हरिद्वार में गैरसैंण के लिए निकले देहरादून के पुलिस आरक्षी का शव अर्धनग्नावस्था में बरामद, सनसनी…

(Young Man Expressed Intention to Commit Suicide (1 Murder-2 investigating officers-Contradictory

नवीन समाचार, हरिद्वार, 25 अगस्त 2024 (Police constable found Dead in Semi Nude state)। देहरादून में तैनात एक पुलिस आरक्षी का अर्धनग्न अवस्था में शव मिला है। इससे क्षेत्र में सनसनी फैल गई है। पुलिस मामले की जांच में जुट गयी है। मृतक का पोस्टमॉर्टम कराया जा रहा है, जिसके बाद मृत्यु के कारणों का … Read more

राज्य के 15 पर्वतीय नगरों की भार वहन क्षमता का आंकलन करायेगी राज्य सरकार…

Baliyanala

Uttarakhand Government will assess15 Cities LCC

सोनिया-राहुल जायें न जायें, उत्तराखंड कांग्रेस के (Harish Rawat) 1 नेता जरूर जायेंगे अयोध्या के दर्शन करने, कहा-मुसलमान भी राम को अपना पूर्वज मानते हैं…

(Politics-Harish Rawat came in Support of Brahmin (Harish Rawat Sting Case-CBI notices to 3 Leaders) Harish Rawat

Harish Rawat

 जितने सवाल-उतने जवाब थे अपने फक्कड़दा-गिर्दा

Girda, Girish Tiwari ‘Girda’,

प्रभारी मंत्री बंशीधर से अस्पताल संचालक ने लड़ाई जुबान, कहा, वह अपराधी नहीं जो खड़े कर किया जा रहा है जवाब तलब….

नवीन समाचार, नैनीताल, 18 मई 2021। राज्य के पीपीडी मोड में चल रहे रामनगर के संयुक्त चिकित्सालय में दल-बल के साथ छापा मारने पहुंचे जनपद के कोविड प्रभारी मंत्री बंशीधर भगत को मंगलवार को चिकित्सालय के संचालक डॉ. दीपक गोयल जुबान लड़ाते हुए अड़ गए। इससे माहौल गरमा गया। संचालक ने यहां तक कह दिया, … Read more

स्कूली बच्चों को मुफ्त जूते व बैग, किसानों के लिए 450 करोड़ सहित बहुत कुछ है उत्तराखंड के बजट में…

नवीन समाचार, गैरसैंण, 4 मार्च 2021। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गुरुवार को विधानसभा में वर्ष 2021-22 के लिए 57400.32 करोड़ का कर मुक्त और राजस्व सरप्लस बजट पेश किया। सरकार ने विकास कार्यों, खासतौर पर सड़कों व पुलों के निर्माण और रखरखाव को बजट पोटली खोल दी है। लोक निर्माण कार्यों के लिए 2369 करोड़ बजट रखा गया है। कक्षा एक से आठवीं तक सभी विद्यार्थियों को मुफ्त जूते और स्कूल बैक देने की घोषणा की गई है। इसके अलावा माध्यमिक शिक्षा में संसाधन जुटाने और शैक्षिक सुधार के लिए एडीबी के माध्यम से 39.70 करोड़ खर्च होंगे।
गुरुवार शाम चार बजे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बतौर वित्त मंत्री दूसरा बजट पेश किया। प्रदेश की भाजपा सरकार का यह पांचवां बजट है। बजट में किसानों पर विशेष फोकस करते हुए 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने का संकल्प दोहराया गया है। इसके लिए परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत 87.56 करोड़ रुपये रखे गए हैं। साथ में गन्ना मूल्य के भुगतान के लिए भी 245 करोड़ की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री राज्य कृषि विकास योजना में 20 करोड़ और एकीकृत आदर्श कृषि ग्राम योजना में 12 करोड़ का प्रविधान है। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना के लिए बजट में 25 करोड़ दिए गए हैं। वहीं दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना के लिए 47 करोड़ दिए गए हैं। उधर, शहरी क्षेत्र में हर घर में पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। जल जीवन मिशन के तहत शहरी क्षेत्रों में प्रत्येक घर को पानी की आपूर्ति सुनिश्चित होगी। इसके लिए 30.15 करोड़ की व्यवस्था की गई है। नलकूपों, नहरों, झीलों व बांधों के रखरखाव को 118 करोड़ रुपये, नलकूपों व नहरों के निर्माण को 150 करोड़ रखे गए हैं।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 5 जुलाई 2019। मोदी सरकार-2 का पहला बजट आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में पेश कर रही हैं। वित्तमंत्री पहली बार ब्रीफकेस की बजाए लाल रंग के कपड़े में बजट दस्तावेज लेकर पहुंची जिसे बजट नहीं बल्कि बही खाता बताया गया है। अपने बजट में आने वाले दशक का लक्ष्य देश के सामने रखते हुए सीतारमण ने कहा कि वर्तमान में भारत की अर्थ व्यवस्था विश्व की छठी सबसे बड़ी अर्थ व्यवस्था है।

अपने बजट भाषण के दौरान एक शेर भी पढ़ा। निर्मला ने कहा, ‘यक़ीन हो तो कोई रास्ता निकलता है, हवा की ओट भी ले कर चराग़ जलता है’। ये शेर मशहूर शायर मंजूर हाशमी का है। उन्होंने कहा कि अगले कुछ वर्षों में हमारी अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगी। भारतीय अर्थ व्यवस्था को एक टि्रलियन लर तक बढ़ने में 55 साल लगे, पिछले पांच साल में हमने अर्थव्यवस्था में एक टि्रलियन डालर जोड़ा हैपांच साल में यह 2।7 टि्रलियन डालर पर पहुंच गईइस साल के अंत तक अर्थ व्यवस्था तीन खरब डालर होगी। सीतारमण ने कहा कि भारत आज रोजगार देने वाला देश बना है। हमारा जोर अब इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने पर है। भारतमाला के जरिए हम देश में सड़क हर गांव तक पहुंचा रहे हैं और नेशनल हाइवे का निर्माण कर रहे हैं। इस दौरान वित्त मंत्री ने अपनी कई योजनाओं का जिक्र किया, जिसमें मुद्रा योजना, सागरमाला, मेक इन इंडिया आदि शामिल रहे।

सरकार का केंद्र बिंदु गांव, किसान👷 और गरीब- सीतारमण🤷‍♂️

मोदी सरकार-2 का पहला बजट पेश कर रहीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि हमारी सरकार का केंद्र बिंदु गांव, किसान और गरीब है. हमारा लक्ष्य है कि 2022 तक हर गांव में बिजली पहुंचेगी। उज्ज्वला योजना और सौभाग्य योजना के जरिए देश में काफी बदलाव आया है.

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार न्यू इंडिया पर फोकस कर रही है. पानी और गैस के लिए भी एक राष्ट्रीय ग्रिड बनेगा. सरकार की तरफ से नेशनल ट्रांसपोर्ट कार्ड का ऐलान किया गया है. जिसका इस्तेमाल रेलवे और बसों में किया जाएगा.

वित्त मंत्री ने कहा कि नेशनल ट्रांसपोर्ट कार्ड को रूपे कार्ड की मदद से चलाया जा सकेगा, जिसमें बस का टिकट, पार्किंग का खर्चा, रेल का टिकट सभी एक साथ किया जा सकेगा. इसके साथ ही सरकार ने एमआरओ का फॉर्मूला अपनाने की बात कही है. जिसमें मैन्यूफैक्चरिंग, रिपेयर और ऑपरेट का फॉर्मूला लागू किया जाएगा.

