भीमताल–अल्मोड़ा के बीच वैकल्पिक सड़क की डीपीआर बनेगी, कैंचीधाम मार्ग पर जाम से मिलेगी राहत, अल्मोड़ा–घाट, ज्योलीकोट–कर्णप्रयाग तथा अल्मोड़ा–उडियारी बेंड पर भी हुई बात…

नवीन समाचार, नई दिल्ली, 6 जनवरी 2026 (New Roads in Kumaun)। राजधानी नई दिल्ली से कुमाऊं क्षेत्र की यातायात व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण और दूरगामी निर्णय सामने आया है। भीमताल से अल्मोड़ा को जोड़ने के लिए कैंची धाम के परंपरागत व्यस्त मार्ग से इतर एक वैकल्पिक सड़क की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जायेगी। इसका मुख्य उद्देश्य मौजूदा मार्ग पर कैंचीधाम क्षेत्र में लगने वाले बार-बार के जाम को कम करना है, जो लंबे समय से स्थानीय निवासियों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए बड़ी समस्या बना हुआ है। माना जा रहा है कि यह पहल न केवल आवागमन को सुगम बनाएगी, बल्कि क्षेत्रीय पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को भी गति देगी।
राजमार्ग परियोजनाओं की समीक्षा बैठक में हुआ निर्णय
केंद्रीय मंत्री की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक
उत्तराखंड में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की समीक्षा को लेकर आयोजित बैठक में राष्ट्रीय राजमार्ग एवं आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड (National Highways and Infrastructure Development Corporation Limited) ने भीमताल–अल्मोड़ा वैकल्पिक मार्ग की जानकारी साझा की। यह बैठक केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में आयोजित की गयी, जिसमें उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने बताया कि वैकल्पिक मार्ग बनने से कैंचीधाम जाने वाले श्रद्धालुओं के साथ-साथ कुमाऊं क्षेत्र में सामान्य यातायात को भी बड़ी राहत मिलेगी।
राज्य सरकार ने रखीं अहम मांगें
बैठक में चारधाम सड़क परियोजना और मानसरोवर संपर्क मार्ग की प्रगति पर भी विस्तार से चर्चा की गयी। सभी निर्माण एजेंसियों को चल रही परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिये गये। उत्तराखंड सरकार की ओर से ऋषिकेश बाईपास, अल्मोड़ा–दन्या–पनार–घाट मार्ग, ज्योलीकोट–खैरना–गैरसैंण–कर्णप्रयाग मार्ग तथा अल्मोड़ा–बागेश्वर–कांडा–उडियारी बेंड मार्ग के प्रस्तावों को स्वीकृति देने का अनुरोध किया गया।
सिलक्यारा सुरंग परियोजना को मार्च 2027 तक पूर्ण करने का लक्ष्य
बैठक में सिलक्यारा बेंड–बड़कोट सुरंग परियोजना की प्रगति की भी समीक्षा की गयी। अधिकारियों ने जानकारी दी कि यह सुरंग मार्च 2027 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। उल्लेखनीय है कि नवंबर 2023 में इसी सुरंग का एक हिस्सा ढहने के कारण परियोजना प्रभावित हुई थी। अब कार्य को पुनः तेज गति से आगे बढ़ाया जा रहा है। यह सुरंग चारधाम यात्रा और यमुनोत्री क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
निर्माण कार्य में कच्चे माल को लेकर सुझाव-स्थानीय नदियों से मलबा निकालने की अनुमति पर चर्चा
परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान केंद्रीय मंत्री ने उत्तराखंड सरकार से आग्रह किया कि राजमार्ग निर्माण के लिए नदियों से मलबा निकालने की अनुमति दी जाये। अधिकारियों का मानना है कि इससे निर्माण लागत घटेगी और परियोजनाएं समय पर पूरी हो सकेंगी। साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने सुझाव दिया कि कच्चे माल की उपलब्धता के लिए हरियाणा जैसे राज्यों की तर्ज पर एक ऑनलाइन प्रणाली अपनायी जा सकती है, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और क्षेत्रीय विकास को बल मिलेगा।
ऋषिकेश बाईपास का विस्तृत स्वरूप
चर्चा के दौरान यह भी बताया गया कि राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 7 के अंतर्गत 12.7 किलोमीटर लंबा चार लेन ऋषिकेश बाईपास प्रस्तावित है, जिसकी अनुमानित लागत 1,161.3 करोड़ रुपये रखी गयी है। इस परियोजना में तीन हाथी गलियारों के लिए 4.9 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड खंड, चंद्रभागा नदी पर 200 मीटर लंबा पुल और रेलवे पोर्टल पर 76 मीटर लंबा रोड ओवर ब्रिज शामिल है। इस परियोजना को पर्यावरण संरक्षण और यातायात सुविधा दोनों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
आगे क्या बदलेगा
यदि भीमताल–अल्मोड़ा वैकल्पिक सड़क और अन्य प्रस्तावित परियोजनाएं समयबद्ध रूप से पूरी होती हैं, तो कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्र में आवागमन कहीं अधिक सुगम होगा। इससे पर्यटन, व्यापार और स्थानीय रोजगार को भी नया आधार मिलने की उम्मीद है। क्या यह पहल कैंचीधाम जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में जाम की समस्या का स्थायी समाधान बन पाएगी। आने वाले समय में इसका प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखेगा।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।











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