बड़ा समाचार : राज्य सरकार से अपेक्षित मान्यता के बिना नहीं होगा किसी मदरसे का संचालन

-याची के अवैध मदरसे की सील खोलने का दिया उच्च न्यायालय ने सरकार को आदेश, इसी मामले में आया उच्च न्यायालय का आदेश
नवीन समाचार, नैनीताल, 2 अप्रैल 2025 (No Madrasa will be Operate without Recognition)। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने देहरादून के विकासनगर स्थित इनामुल उलूम सोसायटी को अंतरिम राहत देते हुए राज्य सरकार को सोसायटी संचालित भवन की सील खोलने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट कहा है कि याचिकाकर्ता को यह वचन देना होगा कि वह राज्य सरकार से अपेक्षित मान्यता के बिना किसी मदरसे का संचालन नहीं करेगा।
जुबेर अहमद की याचिका पर हुई सुनवाई
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह निर्णय न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की एकलपीठ में सुनवाई के दौरान आया। सोसायटी के अध्यक्ष जुबेर अहमद की याचिका में कहा गया था कि उनका संगठन एक मदरसा संचालित करता है, जिसे सरकार ने गैरकानूनी तरीके से सील कर दिया है। याचिकाकर्ता ने मांग की कि सोसायटी के परिसर की सील को हमेशा के लिए खोलने के लिए सरकार को निर्देश दिए जाएं।
राज्य सरकार ने प्रस्तुत किया पक्ष
बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर ने राज्य सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए कहा कि याचिकाकर्ता मदरसा चला रहा है और इस संबंध में तय नियमों का उल्लंघन कर रहा है। उन्होंने कहा कि मदरसे को आवश्यक मान्यता प्राप्त नहीं थी, जिसके कारण इसे सील किया गया था।
बिना सुनवाई के संपत्ति सील नहीं की जा सकती
वहीं याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद-226 के तहत राहत की मांग करते हुए तर्क दिया कि यदि सोसायटी अपने उद्देश्यों से इतर कोई कार्य कर रही थी, तब भी उसे सुनवाई का अवसर दिए बिना संपत्ति को सील नहीं किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि बिना कारण बताओ नोटिस दिए इस प्रकार की कार्रवाई करना गैरकानूनी है।
न्यायालय ने सुनवाई के बाद दिया आदेश
न्यायालय ने मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता की ओर से यह वचन देने पर कि वह बिना सरकारी मान्यता के मदरसा संचालित नहीं करेगा, भवन की सील खोली जा सकती है। साथ ही न्यायालय ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 जून की तिथि निर्धारित की है।
सरकार ने जताई पुनरावृत्ति की आशंका
महाधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि यदि संपत्ति को सील नहीं किया जाता है, तो याचिकाकर्ता पुनः इसी प्रकार की गतिविधियों में संलग्न हो सकता है। इस पर याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि वह यह वचन देने को तैयार हैं कि बिना सरकारी अनुमति के कोई मदरसा संचालित नहीं किया जाएगा।
आदेश का संभावित प्रभाव (No Madrasa will be Operate without Recognition)
न्यायालय के इस निर्णय को दूरगामी और सरकार के पक्ष में माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदेश भविष्य में बिना मान्यता संचालित मदरसों के विरुद्ध सरकार को कड़े कदम उठाने का आधार प्रदान कर सकता है। साथ ही, इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि किसी भी संपत्ति को सील करने से पहले उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना आवश्यक है।
इस आदेश के बाद सरकार के समक्ष यह सुनिश्चित करने की चुनौती होगी कि बिना मान्यता के कोई भी शैक्षणिक या धार्मिक संस्थान संचालित न हो। वहीं याचिकाकर्ता को भी अपने संचालन के लिए सरकार से आवश्यक स्वीकृति प्राप्त करनी होगी। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 11 जून को होने वाली अगली सुनवाई में न्यायालय इस मामले में क्या अंतिम निर्णय देता है। (No Madrasa will be Operate without Recognition)
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