Film News : बॉलीवुड अभिनेता अभय देओल को भाया नैनीताल का यह विद्यालय, बताया हैरी पॉटर का ‘हॉगवर्ड्स’

नवीन समाचार, नैनीताल, 15 दिसंबर 2023 (Film News)। सरोवरनगरी में फिल्म ‘बन टिक्की’ की शूटिंग के लिये पिछले 15 दिनों से अधिक समय से नगर में रह रहे सिने अभिनेता अभय देओल को नैनीताल की लोकेशन व खासकर यहां इन दिनों नजर आ रही ‘विंटर लाइन’ सहित प्राकृतिक सुंदरता काफी भा रही है। यहां तक कि उन्हें यहां फिल्म के शूटिंग स्थल नगर के एक विद्यालय में हॉलीवुड फिल्म-हैरी पॉटर के विद्यालय हॉगवर्ड्स और अपने जीवन के 10 वर्ष पुराने कॉलेज के दिन याद आ रहे हैं।

Abhay Deol reached Nainital for the shooting of the film - अभय देओल फिल्म  की शूटिंग को नैनीताल पहुंचे, हल्द्वानी न्यूजभारतीय फिल्मोद्योग के सुप्रसिद्ध अभिनेता धर्मेंद्र के सबसे छोटे पुत्र अभय ने सोशल मीडिया पर नगर की चार फोटो एवं कई वीडियो शेयर की हैं। इनमें से दो फोटो में वह स्वयं नगर के सेंट जोसफ कॉलेज के मैदान में फिल्म की शूटिंग यूनिट के साथ शाम के समय उभर रही ‘विंटर लाइन’ के साथ नजर आ रहे हैं, जबकि एक फोटो में विंटर लाइन एवं एक अन्य फोटो में नगर से दिखने वाले सूर्यास्त के सुंदर नजारे को खूबसूरत तरीके से दिखाया गया है।

उल्लेखनीय है कि अभय देओल इस फिल्म में नवोदित फिल्म अभिनेत्री नुसरत बरूचा के साथ पति-पत्नी की भूमिका में नजर आने वाले हैं। अब तक सामने आ रहे जानकारी के अनुसार इस फिल्म में अभय व नुसरत के ‘ऑन स्क्रीन’ पुत्र नगर के सेंट जोसफ कॉलेज में पढ़ते और यहां खेल मैदान में खेलते तथा नगर में कभी बच्चे को जोकर बनकर रोमांचित करने सहित अलग-अलग गतिविधियां करते नजर आने वाले हैं। फिल्म की शूटिंग गत 29 नवंबर से नगर में एवं गत 11 दिसंबर से सेंट जोसफ कॉलेज में चल रही है।

बताया गया है कि अभी 19 दिसंबर तक सेंट जोसफ कॉलेज में फिल्म की शूटिंग होनी है। नुसरत भरूचा कई दिन शूटिंग करने के बाद बीती रात्रि बुखार होने के बाद बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में दिखने पहुंची और आज सुबह यहां से लौट गई हैं, जबकि अभय अभी यहीं है। इस फिल्म से करीब 4 वर्ष के बाद सुप्रसिद्ध अभिनेत्री जीनत अमान और शबाना आजमी भी एक बार फिर बड़े परदे पर वापसी करने जा रही हैं।

गौरतलब है कि जीनत यहां कलाबाज, हम किसी से कम नहीं और जाना फिल्मों की शूटिंग के लिये देवानंद, तारिक व राजेश खन्ना जैसे कलाकारों के साथ आ चुकी हैं, वहीं शबाना आजमी नसीरुद्दीन शाह के साथ नैनीताल में फिल्मायी गयी मासूम में मुख्य भूमिका में थीं। बन टिक्की फिल्म से जरिये फैशन डिजाइनर मनीष मल्होत्रा पहली बार प्रोडक्शन में कदम रख रहे हैं।

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यह भी पढ़ें : Film News : नैनीताल में बन रही ‘बन टिक्की’ को अब पूरी दुनिया बड़े परदे पर देखेगी, जीनत अमान-शबाना आजमी भी आऐंगी ?

-नैनीताल में फिल्म ‘बन टिक्की’ की शूटिंग शुरू, अभय देओल व नुसरत भरूचा दिखेंगे साथ
-फिल्म से जीनत अमान व शबाना आजमी भी कर रही हैं लंबे समय बाद वापसी, फैशन डिजाइनर मनीष मल्होत्रा इस फिल्म के जरिये रख रहे प्रोडक्शन में कदम
नवीन समाचार, नैनीताल, 30 नवंबर 2023 (Film News)। पिछले दिनों हिमांचल प्रदेश में काफी दृश्य फिल्माने के बाद हिन्दी फीचर फिल्म ‘बन टिक्की’ की शूटिंग अब नैनीताल में शुरू हो गई है। फिल्म की शूटिंग के लिये नगर के डीएसए मैदान में विशेष प्रबंध किये गये हैं।

Film News नैनीताल में फिल्म 'बन टिक्की' की शूटिंग शुरू, अभय देओल और नुसरत भरूचा  दिखेंगे साथबताया गया है कि अगले करीब 3 सप्ताह तक नगर की मॉल रोड एवं विद्यालयों व अन्य स्थानों पर फिल्म की शूटिंग की जाएगी। गौरतलब है कि ‘बन टिक्की’ पहाड़ों में एक बीच से कटे हुये बन के भीतर टिक्की को रखकर परोसे जाने वाली एक तरह की चाट के तौर पर पहचानी व पसंद की जाती है।

खास बात यह है कि इस फिल्म के अभिनेता सुप्रसिद्ध अभिनेता धर्मेंद्र के सबसे छोटे पुत्र अभय देओल हैं जो इससे पहले करीब 2 दर्जन फिल्मों में नजर आ चुके हैं। वह इस फिल्म में नवोदित फिल्म अभिनेत्री नुसरत बरूचा के साथ नजर आयेंगे। वहीं इस फिल्म से करीब 4 वर्ष के बाद सुप्रसिद्ध अभिनेत्री जीनत अमान और शबाना आजमी भी एक बार फिर बड़े परदे पर वापसी करने जा रही हैं। जबकि फैशन डिजाइनर मनीष मल्होत्रा इस फिल्म के जरिये प्रोडक्शन में कदम रख रहे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ‘बन टिक्की’ फिल्म की कहानी अभय और उनके ऑनस्क्रीन बेटे के आसपास घूमेगी, लेकिन शबाना और जीनत का किरदार भी इस कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगी। अलबत्ता नैनीताल में अभय, नुसरत व उनके ऑनस्क्रीन बेटे के बीच ही अधिकांश दृश्य फिल्माये जायेंगे। पहले दिन सुबह से ही मॉल रोड व पंत पार्क सहित अन्य स्थानों पर अभय व उनके ऑनस्क्रीन बेटे के साथ फिल्म के दृश्य फिल्माए गए। इस दौरान मॉल रोड पर वाहनों का आवागमन भी प्रभावित रहा।

