EnglishInternational Phonetic Alphabet – SILInternational Phonetic Alphabet – X-SAMPASystem input methodCTRL+MOther languagesAbronAcoliадыгэбзэAfrikaansअहिराणीajagbeBatak AngkolaአማርኛOboloالعربيةঅসমীয়াаварتۆرکجهᬩᬮᬶɓasaáBatak Tobawawleбеларускаябеларуская (тарашкевіца)Bariروچ کپتین بلوچیभोजपुरीभोजपुरीẸdoItaŋikomBamanankanবাংলাབོད་ཡིག།bòo pìkkàbèromबोड़ोBatak DairiBatak MandailingSahap Simalunguncakap KaroBatak Alas-KluetbuluburaብሊንMə̀dʉ̂mbɑ̀нохчийнchinook wawaᏣᎳᎩکوردیAnufɔЧăвашлаDanskDagbaniдарганdendiDeutschDagaareThuɔŋjäŋKirdkîडोगरीDuáláÈʋegbeefịkẹkpeyeΕλληνικάEnglishEsperantoفارسیmfantseFulfuldeSuomiFøroysktFonpoor’íŋ belé’ŋInternational Phonetic AlphabetGaगोंयची कोंकणी / Gõychi Konknni𐌲𐌿𐍄𐌹𐍃𐌺𐌰 𐍂𐌰𐌶𐌳𐌰ગુજરાતીfarefareHausaעבריתहिन्दीछत्तीसगढ़ी𑢹𑣉𑣉HoHrvatskiհայերենibibioBahasa IndonesiaIgboIgalaгӀалгӀайÍslenskaawainAbꞌxubꞌal PoptiꞌJawaꦗꦮქართული ენაTaqbaylit / ⵜⴰⵇⴱⴰⵢⵍⵉⵜJjuадыгэбзэ (къэбэрдеибзэ)KabɩyɛTyapkɛ́nyáŋGĩkũyũҚазақшаភាសាខ្មែរಕನ್ನಡ한국어kanuriKrioकॉशुर / 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अक्टूबर 2019 के बीच उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में किया जायेगा। दोनों देषों के 100 सैनिकों की टुकड़ी इस संयुक्त युद्धाभ्यास में हिस्सा लेगी। इस दौरान वे विभिन्न सैन्य ऑपरेशनों एवं आतंकवाद विरोधी जवाबी कार्रवाई के अनुभवों को एक दूसरे से साझा करेगें। शुक्रवार को प्रेस को जारी विज्ञप्ति के जरिये सेना की प्रवक्ता ने बताया कि संयुक्त सैन्य अभ्यास काज़िंद-2019 एक वार्षिक कार्यक्रम है जो दोनों देशों में बारी-बारी से आयोजित किया जाता है। कज़ाकिस्तान के साथ आयोजित होने वाले इस सैन्य अभ्यास को वैश्विक आतंकवाद के बदलते परिदृष्य में एक महत्वपूर्ण सैन्य अभ्यास बताया गया है। कंपनी स्तर पर आयोजित होनेवाले इस सैन्य अभ्यास का उद्देश्य पहाड़ी क्षेत्रांे में आतंकवाद विरोधी ऑपरेशनों को अंजाम देना है। सैन्य अभ्यास के दौरान वैश्विक आतंकवाद और हाइब्रिड युद्ध के उभरते रूझानों के विभिन्न पहलुओं को वर्तमान समय के साथ-साथ वैश्विक परिदृष्यों में समकालीन प्रभावों के कारण भी शामिल किया गया है। साथ ही उम्मीद जताई गई है कि यह संयुक्त सैन्य अभ्यास दोनों देशों के बीच आपसी रक्षा सहयोग को बढ़ाने के साथ ही द्विपक्षीय संबंधों को प्रगाढ बनाने में मददगार सिद्ध होगा।यह भी पढ़ें : ऐसा क्या हुआ कि भारतीय सेना के साथ युद्धाभ्यास के बाद ‘शांति’ की बात करने लगे अमेरिकी जनरल ?-अमेरिकी जनरल ने जताई भारतीय सेना के साथ अंतरराष्ट्रीय शांति मिशन में काम करने की चाहयह भी पढ़ें : उत्तराखंड में नई समस्या बने नीले ड्रम, ‘देशी गीजर’ बनाकर हो रही बिजली चोरी, रुड़की ऊर्जा निगम की कार्रवाई में 148 नीले ड्रम बरामद...