पढ़ें 1 अक्टूबर 2021 के ‘राष्ट्रीय सहारा’ का कुमाऊं संस्करण

आज के ‘राष्ट्रीय सहारा’ के ‘कुमाऊं संस्करण’ में पूरे उत्तराखंड एवं देश-दुनिया के चुनिंदा बड़े समाचार बिल्कुल छपे हुए अखबार की तरह पीडीएफ फॉरमेट में, बड़ा करके पढ़ने के लिये यहां क्लिक करें👉RS DDN KUM-01.10.2021 देखें पिछले अंक : 30 सितंबर का राष्ट्रीय सहारा⇒RS DDN KUM-30.09.2021 29 सितंबर का राष्ट्रीय सहारा⇒RS DDN KUM 29.09.2021 28 सितंबर … Read more

उत्तराखंड में फिर ‘बलूनी है तो मुमकिन है!’: राज्य को मिल सकता है टाटा से बड़ा तोहफा..

नवीन समाचार, नई दिल्ली, 28 नवम्बर 2020। उत्तराखंड को जल्द ही कैंसर इंस्टीट्यूट के रूप में एक बड़ी सौगात मिल सकती है।  भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी ने इसके लिए पहल की है।

उल्लेखनीय है कि बलूनी पिछले दिनों कैंसर से ग्रस्त हो गए थे। इस दौरान मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट मैं उनका उपचार हुआ था। बताया जा रहा है कि इस दौरान ही उनके मन में विचार आया था कि उत्तराखंड के आम लोगों के लिए भी इस तरह की सुविधा होनी चाहिए तभी उन्होंने टाटा समूह के प्रमुख रतन टाटा से इस इंस्टीट्यूट की शाखा उत्तराखंड में खोलने की बात कही, जिस पर ही उन्हें रतनजी टाटा की ओर से खत लिख कर भरोसा दिलाया गया है। अनिल बलूनी ने इसकी जानकारी अपने फेसबुक पेज पर भी दी है।

जानकारी के मुताबिक टाटा ग्रुप ने इसके लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है और सब कुछ ठीक रहा तो जल्द कैंसर इंस्टीट्यूट का तोहफा राज्य को मिल सकता है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 8 मार्च 2019। राज्य सभा सांसद बनने के बाद छोटी सी अवधि में ही पूरे राज्यवासियों के दिलों पर छा गये और वास्तव में ‘सांसद’ पद की उपयोगिता साबित करने वाले अनिल बलूनी अब प्रदेश की दो पर्वतीय पर्यटन नगरों-नैनीताल व मसूरी वासियों का दिल जीतने की राह पर नजर आ रहे हैं। शुक्रवार को बलूनी ने अपने फेसबुक खाते के जरिये सूचना दी है ‘मसूरी की पेयजल योजना स्वीकृत और नैनीताल की 333 करोड़ की योजना पर कार्य जारी, माननीय प्रधानमंत्री जी का शत-शत अभिनंदन!!’ साथ ही एक अन्य पोस्ट में लिखा है कि उन्होंने 25 दिसंबर को बताया था कि मसूरी व नैनीताल की पेयजल समस्या के लिए प्रयासरत हैं। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए अवगत करा रहे हैं कि प्रधानमंत्री की विशेष निधि से मसूरी के पेयजल संकट के समाधान के लिए 187 करोड़ की योजना स्वीकृत करते हुए इस वित्तीय वर्ष में 8 करोड़ रुपये जारी भी कर दिये गये हैं। मोदी हैं तो मुमकिन है।

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Anil Baluni Prasoon Joshiनवीन समाचार, नैनीताल, 3 मार्च 2019 । राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी लगातार उत्तराखंड के उत्थान  के लिए नई पहल  करते  जा रहे हैं  इसी कड़ी में  बलूनी ने प्रसिद्ध गीतकार, लेखक और भारतीय सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी से भेंट की है। अनिल बलूनी ने प्रसून जोशी से अनुरोध किया कि वे उत्तराखंड में पर्यटन के विकास हेतु एक ऐसा प्रेरक गीत लिखें कि पर्यटन और तीर्थाटन हेतु देश-विदेश के सैलानी और श्रद्धालु उत्तराखंड आयें। इससे जनता उत्तराखंड को देखेगी और उत्तराखंड से पलायन रुकेगा। अनिल बलूनी ने कहा, हमें गर्व है कि देवभूमि के बेटे प्रसून जोशी ने अपनी कलम से उत्तराखण्ड का नाम रोशन किया है।  माना जा रहा है कि प्रसून जोशी ने बलूनी केेेे अनुरोध पर उत्तराखंड के लिए एक सुंदर गीत लिखने का मन बना लिया है।

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-बलूनी ने कहा-उद्घाटन का इंतजार न करें, जनता के लिए शुरू करें नई योजनाएंं, इसे कहां जा रहा है बदलती राजनीति का संकेत

-बलूनी की सांसद निधि से लगभग पूर्ण हो चुके कोटद्वार व उत्तरकाशी आईसीयू एवं वेंटिलेटर सेंटर

नवीन समाचार, नैनीताल, 25 फरवरी 2019 ।राज्यसभा सांसद एवं भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी ने अपनी सांसद निधि से लगभग पूर्ण हो चुके कोटद्वार और उत्तरकाशी आईसीयू एवं वेंटीलेटर सेंटरों के उद्घाटन का इंतजार किए बगैर शुरू कर देने को कहा है।अनिल बलूनी ने कोटद्वार और उत्तरकाशी आईसीयू एवं वेंटीलेटर सेंटरों के बाबत में प्रदेश के स्वास्य सचिव को पत्र भेजकर कहा है कि आईसीयू सेंटर का निर्माण कार्य पूर्ण होते ही उद्घाटन की औपचारिकता की प्रतीक्षा करने के बजाय तत्काल उसे जनता की सेवा में समर्पित कर दिया जाए।सांसद बलूनी ने कहा की जनता के धन से जनता के लिए तैयार की गई सुविधा तत्काल जनता की सेवा में समर्पित हो जानी चाहिए। हमें शिलान्यास, उद्घाटन आदि की औपचारिकताओं से ऊपर उठ कर व्यावहारिक होने की आवश्यकता है। समय के साथ हमें अपनी कार्यसंस्तुतियों में बदलाव करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आईसीयू का निर्माण पूर्ण होते ही उसे तत्काल जनता की सेवा में प्रारंभ कर देना चाहिए। ऐसा न हो कि उद्घाटन की औपचारिकताओं के कारण तैयार आईसीयू होते हुए भी कोई महत्वपूर्ण जीवन संकट में पड़ जाए क्योंकि तैयार होते ही यह जनता की स्वत: संपत्ति है। सांसद बलूनी ने कहा कि संतोषजनक समय में आईसीयू सेंटर का निर्माण पूर्ण हुआ है। इनका कुशल संचालन हो और अपेक्षित मेडिकल स्टाफ की तैनाती कर जनता को सुविधा देना हमारी प्राथमिकता है़ दुर्गम क्षेत्रों में आईसीयू सेंटर गंभीर रोगियों के लिए वरदान साबित होंगे।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 5 फरवरी 2019 । राज्यसभा सांसद और भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी एम्स ऋषिकेश और सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी के नजदीक सांसद निधि व अन्य संस्थाओं के सहयोग से आरोग्य सदनों का निर्माण कराएंगे। गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में बनने वाले इन आरोग्य सदनों से पहाड़ के दुर्गम क्षेत्रों से आने वाले गरीब रोगियों और उनके परिजनों को बड़ी राहत मिलेगी।

बलूनी ने मंगलवार को इस संबंध में देहरादून और नैनीताल के जिलाधिकारियों व ऋषिकेश और हल्द्वानी के मेयरों से चर्चा कर आरोग्य सदनों के लिए शीघ्र भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। बलूनी ने कहा कि सुदूर क्षेत्रों से आने वाले रोगियों एवं उनके परिजनों को उपचार के अलावा भोजन, परिवहन और प्रवास में काफी पैसा खर्च करना पड़ता है। अस्पताल के निकट बनने वाले आरोग्य सदन उनका परिवहन एवं प्रवास खर्चा बचाएंगे। साथ ही उन्हें कम लागत पर भोजन उपलब्ध कराने के लिए कैंटीन का भी निर्माण कराया जाएगा। बलूनी ने कहा कि प्रथम चरण में इन सदनों में 100 से अधिक व्यक्तियों के रुकने के लिए कक्षों के साथ-साथ दो डोरमेट्री हॉल (पुरुष-महिला) और कैंटीन का निर्माण कराया जाएगा।

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बलूनी ने मांगा उत्तराखण्ड के लिये सम्पूर्ण स्वास्थ्य कवच
नैनीताल, 24 नवंबर 2018। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख और राज्यसभा सांसद  अनिल बलूनी ने उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाओं के संपूर्ण समाधान के लिए एक विस्तृत फार्मूला प्रस्तुत किया है। हाल ही में अपनी हल्द्वानी में हुई पत्रकार वार्ता में बलूनी ने कहा था कि वह उत्तराखंड की स्वास्थ्य समस्याओं के बड़े समाधान के विषय में होमवर्क कर रहे हैं ताकि राज्य की जनता को प्रदेश में ही उपचार सुलभ हो सके और नागरिकों को उपचार के लिए राज्य से बाहर न जाना पड़े। इस सम्बन्ध में उन्होने आज एक पत्र प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी को लिखा है व शीघ्र ही  प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी से भेंट करेंगे और  स्वास्थ्य मंत्री  जे पी नड्डा जी से इस विषय में चर्चा करेंगे।
उन्होंने इस विषय पर विस्तृत अध्ययन करके एक ब्लूप्रिंट पत्र के माध्यम से  प्रधानमंत्री जी के समक्ष प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा उन्हें उम्मीद है कि आगामी दिनों में उनके प्रस्ताव पर प्रदेशवासियों को सुखद समाचार प्राप्त होगा। बलूनी ने कहा कि प्रधानमंत्री  का उत्तराखंड से भावात्मक संबंध है, वे देश के ऐसे पहले यशस्वी प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने सर्वाधिक बार उत्तराखंड की यात्राएं की हैं और उत्तराखंड की सम्पूर्ण समस्याओं से अवगत हैं। “अटल जी ने बनाया है, मोदी जी संवारेंगे” के मन्त्र के साथ भारतीय जनता पार्टी उत्तराखंड के विकास के लिए अनवरत सेवारत है।
श्री बलूनी ने कहा अटल जी द्वारा प्रदान ऋषिकेश एम्स अब प्रभावी रूप से सेवाएं देने लगा है, किंतु उत्तराखंड राज्य की जनता को संपूर्ण उपचार देने हेतु पर्याप्त नहीं है। श्री बलूनी ने प्रधानमंत्री जी को संबोधित पत्र में कहा है कि ऋषिकेश एम्स का एक अतिरिक्त परिसर कुमाऊं मंडल के हल्द्वानी में स्थापित किया जाए। इसके साथ ही श्रीनगर गढ़वाल और अल्मोड़ा में एक-एक मेडिकल पीजीआई की स्थापना की जाए। इन चार संस्थानों की स्थापना के बाद उत्तराखंड की जनता को उच्च कोटि का उपचार प्राप्त होगा और राज्य से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। यह स्वास्थ्य सेवाओं की दृष्टि में एक ऐतिहासिक कदम होगा और राज्य के लिए वरदान साबित होगा।
सांसद बलूनी ने उम्मीद जताई कि माननीय प्रधानमंत्री जी जिनका उत्तराखंड के प्रति विशेष स्नेह है, वह राज्य की जनता को निःसन्देह यह सौगात देंगे। उत्तराखंड अंतर्राष्ट्रीय सीमा से लगा हुआ सामरिक प्रांत है। स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं प्रदान करने हेतु सरकार कृत संकल्प है, किंतु इसके संपूर्ण समाधान के लिए बड़े कदम उठाने की आवश्यकता है।

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नवीन जोशी, नैनीताल, 22 सितंबर 2018। भारतीय जनता पार्टी के राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी ने फिर एक अभूतपूर्व फैसला लेते हुए उत्तराखंड राज्य के एक गैर-आबाद निर्जन ‘घोस्ट विलेज’ यानी भुतहा गांव कहे जा रहे पौड़ी जिले के दुगड्डा ब्लॉक के दूरस्थ गांव बौर को गोद लेने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि इस गांव को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लिया गया है, इसके बाद अन्य ऐसे गैर-आबाद गांवों को भी इसी मॉडल पर आबाद करने के प्रयास किये जायेंगे। इस गाँव को पुनर्जीवित करने के लिए मूलभूत सुविधाओं बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य और रोजगार से जोड़ा जाएगा ताकि यह गांव पुनर्जीवित होकर अपने पूर्व के स्वरूप में आबाद हो सके। इस संबंध में शीघ्र ही इस गांव के प्रवासियों के साथ बैठक की जायेगी।

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तीन करोड़ प्रवासी उत्तराखंडियों की ‘घर वापसी’ कराएगा आरएसएस !

उनकी इस ‘रिवर्स माइग्रेशन’ की पहल पर विपक्ष की ओर से पूर्व सीएम हरीश रावत की ओर से प्रतिक्रिया काफी कुछ कहने वाली है। हरीश रावत ने भाजपा नेताओं को सलाह दी है कि वह बलूनी की पहलों से घबरायंे नहीं वरन प्रतिस्पर्धा करें। इससे साफ होता है कि अपनी पहलों से बलूनी विपक्ष के बड़े नेताओं का भी ध्यान अपनी ओर आकृष्ट करने में सफल रहे हैं। वहीं यह भी दिखाई दे रहा है उनकी पार्टी-भाजपा के लोग अभी भी उन्हें अधिक महत्व देने से बच रहे हैं। पिछले दिनों उनकी पहल पर नैनी-दून जन शताब्दी एक्सप्रेस रेलगाड़ी चलाने पर राज्य के उनकी पार्टी के नेताओं में रही श्रेय लेने की होड़ पर स्वयं केंद्रीय रेलमंत्री पीयूष गोयल को सफाई देनी पड़ी थी।
बलूनी की गैर-आबाद ग्रामों के पुनर्जीवन की कार्ययोजना के तहत वे उत्तराखण्ड के प्रवासी परिवारों-संगठनों के बीच जाकर संवाद करेंगे। उत्तराखंड के लाखों प्रवासी जो कि दिल्ली, लखनऊ, बरेली, मेरठ, गाजियाबाद, चंडीगढ़, भोपाल, इंदौर, जयपुर, मुंबई आदि शहरों में जाकर बस गए हैं, उन सबसे चर्चा कर गांव के पुनर्जीवन हेतु अनुरोध किया जाएगा और उनकी मांगों के निराकरण हेतु प्रयास किया जाएगा। साथ ही प्रवासियों से संवाद अभियान के माध्यम से उत्तराखंड के कौथीग (मेले), ऋतुपर्व और पारंपरिक आयोजनों को पुनः पुनर्जीवित करने के लिए संपर्क किये जायेंगे। उल्लेखनीय है कि इस तरह की मुहिम की घोषणा पूर्व में आरएसएस के द्वारा भी की गयी थी, जिसमें प्रवासी उत्तराखंडियों से वर्ष में एक बार अपने गांव आने का आह्वान करने की बात कही गयी थी। लेकिन योजना कहीं धरातल पर उतरी हो, इसकी जानकारी नहीं है।
उल्लेखनीय है कि बलूनी इससे पूर्व पौड़ी जिले के धूमाकोट-नैनीडांडा में बीती 4 जुलाई 2018 को हुई 48 यात्रियों की जान लेने वाली भीषण बस दुर्घटना के बाद अपने छह वर्ष के कार्यकाल में हर वर्ष 2-3 कर उत्तराखंड के हर जिले में 18 आईसीयू बनाने की घोषणा करके भी सुर्खियों में रहे थे। इसके अलावा वे राज्य में सेना के अस्पतालों में स्थानीय लोगों को भी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने और राज्य में केंद्रीय संस्थान स्थापित करने की पहलों के साथ भी लगातार अपना सियासी कद बढ़ाते नजर आ रहे हैं। यह भी विदित हो कि 2017 में उत्तराखंड के विस चुनावों के बाद उनका नाम भी राज्य के मुख्यमंत्री पद के लिए प्रमुखता से सियासी हलकों में चला था, लेकिन तब तक जनता से सीधे तौर पर न जुड़े होने की कमी उनकी राह में आढ़े आ गयी थी। लेकिन राज्य सभा सदस्य के तौर पर निर्वाचित होने के बाद से वे लगातार जनता के दिलों पर छाते जा रहे हैं। यह कहना भी गलत न होगा कि पूर्व रास सांसद तरुण विजय के बाद वे एक रास सांसद की क्षमताओं का जनता को अहसास कराने में सफल रहे हैं। ऐसे में वे भविष्य में राज्य के मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में गिने जाएं और मुख्यमंत्री बन जाएं तो आश्चर्य न होगा।