नैनीताल में अभय देओल व नुसरत बलूचा की ही शूटिंग होगी। जीनत यहां कलाबाज, हम किसी से कम नहीं और जाना फिल्मों की शूटिंग के लिये देवानंद, तारिक व राजेश खन्ना जैसे कलाकारों के साथ आ चुकी हैं, वहीं शबाना नसीरुद्दीन शाह के साथ नैनीताल में फिल्मायी गयी मासूम में मुख्य भूमिका में थीं।

जीनत इससे पहले आखिरी बार 2019 में पानीपत फिल्म में एक छोटी भूमिका में नजर आयी थीं। लेकिन इस फिल्म की शूटिंग के लिये इन दोनों पुराने दौर की हीरोइनों की नैनीताल आने की संभावनायें कम हैं। बताया गया है कि बन टिक्की फिल्म लैंगिक समानता और माता-पिता के द्वारा बच्चों के पालन-पोषण के विषयष् को प्रमुखता से उठाएगी।

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यह भी पढ़ें Film News : तीसरे निर्मल पांडे स्मृति लघु फिल्म महोत्सव में प्रदर्शित फिल्मों को पुरस्कारों की हुई घोषणा

-सर्वश्रेष्ठ लघु फिल्म का पुरस्कार रोहिताश्व गौड़ की फिल्म किताब को
डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 11 अगस्त 2022। थियेटर की नगरी भी कहे जाने वाले नगर में नगर के दिवंगत सिने कलाकार स्वर्गीय निर्मल पाण्डे की स्मृति में आयोजित हुए लघु फिल्मों के महोत्सव में प्रदर्शित सर्वश्रेष्ठ फिल्मों को पुरस्कारों की घोषणा हो गई है। सर्वश्रेष्ठ लघु फिल्म का पुरस्कार रोहिताश्व गौड़ की फिल्म किताब को मिला है, जबकि बापू की गाड़ी उप विजेता व विमलेंदु मनोज की ‘कुल की’ तृतीय स्थान पर रही।

वहीं सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का खिताब आशीष बंथ्री को ‘बापू की गाड़ी’ के लिए मिला, किताब के कमलेश के मिश्रा उप विजेता तथा दर्शन प्रकाश प्रणव ‘खड़ा देव टु माझा मराड़’ के लिए द्वितीय उप विजेता रहे। सर्वश्रेष्ठ फिल्मांकन का पुरस्कार युग यिकी को बापू की गाड़ी के लिए मिला, जबकि किताब के लिए अरुण वर्मा उपविजेता व कुल की के लिए राज मोहन सोरेन द्वितीय उप विजेता रहे। सर्वश्रेष्ठ लेखक का पुरस्कार चंद्र सेखर रथ को ‘फॉर्म फॉर द वर्ल्ड’ के लिए मिला, युगुअल बुंडी के लेखक हरेन रावत उप विजेता रहे। इसी तरह सर्वश्रेष्ठ संपादन का पुरस्कार रुषीराज जोशी को ‘झड़प’ के लिए मिला। इस श्रेणी में ‘द लास्ट नाइट विद हर’ के पंकज यादव उप विजेता व थोड़ी सी खुशी के लिए अजय यादव तृतीय स्थान पर रहे।

सर्वश्रेष्ठ संगीत का पुरस्कार बापी टुटुल को किताब के लिए मिला, वहीं कौमार्य एक प्रथा के लिए शंभू चौहान उप विजेता व दीपा जे दास ‘अ लॉस्ट ट्यून ऑफ लाइफ’ के लिए तीसरे स्थान पर रहीं। वहीं सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार धनंजय सर देश पांडे को झड़प के लिए मिला, जबकि बापू की गाड़ी के लिए सई वेसल उपविजेता रहे। जबकि सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार सपना भोज को ‘कौमार्य एक प्रथा’ के लिए दिया गया, जबकि अलीशा खैरी उप विजेता वयाक्षी फिल्म के लिए मालविका द्वितीय उप विजेता रहीं।

इनके अलावा सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री का पुरस्कार ‘गंगा पुत्र’ को, डॉक्यूमेंट्री के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार धरमवीर भारती को ‘लौंग लिव लौंगी’ के लिए, सर्वश्रेष्ठ जूरी अवार्ड दीपक रावत की फिल्म कश्मकश को एवं स्पेशल मेंसन अवार्ड यानी विशेष उल्लेख पुरस्कार बटरफ्लाई फिल्म को दिया गया। इस श्रेणी में भिसूण फिल्म उप विजेता रही। इस मौके पर ‘सिनेमा और टीवी’ नाम की पुस्तक का विमोचन भी किया गया।

उल्लेखनीय है कि कुमाऊं विश्वविद्यालय के हरमिटेज परिसर स्थित सभागार में निर्मल पांडे स्मृति न्यास द्वारा आयोजित इस तृतीय निर्मल पांडे स्मृति लघु फिल्म फेस्टिवल में इनसेन, आर्यंस, कश्मकश, गफलत, आइस क्रीम, टोकन नंबर 100, लोंग लिव लुंगी, कौमार्य-एक प्रथा, यक्षी, बटरफ्लाई, वो सुबह कभी तो आएगी, बूढ़ा बुद्धि दम, प्रिंस, गंगा पुत्र, थोड़ी सी खुशी जैसी लगभग 30 चिन्हित लघु फिल्मों को प्रदर्शित किया गया। इस दौरान दिग्गज अभिनेता अमोल पालेकर को उनकी अनुपस्थिति में लाइव टाइम अचीवमेंट अवार्ड व अभिनेत्री सोनाली कुलकर्णी को एक्टिंग आइकॉन अवार्ड से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर भाभी जी घर पर हैं कि कलाकार रोहिताश्व गौड़, रॉ फिल्म के अभिनेता आशित चटर्जी, मनोज जोशी तथा साहित्यकार व फिल्म समीक्षक डॉ. कुमार विमलेंदु सहित अनिल दुबे, जहूर आलम, मिथिलेश पांडे, चारु तिवारी, अमित साह, अदिति खन्ना, रोहित वर्मा, मदन मेहरा आदि कलाकार मौजूद रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : थियेटर की नगरी नैनीताल में तीसरे निर्मल पांडे स्मृति लघु फिल्मों के मेले का शुभारंभ… दिखाई जाएंगी 30 लघु फिल्में

May be an image of ‎2 people and ‎text that says "‎PANDEY SMRIT ك が harbali abali Line ProDuction Hoga 造 ASquare Square αι ENTERTAINUENT 3 rd NIRMAL PANDEY SMRITI ILM FESTIVAL LIFE ETIMEACHIEVEMENTAWARD TIME ACHIEVEMENT AWARD Shri. Amol Palekar Indian Film Actor & Filmmaker 10th August 2022 Kumaun University, Nainital (Uttarakhand)‎"‎‎डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 10 अगस्त 2022। थियेटर की नगरी भी कहे जाने वाले में बॉलीवुड के ऐसे बिरले कलाकार जिन्होंने एक अभिनेता होते हुए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का खिताब जीता, स्वर्गीय निर्मल पाण्डे की स्मृति में लघु फिल्मों का महोत्सव बुधवार को प्रारंभ हो गया। स्वर्गीय निर्मल पांडे के एनएसडी यानी राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के सहपाठी, ‘भाभी जी घर पर हैं’ के मुख्य कलाकार रोहिताश्व गौड़ ने बतौर मुख्य अतिथि दीपक प्रज्ज्वलित कर महोत्सव का ऑपचारिक रूप से शुभारंभ किया। साथ ही उन्होंने आयोजकों को इस आयोजन के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं भी दीं।

