Himalaya Glacier Avalanche Himskhlan
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नवीन समाचार, चमोली, 1 मार्च 2025 (Big accident in Uttarakhand-Avalanche in Chamoli) उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में हो रही बर्फबारी के बीच भारत-चीन (तिब्बत) सीमा क्षेत्र स्थित माणा कैंप के पास शुक्रवार को भीषण हिमस्खलन हुआ। इस दौरान वहां निर्माण कार्य में लगे 55 मजदूर बर्फ में दब गये थे। इनमें से 46 सुरक्षित हैं, जबकि आठ की मौत हो गई। रविवार को लापता सभी चार श्रमिकों के शव रेस्क्यू टीम ने बरामद कर लिए हैं।

जबकि चार श्रमिकों के शव शनिवार को बरामद हो गए थे। रविवार को एक अन्य घायल को एम्स ऋषिकेश के लिए रेफर कर दिया गया है, जबकि एक घायल श्रमिक शनिवार को रेफर किया गया था। इसके साथ ही तीन दिनों से चला आ रहा रेस्क्यू अभियान भी समाप्त हो गया।

मृतकों में यह शामिल 

मृतकों में मोहिंदर पाल (42 वर्षीय) पुत्र देशराज निवासी कांगड़ा हिमाचल प्रदेश, हरमेश चंद (31 वर्षीय) पुत्र ज्ञान चंद निवासी ऊना हिमाचल प्रदेश, आलोक यादव निवासी कानपुर, उत्तर प्रदेश, मंजीत यादव पुत्र शंभू निवासी सरवन, उत्तर प्रदेश, जितेंद्र सिंह (26 वर्षीय) पुत्र कुलवंत सिंह, बिलासपुर, उत्तर प्रदेश, अशोक (28 वर्षीय) पुत्र रामपाल निवासी फतेहपुर उत्तर प्रदेश, अनिल (21 वर्षीय) पुत्र इश्वरी दत्त निवासी रुद्रपुर उधम सिंह नगर उत्तराखंड व अरविंद निवासी देहरादून उत्तराखंड शामिल हैं।

दुर्घटना का विवरण

Imageशुक्रवार सुबह लगभग 7:15 बजे माणा गांव के निकट बीआरओ के एक शिविर पर हिमस्खलन हुआ। इस शिविर में 57 श्रमिक मौजूद थे, जो माणा से माणा दर्रा तक सड़क चौड़ीकरण और पक्कीकरण के कार्य में लगे थे। हिमस्खलन के कारण श्रमिक बर्फ में दब गए।

बचाव अभियान की प्रगति

घटना की सूचना मिलते ही भारतीय सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की टीमें मौके पर पहुंचीं और बचाव कार्य शुरू किया। अब तक 50 श्रमिकों को बर्फ से बाहर निकाला गया है, जिनमें से चार की मृत्यु हो चुकी है। पांच श्रमिक अभी भी लापता हैं, जिनकी खोज जारी है।

मौसम की चुनौतियाँ

बचाव कार्य में भारी बर्फबारी और खराब मौसम के कारण कठिनाइयाँ आ रही हैं। क्षेत्र में छह फीट तक बर्फ जमा है, जिससे बचाव दलों को मार्ग अवरुद्ध होने और दृश्यता कम होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

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प्रशासन की प्रतिक्रिया

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना पर गहरा दुःख व्यक्त किया है और बचाव कार्यों की निगरानी के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया है। उन्होंने भगवान बद्री विशाल से सभी श्रमिक भाइयों के सुरक्षित होने की प्रार्थना की है।

क्षेत्र की संवेदनशीलता

हिमालयी क्षेत्र अपनी पारिस्थितिक संवेदनशीलता के लिए जाना जाता है और यहाँ ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव के कारण हिमस्खलन और बाढ़ जैसी घटनाएँ बढ़ रही हैं। 2022 में, उत्तराखंड में एक हिमस्खलन में 27 पर्वतारोहियों की मृत्यु हुई थी, जबकि 2021 में एक ग्लेशियर टूटने से आई बाढ़ में 200 से अधिक लोग मारे गए थे।

प्रधानमंत्री मोदी ने सीएम धामी से फ़ोन पर बात कर जनपद चमोली के माणा में फंसे श्रमिकों को सुरक्षित निकालने के लिए चलाए जा रहे रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी ली। साथ ही उन्होंने प्रदेश में हो रही बारिश और हिमपात की स्थिति पर भी विस्तृत जानकारी ली। इस दौरान प्रधानमंत्री ने केंद्र सरकार की ओर से किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए हर संभव सहायता प्रदान किए जाने का आश्वासन दिया।

