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(Supreme Courts Big Decision on UPNL Employees)। उत्तराखंड में उपनल यानी उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम के माध्यम से सरकारी सेवाओं में कार्यरत कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर वर्ष 2018 में उत्तराखंड उच्च न्यायालय के नियमितीकरण से जुड़े आदेश के विरुद्ध दायर की गई राज्य सरकार की याचिका को आज सर्वोच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया है। ऐसे में उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण की संभावना बन गई है, लेकिन सरकार सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का विधिक परीक्षण कराने की तैयारी में है। 2018 में नैनीताल उच्च न्यायालय ने उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण के पक्ष में निर्णय सुनाया था (Supreme Courts Big Decision on UPNL Employees)उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 में उपनल एजेंसी के माध्यम से राज्य सरकार के एक विभाग में कार्यरत कुंदन सिंह की चिट्ठी का नैनीताल उच्च न्यायालय ने संज्ञान लिया था और इसे याचिका में तब्दील कर ‘कुंदन सिंह बनाम राज्य सरकार’ प्रकरण के रूप में सुनवाई करते हुए उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण के पक्ष में निर्णय सुनाया था। नैनीताल हाईकोर्ट ने उस समय सरकार को एक साल के भीतर उपनल कर्मचारियों को नियमित करने की योजना तैयार करने और 6 महीने के भीतर समान कार्य के लिए समान वेतन देने के निर्देश दिए थे।राज्य सरकार ने इस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी राज्य सरकार ने इस आदेश को चुनौती देते हुए 2018 में सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद कुंदन सिंह सहित कई उपनल कर्मचारी संगठनों ने भी सर्वोच्च न्यायालय में अपनी याचिकाएं दायर कीं। सर्वोच्च न्यायालय ने सभी याचिकाओं को एक साथ जोड़ते हुए मामले की सुनवाई की और आज 15 अक्टूबर को अपना निर्णय सुनाया।यह भी पढ़ें : नैनीताल : धारी ब्लॉक के खटियाखाल में गुलदार के हमले से महिला की मृत्यु, 15 दिनों में तीसरी घटना से ग्रामीणों में रोषउत्तराखंड विद्युत संविदा कर्मचारी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष विनोद कवि ने जानकारी दी कि सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार की याचिका को खारिज कर दिया है, और अब सरकार को इस पर कोई ठोस निर्णय लेना है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास अब वर्षों से सरकारी विभागों में कार्यरत उपनल कर्मचारियों को न्याय दिलाने का एक बड़ा अवसर है। राज्य में हजारों उपनल कर्मचारी हैं, जिन्हें इस आदेश के बाद नियमितीकरण का लाभ मिल सकता है।विधिक परीक्षण करायेगी राज्य सरकार हाल ही में धामी सरकार ने 2024 की नियमितीकरण योजना लाने के संकेत दिए थे, हालांकि अप्रैल में कर्मचारियों ने इस बात पर असंतोष व्यक्त किया था कि इस योजना में केवल संविदा कर्मचारियों को ही शामिल किया जा रहा है और उपनल कर्मचारियों की उपेक्षा हो रही है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद सरकार ने कहा है कि पूरे मामले का विधिक परीक्षण कराया जाएगा और जो राज्य के हित में होगा, उस पर कार्यवाही की जाएगी। (Supreme Courts Big Decision on UPNL Employees)आज के अन्य एवं अधिक पढ़े जा रहे उत्तराखंड के नवीनतम अपडेट्स-‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। यहां क्लिक कर हमारे थ्रेड्स चैनल से, व्हाट्सएप चैनल से, फेसबुक ग्रुप से, गूगल न्यूज से, टेलीग्राम से, एक्स से, कुटुंब एप से और डेलीहंट से जुड़ें। अमेजॉन पर सर्वाधिक छूटों के साथ खरीददारी करने के लिए यहां क्लिक करें। यदि आपको लगता है कि ‘नवीन समाचार’ अच्छा कार्य कर रहा है तो हमें यहाँ क्लिक करके सहयोग करें..। (Supreme Courts Big Decision on UPNL Employees, Uttarakhand News, Supreme Court’s order on UPNL Employees, Employee’s Regularization, Big decision in favour of UPNL employees from Supreme Court, question- Will the government accept and regularize them, Uttarakhand, UPNL, Supreme Court, Regularization, Kundan Singh, High Court, State Government, Vinod Kavi, Regularization Policy, Dhami Government, Supreme Court, UPNL Employees, Regularization, 2018 High Court Decision, Government Petition Dismissed, Kundan Singh Case, Equal Pay for Equal Work, Employment Rights, State Government, Vinod Kavi, UPNL Employee Welfare, Regularization Policy 2024, Contract Employees, Uttarakhand Ex-Servicemen Welfare Corporation, Legal Examination, )यह भी पढ़ें : एम्स ऋषिकेश में चमोली के दंपति ने नौ दिन के मृत नवजात का देहदान किया, चिकित्सा शोध को मिला मानवता का बड़ा योगदानShare this: Click to share on Facebook (Opens in new window) Facebook Click to share on X (Opens in new window) X Click to share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading...Related Post navigationसीएम ने जमरानी बांध परियोजना के 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