ये है प्रमुख बिन्दु-

🔹 2022 तक 1.95 करोड़ घर बनाएं जाएंगे। 114 दिनों में घर बनाकर दे रहे हैं। पहले 314 दिनों में बनते थे।

🔹 उज्जवला के जरिए सात करोड़ गैस कनेक्शन दिए गए।

🔹 20 प्रोद्योगिकी बिजनेस इंक्यूबेटर स्थापित किए जाएंगे, जिसके जरिए 20 हजार लोगों को स्किल दिया जाएगा।

🔹 देशभर में 10 हजार उत्पादक संघ बनाए जाएंगे।

🔹 जल शक्ति मंत्रालय जल संसाधनों का प्रबंधन करेगा। गांव में हर घर तक पानी पहुंचाया जाएगा।

🔹 रोजना 135 किमी सड़क बनाने का लक्ष्य है। अभी तक 30 हजार किमी सड़क बनाई गई हैं।

🔹 विमानन क्षेत्र, मीडिया, एनीमेशन AVGC और बीमा क्षेत्रों में एफडीआई खोलने के लिए सुझाव आमंत्रित करेगी।

🔹 इसरो की मदद और अभियानों को आगे बढ़ाने के लिए न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड का गठन किया जाएगा।

🔹 हर पंचायत को इंटरनेट से जोड़ेंगे। दो करोड़ से ज्यादा लोगों को डिजिटल साक्षर बनाया।

🔹 अक्टूबर 2019 तक देश खुले में शौच से मुक्त हो जाएगा।

🔹 पीएम आवासा योजना के तहत शहरों में 81 लाख घर बनाए जाएंगे।

4 साल में गंगा नदी पर कार्गो की आवाजाही शुरू होगी।

इलेक्ट्रॉनिक वाहनों को प्रोत्साहन देना है।

रेलवे ढांचे के विकास के लिए 50 हजार करोड़ की आवश्यकता है।

रेलवे के विकास के लिए पीपीपी मॉडल से निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा।

बजट 2018-19 के लिए 300 किमी. मैट्रो रेलवे को मंजूरी।

बिजली आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए बजट में वन नेशन, वन ग्रिड प्लान का एलान किया गया है। बिजली टैरिफ में बड़े सुधार की योजना।

आदर्श किराया कानून बनाया जाएगा।

एमएसएमई के लिए 350 करोड़ का आवंटन तथा ऑनलाइन पोर्टल बनाया जाएगा। छोटे उद्यमियों की कर्जमाफी के लिए 350 करोड़ का प्रावधान।

खूदरा कारोबारियों के लिए पेंशन पर भी विचार । 3 करोड़ दुकानदारों के लिए पेंशन देने का विचार।

शेयर बाजार को निवेशक फ्रेंडली बनाया जाएगा।

देश के पहले महिला वित्त मंत्री द्वारा पेश किए जा रहे ‘बही खाते’ (बज़ट नहीं) से उत्तराखंड को यह हैं उम्मीदें…

नवीन समाचार, नैनीताल, 5 जुलाई 2019। मोदी-2.0 में देश की पहली महिला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट नहीं ‘देेेश के बही खाते से मातृसत्तात्मक बहुल समाज वाले उत्तराखंड को कुछ खास मिलने की आस है। वे शुक्रवार को बजट पेश करेंगी। हर साल की तरह से इस बार भी प्रदेश सरकार केंद्र के समक्ष अपनी प्राथमिकता रख चुकी है।

त्रिवेंद्र सरकार चाहती है कि मोदी सरकार के बजट में हरिद्वार महाकुंभ, राष्ट्रीय खेल और रेल परियोजनाओं के लिए उदार इमदाद का प्रावधान हो। वैसे, महिला वित्त मंत्री पर प्रदेश की इस वजह से भी नजर रहेगी कि उत्तराखंड महिला प्रधान प्रदेश है। खासतौर पर पहाड़ में महिलाओं को आर्थिकी की मुख्य धुरी माना जाता है, लेकिन उद्यमिता और रोजगार के अवसर यहां बहुत सीमित हैं। क्या बजट में ऐसी घोषणाएं होंगी जो उनके कार्य बोझ को कम करेगा और उनके जीवन स्तर में सुधार लाने में मददगार साबित होगा। जहां तक उत्तराखंड सरकार का सवाल है तो उसने हिमालयी राज्य होने के नाते केंद्र से उदार वित्तीय सहायता का अनुरोध किया है। केंद्रीय बजट में प्रदेश सरकार कुछ ऐसा चाह रही है। साथ में प्रदेश में रेल के विकास, खासकर टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन को धन आवंटन होने की भी उम्मीद की जा रही है।

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Uttarakhand Vidhan Sabhaनवीन समाचार, देहरादून, 20 फरवरी 2019। वित्त मंत्री प्रकाश पंत द्वारा सोमवार को विधानसभा में रखे बजट से राज्य की कमजोर आर्थिक स्थिति की झलक सामने आई है। राज्य में कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और पेंशनर्स के लिए इस साल बजट में सरकार ने 20 हजार 455 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। 48 हजार 663 करोड़ के कुल बजट में वेतन-भत्तों और पेंशन आदि के लिए रखी गयी यह राशि कुल बजट के चालीस प्रतिशत के करीब है।  बजट में कर्मचारियों की वेतन-पेंशन पर गतवर्ष के मुकाबले 1338 करोड़ रुपये अधिक खर्च होने का अनुमान है। गत वर्ष वेतन-पेंशन मद में कुल 19 हजार 117 करोड़ रखे थे। इस साल सातवें वेतन के भत्तों की वजह से सरकार पर भार बढ़ गया है। राज्य कर्मचारियों के वेतन-भत्तों पर इस वर्ष 13340 करोड़, सहायता प्राप्त शिक्षण व अन्य संस्थानों के शिक्षकों-कर्मियों के वेतन-भत्तों पर 1173 रुपये और पेंशन एवं अन्य सेवानिवृत्तिक लाभों के लिए 5942 करोड़ रखे गए हैं।

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p style=”text-align: justify;”>लोन चुकाने पर खर्च होगी 17 प्रतिशत राशि 
बजट में लोन और ब्याज की अदायगी पर भी 8208 करोड़ रुपये की भारी राशि खर्च हो रही है। यह राशि कुल बजट का तकरीबन 17 प्रतिशत है। पिछले साल के बजट में ब्याज और लोन की राशि चुकाने के लिए 8088 करोड़ रखे गए थे। ऋणों की वापसी पर इस साल 2876 करोड़ जबकि ब्याज की अदायगी पर 5332 करोड़ खर्च होंगे।

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p style=”text-align: justify;”>विकास कार्यों को महज 9731 करोड़ 
राज्य के बजट का आकार भले ही 48 हजार करोड़ से अधिक हो। लेकिन इस बजट में से नई योजनाओं के लिए महज 9731 करोड़ की ही राशि है। 48633 करोड़ के बजट में से 38932 करोड़ राजस्व मद यानी सरकार की जिम्मेदारियों पर खर्च होंगी। जबकि पूंजी मद में सिर्फ 9731 करोड़ की ही यानी कारीब 20 % राशि का ही प्राविधान किया गया है।

यह भी पढ़ें : त्रिवेंद्र सरकार ने पेश किया पहला सरप्लस व कर मुक्त बजट, पिछले साल के मुकाबले 7% बड़ा बजट, 12 विभागों का बजट घटा

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p style=”text-align: justify;”>नवीन समाचार, देहरादून, 18 फरवरी 2019। प्रदेश के वित्तमंत्री प्रकाश पंत ने वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए त्रिवेंद्र सरकार का पहला 22.79 करोड़ का राजस्व व कर मुक्त सरप्लस, पिछले साल के मुकाबले 7 फ़ीसदी बड़ा बजट 48663.90 करोड़ का बजट पेश किया। इस कर मुक्त बजट में 9798.15 करोड़ के राजकोषीय घाटे का अनुमान है। 12 विभागों का बजट घटा है। बजट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एजेंडे, भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस और सुशासन तथा में खेती-किसानी के साथ स्वरोजगार को बढ़ावा देने पर पर जोर दिया गया है। बजट में अन्न दाता के कल्याण का भरोसा दिलाया गया है। बजट पेश करने के दौरान तब अजीब स्थिति भी उत्पन्न हो गयी जब वित्त मंत्री प्रकाश पंत तबीयत खराब होने से भाषण पढ़ते हुए बेहोश हो गए। इस पर उन्हें सदन से बाहर ले जाना पडा।
इस साल पिछले साल के मुकाबले 7 फ़ीसदी बड़ा बजट, 12 विभागों का बजट घटाइससे पूर्व सोमवार को विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते हुए सदन में सबसे पहले पुलवामा हमले शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। विधायक करन महरा ने मेजर चित्रेश बिष्ट और मेजर विभूति ढौंडियाल को श्रद्धांजलि देने के बाद सदन स्थगित करने की मांग की। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल व उप नेता सहित अनेकों विधायकों की आंखें नम नजर आईं। आगे 12 बजे के बाद सदन की कार्यवाही शुरू होने पर विपक्ष की बिना कारण गैर मौजूदगी में तीन संशोधन विधेयक पेश हुए और राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव भी पारित हुआ।

बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि सरकार का जोर किसान और प्राइमरी सेक्टर पर है, ताकि किसान के साथ युवाओं को रोजगार के मौके मिल सके। बजट में राजस्व घाटा नहीं है, बजट सर प्लस है, और राजकोषीय घाटा भी सीमा के अंदर है। सैनिक-अर्धसैनिक मृतक आश्रितों के लिए सेवा योजन का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि हमारा संकल्प ‘सबका साथ सबका विकास’ है। सबसे ज़्यादा शिक्षा विभाग का बजट है. इसके साथ ही स्वास्थ, कृषि विभाग पर फ़ोकस किया गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि इस वित्त वर्ष के लिए बजट करीब 23 करोड़ सरप्लस है। कुल आय  जहां 48,679 करोड़ अनुमानित है तो व्यय 48,663 करोड़ अनुमानित है. वित्त वर्ष में राज्य कर्मचारियों के वेतन भत्तों के लिए 14,513 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान है. पेंशन और अन्य खर्चों के लिए 5,942 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। ब्याज के लिए 5,332 करोड़ और लोन पेमेंट के लिए 2,876 करोड़ का खर्च अनुमानित है। 12 विभागों के बजट में पिछले साल के मुकाबले कटौती की गई है. सबसे ज्यादा लोनिवि का बजट 159 करोड़ रुपये कम हुआ है।वहीं खाद्य विभाग का बजट 23 करोड़ रुपये और उद्योग विभाग का बजट पिछले साल से 20 करोड़ रुपये कम हुआ है। स्वच्छ भारत मिशन के लिए बजट में 202 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया हैै। लेकिन अनुसूचित जातियों के कल्याण का बजट 55 करोड़ रुपये कम हुआ है. ग्राम्य विकास का बजट भी पिछले साल से 7 करोड़ रुपये कम हुआ है। कैबिनेट का बजट भी पिछले साल से 32 करोड़ रुपये कम हुआ है। जबकि राजस्व और सामान्य प्रशासन का बजट 150 करोड़ रुपये और सूचना विभाग का बजट पिछले साल से 15 करोड़ रुपये कम हुआ है।

यह भी पढ़ें: जानें क्या है केंद्रीय बजट पर पर्यटन प्रदेश के पर्यटन व्यवसायियों की प्रतिक्रिया

नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 1 फरवरी 2019। शुक्रवार को आये केंद्र सरकार के बजट पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। बजट में कर छूट की सीमा ढाई लाख से बढ़ाकर सीधे दोगुनी करते हुए पांच लाख की गयी है। वहीं जीएसटी में पंजीकृत उद्योगों के लिए 59 मिनट में एक करोड रुपये के ऋण मात्र दो फीसद ब्याज पर देने की घोषणा हुई है। उधर उत्तराखंड की समान प्रकृति के पूर्वोत्तर के राज्यों के लिए वर्ष 2018-19 के मुकाबले वर्ष 2019-20 के लिए आवंटन को 21 फीसद बढ़ाकर 58,166 करोड़ किया गया है, किंतु पूरी बजट की रिपोर्ट मंे पांच सांसद देने वाले उत्तराखंड राज्य का कहीं जिक्र भी नहीं किया गया है।
लिहाजा इन स्थितियों पर मुख्यालय के खासक पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आनी लाजिमी हैं। नगर के शेरवानी होटल के प्रबंधक कमलेश सिंह का कहना है, निम्न मध्य वर्ग के लिए अच्छा है। इससे लोगों की बचत होगी, और बचत होगी तो पर्यटन में भी बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है। लिहाजा बजट कर्मचारियों के लिए बहुत अच्छी खबर लेकर आया है। वहीं उत्तर भारत के होटल एवं रेस्टोरेंट एसोसिएशन के पदाधिकारी प्रवीण शर्मा का कहना है कि पर्यटन उद्योग केंद्रीय बजट से खासा निराश है। बजट में आवभगत से जुड़े पर्यटन उद्योग को छुवा भी नहीं गया है। प्रति रात्रि 7000 से अधिक किराये के कमरों पर 28 फीसद जीएसटी का प्राविधान है। इसके हटने की उम्मीद थी। लेकिन इसे कम नहीं किया गया है। बजट में निवेश बढ़ाने के लिए भी कुछ नहीं है। इन्हीं कारणों से पर्यटन गिरता जा रहा है। उन्होंने कहा कि बजट से उत्तराखंड जैसे राज्यों को काफी नुकसान होने जा रहा है। इसी तरह की प्रतिक्रिया नैनीताल होटल एवं रेस्टोरेंट एसोसिएशन के प्रतिनिधि दिग्विजय बिष्ट की भी आई है। उनका कहना है कि बजट में पर्यटन, पहाड़ एवं उत्तराखंड के लिए कुछ भी नहीं है, जबकि इन क्षेत्रों में कर छूट मिलनी चाहिए थी। हालांकि हाल ही में जीएसटी में पंजीकरण के लिए 10 लाख रुपये तक के कारोबार की सीमा बढ़ाकर पूर्व में ही देश के अन्य राज्यों के बराबर 20 लाख की जा चुकी है। साथ ही उन्होंने कहा कि 5 लाख से अधिक आय वालों के लिए कर छूट पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसके अलावा उन्होंने जोर देकर कहा कि हिमालयी राज्यों व पर्यटन के लिए अलग से नीति बननी चाहिए थी व खास तौर इस क्षेत्र में नये कर छूट के प्राविधान होने चाहिए थे। आगे रेलवे बजट से नयी रेलों, हवाई सेवाओं व हाई-वे तथा सड़कों आदि के लिए बजट प्राविधानों की उम्मीद है।

यह भी पढ़ें : गांव किसान करदाता सबके लिए छप्पर फाड़ बजट, 5 साल की कसर पूरी

नवीन समाचार नई दिल्ली 1 फरवरी 2019। मोदी सरकार ने आज अपने कार्यकाल का आखिरी बजट पेश किया। इसे चुनावी बजट भी कहा जा रहा है। केंद्र सरकार ने इस बजट में गांव, गरीब, किसानों, मजदूरों के लिए कई बड़े ऐलान किए। इसमें लंबे समय से प्रतिक्षित आयकर में छूट का ऐलान किया। इस बजट में लगभग हर तबके को कुछ न कुछ देने का ऐलान किया है।

पूरा बजट देखें इस लिंक पर →hbs

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p style=”text-align: justify;”>5 लाख तक इनकम टैक्स में छूट
पीयूष गोयल ने कहा, ‘पांच लाख रुपये तक की व्यक्तिगत आय पूरी तरह से कर मुक्त होगी और विभिन्न निवेश उपायों के साथ 6.50 लाख रुपये तक की व्यक्तिगत आय पर कोई कर नहीं देना होगा। व्यक्तिगत कर छूट का दायरा बढ़ने से तीन करोड़ करदाताओं को 18,500 करोड़ रुपये तक का कर लाभ मिलेगा। वेतनभोगी तबके के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन को 40,000 से बढ़ाकर 50,000 रुपये किया गया।’ इस घोषणा के बाद संसद में काफी देर तक मोदी-मोदी के नारे गूंजते रहे। गोयल ने कहा, ‘हम कर दाताओं का शुक्रिया अदा करते हैं। आपके टैक्स से ही देश का विकास होता है।’

