लालकुआं में दुष्कर्म प्रकरण की विवेचना में लापरवाही पर महिला उप निरीक्षक निलंबित, एसएसपी ने दिए सख्त निर्देश

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नवीन समाचार, हल्द्वानी, 14 जनवरी 2026 (SSP Suspended Female SI)। उत्तराखंड के नैनीताल जनपद के हल्द्वानी (Haldwani) अंतर्गत लालकुआं (Lalkuan) कोतवाली क्षेत्र में महिला अपराध से जुड़े एक गंभीर प्रकरण की विवेचना में लापरवाही सामने आने पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नैनीताल (SSP Nainital) मंजूनाथ टीसी (Manjunath TC) ने कड़ा कदम उठाया है।

(SSP Suspended Female SI) (On Christmas-New Year-Sticker System in Nainital)लालकुआं थाने में तैनात महिला उप निरीक्षक अंजू यादव नेगी (Anju Yadav Negi) को दुष्कर्म के मामले की जांच में गंभीर लापरवाही और आरोपित प्रतिवादी को लाभ पहुंचाने के आरोप में निलंबित (Suspended) कर दिया गया है। यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि महिला सुरक्षा और न्याय प्रक्रिया में निष्पक्ष विवेचना को लेकर पुलिस प्रशासन ने “शून्य सहनशीलता” का संदेश दिया है।

प्रकरण क्या है, शिकायत कब दर्ज हुई

जानकारी के अनुसार लालकुआं कोतवाली में अक्टूबर 2025 में एक युवती ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में युवती ने आरोप लगाया था कि शादी का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया गया। इस आधार पर पुलिस ने आरोपित के विरुद्ध अभियोग पंजीकृत किया था। प्रकरण की विवेचना की जिम्मेदारी महिला उप निरीक्षक अंजू नेगी (Anju Negi) को सौंपी गई थी।

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जांच के दौरान उच्चाधिकारियों के स्तर पर यह तथ्य सामने आया कि विवेचना में आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। यह भी आरोप है कि निष्पक्ष जांच करने के बजाय प्रतिवादी को लाभ पहुंचाने का प्रयास हुआ, जिससे पीड़िता को न्याय मिलने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती थी।

एसएसपी ने क्यों माना इसे गंभीर, तत्काल जांच के बाद कार्रवाई

मामले की शिकायत उच्च स्तर तक पहुंचने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नैनीताल (SSP Nainital) मंजूनाथ टीसी (Manjunath TC) ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच कराई। प्रारंभिक स्तर पर आरोप सही पाए जाने के बाद महिला उप निरीक्षक को निलंबित कर दिया गया।

इस कार्रवाई से पुलिस महकमे में हलचल देखी जा रही है। प्रशासनिक तौर पर यह कदम साफ संकेत देता है कि महिला अपराधों में विवेचना के स्तर पर “ढिलाई” को भी गंभीर अनियमितता माना जा रहा है।

महिला सुरक्षा, कानून और विवेचना की जवाबदेही पर बड़ा संदेश

निष्पक्ष विवेचना क्यों जरूरी है

महिला अपराधों में त्वरित और निष्पक्ष विवेचना केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि पीड़िता के विश्वास और सामाजिक न्याय का आधार है। यदि विवेचना में तकनीकी त्रुटि, विलंब या प्रक्रियात्मक लापरवाही हो जाती है, तो न्यायालय में मामला कमजोर हो सकता है। यही कारण है कि पुलिस विभाग में अब विवेचना की गुणवत्ता, साक्ष्य संकलन और समयबद्ध कार्रवाई को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

एसएसपी का स्पष्ट निर्देश

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नैनीताल (SSP Nainital) ने स्पष्ट कहा है कि महिला अपराध से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही, पक्षपात या अनियमितता कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि किसी भी स्तर पर यह पाया गया कि विवेचना में जानबूझकर ढिलाई हुई या आरोपित को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया, तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध कठोर विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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आगे क्या, विभागीय प्रक्रिया और निगरानी बढ़ने के संकेत

इस निलंबन के बाद अब प्रकरण की विवेचना प्रक्रिया की समीक्षा और उत्तरदायित्व तय करने की दिशा में विभागीय कार्रवाई आगे बढ़ सकती है। साथ ही यह भी संभव है कि महिला अपराधों से जुड़े मामलों में विवेचकों की निगरानी (Monitoring) और जांच गुणवत्ता का आंतरिक परीक्षण और कड़ा किया जाए।

यह सवाल भी उठता है कि क्या थानों में संवेदनशील मामलों की विवेचना के लिए विशेष प्रशिक्षण, मानक प्रक्रिया (Standard Operating Procedure) और जवाबदेही की व्यवस्था और मजबूत की जाएगी। प्रशासन का रुख देखकर यही संकेत मिल रहा है कि अब इस दिशा में सख्ती बढ़ेगी।

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