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    • खुशखबरी : सेना के डॉक्टर सूबे में आम लोगों का इलाज भी करेंगे 
    • केंद्रीय रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने दी सैद्धांतिक सहमति 
  • सांसद अनिल बलूनी के अनुरोध पर मिली प्रदेश को Anil Baluniसौगात 

देहरादून, 15 सितंबर 2018 । डॉक्टरों की कमी की समस्या झेल रहे उत्तराखंड के लिए खुशखबरी है। प्रदेश के छावनी क्षेत्रों में तैनात सेना के डॉक्टर अब आम लोगों का इलाज भी करेंगे। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख और उत्तराखंड से राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी ने उत्तराखंड की जनता के लिए स्वास्य के क्षेत्र में बड़ी सौगात दी है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व 25 अगस्त 2018 को नैनी-दून जनशताब्दी एक्सप्रेस का तोहफा भी दिलाया था। इसके अलावा वे हाल में संसद में उत्तराखंड के लिए विशेष राहत पैकेज और एनडीआरएफ की स्थाई यूनिट स्थापित करने की मांग भी उठा चुके हैं।

शनिवार को रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ हुई बैठक में उन्होंने उत्तराखंड के सामान्य नागरिकों को भी सेना के चिकित्सकों द्वारा प्राथमिक उपचार देने के लिए अनुरोध किया, जिस पर रक्षा मंत्री ने सैद्धांतिक सहमति दी है। यह फैसला पर्वतीय जनता की स्वास्य सेवा के क्षेत्र में मील का पत्थर होगा। सांसद बलूनी की रक्षा मंत्री के साथ उनके साउथ ब्लॉक स्थित कार्यालय में भेंट हुई। बैठक में उत्तराखंड के उन सैन्य क्षेत्रों (छावनियों) में, जहां सेना के चिकित्सक उपलब्ध हैं, उनके द्वारा राज्य के सामान्य नागरिकों को भी चिकित्सकीय सहायता मिले, इस विषय पर रक्षा मंत्री से भेंट की तथा दुर्गम क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्य की सुविा प्रदान करने पर र्चचा हुई। सांसद अनिल बलूनी ने कहा कि रक्षा मंत्री ने राज्य के पलायन की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वह स्वयं उत्तराखंड की परिस्थितियों से अवगत हैं और स्वास्य, शिक्षा तथा रोजगार के लिए निरंतर राज्य से पलायन के कारण चिंतित हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि सीमांतवासियों के लिए स्वास्य की सुविधा प्राथमिक रूप से मिलनी चाहिए। इसके कार्यान्वयन के लिए सेना के संबंधित कमान से र्चचा करेंगी। सांसद बलूनी ने कहा कि सेना के देहरादून, रुड़की, लैंसडाउन, हर्षिल, रुद्रप्रयाग, जोशीमठ, रानीखेत, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ व धारचूला में सैन्य क्षमता के आधार पर मिलिट्री हॉस्पिटल, फील्ड हॉस्पिटल, सेक्शन हस्पिटल और जनरल हॉस्पिटल कार्य कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त जिला स्तर पर आईसीएचएस क्लीनिक कार्य कर रही हैं। रक्षा मंत्री जी से अनुरोध किया गया कि केवल प्राथमिक उपचार, औषाि और मरहम पट्टी स्तर की क्लीनिक जो आम नागरिकों के लिए कुछ घंटे दैनिक रूप से सेवा दें ताकि नागरिकों को स्वास्य के क्षेत्र में बड़ी राहत मिल सके।

अर्धसैनिक बलों के डॉक्टरों को लेकर आज केंद्रीय गृहमंत्री से मिलेंगे बलूनी

देहरादून। अर्धसैनिक बलों के चिकित्सकों से भी प्रदेश की आम जनता का इलाज मिल सके इस बाबत राज्य सभा अनिल बलूनी का रविवार को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से भेंट का समय तय हुआ है। सांसद बलूनी ने कहा कि उत्तराखंड प्रदेश में सेना के साथ-साथ आईटीबीपी, एसएसबी और सीआरपीएफ की बटालियनें भी हैं, इस संबंध में वह रविवाव को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मिलेंगे और गृहमंत्री से अपील करेंगे कि वह अर्धसैन्य बलों के चिकित्सकों के माध्यम से भी स्थानीय नागरिकों को मेडिकल सुविधा देने की कृपा करें।

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नैनीताल : नगर पालिका के एक अधिकारी के खिलाफ जांच के आदेश

-निकाले गए तीन कर्मचारियों ने लगाए थे आरोप
नवीन समाचार, नैनीताल, 10 नवम्बर 2020। नैनीताल नगर पालिका के अध्यक्ष सचिन नेगी ने नौकरी से निकाले गए तीन कर्मचारियों-सौरभ पुत्र राजू, पवन पुत्र भगवत एवं मोहित पुत्र मनोज के द्वारा लगाए गए आरोपों पर नगर पालिका के सफाई निरीक्षक कुलदीप कुमार के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। इस मामले में नगर पालिका के वरिष्ठ नगर स्वास्थ्य अधिकारी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है। जांच समिति में नगर पालिका के अवर अभियंता एवं लेखाधिकारी को सदस्य बनाया गया है, तथा जांच समिति से एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया है। उल्लेखनीय है कि तीनों कर्मचारियों ने इस संबंध में अपने समाज की वाल्मीकि सभा को इस संबंध में पत्र लिखा था और नगर पालिका अध्यक्ष को पृष्ठांकित किया था, तथा वाल्मीकि सभा ने भी नगर पालिका अध्यक्ष से इस संबंध में कार्रवाई करने को कहा था।

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-वर्ष 2010-11 में लेक ब्रिज चुंगी का मामला, मामले में हुई थी सीबीआई की जांच
-धारा 471 के मामले भी किसी पर साबित नहीं, दो आरोपितों पर निचली अदालत में होगा परीक्षण
नवीन समाचार, नैनीताल, 31 अगस्त 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने वर्ष 2010-11 में नैनीताल नगर पालिका की लेक ब्रिज चुंगी के मामले में सभी आरोपितों ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के आरोप खारिज कर दिये हैं। उच्च न्यायालय द्वारा जारी 30 पन्नों के आदेश में साफ कहा गया है कि मामले में सभी आरोपितों-तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष मुकेश जोशी, अधिशासी अधिकारी नीरज जोशी, ठेकेदार आलोक चौधरी, क्लर्क राजेंद्र जोशी आदि के खिलाफ आपराधिक शडयंत्र, धोखाधड़ी या जालसाजी के आरोप में सीबीआई द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 120बी, 420, 468 के तहत लगायी गयी धाराओं का कोई मामला नहीं बनता है। धारा 471 में भी किसी पर आरोप साबित नहीं हुए हैं, बल्कि दो आरोपितों पर निचली अदालत में परीक्षण होगा। यानी सीबीआई द्वारा आरोपितों पर याचिकाकर्ता ठेकेदार नवबहार अली को निविदा प्रक्रिया से बाहर कर ठेकेदार आलोक चौधरी को ठेका दिलाने के लिए लाभ पहुंचाने के आरोप खारिज हो गये हैं।
मामले में उच्च न्यायालय ने माना कि 25 मार्च 2010 को नव बहार अली को उसके नाम पर निविदा निकलने की जानकारी देते हुए उसे निविदा की 50 फीसद धनराशि जमा करने को कहा गया। उसके मना करने पर दूसरे निविदादाता नवीन अग्रवाल से भी निविदा लेने को कहा गया। नवबहार अली इसके बाद तीन अप्रैल को हुई बोर्ड बैठक में भी मौजूद रहा। उसके द्वारा भी मना करने के बाद निविदा की प्रक्रिया नये सिरे से की गयी। मामले में नगर पालिका के तत्कालीन डिस्पैच क्लर्क राजेंद्र जोशी एवं यस कोरियर के एजेंट राजेंद्र शर्मा पर भी भारतीय दंड संहिता की धारा 471 के तहत भी आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं, बल्कि उनके विरुद्ध केवल धारा 471 के तहत ट्रायल कोर्ट में मामला चलेगा। इस मामले में राजेंद्र जोशी पर केवल इतना आरोप है कि उसने कोई जालसाजी नहीं की, बल्कि उसने (बीच में आत्महत्या करने वाले) पत्रवाहक राजेंद्र मेहरा द्वारा देरी से कोरियर की रसीद लाने पर डाक रजिस्टर में कोरियर के 15 रुपए चढ़ाने में संशोधन किया। वहीं कोरियर एजेंट मनोज शर्मा पर आरोप है कि उसने कोरियर की रसीद में नवबहार अली के हस्ताक्षर खुद कर दिये। इसीलिए उच्च न्यायालय की न्यायमूति रवींद्र मैठाणी की अदालत ने धारा 471 के मामले को ट्रायल कोर्ट में परीक्षण कराने को कहा है।

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-तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष, अधिशासी अधिकारी व ठेकेदार के खिलाफ सीबीआई को नहीं मिले अपेक्षित सबूत, मामला खारिज
नवीन समाचार, नैनीताल, 30 अगस्त 2019। वर्ष 2010-2011 में नगर पालिका नैनीताल के लेकब्रिज चुंगी मामले में हुई सीबीआई जांच के बहुचर्चित मामले में सीबीआई द्वारा देहरादून की सीबीआई कोर्ट में पेश की गई चार्जशीट को धारा 482 के तहत उच्च न्यायालय में चुनौती देने वाली याचिकाओं पर न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी की एकलपीठ से बहुप्रतीक्षित फैसला आ गया है। मामले में बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं के अनुसार एकलपीठ ने याचिकाओं को यह कहते हुए स्वीकार किया है कि सीबीआई ने नगर पालिका नैनीताल के तत्कालीन पालिका अध्यक्ष मुकेश जोशी, अधिशासी अधिकारी नीरज जोशी व ठेका प्राप्त करने वाले ठेकेदार आलोक चौधरी के खिलाफ जो आरोप लगाये थे, उसके उनके पास अपेक्षित जरूरी साक्ष्य नहीं हैं, जिससे कि यह मामला आगे चल सके। अलबत्ता, नगर पालिका के तत्कालीन डीलिंग क्लर्क एवं कोरियर वाले की जालसाजी में भूमिका के भारतीय दंड संहिता की धारा 471 के तहत तथ्य मिले हैं।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2010-11 लेक ब्रिज चुंगी की निविदा प्रक्रिया विवादों में आ गई थी। मामले में चुंगी की निविदा नवबहार के नाम पर 2 करोड़ 10 लाख में हुई थी, लेकिन वह निर्धारित समय के भीतर निविदा की 50 फीसदी राशि जमा करने नही आये। इस कारण नगर पालिका को दुबारा से निविदा निकालनी पड़ी। जबकि नवबहार ने नगर पालिका पर आरोप लगाया था कि निविदा के संबंध में उसे किसी भी प्रकार की सूचना नही दी गयी। बाद में कोर्ट के आदेश पर इस मामले की सीबीआई जाँच हुई थी। सीबीआई ने जाँच रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर दी थी, जिसे नगर पालिका नैनीताल के तत्कालीन पालिका अध्यक्ष मुकेश जोशी, अधिशासी अधिकारी नीरज जोशी व ठेका प्राप्त करने वाले ठेकेदार आलोक चौधरी ने चुनौती देकर उन पर सीबीआई द्वारा लगाई गई आपराधिक मामलों व शडयंत्र की धाराएं लगाने को गलत बताते हुए कहा था कि सभी निर्णय केवल उनके नहीं, बल्कि नगर पालिका बोर्ड के सर्वानुमति से लिये गये हैं। जो कुछ भी किया गया वह प्रोक्योरमेंट नियमावली के तहत ही किया गया। उनसे किसी प्रकार का धन आदि भी बरामद नहीं हुआ।

करीब 9 वर्ष बाद बेदाग साबित हुए

नैनीताल। तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष मुकेश जोशी व तत्कालीन अधिशासी अधिकारी नीरज जोशी सीबीआई के आरोपों से 9 वर्ष बाद बेदाग साबित हुए हैं। इससे उन्होंने बड़ी राहत की सांस ली है। उल्लेखनीय है कि नैनीताल में सीबीआई के दायरे में आने का पहला मामला था। आरोपों से खासकर मुकेश जोशी का राजनीतिक कॅरियर भी प्रभावित हुआ था। बेदाग साबित होने पर उन्होंने अपनी सभी सुभेच्छुओं का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि सीबीआई जांच से उनकी छवि को जो आघात पहुंचा, उसकी भरपाई नहीं हो सकती है। मामले में न्यायालय का फैसला आने से इन के साथ देश की दूसरे नंबर की ऐतिहासिक नैनीताल नगर पालिका में इस मामले में भ्रष्टाचार के आरोप भी एक तरह से खारिज हुए हैं।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 23 अगस्त 2019। वर्ष 2010-2011 में नगर पालिका नैनीताल के लेकब्रिज चुंगी मामले में हुई सीबीआई जांच का बहुचर्चित मामला फिर से सतह पर आ गया है। मामले में सीबीआई की चार्जशीट को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हर न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी की एकलपीठ ने शुक्रवार को अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है। निर्णय अगले 10 दिन के भीतर सुनाया जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2010-11 लेक ब्रिज चुंगी की निविदा प्रक्रिया विवादों में आ गई थी। मामले में चुंगी की निविदा नवबहार के नाम पर 2 करोड़ 10 लाख में हुई थी, लेकिन वह निर्धारित समय के भीतर निविदा की 50 फीसदी राशि जमा करने नही आये। इस कारण नगर पालिका को दुबारा से निविदा निकालनी पड़ी। जबकि नवबहार ने नगर पालिका पर आरोप लगाया था कि निविदा के संबंध में उसे किसी भी प्रकार की सूचना नही दी गयी। बाद में कोर्ट के आदेश पर इस मामले की सीबीआई जाँच हुई थी। सीबीआई ने जाँच रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर दी थी, जिसे नगर पालिका नैनीताल के तत्कालीन पालिका अध्यक्ष मुकेश जोशी, अधिशासी अधिकारी नीरज जोशी व ठेका प्राप्त करने वाले ठेकेदार आलोक चौधरी ने चुनौती देकर उन पर सीबीआई द्वारा लगाई गई आपराधिक मामलों व शडयंत्र की धाराएं लगाने को गलत बताते हुए कहा था कि सभी निर्णय केवल उनके नहीं, बल्कि नगर पालिका बोर्ड के सर्वानुमति से लिये गये हैं। जो कुछ भी किया गया वह प्रोक्योरमेंट नियमावली के तहत ही किया गया। उनसे किसी प्रकार का धन आदि भी बरामद नहीं हुआ।