हिमस्खलन में फंसे मजदूरों की खोज जारी

पुलिस व संबंधितों से प्राप्त जानकारी के अनुसार हिमस्खलन की चपेट में जम्मू-कश्मीर, पंजाब और उत्तर प्रदेश के मजदूर आए हैं। ये सब बीआरओ की कार्यदायी संस्था के मजदूर हैं।  बताया जा रहा है कि  बर्फबारी के बीच आज सुबह कुबेर पर्वत से कंटेनर के ऊपर हिमस्खलन हो गया। जिसमें सो रहे बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) के 57 मजदूर इसकी चपेट में आ गए।

आईटीबीपी ने रेस्क्यू ऑपरेशन बंद किया

भारी बर्फबारी के चलते आईटीबीपी ने रेस्क्यू ऑपरेशन बंद कर दिया है। आईटीबीपी के जवान माणा गांव में वापस अपने कैंप में लौट गए है। जिलाधिकारी संदीप तिवारी ने बताया कि जिस स्थान पर हिमस्खलन हुआ है वहां करीब आठ फीट तक बर्फ जम गई है। मौसम सामान्य होने पर फिर से रेस्क्यू चलाया जाएगा।

(Big accident in Uttarakhand-Avalanche in Chamoli) उत्तराखंड के चमोली में भयंकर एवलांच, 57 मजदूर फंसे, 10 को निकाला, जारी है  रेस्क्यू ऑपरेशन- Navbharat Live (नवभारत) - Hindi News | avalanche in  chamoli uttarakhand 57 people ...क्षेत्र में संचार सेवा ठप, वायु सेना से मांगी मदद

क्षेत्र में मौसम खराब होने के कारण संचार सेवा ठप हो गयी है। चमोली के जिलाधिकारी संदीप तिवारी ने बताया कि माणा और माणा पास के बीच हिमस्खलन की सूचना मिलते ही राहत कार्य शुरू कर दिया गया। सेना, आईटीबीपी और एनडीआरएफ की टीमें खोज एवं बचाव अभियान में लगी हैं। वायु सेना से भी सहायता मांगी गयी है।

बर्फबारी ने बढ़ाई मुश्किलें

बदरीनाथ मार्ग का हनुमान चट्टी से आगे का हिस्सा बर्फबारी के कारण अवरुद्ध हो गया है, जिससे एनडीआरएफ की टीम माणा कैंप तक नहीं पहुंच पाई है। पिछले तीन दिनों से लगातार हो रही बर्फबारी के कारण बदरीनाथ धाम, हेमकुंड साहिब, फूलों की घाटी, रुद्रनाथ, लाल माटी, नंदा घुंघटी, औली, गोरसों, नीती और माणा घाटी में भारी बर्फ जमा हो चुकी है।

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बीआरओ कैंप को नुकसान

उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय के प्रवक्ता आईजी नीलेश आनंद भरणे ने बताया कि माणा में सीमा सड़क संगठन के कैंप के पास हुए हिमस्खलन में निर्माण कार्य में लगे 57 मजदूर दब गये हैं। इनमें से 10 को बचा लिया गया है और गंभीर रूप से घायल मजदूरों को सेना कैंप में चिकित्सकीय सहायता दी जा रही है। अन्य को निकालने के प्रयास जारी हैं।

मुख्यमंत्री ने की मजदूरों की सुरक्षा की प्रार्थना

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चमोली में हुए हिमस्खलन पर चिंता व्यक्त करते हुए राहत और बचाव कार्यों को तेज करने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रभावित मजदूरों को हर संभव सहायता उपलब्ध करायेगी। साथ ही उन्होंने मजदूरों की सुरक्षा और शीघ्र बचाव की प्रार्थना की। (Big accident in Uttarakhand-Avalanche in Chamoli, Chamoli News, Uttarakhand News, Big accident in Uttarakhand, Avalanche in Chamoli)

रैणी आपदा की दिलाई याद (Big accident in Uttarakhand-Avalanche in Chamoli)

चमोली में हुए इस हिमस्खलन ने वर्ष 2021 में रैणी गांव में हुई आपदा की याद दिला दी, जब ग्लेशियर टूटने के कारण ऋषिगंगा में आयी बाढ़ से 206 लोगों की मृत्यु हो गयी थी और कई आज भी लापता हैं। (Big accident in Uttarakhand-Avalanche in Chamoli, Chamoli News, Uttarakhand News, Big accident in Uttarakhand, Avalanche in Chamoli)

राज्य आपातकालीन परिचालन केन्द्र द्वारा जनपद उत्तरकाशी, चमोली, रूद्रप्रयाग, टिहरी गढ़वाल, देहरादून, पिथौरागढ़ एवं बागेश्वर में भारी वर्षा एवं बर्फबारी के दृष्टिगत जिलाधिकारियों को जारी किए गए आवश्यक दिशा-निर्देश :

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By डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार

‘डॉ.नवीन जोशी, वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार, 'कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले पत्रकार' एवं मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 140 मिलियन यानी 1.40 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।

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