विधानसभा चुनाव 2027 से पहले उत्तराखंड में बड़े प्रशासनिक फेरबदल की तैयारी, गृह जिले में तैनात अधिकारी हटेंगे

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नवीन समाचार, देहरादून, 5 नवंबर 2026 (Administrative Reshuffle in Uttarakhand)। उत्तराखंड (Uttarakhand) में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने के लिए भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) ने चुनाव से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के स्थानांतरण एवं तैनाती को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं।

इसके तहत चुनाव कार्यों से सीधे जुड़े ऐसे अधिकारियों को उनके गृह जनपद में तैनात नहीं रखा जाएगा, जिन्होंने पिछले चार वर्षों में किसी एक जिले में तीन साल या उससे अधिक का कार्यकाल पूरा किया है अथवा 31 मार्च 2027 तक पूरा कर लेंगे।

Administrative Reshuffle in Uttarakhand Administrative Reshuffle in Uttarakhand, आयोग के निर्देशों के बाद प्रदेश में प्रशासनिक और पुलिस विभागों में बड़े स्तर पर स्थानांतरण होने की संभावना है। हालांकि यह व्यवस्था सभी विभागों और कर्मचारियों पर समान रूप से लागू नहीं होगी।

निर्वाचन आयोग ने 27 अक्टूबर 2026 को उत्तराखंड सहित गोवा, मणिपुर, पंजाब और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों तथा मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को पत्र भेजकर ये निर्देश दिए हैं। उत्तराखंड सहित चार राज्यों में तीन वर्ष के कार्यकाल की गणना के लिए 31 मार्च 2027 की तारीख तय की गई है, जबकि उत्तर प्रदेश के लिए यह तारीख 31 मई 2027 है। आयोग का उद्देश्य लंबे समय से एक ही जिले में तैनात अधिकारियों के प्रभाव को सीमित करना और चुनाव के दौरान प्रशासनिक तथा पुलिस व्यवस्था की निष्पक्षता बनाए रखना है।

किन अधिकारियों और कर्मचारियों पर लागू होंगे तबादले के नियम

निर्वाचन आयोग की स्थानांतरण नीति मुख्य रूप से उन अधिकारियों पर लागू होगी, जो सीधे निर्वाचन प्रक्रिया, मतदाता सूची, प्रशासनिक प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े हैं। इनमें जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO), उप जिला निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचन अधिकारी (RO), सहायक निर्वाचन अधिकारी (ARO), निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO), सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (AERO) तथा चुनाव से संबंधित विशेष जिम्मेदारियां निभाने वाले अधिकारी शामिल हैं।

जिला प्रशासन में तैनात अपर जिलाधिकारी (ADM), उपजिलाधिकारी (SDM), संयुक्त मजिस्ट्रेट, तहसीलदार, उप जिलाधिकारी स्तर के अन्य अधिकारी और खंड विकास अधिकारी (BDO) भी निर्धारित दायरे में आएंगे। मंडलायुक्त, नगर आयुक्त और नगर निगमों एवं विकास प्राधिकरणों में प्रतिनियुक्ति पर तैनात संबंधित अधिकारी भी इस व्यवस्था के अंतर्गत शामिल हैं।

पुलिस विभाग में उपनिरीक्षक से लेकर निरीक्षक, पुलिस अधीक्षक, पुलिस उपमहानिरीक्षक और पुलिस महानिरीक्षक सहित निर्वाचन तथा सुरक्षा व्यवस्था से सीधे जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों पर भी ये निर्देश लागू होंगे। आबकारी विभाग में उपनिरीक्षक और उससे ऊपर के अधिकारी तथा परिवहन विभाग के निर्धारित श्रेणी के क्षेत्रीय अधिकारी भी इसके दायरे में रखे गए हैं।

आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि जिला निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचन अधिकारी, सहायक निर्वाचन अधिकारी और पुलिस निरीक्षक, उपनिरीक्षक या उनसे वरिष्ठ अधिकारी पिछले विधानसभा चुनाव अथवा उसके बाद हुए किसी उपचुनाव के दौरान जिस विधानसभा क्षेत्र या जिले में तैनात रहे हों, वहां दोबारा तैनात न किए जाएं।

गृह जनपद और तीन वर्ष की तैनाती का नियम कैसे लागू होगा

आयोग के निर्देशों के अनुसार, चुनाव कार्य से सीधे जुड़े किसी अधिकारी को उसके गृह जनपद में तैनात नहीं रखा जाएगा। इसके अतिरिक्त, यदि किसी अधिकारी ने पिछले चार वर्षों में एक ही जिले में तीन साल या उससे अधिक समय पूरा कर लिया है अथवा निर्धारित गणना तिथि तक पूरा कर लेगा, तो उसे उस जिले से स्थानांतरित करना होगा।

तीन साल की अवधि की गणना में उसी जिले के भीतर पदोन्नति के बाद की गई तैनाती भी शामिल होगी। हालांकि, पिछले चार वर्षों में राज्य मुख्यालय में की गई सेवा को इस अवधि की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा, भले ही राज्य मुख्यालय उसी राजस्व जिले में स्थित हो।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि निर्धारित संवर्ग के लिए आरक्षित पदों पर संबंधित संवर्ग के अधिकारियों की ही तैनाती होनी चाहिए। ऐसे पदों पर अन्य अधिकारियों की नियुक्ति में छूट नहीं दी जाएगी।