< p style=”text-align: justify;”>नवीन समाचार, रानीखेत, 29 सितंबर 2018। भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण अभ्यास-2018 का शनिवार को एक भव्य समारोह के साथ चौबटिया (उत्तराखंड) में समापन हो गया। इस मौके पर अमेरिकी जनरल ने कहा कि वह पिछले दो सप्ताह से चल रहे प्रक्षिक्षण से काफी संतुष्ट व प्रसन्न हैं। यकीनन भारतीय सेना विश्व की सर्वश्रेष्ठ सेनाओं में से एक है और युद्ध अभ्यास 2018 पूरी तरह से सफल सिद्ध हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में अमेरिकी सेना भारतीय सेना के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय शांति मिशन में काम करना चाहेगी। वहीं सैन्य अभ्यास में शामिल गरुड़ डिवीजन के कमांडर मेजर जनरल कविंद्र सिंह ने कहा कि यह युद्ध अभ्यास अति लाभप्रद सिद्ध हुआ है जिसमें दोनों देशों की सेनाओं ने अंतरराष्ट्रीय शांति मिशन में एक साथ काम करने की काबिलियत में सक्षमता हासिल की है। समापन अवसर पर दोनों देशों की सैन्य दलों ने शानदार परेड की, जिसकी सलामी अमेरिकी सेना के मेजर जनरल विलियम ग्राहम, डिप्टी कमांडिंग जनरल 1 कोर तथा भारतीय सेना से गरुड़ डिवीजन कमांडर मेजर जनरल कविन्द्र सिंह ने संयुक रुप से ली। समुद्र तल से तकरीबन सात हजार फीट की ऊँचाई पर घने जंगलों में पिछले दो सप्ताह से दोनों पक्षों द्वारा आतंकवाद विरोधी अभियानों जैसे कि रेड, कॉर्डन और खोज-बचाव आदि के लिए अभ्यास किया गया। आतंकवादियों की निगरानी, ट्रैकिंग और पहचान, लड़ाई के लिए विशेषज्ञ हथियार का उपयोग, आईईडी तटस्थ करने और प्रभावी संचार स्थापित करने के लिए कला उपकरणों के उपयोग पर भी जोर दिया गया। भारतीय व अमेरिकी सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस परेड को देखा। गौरतलब है कि भारतीय सेना की 15 गढ़वाल राइफल्स व अमेरिका से 1-23 इन्फैंट्री रेजीमेंट ने फील्ड ट्रेनिंग अभ्यास तथा कमांड पोस्ट अभ्यास में भारतीय सेना की गरूड डिवीजन तथा अमेरिकी सेना की सातवीं इन्फैंट्री डिवीजन ने भाग लिया, तथा 14 डोगरा व 13 सिख ने भी दिया।नैनीताल की खूबसूरती देख लड़ना भूल बैठी अमेरिकी सेना !नैनीताल, 23 सितंबर 2018। चौबटिया-रानीखेत में भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य युद्धाभयास-2008 के लिए आई अमेरिकी सेना प्रकृति के स्वर्ग कही जाने वाली सरोवरनगरी नैनीताल की प्राकृतिक खूबसूरती के आकर्षण में ऐसी खोई कि युद्ध और युद्धाभ्यास भूल बैठी। दो वर्ष पूर्व भी नैनीताल आये अमेरिकी सेना के कुछ सैनिकों के दिलो-दिमाग पर शायद नैनीताल की खूबसूरती का ऐसा असर था कि वे पहाड़ों की रानी कहे जाने वाले रानीखेत और डिलीसियस सेब की नगरी चौबटिया छोड़ रविवार का समय निकालकर नैनीता आ गये और यहां इस दौरान हो रही भारी बारिश के बावजूद अमेरिकी सैनिकों व सैन्य अधिकारियों ने अमेरिकी जनरल विलियम ग्राहम की अगुवाई में नगर का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने नगर की