नवीन समाचार, देहरादून, 6 दिसंबर 2019। गलत सूचना देकर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए सल्ट (अल्मोड़ा) से भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह जीना वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत पर विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव ले आए। जीना के इस प्रस्ताव से सत्ता पक्ष असहज हो गया। विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने जीना को प्रस्ताव के परीक्षण का आश्वासन दिया है। विधानसभा की कार्यसूची के तहत विशेषाधिकार के मामले को 26वें नंबर पर रखा गया था। मगर, 25 के बाद सीधा 29वें नंबर के विषय पर चर्चा होती देख जीना सीट से उठे और विस अध्यक्ष से कहा कि उनका मामला तो लिया ही नहीं गया। जीना के विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव को संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने यह कहते हुए खारिज करने की कोशिश कि उन्होंने वन मंत्री को इसकी प्रति नहीं दी है। मगर, जीना बोले, यह उनका नहीं, बल्कि विधानसभा का काम है। इस पर विस अध्यक्ष ने जीना को प्रस्ताव रखने की अनुमति दे दी। जीना ने कहा कि उन्होंने पिछली बार भी जिम कार्बेट पार्क से सटे क्षेत्र और रामनगर-मर्चुरा मार्ग पर भी वन्यजीवों के आतंक का मुद्दा उठाया था। वहां हाथी 30 बार हमले कर चुका है। हाथी ने एक शिक्षक को भी मार डाला था। इस पर मंत्री की ओर जवाब मिला कि हाथियों को आबादी क्षेत्र में आने से रोकने के पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। नारियल की रस्सियां जलाकर लटकाई जाती हैं। ग्रामीणों को पटाखे-ढोल दिए गए हैं और गश्त हो रही है। जीना ने कहा कि असल में ऐसा हो ही नहीं रहा है। ऐसी घटनाओं में कई घंटे बाद अफसर मौके पर आते हैं। मंत्री की गलत सूचना से जनप्रतिनिधियों को भी जनता के बीच फजीहत उठानी पड़ती है। गलत सूचना देकर मंत्री ने सदन को गुमराह किया है। इसलिए उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का दोष बनता है।
मेरा प्रस्ताव जनता-राज्यहित से जुड़ा है। जंगली जानवरों ने स्थानीय लोगों का जीना दुश्वार कर दिया है। कुछ दिन पहले ही हाथियों ने पर्यटकों की गाड़ी तोड़ दी थी। सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। मगर, सरकार के स्तर से भी झूठी सूचनाएं दी जाएंगी तो फिर कैसे चलेगा?
सुरेंद्र सिंह जीना, विधायक
क्या है विशेषाधिकार
लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और विधान परिषद के किसी भी सदस्य पर सदन या बाहर गलत आरोप लगाना भी विशेषाधिकार हनन में आता है। सदस्य सदन के भीतर असत्य बोलता है या गलत दस्तावेज पेश करता है तो भी विशेषाधिकार हनन माना जाता है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, ऐसे मामलों में कोर्ट की तरह सुनवाई होती है। चेतावनी देकर छोड़ा जा सकता है या निलंबित भी किया जा सकता है।
‘डॉ.नवीन जोशी, वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले पत्रकार’ एवं मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 140 मिलियन यानी 1.40 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
मेरा प्रस्ताव जनता-राज्यहित