथ रंगे हाथों पकड़ा गया है। साथ ही उनकी करीब 400 करोड़ रुपये की सम्पति भी अब तक की जांच में सामने आ चुकी है। एसीबी के अधिकारियों के अनुसार सहीराम मीणा ने इन संपत्तियों में अपने व अपने परिवार के सदस्यों के नाम से निवेश कर रखा था। राजस्थान के इतिहास में इसे एसीबी की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। एसीबी के अधिकारियों ने सोमवार को सहीराम के 15 बैंक खातों और लॉकरों को खोला तो चौंक गए। लॉकरों में नकदी और ज्वलैरी के साथ ही हीरे भी मिले। मीणा के कोटा और जयपुर स्थित आवास से करीब सात करोड़ रुपये की नकदी बरामद हुई। अब तक की जांच में पता चला है कि सहीराम मीणा तथा उसकी पत्नी और बेटा 106 आवासीय प्लॉट,एक मैरिज गार्डन, 25 दुकानों, दो औद्योगिक प्लॉट, एक पेट्रोल पंप, मुम्बई और दिल्ली में एक-एक फ्लैट, सात बीघा कृषि भूमि, एक फार्म हाउस, चार ट्रक, एक टायर फर्म और एक शिक्षण संस्थान के मालिक हैं। उन्होंने सवाई माधोपुर जिले में स्थित अपने गांव जीबली के कुछ गरीब लोगों के नाम से भी रणथम्भौर सेंचूरी के आसपास बेनामी भूखंड खरीद रखे हैं। पूछताछ में यह भी पता चला कि सहीराम मीणा के दो रिश्तेदार भाजपा के बड़े नेता हैं जबकि एक रिश्तेदार कांग्रेस का प्रभावशाली नेता है। उन्होंने विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के कई उम्मीदवारों को फंडिंग भी की थी ।
पूछताछ के दौरान सहीराम ने सीने में दर्द और बेचौनी की शिकायत की। इस पर उसे कोटा के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच के बाद उसे और उसके दलाल कमलेश को एसीबी की विशेष अदालत के मजिस्ट्रेट के घर पेश किया गया जहां से उसे रिमांड पर भेज दिया गया।

यह भी पढ़ें : अधिकारी को एक हाथ मिला मुख्यमंत्री अवार्ड, और दूसरे हाथ भ्रष्टाचार पर पद से हटने का आदेश…

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p style=”text-align: justify;”>p style=”text-align: justify;”>नवीन समाचार, देहरादून, 27 जनवरी 2019। राजकाज में ऐसा भी होता है। उत्तराखंड में शिक्षा के क्षेत्र में मुख्यमंत्री अवॉर्ड हासिल करने के चंद घंटों के भीतर एक अधिकारी को भ्रष्टाचार के आरोप में हटा दिया गया है। अल्मोड़ा के मुख्य शिक्षा अधिकारी जगमोहन सोनी को गणतंत्र दिवस के मौके पर राज्य की त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार ने पुरस्कृत किया था।
लेकिन अल्मोड़ा में भव्य गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान सोनी जब केंद्रीय मंत्री अजय टमटा और उत्तराखंड सरकार के मंत्री हरक सिंह रावत से अवॉर्ड हासिल कर रहे थे, उसी दौरान देहरादून में उनको हटाने का आदेश टाइप हो रहा था। छुट्टी के बावजूद राज्य के शिक्षा सचिव भूपिंदर कौर औलख को रिपब्लिक डे के दिन दफ्तर पहुंचकर सोनी को हटाने के आदेश पर दस्तखत करने के लिए कहा गया।
मुख्य शिक्षा अधिकारी सोनी पर शिक्षकों की नियुक्ति के दौरान लाखों की रिश्वत लेने का आरोप है। आरोपी अधिकारी को अब देहरादून में शिक्षा निदेशालय से अटैच कर दिया गया है। हालांकि सरकार की तरफ से जारी आदेश में सोनी को हटाने की वजह नहीं बताई गई है लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि उन पर सरकार द्वारा सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति में घूस लेने का आरोप है। सोनी ने अपने खिलाफ कार्रवाई और हटाए जाने का आदेश मिलने की पुष्टि की है। इसके साथ ही उन्होंने खुद पर लगे आरोपों को झूठा बताया है। सोनी ने कहा, ‘मुझे खुद पर लगाए गए आरोपों के बारे में जानकारी है लेकिन वे आधारहीन हैं। मुझे राज्य में शिक्षा के लिए योगदान देने पर अवॉर्ड दिया गया और उसी दिन मुझे पद से हटा दिया गया। यह अन्याय है।’ अधिकारियों के मुताबिक सोनी को हटाने का फैसला शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे के आदेश के बाद लिया गया, जो शुक्रवार को अल्मोड़ा में थे। एक अधिकारी ने बताया, ‘स्थानीय लोगों ने शिकायत की थी कि सोनी समेत कुछ अधिकारी शिक्षकों को नियुक्त करने के लिए लाखों रुपये तक की रिश्वत मांग रहे थे। मामले की पूरी जांच की जाएगी।’

