डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 1 मार्च 2026 (British-era Glenmore Kothi in Fire)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के नैनीताल (Nainital) नगर में ब्रिटिशकालीन धरोहरों के आग से नष्ट होने की श्रृंखला में एक और घटना जुड़ गई। रविवार अपराह्न आल्मा लॉज (Alma Lodge) और निशांत विद्यालय (Nishant School) के पास स्थित ग्लेनमोर कोठी (Glenmore Cottage) भीषण अग्निकांड में जलकर नष्ट हो गई। राहत की बात यह रही कि भवन में रह रहे परिवार सुरक्षित हैं, लेकिन लकड़ी से निर्मित ऐतिहासिक इमारत और उसमें रखा अधिकांश सामान पूरी तरह नष्ट हो गया। यह घटना शहर में अग्नि सुरक्षा और विरासत संरक्षण पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रही है।
कैसे लगी आग
प्राप्त जानकारी के अनुसार कोठी के एक हिस्से में जिला कलक्ट्रेट से सेवानिवृत्त ललित मोहन तिवारी (Lalit Mohan Tiwari) परिवार सहित रहते हैं, जबकि दूसरे हिस्से में एरीज (Aryabhatta Research Institute of Observational Sciences) से सेवानिवृत्त अनिल जोशी (Anil Joshi) निवास करते हैं, जो घटना के समय घर पर नहीं थे।
रविवार को लगभग पौने दो बजे गृहस्वामी घर लौटे तो भीतर धुआं महसूस हुआ। उन्होंने 1.50 बजे अग्निशमन विभाग को सूचना दी।
दमकल पहुंचने में आई कठिनाई
सूचना मिलने पर अग्निशमन अधिकारी देवेंद्र सिंह नेगी (Devendra Singh Negi) के नेतृत्व में तीन दमकल वाहन संकरी सड़क से जोखिम उठाते हुए मौके पर पहुंचे। तब तक लकड़ी से बने पुराने भवन में आग पूरी तरह फैल चुकी थी।
अग्निशमन कर्मी प्रकाश मेर (Prakash Mer), प्रकाश कांडपाल (Prakash Kandpal), भूपेंद्र नेगी (Bhupendra Negi), नीरज (Neeraj), नानक राणा (Nanak Rana), रमेश चंद्र (Ramesh Chandra), किशोर (Kishore), बीना परिहार (Beena Parihar), कविता सकलानी (Kavita Saklani), रूपा राणा (Rupa Rana) और अमरदीप राणा (Amardeep Rana) सहित टीम करीब साढ़े तीन घंटे से अधिक समय तक आग बुझाने में जुटी रही। समाचार लिखे जाने तक भी लकड़ियां सुलग रही थीं और टिन की चादरें गिरने का खतरा बना हुआ था।
हाइड्रेंट और पानी की कमी बनी चुनौती
अग्निशमन कर्मियों ने बताया कि क्षेत्र में अग्नि हाइड्रेंट न होने और पानी की सीमित उपलब्धता के कारण आग पर शीघ्र नियंत्रण पाना कठिन रहा। संकरी सड़क के कारण दमकल वाहनों की आवाजाही भी बाधित हुई।
पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा और स्थानीय लोग भी आग बुझाने में सहयोग करते रहे।
क्यों महत्वपूर्ण है यह घटना
नैनीताल में हाल के समय में ब्रिटिशकालीन लकड़ी निर्मित भवनों में आग की घटनाएं बढ़ने से विरासत संरक्षण, शहरी अग्नि सुरक्षा और आपदा तैयारी पर पुनर्विचार की आवश्यकता महसूस की जा रही है। क्या पुराने भवनों के लिए विशेष अग्नि सुरक्षा मानक तय होंगे? यह अब प्रशासन और नगर नियोजन एजेंसियों के सामने अहम प्रश्न है।
आगे क्या कदम संभव
प्रशासन की ओर से आग के कारणों की जांच की जा रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि विरासत भवनों के लिए अग्नि चेतावनी प्रणाली, हाइड्रेंट नेटवर्क और आपात पहुंच मार्गों को मजबूत करना भविष्य में ऐसी घटनाओं को कम कर सकता है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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