IMG 20220810 WA0046कुमाऊं विश्वविद्यालय के हरमिटेज परिसर स्थित सभागार में निर्मल पांडे स्मृति न्यास द्वारा आयोजित तृतीय निर्मल पांडे स्मृति लघु फिल्म फेस्टिवल में इनसेन, आर्यंस, कश्मकश, गफलत, आइस क्रीम, टोकन नंबर 100, लोंग लिव लुंगी, कौमार्य-एक प्रथा, यक्षी, बटरफ्लाई, वो सुबह कभी तो आएगी, बूढ़ा बुद्धि दम, प्रिंस, गंगा पुत्र, थोड़ी सी खुशी जैसी लगभग 30 चिन्हित लघु फिल्मों को दर्शाया जाएगा, साथ ही इनमें से सर्वश्रेष्ठ फिल्मों को पुरस्कृत भी किया जाएगा।

इस अवसर पर प्रसिद्ध सिने अभिनेता अमोल पालेकर को लाइफ टाइम एचीवमेंट अवॉर्ड, व सोनाली कुलकर्णी को एक्टिंग आईकॉन अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा। अमोल पालेकर की स्वास्थ्य कारणों से आने की संभावना कम है, जबकि सोनाली आने की कोशिश में हैं। इस अवसर पर रॉ फिल्म के अभिनेता आशित चटर्जी, मनोज जोशी तथा साहित्यकार व फिल्म समीक्षक डॉ. कुमार विमलेंदु सहित अनिल दुबे, जहूर आलम, मिथिलेश पांडे, चारु तिवारी, अमित साह, अदिति खन्ना, रोहित वर्मा, मदन मेहरा आदि कलाकार मौजूद रहे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : ब्रेकिंग: उत्तराखंड में टैक्स फ्री हुई ‘द कश्मीर फाइल्स’

नवीन समाचार, देहरादून, 15 मार्च 2022। उत्तराखंड सरकार ने कश्मीरी पंडितों के पलायन और उत्पीड़न पर बनी फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ को उत्तराखंड में टैक्स फ्री घोषित कर दिया है। मंगलवार को इस संबंध में अपर मुख्य सचिव मनीषा पंवार की ओर से निर्देश जारी दिए गए हैं।

द कश्मीर फाइल्सइससे पूर्व प्रदेश के कार्यवाहक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सचिव को इस हेतु निर्देश दिए थे। उल्लेखनीय है कि सीएम ने स्वयं भी परिवार के साथ 11 मार्च को रिलीज हुई फिल्म देखने गए थे और फिल्म निर्देशक विवेक अग्निहोत्री से फोन पर बात कर कश्मीरी हिंदुओं पर हुए अत्याचार को बेहतरीन ढंग से प्रदर्शित करने पर बधाई दी। कार्यवाहक कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने भी भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा को पत्र लिख कर भाजपा शासित राज्यों में फिल्म को टैक्स फ्री करने का सुझाव दिया था। (डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : ऑस्कर फिल्म फेयर फेस्टिवल से एक कदम दूर तक पहुंची उत्तराखंड की लघु फिल्म

-भोटिया समुदाय की लोकगाथा पर आधारित एवं लोकभाषा में बनी है फिल्म
नवीन समाचार, रुद्रप्रयाग, 28 फरवरी 2022। पहली बार उत्तराखंड में बनी एक लघु फिल्म का कोरिया के बुसान में चल रहे 39वें अंतरराष्ट्रीय शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल में वर्ल्ड प्रीमियर होने जा रहा है। भोटिया जनजाति की एक लोककथा पर आधारित व स्थानीय लोकभाषा में बनी पताल ती (होली वाटर) नाम की इस लघु फिल्म का चयन दुनियाभर की 2548 फिल्मों में से शीर्ष 14 में हुआ है। इसके बाद यदि यह फिल्म शीर्ष 14 में से शीर्ष एक में आती है तो यह स्वतः ही ऑस्कर फिल्म समारोह में जाने के लिए योग्य हो जाएगी।

स्टूडियो यूके13 की टीम द्वारा निर्मित इस फिल्म के निर्माता निर्देशक संतोष सिंह रावत और मुकुंद नारायण के अनुसार इस फिल्म में हिमालय क्षेत्र के एक गांव के जीवन का फिल्मांकन किया है। इस फिल्म के लिए फिल्म की टीम ने फिल्म के पात्र एक किशोर पोते के लिए अपने मरणासन दादा की आखिरी इच्छा पूरी करने के लिए 20 दिन में 4500 मीटर की ऊंचाई तक 300 किमी से ज्यादा पैदल यात्रा की है। फिल्म के लिए बिट्टू रावत व दिव्यांशु रौतेला प्राकृतिक रोशनी का बेहतरीन उपयोग करते हुए बेहतरीन फिल्मांकन किया है।

फिल्म में कलाकारों के नाममात्र के संवाद भी भी इस फिल्म की खास विशेषता हैं। फिल्म में आयुष रावत धन सिंह राणा, कमला कुंवर, भगत बुरफाल मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म निर्माण में रजत बर्त्वाल के साथ ध्वनि संयोजन में ऑस्कर विजेता रेसुल पुकुट्टी (स्लम डॉग मिलेनियर), एडिटिंग में संयुक्ता काजा (तुम्बाड़ वेब सीरीज) और पूजा पिल्लै (पाताल लोक) और रंग संयोजन में ईरान के हामिद रेजाफातोरिचअन जैसे हालीवुड फिल्म निर्माण से जुड़े लोगों का भी सहयोग रहा है। (डॉ. नवीन जोशी) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : नैनीताल की फिल्म देश के चार प्रतिष्ठित फिल्म फेस्टिवलों में रही विजेता

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पुरस्कारों के साथ लघु फिल्म के निर्देशक व कलाकार आदि।

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 19 जनवरी 2022। नैनीताल नगर के कलाकारों द्वारा मधुबन आर्ट्स के अंतर्गत निर्मित लघु फिल्म ‘टोकन नंबर 100’ नें देश के चार प्रतिष्ठित फिल्म फेस्टिवलों में विजेता का खिताब जीत कर उत्तराखंड का नाम गौरवान्वित किया है। इस फिल्म ने नौवें ‘लेक सिटी इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल’ में ‘बेस्ट शार्ट फिल्म’, आठवें आसिफ चम्बल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में ‘बेस्ट एक्सपेरिमेंटल शार्ट फिल्म’, 15वें अयोध्या फिल्म फेस्टिवल में ‘बेस्ट कांसेप्ट’ में उपविजेता तथा मुंबई इंडिपेंडेंट फिल्म फेस्टिवल में चयनित फिल्मों में स्थान पाया है। देखें फिल्म-टोकन नंबर 100 :