यह भी पढ़ें : पिछली कांग्रेस सरकार का एक और घोटाला उजागर, सीएम के ओएसडी सहित चार अफसरों पर चलेगा केस

नवीन समाचार, देहरादून, 10 जनवरी 2019। पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के भ्रष्टाचार के मामलों के उजागर होने का सिलसिला थम नहीं रहा। अब चार साल पुराने मामले में मुख्यमंत्री के ओएसडी जेसी खुल्वे समेत चार तत्कालीन अफसरों पर मुकदमा चलेगा। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) एमएम पांडेय की अदालत ने यह आदेश दिया है। चारों अफसरों पर केंद्र की समेकित जलागम प्रबंधन कार्यक्रम (आईडब्ल्यूएमपी) और राष्ट्रीय जलागम विकास योजना में 2014-15 में 70 लाख रुपये का फर्जीवाड़ा करने का आरोप है। तत्कालीन सहायक कृषि अधिकारी (वर्ग-दो) रमेश चंद चौहान की शिकायत पर पूर्व में दो प्रशासनिक जांचें हुईं। सूत्रोंं के अनुसार इस जांच में 70 लाख रुपये का भ्रष्टाचार कर बंदरबांट करने, सरकारी कर्मचारी, मानसिक दिव्यांग, संविदा कर्मचारियों और छात्रों के नाम योजना में हुए कार्यों में दिखाकर उनके जरिये फंड का भुगतान कर वित्तीय गड़बड़ी की बात सामने आई। तत्कालीन एसएसपी और पटेलनगर इंस्पेक्टर से शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई न होने पर उन्होंने आरटीआई से जांच रिपोर्ट की सत्यापित प्रतियां लेकर सीजेएम कोर्ट में वाद दायर किया गया। इस पर सीजेएम एमएम पांडेय की अदालत ने आदेश दिया कि यह वाद अदालत में चलेगा। सक्षम अधिकारी से भी इसकी जांच कराई जाएगी। इस समय मुख्यमंत्री के ओएसडी  खुल्बे उस वक्त कृषि एवं भूमि संरक्षण अधिकारी चकराता के पद पर तैनात थे। मामले में जेसी खुल्बे, तत्कालीन कृषि एवं भूमि संरक्षण अधिकारी चकराता (वर्तमान ओएसडी मुख्यमंत्री), ओमवीर सिंह, तत्कालीन सहायक कृषि अधिकारी (वर्ग तीन), गौरी शंकर, तत्कालीन कृषि निदेशक उत्तराखंड कृषि निदेशालय (नंदा की चौकी व विजय देवराड़ी, तत्कालीन मुख्य कृषि अधिकारी देहरादून आरोपित हैं।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड के नगर निकायों में करोड़ों के घोटाले उजागर