यह भी पढ़ें : सीबीआई जांच के दायरे में आईं राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त प्रधानाचार्या व वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री

-उनकी प्रधानाचार्य पद पर नियुक्ति और राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए हुए नामांकन से संबंधित अधिकारी भी आ सकते हैं जांच के दायरे में
नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने रामनगर के गोमती पूरन प्रसाद आर्य कन्या इंटर कालेज में विभिन्न पदों के लिए हुई भर्ती की प्रक्रिया में धांधली के आरोपों पर सीबीआई को चार माह के भीतर जांच कर रिपोर्ट न्यायालय में पेश करने के आदेश दिए हैं। मामले में दिलचस्प तथ्य यह भी है कि विद्यालय की प्रधानाचार्य हरिप्रिया सती वर्ष 2014 के राष्ट्रपति पुरस्कार से 5 सितंबर 2015 को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के हाथों सम्मानित हो चुकी हैं, तथा वर्तमान में सेवानिवृत्ति की आयु पूरी होने के बाद राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त करने पर मिलने वाले दो वर्ष के सेवा लाभ के तहत ही पद पर कार्यरत हैं। साथ ही वे 35 वर्षों से कांग्रेस पार्टी से जुड़ी वरिष्ठ नेत्री भी हैं। इधर उन्होंने रामनगर नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए भी दावेदारी की हुई है।

इधर 31 मई को उत्तराखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश केएम जोसफ की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने एकलपीठ के सीबीआई जांच कराने से संबंधित आदेश पर रोक लगा दी है।

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‘लॉक डाउन’ से नैनी लेक हुई ‘अप’, सुधरी पारिस्थितिकी

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-15 वर्षों के सर्वाधिक स्तर पर पहुंचा नैनी झील का जल स्तर, पारदर्शिता भी बढ़ी

नवीन समाचार, नैनीताल, 20 अप्रैल 2020। कोरोना की वैश्विक महामारी के दृष्टिगत देश भर में लागू लॉक डाउन मानो प्रकृति का मानव के साथ स्वयं को भी उसके मूल स्वभाव में लौटाने की कोशिश हो। इन दिनों जहां मानव ग्लोबलाइजेशन के साथ बेतहाशा बढ़ी आवश्यकताओं के बिना बेहद सीमित संसाधनों में जीने की अपनी पुरानी आदतों में लौट रहा है, वहीं प्रकृति भी मानो मानवीय हस्तक्षेप घटने से अपना आत्म शुद्धि कर रही है। प्रकृति का स्वर्ग कही जाने वाली सरोवरनगरी नैनीताल की विश्व प्रसिद्ध नैनी झील भी इसकी बानगी है।

झील नियंत्रण के प्राप्त जानकारी के अनुसार नैनी झील का जल स्तर अंग्रेजों द्वारा तय पैमाने पर सोमवार को 6 फिट पांच इंच रिकार्ड किया गया, जबकि इससे पूर्व केवल वर्ष 2005 में आज के दिन झील का जल स्तर 6 फिट 6 इंच यानी अब से बेहतर था। यानी नैनी झील जल स्तर के मामले में पिछले 15 वर्षों के सर्वश्रेष्ठ स्तर पर है। यह आंकड़ा भी उल्लेखनीय है कि लॉक डाउन लागू होने के लिए 22 मार्च को झील के जल स्तर में मात्र 7 इंच की कमी आई है। यानी करीब तीन दिन में झील का पानी एक इंच गिर रहा है, जबकि पिछले वर्षों में इन दिनों आधा इंच जल स्तर रोज गिरता था। उल्लेखनीय है कि नैनी झील के पानी का ही नगर में पेयजल सहित सभी तरह से उपयोग होता है। यानी नगर में जल के उपयोग एवं वाष्पीकरण तथा जल के क्षरण आदि कारणों में पिछले एक माह में कमी आयी है। वहीं एक दौर में नैनी झील के दो तिहाई हिस्से में ऑक्सीजन की मात्रा शून्य हो जाने यानी झील के दो तिहाई हिस्से में जल-जीवन मृत हो जाने के बाद वर्ष 2007 में एयरेशन के जरिये नैनी झील को ‘डायलिसिस’ की तरह कृत्रिम ऑक्सीजन चढ़ाने वाले नैनीताल जिला विकास प्राधिकरण के परियोजना प्रबंधन चंद्रमौलि साह ने बताया कि लॉक डाउन के दौरान प्राधिकरण नैनी झील की सफाई का कार्य नहीं कर पा रहा है। यहां तक कि नैनी झील के बीच में नौका ले जाकर झील की गुणवत्ता भी नहीं मापी जा रही है, फिर भी झील के किनारे किये गये ऐसे मापन के अनुसार झील में पारदर्शिता करीब पूर्व की करीब डेढ़ मीटर से बढ़कर 2.5 मीटर तक हो गयी है। वहीं झील के पानी में ऑक्सीजन की मात्रा 7.5 के स्तर पर बनी हुई है। वहीं नगर के पर्यावरणविद् डा. अजय रावत ने नैनी झील की पारदर्शिता एवं सफाई में स्वतः सुधार होने की बात कही है। उन्होंने दावा किया कि झील में पारदर्शिता पहले ऊपरी सतह से सात मीटर की गहराई तक स्थित एपीलिनियन तक ही थी, जबकि अब सात से नौ मीटर की गहराई पर स्थित थर्मोलाइन तक हो गयी है, और इस गहराई तक मछलियों का आवागमन भी हो गया है, जो कि पहले केवल एपीलिनियन में था। इसके अलावा भी नैनी झील के किनारे ठंडी सड़क क्षेत्र में इन दिनो मानव की गतिविधियां घट जाने की वजह से गुलदार एवं उसके शावकों के साथ ही घुरल, काकड़, कलीज फीजेंट सहित अनेक पशु-पक्षी भी नजर आ रहे हैं। इसे भी नैनी झील एवं नगर की पारिस्थितिकी में हुए परिवर्तन का परिणाम माना जा रहा है।

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यूएन से स्वीकृत हुई नैनी झील के पानी की सतत निगरानी के लिए परियोजना
-बैथीमेट्री विश्लेषण से पहली बार तैयार हुई नैनी झील की कॉन्टूर मैपिंग, झील की अधिकतम गहराई में 2.4 मीटर की गिरावट
-आगे एनआईएच से झील के आन्तरिक जल स्रोतों का सर्वे भी कराया जायेगा
Naini Lake Reportनवीन समाचार, नैनीताल, 10 फरवरी 2020। डीएम सविन बंसल प्रयासों से नैनी झील के दीर्घकालिक संरक्षण एवं आंतरिक प्रोफाईल किये जाने हेतु आईआरएस संस्थान इसरो देहरादून के वैज्ञानिकों के द्वारा नवम्बर माह के द्वितीय सप्ताह में इसकी अर्न्तजलीय संरचना, जैव विविधिता स्थिति एवं पारिस्थिक तंत्र, पेयजल शुद्धता के नवंबर माह के द्वितीय सप्ताह में किये गए विस्तृत विश्लेषण एवं परीक्षण का परिणाम काफी सुखद रहा है। डीएम बंसल ने सोमवार को जिला कार्याालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि ने नैनी झील की पहली बार तैयार कॉन्टूर मैपिंग के अनुसार झील की गहराई न्यूनतम 4 से सात मीटर, अधिकमत 24.6 मीटर तथा औसतन 9 मीटर प्राप्त हुई तथा पानी का टीडीएस 300 से 700 मिली ग्राम प्रति लीटर प्राप्त हुआ जो पानी की अच्छी गुणवत्ता को दर्शाता है। पानी का डीओ अधिकतम 7.5 मिलीग्राम प्रति लीटर व न्यूनतम 6-7 मिली ग्राम प्रतिलीटर मिला। आगे इसरो के माध्यम से प्रतिवर्ष मानसून से पहले व मानसून के बाद वर्ष में दो बार झील के पानी का परीक्षण कराया जायेगा। उल्लेखनीय है कि नैनी झील की गहराई 27 मीटर बताई जाती रही है। इस आधार पर लगता है कि झील की गहराई 2.4 मीटर घट गई है, जोकि चिंताजनक स्थिति है। किंतु ध्यान रखना होगा कि पूर्व में झील की गहराई अन्य विधियों से मापी गई है। इस परीक्षण के बाद यूएन द्वारा नैनी झील के पानी की सतत् निगरानी हेतु परियोजना स्वीकृत कर दी गयी है।

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डीएम सविन बंसल

डीएम ने बताया कि नैनी झील में किये गए बैथीमेट्री विश्लेषण कार्य के अन्तर्गत जल की गहराई की मैपिंग-लेक बैड प्रोफाईलिंग, झील का विस्तृत जल गुणवत्ता विश्लेषण, पीएच लेवल, डीओ, टीडीएस, क्लोरीन, टर्बिडिटी, सेलेनिटी आदि परीक्षण किये गये। उन्होंने बताया कि इन परीक्षणों में इसरो वैज्ञानिकों की टीम द्वारा पहली बार नैनी झील की 78 हजार बिंदुओं की गहराई मापते हुए कॉन्टूर लेक प्रोफाईल तैयार कर रिपोर्ट दी है, और झील के पानी की गुणवत्ता के आकड़ों को पहली बार जीआईएस प्रोफाईल पर प्रदर्शित करते हुए झील के विभिन्न स्थानों पर पानी की गुणवत्ता का मानचित्रीकरण किया गया है। इसरो के वैज्ञानिकों द्वारा सर्वे के उपरान्त डाटा उपलब्ध कराया गया, जिसे जिला प्रशासन के जीआईएस सेल द्वारा परिशोधन करके महत्वपूर्ण परिणाम ज्ञात किये गये।

यह होगा यूएन की स्वीकृत परियोजना में

नैनीताल। डीएम श्री बंसल ने बताया कि बैथीमेट्री स्टडी परिणामों को यूएनडीपी को उनके द्वारा प्रस्ताव बनाकर भेजा गया। फलस्वरूप यूएन द्वारा झील के पानी की सतत् निगरानी हेतु परियोजना स्वीकृत कर दी गयी है। जिसका अतिशीघ्र क्रियान्वयन किया जायेगा। उन्होंने कहा कि किसी झील का साइंटिफिक एवं प्रामाणिक डाटा उपलब्ध कराये जाने पर यूएन द्वारा भारत में पहली बार किसी झील की स्टडी प्रोजेक्ट लिया गया है। यूएन द्वारा वित्तीय एवं तकनीकी कार्य निःशुल्क किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट लगभग 55 लाख रूपये का होगा, जिसका शीघ्र एमओयू भी किया जायेगा। यूएन द्वारा झील के दोनो छोर (तल्लीताल मल्लीताल) पर जहां पेयजल हेतु पम्प लगे हैं, पर पानी की गुणवत्ता की माप हेतु सेंसर लगाये जायेंगे साथ ही जनता को झील के पानी की गुणवत्ता की जानकारी देने हेतु तल्लीताल गॉधी मूर्ति के पास पानी की गुणवत्ता प्रदर्शित करने के लिए मॉनीटर-एलईडी लगाया जायेगा। जिलाधिकारी श्री बंसल ने बताया कि इसके बाद एनआईएच से झील के आन्तरिक जल स्रोतों का सर्वे भी कराया जायेगा।

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-360 डिग्री पर घूमने वाले 4 पीटीजेड तथा 9 स्थिर कैमरों ने कार्य करना किया प्रारंभ
नवीन समाचार, नैनीताल, 27 दिसंबर 2019। सरोवरनगरी में अब रात्रि में भी नालों में गंदगी डालने वालों व नियम विरुद्ध क्रियाकलापों को अंजाम देने वाले अब प्रशासन की नजरों में होंगे। सरोवर नगरी में 13 नाइट विजन मोड वाले यानी रात्रि में भी साफ देखने वाले सीसीटीवी कैमरे चलने शुरू हो गए हैं। इनमें से चार कैमरे पीटीजेड यानी यानी‘पैन टिल्ट जूम’ प्रकार के हैं जो कि 360 डिग्री पर घूम सकते हैं और इनसे प्राप्त चित्रों को किसी छोटे स्थान पर जूम भी किया जा सकता है। यह इतने ताकतवर हैं कि तल्लीताल में लगे पीटीजेड कैमरे से नैना पीक पर मौजूद सैलानियों के क्रियाकलापों को साफ देखा जा सकता है। पीडीजेड कैमरे तल्लीताल में गांधी प्रतिमा के पास, मल्लीताल गुरुद्वारा परिसर, बीडी पांडे अस्पताल के पास और चीना बाबा मंदिर के पास ऐसे स्थानों पर लगाए गए हैं, कि इनसे पूरे शहर में नजर रखी जा सकती है। जबकि नौ अन्य कैमरे बोट हाउस क्लब मल्लीताल, तल्लीताल रिक्शा स्टैंड के पीछे नाला नंबर एक, सात नंबर से आने वाले नाला नंबर 20, बीडी पांडे अस्पताल के पास, चीना बाबा के पास स्थित नाला नंबर 23 में लगाए गए हैं। इन कैमरों के वीडियो फुटेज पर आपदा कंट्रोल रूम एवं कोतवाली मल्लीताल में बड़ी स्क्रीनों से नजर रखी जा रही है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 10 नवंबर 2019। डीएम सविन बंसल के विशेष प्रयासों से इसरो के वैज्ञानिकों का एक दल बीते शनिवार से बैथीमेट्री सर्वे के तहत सोनार पद्धति से नैनी झील का तकनीकी अध्ययन कर रहा है। इस अध्ययन के तहत वैज्ञानिकों के द्वारा अत्याधुनिक यंत्रों के माध्यम से विभिन्न स्थानों पर नैनी झील की गहराई नापी जा रही है। साथ ही झील की तलहटी में पड़े मलबे व अन्य पदार्थों का भी अध्ययन किया जा रहा है। इस अध्ययन में नैनी झील की चिंताजनक तस्वीर भी दिखाई दे रही है।

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वैज्ञानिकों को अध्ययन में नैनी झील के कई हिस्सों में काफी गंदगी एवं नैनी झील की औसत गहराई पर चिंताजनक तस्वीर दिखाई दी है। डीएम बंसल ने वैज्ञानिकों के हवाले से बताया कि पाषाण देवी मंदिर के समीप से मध्य तक क्षेत्रफल में झील की गहराई सर्वाधिक है। वहीं अभी तक झील की विधिवत तकीनीकी मैपिंग न होने के कारण अभी यह जानकारी नहीं है कि झील में कितना मलवा जमा है। लेकिन इस अध्ययन के बाद यह जानकारी रहेगी किए झील में कितना मलवा समा रहा है। उसी के हिसाब से तकनीकी कार्यवाही भी की जायेगी।