बजट से जुड़ी प्रमुख बातें:

  1. सरकार ने इनकम टैक्‍स स्‍लैब में बड़े बदलाव का ऐलान करते हुए 5 लाख तक की इनकम पर टैक्‍स छूट का प्रस्‍ताव रखा, जिसकी सीमा अब तक 2.5 लाख रुपये थी। इससे 3 करोड़ मध्‍यम वर्ग के परिवारों को फायदा मिलेगा।
  2. सरकार ने स्‍टैंडर्ड डिडक्‍शन को भी 40 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपये करने की बात कही। वहीं, सरकार ने बैंकों में एफडी के ब्‍याज पर 40 हजार तक कोई टैक्‍स नहीं लगने की घोषणा की, जिसकी सीमा अब तक 10 हजार रुपये थी।
  3. वित्‍त मंत्री ने छोटे-सीमांत किसानों के लिए बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि 2 हेक्‍टेयर वाले किसानों के खाते में सालाना सीधे 6 हजार रुपये जाएंगे। यह योजना 1 दिसंबर, 2018 से लागू होगी। सरकार की इस योजना से करीब 12 करोड़ किसानों को फायदा होगा।
  4. गायों के लिए सरकार कामधेनु योजना शुरू करेगी। मछली पालन के लिए भी आयोग बनेगा। पशुपालन और मत्‍स्‍यपालन के लिए लिए जाने वाले कर्ज में 2 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।
  5. सरकार ने कामकाजी लोगों के लिए अहम घोषणा करते हुए कहा कि वेतन आयोग की सिफारिशें जल्‍द लागू की जाएंगी। सरकारी कर्मचारियों के लिए नई पेंशन योजना आसान बनाई जाएगी।
  6. सरकार ने 21 हजार मासिक से कम वेतन पर काम करने वाले कामगारों को 7 हजार रुपये का बोनस देने की बात कही है। साथ ही ग्रेच्‍युटी की सीमा बढ़ाकर 20 लाख किए जाने का ऐलान किया गया।
  7. प्रधानमंत्री श्रम योगी मान धन योजना को मंजूरी प्रदान कर दी गई है, जिसका लाभ 15 हजार कमाने वाले कर्मचारियों को मिलेगा। कामगार की आकस्मिक मृत्‍यु की स्थिति में 6 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की गई है। सरकार ने
  8. अहम घोषणा करते हुए कहा कि जिनका ईपीएफ कटता है, उन्‍हें 6 लाख रुपये का बीमा प्रदान किया जाएगा।
  9. महिलाओं को ध्‍यान में रखते हुए सरकार ने अहम घोषणा करते हुए कहा कि सरकार 6 करोड़ महिलाओं को उज्‍जवला योजना के तहत एलपीजी कनेक्‍शन दे चुकी है। इस योजना के तहत महिलाओं को 8 करोड़ और एलपीजी कनेक्‍शन दिए जाएंगे।
  10. बजट पेश करते हुए वित्‍त मंत्री ने कहा कि देशभर में लोगों को उम्‍दा स्‍वास्‍थ्‍य सेवा मुहैया कराने के लिए दिल्‍ली के एम्‍स की तर्ज पर एम्‍स बनाए जा रहे हैं। इसी के तहत हरियाणा में देश का 22वां एम्स शुरू होने जा रहा 2 वर्षों के भीतर, कर निर्धारण इलेक्ट्रॉनिक रूप से किया जाएगा
  11. 2. आईटी सिर्फ 24 घंटे में प्रोसेसिंग कर देता है
  12. 3. केंद्रीय सरकार द्वारा राज्यों को जीएसटी का न्यूनतम 14% राजस्व।
    4. 36 कैपिटल गुड्स से कस्टम ड्यूटी खत्म कर दी गई है
    5. घर खरीदारों के लिए जीएसटी दरों को कम करने के लिए जीएसटी परिषद की सिफारिशें
    6. “सभी कटौती के बाद 5 लाख वार्षिक आय तक पूर्ण कर छूट।”
    7. स्टैंडर्ड डिडक्शन 40000 से बढ़कर 50000 हो गया है
    8. दूसरे स्व-कब्जे वाले घर पर कर की छूट
    9. टीडीएस यू / एस 194 ए की सीलिंग सीमा 10000 से 40000 हो गई है
    10. TDS u / s 194I की सीलिंग सीमा 180000 से बढ़कर 240000 हो गई है
    11. कैपिटल टैक्स बेनेफिट यू / एस 54 एक आवासीय घर में निवेश से बढ़कर दो आवासीय घरों तक पहुंच गया है।
    12. बेनिफिट यू / एस 80IB एक और वर्ष यानी 2020 तक बढ़ गया है
    13. अनसोल्ड इन्वेंट्री को दिया गया लाभ एक साल से दो साल तक बढ़ गया है।
    *अन्य क्षेत्र*
    14. राज्य का हिस्सा बढ़कर 42% हो गया है
    15. पीसीए प्रतिबंध 3 प्रमुख बैंकों से समाप्त कर दिया गया है
    16. 10% आरक्षण के लिए 2 लाख सीटें बढ़ेंगी
    17. मनरेगा के लिए 60000 करोड़
    18. सभी के लिए भोजन सुनिश्चित करने के लिए 1.7 लाख करोड़
    19. हरियाणा में 22 वां एम्स खोला जाना है
    20. पीएम किसान योजना को मंजूरी दी जानी है
    21. रुपये। 2 हेक्टेयर भूमि तक प्रत्येक किसान को 6000 प्रतिवर्ष दिया जाना है। सितंबर 2018 से लागू। राशि 3 किश्तों में स्थानांतरित की जाएगी
    22. गायों के लिए राष्ट्रीय कामधेनु अयोग। रुपये। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के लिए 750 करोड़
    23. पशुपालन करने वाले किसानों के लिए 2% ब्याज उपशमन और मत्स्य पालन के लिए अलग विभाग भी बनाना।
    २४. प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों के लिए २% ब्याज और समय पर भुगतान के लिए अतिरिक्त ३% ब्याज सबवेंशन।
    25. कर मुक्त ग्रेच्युटी सीमा 10 लाख से 20 लाख तक बढ़ जाती है
    26. 21000 मासिक कमाने वाले श्रमिकों के लिए बोनस लागू होगा
    27. प्रधान मंत्री श्रम योगी मन्धन नामक योजना, रु। की अनुमानित मासिक पेंशन प्रदान करेगी। 3,000 रुपये के योगदान के साथ। 60 वर्ष की आयु के बाद असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए 100 प्रति माह।
    28. हमारी सरकार ने उज्जवला योजना के तहत 6 करोड़ मुफ्त एलपीजी कनेक्शन वितरित किए
    29. MSME GST पंजीकृत व्यक्ति के लिए 2% ब्याज राहत
    30. महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए 26 सप्ताह का मातृत्व अवकाश
    31. रक्षा के लिए 3 लाख से अधिक करोड़
    32. अगले 5 वर्षों में एक लाख डिजिटल गांव
    33. भारत फिल्म निर्माताओं की मंजूरी के लिए एकल खिड़की

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पत्रकार वार्ता करते काबीना मंत्री प्रकाश पंत।

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p style=”text-align: justify;”>–पूर्व सीएम रावत के सरकार को वित्तीय स्थिति सामने रखने की चुनौती पर राज्य के वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने दिया जवाब
-कहा सरकार राज्य की राजधानी पर किसी भी प्रस्ताव पर सदन में विचार करने को है तैयार
नैनीताल। उत्तराखंड सरकार के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री प्रकाश पंत ने राज्य की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर राज्य का वित्तीय संतुलन बिगाड़ने और राज्य पर पांच वर्षों में 21000 करोड़ रुपए का कर्ज थोपने का आरोप भी लगाया।

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उत्तराखंड में फिर ‘बलूनी है तो मुमकिन है!’: राज्य को मिल सकता है टाटा से बड़ा तोहफा..

