हल्द्वानी के चिकित्सालय की ‘गब्बर’ जैसी हरकत, उपचार के दौरान मृत्यु के बाद नहीं दिया शव, एसएसपी नैनीताल के हस्तक्षेप से परिजनों को मिला शव

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 4 जनवरी 2026 (Haldwani Hospital as Gabbar)। उत्तराखंड के नैनीताल जनपद में मानवता और प्रशासनिक संवेदनशीलता का एक उदाहरण सामने आया है। हल्द्वानी स्थित एक निजी चिकित्सालय में उपचार के दौरान एक महिला की मृत्यु के बाद धनराशि जमा न होने पर शव परिजनों को न देने की फिल्म ‘गब्बर’ जैसी स्थिति की शिकायत सामने आई। पीड़ित पति की प्रार्थना पर एसएसपी नैनीताल ने त्वरित संज्ञान लेते हुए हस्तक्षेप किया, जिसके बाद पुलिस की पहल से मृतका का शव परिजनों को सौंपा गया और चिकित्सालय प्रबंधन को भविष्य के लिए कड़ी हिदायत भी दी गई।
पीड़ित की फरियाद पर लिया गया त्वरित संज्ञान
प्राप्त जानकारी के अनुसार अल्मोड़ा जनपद के धारानौला क्षेत्र निवासी नन्दन बिरौड़िया ने 3 जनवरी की रात्रि एसएसपी नैनीताल को फोन पर अवगत कराया कि उनकी पत्नी सीमा बिरौड़िया को बेस चिकित्सालय अल्मोड़ा से हल्द्वानी के चंदन चिकित्सालय में उपचार के लिए लाया गया था। उपचार के दौरान पत्नी की मृत्यु हो गई, लेकिन चिकित्सालय प्रबंधन द्वारा शेष धनराशि जमा न करने के कारण शव देने से इनकार किया जा रहा है। पीड़ित ने बताया कि वह आर्थिक रूप से कमजोर है और अब तक 57 हजार रुपये जमा कर चुका है, इसके बावजूद 30 हजार रुपये और मांगे जा रहे हैं।
परिजनों की पीड़ा और अंतिम संस्कार की चिंता
पीड़ित ने यह भी बताया कि धन के अभाव में शव न मिलने से वह धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार नहीं कर पा रहा है। इस स्थिति ने पूरे परिवार को मानसिक और सामाजिक संकट में डाल दिया। ऐसे मामलों में अक्सर परिजन असहाय महसूस करते हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं और मानवता पर प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं।
पुलिस अधिकारियों को दिए गए तत्काल निर्देश
पीड़ित की व्यथा सुनकर एसएसपी नैनीताल ने तुरंत मामले को गंभीरता से लिया और क्षेत्राधिकारी नगर हल्द्वानी तथा कोतवाली हल्द्वानी प्रभारी निरीक्षक को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। पुलिस टीम तत्काल चिकित्सालय पहुंची और स्थिति की जांच की।
शव सौंपा गया, चिकित्सालय को दी गई चेतावनी
पुलिस के हस्तक्षेप के बाद चंदन चिकित्सालय के प्रबंधन द्वारा मृतका का शव परिजनों के सुपुर्द किया गया और मृत्यु प्रमाण पत्र भी उपलब्ध कराया गया। साथ ही चिकित्सालय प्रबंधक को स्पष्ट हिदायत दी गई कि भविष्य में किसी भी परिस्थिति में मानवता की अनदेखी न की जाए और इस प्रकार की स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो। प्रशासन ने यह भी संकेत दिया कि यदि भविष्य में ऐसी शिकायत सामने आती है तो नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला
यह घटना केवल एक परिवार की पीड़ा तक सीमित नहीं है, बल्कि निजी स्वास्थ्य संस्थानों में रोगी अधिकारों और मानवीय संवेदनशीलता के प्रश्न को भी उजागर करती है। प्रशासनिक त्वरित कार्रवाई से यह संदेश गया है कि आर्थिक मजबूरी के कारण किसी को अंतिम संस्कार से वंचित नहीं किया जा सकता।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।











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