किन कर्मचारियों को मिलेगी छूट

निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव से सीधे संबंध नहीं रखने वाले सभी विभागों में बड़े पैमाने पर तबादले करने का उसका उद्देश्य नहीं है। इसलिए चिकित्सा, शिक्षा और इंजीनियरिंग जैसे विभागों के ऐसे कर्मचारी, जिनका निर्वाचन कार्य से प्रत्यक्ष संबंध नहीं है, सामान्य तौर पर इस स्थानांतरण नीति के दायरे में नहीं आएंगे। राज्य मुख्यालय में तैनात अधिकारियों को भी निर्धारित स्थानांतरण नियमों से छूट दी गई है।

हालांकि, किसी ऐसे अधिकारी के विरुद्ध राजनीतिक पक्षपात या पूर्वाग्रह की शिकायत मिलती है और जांच में वह प्रमाणित हो जाती है तो मुख्य निर्वाचन अधिकारी या आयोग उसके स्थानांतरण के साथ विभागीय कार्रवाई के निर्देश भी दे सकता है।

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Summary Revision-SIR) में लगे अधिकारियों के स्थानांतरण को लेकर भी अलग व्यवस्था की गई है। ऐसे अधिकारियों के स्थानांतरण आदेश अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी से परामर्श करके ही जारी और लागू किए जाएंगे। असाधारण परिस्थितियों में इससे पहले स्थानांतरण करने के लिए आयोग की अनुमति आवश्यक होगी।

इसके अतिरिक्त, 31 मार्च 2027 तक सेवानिवृत्त होने वाले उत्तराखंड सहित चार राज्यों के अधिकारी सामान्य तीन वर्ष की स्थानांतरण कसौटी से मुक्त रहेंगे, लेकिन यदि वे निर्वाचन से जुड़े पद पर तैनात हैं तो उन्हें उस जिम्मेदारी से मुक्त करना होगा।

आपराधिक और अनुशासनिक मामलों वाले अधिकारियों को चुनाव ड्यूटी नहीं

आयोग ने चुनाव कार्य में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए कुछ अधिकारियों को निर्वाचन संबंधी जिम्मेदारियों से अलग रखने के निर्देश भी दिए हैं। जिन अधिकारियों के विरुद्ध पूर्व में आयोग ने अनुशासनिक कार्रवाई की संस्तुति की थी और वह लंबित है अथवा जिसके परिणामस्वरूप दंड दिया जा चुका है, उन्हें चुनाव कार्य में नहीं लगाया जाएगा। पिछले चुनावों में लापरवाही के लिए आरोपित अधिकारियों को भी निर्वाचन संबंधी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।

इसी तरह, जिन अधिकारियों के विरुद्ध उनके आधिकारिक कार्यों से संबंधित आपराधिक मामला किसी न्यायालय में लंबित है, उन्हें भी चुनाव कार्य से अलग रखा जाएगा। प्रतिनियुक्ति की अवधि बढ़ाकर अथवा पुनर्नियुक्ति के आधार पर कार्य कर रहे अधिकारियों को भी सामान्यतः निर्वाचन संबंधी जिम्मेदारियां नहीं दी जाएंगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय में तैनात अधिकारियों के लिए इसमें अपवाद रखा गया है।

30 नवंबर तक देनी होगी अनुपालन रिपोर्ट

निर्वाचन आयोग ने पांचों राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों को 30 नवंबर 2026 तक स्थानांतरण संबंधी निर्देशों के अनुपालन की रिपोर्ट सौंपने को कहा है। इस अवधि में संबंधित विभागों को पात्र अधिकारियों की पहचान कर आवश्यक स्थानांतरण और तैनाती की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। स्थानांतरण के बाद नए अधिकारियों की तैनाती मुख्य निर्वाचन अधिकारी से परामर्श के बाद की जाएगी। स्थानांतरित अधिकारियों को नए अधिकारी के आने की प्रतीक्षा किए बिना तत्काल कार्यभार सौंपने के निर्देश भी दिए गए हैं।

इस संबंध में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि कुछ समाचारों में अनुपालन रिपोर्ट की अंतिम तारीख 25 नवंबर बताई गई है, लेकिन 27 अक्टूबर के निर्वाचन आयोग के निर्देशों पर प्रकाशित रिपोर्टों में यह तारीख 30 नवंबर 2026 बताई गई है। इसलिए आयोग के निर्देश के आधार पर 30 नवंबर की समयसीमा को ही सही माना गया है।

उत्तराखंड विधानसभा का कार्यकाल मार्च 2027 में समाप्त होना है। ऐसे में चुनाव से पहले प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की तैनाती में होने वाले बदलाव को निर्वाचन की तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। अब निगाहें शासन की ओर से जारी होने वाले स्थानांतरण आदेशों और 30 नवंबर तक निर्वाचन आयोग को भेजी जाने वाली अनुपालन रिपोर्ट पर रहेंगी।

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