नवीन समाचार, नई दिल्ली, 28 नवम्बर 2020। उत्तराखंड को जल्द ही कैंसर इंस्टीट्यूट के रूप में एक बड़ी सौगात मिल सकती है।  भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी ने इसके लिए पहल की है।

उल्लेखनीय है कि बलूनी पिछले दिनों कैंसर से ग्रस्त हो गए थे। इस दौरान मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट मैं उनका उपचार हुआ था। बताया जा रहा है कि इस दौरान ही उनके मन में विचार आया था कि उत्तराखंड के आम लोगों के लिए भी इस तरह की सुविधा होनी चाहिए तभी उन्होंने टाटा समूह के प्रमुख रतन टाटा से इस इंस्टीट्यूट की शाखा उत्तराखंड में खोलने की बात कही, जिस पर ही उन्हें रतनजी टाटा की ओर से खत लिख कर भरोसा दिलाया गया है। अनिल बलूनी ने इसकी जानकारी अपने फेसबुक पेज पर भी दी है।

जानकारी के मुताबिक टाटा ग्रुप ने इसके लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है और सब कुछ ठीक रहा तो जल्द कैंसर इंस्टीट्यूट का तोहफा राज्य को मिल सकता है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 8 मार्च 2019। राज्य सभा सांसद बनने के बाद छोटी सी अवधि में ही पूरे राज्यवासियों के दिलों पर छा गये और वास्तव में ‘सांसद’ पद की उपयोगिता साबित करने वाले अनिल बलूनी अब प्रदेश की दो पर्वतीय पर्यटन नगरों-नैनीताल व मसूरी वासियों का दिल जीतने की राह पर नजर आ रहे हैं। शुक्रवार को बलूनी ने अपने फेसबुक खाते के जरिये सूचना दी है ‘मसूरी की पेयजल योजना स्वीकृत और नैनीताल की 333 करोड़ की योजना पर कार्य जारी, माननीय प्रधानमंत्री जी का शत-शत अभिनंदन!!’ साथ ही एक अन्य पोस्ट में लिखा है कि उन्होंने 25 दिसंबर को बताया था कि मसूरी व नैनीताल की पेयजल समस्या के लिए प्रयासरत हैं। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए अवगत करा रहे हैं कि प्रधानमंत्री की विशेष निधि से मसूरी के पेयजल संकट के समाधान के लिए 187 करोड़ की योजना स्वीकृत करते हुए इस वित्तीय वर्ष में 8 करोड़ रुपये जारी भी कर दिये गये हैं। मोदी हैं तो मुमकिन है।

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Anil Baluni Prasoon Joshiनवीन समाचार, नैनीताल, 3 मार्च 2019 । राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी लगातार उत्तराखंड के उत्थान  के लिए नई पहल  करते  जा रहे हैं  इसी कड़ी में  बलूनी ने प्रसिद्ध गीतकार, लेखक और भारतीय सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी से भेंट की है। अनिल बलूनी ने प्रसून जोशी से अनुरोध किया कि वे उत्तराखंड में पर्यटन के विकास हेतु एक ऐसा प्रेरक गीत लिखें कि पर्यटन और तीर्थाटन हेतु देश-विदेश के सैलानी और श्रद्धालु उत्तराखंड आयें। इससे जनता उत्तराखंड को देखेगी और उत्तराखंड से पलायन रुकेगा। अनिल बलूनी ने कहा, हमें गर्व है कि देवभूमि के बेटे प्रसून जोशी ने अपनी कलम से उत्तराखण्ड का नाम रोशन किया है।  माना जा रहा है कि प्रसून जोशी ने बलूनी केेेे अनुरोध पर उत्तराखंड के लिए एक सुंदर गीत लिखने का मन बना लिया है।

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-बलूनी ने कहा-उद्घाटन का इंतजार न करें, जनता के लिए शुरू करें नई योजनाएंं, इसे कहां जा रहा है बदलती राजनीति का संकेत

-बलूनी की सांसद निधि से लगभग पूर्ण हो चुके कोटद्वार व उत्तरकाशी आईसीयू एवं वेंटिलेटर सेंटर

नवीन समाचार, नैनीताल, 25 फरवरी 2019 ।राज्यसभा सांसद एवं भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी ने अपनी सांसद निधि से लगभग पूर्ण हो चुके कोटद्वार और उत्तरकाशी आईसीयू एवं वेंटीलेटर सेंटरों के उद्घाटन का इंतजार किए बगैर शुरू कर देने को कहा है।अनिल बलूनी ने कोटद्वार और उत्तरकाशी आईसीयू एवं वेंटीलेटर सेंटरों के बाबत में प्रदेश के स्वास्य सचिव को पत्र भेजकर कहा है कि आईसीयू सेंटर का निर्माण कार्य पूर्ण होते ही उद्घाटन की औपचारिकता की प्रतीक्षा करने के बजाय तत्काल उसे जनता की सेवा में समर्पित कर दिया जाए।सांसद बलूनी ने कहा की जनता के धन से जनता के लिए तैयार की गई सुविधा तत्काल जनता की सेवा में समर्पित हो जानी चाहिए। हमें शिलान्यास, उद्घाटन आदि की औपचारिकताओं से ऊपर उठ कर व्यावहारिक होने की आवश्यकता है। समय के साथ हमें अपनी कार्यसंस्तुतियों में बदलाव करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आईसीयू का निर्माण पूर्ण होते ही उसे तत्काल जनता की सेवा में प्रारंभ कर देना चाहिए। ऐसा न हो कि उद्घाटन की औपचारिकताओं के कारण तैयार आईसीयू होते हुए भी कोई महत्वपूर्ण जीवन संकट में पड़ जाए क्योंकि तैयार होते ही यह जनता की स्वत: संपत्ति है। सांसद बलूनी ने कहा कि संतोषजनक समय में आईसीयू सेंटर का निर्माण पूर्ण हुआ है। इनका कुशल संचालन हो और अपेक्षित मेडिकल स्टाफ की तैनाती कर जनता को सुविधा देना हमारी प्राथमिकता है़ दुर्गम क्षेत्रों में आईसीयू सेंटर गंभीर रोगियों के लिए वरदान साबित होंगे।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 5 फरवरी 2019 । राज्यसभा सांसद और भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी एम्स ऋषिकेश और सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी के नजदीक सांसद निधि व अन्य संस्थाओं के सहयोग से आरोग्य सदनों का निर्माण कराएंगे। गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में बनने वाले इन आरोग्य सदनों से पहाड़ के दुर्गम क्षेत्रों से आने वाले गरीब रोगियों और उनके परिजनों को बड़ी राहत मिलेगी।

बलूनी ने मंगलवार को इस संबंध में देहरादून और नैनीताल के जिलाधिकारियों व ऋषिकेश और हल्द्वानी के मेयरों से चर्चा कर आरोग्य सदनों के लिए शीघ्र भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। बलूनी ने कहा कि सुदूर क्षेत्रों से आने वाले रोगियों एवं उनके परिजनों को उपचार के अलावा भोजन, परिवहन और प्रवास में काफी पैसा खर्च करना पड़ता है। अस्पताल के निकट बनने वाले आरोग्य सदन उनका परिवहन एवं प्रवास खर्चा बचाएंगे। साथ ही उन्हें कम लागत पर भोजन उपलब्ध कराने के लिए कैंटीन का भी निर्माण कराया जाएगा। बलूनी ने कहा कि प्रथम चरण में इन सदनों में 100 से अधिक व्यक्तियों के रुकने के लिए कक्षों के साथ-साथ दो डोरमेट्री हॉल (पुरुष-महिला) और कैंटीन का निर्माण कराया जाएगा।