नवीन समाचार, देहरादून, 8 जनवरी 2019। नगर निकायों में गली-मुहल्लों और वार्डों में भले ही गंदगी से आम आदमी का जीना मुहाल हो, या लोग टूटी सड़कों-नालियों से परेशानहाल हों, लेकिन शहरी निकाय बुनियादी जरूरतों से मुंह चुराकर जनता की गाढ़ी कमाई का जमकर दुरुपयोग कर रहे हैं। प्रोक्योरमेंट नियमों को ताक पर रखकर निर्माण कार्य कराए जाने से लाखों की धनराशि अनियमित तरीके से खर्च की ही गई है, साथ में तकनीकी मंजूरी के बगैर कराए गए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता भी सवालों के दायरे में आ गई है। अल्मोड़ा में तो ठेकेदार को बगैर कार्य के ही 41.45 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। रुड़की नगर निगम में तो वर्ष 2016-17 में सभी निर्माण कार्य बगैर तकनीकी स्वीकृति के कराए गए हैं। रुड़की नगर निगम समेत अल्मोड़ा, पौड़ी, नई टिहरी व मसूरी नगरपालिका परिषद समेत कुल पांच निकायों के ऑडिट में निर्माण कार्यों, करों की वसूली, जुर्माना वसूली में करोड़ों रुपये की अनियमिताएं सामने आई हैं।

मसूरी नगरपालिका को छोड़कर उक्त सभी निकायों के वर्ष 2016-17 के कार्यों का ऑडिट किया गया है। मसूरी नगरपालिका में वर्ष 2016-17 में बड़े पैमाने में अनियमितता सामने आने के बाद एक वर्ष पहले यानी 2015-16 का ऑडिट भी कराया गया है।

नगर निगम रुड़की

निगम में तमाम निर्माण कार्यों में उत्तराखंड अधिप्राप्ति नियमावी, 2008 को ताक पर रखकर बगैर तकनीकी स्वीकृति के 332.10 लाख की राशि का अनियमित भुगतान किया गया है। यही नहीं निर्माण कार्यों में देरी होने की स्थिति में ठेकेदारों से जुर्माना वसूली की हिम्मत नहीं दिखाई गई। नतीजतन 2.08 लाख की राशि की कटौती नहीं हो पाई।

नगरपालिका परिषद पौड़ी

बगैर अनुमति के 14.24 लाख रुपये वाहन खरीदने में खर्च कर डाले। पालिका कैशबुक व पत्रावली में बोर्ड फंड का ग्रीष्मोत्सव पौड़ी मेला संचालन में खर्च होना दर्शाया गया है। ऐसी 20 लाख रुपये की राशि का अब तक समायोजन नहीं हो सका है।

नगरपालिका परिषद मसूरी

पर्यटकों की पसंदीदा पहाड़ों की रानी मसूरी में टेंडर कराए बगैर कंपनी बाग कार पार्किंग व मसूरी झील ठेके को अनियमित रूप से दिया गया। विभिन्न संसाधनों से 149.30 लाख रुपये कम आय होने से पालिका को राजस्व का चूना लगा। वहीं अस्थायी व स्थायी वसूली, भवन व व्यावसायिक प्रतिष्ठान के सालाना कर मूल्यांकन में कटौती, कार पार्किंग का बकाया, रायल्टी कटौती न होने, ठेका अनुबंध स्टांप पेपर पर नहीं कराने समेत विभिन्न तरीके से करीब 194.41 लाख रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। इसमें 20.61 लाख रुपये कार पार्किंग की बकाया राशि की वसूली न होना भी शामिल है।

