नैनीताल में एक जीवाणु का हमला ! चार मौतों से विभाग हरकत में…

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नवीन समाचार, नैनीताल, 15 मार्च 2020। देश भर में कोरोना के वायरस यानी विषाणु के हमले के बीच जिला मुख्यालय नैनीताल के करीबी गांवों में ग्लैंडर्स नाम के बैक्टीरिया यानी जीवाणु ने हमला बोला है। इसकी पहचान किये जाने से पहले ही मुख्यालय के निकटवर्ती देवता गांव में चार घोड़ों की मौत इस खतरनाक जीवाणु के कारण हो चुकी है। इसके बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। निकटवर्ती गांवों के करीब 50 घोड़ों के नमूने ले लिए गए हैं, और इन्हें हरियाणा की हिसार स्थित प्रयोगशाला को जांच के लिए भेजा जा रहा है।
मुख्यालय की पशु चिकित्सा अधिकारी डा. हेमा राठौर ने बताया कि करीब एक माह पूर्व मुख्यालय से करीब 20 किमी दूर बीरभट्टी पुल से आगे स्थित देवता गांव में तीन-चार घोड़ों के बीमार होने की सूचना मिली थी। घोड़ों की जांच की गई, किंतु उन्हें हुई बीमारी की पहचान नहीं की जा सकी। इस पर घोड़ों के सेंपल लेकर हिसार स्थित प्रयोगशाला भेजे गए। जांच रिपोर्ट में उन्हें ग्लैंडर्स रोग की पुष्टि हुई, लेकिन इससे पहले ही करीब 20 दिन पूर्व चारों घोड़ों की मौत हो चुकी थी। इसके बाद बीते दो-तीन दिनों में निकट के बल्दियाखान, अधौड़ा जमीरा, देवता, सड़ियाताल गांवों व मुख्यालय के सूखाताल क्षेत्र के करीब 50 घोड़ों के सेंपल लिये गए हैं। आगे अगले सप्ताह मुख्यालय के बारापत्थर क्षेत्र में रहने वाले व सैलानियों को नगर के पर्यटन स्थलों की सैर कराने वाले सवारी घोड़ों के सेंपल भी लिये जाने हैं। ये सभी नमूने भी हिसार भेजे जाएंगे। डा. राठौर ने बताया कि ग्लेंडर्स जीवाणु जनित बीमारी है, जो अश्व प्रजाति के घोड़ों, गधों, टट्टुओं व खच्चरों आदि में होता है। इसमें जानवरों को मलेरिया की तरह लक्षण नजर आते हैं। शरीर पर फफोले भी उठते हैं, और उनमें मवाद भर जाता है। यह बीमारी जूनॉटिक प्रकृति की यानी घोड़ों से मनुष्य में भी संक्रमिक होने वाली बीमारी है। उन्होंने बताया कि इसकी जागरूकता के लिए बल्यिाखान में शिविर लगाकर लोगों को बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में बताया गया। हिदायत दी गई कि इस दौरान घोड़ों की खरीद-फरोख्त न करें, इससे बीमारी आगे फैल सकती है। इस बीमारी से 95 फीसद संक्रमितों की मृत्यु हो जाती है और बीमारी का पता लगने पर संक्रमित घोड़ों को मारना पड़ता है।

नैनीताल जू में हुई एक चीतल की मौत
नैनीताल। मुख्यालय स्थित गोविंद बल्लभ पंत उच्च स्थलीय प्राणि उद्यान यानी नैनीताल चिड़ियाघर में एक हिरन प्रजाति के चीतल की मौत हो गई। नैनीताल चिड़ियाघर के निदेशक बीजू लाल टीआर ने बताया कि चीतल की मौत प्राकृतिक कारणों से उम्र पूरी करने के कारण हुई है। मृत चीतल 12-13 वर्ष की उम्र का नर था।