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बलूनी ने मांगा उत्तराखण्ड के लिये सम्पूर्ण स्वास्थ्य कवच
नैनीताल, 24 नवंबर 2018। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख और राज्यसभा सांसद  अनिल बलूनी ने उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाओं के संपूर्ण समाधान के लिए एक विस्तृत फार्मूला प्रस्तुत किया है। हाल ही में अपनी हल्द्वानी में हुई पत्रकार वार्ता में बलूनी ने कहा था कि वह उत्तराखंड की स्वास्थ्य समस्याओं के बड़े समाधान के विषय में होमवर्क कर रहे हैं ताकि राज्य की जनता को प्रदेश में ही उपचार सुलभ हो सके और नागरिकों को उपचार के लिए राज्य से बाहर न जाना पड़े। इस सम्बन्ध में उन्होने आज एक पत्र प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी को लिखा है व शीघ्र ही  प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी से भेंट करेंगे और  स्वास्थ्य मंत्री  जे पी नड्डा जी से इस विषय में चर्चा करेंगे।
उन्होंने इस विषय पर विस्तृत अध्ययन करके एक ब्लूप्रिंट पत्र के माध्यम से  प्रधानमंत्री जी के समक्ष प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा उन्हें उम्मीद है कि आगामी दिनों में उनके प्रस्ताव पर प्रदेशवासियों को सुखद समाचार प्राप्त होगा। बलूनी ने कहा कि प्रधानमंत्री  का उत्तराखंड से भावात्मक संबंध है, वे देश के ऐसे पहले यशस्वी प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने सर्वाधिक बार उत्तराखंड की यात्राएं की हैं और उत्तराखंड की सम्पूर्ण समस्याओं से अवगत हैं। “अटल जी ने बनाया है, मोदी जी संवारेंगे” के मन्त्र के साथ भारतीय जनता पार्टी उत्तराखंड के विकास के लिए अनवरत सेवारत है।
श्री बलूनी ने कहा अटल जी द्वारा प्रदान ऋषिकेश एम्स अब प्रभावी रूप से सेवाएं देने लगा है, किंतु उत्तराखंड राज्य की जनता को संपूर्ण उपचार देने हेतु पर्याप्त नहीं है। श्री बलूनी ने प्रधानमंत्री जी को संबोधित पत्र में कहा है कि ऋषिकेश एम्स का एक अतिरिक्त परिसर कुमाऊं मंडल के हल्द्वानी में स्थापित किया जाए। इसके साथ ही श्रीनगर गढ़वाल और अल्मोड़ा में एक-एक मेडिकल पीजीआई की स्थापना की जाए। इन चार संस्थानों की स्थापना के बाद उत्तराखंड की जनता को उच्च कोटि का उपचार प्राप्त होगा और राज्य से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। यह स्वास्थ्य सेवाओं की दृष्टि में एक ऐतिहासिक कदम होगा और राज्य के लिए वरदान साबित होगा।
सांसद बलूनी ने उम्मीद जताई कि माननीय प्रधानमंत्री जी जिनका उत्तराखंड के प्रति विशेष स्नेह है, वह राज्य की जनता को निःसन्देह यह सौगात देंगे। उत्तराखंड अंतर्राष्ट्रीय सीमा से लगा हुआ सामरिक प्रांत है। स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं प्रदान करने हेतु सरकार कृत संकल्प है, किंतु इसके संपूर्ण समाधान के लिए बड़े कदम उठाने की आवश्यकता है।

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नवीन जोशी, नैनीताल, 22 सितंबर 2018। भारतीय जनता पार्टी के राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी ने फिर एक अभूतपूर्व फैसला लेते हुए उत्तराखंड राज्य के एक गैर-आबाद निर्जन ‘घोस्ट विलेज’ यानी भुतहा गांव कहे जा रहे पौड़ी जिले के दुगड्डा ब्लॉक के दूरस्थ गांव बौर को गोद लेने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि इस गांव को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लिया गया है, इसके बाद अन्य ऐसे गैर-आबाद गांवों को भी इसी मॉडल पर आबाद करने के प्रयास किये जायेंगे। इस गाँव को पुनर्जीवित करने के लिए मूलभूत सुविधाओं बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य और रोजगार से जोड़ा जाएगा ताकि यह गांव पुनर्जीवित होकर अपने पूर्व के स्वरूप में आबाद हो सके। इस संबंध में शीघ्र ही इस गांव के प्रवासियों के साथ बैठक की जायेगी।

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तीन करोड़ प्रवासी उत्तराखंडियों की ‘घर वापसी’ कराएगा आरएसएस !

उनकी इस ‘रिवर्स माइग्रेशन’ की पहल पर विपक्ष की ओर से पूर्व सीएम हरीश रावत की ओर से प्रतिक्रिया काफी कुछ कहने वाली है। हरीश रावत ने भाजपा नेताओं को सलाह दी है कि वह बलूनी की पहलों से घबरायंे नहीं वरन प्रतिस्पर्धा करें। इससे साफ होता है कि अपनी पहलों से बलूनी विपक्ष के बड़े नेताओं का भी ध्यान अपनी ओर आकृष्ट करने में सफल रहे हैं। वहीं यह भी दिखाई दे रहा है उनकी पार्टी-भाजपा के लोग अभी भी उन्हें अधिक महत्व देने से बच रहे हैं। पिछले दिनों उनकी पहल पर नैनी-दून जन शताब्दी एक्सप्रेस रेलगाड़ी चलाने पर राज्य के उनकी पार्टी के नेताओं में रही श्रेय लेने की होड़ पर स्वयं केंद्रीय रेलमंत्री पीयूष गोयल को सफाई देनी पड़ी थी।
बलूनी की गैर-आबाद ग्रामों के पुनर्जीवन की कार्ययोजना के तहत वे उत्तराखण्ड के प्रवासी परिवारों-संगठनों के बीच जाकर संवाद करेंगे। उत्तराखंड के लाखों प्रवासी जो कि दिल्ली, लखनऊ, बरेली, मेरठ, गाजियाबाद, चंडीगढ़, भोपाल, इंदौर, जयपुर, मुंबई आदि शहरों में जाकर बस गए हैं, उन सबसे चर्चा कर गांव के पुनर्जीवन हेतु अनुरोध किया जाएगा और उनकी मांगों के निराकरण हेतु प्रयास किया जाएगा। साथ ही प्रवासियों से संवाद अभियान के माध्यम से उत्तराखंड के कौथीग (मेले), ऋतुपर्व और पारंपरिक आयोजनों को पुनः पुनर्जीवित करने के लिए संपर्क किये जायेंगे। उल्लेखनीय है कि इस तरह की मुहिम की घोषणा पूर्व में आरएसएस के द्वारा भी की गयी थी, जिसमें प्रवासी उत्तराखंडियों से वर्ष में एक बार अपने गांव आने का आह्वान करने की बात कही गयी थी। लेकिन योजना कहीं धरातल पर उतरी हो, इसकी जानकारी नहीं है।
उल्लेखनीय है कि बलूनी इससे पूर्व पौड़ी जिले के धूमाकोट-नैनीडांडा में बीती 4 जुलाई 2018 को हुई 48 यात्रियों की जान लेने वाली भीषण बस दुर्घटना के बाद अपने छह वर्ष के कार्यकाल में हर वर्ष 2-3 कर उत्तराखंड के हर जिले में 18 आईसीयू बनाने की घोषणा करके भी सुर्खियों में रहे थे। इसके अलावा वे राज्य में सेना के अस्पतालों में स्थानीय लोगों को भी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने और राज्य में केंद्रीय संस्थान स्थापित करने की पहलों के साथ भी लगातार अपना सियासी कद बढ़ाते नजर आ रहे हैं। यह भी विदित हो कि 2017 में उत्तराखंड के विस चुनावों के बाद उनका नाम भी राज्य के मुख्यमंत्री पद के लिए प्रमुखता से सियासी हलकों में चला था, लेकिन तब तक जनता से सीधे तौर पर न जुड़े होने की कमी उनकी राह में आढ़े आ गयी थी। लेकिन राज्य सभा सदस्य के तौर पर निर्वाचित होने के बाद से वे लगातार जनता के दिलों पर छाते जा रहे हैं। यह कहना भी गलत न होगा कि पूर्व रास सांसद तरुण विजय के बाद वे एक रास सांसद की क्षमताओं का जनता को अहसास कराने में सफल रहे हैं। ऐसे में वे भविष्य में राज्य के मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में गिने जाएं और मुख्यमंत्री बन जाएं तो आश्चर्य न होगा।