पांच मिनट की इस एक किरदार तथा एक स्थान में निर्मित मूक फिल्म का निर्देशन डॉ. मोहित सनवाल तथा अभिनय मनोज साह टोनी द्वारा किया गया है। फिल्म अस्सी के दशक के एक अधेड़ खिलाडी की कहानी है जिसका कभी स्वर्णिम अतीत था पर वर्तमान व्यवस्था में वह असफल है। फिल्म खिलाड़ियों के भविष्य पर सोचने को मजबूर करती है। इस मूक फिल्म में कमरे में उपलब्ध वस्तुओं के माध्यम से ही कहानी कही गयी है। इस तरह दर्शक अपनी कल्पनाशीलता से भी इसकी कहानी को सोच सकते है।

फिल्म मधुबन आर्ट्स के यूट्यूब चैनल पर भी उपलब्ध है। फिल्म के निर्माण में निर्माता कविता सनवाल, एसोसिएट डायरेक्टर विनीता यशश्वी, सिनेमेटोग्राफर रोहन भट्ट, ध्वनि मौलिक सनवाल के साथ केपी साह, राजेश साह, संजय तिवारी, अजय पवार, अमित साह, अदिति खुराना तथा मो. खुर्शीद ने सहयोग दिया है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : मरचूला में आयोजित हुए कौतिक अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव-2021 के पुरस्कारों की हुई घोषणा, भारत, स्पेन, ईरान, यूएसए की फिल्मों को मिले पुरस्कार

marchula film festivelडॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 7 दिसंबर 2021। नैनीताल जनपद के जिम कॉर्बेट पार्क के पास मरचूला स्थित महाशीर फिशिंग कैम्प में गत 3 से 5 दिसंबर के बीच कौतिक अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव-2021 आयोजित किया गया। मंगलवार को इसके पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है। महोत्सव में मेजबान भारत के साथ ही ईरान, कनाडा, पुर्तगाल, सर्बिया, नॉर्वे, आयरलैंड, तुर्की और संयुक्त राज्य अमेरिका सहित दुनिया भर से 50 से अधिक लघु और फीचर फिल्मों को दो स्क्रीनों में समानांतर रूप से प्रदर्शित किया गया।

इस दौरान दो पुस्तकों-गुवाहाटी इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल की निदेशक मोनिता बोरगोहेन की कॉफी टेबल बुक और फिल्म समीक्षक दिप्सिका भगवती की फिल्म ऐप्रिसिशन पर उत्पल दत्ता की पुस्तक की अनुवाद पुस्तक का भी इस दौरान विमोचन किया गया। इसके अतिरिक्त रंजन घोष, प्रशांत नाइक, दीपशिखा भगवती, यश चव्हाण, श्रीकांत वर्मा और सुशील शर्मा आदि के द्वारा ‘वर्तमान परिदृश्य में ओटीटी का उदय’, ‘अभिनेताओं की भूमिका के लिए तैयारी’ और ‘भारतीय सिनेमा का भविष्य क्या है’ विषयों पर पैनल चर्चा भी आयोजित हुई।

इस दौरान 5 अलग-अलग जूरी पैनल द्वारा प्रस्तुतियों का मूल्यांकन कर पुरस्कारों की घोषणा की गई। फीचर जूरी में सुरेंद्र चौधरी, हिमांशु खटुआ और सिमोन मारियानी (इटली), लघु कथा जूरी में उमामहेश्वर राव, परेश कामदार, मोंजरुल इस्लाम मेघ (बांग्लादेश), वृत्तचित्र जूरी में सुधीर टंडन, सुभाष साहू और जूडी ग्लैडस्टोन (कनाडा), एनीमेशन जूरी में मोनिता बोरगोहेन, अमृत प्रीतम और चार्लोट समर्स (स्पेन) शामिल रहे। वहीं हाउस ऑफ इल्यूजन की ओर से सर्वश्रेष्ठ छात्र फिल्म के लिए और महिला निर्देशक द्वारा सर्वश्रेष्ठ फिल्म के लिए दिए जाने वाले पुरस्कारों की ज्यूरी में प्रशांत नाइक, रेसुल पुकुट्टी, और एलेक्जेंड्रा बिरनाका (पोलैंड) शामिल रहे। इसके अलावा फिल्म क्रिटिक्स सर्कल ऑफ इंडिया ने सर्वश्रेष्ठ डेब्यू शॉर्ट फिक्शन और बेस्ट डेब्यू एनिमेशन के लिए पुरस्कारों की घोषणा करने वाली ज्यूरी में ज्ञानेश मोघे, दीपशिखा भगवती और असीम छाबड़ा शामिल रहे।

कौतिक 2021 में घोषित किए गए पुरस्कार:

सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म: एमी बरुआ की ‘सेमखोर’ (भारत)
विशेष उल्लेख, फीचर फिल्म: बेन ब्यूरन की ‘मार्किस’ (स्पेन)
विशेष उल्लेख, फीचर फिल्म में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता: रंजन घोष की ‘आहा रे – द टू लवर्स’ (भारत) में ऋतुपर्णा सेनगुप्ता
बेस्ट शॉर्ट फिक्शन: अनुराग पुजारी की अराओ – द क्राई (भारत)
विशेष उल्लेख, लघु कथा: अमीर मोहनदेसियन का स्टेज (ईरान)
स्पेशल मेंशन, शॉर्ट फिक्शन फिल्म में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता: द इंटिमेट टच (स्वीडन) में अन्ना हार्लिंग
स्पेशल मेंशन, शॉर्ट फिक्शन फिल्म में सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार: द टेंटेड मिरर (भारत) में याईखोम्बा
सर्वश्रेष्ठ लघु वृत्तचित्र: जॅचरी गुडविन, फ्लिन हैरिस, एलेक्स फ्लैनगन और एलेक्स कुम्फ की आइज (यूएसए)
बेस्ट फुल लेंथ डॉक्यूमेंट्री: एड्रियानो जेक्का की ‘रिटर्न टू द लॉस्ट ईडन (स्विट्जरलैंड)
सर्वश्रेष्ठ एनिमेशन फिल्म: फॉरेस्ट स्लेज का ‘लाइक एंड फॉलो’ (जापान)
सर्वश्रेष्ठ छात्र फिल्म के लिए हाउस ऑफ इल्यूजन पुरस्कार: जॅचरी गुडविन, फ्लिन हैरिस, एलेक्स फ्लैनगन और एलेक्स कुम्फ की आइज (यूएसए)
एक महिला निर्देशक द्वारा सर्वश्रेष्ठ फिल्म के लिए हाउस ऑफ इल्यूजन पुरस्कार: मोरवरिद काशीराम के निकायों (ईरान)
बेस्ट डेब्यू शॉर्ट फिक्शन के लिए फिल्म क्रिटिक्स सर्कल ऑफ इंडिया अवार्ड: यासर बरजेगर की सबसर्विएंट (ईरान)
बेस्ट डेब्यू एनिमेशन के लिए फिल्म क्रिटिक्स सर्कल ऑफ इंडिया अवार्ड: माजिद साबरी का ड्रीम (ईरान) आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : नैनीताल में बॉलीवुड गायक जुबिन नौटियाल, भूमि कानून के साथ उत्तराखंड के युवाओं के लिए भी दिया संदेश