नैनी झील के संरक्षण के लिए बनेगी विशेष कार्य योजना
नैनीताल। डीएम सविन बंसल ने बताया कि नैनी झील को रिचार्ज करने वाले नालों की सफाई के साथ ही जाली लगाने का काम किया जा रहा है। साथ ही सूखाताल झील के पानी से बरसात में नैनी झील रिचार्ज करने के लिए विशेष कार्य योजना बनाई गई है। आगे सूखाताल में गड्ढे बनाए जायेंगे ताकि बरसात का पानी जमा हो और नैनी झील रिचार्ज होती रहे। इसके साथ ही सूखाताल व उसके आसपास के क्षेत्रों में वृक्षारोपण भी किया जाएगा ताकि वृक्षों के माध्यम से भी वर्षा जल सूखाताल में संकलित हो सके।

डीएम ने स्वयं देखीं वैज्ञानिकों की गतिविधियां
डीएम श्री बंसल ने रविवार को वैज्ञानिकों के साथ नैनी झील में भ्रमण कर वैज्ञानिकों द्वारा किए जा रहे तकनीकी कार्यों का मौका मुआयना किया और उनसे बात भी की। श्री बंसल ने बताया कि वैज्ञानिकों का विशेष दल पहली बार नैनी झील का इस तरह का अध्ययन कर रहा है। खास बात यह भी है कि इस महत्वपूर्ण सर्वे कार्य के लिए इसरो द्वारा किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जा रहा है। अध्ययन के तहत वैज्ञानिकों ने सोनार सिस्टम के माध्यम से नैनी झील की गहराई का जीपीएस के जरिये मानचित्रण किया, साथ ही वैज्ञानिकों के द्वारा झील में मौजूद ठोस अपशिष्ट, पीएच मान आदि के साथ ही झील के पानी की गुणवत्ता, अवसादन तथा सूचकांक का भी अध्ययन वैज्ञानिकों द्वारा किया जा रहा है। श्री बंसल ने बताया कि इसरो के वैज्ञानिक अध्ययन के उपरांत प्रशासन को झील के संबंध में रिपोर्ट आख्या प्रस्तुत करेंगे जिसे शासन को भेजा जाएगा तथा झील के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु धनरशि अवमुक्त कराने के लिए अनुश्रवण भी किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान इसरो के वरिष्ठ वैज्ञानिक वैभव गर्ग, वैज्ञानिक पंकज, इंजीनियर नमन, अभिषेक, ईशान, एसडीएम विनोद कुमार, सीओ विजय थापा आदि मौजूद रहे।

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नैनी झील में सोनार तकनीकी पर कार्य करने वाली जीपीएस युक्त ईको बोट के जरिये बैथीमैट्री विश्लेषण का अवलोकन करते डीएम सविन बंसल।

नवीन समाचार, नैनीताल, 9 नवंबर 2019। उत्तराखण्ड राज्य के 20वें स्थापना दिवस पर डीएम सविन बंसल की पहल पर राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान रुड़की के वैज्ञानिकों द्वारा नैनीझील का बैथीमैट्री विश्लेषण कार्य प्रारम्भ किया गया।
इस मौके पर श्री बंसल ने कहा कि नैनी झील झील के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए बैथीमेट्री कार्य आवश्यक है। इसके लिए विशेष प्रयास कर राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान रुड़की के वैज्ञानिकों के माध्यम से बैथीमैट्री विश्लेषण कार्य पहली बार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बैथीमैट्री विशलेषण के जरिये नैनी झील की प्रकृति तथा पानी की सतह के नीचे पानी की आंतरिक संरचनाओं मे हुए परिवर्तन, झील के दीर्घकालीन संरक्षण, झील की जल संग्रहण क्षमता विकास तथा ईको सिस्टम को बनाए रखने हेतु वैज्ञानिक द्वारा सघन अध्ययन किया जायेगा।
उन्होंने बताया कि देश-दुनिया में विख्यात नैनी झील की प्रकृति, पानी की सतह के नीचे की संरचनाओं, लैंड टोपोग्राफी, लेक फ्लोर एवं अन्य तकनीकी विषयों को ज्ञात करने के लिए बैथीमैट्री विशलेषण अति आवश्यक है। इसके लिए जलविज्ञान संस्थान रुड़की के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. वैभव गर्ग के नेतृत्व में 5 सदस्यीय तकनीकी टीम कार्य करेगी जो झील के विश्लेषण कार्य हेतु जीपीएस युक्त ईको बोट एवं सोनार तकनीकी पर कार्य करने वाले अन्य सहवर्ती उपकरणों के साथ कार्य करेगी। कहा कि विश्लेषण रिपोर्ट के आधार पर झील के संरक्षण हेतु सभी आवश्यक कदम उठाए जायेंगे। इस अवसर पर सीडीओ विनीत कुमार, एडीएम एसएस जंगपांगी, कैलाश सिंह टोलिया, एसडीएम विनोद कुमार, एआरटीओ विमल पांडे, ईओ एके वर्मा, जिला पर्यटन विकास अधिकारी अरविंद गौड़ आदि अधिकारी उपस्थित रहे।

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-ब्रिटिशकालीन रेगुलेशन गेटों की जगह अत्याधुनिक स्कॉडा तकनीक से नये गेट व जल स्तर प्रदर्शित करने का प्रबंध लगेगा
-तल्लीताल-मल्लीताल सहित चार नालों में कूड़ा-कचरा डालने वालों पर नजर रखने के लिए लगेंगे सीसीटीवी कैमरे

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नवीन समाचार, नैनीताल, 13 अक्टूबर 2019। सरोवर नगरी नैनीताल के सर्वप्रमुख आकर्षण नैनी झील के लिए अरसे बाद बड़े कार्य होने जा रहे हैं। झील में पानी के नियंत्रण के लिए अंग्रेजी दौर में बने डांठ यानी गेटों की जगह नये आधुनिक स्कॉडा तकनीक से संचालित गेटों के निर्माण हेतु डीएम सविन बंसल के प्रयासों से शासन ने 78.05 लाख की स्वीकृति प्रदान कर दी है। झील में पानी कम होने पर नये गेटों का निर्माण किया जाएगा। नये गेटों में झील का जल स्तर डिजिटल तरीके से प्रदर्शित करने का प्रबंध भी किया जाएगा। इसके साथ ही डीएम बंसल ने अपनी विवेकाधीन कोष से नैनी झील के चार प्रमुख नालों-नाला नंबर 1, 20, 21 व 23 तथा मल्लीताल नैना देवी मंदिर व बोट हाउस क्लब के समीप तथा तल्लीताल में महात्मा गांधी जी की मूर्ति के पास नालों व झील में कूड़ा डालने वालों पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी लगाने के लिए 15 लाख रुपए की धनराशि जारी कर दी है।

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डीएम सविन बंसल

डीएम श्री बंसल ने बताया कि नैनी झील के लिए जिला प्रशासन ने अभिनव डिजिटल पहल की कार्य योजना तैयार की है। नैनी झील के गेटांे पर मानसून काल में झील का स्तर बढने पर पानी की निकासी ब्रिटिशकालीन शासनकाल मे स्थापित मैकैनिकल व्हील के माध्यम से काफी कठिनाई से करनी पड़ती है। इसलिए जुलाई प्रथम सप्ताह में स्कॉडा सिस्टम से लेक ब्रिज के अपस्ट्रीम मे नये गेटों के निर्माण एवं पुराने गेटों के मरम्मत के लिए प्रस्ताव तैयार कर धनराशि उपलब्ध कराने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। इस पर शासन से 78.05 लाख की धनराशि अवमुक्त कर दी गई है। यह महत्वपूर्ण तकनीकी कार्य सिचाई विभाग की यांत्रिकी शाखा रुडकी द्वारा कराया जा रहा है। वहीं झील में पानी लाने वाले नालों से आने वाले अपशिष्ट को रोकने के लिए सीसी कैमरो के माध्यम से निगरानी हेतु उन्होंने अपने विवेकाधीन कोष से 15 लाख रुपए स्वीकृत कर दिये हैं। यह कैमरे दिन रात ऐसे लोगो की निगरानी करेगे जो नालों मे चोरी छुपे कूड़ा-कचरा आदि गंदगी डालते हैं। इन कैमरों के ऑनलाइन अनुश्रवण हेतु कलेक्ट्रेट स्थित जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र तथा सिचाई खंड नैनीताल मे नियंत्रण कक्ष स्थापित किये जायेगेे जो कि कैमरों की रिकार्डिग की मानिटरिंग करेंगे।

यह भी पढ़ें : प्रो. अजय रावत की बहुचर्चित याचिका अंतिम रूप से निस्तारित, ईको सेंसिटिव जोन, वैध-अवैध निर्माण, यातायात व नैनी झील पर हाइकोर्ट ने दिये बड़े निर्देश

नवीन समाचार, नैनीताल, 29 अगस्त 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया व न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने प्रो. अजय रावत की जनहित याचिका को अंतिम रूप से निस्तारित करते हुए नैनीताल जिला प्रशासन को नैनीताल के सूखाताल, शेर का डांडा व सात नम्बर के जोन एक व दो में आने वाले क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने के तथा पर्यटकों व स्थानीय जनता की सुविधा के अनुसार यातायात नियंत्रित करने व इस कार्य में आईआईटी दिल्ली की सलाह लेने, अवैध रूप से भवन निर्माण करने वालों पर कानूनी कार्यवाही करने के निर्देश भी शासन-प्रशासन को दिए हैं। अलबत्ता, कोर्ट कमिश्नर अनिल जोशी को छूट दी है कि यदि कोर्ट के आदेशों की अवहेलना होती है तो वे कोर्ट को अवगत करा सकते हैं। साथ ही हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को आदेश दिया है कि इस आदेश की प्रति नैनीताल के डीएम को आवश्यक कार्यवाही के लिए भेजें।
कोर्ट ने प्रो. रावत की याचिका में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार की विशेषज्ञ कमेटी द्वारा नैनीताल को इको सेंसेटिव जोन घोषित करने की संस्तुति के अनुसार सरकार को निर्देश देने की अपील पर कहा कि ऐसा निर्देश वन व पर्यावरण मंत्रालय स्वयं दे सकता है। कमेटी ने यह संस्तुति मार्च मार्च 2003 में की थी। प्रो. रावत की दूसरी प्रार्थना जिसमें नैनीताल में बड़े स्तर पर हो रहे अवैध निर्माणों को रोकने व दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की गई थी, के संदर्भ में कोर्ट ने सचिव आपदा प्रबंधन उत्तराखंड को निर्देश दिया है कि वे दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करें।

सूखाताल व संवेदनशील पहाड़ियों में हो रहे अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने के साथ ही यातायात को लेकर भी दिये बड़े निर्देश
हाईकोर्ट ने कुमाऊं आयुक्त, डीएम नैनीताल व प्राधिकरण सचिव को सूखाताल व संवेदनशील पहाड़ियों में हो रहे अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने के निर्देश दिए हैं। लेकिन सुरक्षित स्थानों में आवासीय घर बनाने की अनुमति देने हेतु कोर्ट ने छूट भी दी है। वहीं यातायात नियंत्रण के लिए कोर्ट ने डीएम व एसएसपी को कई निर्देश दिए हैं, जिसके तहत नैनीताल में 25 सीट से अधिक क्षमता का वाहन लाने की अनुमति न देने, शहर से बाहर छोटे होटल खोलने व होम स्टे योजना लागू करने, शहर से बाहर सेटेलाइट पार्किंग बनाने, माल रोड में आपातकालीन सेवा को छोड़ अन्य भारी वाहनों का प्रवेश निषिद्ध करने, अपर माल रोड में सीजन में शायं 6 से 9 बजे तक व ऑफ सीजन में 6 से 8 बजे तक यातायात बंद रखने को कहा है। इसके साथ ही कोर्ट ने नैनीताल के लिए नए टैक्सी परमिट जारी करने पर रोक लगा रखी है परंतु यदि वाहन पुराना या खटारा हो जाता है तो आरटीओ चाहे तो उसे नया परमिट जारी कर सकता है। इसके अलावा नैनी झील में सीवर की गंदगी जाने से रोकने, घोड़ों की लीद को झील में न जाने देने, नालों में मलवा न फेंकने, पेड़ों के अवैध कटान को गम्भीर अपराध मानने के निर्देश भी दिए हैं।

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-सभी नालों के मुहानों पर 6 फिट ऊंची जालियां एवं नगर में चार एसटीपी बनेंगे
Kumaon Commissioner Rajiv Rautelaनवीन समाचार, नैनीताल, 27 अगस्त 2019। नैनी झील में आने वाले पानी की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए दो बड़े कदम उठाए जाएंगे। पहला, सभी नालों के नैनी झील में गिरने वाले सिरों पर लगभग 6 फीट ऊंची जालियां लगायी जायेंगी, ताकि कूड़ा और मलबा उनमें आकर फंस जाए और झील में न जाने पाए। दूसरे नगर की सीवर लाइनें उफनकर उनकी गंदगी झील में न जाए, इस हेतु नगर में चार एसटीपी यानी सीवर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किये जाएंगे। मंगलवार को नगर की अंग्रेजी दौर में गठित हिल साइड सेफ्टी कमेटी की बैठक लेते हुए मंडलायुक्त राजीव रौतेला ने एसटीपी हेतु शहर के चार स्थानों- कैपिटल सिनेमा, मेट्रोपोल होटल, स्टैट बैंक के पास, रेमजे होस्पीटल के समीप एसटीपी बनाये जाने हेतु भूमि चयन प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए।
इस दौरान आयुक्त श्री रौतेला ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा नैनी झील के साथ ही सूखाताल के संरक्षण एवं विकास के लिए पांच करोड़ रुपए की धनराशि स्वीकृत एवं इसमें से डेढ़ करोड़ रुपए अवमुक्त कर दिये गये है। उन्होंने अधिशासी अभियंता सिंचाई हरीश चंद्र भारती को कार्यों को प्रारंभ करने के निर्देश दिए। बैठक में कमेटी के सदस्यों के द्वारा नैनी झील की दीवारों की मरम्मत का सुझाव भी दिया गया, जिस पर अधिशासी अभियंता ने बताया कि 41 करोड़ का प्रस्ताव शासन में भेजा गया है। बैठक में पर्यावरणविद डा. अजय रावत, राजीव लोचन शाह, सुदर्शन शाह, अनूप शाह, जीएल शाह, नीरज जोशी व कमल जगाती आदि ने भी महत्वपूर्ण सुझाव दिये। बैैठक में डीएम सविन बंसल, वन संरक्षक तेजस्वनी पाटिल धकाते, डीएफओ टीआर बीजु लाल, लोनिवि के एसई डीएस नबियाल, सिंचाई विभाग के पीएस पतियाल, पेयजल निगम के ईई जीएस तोमर व लोनिवि के डीएस बसनाल आदि मौजूद रहे। गौरतलब है कि नगर में एसटीपी निर्मित करने के लिए ग्रीन ट्रिब्यूनल से अल्टीमेटम मिला हुआ है। इसके बिना नगर के होटलों को बंद करने की नौबत आ सकती है। अलबत्ता, नैनी झील किनारे प्रस्तावित एसटीपी की गंदगी का कोई अंश नैनी झील में जाकर उसके पानी को दूषित न कर दे, यह देखना होगा।