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    • खुशखबरी : सेना के डॉक्टर सूबे में आम लोगों का इलाज भी करेंगे 
    • केंद्रीय रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने दी सैद्धांतिक सहमति 
  • सांसद अनिल बलूनी के अनुरोध पर मिली प्रदेश को Anil Baluniसौगात 

देहरादून, 15 सितंबर 2018 । डॉक्टरों की कमी की समस्या झेल रहे उत्तराखंड के लिए खुशखबरी है। प्रदेश के छावनी क्षेत्रों में तैनात सेना के डॉक्टर अब आम लोगों का इलाज भी करेंगे। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख और उत्तराखंड से राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी ने उत्तराखंड की जनता के लिए स्वास्य के क्षेत्र में बड़ी सौगात दी है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व 25 अगस्त 2018 को नैनी-दून जनशताब्दी एक्सप्रेस का तोहफा भी दिलाया था। इसके अलावा वे हाल में संसद में उत्तराखंड के लिए विशेष राहत पैकेज और एनडीआरएफ की स्थाई यूनिट स्थापित करने की मांग भी उठा चुके हैं।

शनिवार को रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ हुई बैठक में उन्होंने उत्तराखंड के सामान्य नागरिकों को भी सेना के चिकित्सकों द्वारा प्राथमिक उपचार देने के लिए अनुरोध किया, जिस पर रक्षा मंत्री ने सैद्धांतिक सहमति दी है। यह फैसला पर्वतीय जनता की स्वास्य सेवा के क्षेत्र में मील का पत्थर होगा। सांसद बलूनी की रक्षा मंत्री के साथ उनके साउथ ब्लॉक स्थित कार्यालय में भेंट हुई। बैठक में उत्तराखंड के उन सैन्य क्षेत्रों (छावनियों) में, जहां सेना के चिकित्सक उपलब्ध हैं, उनके द्वारा राज्य के सामान्य नागरिकों को भी चिकित्सकीय सहायता मिले, इस विषय पर रक्षा मंत्री से भेंट की तथा दुर्गम क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्य की सुविा प्रदान करने पर र्चचा हुई। सांसद अनिल बलूनी ने कहा कि रक्षा मंत्री ने राज्य के पलायन की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वह स्वयं उत्तराखंड की परिस्थितियों से अवगत हैं और स्वास्य, शिक्षा तथा रोजगार के लिए निरंतर राज्य से पलायन के कारण चिंतित हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि सीमांतवासियों के लिए स्वास्य की सुविधा प्राथमिक रूप से मिलनी चाहिए। इसके कार्यान्वयन के लिए सेना के संबंधित कमान से र्चचा करेंगी। सांसद बलूनी ने कहा कि सेना के देहरादून, रुड़की, लैंसडाउन, हर्षिल, रुद्रप्रयाग, जोशीमठ, रानीखेत, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ व धारचूला में सैन्य क्षमता के आधार पर मिलिट्री हॉस्पिटल, फील्ड हॉस्पिटल, सेक्शन हस्पिटल और जनरल हॉस्पिटल कार्य कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त जिला स्तर पर आईसीएचएस क्लीनिक कार्य कर रही हैं। रक्षा मंत्री जी से अनुरोध किया गया कि केवल प्राथमिक उपचार, औषाि और मरहम पट्टी स्तर की क्लीनिक जो आम नागरिकों के लिए कुछ घंटे दैनिक रूप से सेवा दें ताकि नागरिकों को स्वास्य के क्षेत्र में बड़ी राहत मिल सके।

अर्धसैनिक बलों के डॉक्टरों को लेकर आज केंद्रीय गृहमंत्री से मिलेंगे बलूनी

देहरादून। अर्धसैनिक बलों के चिकित्सकों से भी प्रदेश की आम जनता का इलाज मिल सके इस बाबत राज्य सभा अनिल बलूनी का रविवार को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से भेंट का समय तय हुआ है। सांसद बलूनी ने कहा कि उत्तराखंड प्रदेश में सेना के साथ-साथ आईटीबीपी, एसएसबी और सीआरपीएफ की बटालियनें भी हैं, इस संबंध में वह रविवाव को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मिलेंगे और गृहमंत्री से अपील करेंगे कि वह अर्धसैन्य बलों के चिकित्सकों के माध्यम से भी स्थानीय नागरिकों को मेडिकल सुविधा देने की कृपा करें।

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बिग ब्रेकिंग: गैरसेंण उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनी, अधिसूचना जारी, पर देहरादून की राजधानी क्या ? अस्थायी या शीतकालीन ?

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नवीन समाचार, देहरादून, 08 जून 2020। उत्तराखंड आंदोलन के दौर से ही राजधानी के रूप में प्रचारित गैरसेंण आखिर राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी बन गई है। उत्तराखण्ड की त्रिवेन्द्र सरकार द्वारा चमोली जिले के चमोली भराड़ीसैंण (गैरसैंण) को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की घोषणा को आज आखिरकार मुहर लगा दी। राज्यपाल बेबी रानी मौर्या ने त्रिवेन्द्र सरकार के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है। इसके बाद प्रदेश के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने इस बारे में अधिसूचना जारी कर दी है। इस के साथ अब उत्तराखण्ड की दो राजधानी हो गई हैं। जिनमें ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण होगी, जबकि देहरादून में पहले से अस्थायी राजधानी के रूप में कार्य हो रहे हैं। आगे देखने वाली बात होगी कि क्या अब तक अस्थायी होने के बावजूद राजधानी के रूप में प्रयुक्त देहरादून के लिये क्या शब्द प्रयोग होगा। इसे शीतकालीन राजधानी के रूप में अधिसूचित किया जाता है अथवा स्थायी राजधानी के रूप में।

यह भी पढ़ें : ‘नवीन समाचार’ की खबर पर लगी मुहर : भाजपा सरकार ने गैरसेंण पर की बड़ी घोषणा