शान माल रोड के साथ ही नैनी झील, भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत उच्च स्थलीय प्राणि उद्यान यानी नैनीताल चिड़ियाघर और मल्लीताल स्थित गुरुद्वारा गुरुसिंह सभा सहित अनेक अन्य स्थानों पर यहां की खूबसूरत वादियों का लुप्त उठाया और यहां की संस्कृति की झलक भी देखी, तथा इसकी काफी प्रशंसा की। भ्रमण के दौरान भारतीय सेना की ओर से चौबटिया 99 ब्रिगेड के कर्नल हर्ष मिश्रा व अन्य लोग भी उनके साथ रहे। विदित हो रानीखेत चौबटिया में भारत-अमेरिका का 14वां संयुक्त युद्धाभ्यास पिछली 16 सितंबर से चल रहा है जो 29 सितंबर तक चलेगा। संयुक्त युद्धाभ्यास कार्यक्रम में अमेरिकी सेना के 350 सैनिक व सैन्य अधिकारीयो का दल प्रतिभाग कर रहा है। रविवार को वे भारत की सांस्कृतिक झलक देखने के लिए नैनीताल पहुंचे थे।यह भी पढ़ें : दो बच्चों की मां का भतीजे ने चुराया दिल, प्रेम विवाह कर दोनों घर चलाने बन गए 'बंटी-बबली' जैसे चोर और….यह भी पढ़ें : मोदी की कूटनीति का असर: भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास इस तरह हुआ शुरूनवीन समाचार, चौबटिया, रानीखेत 16 सितंबर 2018। भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास-2018 का शुरूआती समारोह आज उत्तराखंड के चौबटिया में आयोजित किया गया । इस समारोह की शुरूआत राष्ट्रगान – ‘जन गण मन ….’ एवं ‘द स्टार स्पैन्गल्ड बैनर’ के साथ हुई। इस अवसर पर दोनों देशों के झंडे फहराये गये। भारतीय एवं अमेरिकी सैनिक एक दूसरे के साथ खड़े रहे तथा समारोह के दौरान दोनों देशों के दो वरिष्ठ सैन्यधिकारियों को रस्मी सैल्यूट दिये‘नवीन समाचार’ की ओर से पाठकों से विशेष अपील:3 जून 2009 से संचालित उत्तराखंड का सबसे पुराना डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘नवीन समाचार’ अपने आरंभ से ही उत्तराखंड और देश-दुनिया की सटीक, निष्पक्ष और जनहित से जुड़ी खबरें आप तक पहुँचाने का प्रयास करता आ रहा है। हिंदी में विशिष्ट लेखन शैली हमारी पहचान है। हमारा उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक आवाज को मजबूती से सामने लाना, स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता देना और हिंदी पत्रकारिता को जीवित रखना है। हमारे प्रत्येक समाचार एक लाख से अधिक लोगों तक और हर दिन लगभग 10 लाख बार पहुंचते हैं। आज के समय में स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता को बनाए रखना आसान नहीं है। डिजिटल मंच पर समाचारों के संग्रह, लेखन, संपादन, तकनीकी संचालन और फील्ड रिपोर्टिंग में निरंतर आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता होती है। ‘नवीन समाचार’ किसी बड़े कॉर्पोरेट या राजनीतिक दबाव से मुक्त रहकर कार्य करता है, इसलिए इसकी मजबूती सीधे-सीधे पाठकों के सहयोग से जुड़ी है। ‘नवीन समाचार’ अपने सम्मानित पाठकों, व्यापारियों, संस्थानों, सामाजिक संगठनों और उद्यमियों से विनम्र अपील