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-भीमताल झील के बांध की सुरक्षा दीवारों में दरारें आने व पानी रिसने की की गई थी शिकायत

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1895 भीमताल

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p style=”text-align: justify;”>नवीन समाचार, नैनीताल, 19 अगस्त 2019। जनपद की भीमताल सरोवर की सुरक्षा दीवारों में पिछले कुछ वर्षों से आई दरारों पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने संज्ञान लिया है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस संबंध में की गयी शिकायत को उत्तराखंड के मुख्य सचिव को संदर्भित कर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है। इसके बाद प्रदेश के मुख्य सचिव ने सिचाई विभाग के सचिव से मामले में नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा है।
इस मामले में भीमताल के सामाजिक कार्यकर्ता पूरन ब्रजवासी ने गत 16 जून को प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था। ब्रजवासी का कहना था कि 1880 में भीमताल झील के पानी को बांधने के लिए बने बांध की दीवारें 139 वर्षों से झील को रोके हुए हैं, किंतु अब ये जवाब देने लगी हैं। इन दीवारों से पानी रिसने लगा है। पिछले वर्षों में यह मामला काफी प्रमुखता से उठा किंतु झील का स्वामित्व रखने वाले सिंचाई विभाग बांध की कमजोरी को नजर अंदाज कर देता है। इसलिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनकी दूसरी बार जीत की बधाई देते हुए भीमताल नगर व झील के अस्तित्व को देखते हुए झील के बांध की दीवारों का पुर्ननिर्माण करने की मांग की थी।

शिकायत के निदान की व्यवस्था में खोट

नैनीताल। सामान्यतया लोग उच्च से उच्च पदों तक अपनी शिकायत को पहुंचाते हुए यह विश्वास रखते हैं कि उनकी समस्याओं का निदान हो जाएगा। इसी विश्वास के साथ प्रदेश के मुख्यमंत्री, राज्यपाल व देश के प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति आदि से शिकायतें की जाती हैं। लेकिन देखने में आता है कि कितने ही उच्च पद तक शिकायत किये जाने के बाद उसकी जांच अन्ततः उन्ही निचले स्तर के अधिकारियों के स्तर से की जाती है, जो निचले स्तर पर की जाने वाली शिकायतों की जांच भी करते हैं, और कई बार ऊपर की गई शिकायतों के मामलों की जांच भी पूर्व में निचले स्तर पर की गयी शिकायतों पर कर चुके होते हैं। ऐसे में जांच रिपोर्ट वही आती है, जो पहले आई थी, और शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो पाती है। अब देखने वाली बात होगी कि पूर्व में भीमताल झील को कोई खतरा न बताने वाला सिचाई विभाग अब प्रधानमंत्री के स्तर पर की गयी शिकायत के बाद क्या रिपोर्ट देता है।

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p style=”text-align: justify;”>नवीन समाचार, नैनीताल, 30 जुलाई 2019। डीएम सविन बंसल के आदेशों की कड़ी में एसडीएम विनोद कुमार ने नगर के निकट की सरिताताल झील एवं इसके आस-पास फैली गंदगी की सफाई न किये जाने पर सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता के खिलाफ सीआरपीसी यानी भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 133 के तहत कार्रवाई की है। एसडीएम श्री कुमार ने बताया कि सरिताताल व इसके आसपास फैली गंदगी के बाबत तहसीलदार की जांच आख्या के आधार पर सिंचाई खंड नैनीताल के अधिशासी अभियंता विरुद्ध सीआरपीसी की धारा 133 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए आवश्यक कार्यवाही की गई है। अधिशासी अभियंता सिंचाई को आदेशित किया गया है कि वह सरिताताल एवं आस-पास की तत्काल सफाई सुनिश्चित करें एवं शपथ पत्र द्वारा अवगत करायें कि वहां पूर्ण रूप से सफाई कर ली गई है अथवा 5 अगस्त को प्रातः 11 बजे उनके-परगना मजिस्ट्रेट नैनीताल के न्यायालय में स्वयं उपस्थित होकर बतायें कि क्यों न उनके विरूद्ध सीआरपीसी की धारा 133 के तहत अंतिम कार्रवाई कर दी जाए। आगे यदि न्यायालय उनके द्वारा की गयी कार्रवाई व जवाब से संतुष्ट नहीं होता तो उनके विरुद्ध सीआरपीसी की धारा 188 के तहत दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।
उल्लेखनीय है कि गत 18 जुलाई को डीएम सविन बंसल ने स्वयं सरिताताल का निरीक्षण किया था, और सीआरपीसी की धारा 133 के तहत कार्रवाई करने की चेतावनी दी थी। इधर उन्होंने पुनः सोमवार की सुबह भी झील का निरीक्षण किया और पाया कि झील व उसके आस-पास अभी भी गंदगी फैली हुई है। यानी अधिकारियों ने डीएम के आदेश हवा में उड़ा दिये। इस पर डीएम ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए एसडीएम विनोद कुमार को 133 सीआरपीसी के अंतर्गत कार्यवाही करने के निर्देश दिए थे। इस पर एसडीएम ने तहसीलदार की जांच आख्या मंगाई, जिसमें बताया गया है कि ग्राम कुरपाखा स्थित सरिताताल में अत्यधिक मात्रा में कूड़ा-कचरा, काई, प्लास्टिक एवं मलवा आदि पड़ा है, तथा ताल के समीप स्थित शौचालय भी गंदगी से भरा पड़ा है। इससे झील के पानी पर निर्भर ग्राम कुरपाखा, मंगोली, गहलना, बजून एवं बेलुआखान वासियों के स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ने और महामारी फैलने की संभावना है।

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-नैनीताल के संरक्षण एवं विकास हेतु ‘मथन’ चिया द्वारा व्याख्यान आयोजित

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डा. पुष्किन फर्त्याल स्मृति व्याख्यान माला में वक्ताओं को सम्मानित करते डीएम सविन बंसल।

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p style=”text-align: justify;”>नवीन समाचार, नैनीताल, 29 जुलाई 2019। चिया यानी सेन्ट्रल हिमालयन इन्वायरमेन्ट एसोसियेशन नैनीताल के तत्वावधान में संस्था के पूर्व अधिशासी निदेशक स्वर्गीय डा. पुश्किन फर्त्याल की स्मृति में कुमाऊं विश्वविद्यालय के हरमिटेज सभागार में आयोजित व्याख्यान में स्थानीय विधायक संजीव आर्य ने वर्षा जल संरक्षण को आंदोलन के रूप में विकसित करने पर जोर दिया और नगर के शिक्षण संस्थानों, होटलों एवं अन्य बड़े संस्थानों से इसकी पहल करने का अपील की, ताकि नैनी झील पर निर्भरता कम की जा सके। साथ ही उन्होंने नगर में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के न होने के प्रति ध्यान आकर्षित किया। कहा कि सर्वोच्च न्यायालय व एनजीटी के आदेशों पर नगर में एसटीपी की स्थापना के लिए कुछ ही माह बचे हैं। अन्यथा नगर के होटलों व शिक्षण संस्थानों आदि के बंद होने की नौबत भी आ सकती है।
आयोजन में मूलतः प्रदेश के पर्वतीय शहरों की कैरीइंग कैपेसिटी यानी वहन क्षमता पर चर्चा की गयी। कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. केएस राणा ने कहा कि सभी समस्याओं की मूल समस्या अधिक जनसंख्या की है, और जनसंख्या को नियंत्रित किये जाने में सभी समस्याओं का समाधान निहित है। व्याख्यान के प्रथम सत्र में जीबीपीएनआईएचईएसडी के लिए वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. सुब्रत शर्मा व डा. रंजन जोशी ने पर्वतीय पर्यटन स्थल की वहन क्षमता पर उपस्थित लोगों परिचर्चा की। डीएम सविन बसंल ने कहा कि अतिक्रमण पर रोक लगाने के लिए नियमित कार्य किये जाने की जरूरत बताई। प्रो. अजय रावत ने नगर के संरक्षण के लिए पुरानी झीलों के संरक्षण के लिए बने वेटलेंड नोटिफिकेशन को लागू करने एवं नगर के विकास कार्यों में नगर की भूगर्भीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखे जाने की आवश्यकता जताई। प्रो. शेखर पाठक ने हिमालयी क्षेत्र एवं उत्तराखण्ड के परिप्रेक्ष्य में बताया कि प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों से सौ वर्ष पूर्व ही शुरू हो गया था। कहा कि पलायन रोके बिना सुनियोजित दिशा-नीति नही बनायी जा सकती है, जिससे वहन क्षमता को केन्द्रित करके पलायन की गति पर नियन्त्रण लग सकता है। चिया के अधिशासी निदेशक डा. पंकज तिवारी ने अतिथियों का स्वागत एवं अभिनन्दन किया तथा चिया द्वारा किये जा रहे कार्यो से अवगत कराया वहीं वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं चिया के सचिव डा. सुब्रत शर्मा ने कार्यक्रम के मुख्य बिन्दुओं पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में कुमाऊं विवि के यूजीसी-एचआरडीसी के निदेशक प्रो. बीएल साह, प्रो. ललित तिवारी, प्रो. राजीव उपाध्याय, प्रो. जीएल शाह, प्रो. डीएस कार्की, डा. सुचेतन शाह, डा. हरदयाल सिंह जलाल, चिया के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एके पंत, पूर्व सचिव प्रो. सीसी पंत, विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि, प्रधानाचार्य, नगर पालिका के सभासद एवं स्व. डा. फर्त्याल की पुत्री महिका फर्त्याल भी उपस्थित रही। आयोजन में दीपा उपाध्याय, प्रताप नगरकोटी, कुंदन बिष्ट, डा. प्रताप ढैला, डा. अमित मित्तल, नरेन्द्र बिष्ट, धीरज जोशी, कृष्ण कुमार टम्टा, विनीता वर्मा, अनिल कनवाल राम सिंह एवं नीमा रौतेला द्वारा सहयोग किया।

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p style=”text-align: justify;”>-रुद्रप्रयाग, तिलवाड़ा व मुनि की रेती नगर निकायों से हुई खुले कूड़ेदान हटाने की शुरुआत
-प्रदेश के शहरी विकास सचिव शैलेश बगौली ने बताया-आगे नैनीताल सहित प्रदेश के अन्य निकायों से भी खुले कूड़े दान हटाने की है योजना

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रुद्रप्रयाग में कूड़ेदानों को हटाते नगर पालिका कर्मी।

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p style=”text-align: justify;”>नवीन जोशी, नैनीताल, 21 जुलाई 2019। शहर अपने कूड़े से अधिक अपने खुले कूड़ेदानों से अधिक गंदे होते हैं। पूरे शहर को साफ कर कूड़ेदान स्वयं शहर के सबसे गंदे बन जाते हैं। लेकिन अब यह स्थिति बदलने जा रही है। राज्य सरकार की योजना शहरों को खुले कूड़े दानों से मुक्त करने की है। प्रदेश के शहरी विकास सचिव शैलेश बगौली ने बताया कि योजना की शुरुआत हो गयी है। योजना के तहत प्रदेश के रुद्रप्रयाग जिला मुख्यालय सहित जनपद के अन्य निकाय अच्छा कार्य कर रहे हैं। आगे नैनीताल सहित प्रदेश के सभी नगर निकायों को कूड़ेदानों से मुक्त करने की है।
उन्होंने बताया कि शुक्रवार को रुद्रप्रयाग नगर पालिका से 10 एवं इसी जनपद की तिलवाड़ा नगर पंचायत के वार्ड संख्या 2, 3 एवं 4 से कूड़ेदान हटा लिये गये हैं। इसी तरह टिहरी जिले की मुनि की रेती नगर निकाय ने भी बेहतर कार्य किया है। इसके बाद केवल शहरों में चुनिंदा स्थानों पर अच्छे छोटे कूड़ेदान ही रखे जाएंगे, जिनमें घूमते हुए लोग छोटी गंदगी ही डाल पाएंगे।

घर से कूड़ा एकत्रीकरण एवं पृथक्करण से आएगी खुले कूड़ेदान मुक्त होने की शुरुआत

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प्रदेश के शहरी विकास सचिव शैलेश बगौली।

नैनीताल। शहरी विकास सचिव श्री बगौली ने बताया कि शहरों को खुले कूड़ेदानों से मुक्त कराने की शुरुआत घर-घर में कूड़ा एकत्र करने और गीले व सूखे कूड़े को एकत्र करने से होगी। लोग अपने कूड़े को अपने घर पर ही गीले व सूखे कूड़े में विभक्त करके रखेंगे, तथा नगर निकाय के कर्मचारी इस विभक्त कूड़े को अलग-अलग अपने साथ ले जाएंगे। इससे कूड़े को खुले कूड़ेदानों में डालने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। बताया कि रुद्रप्रयाग के डीएम ने इस दिशा में बेहतरीन कार्य करते हुए अपने अधिकारियों की वार्डों में लोगों को जागरूक करने के लिए ड्यूटी लगाई, जिससे यह सफलता मिली है। आगे उन्होंने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों से योजना के लिए इसी तरह का सहयोग देकर शहरों को खुले कूड़ेदान व गंदगी मुक्त करने में अपना योगदान देने के निर्देश भी दिये हैं।

नैनीताल में भी हुई घर से कूड़ा एकत्रीकरण की शुरुआत

नैनीताल। प्रदेश की दूसरी सबसे पुरानी नगर पालिका नैनीताल में पूर्व में श्री बगौली के डीएम रहते ही शुरू हुई ‘मिशन बटरफ्लाई’ योजना की सफलता एवं बाद में ‘एटुजेड’ कंपनी की विफलता के बाद एक बार पुनः घर से कूड़ा एकत्रीकरण व पृथक्करण योजना की शुरुआत हो गयी है। योजना के तहत इन दिनों शहर के विभिन्न वार्डों में गीले व सूखे कूड़े के लिए अलग-अलग छोटे कूड़ेदान बांटे जा रहे हैं। अलबत्ता अभी कूड़ा घर से ले जाने का कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है।

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p style=”text-align: justify;”>-डीएम ने नैनी झील का निरीक्षण करते हुए पर सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता तथा अधिशासी अभियंता को अनुशासनात्मक तथा विभागीय कार्यवाही की चेतावनी दी
-नैनी झील के जल स्तर को मापने व नियंत्रण के लिए स्वचालित प्रणाली लगाने के भी दिये आदेश
Lake nirikshan DMनवीन समाचार, नैनीताल, 12 जुलाई 2019। डीएम सविन बंसल ने शुक्रवार सुबह नैनी झील तथा नालों का निरीक्षण करते हुए नगर के मल्लीताल स्थित सबसे बड़े नाला नंबर 23 में गंदगी पाये जाने पर सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता तथा अधिशासी अभियंता को तीन दिन के भीतर नगर के सभी नालों की सफाई दुरुस्त करने के निर्देश दिये हैं। और ऐसा न करने पर अनुशासनात्मक तथा विभागीय कार्यवाही की चेतावनी दी है। कहा कि यदि ठेकेदार द्वारा सफाई व्यवस्था में हीलाहवाली की जा रही है तो तत्काल ठेका निरस्त कर हुए ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट करें। उन्होंने तल्लीताल में झील से पानी की निकासी एवं झील के स्तर की मॉनीटरिंग के लिए लेक लेवल मैनुअल गेज-पुली सिस्टम के स्थान पर ऑटो मॉनीटरिंग तथा नियंत्रण के लिए ऑटोमैटेड स्काडा सिस्टम स्थापित करने को कहा, ताकि झील के जल स्तर तथा गेट को स्वचालित तरीके से ऑपरेट किया जा सके।
इसके साथ ही उन्होंने बरसात के दौरान झील की प्रतिदिन सुबह व शाम दो बार नियमित सफाई करने, नैना देवी मंदिर के पास ठंडी सड़क क्षेत्र में झील की क्षतिग्रस्त दीवार की मरम्मत के लिए तत्काल आगणन बनाकर प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिये। उन्होंने नालों, झील एवं आस-पास के क्षेत्रों की सफाई व्यवस्था की निगरानी के लिए जिला विकास प्राधिकरण के सचिव हरबीर सिंह तथा एसडीएम विनोद कुमार को नोडल अधिकारी नामित किया। निरीक्षण के दौरान एडीएम एसएस जंगपांगी, हरबीर सिंह, विनोद कुमार, ईई सिचाई हरीश चंद्र सिंह, डीएस बसनाल सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

