सरकार अपने ही अधिकारियों को सुरक्षा नहीं दे पा रही है… हाईकोर्ट का वन अधिकारी से मारपीट प्रकरण में कड़ा रुख

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-वन अधिकारी से मारपीट प्रकरण: हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर लगाई रोक, पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर प्रश्न

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 14 मार्च 2026 (Officer Assault-HC takes Tough Stance)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के जनपद देहरादून (Dehradun) के विकासनगर (Vikasnagar) क्षेत्र में वन विभाग के उप प्रभागीय वनाधिकारी (Sub Divisional Forest Officer – SDO) के साथ हुई मारपीट के मामले में उत्तराखंड उच्च न्यायालय (High Court of Uttarakhand) ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने वन अधिकारी राजीव नयन नौटियाल (Rajiv Nayan Nautiyal) की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

Officer Assault-HC Takes Tough Stance Chakrata SDO Beaten by Mining Mafia in Dehradun; Cross FIR Filed Against  Officerन्यायमूर्ति राकेश थपलियाल (Rakesh Thapliyal) की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान विकासनगर कोतवाली (Vikasnagar Police Station) के पूरे स्टाफ का रिकॉर्ड तलब करने के निर्देश दिए हैं तथा अवैध खनन (Illegal Mining) पर सख्ती से रोक लगाने को कहा है। न्यायालय ने प्राथमिकी दर्ज करने वाले अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई और निलंबन (Suspension) की संभावना पर भी टिप्पणी की है।

क्या है पूरा मामला

मामले के अनुसार कालसी (Kalsi) क्षेत्र के उप प्रभागीय वनाधिकारी राजीव नयन नौटियाल ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 27 फरवरी 2026 की शाम जब वह अपने कार्यालय से लौट रहे थे, तब उन्होंने यमुना नदी (Yamuna River) की ओर जाते एक डंपर की गतिविधि संदिग्ध देखी। इस पर उन्होंने डंपर का वीडियो बनाना शुरू कर दिया।

आरोप है कि वहां मौजूद कुछ लोगों ने इसका विरोध किया और सरकारी कार्य में बाधा डालते हुए उनके साथ हाथापाई की। घटना का एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें कथित रूप से वन अधिकारी को उनकी सरकारी गाड़ी से बाहर निकालकर मारपीट करते हुए दिखाया गया।

दोनों पक्षों की शिकायत पर दर्ज हुए अभियोग

इस घटना के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर अलग-अलग अभियोग दर्ज किए। वन अधिकारी की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita – BNS) की धारा 115(2), 352, 324(2), 121(1), 132 और 191(2) के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया।

वहीं दूसरी ओर बड़वाला (Badwala) निवासी मनीष चौहान (Manish Chauhan) की शिकायत पर राजीव नयन नौटियाल के विरुद्ध भी भारतीय न्याय संहिता की धारा 115(2), 324(2), 351(3), 352 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (SC/ST Act) की धारा 3(1)(द) और 3(1)(ध) के अंतर्गत अभियोग दर्ज किया गया।

न्यायालय ने पुलिस की भूमिका पर उठाए प्रश्न

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति थपलियाल ने सरकारी अधिकारी के साथ हुई मारपीट की घटना पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यदि सरकार अपने ही अधिकारियों को सुरक्षा प्रदान नहीं कर पा रही है तो यह अत्यंत गंभीर स्थिति है।

न्यायालय ने यह भी पूछा कि जब संबंधित अधिकारी के स्थानांतरण (Transfer) पर पहले ही न्यायालय ने रोक लगा दी थी, तो उसके बाद उनके विरुद्ध प्राथमिकी (First Information Report – FIR) दर्ज करने की कार्रवाई क्यों की गई।

पूरी कोतवाली के कर्मचारियों का रिकॉर्ड तलब

न्यायालय ने पुलिस महानिदेशक (Director General of Police – DGP) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून (Senior Superintendent of Police – SSP Dehradun) को निर्देश दिया कि विकासनगर पुलिस स्टेशन के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों का पूरा सेवा रिकॉर्ड प्रस्तुत किया जाए।

साथ ही न्यायालय ने पूरे थाना स्टाफ के स्थानांतरण (Transfer) पर विचार करने के निर्देश भी दिए। न्यायालय ने प्राथमिकी दर्ज करने वाले अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई और निलंबन (Suspension) की संभावना पर भी टिप्पणी की।

अवैध खनन पर सख्ती के निर्देश

मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि संबंधित क्षेत्र में अवैध खनन गतिविधियों को पूरी तरह रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

याचिकाकर्ता की ओर से प्रस्तुत वीडियो के आधार पर न्यायालय ने अधिवक्ता को वीडियो को पेन ड्राइव (Pen Drive) में प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया, ताकि न्यायालय मामले की तथ्यात्मक स्थिति को विस्तार से देख सके।

गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक

न्यायालय ने आदेश दिया कि वन अधिकारी राजीव नयन नौटियाल के विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी के आधार पर उन्हें गिरफ्तार न किया जाए। साथ ही पुलिस से यह भी पूछा गया कि वन अधिकारी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत की वर्तमान स्थिति क्या है।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही, अवैध खनन नियंत्रण और सरकारी अधिकारियों की सुरक्षा से जुड़े व्यापक प्रश्नों को सामने लाता है। मामले की अगली सुनवाई सोमवार को निर्धारित की गई है।

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