नवीन समाचार, नैनीताल, 22 मार्च 2026 (Jot Singh Bisht-Uttarakhand Parisiman)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के नैनीताल (Nainital) में आयोजित पत्रकार वार्ता में “अपनी गणना–अपना गांव” अभियान के मुख्य संयोजक जोत सिंह बिष्ट (Jot Singh Bisht) ने चेतावनी दी कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों के लोग अपने गांव में रहकर जनगणना में शामिल नहीं हुए, तो पर्वतीय क्षेत्रों का बजट और विधानसभा सीटें दोनों घट सकती हैं। उन्होंने लोगों से अपने गांव लौटकर जनगणना में भाग लेने की अपील की, ताकि क्षेत्रीय संतुलन और विकास प्रभावित न हो।
जनगणना और सीटों का संबंध क्यों है महत्वपूर्ण
जोत सिंह बिष्ट ने बताया कि राज्य गठन के बाद पहला परिसीमन 1971 की जनगणना के आधार पर हुआ था, जिसमें—
13 जिलों में 70 विधानसभा सीटें तय की गईं
9 पर्वतीय जिलों को 40 सीटें
4 मैदानी जिलों को 30 सीटें मिलीं
इसके बाद 2001 की जनगणना के आधार पर हुए दूसरे परिसीमन में बड़ा बदलाव हुआ—
पर्वतीय क्षेत्रों की सीटें 40 से घटकर 34 हो गईं
मैदानी क्षेत्रों की सीटें भी 34 से घटकर 24 रह गईं
यह स्पष्ट करता है कि जनसंख्या के आधार पर राजनीतिक प्रतिनिधित्व तय होता है।
घटती जनसंख्या से क्या खतरा
बिष्ट के अनुसार 2011 की जनगणना में—
टिहरी (Tehri) की जनसंख्या में लगभग 5 प्रतिशत कमी
पौड़ी (Pauri) में करीब 10 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई
साथ ही—
पर्वतीय क्षेत्रों में जनसंख्या लगभग 4 प्रतिशत घट रही है
मैदानी क्षेत्रों में 18 प्रतिशत तक वृद्धि हो रही है
क्या यह असंतुलन भविष्य में पहाड़ों की राजनीतिक ताकत को कमजोर कर सकता है? यही चिंता इस अभियान का आधार है।
“अपनी गणना–अपना गांव” अभियान का उद्देश्य
अभियान के तहत लोगों से अपील की गई है कि—
जो लोग शहरों में रह रहे हैं, वे जनगणना के दौरान अपने गांव लौटें
अपने परिवार सहित गांव में ही अपनी गणना कराएं
इसके लिए किसी दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होगी, मौखिक जानकारी भी पर्याप्त होगी
बिष्ट ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान लगभग 8 लाख लोग गांव लौटे और वहां नवाचार कार्य किए। यदि यही प्रवृत्ति जनगणना में भी दिखे, तो ग्रामीण क्षेत्रों को मजबूती मिलेगी।
बजट और योजनाओं पर क्या असर पड़ेगा
यदि ग्रामीण क्षेत्रों की जनसंख्या लगातार घटती रही तो—
सरकारी बजट में ग्रामीण क्षेत्रों की हिस्सेदारी कम हो सकती है
आशा (ASHA) और आंगनबाड़ी (Anganwadi) जैसी योजनाओं का लाभ सीमित हो सकता है
विकास कार्यों की प्राथमिकता भी प्रभावित हो सकती है
राज्य में जनगणना के लिए लगभग 30 हजार वार्ड बनाए गए हैं, जिनमें प्रत्येक वार्ड की औसत जनसंख्या 800 निर्धारित की गई है।
आगे की योजना और जागरूकता अभियान
जोत सिंह बिष्ट ने कहा कि इस विषय पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) से भी वार्ता की जाएगी। साथ ही—
कथा वाचकों
गीतकारों
मंच कलाकारों
के माध्यम से लोगों को जनगणना के लिए जागरूक करने की योजना बनाई जा रही है।
पत्रकार वार्ता में पूर्व सैनिक सोहन लाल खंडूरी (Sohan Lal Khanduri) और धना बिष्ट (Dhana Bisht) भी उपस्थित रहे।
क्यों जरूरी है यह पहल
यह केवल जनगणना का विषय नहीं, बल्कि—
क्षेत्रीय संतुलन
राजनीतिक प्रतिनिधित्व
और ग्रामीण विकास
से जुड़ा प्रश्न है। यदि लोग अपने गांवों में दर्ज नहीं होंगे, तो क्या पहाड़ों की आवाज कमजोर हो जाएगी? यह प्रश्न अब समाज के सामने है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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