नवीन समाचार, गैरसेंण, 4 मार्च 2020। उत्तराखंड बजट सत्र के दौरान सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एक बड़ी घोषणा करते हुए गैरसैंण (भराड़ीसैंण) को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर दिया है। बताया गया है कि गैरसेंण व देहरादून 6-6 माह के लिए उत्तराखंड की राजधानी होंगे। इसके साथ ही भाजपा सरकार ने गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने का अपना चुनावी संकल्प भी पूरा कर दिया है। इसे भाजपा सरकार का एतिहासिक फैसला माना जा रहा है। हालांकि गैरसेंण को उत्तराखंड की पूर्ण-स्थायी राजधानी की मांग करने वाले लोगों को सरकार का यह फैसला इस मुद्दे को हल्का करने वाला भी लग सकता है। उल्लेखनीय है कि आपके प्रिय एवं भरोसेमंद समाचार पोर्टल ‘नवीन समाचार’ ने गत 23 फरवरी को ही सरकार द्वारा ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने की संभावना जता दी थी।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विधानसभा में बुधवार को बजट पेश करने के बाद गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने का ऐलान किया। उस वक्त सदन में कुछ क्षणों के लिए सभी सदस्य हतप्रभ रह गए और सन्नाटा छा गया लेकिन सत्तापक्ष और विपक्षी दल खुशी से झूम उठे और अपनी मेज थप-थपाकर इस ऐलान का स्वागत किया। मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष प्रेम चन्द अग्रवाल ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर ख़ुशी का इजहार किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक तरह से उत्तराखंड के आंदोलन और गैरसैंण को राजधानी बनाए जाने को लेकर आंदोलन करने वाले सभी तमाम शहीदों को तोहफा है। गैरसैंण राजधानी शहीदों को समर्पित है। गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी की घोषणा आंदोलनकारियों का सम्मान है। उन्होंने कहा कि इस घोषणा से राज्य निर्माण की अवधारणा पूरी हो गई है।
बाद में त्रिवेंद्र रावत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि इसके लिए क्या जरूरी इंस्फाट्रक्चर चाहिए, उसका सरकार अध्ययन कराएगी और उसी के अधीन काम होगा। साथ ही प्रशासनिक और शासन स्तर पर सभी तथ्यों पर सरकार विचार करेगी। उन्होंने कहा की यहां पर भराणी सैंण बहुत अधिक ऊंचाई पर है। इस वजह से यहां पानी की समस्या रहती है। इसके लिए एक झील बनाई जाएगी जिससे बारिश के पानी का संग्रह किया जा सके। ताकि पानी की दिक्कत का समाना न करना पड़े। इस बावत लोकनिर्माण विभाग के अभियंताओं को निर्देश दिए गए हैं। राजधानी बनाए जाने के बाद क्या गैरसैंण को अब जिला घोषित किया जाएगा? यह पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हम पहले सभी पक्षों का अध्ययन करेंगे और जो भी बेहतर होगा, सरकार उस पर काम करेगी। उन्होंने कहा कि जब हमने इसे राजधानी घोषित कर दिया है तो जिला बनाये जाने का मुद्दा अपने आप ख़त्म हो गया है। 
उल्लेखनीय है कि कर्णप्रयाग के विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी ने हाल ही में मुख्यमंत्री से मिलनकर भराड़ीसैंण में होने वाले सत्र के दौरान गैरसैंण को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने की मांग की थी। उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड राजधानी के तौर पर गैरसैंण का नाम सबसे पहले 60 के दशक में वीर चंद्र सिंह गढ़वाली ने आगे किया था। उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन के समय भी गैरसैंण को ही राज्य की प्रस्तावित राजधनी माना गया। वर्ष 1989 में उक्रांद के संस्थापक डीडी पंत और विपिन त्रिपाठी ने गैरसैंण को उत्तराखंड की प्रस्तावित राजधानी के रूप में माना था और उक्रांद ने 1992 में गैरसैंण को उत्तराखण्ड की औपचारिक राजधानी घोषित भी कर दिया था। राज्य आंदोलन के दौरान गैरसेंण उत्तराखंड की राजधानी के रूप में ही आंदोलन विषय के केंद्र में रहा।

यह भी पढ़ें : गैरसैंण पर इतिहास रच सकते हैं त्रिवेंद्र, राज्य आंदोलनकारियों पर भी हो सकता है बड़ा ऐलान…

नवीन समाचार, नैनीताल, 23 फरवरी 2020। जी हां, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत पर्वतीय जनभावनाओं की राजधानी गैरसैंण पर इतिहास रच सकते हैं। वे गैरसैंण में आगामी 3 मार्च से आयोजित होने जा रहे विधानसभा सत्र में गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर सकते हैं। चमोली जिले, जहां गैरसैण स्थित है, के सत्ताधारी विधायक महेंद्र भट्ट के दावे ने इन चर्चाओं को ताकत मिली है। कहा जा रहा है उन्होंने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के हवाले से यह बात कही है। ऐसी स्थिति में त्रिवेंद्र इतिहास रचने के करीब खडे़ हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री रावत राज्य आंदोलनकारियों को समान पेंशन व पेंशन को बढ़ाकर 5 हजार रुपये करने तथा उन्हें आरक्षण बहाल करने की भी घोषणा कर सकते हैं। राज्य आंदोलनकारियों से ऐसा वादा कर चुके हैं।gairsain
इस मसले को मौजूदा स्थितियोें में सै़द्धांतिक और व्यवहारिक नजरियेे से देखें तो दो बातें निकलकर आती हैं। सैद्धांतिक बात गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित करने के पक्ष में है, लेकिन देहरादून में जिस तरह से पिछले 20 साल से अस्थायी तौर पर ही सही राजधानी का संचालन हुआ है, उसमें अब गैरसैंण के स्थायी राजधानी बनने की कितनी संभावनाएं हैं, यह व्यवहारिक यक्ष प्रश्न है। राज्य आंदोलनकारियों के बीच में से ही एक वर्ग मानता है कि मौजूदा स्थिति में गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी बन जाए, तो यह उस क्षेत्र के विकास के लिहाज से बड़ी बात होगी। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने 2017 केे विधानसभा चुनाव में अपने घोषणापत्र में ग्रीष्मकालीन राजधानी का वादा किया था। कांग्रेस का कहना है कि अगर ग्रीष्मकालीन राजधानी का एलान होगा तो सरकार से पूछा जाएगा कि स्थायी राजधानी क्यों नहीं। हालांकि उन्हें यह पूछने का हक नहीं, क्योंकि यही सवाल उनसे भी पूछा जाएगा। वहीं भाजपा के पास कहने के लिए एक बड़ा जवाब है। वह कह सकती है कि उसके चुनाव घोषणापत्र पर भरोसा करके ही उसे प्रचंड बहुमत मिला है। वह कह सकती है कि यदि ग्रीष्मकालीन राजधानी के वादे पर जनता असहमत होती तो कर्णप्रयाग विधानसभा सीट, जिसके अंतर्गत गैरसैंण क्षेत्र आता है, वहां पर भाजपा के सुरेंद्र सिंह नेगी कभी जीतकर नहीं आते।Gairsain
अब बात त्रिवेंद्र सिंह रावत की। यदि उनकी सरकार ग्रीष्मकालीन राजधानी का एलान कर देती है, तो यह इतिहास रचने जैसा होगा। गैरसैंण में भव्य विधानभवन तैयार हो चुका है। वहां सत्र आयोजित होने लगे हैं। इससे पहले 2016 में हरीश रावत सरकार के पास यह मौका था। मगर वह गैरसैंण राजधानी के मसले पर चूक गई। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को अब इसका मलाल भी है। अब पूरे उत्तराखंड की निगाहें 3 मार्च से गैरसैंण में शुरू हो रहे विधानसभा सत्र पर टिकी हैं। क्या इसी दौरान एलान होगा या फिर अपनी सरकार के बचे हुए दो साल के कार्यकाल के दरमियान किसी और तारीख को मुख्यमंत्री इसके लिए चुनेंगे। इस पर शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक का सिर्फ इतना कहना है कि सरकार जनभावनाओं से वाकिफ है और गैरसैंण के विकास के लिए जो बेहतर होगा, वह निर्णय लिया जाएगा।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 8 जून 2018। केंद्र एवं राज्य में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने गैरसेंण-चंद्रनगर के बारे में उत्तराखंड की राजधानी के बाबत भाजपा सरकार की मंशा पर बड़ा खुलासा किया है। नैनीताल क्लब के राज्य अतिथि गृह में पत्रकारों से बात करते हुए भट्ट ने कहा कि भाजपा सरकार साफ तौर पर पहले गैरसेंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने जा रही है। इसके लिए भी अभी वहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। वहां विधानभवन तैयार हो गया है, परंतु यहां आयोजित होने वाले विधानसभा सत्र के लिए ही तैनात होने वाले कर्मचारियों के लिए आवास नहीं हैं। कर्मचारियों को ग्रामीणों के घरों में शरण लेनी पड़ती है। साथ ही पानी की भारी समस्या है। बीते सत्र में तैनात 1000 पुलिस के जवान पानी के लिए परेशान रहे, जबकि कई को गाड़ियों में सोना पड़ा। पानी व आवास जैसी इन मूलभूत सुविधाओं को उपलब्ध कराने के बाद सरकार ‘जनभावनाओं के अनुरूप’, जिस स्वरूप में जनता चाहेगी, वैसे गैरसेंण को राजधानी बनाने पर निर्णय लेगी। साथ ही उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस इस बारे में जो कुछ भी कहती है, सदन के बाहर कहती है। सदन के भीतर कांग्रेस ने अब तक गैरसेंण पर अपना रुख साफ नहीं किया है।

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