अब नहीं रहेगी पहाड़ में चारे की समस्या

नवीन जोशी, नैनीताल। मैदानों के साथ पहाड़ भी गर्मी में झुलस रहे हैं, और पशुपालक परेशान हैं कि कैसे बरसात होने तक जानवरों का पेट पालें। ऐसे में यह खबर खासकर पहाड़ के पशुपालकों के लिए बड़ी राहत देने वाली हो सकती है। इन गर्मियों में तो नहीं, किंतु जल्द ही प्रदेश का पशुपालन महकमा कुमाऊं मंडल के पर्वतीय अंचलों में 115 हेक्टेयर भूमि पर 23 चरागाह विकसित करने जा रहा है। विभाग को इसके लिए 113.85 लाख रुपये भी शासन से प्राप्त हो गये हैं। बाद में सभी पहाड़ी ब्लाकों में दो-दो यानी 68 चरागाह बनाने की योजना भी तैयार की जा रही है। कुमाऊं मंडल के उप निदेशक पशुपालन डा. भरत चंद्र ने बताया कि मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाली 14 योजनाओं में ग्रास लैंड डेवलपमेंट एंड ग्रास रिजर्व योजना भी शामिल हैं। इसके तहत मंडल के मैदानी जनपद ऊधमसिंह नगर को छोड़कर (क्योंकि इस जिले में वन पंचायतें ही नहीं हैं) अन्य पांच जिलों के आठ विकास खंडों में 23 वन पंचायतें चिह्नित की गई हैं। यहां चरागाह विकसित करने के लिए धनराशि मिल गई है। श्री भरत चंद्र ने बताया कि योजना के तहत इन चिह्नित वन पंचायतों की 115 हेक्टेयर भूमि पर ऊंचाई के अनुसार पहाड़ के परंपरागत भीमल, तिमिल जैसे चारा वृक्ष व घास के पौधे रोपे जाएंगे। बाद में इन पर्वतीय जिलों के सभी 34 विकास खंडों के दो-दो यानी कुल 68 गांवों में भी ऐसे ही चरागाह विकसित करने का प्रस्ताव है।
 
जानवर खाएंगे रेडीमेड चारा केक
 
नैनीताल। उप निदेशक पशुपालन डा. भरत चंद्र ने बताया कि कुमाऊं के 41 (ऊधमसिंह नगर जनपद भी शामिल) में से 32 विकास खंडों में चारा बैंक विकसित कर लिए गये हैं। शीघ्र ही अन्य 18 ब्लॉकों में भी स्थापित किये जा रहे हैं। इन चारा बैंकों में जानवरों के लिए भूसा व शीरा के अलग-अलग अनुपात वाले 12 व 14 किग्राके ठोस चारा केक उपलब्ध करा दिये गये हैं। इन केक को पानी मिलाकर जानवर बड़े चाव से खा रहे हैं।
 
नहीं रिझा सकी बिग डेयरी योजना
 
नैनीताल। पशुपालन विभाग ने पुरानी योजना को परिवर्तित कर जो डेयरी उद्यमिता विकास योजना (बिग डेयरीयोजना) शुरू की है, उसे नैनीताल के पशुपालकों ने तो खूब पसंद किया है, पर यह पहाड़ के पशुपालकों को रिझाने में असफल रही है। दो से 10 दुधारू पशुओं की खरीद के लिए नाबार्ड से 25 फीसद अनुदान पर एक से पांच लाख के ऋ ण वाली इस योजना में 211 के लक्ष्य के सापेक्ष 648 आवेदन आये। इन आवेदनों में पर्वतीय पशुपालकों के आवेदन कम ही थे और जो थे भी वह दो या तीन जानवरों तक सीमित थे। बीती 31 मार्च तक ही लक्ष्य से अधिक 296 आवेदकों को 3.27 करोड़ रुपये के ऋ ण स्वीकृत हो गये।
नवीन समाचार
मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड
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