बुजुर्ग दंपति की संपत्ति से बेदखली के आरोप पर उच्च न्यायालय सख्त, पुत्र और बहू को सूचना-पत्र
नवीन समाचार, नैनीताल, 13 अक्टूबर 2026 (Uttarakhand High Court News 13 October)। उत्तराखंड उच्च न्यायालय (Uttarakhand High Court) ने देहरादून (Dehradun) के बुजुर्ग दंपति (Elderly Couple) नरेंद्र सिंह रावत (Narendra Singh Rawat, 76) और बीना रावत (Beena Rawat, 71) की याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस उत्पीड़न (Police Harassment) और संपत्ति से जबरन बेदखल करने के कथित प्रयासों पर निर्देश जारी किये हैं। न्यायालय ने देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (Senior Superintendent of Police, Dehradun) को सुनिश्चित करने को कहा है कि पुलिस बुजुर्ग दंपति को प्रताड़ित न करे और विधिक प्रक्रिया (Legal Procedure) का पालन किये बिना उन्हें उनकी संपत्ति से बेदखल न किया जाए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित (Justice Pankaj Purohit) की एकलपीठ (Single Judge Bench) ने जोगीवाला थाना (Jogiwala Police Station) की पुलिस या किसी अन्य अधिकारी को याचिकाकर्ताओं को परेशान नहीं करने के निर्देश दिये। न्यायालय ने बुजुर्ग दंपति के पुत्र और बहू को सूचना-पत्र (Notice) जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 22 दिसंबर (22 December) को निर्धारित की गयी है।
सात वर्षों से लंबित नामांतरण वाद के शीघ्र निस्तारण के निर्देश (Directions for Early Disposal of Mutation Case)
उत्तराखंड उच्च न्यायालय (Uttarakhand High Court) ने देहरादून (Dehradun) के तहसीलदार न्यायालय (Tehsildar Court) में सात वर्षों से लंबित नामांतरण वाद (Mutation Case) का शीघ्र निस्तारण करने के निर्देश दिये हैं। न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी (Justice Ravindra Maithani) ने तहसीलदार (Tehsildar) को मामले की कार्यवाही यथाशीघ्र पूरी करने को कहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह मामला प्रवीण दुर्गा व अन्य बनाम दून हाउसिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड व अन्य (Praveen Durga and Others vs Doon Housing Company Private Limited and Others) से संबंधित है। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता अभिजित नेगी (Advocate Abhijit Negi) ने न्यायालय को बताया कि वर्ष 1969 में विक्रय विलेख (Sale Deed) होने के बाद वर्ष 2002 में राजस्व अभिलेखों (Revenue Records) में नाम दर्ज किया गया था, जिसे बाद में निरस्त कर दिया गया। इस मामले की जांच विशेष जांच दल (Special Investigation Team—SIT) ने भी की थी। इसके बावजूद अपर तहसीलदार न्यायालय, देहरादून (Additional Tehsildar Court, Dehradun) में नामांतरण की कार्यवाही पिछले सात वर्षों से लंबित है।
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी (Justice Ravindra Maithani) ने कहा कि नामांतरण प्रक्रिया का निस्तारण यथाशीघ्र होना चाहिए। न्यायालय ने तहसीलदार को लंबित वाद का शीघ्र निस्तारण करने के निर्देश दिये।
थैलीसैंण थाने के मामले में दो याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत, दंडात्मक कार्रवाई पर रोक (Interim Relief in Thalisain Police Case)
उत्तराखंड उच्च न्यायालय (Uttarakhand High Court) ने पौड़ी गढ़वाल (Pauri Garhwal) के थैलीसैंण थाना (Thalisain Police Station) में दर्ज एक मामले में जगदीश सिंह (Jagdish Singh) और एक अन्य याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत (Interim Relief) देते हुए उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई (Punitive Action) पर रोक लगा दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित (Justice Pankaj Purohit) की एकलपीठ ने 12 अक्टूबर (12 October) को यह आदेश पारित किया। प्राथमिकी (First Information Report—FIR) का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता की दलीलें प्रथम दृष्टया (Prima Facie) सही प्रतीत होती हैं।