नये सिस्टम से खुलेगी नालों की सफाई की पोल

नैनीताल। डीएम सविन बंसल ने दोहराया कि नगर के नालों की वास्तविक निगरानी के लिए ‘वाईफाई एनेबल्ड ऑल वेदर हाई रिजुलेशन सीसीटीवी कैमरे’ स्थापित किए जा रहे हैं। इनसे सिंचाई विभाग तथा नगर पालिका द्वारा की जा रही सफाई व्यवस्था की वास्तविकता सामने आएगी, लापरवाही पाए जाने पर इन विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यह भी पढ़ें : नालों में कूड़ा डालने वालों पर नजर रखने के लिए ड्रोन कैमरे का हुआ सफल परीक्षण…

नवीन समाचार, नैनीताल, 7 जुलाई 2019। डीएम सविन बंसल की पहल पर नैनीताल नगर में नालों पर कूड़ा-मलवा डालने वालों पर आधुनिक तरीके से नजर रखने की कड़ी में रविवार को ड्रोन कैमरे का परीक्षण किया गया। बताया जा रहा है कि नगर के मल्लीताल स्थित मस्जिद तिराहा के पास वाले नगर के सबसे बड़े नाला नंबर 23 व बीडी पांडे जिला चिकित्सालय के पास के नाला नंबर 20-21 पर डीजेआई कंपनी की ओर से ड्रोन कैमरे की करीब 10 मिनट की सफल परीक्षण उड़ानें हुईं। बताया जा रहा है कि आगे इसी कंपनी के माध्यम से नगर के सभी नालों पर कूड़ा डालने वालों, अतिक्रमण करने वालों आदि पर इसी तरह ड्रोन कैमरों से नजर रखी जा सकती है।

यह भी पढ़ें : नालों में कूड़ा डालने वालों पर नजर रखने को होगा वाईफाई सुविधा युक्त नया प्रबंध…

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p style=”text-align: justify;”>-बलियानाला क्षेत्र में भूस्खलन पर नजर रखने को भी लगेंगे वाईफाई युक्त हाई रिजुलेशन ऑल वेदर सीसीटीवी कैमरे
नवीन समाचार, नैनीताल, 6 जुलाई 2019। नैनीताल की विश्व प्रसिद्ध नैनी झील के लिए सकारात्मक खबर है। नैनीताल नगर में नालों में कूड़ा, मलवा डालने वालों व अतिक्रमण करने वालों और नगर पालिका तथा सिंचाई विभाग द्वारा की जाने वाली नालों की सफाई व्यवस्था पर पैनी नजर बनाए रखने के लिए संवेदनशील स्थानों पर तीसरी ऑख के रूप में ‘वाईफाई युक्त हाई रिजुलेशन ऑल वेदर सीसीटीवी कैमरे’ लगाये जाने की कवायद शुरू कर दी गई हैं। डीएम सविन बंसल ने बताया कि इन कैमरों की प्रतिदिन मोनीटरिंग एवं पर्यवेक्षण करने के लिए जिला कन्ट्रोल रूम तथा एलडीए में कन्ट्रोल डिसप्ले लगाते हुए प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी। नालों में कूड़ा डालने वालों के चालान करते हुए आपदा अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत कड़ी कार्यवाही की जाएगी।
श्री बंसल ने नैनीताल झील को नगर की जीवर रेखा एवं इसमें गिरने वाले नालों को झील की धमनियां बताते हुए नालों में कूड़ा एवं मलवा डालने तथा अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि नैनीताल शहर में स्थित विभिन्न नालों के अलग-अलग स्थानों पर कूड़ा तथा भवन निर्माण सामाग्री तथा मलवा डाले जाने से वर्षा के दौरान नालियॉ अवरूद्ध होने से बहाव सड़क एवं पहाड़ियों से होते हुए परिसम्पत्तियों को नुकसान पहुंचता है, जिससे जान-माल के नुकसान की संभावना बनी रहती है। विगत वर्षो में नालों के बहाव अवरूद्ध होने के कारण आपदा जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई थी ,जिससे माल रोड पर भारी मलवा जमा होने से माल रोड धंस गई थी तथा जन-जीवन एवं यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ था तथा इसके पुर्नस्थापना में काफी समय एवं धन भी व्यय हुआ था। उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे नालों एवं झील के विभिन्न स्थानों पर सीसीटीवी लगाने हेतु ऐसे स्थान चुनें जहां से नालों की रियल टाईम मॉनीटरिंग एवं पर्यवेक्षण किया जा सके। उन्होंने बताया कि अतिसंवेदनशील बलियानाला के ‘स्लोप क्रोनिक डेवलपमेंट मोनीटरिंग’ एवं प्रतिकूल स्थिति पर पैनी नजर रखते हुए प्रतिकूल स्थिति में रेस्पोंस टाईम कम करने के लिए भी तीसरी ऑख के रूप में वाईफाई इनेबल्ड हाई रिजुलेशन ऑल वेदर सीसीटीवी कैमरे सहायक होंगे।

यह भी पढ़ें : हाई कोर्ट ने बरसाती पानी पर जल संस्थान को दिए सिर्फ 2 हफ्ते…

नवीन समाचार, नैनीताल, 19 जनवरी, 2019। सरोवरनगरी नैनीताल की वैश्विक पहचान बनाने वाली नैनी झील में इसके जलागम क्षेत्र की पानी की बूंद-बूंद को लाने और इसमें आई हर बूंद को बचाकर इसे संरक्षित करने के लिए उत्तराखंड हाईकोर्ट ने नैनीताल नगर में छतों से गिरने वाले बारिश के पानी को सीवर लाइन में डालने के मामले को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने जल संस्थान को नगर में चिह्नित ऐसे 215 मामलों में दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति नारायण सिंह धानिक की संयुक्त खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। नैनीताल नगर के सामाजिक कार्यकर्ता कमल त्रिपाठी ने इस मामले में जनहित याचिका दायर की है। सुनवाई के दौरान याची के अधिवक्ता विपुल शर्मा ने कोर्ट में बताया कि नगर के कई भवनों के छतों का पानी सीवर से जोड़ कर रखा गया है। इसके चलते नगर में होने वाली बारिश का साफ पानी नैनी झील में जाने के बजाय नगर से बाहर चला जाता है। वहीं सीवर लाइन पर इसके दबाव के कारण माल रोड सहित कई अन्य स्थानों पर सीवर लाइन ओवर फ्लो होकर गंदा पानी नैनीझील में जाता है,जो सही नहीं है। सुनवाई के दौरान जल संस्थान की ओर से कोर्ट में बताया गया कि ऐसे भवनों का सर्वे किया गया है। जिसमें 215 मामले सामने आए हैं। इनमें निजी और सरकारी भवन शामिल हैं। इस पर कोर्ट ने सख्त नारजगी व्यक्त करते हुए जल संस्थान से सभी भवनों के सीवर से संयोजन हटाने के कहा और इसके लिए दो सप्ताह का समय दिया है।

यह भी पढ़ें : नैनी झील के संरक्षण के लिए बड़ा समाचार: सिचाई विभाग ने बनाया 17 करोड़ रुपये का प्लान

-बदले जाएंगे अंग्रेजों के जमाने में बने झील के डांट (गेट), तल्लीताल में लगेगा बड़ा इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले बोर्ड, वर्षा जल संग्रहण का पूरा प्रबंध भी होगा

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p style=”text-align: justify;”>नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 19 जनवरी, 2019। सरोवरनगरी नैनीताल की वैश्विक पहचान बनाने वाली नैनी झील में इसके जलागम क्षेत्र की पानी की बूंद-बूंद को लाने और इसमें आई हर बूंद को बचाकर इसे संरक्षित करने के लिए सिचाई विभाग ने करीब 17 करोड़ रुपये की लागत से नैनी झील को बचाने का मास्टर प्लान तैयार किया गया है। इस बजट से नगर के बरसाती पानी को झील में लाने, झील की सफाई करने, नालों के मुहानों की मरम्मत, झील के किनारों की मरम्मत एवं झील में पानी घोलने की पहले से चल रही एरिएशन की प्रक्रिया को और बेहतर किया जाएगा। इस बाबत विस्तृत प्रस्ताव पर शुक्रवार को देहरादून शासन की वित्त व्यय समिति की बैठक भी हो चुकी है।
सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता एमसी पांडेय ने इस बाबत विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि योजना के अंतर्गत नैनीताल नगर के नैनी झील के जगागम क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पूरे क्षेत्र का वर्षा जल संग्रहण का प्रबंधन किया जाएगा। इसके तहत नैनी झील में पानी लाने वाले सभी 64 नालों का रिस्टोरेशन, इस हेतु शहर के घरों की छतों में गिरने वाले बरसाती पानी को नालों से जोड़ने, ताकि उनका पानी झील में पहुंचे उनके झील में पहुंचने वाले मुहानों का सुधार, सूखाताल में बरसात के पानी को रोक कर इसे झील के रूप में स्थापित करने के कार्य भी किये जाएंगे। वहीं शुक्रवार की देहरादून में हुई बैठक से लौटे अधीक्षण अभियंता नरेंद्र सिंह पतियाल ने कहा कि इसी माह 23 जनवरी को होने वाली अगली बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने की पूरी उम्मीद है।

झील को जल स्तर मांपने और प्रदशित करने का सिस्टम भी बदलेगा

नैनीताल। योजना के तहत नैनी झील के जल स्तर को मापने और इसे प्रदर्शित करने की मौजूदा व्यवस्था भी पूरे एक करोड़ रुपये खर्च कर बदली जाएगी। उल्लेखनीय है कि अब तक चल रही अंग्रेजी दौर की व्यवस्था के तहत संभवतया उस दौर के सबसे निचले स्तर को शून्य स्तर माना जाता है, जबकि नैनी झील की गहराई करीब 27 मीटर मानी जाती है। ऐसे में झील का जल स्तर शून्य बताये जाने के दौरान भी झील में 20 मीटर से अधिक जल होता है और इसे शून्य कहे जाने से भ्रमपूर्ण स्थिति भी बनती है। वहीं जल स्तर को बताने के लिए भी अंग्रेजी दौर की ही अंकों को लटकाने की व्यवस्था है। इनमें से अधिकांश अंक हवा में उड़कर गायब भी हो चुके हैं। वहीं सिचाई विभाग के मुख्य अभियंता एमसी पांडे ने बताया कि नयी व्यवस्था के तहत झील के आधार से जल स्तर की माप की जाएगी और इसे तल्लीताल डांठ, फांसी गधेरा अथवा किसी अन्य ऐसे सुविधाजनक स्थान पर लगाया जाएगा जहां से नगर के आम लोग एवं सैलानी झील के स्तर, पानी की गुणवत्ता आदि के बारे में जान सकें, एक विशाल इलेक्ट्रॉनिक बोर्ड के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। इस बोर्ड में नगर के तापमान, बारिश, आर्द्रता आदि के बारे में जानकारियां प्रदर्शित की जाएंगी।

सात करोड़ में बनेता भरा सूखाताल

नैनीताल। योजना के तहत सात करोड़ रुपये में सूखाताल को झील के रूप में विकसित एवं पुर्नस्थापित किया जाएगा। इसके लिये क्षेत्र के सूखाताल के बेड की सफाई कर इसकी गहराई इसके मूल स्तर तक बढ़ाई जाएगी एवं इसके जलागम क्षेत्र के नालों को सूखाताल से जोड़ा जाएगा, ताकि बरसात में यह झील भर जाए, और आगे पूर्व की तरह लंबे समय तक नैनी झील को रिसाव के जरिये पानी पहुचाकर रिचार्ज करते रहें।

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p style=”text-align: justify;”>Plasticनैनीताल, 23 सितंबर 2018। ईश्वर प्रदत्त प्रकृति से अधिक शक्तिमान कुछ भी नहीं। मनुष्य एक-दूसरे को, शासन-प्रशासन भले जनता और न्यायालय को बेवकूफ बना लें, किंतु ईश्वर और उसके अंग प्रकृति की आंखों में धूल नहीं झोंक सकते। रविवार को भी कुछ ऐसा ही हुआ। नगर में हुई बारिश के बाद नैनी झील ने नगर की सफाई व्यवस्था और प्रशासन के पॉलीथीन उन्मूलन के प्रयासों की पूरी तरह से पोल-खोल कर रख दी। नैनी झील की सतह पर इतनी अधिक मात्रा में प्लास्टिक उभर कर आ गयी कि कई लोगों से देखी न जा सकी। ऐसे में कुछ नाविकों ने ही बिना (बिना अखबारनवीसों को सूचना दिये या पहले से किसी कभी लक्ष्य पूरा न किये जाने के लिये चलाये जाने वाले प्रशासनिक अभियानों की तरह कोई घोषणा किये) झील की सतह पर इकट्ठा हुई प्लास्टिक को झील से हटाया।
Plastic1उल्लेखनीय है कि नगरवासी और प्रशासनिक जिम्मेदार विभाग इस वर्ष मानवीय हरकतों-प्लास्टिक इत्यादि के कारण नालों-नालियों के चोक होने से लोवर माल रोड के नैनी झील में समाने और उधर बेरोकटोक निर्माणों की वजह से पानी के रिसाव से बलियानाला के रईस होटल क्षेत्र में हुए अब तक के सबसे बड़े भूस्खलन के बावजूद अपनी हरकतों से कोई सबक नहीं ले रहे हैं। इसकी परिणति-कीमत भविष्य में किस रूप में नगर को चुकानी पड़ सकती है, इसका किसी को अंदाजा भी नहीं है।

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नैनीताल समाचार : नगर पालिका के एक पर्यावरण मित्र कर्मी की संदेहास्पद मृत्यु

नवीन समाचार, नैनीताल, 24 अक्तूबर 2019। बुधवार रात्रि नगर में नगर पालिका के एक पर्यावरण मित्र कर्मी की संदेहास्पद तरीके से मृत्यु हो गई। मल्लीताल कोतवाली पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार 40 वर्षीय बिजेंद्र पुत्र स्वर्गीय सुंदर लाल अपने घर में सोया था। सोते हुए ही वह अचेत हो गया। इस पर परिजन उसे … Read more

उत्तराखंड की पहाड़ियों में 3 अक्तूबर से होगा भारत-कजाकिस्तान की सेनाओं का संयुक्त सैन्य अभ्यास

