हरकी पैड़ी पर ‘टोपी’ से उपजा बखेड़ा: बिजनौर से आई ‘एक्स मुस्लिम’ यात्रा के समापन पर भारी विवाद

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नवीन समाचार, हरिद्वार, 13 अप्रैल 2026 (Har Ki Pauri-Controversy On Muslim Cap)। उत्तराखंड (Uttarakhand) की धर्मनगरी हरिद्वार (Haridwar) में रविवार को उस समय भारी तनाव और विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई, जब उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बिजनौर (Bijnor) से चलकर आई ‘एक्स मुस्लिम (Ex-Muslim) पदयात्रा’ हरकी पैड़ी (Har-ki-Pauri) पहुंची। इस्लाम (Islam) त्यागकर सनातन धर्म (Sanatan Dharma) अपनाने का संदेश देने वाली इस यात्रा के दौरान कुछ युवकों के संप्रदाय विशेष की वेशभूषा और टोपी पहनकर ब्रह्मकुंड (Brahmkund) क्षेत्र में प्रवेश करने पर श्रीगंगा सभा (Shri Ganga Sabha) ने कड़ी आपत्ति जताई है। तीर्थ पुरोहितों ने इसे धार्मिक मर्यादाओं का उल्लंघन और सनातन को कलंकित करने का षड्यंत्र बताते हुए दोषियों पर कानूनी कार्यवाही की मांग की है।

(Har Ki Pauri-Controversy On Muslim Cap) Ex Muslim Padayatra Haridwarहरिद्वार के स्थानीय सूत्रों और श्रीगंगा सभा से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह यात्रा शनिवार को बिजनौर के गंगा बैराज (Ganga Barrage) से प्रारंभ हुई थी, जिसका उद्देश्य मुस्लिम समाज के लोगों को सनातन धर्म की ओर ‘घर वापसी’ (Ghar Wapsi) के लिए जागरूक करना था। यात्रा के संयोजक इमरोज आलम (Imroz Alam) के नेतृत्व में यह दल नजीबाबाद हाईवे (Najibabad Highway) से होते हुए रविवार दोपहर लगभग डेढ़ बजे हरकी पैड़ी पहुंचा। पुलिस बल की उपस्थिति में यात्रियों ने गंगा स्नान और पूजन किया, किंतु विवाद तब गहराया जब सोशल मीडिया (Social Media) पर कुछ वीडियो प्रसारित हुए, जिनमें युवक मुस्लिम वेशभूषा में प्रतिबंधित क्षेत्र के भीतर दिखाई दिए।

धार्मिक मर्यादा और प्रवेश निषेध के नियमों पर प्रश्नचिह्न

हरकी पैड़ी की व्यवस्था संभालने वाली संस्था श्रीगंगा सभा के पदाधिकारियों ने इस घटनाक्रम पर अत्यंत तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम (Nitin Gautam) ने कहा कि हरकी पैड़ी क्षेत्र के उपनियमों (Bylaws) के अनुसार यहाँ गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है और इस संबंध में स्पष्ट सूचना पट्ट (Information Boards) भी स्थापित हैं। उन्होंने प्रश्न किया कि जब यह लोग सनातन धर्म अपनाने का दावा कर रहे थे, तो संप्रदाय विशेष की टोपी लगाकर मर्यादाओं को चुनौती देने का क्या अर्थ है?

Ex Muslim Padayatra Haridwarसभा ने इस यात्रा का नेतृत्व कर रहे संत राम विशाल दास (Ram Vishal Das) की भूमिका पर भी गंभीर प्रश्न उठाए हैं। नितिन गौतम ने उन्हें ‘कालनेमि’ (Kalnemi) की संज्ञा देते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने प्रशासन और गंगा सभा को भ्रमित कर यह प्रोपेगेंडा (Propaganda) रचा है। तीर्थ पुरोहित उज्ज्वल पंडित (Ujjwal Pandit) ने भी इसे सस्ती लोकप्रियता प्राप्त करने की कुत्सित कोशिश बताया और चेतावनी दी कि धार्मिक भावनाओं को आहत करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

‘घर वापसी’ का दावा और संत की सफाई

दूसरी ओर, यात्रा में शामिल लोगों का पक्ष भिन्न है। संयोजक इमरोज आलम ने तर्क दिया कि जिन लोगों ने इस्लाम छोड़ा है, वे स्वयं को असुरक्षित अनुभव कर रहे थे और सनातन धर्म में संरक्षण की आशा लेकर आए हैं। वहीं, विवादों के केंद्र में आए संत राम विशाल दास ने अपने ऊपर हो रही टिप्पणियों को निराधार बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो लोग टोपी पहनकर पहुंचे थे, वे इस्लाम त्याग चुके थे और उन्होंने हरकी पैड़ी पर विधिवत सनातन धर्म स्वीकार किया है। उन्होंने श्रीगंगा सभा के पदाधिकारियों पर कुंठित होने का आरोप लगाते हुए मानहानि की कार्यवाही करने की बात कही है।

प्रशासन की भूमिका और आगामी वैधानिक स्थिति

घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन (Police Administration) ने यात्रा के समापन के पश्चात यात्रियों को सुरक्षा घेरे में चिड़ियापुर (Chidiyapur) सीमा से उत्तर प्रदेश में प्रवेश कराया। वर्तमान में पुलिस इस मामले के वीडियो साक्ष्यों की जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या जानबूझकर प्रतिबंधों का उल्लंघन किया गया।

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यह प्रकरण अब केवल एक यात्रा तक सीमित न रहकर कानूनी और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया है। एक ओर जहाँ ‘एक्स मुस्लिम’ समूह अपनी धार्मिक स्वतंत्रता की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर तीर्थ पुरोहितों का समूह तीर्थ स्थल की पवित्रता और ऐतिहासिक परंपराओं की रक्षा हेतु अड़ा हुआ है। क्या इस प्रकार के आयोजनों के लिए भविष्य में कड़े दिशा-निर्देश (Guidelines) जारी होंगे? यह प्रश्न अब प्रशासन के समक्ष खड़ा है।

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