नगरपालिका परिषद नई टिहरी

अवर अभियंता ने नई टिहरी व बौराड़ी क्षेत्र में मस्टरोल के जरिये अकुशल श्रमिकों से नाली की सफाई का कार्य कराया। इन श्रमिकों को 832 दिनों के लिए प्रतिदिन 350 रुपये की दर से 2.91 लाख का भुगतान दर्शाया गया है, जबकि कार्यालय प्रमुख अभियंता व विभागाध्यक्ष लोक निर्माण विभाग के पत्र के मुताबिक अकुशल श्रमिक के लिए प्रतिदिन 275 रुपये की दर निर्धारित की गई। इससे अवर अभियंता को 62 हजार रुपये का अधिक भुगतान किया गया। बिजली उपकरणों व अन्य सामान खरीद में खामियां बरती गईं। इसमें मैसर्स विनायक ट्रेडर्स मेरठ व मैसर्स जीरो वेस्ट इनकॉरपोरेाश्न, ऋषिकेश को लाखों की राशि का त्रुटिपूर्ण भुगतान किया गया है।

नगरपालिका परिषद अल्मोड़ा

अवस्थापना विकास से संबंधित 493.08 लाख की निष्फल योजनाओं के लिए अनुदान से ठेकेदार को बगैर कार्य के लिए 41.45 लाख का अनियमित भुगतान किया गया। अनुदान की राशि का इस्तेमाल अन्य परियोजनाओं व कार्यों में किए जाने से 215.17 लाख की राशि के गबन का अंदेशा जताया गया है। एकीकृत आवास एवं मलिन बस्ती सुधार की 833.32 लाख की योजना में कार्यदायी संस्था से अवशेष धनराशि 186.96 लाख की वसूली नहीं की गई। ठेकेदारों के देयकों, लेबर सेस में कटौती नहीं कर पालिका के राजस्व को हानि हुई। (रविंद्र बड़थ्वाल साभार)

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-प्रतिभागियों को प्रशिक्षण अवधि, रविंद्र बड़थ्वाल में नहीं दी गयी टूल किट, शिकायत करने पर की गयी खानापूरी

प्रशिक्षण के तहत दी गयी 1500 रुपए की टूल किट।

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p style=”text-align: justify;”>p style=”text-align: justify;”>नैनीताल, 1 अक्टूबर 2018। नैनीताल नगर पालिका के सूडा यानी राज्य नगरीय विकास अधिकरण के द्वारा दीनदयाल अंत्योदय राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के अंतर्गत कराये गये उत्थान यानी ‘इम्प्लॉयमेंट थ्रू स्किल ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट’ के तहत ब्यूटी पार्लर प्रशिक्षण में प्रतिभागियों के द्वारा प्रशिक्षण संस्था के द्वारा सांठगांठ से घोटाला किये जाने की संभावना जताई गयी है। बताया गया है कि प्रशिक्षण अवधि में ही प्रतिभागियों को टूल किट दी जानी थी। किंतु नहीं दी गयी। प्रतिभागियों को खुद ही सामग्री जुटानी पड़ी। इसकी शिकायत गत 26 सितंबर को नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी से किये जाने के बाद सोमवार को प्रशिक्षण दे रही संस्था इंपीरियल इंस्टीट्यूट के द्वारा टूलकिट देने की खानापूरी की गयी है। प्रतिभागियों के अनुसार प्रत्येक प्रतिभागी को 1500 रुपए की टूलकिट दी जानी थी, किंतु ऐसा लगता है कि सबको मिलाकर 1500 रुपए की किट दे दी गयी है। किट में केवल एक-एक बैग, कंघा, जूड़े की पिन, छोटी पिन एवं दो अन्य सामग्री ही दी गयी है। साथ ही प्रशिक्षण के प्रमाण पत्र में डिप्लोमा एवं अधिकांश प्रतिभागियों का नाम भी गलत अंकित किया गया है। इस संबंध में पूूछे जाने पर नगर की प्रभारी ईओ लता आर्य ने मामला संज्ञान में न होने और अब संज्ञान में लेने की बात कही है।

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    • उत्तराखंड के मुख्य सचिव, आयकर निदेशक-लखनऊ व सीबीआई के निदेशक सहित 37 अधिकारियों का उच्च न्यायालय ने किया जवाब तलब
  • उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता को भी आरोप लगाने के कारण एक लाख रुपये न्यायालय में जमा करने को कहा