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 2 अगस्त 2021। बॉलीवुड के उत्तराखंड निवासी सुप्रसिद्ध गायक जुबिन नौटियाल भी इन दिनों अपने परिवार के साथ नैनीताल पहुंचे हैं। वह यहां अपनी वॉल्वो कार संख्या एमएच02एफसी-0111 को खुद चलाकर पहुंचे हैं। उनके साथ उनके देहरादून निवासी मित्र रोहन चंदेल और अन्य दोस्तों के साथ चार गाड़ियों में आए हैं, और निकटवर्ती पंगोट में अपनी बहन निहारिका और शिव मल्होत्रा के रिजॉर्ट में ठहरे हैं।

Jubin Nautiyalइस दौरान उत्तराखंड में भूमि कानून में संशोधन को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही मुहिम का समर्थन करते हुए जुबिन ने कहा कि, मसूरी और नैनीताल में पर्यटकों की बड़ी संख्या आती है और इस राज्य में पर्यटक जरूरी हैं। कोरोना के बाद लोग समुद्री तटों को छोड़कर पहाड़ों की तरफ रुख कर रहे हैं। इसके लिए यहां कड़े भूमि कानून बनाने चाहिए ताकि इस क्षेत्र को बचाया जा सके।

इस मौके पर जुबिन ने करगिल युद्ध के हीरो रहे शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा पर फिल्माई गई आगामी फिल्म ‘शेरशाह’ में गाए अपने गीत की दो लाइनें भी गुनगुनाईं, ‘काटूं कैसे राता ओ बावरे, जिया नहीं जाता सुन बावरे, की राता लम्बिया लम्बिया रे, कटे तेरे संज्ञा संज्ञा रे, ओ राता लंबया लंबया रे, कटे तेरे संज्ञा संज्ञा रे…’

इसके साथ जुबिन नौटियाल ने आजकल के अर्थहीन गानों पर पूछे गए एक सवाल पर कहा कि, वो बिना अच्छे मायने वाले गानों को गाते ही नहीं हैं और पिछले कुछ वर्षों से अरिजीत सिंह के साथ उन्होंने पुराने दौर को वापस लाने का प्रयत्न किया है। संगीत को उन्होंने मनोरंजन का ही नहीं बल्कि युवाओं को सीख के लिए एक सुंदर माध्यम बताते हुए कहा कि, कुछ समय पहले उन्होंने छोटे बच्चों को अश्लील गाने हुए सुना था, जो उनका मतलब तक नहीं जानते थे। इसलिए वह ऐसे गानों का विरोध करते हैं।

इसके अलावा उत्तराखंड के नौजवानों के लिए एक संदेश देते हुए जुबिन ने कहा कि, उन्हें मदद के लिए दूसरों की की ओर नहीं ताकना चाहिए बल्कि अपनी जंग खुद लड़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि छोटा और आसान रास्ता आकर्षक होता है लेकिन कठिन मार्ग ही सफलता की कुंजी होती है। कठिन चुनौतियां से उबरकर आने की सीख ही आपको चमकाएगी।

उल्लेखनीय है गत दिवस उनकी कार नैनीताल-पंगोट के बीच सड़क पर मलबा आने के कारण कुछ देर फंसी भी रह गई थी। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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-देश से पहले विदेश में लांच होने वाली पहली फिल्म थी मधुमती, नैनीताल जनपद के भवाली-घोड़ाखाल के बीच हुई थी मधुमती फिल्म की अधिकांश शूटिंग
-यहीं फिल्माये गए थे फिल्म के तीन दिन, सुहाना सफर और ये मौसम हसीं, चढ़ गयो पापी बिछुवा और जंगल में मोर नाचा किसी ने ना देखा
डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 06 जुलाई 2021। बुधवार को दिवंगत हुए हिंदी फिल्मों के ‘ट्रेजडी किंग’ दिलीप कुमार के बारे में सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने कहा, हिंदी फिल्मी दुनिया के दो ही दौर हैं, दिलीप कुमार से पहले और दिलीप कुमार के बाद। उत्तराखंड व खासकर नैनीताल के पर्वतीय क्षेत्र भी कह सकते हैं कि यहां के लिए भी फिल्मों के लिहाज से दो ही दौर हैं, एक दिलीप कुमार से पहले और दूसरा दिलीप कुमार के बाद। वास्तव में दिलीप कुमार से पहले का कोई दौर ही नहीं है, क्योंकि इससे पहले यहां किसी भी फिल्म की शूटिंग नहीं हुई थी। लेकिन जैसे ही 1958 में यहां दिलीप कुमार-वैजयंती माला अभिनीत बिमल रॉय के निर्देशन में मधुमती फिल्म की लगातार छह माह तक शूटिंग हुई, यहां इस फिल्म के तीन गीत- सुहाना सफर और ये मौसम हसीं, चढ़ गयो पापी बिछुवा और जंगल में मोर नाचा किसी ने ना देखा फिल्माए गए और पूरी दुनिया के सामने यहां के पहाड़ों की खूबसूरती सामने आई, यहां फिल्मों की शूटिंग की लाइन ही लग गई और अब तक सौ से अधिक बड़़ी और हजारों छोटी-बड़ी फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है।

मधुमती फिल्म के बारे में यह भी खास रहा कि यह देश में रिलीज होने से पहले चेक गणराज्य के प्राग में आयोजित हुए कारलोव वैरी अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में लांच हुई थी और इसके कुछ माह बाद मुंबई में इसका प्रीमियर हुआ। इस तरह विदेश में लांच वाली देश की पहली फिल्म का रिकॉर्ड भी मधुमती के नाम पर ही है। इस तरह पहली फिल्म में ही नैनीताल और उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों की खूबसूरती देश से पहले विदेश में देखी गई। साथ ही मधुमती अपने समय की इतनी बड़ी हिट फिल्म साबित हुई कि इसने 9 फिल्म फेयर अवार्ड जीते थे और उसका यह रिकॉर्ड 37 साल बाद दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे फिल्म 1995 में 11 फिल्म फेयर जीतकर तोड़ पाई थी।

मधुमती फिल्म न केवल यहां फिल्माई गई थी, बल्कि यह कहना भी गलत न होगा कि यह फिल्म यहीं के परिवेश, संस्कृति में रच बस गई थी। इस फिल्म का पूरे परिवेश, नायिका वैजयंती माला के वस्त्र विन्यास, पहाड़ी घाघरा-पिछौड़ा व गले में हंसुली, जॉनी वॉकर सहित फिल्म में अन्य पुरुषों-महिलाओं का पहनावा आदि बहुत कुछ तत्कालीन कुमाउनी व पर्वतीय लोक संस्कृति से ओत-प्रोत थे। यही नहीं फिल्म का पार्श्व संगीत गीत एवं नाटक प्रभाग में कार्यरत रहे सत्य नारायण ने तैयार किया था और इसके गीतों में संगीत देने में प्रसिद्ध कुमाउनी गीत ‘बेड़ू पाको बारों मासा’ के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से प्रशंसा प्राप्त कर चुके मोहन उप्रेती और उनकी धर्मपत्नी नईमा खान उप्रेती का भी सहयोग रहा था। फिल्म का गीत ‘चढ़ गयो पापी बिछुवा’ तो पूरी तरह से कुमाउनी लोक शैली में भी गाया व फिल्माया गया था। गौरतलब है कि पुर्नजन्म पर आधारित इस फिल्म की पूरी कहानी भवाली में मौजूदा टीआरएच के शीर्ष की पहाड़ी पर बने मिस्टर रे के बंगले के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां नायक दिलीप कुमार बारिश के कारण एक रात के लिए फंस जाते हैं, वहां उन्हें अपने पूर्व जन्म की प्रेमिका वैजयंतीमाला की स्मृतियां हो आती हैं, जिसकी हत्या कर दी गई होती है। दिलीप को इस जन्म में भी वैजयंती माला मिल जाती हैं, उसकी मदद से वह पूर्व जन्म मंे की गई हत्या का बदला लेते हैं। यही कहानी बाद में दीपिका पादुकोण की बॉलीवुड में पदार्पण करने वाली फिल्म ओम शांति ओम में भी दोहराई गई। मिस्टर रे के इस बंगले को वर्ष 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने फिल्म संग्रहालय के रूप में विकसित करने का आश्वासन बिमल रॉय की पुत्री रिंकी रॉय भट्टाचार्य को दिया।