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American armyनवीन समाचार, नैनीताल, 27 सितंबर 2019। भारत तथा कज़ाकिस्तान की सेनाओं के संयुक्त सेैन्य अभ्यास ‘काज़िंद-2019’ का आयोजन 3 अक्टूबर 2019 से 15 अक्टूबर 2019 के बीच उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में किया जायेगा। दोनों देषों के 100 सैनिकों की टुकड़ी इस संयुक्त युद्धाभ्यास में हिस्सा लेगी। इस दौरान वे विभिन्न सैन्य ऑपरेशनों एवं आतंकवाद विरोधी जवाबी कार्रवाई के अनुभवों को एक दूसरे से साझा करेगें। शुक्रवार को प्रेस को जारी विज्ञप्ति के जरिये सेना की प्रवक्ता ने बताया कि संयुक्त सैन्य अभ्यास काज़िंद-2019 एक वार्षिक कार्यक्रम है जो दोनों देशों में बारी-बारी से आयोजित किया जाता है। कज़ाकिस्तान के साथ आयोजित होने वाले इस सैन्य अभ्यास को वैश्विक आतंकवाद के बदलते परिदृष्य में एक महत्वपूर्ण सैन्य अभ्यास बताया गया है। कंपनी स्तर पर आयोजित होनेवाले इस सैन्य अभ्यास का उद्देश्य पहाड़ी क्षेत्रांे में आतंकवाद विरोधी ऑपरेशनों को अंजाम देना है। सैन्य अभ्यास के दौरान वैश्विक आतंकवाद और हाइब्रिड युद्ध के उभरते रूझानों के विभिन्न पहलुओं को वर्तमान समय के साथ-साथ वैश्विक परिदृष्यों में समकालीन प्रभावों के कारण भी शामिल किया गया है। साथ ही उम्मीद जताई गई है कि यह संयुक्त सैन्य अभ्यास दोनों देशों के बीच आपसी रक्षा सहयोग को बढ़ाने के साथ ही द्विपक्षीय संबंधों को प्रगाढ बनाने में मददगार सिद्ध होगा।

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-अमेरिकी जनरल ने जताई भारतीय सेना के साथ अंतरराष्ट्रीय शांति मिशन में काम करने की चाह

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p style=”text-align: justify;”>नवीन समाचार, रानीखेत, 29 सितंबर 2018। भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण अभ्यास-2018 का शनिवार को एक भव्य समारोह के साथ चौबटिया (उत्तराखंड) में समापन हो गया। इस मौके पर अमेरिकी जनरल ने कहा कि वह पिछले दो सप्ताह से चल रहे प्रक्षिक्षण से काफी संतुष्ट व प्रसन्न हैं। यकीनन भारतीय सेना विश्व की सर्वश्रेष्ठ सेनाओं में से एक है और युद्ध अभ्यास 2018 पूरी तरह से सफल सिद्ध हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में अमेरिकी सेना भारतीय सेना के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय शांति मिशन में काम करना चाहेगी। वहीं सैन्य अभ्यास में शामिल गरुड़ डिवीजन के कमांडर मेजर जनरल कविंद्र सिंह ने कहा कि यह युद्ध अभ्यास अति लाभप्रद सिद्ध हुआ है जिसमें दोनों देशों की सेनाओं ने अंतरराष्ट्रीय शांति मिशन में एक साथ काम करने की काबिलियत में सक्षमता हासिल की है।
समापन अवसर पर दोनों देशों की सैन्य दलों ने शानदार परेड की, जिसकी सलामी अमेरिकी सेना के मेजर जनरल विलियम ग्राहम, डिप्टी कमांडिंग जनरल 1 कोर तथा भारतीय सेना से गरुड़ डिवीजन कमांडर मेजर जनरल कविन्द्र सिंह ने संयुक रुप से ली। समुद्र तल से तकरीबन सात हजार फीट की ऊँचाई पर घने जंगलों में पिछले दो सप्ताह से दोनों पक्षों द्वारा आतंकवाद विरोधी अभियानों जैसे कि रेड, कॉर्डन और खोज-बचाव आदि के लिए अभ्यास किया गया। आतंकवादियों की निगरानी, ट्रैकिंग और पहचान, लड़ाई के लिए विशेषज्ञ हथियार का उपयोग, आईईडी तटस्थ करने और प्रभावी संचार स्थापित करने के लिए कला उपकरणों के उपयोग पर भी जोर दिया गया। भारतीय व अमेरिकी सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस परेड को देखा।
गौरतलब है कि भारतीय सेना की 15 गढ़वाल राइफल्स व अमेरिका से 1-23 इन्फैंट्री रेजीमेंट ने फील्ड ट्रेनिंग अभ्यास तथा कमांड पोस्ट अभ्यास में भारतीय सेना की गरूड डिवीजन तथा अमेरिकी सेना की सातवीं इन्फैंट्री डिवीजन ने भाग लिया, तथा 14 डोगरा व 13 सिख ने भी दिया।

नैनीताल की खूबसूरती देख लड़ना भूल बैठी अमेरिकी सेना !

नैनीताल, 23 सितंबर 2018। चौबटिया-रानीखेत में भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य युद्धाभयास-2008 के लिए आई अमेरिकी सेना प्रकृति के स्वर्ग कही जाने वाली सरोवरनगरी नैनीताल की प्राकृतिक खूबसूरती के आकर्षण में ऐसी खोई कि युद्ध और युद्धाभ्यास भूल बैठी। दो वर्ष पूर्व भी नैनीताल आये अमेरिकी सेना के कुछ सैनिकों के दिलो-दिमाग पर शायद नैनीताल की खूबसूरती का ऐसा असर था कि वे पहाड़ों की रानी कहे जाने वाले रानीखेत और डिलीसियस सेब की नगरी चौबटिया छोड़ रविवार का समय निकालकर नैनीता आ गये और यहां इस दौरान हो रही भारी बारिश के बावजूद अमेरिकी सैनिकों व सैन्य अधिकारियों ने अमेरिकी जनरल विलियम ग्राहम की अगुवाई में नगर का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने नगर की शान माल रोड के साथ ही नैनी झील, भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत उच्च स्थलीय प्राणि उद्यान यानी नैनीताल चिड़ियाघर और मल्लीताल स्थित गुरुद्वारा गुरुसिंह सभा सहित अनेक अन्य स्थानों पर यहां की खूबसूरत वादियों का लुप्त उठाया और यहां की संस्कृति की झलक भी देखी, तथा इसकी काफी प्रशंसा की। भ्रमण के दौरान भारतीय सेना की ओर से चौबटिया 99 ब्रिगेड के कर्नल हर्ष मिश्रा व अन्य लोग भी उनके साथ रहे। विदित हो रानीखेत चौबटिया में भारत-अमेरिका का 14वां संयुक्त युद्धाभ्यास पिछली 16 सितंबर से चल रहा है जो 29 सितंबर तक चलेगा। संयुक्त युद्धाभ्यास कार्यक्रम में अमेरिकी सेना के 350 सैनिक व सैन्य अधिकारीयो का दल प्रतिभाग कर रहा है। रविवार को वे भारत की सांस्कृतिक झलक देखने के लिए नैनीताल पहुंचे थे।

यह भी पढ़ें : मोदी की कूटनीति का असर: भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास इस तरह हुआ शुरू

नवीन समाचार, चौबटिया, रानीखेत 16 सितंबर 2018। भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास-2018 का शुरूआती समारोह आज उत्तराखंड के चौबटिया में आयोजित किया गया । इस समारोह की शुरूआत राष्ट्रगान – ‘जन गण मन ….’ एवं ‘द स्टार स्पैन्गल्ड बैनर’ के साथ हुई। इस अवसर पर दोनों देशों के झंडे फहराये गये। भारतीय एवं अमेरिकी सैनिक एक दूसरे के साथ खड़े रहे तथा समारोह के दौरान दोनों देशों के दो वरिष्ठ सैन्यधिकारियों को रस्मी सैल्यूट दिये

Indo American Yuddhabhyas1इस संयुक्त युद्धाभ्यास में अमेरिकी सेना की ओर से प्रथम इंफैन्ट्री बटालियन, 23 इंफैन्ट्री रेजिमेन्ट, 2 स्ट्राइकर ब्रिगेड कॉम्बैट टीम, 7 इंफैन्ट्री डिविजन ने प्रतिनिधित्व किया जबकि भारतीय सेना की ओर से कांगो ब्रिगेड, गरूड़ डिविजन, सूर्या कमान ने प्रतिनिधित्व किया। इस अवसर पर गरूड़ डिविजन के जनरल ऑफीसर कमांडिंग ने अमेरिकी सैनिकों का स्वागत किया तथा उन्होंने अपने उद्घाटन भाशण में भारत और अमेरिका की इस प्रकार की साझेदारी को प्रजातंत्र, स्वतंत्रता, समानता एवं न्याय को दोनों देशों के लिए मूल्यवान बताया।

इस दो सप्ताह तक चलनेवाले सैन्य युद्धाभ्यास में अमेरिकी सेना तथा भारतीय सेना के सूर्या कमान की ओर से बराबर संख्या में सैन्य टुकड़ियॉं हिस्सा ले रही हैं। इस युद्धाभ्यास के दौरान जवाबी एवं आतंकवाद विरोधी कार्रवाईयों से निपटने की उनकी कार्यकुशलता तथा तकनीकी कौशल देखने को मिलेगा। इस युद्धाभ्यास में दोनों देशों की सेनाओं की ओर से निगरानी तथा ट्रेकिंग, उपकरण, आतंकवादियों से निपटने के लिए विशेष हथियारों, विस्फोटक और आईईडी डिटेक्टर्स अथवा नवीनतम संचार उपकरणों का प्रयोग किया जायेगा। दोनों देश संयुक्त रूप से किसी प्रकार के खतरों से निपटने के लिए एक सुविकसित कुशल ड्लि को अमल में लाकर योजनाबद्ध तरीके से प्रशिक्षण लेगें जिसे संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के लिए आयोजित ऑपरेशनों में प्रयोग किया जा सके। दोनों देशों के सैन्य विशेषज्ञ पारस्परिक लाभ हेतु विविध विषयों पर एक दूसरे के अनुभवों को साझा करने के लिए विचार-विमर्श भी करेगें।

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उत्तराखंड में एक वरिष्ठ अधिकारी को जबरन किया सेवानिवृत्त, अपनी तरह का पहला मामला

नवीन समाचार, नैनीताल, 19 सितंबर 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने पहली बार कार्य में लेटलतीफी सहित अन्य कारणों से एक वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी को 50 वर्ष की आयु में जबरन सेवानिवृत्ति दे दी है। हाई कोर्ट की स्थापना के बाद किसी वरिष्ठ न्यायिक अफसर को जबरन रिटायर करने का यह पहला मामला है। हाई कोर्ट … Read more

कमाल: सात दिन में 4400 किमी का सफर तय कर सुदूर रामेश्वरम पहुंचे हल्द्वानी के दो यार…

Bikingनवीन समाचार, हल्द्वानी, 15 सितंबर 2019। बाइकिंग के शौकीन शहर के दो युवा बाइकर अवनीश राजपाल व योगेश जोशी विश्व शांति, पर्यावरण संरक्षण, रक्तदान जागरूकता, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसे कई संदेश लेकर 4400 किमी सड़क नापकर बाइक से रामेश्वरम (तमिलनाडु) पहुंच गए हैं। दोनों इसी माह सात सितंबर को ‘एक भारत, मेरा भारत’ का संकल्प लेकर हल्द्वानी से निकले थे, और उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्टड्ढ्र, कर्नाटक, केरल होते हुए तमिलनाडु पहुंच गए हैं। आगे उनका इसी सप्ताह वापस हल्द्वानी लौटने का भी कार्यक्रम है। बताया गया है कि वे पूर्व में हल्द्वानी से कन्याकुमारी की यात्रा कर चुके हैं। इस यात्रा में उन्होंने भारत के छह ज्योतिर्लिंगों-महाकाल उज्जैन व ओमकारेश्वर (मध्य प्रदेश), घृष्णेश्वर, त्रयंबकेश्वर, भीमाशंकर (महाराष्ट्र) एवं रामेश्वरम (तमिलनाडु) के अलावा र्साइं समाधि स्थल शिरडी, शनि शिंगणापुर आदि के भी दर्शन लाभ प्राप्त किये हैं।

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दुनियां में (एक देश में) सर्वाधिक बाइकिंग के लिये गिनीज बुक में दर्ज हुआ नैनीताल के गौरव का नाम

  • दुनिया में किसी एक देश में एक यात्रा में सर्वाधिक दूरी तक मोटर साइकिल चलाने का बनाया विश्व रिकार्ड
  • अमेरिकी रिकार्ड को डेढ़ गुने के अंतर से तोड़ा

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राष्ट्रीय सहारा, 1 मार्च 2018

नवीन जोशी, नैनीताल। जी हां, दुनियां में (एक देश में) एक साथ सर्वाधिक दूरी तक मोटर साइकिल चलाने के लिये नैनीताल के ‘बावरे-घुमक्कड़’ गौरव सिद्धार्थ बिष्ट का नाम ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में दर्ज कर लिया गया है। गौरव ने 17 सितंबर 2015 से 23 अप्रैल 2017 के भारत में अपनी नारंगी रंग की ‘बावरी’ नाम की हीरो इम्पल्स मोटरसाइकिल 115,093.941 किमी (71,708 मील) चलाकर यह सफलता अर्जित की है। इसके बाद कड़ी जांच के उपरांत उन्हें ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ ने प्रमाण पत्र जारी कर दिया है।

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उल्लेखनीय है कि एक देश में एक यात्रा में सर्वाधिक दूरी तक मोटरसाइकिल चलाने का गिनीज बुक में दर्ज यह रिकार्ड अब तक अमेरिकी महिला बाइकर डेनेल लिन के नाम पर अमेरिका में 48,600 मील यानी 78,214.118 किमी चलने का था, जो उन्होंने 19 सितंबर 2014 से 29 अगस्त 2015 के बीच अमेरिका के सभी 48 राज्यों से गुजरकर बनाया था। इस तरह गौरव ने करीब डेढ़ गुने के अंतर से यह रिकॉर्ड तोड़ा है। गौरव ने इस रिकॉर्ड को भारत के 70वें स्वतंत्रता दिवस पर 15 अगस्त 2017 के दिन तोड़ा था। इसका प्रमाण पत्र उन्हें अब प्राप्त हो गया है।

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किसानों के मुद्दे पर प्रदेश के मुख्य सचिव को हाईकोर्ट की फटकार..

नवीन समाचार, नैनीताल, 30 अगस्त 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने प्रदेश के किसानों की आत्महत्या व बदहाली के मामले की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रदेश के मुख्य सचिव फटकार लगाते हुए 4 सप्ताह के भीतर कारण बताने संबंधी शपथ पत्र पेश करने के आदेश दिये हैं। शुक्रवार को शांतिपुरी ऊधमसिंह नगर निवासी किसान … Read more

सुखद संभावना: उत्तराखंड के जंगलों में अब जहां आग लगेगी, वहीं होगी बादलों से बारिश..