उत्तराखंड में सरकार को 10 हजार करोड़ रुपये का एक नया घोटाला प्रकाश में आ रहा है। इस मामले में रुड़की निवासी धर्मेन्द्र सिंह नाम के व्यक्ति ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि उत्तराखंड में उद्योगों की स्थापना के लिए ट्रेड टैक्स अफसरों ने उद्योगपतियों से एक हजार करोड़ रुपए टैक्स के तौर पर लिए हैं। परन्तु यह रकम सरकार के खाते में जमा नहीं की गई है। इससे अब तक राज्य सरकार को कुल मिलकर दस हजार करोड़ रुपये का घाटा हो गया है। इस प्रकार 10 हजार करोड़ रुपये की टैक्स चोरी से जुड़े इस मामले में उत्तराखंड उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति राजीव शर्मा एवं लोकपाल सिंह की संयुक्त खंडपीठ ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव, राजस्व सचिव , मुख्य राजस्व आयुक्त, आयकर निदेशक-लखनऊ व सीबीआई के निदेशक सहित 37 अधिकारियों का जवाब तलब कर दिया है। इन सभी अधिकारियों को जवाब पेश करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया गया है। जबकि याचिकाकर्ता को भी आरोप लगाने के कारण एक लाख रुपये न्यायालय में जमा करने को कहा है। 

उल्लेखनीय है कि इस मामले में पूर्व में ट्रेड टैक्स कमिश्नर ने पांच अधिकारियों-सहायक आयुक्त विनय कुमार, डिप्टी कमिश्नर पीपी शुक्ला, पीएस डुगरियाल, शिवेंद्र प्रताप सिंह, संयुक्त आयुक्त पीएस नगन्याल को नोटिस जारी किए थे, जबकि संयुक्त आयुक्त नवीन जोशी के खिलाफ सूचना आयोग ने राज्य सरकार को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। आरोप है कि सरकार ने इन अधिकारियों के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की। इधर सोमवार को सुनवाई पर एक लाख रुपया जमा करने के याचिकाकर्ता को निर्देश देने से परेशान याचिकाकर्ता ने एक प्रार्थनापत्र लगाकर अपनी गरीबी का हवाला दिया। इस दौरान वित्त सचिव अमित नेगी ने जवाब पेश कर सभी आरोप गलत बताये। सभी पक्षों की दलील सुनने पर न्यायालय ने मुख्य सचिव समेत 37 अफसरों का जवाब तलब कर दिया है।

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नैनीताल। नैनीताल विधायक संजीव आर्य ने सरोवरनगरी में पेयजल की किल्लत के लिए पिछली सरकार के दौर की 88 करोड़ रुपए की एडीबी के माध्यम से बनी योजना को जिम्मेदार बताया है। आरोप लगाया कि इसमें धन का दुरुपयोग व बंदरबांट हुई, लिहाजा इतनी बड़ी धनराशि खर्च होने के बावजूद नगर में पेयजल की किल्लत बनी हुई है। कहा कि इस विषय को सदन के पटल पर रखेंगे, तथा जांच की मांग भी करेंगे। साथ ही कहा कि आगे अमृत योजना के तहत मुख्यालय में पेयजल की किल्लत में सुधार करने का प्रयास भी किया जाएगा। उन्होंने इसके अलावा पहाड़ों से पलायन पर एक नया तर्क देते हुए कहा कि पलायन के लिए बेरोजगारी के साथ ही पानी की कमी भी बड़ा कारण है। पानी नहीं होगा तो लोग क्या करेंगे। पानी नहीं होने की वजह से भी लोग खेती छोड़ने और पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं। कहा कि पानी के साथ जवानी में कौशल विकास करना भी उनकी कार्य योजनाओं में शामिल है।