करता है कि वे विज्ञापन के माध्यम से हमें आर्थिक सहयोग प्रदान करें। आपका दिया गया विज्ञापन न केवल आपके व्यवसाय या संस्थान को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँचाएगा, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता को भी सशक्त बनाएगा। अग्रिम धन्यवाद। इस संयुक्त युद्धाभ्यास में अमेरिकी सेना की ओर से प्रथम इंफैन्ट्री बटालियन, 23 इंफैन्ट्री रेजिमेन्ट, 2 स्ट्राइकर ब्रिगेड कॉम्बैट टीम, 7 इंफैन्ट्री डिविजन ने प्रतिनिधित्व किया जबकि भारतीय सेना की ओर से कांगो ब्रिगेड, गरूड़ डिविजन, सूर्या कमान ने प्रतिनिधित्व किया। इस अवसर पर गरूड़ डिविजन के जनरल ऑफीसर कमांडिंग ने अमेरिकी सैनिकों का स्वागत किया तथा उन्होंने अपने उद्घाटन भाशण में भारत और अमेरिका की इस प्रकार की साझेदारी को प्रजातंत्र, स्वतंत्रता, समानता एवं न्याय को दोनों देशों के लिए मूल्यवान बताया।इस दो सप्ताह तक चलनेवाले सैन्य युद्धाभ्यास में अमेरिकी सेना तथा भारतीय सेना के सूर्या कमान की ओर से बराबर संख्या में सैन्य टुकड़ियॉं हिस्सा ले रही हैं। इस युद्धाभ्यास के दौरान जवाबी एवं आतंकवाद विरोधी कार्रवाईयों से निपटने की उनकी कार्यकुशलता तथा तकनीकी कौशल देखने को मिलेगा। इस युद्धाभ्यास में दोनों देशों की सेनाओं की ओर से निगरानी तथा ट्रेकिंग, उपकरण, आतंकवादियों से निपटने के लिए विशेष हथियारों, विस्फोटक और आईईडी डिटेक्टर्स अथवा नवीनतम संचार उपकरणों का प्रयोग किया जायेगा। दोनों देश संयुक्त रूप से किसी प्रकार के खतरों से निपटने के लिए एक सुविकसित कुशल ड्लि को अमल में लाकर योजनाबद्ध तरीके से प्रशिक्षण लेगें जिसे संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के लिए आयोजित ऑपरेशनों में प्रयोग किया जा सके। दोनों देशों के सैन्य विशेषज्ञ पारस्परिक लाभ हेतु विविध विषयों पर एक दूसरे के अनुभवों को साझा करने के लिए विचार-विमर्श भी करेगें।यह भी पढ़ें : नैनीताल में फर्जी गाइड ने पर्यटक की कार लेकर की क्षतिग्रस्त, मालरोड पर पेड़ और डस्टबिन से टकराकर हुआ फरार, पुलिस तलाश में जुटी<p style=”text-align: justify;”>गुरुवार को दोनों देशों के बीच हुआ था अहम रक्षा करार गुरुवार को भारत और अमेरिका के बीच पहली ‘टू प्लस टू’ वार्ता के बाद यहां दोनों के बीच एक रक्षा करार पर हस्ताक्षर हुए जिसके तहत भारतीय सेना को अमेरिका से महत्वपूर्ण और एन्क्रिप्टिड (कूट रूप से सुरक्षित) रक्षा प्रौद्योगिकियां मिलेंगी। ‘टू प्लस टू’ वार्ता में दोनों देशों ने सीमापार आतंकवाद, एनएसजी की सदस्यता के भारत के प्रयास और विवादित एच1बी वीजा के मुद्दों पर चर्चा की।विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की अमेरिकी विदेश मंत्री माइकल आर पोम्पिओ तथा रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस से वार्ता में दोनों देशों ने उनके बीच हॉटलाइन भी स्थापित करने का फैसला किया। स्वराज ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रथम वार्ता के एजेंडे पर संतोष जताया और इसमें हुई बातचीत का ब्योरा रखा।