तीन बार नैनीताल आए थे दिलीप कुमार
नैनीताल। दिवंगत सिने अभिनेता दिलीप कुमार हालांकि मधुमती फिल्म की शूटिंग के लिए निकटवर्ती भवाली में रहे थे और फिल्म की अधिकांश शूटिंग यहीं भवाली से घोड़ाखाल के बीच वर्तमान उजाला, उत्तर वाहिनी शिप्रा नदी आदि क्षेत्रों एवं कुछ रानीखेत में हुई थी, लेकिन इस बीच दिलीप कुमार एक बार इस फिल्म के निर्माता-निर्देशक बिमल रॉय के साथ नैनीताल आए थे और यहां हरि संकीर्तन सभा में आयोजित शास्त्रीय संगीत के कार्यक्रम में भी शामिल हुए थे। इस कार्यक्रम में शामिल रहे तथा ‘भारतीय सिनेमा के 100 वर्ष और नैनीताल’ आलेख लिखने वाले नगर के वरिष्ठ रंगकर्मी के अनुसार इस दौरान दिलीप साहब ने एक शास्त्रीय गीत भी गाया था। बिमल रॉय व दिलीप कुमार द्वारा इस दौरान रजिस्टर में किए गए हस्ताक्षर अभी भी यहां सुरक्षित हैं।

श्री गुरुरानी बताते हैं इसके अलावा दिलीप साथ 1960-70 के दशक में पंडित नारायण दत्त तिवारी के चुनाव प्रचार के लिए नगर के मल्लीताल स्थित रामलीला मैदान में मधुमती फिल्म के अपने साथी कलाकार जॉनी वॉकर के साथ आए थे। अलबत्ता इसी दौरान उनका स्वास्थ्य अचानक खराब हो गया था। इस कारण उन्हें यहां से भाषण दिए बिना लौटना पड़ा था। गौरतलब है कि दिलीप कुमार ने पं. तिवारी के लिए 1991 के चुनाव में नैनीताल लोकसभा का हिस्सा रहे बहेड़ी में चुनावी सभा में भाषण दिया था। पं. तिवारी यह चुनाव हार गए थे। बाद में पंडित तिवारी ने इन पंक्तियों के लेखक के समक्ष अपनी टीस व्यक्त की थी कि दिलीप साहब के संबोधन से हुई एक गलतफहमी के कारण वह यह चुनाव हार गए थे।

पहले सेब के व्यापारी के रूप में नैनीताल आ चुके थे दिलीप कुमार
नैनीताल। दिलीप कुमार की आत्मकथा ‘द सबस्टैंडस एंड द शैडो’ में स्वर्गीय दिलीप कुमार ने बताया है कि वह मधुमती से भी पहले नैनीताल एक फल कारोबारी के रूप में आ चुके थे। उनका जन्म पाकिस्तान के पेशावर शहर में हुआ था। उनके पिता लाला गुलाम सरवर खान फलों के बड़े कारोबारी थे। वह और उनका परिवार मुंबई में रहता था। मुंबई से ही वह फलों का कारोबार करते थे। दिलीप कुमार भी अपने पिता के कारोबार उनका हाथ बंटाते थे। पिता को लगता था कि एक दिन उनका बेटा कारोबार संभालेगा। वह अपने बेटे यूसुफ को धंधे में निपुण बनाना चाहते थे। पहले तो वह मुंबई में उन्हें अपने कारोबार का छोटा-मोटा काम सौंपते थे, लेकिन बाद में उन्होंने नैनीताल में एक सेब के बागीचे को लीज का अनुबंध करने की जिम्मेदारी यूसुफ को सौंपी। यह उनके लिए बतौर कारोबारी पहली परीक्षा थी। अपने पिता द्वारा दी गई जिम्मेदारी को उन्होंने बखूबी निभाया और नैनीताल में एक सेब के बागीचे के लीज का अनुंबध हासिल किया। इस डील के लिए उन्होंने अग्रिम भुगतान के तौर पर रुपये भी मिले थे। इस सफलता पर पिता ने उन्हें सराहा भी था। इसके बाद ही 1944 के दौर में उन्होंने दिलीप कुमार के नाम से सिनेमा जगत में दस्तक दे दी। और 14 साल बाद वह 1958 में एक अभिनेता के तौर पर दुबारा नैनीताल पहुंचे थे। उस समय आलम यह था कि उनकी एक झलक पाने के लिए लोग कई किलोमीटर पैदल चलकर मधुमती की शूटिंग देखने लोग पहुंचे थे।

10-12 बड़े भव्य कमरों वाला है फिल्म मधुमती में दिखने वाला बंगला
दिवंगत सिने अभिनेता दिलीप कुमार अभिनीत एवं उत्तराखंड में फिल्माई गई पहली फिल्म मधुमती के बारे में जैसे-जैसे जिज्ञासा बढ़ रही है, यांदों के पिटारे भी खुलते जा रहे हैं। भवाली के नगर पालिका अध्यक्ष संजय वर्मा ने बताया कि मधुमती फिल्म की अधिकांश शूटिंग नगर में स्थित ‘मिस्टर रे के बंगले’ में हुई थी। करीब 10-12 बड़े भव्य कमरों का यह बंगला अंग्रेजी दौर में अंग्रेज सैन्य अधिकारी जनरल वीलर ने बनवाया था। वर्तमान में यहां उनके वंशज रे परिवार के लोग रहते हैं। परिवार के प्रमुख बॉबी रे का कुछ ही समय पूर्व निधन हुआ। उनके बाद उनके दो पुत्र लेस्ली रे व डेनिस रे तथा वेरोनिका ग्रेवाल व मिसेज मेडिली सहित तीन बेटियां इस बंगले के स्वामी हैं। बंगले का कुछ हिस्सा इधर हाल में बिकने की भी अपुष्ट खबर है।