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भारतीय मजदूर संघ द्वारा पूर्व हरीश रावत की सरकार में हुए परिवहन निगम में हुए घोटालों का मामला कार्यक्रम में मंच से उठाने के बाद परिवहन मंत्री यशपाल आर्य ने गंभीरता से लेते हुए पूरे प्रकरण की जांच कराने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि मामले की बिना दुर्भावना के जांच कराई जाएगी। इस संबंध में परिवहन सचिव से जांच के लिये समिति का गठन करने को कहा गया है।आर्य ने बताया कि पिछले दिनों पूर्व भारतीय मजदूर संघ के कार्यक्रम में उनके समक्ष कई बिन्दुओं को संज्ञान में लाया गया जिसमें पिछली सरकार में रोडवेज के लिए 100 करोड़ रूपये की बसें खरीदने में हुए घपलें की बात कही गयी। इसके बाद उन्होंने विधानसभा में अपने कार्यालय में समीक्षा बैठक के दौरान इस मामले में निष्पक्ष जांच कराने के आदेश दिये है। कांग्रेस शासनकाल के आखिरी समय में कुछ महीनों के लिए परिवहन विभाग की जिम्मेदारी नवप्रभात को दी गयी थी। उसी समय में रोडवेज के लिए नयी बसों को लोन प्रक्रिया के तहत 100 करोड़ की लगभग 429 साधारण बसों को खरीदा गया है। इस खरीद में सवाल उठाया गया है कि उस वक्त बीएस-3 मॉडल के वाहनों को क्यों खरीदा गया था जबकि यह मॉडल न सिर्फ बाहर हो रहा था बल्कि बीएस-4 वाहनों के आने की पूरी संभावना हो गयी थी। इसके अलावा निगम में कलपुर्जे आदि की खरीद में भी अनिमित्ता की संभावना जताई गयी है।

पूर्व आलेख : नैनीताल एनआरएचएम में घोटाले की बू !

    • प्रधानमंत्री कार्यालय ने मुख्य सचिव को किया निर्देशित
  • नैनीताल डीएम के आदेश पर दिसंबर 2014 में संयुक्त मजिस्ट्रेट स्तर से की गयी प्रारंभिक जांच में 4.67 करोड़ रुपये के दुर्विनियोग एवं एक करोड़ रुपये की शासकीय क्षति पहुंचाने का है रिपोर्ट में उल्लेख

नवीन जोशी, नैनीताल। प्रधानमंत्री कार्यालय ने नैनीताल जनपद के राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्य मिशन एवं राष्ट्रीय शिशु स्वास्य कार्यक्रम के बाबत संयुक्त मजिस्ट्रेट स्तर पर हुई एक जांच में उजागर हुए तथ्यों के आधार पर मिली एक शिकायत पर संज्ञान लिया है, और राज्य के मुख्य सचिव से इस मामले में आवेदक की शिकायत पर कार्रवाई करने एवं कृत कार्रवाई से आवेदक को अवगत कराने एवं वेब पोर्टल पर भी जानकारी सार्वजनिक करने के आदेश दिये हैं। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार मिशन के तहत खातों में चार करोड़ 67 लाख 39 हजार 389 रुपये अधिक दिखाये गये हैं, तथा नौ लाख 53 हजार 563 रुपये से अधिक की शासकीय कोष को क्षति पहुंचाने की बातें कही गयी हैं। उल्लेखनीय है कि इस मामले में शिकायतकर्ता के वाहन भी चलते रहे हैं, तथा इसी सम्बन्ध में चेकों से छेड़छाड़ के आरोप में शिकायतकर्ता के घर की कुर्की हो चुकी है।