न्यायालय ने तीसरे प्रतिवादी (Respondent No. 3) को चार सप्ताह में जवाब देने के लिए सूचना-पत्र जारी करने और तीन दिन के भीतर आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिये। प्रतिवादियों को चार सप्ताह के भीतर जवाबी शपथपत्र (Counter Affidavit) दाखिल करना होगा। मामले की अगली सुनवाई 23 दिसंबर (23 December) को निर्धारित की गयी है।
इथियोपिया में नौकरी दिलाने के नाम पर भेजे गये युवक का मामला समझौते से समाप्त, कार्यवाही निरस्त (Case Closed Following Settlement)
उत्तराखंड उच्च न्यायालय (Uttarakhand High Court) ने इथियोपिया (Ethiopia) में नौकरी दिलाने के नाम पर भेजे गये एक युवक से संबंधित मामले में पक्षों के बीच हुए आपसी समझौते (Mutual Settlement) के आधार पर दर्ज अभियोग और उससे जुड़ी आगामी न्यायिक कार्यवाही निरस्त कर दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति आलोक महरा (Justice Alok Mehra) की एकलपीठ (Single Judge Bench) में हुई। पक्षों के बीच समझौता होने के आधार पर न्यायालय ने अभियोग और उससे संबंधित आगे की कार्यवाही निरस्त करने का आदेश दिया। उपलब्ध विवरण में मामले के अन्य पक्षों और समझौते की शर्तों का उल्लेख नहीं है।
ट्रेडमार्क विवाद में ‘स्वर्णिका’ नाम से आभूषण कारोबार पर अंतरिम रोक, निचली अदालत का आदेश निरस्त (Trademark Dispute)
उत्तराखंड उच्च न्यायालय (Uttarakhand High Court) ने व्यापार चिह्न (Trademark) के उल्लंघन और भ्रम उत्पन्न करने वाले नाम के प्रयोग से जुड़े मामले में ऊधमसिंह नगर (Udham Singh Nagar) के प्रथम अपर जिला न्यायाधीश (First Additional District Judge) के 18 जुलाई 2026 (18 July 2026) के आदेश को निरस्त कर दिया है। न्यायालय ने अपील स्वीकार करते हुए पूनम भट्ट (Poonam Bhatt) को दीवानी वाद (Civil Suit) के अंतिम निस्तारण तक ‘स्वर्णिका’ (Swarnika) नाम या उससे मिलते-जुलते ट्रेडमार्क अथवा लेबल (Label) के तहत आभूषणों के निर्माण, बिक्री, विज्ञापन और कारोबार पर अंतरिम रोक लगा दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार अपीलकर्ता दीपांशु बंसल (Deepanshu Bansal) ने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी अंतरिम रोक लगाने की याचिका खारिज कर दी गयी थी। उच्च न्यायालय ने अपील स्वीकार करते हुए प्रतिवादी पूनम भट्ट (Poonam Bhatt) के विरुद्ध अंतरिम निषेधाज्ञा (Interim Injunction) जारी की। यह रोक दीवानी वाद के अंतिम निस्तारण तक प्रभावी रहेगी।
रुड़की के प्रेमी जोड़े को सुरक्षा देने के निर्देश, धमकी देने वाले परिजनों को समझाने को कहा (Protection for Couple)
उत्तराखंड उच्च न्यायालय (Uttarakhand High Court) ने रुड़की (Roorkee) निवासी एक मुस्लिम प्रेमी जोड़े (Muslim Couple) की सुरक्षा संबंधी याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस को उचित सुरक्षा उपलब्ध कराने के निर्देश दिये हैं। न्यायालय ने रुड़की थाना प्रभारी (Station House Officer, Roorkee) को जोड़े के समक्ष मौजूद खतरे का आकलन कर आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था करने और धमकी देने वाले परिजनों को बुलाकर विधिवत समझाने को कहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार न्यायमूर्ति आलोक मेहरा (Justice Alok Mehra) की एकलपीठ ने सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के लता सिंह बनाम उत्तर प्रदेश सरकार (Lata Singh vs State of Uttar Pradesh) मामले में दिये गये निर्णय को आधार बनाया। न्यायालय ने पुलिस को जोड़े की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश देने के साथ ही राज्य सरकार (State Government) से मामले में प्रगति प्रतिवेदन (Progress Report) भी मांगा है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।

