पोम्पिओ ने ‘संचार, संगतता, सुरक्षा समझौता’ (कॉमकोसा) को संबंधों में ‘मील का पत्थर’ करार दिया, वहीं सीतारमण ने कहा कि करार भारत की रक्षा क्षमता और तैयारियों को बढ़ाएगा। कॉमकोसा करार होने के बाद भारत अमेरिका से महत्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकियां हासिल कर सकेगा और अमेरिका तथा भारतीय सशस्त्र बलों के बीच अंतर सक्रियता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण संचार नेटवर्क तक भारत की पहुंच होगी। यह करार अमेरिका से मंगाए गए रक्षा प्लेटफॉर्मों पर उच्च सुरक्षा वाले अमेरिकी संचार उपकरणों को लगाने की भी इजाजत देगा।स्वराज ने कहा कि यह वार्ता दोनों देशों के नेतृत्व की रक्षा और सुरक्षा मुद्दों पर द्विपक्षीय सामरिक संचार को और अधिक बढ़ाने की आकांक्षा झलकाती है।यह भी पढ़ें : पर्वत शिखर गंगोत्री-III के लिए सेना का पर्वतारोहण अभियान<p style=”text-align: justify;”>नैनीताल, 8 सितम्बर 2018। पर्वत शिखर गंगोत्री-III के लिए भारतीय सेना के पर्वतारोहण अभियान दल ने 08 सितंबर 2018 को पर्यनुकुलन का प्रथम चरण पूरा कर लिया है। 20 सदस्यीय यह पर्वतारोहण दल अब दूसरे चरण की ओर चल पड़ा है जो चार दिनों में पूरा कर पर्वत शिखर गंगोत्री-III को फतह हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ेगा। गत 28 अगस्त 2018 को भारतीय सेना का पर्वतारोहण अभियान दल पर्वत शिखर गंगोत्री-प्प्प् के लिए रवाना किया गया था। पर्वत शिखर गंगोत्री-III उत्तराखंड के गंगोत्री क्षेत्र में है जो पश्चिमी गढ़वाल हिमालय में स्थित है। यह पर्वत चोटी गंगोत्री की तीसरी सबसे ऊॅंची पर्वत चोटी है। पर्वत शिखर गंगोत्री-I की ऊॅंचाई 6620 मीटर है वहीं पर्वत शिखर गंगोत्री-II की ऊॅंचाई 6590 मीटर और पर्वत शिखर गंगोत्री-III की ऊॅंचाई 6577 मीटर है। पर्वतारोहण के लिए उच्च तकनीकी कौशल, विशद अनुभव, उत्साह, शारीरिक एवं मानसिक फिटनेस के साथ-साथ अनुकूल मौसमी परिस्थितियों की जरूरत होती है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए पर्वतारोही दल के सदस्यों की सभी प्रकार के सुरक्षा उपायों को अपनाया जा रहा है और इसकी प्रगति पर नजर रखी जा रही है।Share this: Click to share on Facebook (Opens in new window) Facebook Click to share on X (Opens in new window) X Click to share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading...Related Post navigationहरीश रावत की रायता पार्टी स्थगित, पर लीजिए पहाड़ी ककड़ी के ‘अल्मोड़िया रायते’ के लिए ‘चंद बरदाई’ बने रावत के रायते व रायता फैलाने वालों पर एक बेहद रोचक लेख का स्वाद.. नैनीताल समाचार : नगर पालिका के एक पर्यावरण मित्र कर्मी की संदेहास्पद मृत्यु
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