उल्लेखनीय है कि हालिया जनपद के निगलाट और मूलत: बागेश्वर जिले के ग्राम बघर निवासी कुंवर सिंह देव ने दिसंबर 2014 में डीएम नैनीताल के आदेश पर संयुक्त मजिस्ट्रेट एसडीएम आशीष कुमार चौहान द्वारा नैनीताल जनपद के राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्य मिशन एवं राष्ट्रीय शिशु स्वास्य कार्यक्रम की जांच रिपोर्ट में प्रकाश में आये तयों को प्रधानमंत्री कार्यालय को प्रेषित करते हुए कार्रवाई की मांग की थी। इस जांच रिपोर्ट में वित्तीय वर्ष 2011-12 में समस्त योजनाओं का कुल अंतिम अवशेष 2,30,88,877 रुपये, जबकि वर्ष 2012-13 का प्रारंभिक शेष रुपये 2,40,79,138 यानी 9,90,261 रुपये अधिक और इसी तरह 2012-13 का अंतिम अवशेष रुपये 4,96,35,497 जबकि वर्ष 2013-2014 का प्रारंभिक शेष रुपये 4,97,56,417 यानी 1,20,920 रुपये तथा दोनों को मिलाकर 11 लाख 11 हजार 181 रुपये अधिक दिखाया गया है। इस अतिरिक्त धनराशि का स्वास्य विभाग के खातों में कोई उल्लेख नहीं है। इसी तरह आरसीएच फ्लैक्सीपूल, एनआरएचएम एडीशनलिटीज व इम्युनाइजेशन योजनाओं में भी व्यय धनराशि एवं बैंकों में उपलब्ध धनराशि में 46 लाख 73 हजार 938 रुपये का अंतर जांच में सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार अंतिम अवशेष चार करोड़ दो लाख 430 रुपये है, जबकि बैंक खातों में तीन करोड़ 55 लाख 26 हजार 492 रुपये ही जमा हैं। इसके अलावा सीएमओ कार्यालय द्वारा वित्तीय वर्ष 2010-11 से वर्ष 2012-13 तक उपलब्ध कराये गये आंकड़ों में भी इन तीनों वर्षो में क्रमश: 41452467, 17773458 एवं 29660141 रुपये का अधिक व्यय दिखाया गया है। इसी तरह राष्ट्रीय बाल स्वास्य कार्यक्रम के तहत किराये पर लिये गये वाहनों के परिचालन में 5,26,469 रुपये की अधिक धनराशि की शासकीय क्षति उद्घाटित हुई है। वाहनों के संचालन में रुपये 2,93,112 के औचित्य पर भी सवाल उठाये गये हैं, जिसमें शिकायतकर्ता के वाहन भी संचालित बताये गये हैं। साथ ही वाहनों के 27,313 किमी अनौचित्यपूर्ण तरीके से चलने और इस कारण 1,33,982.68 रुपये का अधिक भुगतान किये जाने की बात रिपोर्ट में कही गयी है। वाहन संचालक द्वारा वाहन उपलब्ध न कराने की दशा में अर्थदंड के रूप में 99,375 की वसूली न करके भी शासकीय क्षति किये जाने की बात रिपोर्ट में है। इसके अलावा रिपोर्ट में राष्ट्रीय बाल स्वास्य कार्यक्रम के तहत नियुक्त चिकित्सकों की टीमों द्वारा दायित्वों का निर्वहन न किये जाने की बात भी कही गयी है। चिकित्सकों के मोबाइल हेल्थ रजिस्टरों और वाहन ठेकेदारों की रिपोटरे व वाहन लॉग बुक में समानता नहीं है। कार्यक्रम में फार्मासिस्ट की नियुक्ति में कम्प्यूटर कार्य में कुशलता संबंधित निर्धारित पात्रता की तथा स्टाफ नर्स की नियुक्ति में नर्सेज एंड मिडवाइफ काउंसिल में पंजीकरण कराये बिना की किये जाने जैसी भी तमाम अनियमितताओं की बात कही गयी है। जांच रिपोर्ट में बिलों के भुगतान, सूचना के अधिकार के तहत जानकारियां देने आदि में भी तमाम अनियमिततायें उजागर की गई हैं।

विधायक का नैनीताल विधानसभा के लिए करीब 200 करोड़ की कार्य योजनाएं स्वीकृत करने का दावा, पर कार्यान्वयन में दिक्कत, अलबत्ता बेतालघाट तक सीमित दिख रहीं विधायक की योजनायें 