-क्लाउड सीडिंग के जरिये कृत्रिम बारिश से वनाग्नि रोकने की संभावनाओं पर सऊदी अरब से चल रही है बात -तमिलनाडु व कर्नाटक पहले कर चुके हैं प्रयोग, अगले साल उत्तराखंड में शुरू हो सकता है प्रयोग नवीन समाचार, देहरादून, 4 जून 2019। वनाग्नि से पर्यावरण व जैव विविधता को बड़े पैमाने पर हो रहे नुकसान … Read more

नैनीताल के ‘इनसाइक्लोपीडिया’ गंगा प्रसाद साह पंचतत्व में विलीन

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-85 वर्ष की उम्र में शनिवार सुबह तड़के ली थी आखिरी सांस
-नगर पालिका, डीएसए, श्रीराम सेवक सभा, हिल साइड सेफ्टी कमेटी, जिला महिला हॉकी संघ सहित अनेक संस्थाओं-संगठनों से रहा जुड़ाव
नैनीताल। सरोवरनगरी के कला, संस्कृति, खेल प्रेमी एवं जीवंत ‘इनसाइक्लोपीडिया’ कहे जाने वाले रंगकर्मी एवं राज्य आंदोलनकारी गंगा प्रसाद साह रविवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। रविवार सुबह पाइंस स्थित श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार कर दिया। उनके एकमात्र पुत्र अतुल साह व पौत्र शिवम साह ने उनकी चिता को मुखाग्नि दी। इस मौके पर एसडीएम अभिषेक रुहेला, पूर्व विधायक डा. नारायण सिंह जंतवाल, पूर्व पालिकाध्यक्ष संजय कुमार संजू व मुकेश जोशी, इतिहासकार डा. शेखर पाठक, भूगोलविद् डा. जीएल साह, कुमाऊं विवि के उपकुलसचिव बहादुर सिंह बिष्ट, पूर्व सभासद जगदीश बवाड़ी, आनंद बिष्ट व मनोज अधिकारी तथा तिब्बती शरणार्थी फाउंडेशन के अध्यक्ष पेमा गेकिल शिथर सहित तहसीलदार एवं नगर के विभिन्न संगठनों एवं संस्थाओं व विभागों से जुड़े लोग मौजूद रहे। इससे पूर्व उत्तराखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बीके बिष्ट भी उनके घर पर अंतिम दर्शनों को पहुंचे।

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गूगल ने चिपको आन्दोलन पर डूडल बनाकर बढाया उत्तराखंड का मान

चिपको से रहा है उत्तराखण्ड की महिलाओं के आन्दोलन का इतिहास

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गौरा देवी

महिलाएं उत्तराखंड की दैनिक काम-काज से लेकर हर क्षेत्र में धूरी हैं। कदाचित वह पुरुषों के नौकरी हेतु पलायन के बाद पूरे पहाड़ का बोझ अपने ऊपर ढोती हैं। विश्व विख्यात चि‍पको आंदोलन और शराब विरोधी आंदोलनों से उनका आन्दोलनों का इतिहास रहा है। वनों को बचाने हेतु रैणी गांव की एक साधारण परंतु असाधारण साहस वाली महिला ‘गौरा देवी ने 21 मार्च 1974 को अपने गांव के पुरुषों की अनपुस्थिति में जिस सूझबूझ व साहस का परि‍चय दिया, वह चिपको आंदोलन के रूप में इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित होने के साथ ही अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन गया। जब उन्होंने व विभाग के कर्मचारि‍यों ने पेड़ों को काटने का वि‍रोध किया और न मानने पर वो तकरीबन 30 अन्य महिलाओं के साथ पेड़ों पर चि‍पक गई जिससे पेड़ काटने वालों को उल्टे पैर वापस जाना पड़ा। इस घटना के बाद 1975 में गोपेश्‍वर व 1978 में बद्रीनाथ समेत अनेक क्षेत्रों में महिलाओं ने वि‍रोध कर जंगलों को काटने से बचाया।

बकौल गिर्दा, यह रहा चिपको-वनान्दोलन का प्रभाव

‘हम भोले-भाले पहाड़ियों को हमेशा ही सबने छला है। पहले दूसरे छलते थे, और अब अपने छल रहे हैं। हमने देश-दुनिया के अनूठे ‘चिपको आन्दोलन’ वाला वनान्दोलन लड़ा, इसमें हमें कहने को जीत मिली, लेकिन सच्चाई कुछ और थी।’ गिर्दा को वनान्दोलन के परिणामस्वरूप पूरे देश के लिए बने वन अधिनियम से जनता के हक-हकूकों पर और अधिक पाबंदियां आयद कर दिए जाने की गहरी टीस थी। 1972 से शुरू हुऐ पहाड़ के एक छोटे से भूभाग का वन आंदोलन, चिपको जैसे विश्व प्रसिद्ध आंदोलन के साथ ही पूरे देश के लिए वन अधिनियम 1980 का प्रणेता भी रहा। लेकिन यह सफलता भी आंदोलनकारियों की विफलता बन गई। दरअसल शासन सत्ता ने आंदोलनकारियों के कंधे का इस्तेमाल कर अपने हक-हुकूक के लिए आंदोलन में साथ दे रहे पहाड़वासियों से उल्टे उनके हक-हुकूक और बुरी तरह छीन लिऐ थे, और आंदोलनकारियों को अपने ही लोगों के बीच गुनाहगार की तरह खड़ा कर दिया था। आंदोलन में अगली पंक्ति में रहे गिर्दा को आखिरी दिनों में यह टीस बहुत कष्ट पहुंचाती थी। उनके अनुसार ‘1972 में वनांदोलन शुरू होने के पीछे लोगों की मंशा अपने हक-हुकूकों को बेहतरी से प्राप्त करने की थी। यह वनों से जीवन-यापन के लिए अधिकार लेने की लड़ाई थी। सरकार स्टार पेपर मिल सहारनपुर को कौड़ियों के भाव यहां की वन संपदा लुटा रही थी। इसके खिलाफ आंदोलन हुआ, लेकिन जो वन अधिनियम मिला, उसने स्थितियों को और अधिक बदतर कर दिया। इससे जनभावनाऐं साकार नहीं हुईं। वरन, जनता की स्थिति बद से बदतर हो गई। तत्कालीन पतरौलशाही के खिलाफ जो आक्रोष था, वह आज भी है। औपनिवेषिक व्यवस्था ने ‘जन’ के जंगल के साथ ‘जल’ भी हड़प लिया। वन अधिनियम से वनों का कटना नहीं रुका, उल्टे वन विभाग का उपक्रम-वन निगम और बिल्डर वनों को वेदर्दी से काटने लगे। साथ ही ग्रामीण भी परिस्थितियों के वशीभूत ऐसा करने को मजबूर हो गऐ। अधिनियम का पालन करते हुए वह अपनी भूमि के निजी पेड़ों तक को नहीं काट सकते है। उन्हें हक-हुकूक के नाम पर गिनी चुनी लकड़ी लेने के लिए भी मीलों दूर जाना पड़ता है। इससे उनका अपने वनों से आत्मीयता का रिस्ता खत्म हो गया है। वन जैसे उनके दुश्मन हो गऐ, जिनसे उन्हें पूर्व की तरह अपनी व्यक्तिगत जरूरतों की चीजें तो मिलती नहीं, उल्टे वन्यजीव उनकी फसलों और उन्हें नुकसान पहुंचा जाते हैं। इसलिऐ अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए ग्रामीण महिलाऐं वनाधिकारियों की नजरों से बचने के फेर में बड़े पेड़ों की टहनियों को काटने की बजाय छोटे पेड़ों को जल्द काट गट्ठर बना उनके निसान तक छुपा देती हैं। इससे वनों की नई पौध पैदा ही नहीं हो रही। पेड़-पौधों का चक्र समाप्त हो गया है। अब लोग गांव में अपना नया घर बनाना तो दूर उनकी मरम्मत तक नहीं कर सकते। लोगों का न अपने निकट के पत्थरों, न लकड़ी की ‘दुंदार’, न ‘बांस’ और न छत के लिऐ चौड़े ‘पाथरों’ पर ही हक रह गया है। पास के श्रोत का पानी भी ग्रामीण गांव में अपनी मर्जी से नहीं ला सकते। अधिनियम ने गांवों के सामूहिक गौचरों, पनघटों आदि से भी ग्रामीणों का हक समाप्त करने का शडयंत्र कर दिया। उनके चीड़ के बगेटों से जलने वाले आफर, हल, जुऐ, नहड़, दनेले बनाने की ग्रामीण काष्ठशालायें, पहाड़ के तांबे के जैसे परंपरागत कारोबार बंद हो गऐ। लोग वनों से झाड़ू, रस्सी को ‘बाबीला’ घास तक अनुमति बिना नहीं ला सकते। यहां तक कि पहाड़ की चिकित्सा व्यवस्था का मजबूत आधार रहे वैद्यों के औषधालय भी जड़ी बूटियों के दोहन पर लगी रोक के कारण बंद हो गऐ। दूसरी ओर वन, पानी, खनिज के रूप में धरती का सोना बाहर के लोग ले जा रहे हैं, और गांव के असली मालिक देखते ही रह जा रहे हैं। गिर्दा वन अधिनियम के नाम पर पहाड़ के विकास को बाधित करने से भी अत्यधिक चिंतित थे। उनका मानना था कि विकास की राह में अधिनियम के नाम पर जो अवरोध खड़े किऐ जाते हैं उनमें वास्तविक अड़चन की बजाय छल व प्रपंच अधिक होता है। जिस सड़क के निर्माण से राजनीतिक हित न सध रहे हों, वहां अधिनियम का अड़ंगा लगा दिया जाता है।

पर्यावरण-रक्षा के लिए “चिपको आंदोलन”

(26 मार्च 2018) 45 वर्ष पूर्व 1973 में (तत्‍कालीन उत्‍तर प्रदेश) वर्तमान में उत्तराखंड राज्य के पर्वतीय अंचल के गढ़वाल मंडल में चिपको आंदोलन की शुरुआत हुई थी.चिपको आन्दोलन एक पर्यावरण-रक्षा का आन्दोलन रहा..दरअसल तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने जंगल की जमीन को खेल का सामान बनाने वाली एक कंपनी को देने का फैसला कर लिया था.. ग्रामीणों ने वृक्षों की कटाई का विरोध करने के लिए इस आंदोलन की रूपरेखा तय की..वे राज्य के वन विभाग के ठेकेदारों द्वारा वनों की कटाई का विरोध कर रहे थे और उन पर अपना परम्परागत अधिकार भी जता रहे थे..पेड़ों के कटान के इस फैसले का विरोध करने के लिए ग्रामीण विशेष रूप से महिलाएं पेड़ों के चारों तरफ घेरा बनाकर उससे चिपक जाती थीं.. इससे पेड़ों को काटना मुश्किल हो गया..
स्‍थानीय महिलाओं की अगुआई में शुरू हुए इस आंदोलन का प्रसार चंडी प्रसाद भट्ट और उनके एनजीओ “दशौली ग्राम स्वराज्य संघ” ने भी किया..व इस महान कार्य में विद्वान गांधीवादी विचारक सुंदरलाल बहुगुणा ने इस आंदोलन को दिशा दी और उन्‍होंने तत्‍कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से पेड़ों की कटाई रोकने का आदेश देने की अपील की.. उसका नतीजा यह हुआ कि केंद्र की कांग्रेसनीत इंदिरा गांधी सरकार ने 15 वर्षों के लिए पेड़ों की कटाई को बैन कर दिया.. धूम सिंह नेगी, बचनी देवी, गौरा देवी और सुदेशा देवी इस आंदोलन से जुड़ी प्रमुख हस्तियां थीं..केवल उपरोक्त वर्णित नाम ही नही वरन गाँव के गाँव इस आंदोलन में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने लगे..इस शांत विरोध आंदोलन की सफलता के बाद यह आंदोलन देश के अन्‍य हिस्‍सों में भी फैलने लगा..
‘चिपको आन्दोलन’ का उदघोष रहा…
“क्या हैं जंगल के उपकार, मिट्टी, पानी और बयार।
मिट्टी, पानी और बयार, जिन्दा रहने के आधार।”
 सन १९८७ में इस आन्दोलन को सम्यक जीविका पुरस्कार (Right Livelihood Award) से भी सम्मानित किया गया..
कुलमिलाकर पर्यावरण की रक्षा के लिए जब रैणि गाँव उत्तराखंड की पाँचवी कक्षा तक पढ़ी गौरा देवी की भूमिका इतिहास में दर्ज हो सकती है तो पढ़ा लिखा समाज कब जागेगा..क्योंकि आज की स्थितियाँ 1973 में शुरू हुए चिपको आंदोलन से भी कठिन हो गई हैं..लोग जननायक तो चाहते हैं पर करना कुछ नही चाहते..इसलिए वनों के विलुप्त होने में पढ़े-लिखे समाज को ही ज्यादा जिम्मेदार कहा जायेगा..पेड़ों की उपलब्धता में विश्व में 180 देशों में हुए सर्वे में भारत 177 वें स्थान पर आसीन है..सरकारों को भी वनों ,वनाश्रितों के हितों को सुरक्षित करने के लिए कड़े कानून बनाने चाहिए..अन्यथा महंगाई,भ्रष्टाचार के मुद्दे भी गौण हो जाएंगे क्योंकि जनजीवन के लिए अतिआवश्यक तत्व ऑक्सीजन की भारी कमी हो जाएगी…
-संजय नागपाल नैनीताल

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  • ‘विक्टोरिया पदक’ व ‘कम्पेनियन इंडियन एम्पायर अवार्ड-सीआईएम’ जैसे अनेक पुरस्कारों से सम्मानित प्रथम भारतीय थे नैन सिंह 
  • गूगल ने उन्हें बताया है, ‘उनके द्वारा नापे गए पर्वतों (हिमालय) की तरह अडिग विश्वास वाला व्यक्ति’
  • अनपढ़ होते हुए भी स्कूल खोलने व शिक्षक के रूप में कार्य करने पर मिली थी ‘पंडित’ की पदवी
  • अपने बराबर कदमों से चलकर और कंठी माला पर कदमों को गिनकर नापे थे हिमालय पर स्थित ‘एशिया की पीठ’ और बनाए थे मानचित्र

नवीन जोशी, नैनीताल। दुनिया का सबसे बड़ा खोज इंजन यूं हर खास मौके पर एक नया डूडल बनाने के लिए भी विख्यात है। किंतु आज 21 अक्टूबर को उसने जो डूडल बनाया है उसे देश के साथ खासकर उत्तराखंड वासियों का सिर गर्व से ऊंचा हो गया है, और वे दीपावली-भैया दूज पपर गूगल से मिले इस खास तोहफे को शायद कभी न भुला पाएं। यह तोहफा है गूगल द्वारा आज के दिन के लिये बनाया गया डूडल, जिसमें हाथ में कंठी माला पकड़े एक व्यक्ति को हिमालय के खूबसूरत पहाड़ों व नदी को सलाम करते हुए दिखाया गया है। गूगल पर अपना मनपसंद विषय खोजने वाली पूरी दुनिया आज इस शख्श के बारे में जानने को उत्सुक है। गूगल ने उन्हें ‘उनके द्वारा नापे गए पर्वतों (हिमालय) की तरह अडिग विश्वास वाला व्यक्ति’ बताया है। उत्तराखंड के लिये गर्व करने वाली बात यह है कि यह शख्श महान अन्वेषक, सर्वेक्षक और मानचित्रकार, हिमालय पुत्र पंडित नैन सिंह रावत हैं, और देश के गिने-चुने व्यक्तियों में शुमार और उत्तराखंड के ऐसे पहले व्यक्ति हो गए हैं, जिनके 187वें जन्मदिन पर गूगल ने आज उन पर खास डूडल बनाया है।

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