नवीन समाचार, नई दिल्ली, 18 मार्च 2026 (EPF Pension may increase 7 Times)। नई दिल्ली (New Delhi) से देश के करोड़ों कर्मचारियों और पेंशनधारकों से जुड़ा महत्वपूर्ण संकेत सामने आया है। संसद की स्थायी समिति (Parliamentary Standing Committee) ने कर्मचारी पेंशन योजना 1995 (Employees’ Pension Scheme-1995, EPS-95) के तहत मिलने वाली न्यूनतम ₹1000 मासिक पेंशन को अपर्याप्त बताते हुए इसे तत्काल 7 गुना से अधिक बढ़ाने की सिफारिश की है। समिति ने स्पष्ट कहा कि मौजूदा महंगाई और जीवनयापन की लागत के बीच इतनी कम पेंशन से सम्मानजनक जीवन संभव नहीं है। यह सिफारिश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे भविष्य में पेंशन बढ़ोतरी पर नीति-निर्माण तेज हो सकता है।
ऐसे उठा पेंशन बढ़ाने का मुद्दा
संसदीय समिति की 15वीं रिपोर्ट (अनुदान मांग 2026-27) में कहा गया है कि लगातार बढ़ती महंगाई, चिकित्सा खर्च और दैनिक आवश्यकताओं के बीच ₹1000 मासिक पेंशन पूरी तरह अपर्याप्त है। समिति को देशभर से विशेषकर बुजुर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर पेंशनधारकों की शिकायतें मिलीं कि इस राशि में बुनियादी जरूरतें भी पूरी नहीं हो पा रही हैं।
यही कारण है कि समिति ने श्रम एवं रोजगार मंत्रालय (Ministry of Labour and Employment) को न्यूनतम पेंशन की “तुरंत और व्यापक समीक्षा” करने की सिफारिश की है।
₹7500 पेंशन की मांग क्यों चर्चा में
देशभर में EPS-95 पेंशनधारक लंबे समय से न्यूनतम पेंशन को ₹7500 प्रति माह करने की मांग कर रहे हैं। इसी मांग को लेकर 9 मार्च से जंतर-मंतर (Jantar Mantar) पर तीन दिन तक प्रदर्शन भी किया गया।
पेंशनधारकों का कहना है कि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों में ₹1000 से जीवनयापन संभव नहीं है, इसलिए इसे वास्तविक जीवन लागत के अनुरूप बढ़ाना आवश्यक है।
EPFO योजना में अभी यह हैं प्रावधान
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (Employees’ Provident Fund Organisation-EPFO) द्वारा संचालित इस योजना में—
न्यूनतम पेंशन ₹1000 प्रति माह निर्धारित है
सरकार की ओर से बजटीय सहायता दी जाती है
सक्रिय सदस्यों के लिए 1.16% का अतिरिक्त योगदान शामिल है
हालांकि समिति का मानना है कि यह व्यवस्था मौजूदा परिस्थितियों में पर्याप्त नहीं है।
समिति के प्रमुख सुझाव
संसदीय समिति ने सरकार को निम्न सुझाव दिए हैं—
न्यूनतम पेंशन की तत्काल समीक्षा कर इसे सम्मानजनक स्तर तक बढ़ाया जाए
योजना के लिए बजटीय सहायता बढ़ाने के विकल्प तलाशे जाएं
पेंशनधारकों को बेहतर सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता प्रदान की जाए
ठेका श्रमिकों के लिए भी बड़ा सुझाव
रिपोर्ट में ठेका (Contract) श्रमिकों की स्थिति पर भी चिंता जताई गई है। समिति ने पाया कि कई अनुबंध श्रमिक नियमित कर्मचारियों के समान कार्य करते हैं, लेकिन दुर्घटनाओं के बाद उन्हें राहत और मुआवजा समय पर नहीं मिलता।
इस पर समिति ने सिफारिश की—
ऐसे श्रमिकों को कर्मचारी राज्य बीमा (Employees’ State Insurance-ESI) और ईपीएफ (EPF) योजनाओं के तहत समय पर शामिल किया जाए
मुआवजा प्रक्रिया को तेज किया जाए
केंद्र और राज्य स्तर पर निगरानी प्रणाली विकसित की जाए
यह बदल सकता है आगे
यह सिफारिश सीधे तौर पर पेंशन बढ़ाने का निर्णय नहीं है, लेकिन यह स्पष्ट संकेत है कि सरकार पर अब इस विषय में निर्णय लेने का दबाव बढ़ सकता है। यदि पेंशन में वृद्धि होती है, तो इसका सीधा लाभ लाखों सेवानिवृत्त कर्मचारियों को मिलेगा।
यह भी महत्वपूर्ण प्रश्न है—क्या सरकार ₹7500 जैसी मांग को स्वीकार करेगी या कोई मध्य मार्ग निकाला जाएगा? और क्या इससे सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी?
आने वाले समय में इस पर नीति स्तर पर क्या निर्णय होता है, इस पर देशभर के पेंशनधारकों की नजर बनी हुई है। पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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