-विधायक संजीव आर्य ने एक वर्ष के कार्यों का ब्यौरा किया पेश

संजीव आर्य

नैनीताल। क्षेत्रीय विधायक संजीव आर्य ने अपने व सरकार के एक वर्ष का कार्यकाल पूरा होने पर रविवार को किये गये कार्यों के ब्यौरे पेश किये। दावा किया कि एक वर्ष में अपने विधानसभा क्षेत्र में करीब 200 करोड़ की योजनाएं स्वीकृत कराई गयी हैं। अलबत्ता लगा कि विधायक का ध्यान अधिकतम राजनीतिक रूप से उनके गढ़ बेतालघाट में ही अधिक है, तथा एक वर्ष में योजनाएं केवल कागजों में ही हैं। विधायक ने भी स्वीकारा कि उनकी विधायक निधि सहित अन्य कार्यों में क्रियान्वयन में दिक्कतें हैं।

रविवार को नैनीताल क्लब में पार्टी की बैठक के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए विधायक ने बताया कि करीब 50 करोड़ की लागत से 44 सड़कों के निर्माण की प्रक्रिया जिला स्तर पर पूर्ण कर केंद्र सरकार में नोडल स्तर तक तक पहुंचा दी गयी हैं। इनमें से 11 में सैद्धांतिक स्वीकृति भी प्राप्त हो चुकी है, जबकि 7 पर कार्य भी प्रारंभ हो गया है। इसके अलावा जनपद के बेतालघाट से लगे गांवों के लिए कोसी नदी से पानी लिफ्ट करने के लिए 48 करोड़ की योजनाएं एनआरडीडब्लूपी के तहत शासन को प्रस्ताव भेजे गए हैं। साथ ही 82 गांवों में जल संरक्षण हेतु 24 करोड़ के कार्य स्वीकृत किये गए हैं। बताया कि जनपद में केवल उनकी विधानसभा के इन 82 गांवों में ही यह योजना स्वीकृत हुई है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि अपनी विधायक निधि के 3.75 करोड़ में से एक वर्ष में 4.21 करोड़ रुपए के कार्यों की अब तक घोषणा कर चुके हैं, अलबत्ता कार्य शुरू होने में विभागों के स्तर से देरी हो रही है, व दिक्कत आ रही है। इसके अलावा गांवों में पेयजल, सड़क, बारातघर जैसे छोटे कार्यों के लिए 61 लाख रुपए की योजनाएं स्वीकृत की गयी हैं। उन्होंने जनपद व विधानसभा के दूरस्थ बेतालघाट विकासखंड में एक दंत चिकित्सक व दो महिला चिकित्सकों सहित 5 चिकित्सक पहुंचा दिये गये हैं, जबकि राज्य बनने के बाद से यहां केवल 1 ही चिकित्सक रहे हैं।

अलबत्ता मुख्यालय स्थित जिला चिकित्सालय में चिकित्सकों की कमी पर बोलते हुए विधायक ठिठकते दिखे। मुख्यालय के लिए उन्होंने केवल 50 करोड़ की पार्किंग स्वीकृत कराने भर का जिक्र किया, और यह कब तक स्वीकृति के बाद बनना शुरू होगी, इस पर कुछ नहीं कहा। नालों की सफाई, नैनी झील के सिचाई विभाग को हस्तांतरित होने के बावजूद कोई कार्य न होने के विषयों पर भी विधायक ने कुछ नहीं कहा। इस मौके पर मुख्यमंत्री राहत कोष से 14 आवेदकों को 5 से 10 हजार रुपए की मिलाकर कुल 91 हजार रुपए की अनुमन्य राशि के चेक भी भेंट किये गये। कार्यक्रम में नगर अध्यक्ष मनोज जोशी, बिमला अधिकारी, विवेक साह, भुवन हरबोला, अरविंद पडियार, नितिन कार्की, पान सिंह रौतेला, दया किशन पोखरिया, विश्वकेतु वैद्य, संदीप कांडपाल व अतुल पाल सहित बड़ी संख्या में भाजपाई मौजूद रहे।

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