श्री वर्मा ने बताया कि फिल्म का काफी हिस्सा, खासकर सुहाना सफर गीत भवाली के पास अल्मोड़ा जाने वाले मार्ग पर अपनी तरह की खास उत्तरवाहिनी शिप्रा नदी के किनारे डाकारौली नाम के स्थान पर फिल्माया गया था। उस जमाने में शिप्रा नदी में काफी पानी होता था। इस पर एक दर्जन पहाड़ी घराट कही जाने वाली पनचक्कियां भी चला करती थीं। बच्चे इसमें नहाते थे। वर्तमान में यह नदी नाले में तब्दील हो चुकी है, अलबत्ता अब इसे पुर्नजीवित करने के प्रयास भी शुरू हो गए हैं।

जब गेठिया की बेटी बनीं दिलीप कुमार की हीरोइन
स्थानीय निवासी और भीमताल के ब्लॉक प्रमुख डॉ. हरीश बिष्ट ने भी पुराने लोगों से सुनी बातों के आधार पर बताया कि यहां के गांव गेठिया की एक लड़की को कुछ दृश्यों के लिए ही सही, दिलीप कुमार की हीरोइन बनने का मौका मिला था। यह लड़की थी-यशोदा आर्या। हुआ यह कि गेठिया सैनिटोरियम के पास चीड़धार में शूटिंग के दौरान एक दृश्य में अभिनेत्री वैजयंती माला को पहाड़ पर दौड़ना था। लेकिन वैजयंती माला दृश्य के लिए जरूरी तरीके से पहाड़ पर दौड़ नहीं पा रही थी। इस दौरान निर्देशक बिमल रॉय की निगाह पास खड़ी गेठिया गांव की एक बेटी यशोदा आर्या पर पड़ी, जिसे उन्होंने वैजयंती माला की जगह दौड़ाकर सीन शूट किया। इस दौरान दिलीप कुमार ने गांव वालों के साथ फोटो भी खिंचवाई थी, इस फोटो में यशोदा आर्या मौजूद बताई जाती हैं। इसलिए इस फोटो कुछ लोगों ने आज भी सहेज कर रखा है।

इस तरह शूटिंग के लिए नैनीताल आया बिमल रॉय की नजर में
बिमल रॉय अक्सर मुक्तेश्वर आते थे। यहां उनके जीजा भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आइवीआरआइ) मुक्तेश्वर में नौकरी करते थे। इसलिए बिमल अपनी दीदी के परिवार से मिलने के यहां आते रहते थे। इस दौरान व अक्सर नैनीताल भी घूमने आते थे। उन्हें इस क्षेत्र का सौंदर्य एक नजर में भा गया था। इसीलिए वह बाद में पूरी यूनिट लेकर मधुमती की शूटिंग के लिए नैनीताल आए थे। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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-फिल्म ‘फायर इन द माउंटेंस’ को लॉस एंजिल्स में मिला ऑडियंस अवार्ड
-नैनीताल, अल्मोड़ा आदि के कलाकार हैं फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में

Mukesh Dhasmana
फिल्म के एक दृश्य में नैनीताल के वरिष्ठ कलाकार मुकेश धस्माना।

डॉ.नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 29 मई 2021। नैनीताल एवं उत्तराखंड के कई कलाकारों के अभिनय से सजी तथा पहाड़ की समस्याओं के समाधान के लिए यहां की नई व पुरानी पीढ़ियों के बीच नए व पारंपरिक जागर जैसे धार्मिक आयोजनों के समाधानों को रेखांकित करती हिंदी फीचर फिल्म ‘फायर इन द माउंटेंस’ ने लॉस एंजिल्स में आयोजित 19वें वार्षिक भारतीय फिल्म समारोह में सर्वश्रेष्ठ फीचर के लिए ऑडियंस अवार्ड जीता है। इस फिल्म को 20 से 27 मई तक कैलिफोर्निया में आयोजित समारोह के उद्घाटन अवसर पर प्रदर्शित किया।
82 मिनट की यह फिल्म पहाड़ की एक ऐसी मां के बारे में है जो अपने व्हीलचेयर से बंधे बेटे को फिजियोथेरेपी के लिए चिकित्सालय ले जाने में सक्षम होने के लिए एक दूरदराज के हिमालयी गांव में सड़क बनाने के लिए पैसे बचाने के लिए कड़ी मेहनत करती है, लेकिन उसके पति का मानना है कि जागर लगाकर देवताओं के आह्वान से उसका बच्चा ठीक हो सकता है। फिल्म में नैनीताल के वरिष्ठ कलाकार मुकेश धस्माना ग्राम प्रधान की नकारात्मक भूमिका में, जबकि मदन मेहरा हड्डी रोग विशेषज्ञ की जबकि अल्मोड़ा निवासी मुंबई में स्थापित एनएसडी स्नातक चंदन बिष्ट नायक की मुख्य भूमिका में हैं। साथ ही पहाड़ के ही हर्षिता तिवारी और मयंक सिंह जैड़ा भी फिल्म में हैं, साथ ही विनम्रता राय और सोनल झा की भी भूमिकाएं हैं। बताया गया है कि इससे पहले इस फिल्म का सनडांस फिल्म फेस्टिवल-2021 में वर्ल्ड प्रीमियर हुआ था। वर्ल्ड सिनेमा ड्रामेटिक कॉम्पिटिशन में भी यह फिलम 10 फिल्मों में से दक्षिण एशिया से चुनी गई एकमात्र फिल्म थी। हाल ही में इस फिल्म ने स्पेन में आयोजित हुए 20वें लास पालमास डी ग्रैन कैनरिया अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में इसे सर्वश्रेष्ठ फिल्म के लिए सिल्वर लेडी हरिमगुड़ा और फिल्म के अभिनेता चंदन बिष्ट को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के पुरस्कार भी जीते हैं।

नैनीताल के फिल्मकार संजय की फिल्म को बेस्ट जूरी अवार्ड
Monitorनैनीताल। नैनीताल के फिल्मकार संजय सनवाल की कन्या भ्रूण हत्या जैसे संवेदनशील विषय पर बनी फिल्म मॉनीटर ने इसी माह आयोजित नवाडा इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल-2021 में ‘बेस्ट जूरी अवार्ड’ जीता है। बताया गया है कि 9 सितंबर 2020 से 9 मई 2021 तक नवाडा बिहार में आयोजित इस फिल्म फेस्टिवल में 55 देशों की 1650 फिल्मों ने प्रतिभाग किया था।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 02 अप्रैल 2021। नगर में शशि सुमित प्रोडक्शन एवं जार पिक्चर्स मुंबई के बैनर तले ‘वन्स अपॉन टू टाइम्स’ नाम से बन रही फिल्म की शूटिंग की गई है। बीती 15 से 31 मार्च के बीच इस फिल्म की शूटिंग नगर के मल्लीताल, पाइंस, हिमालय दर्शन, भवाली, हनुमानगढ, लवर्स पॉइंट, नैनी रिट्रीट, डीएसए मैदान व मॉल रोड पर की गई।

Film Once upon two times
फिल्म ‘वन्स अपॉन टू टाइम्स’ की शूटिंग के दौरान फिल्म के मुख्य कलाकारों के साथ स्थानीय कलाकार।

सोनाक्षी मित्तल द्वारा निर्देशित इस फिल्म में संजय सूरी, नितेश पांडेय, मृणाल कुलकर्णी, अनुद सिंह व कशिश खान मुख्य भूमिकाओं में हैं, जबकि फिल्म में नैनीताल के मदन मेहरा, कौशल साह जगाती, रोहित वर्मा, उमेश कांडपाल, मुकेश धस्माना, विक्रम रावत, मीता साह, पंकज भट्ट, मनीष भट्ट, दीक्षा अधिकारी, मरियम, प्रदीप त्यागी, भुवन, रवि, मंजू रौतेला, कुसुम व गीता आदि कलाकारों ने भी अभिनय किया है, जबकि गोलू फिल्म्स एवं कास्टिंग और प्रयोगांक नैनीताल के कलाकारों ने फिल्म में क्राउड संयोजक के रूप में योगदान दिया है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 06 अक्टूबर 2020। जोधा फिल्म दिल्ली के बैनर पर उत्तराखंड दूरदर्शन के लिए गढ़वाली धारावहिक ‘भागीरथ प्रयास’ की शूटिंग कुमाऊं मंडल के अल्मोड़ा, भिकियासैंण के श्रीकोट, माझली गांव तथा मानिला, रतखाल आदि गाँवों में नौ दिन तक की गई।
फिल्म के सहायक-निर्देशक और प्रोडक्शन इंचार्ज जगदीश तिवारी ने बताया कि इस धारावाहिक के निर्माता दिल्ली के संजय जोशी है, जबकि निर्देशन, पटकथा व संवाद लेखन प्रसिद्ध उत्तराखंडी फिल्म उद्योग की प्रथम महिला निर्देशिका के रूप में प्रतिष्ठित निर्देशक सुशीला रावत ने किया है। कैमरामैन ध्रुवव त्यागी, मेकअप श्वेता शर्मा, टीम लीडर खुशाल सिंह बिष्ट और देव रौतेला आदि ने कोरोना से बचाव के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए शूटिंग पूरी करने में योगदान दिया। उन्होंने बताया कि भागीरथ प्रयास की कहानी दो दोस्तों-सरकारी विभाग में अधिकारी के पद से सेवा निवृत्त गंगा सिंह व भागीरथ के बीच घूमती हुई उत्तराखंड के वर्तमान हालातों का बयां करती है तथा रिवर्स पलायन की ओर प्रेरित करते हुए संदेश देती है कि पलायन को रोकना अत्यंत आवश्यक है, जिससे यहां की जनसंख्या कम ना हो और उत्तराखंड एक खुशहाल राज्य बने।
इस धारावाहिक में उत्तराखंड फिल्म और कला जगत के ख्यातिप्राप्त बृजमोहन वेदवाल, कुसुम बिष्ट, राजेश मालगुडी, अमित भट्ट, कुसुम चौहान, सुमन खन्डूड़ी, रविंद्र रावत, पुष्पा जोशी, राजेश नौगाईं, रमेश परदेसी, पार्थ नेगी, देव रौतेला और मोहन रौतेला के साथ ही स्थानीय कलाकारों ने भी अभिनय किया है ।

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Papa ka ashish
फिल्म पापा का आशीष का एक दृश्य।

नवीन समाचार, नैनीताल, 01 अक्टूबर 2020। नगर के मधुबन आर्ट्स द्वारा निर्मित तथा डा. मोहित सनवाल द्वारा निर्देशित लघु फिल्म ‘पापा का आशीष’ अब प्रसिद्ध फिल्म चैनल ‘शार्ट फिल्म्स’ में 2 अक्टूबर 2020 को 11 बजे से प्रदर्शित की जाएगी, और आगे भी देखी जा सकेगी। डॉ सनवाल ने बताया की वर्ष 2019 में निर्मित यह फिल्म पूर्व में ‘लेक सिटी इंटेरनेशनल फिल्म फेस्टिवल नोएडा’ में बेस्ट डेब्यू डायरेक्टर का पुरस्कार जीत चुकी है, तथा ‘लंदन फर्स्ट टाइम फिल्ममेकर्स सेशन’ में भी चयनित हुई है। यह फिल्म पॉकेट फिल्म्स के चैनल शार्ट फ़िल्म में 2 अक्टूबर 2020 को 11 बजे इस लिंक पर लाइव प्रदर्शित होगी : https://youtu.be/pHvTbxIsbIY
उल्लेखनीय है कि फिल्म की निर्माता कविता सनवाल हैं, जबकि कैमरा अदिति खुराना, एडिटिंग किंशुक पाण्डेय ने की है। कलाकारों में स्वर्गीय संदीपन विमलकांत नागर, अनिल घिल्डियाल, डीके शर्मा, कौशल साह, शबनी राणा, पवन कुमार, मुकेश धस्माना, अजय पवार, अमित साह व मनोज साह टोनी आदि हैं। इसके साथ ही डा. सनवाल ने इधर लॉक डाउन के दौरान देश भर के 1100 आवेदनों में में शीर्ष 100 में चयनित होगर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय का 13 दिवसीय ‘थिएटर एप्रिशिएशन कोर्स पूरा किया है। इस उपलब्धि पर नगर के रंगकर्मियों ने उन्हें बधाई और शुभकामनायें दी हैं।

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मुक्तेश्वर जैसे छोटे से कस्बे निकलकर निर्मला ने मायानगरी में बना ली है अपनी जगह, कई फिल्मों ,धारावाहिकों में काम कर चुकी है निशा
– 21 सितम्बर को जी टीवी के धारावाहिक गुड्डन तुमसे न हो पायेगा में होगी निशा की एंट्री
– दूरदर्शन के धारावाहिक फिर सुबह होगी में हैं मुख्य कलाकार
IMG 20200921 111538दान सिंह लोधियाल, नवीन समाचार, धानाचूली, 21 सितंबर 2020। सपने पूरा करने के लिए उन सपनों को खुली आँखों से देखना ज्यादा जरुरी है। कुछ ऐसे ही कहानी नैनीताल जिले के कस्बे मुक्तेश्वर की रहने वाली निशा उर्फ़ निर्मला जे चन्द्रा की है।
मामूली से कस्बे से निकल कर जब कोई व्यक्ति अपना नाम बॉलीवुड की दुनिया में दर्ज करवाता है, तो यह कोई मामूली बात नहीं रह जाती। मुक्तेश्वर स्थित आईवीआरआई से सेवानिवृत्त जगदीश चन्द्र की सुपुत्री निर्मला (निशा) ने कर दिखाया जो कि अब बॉलीवुड में अपनी जगह बना चुकी है। उनका हाल निवास हल्द्वानी है।
निशा ने बताया माँ नीरा ने उसे उड़ने के लिए पंख दिए, पापा ने कभी एक्टिंग, डांस, ड्रामा के प्रति मना नहीं किया। साधारण से परिवार से ताल्लुक रखने वाली निर्मला उर्फ़ निशा अब तक कई धारावाहिकों ,फिल्मों टीवी विज्ञापनों में काम कर चुकी हैं।
विवेक गोंडियाल की हास्य फिल्म पाईड पाइपर ,अजय लोहान के साथ बोलो राम ,घरोंदा डॉट कॉम जैसी फिल्मो में काम कर चुकी हैं। सोनी चैनल के सीआईडी, क्राइम पट्रोल और लाइफ ओके के सावधान इंडिया और स्टार प्लस के शपथ धारावाहिक में भी कार्य कर कर चुकी हैं। निर्मला (निशा )बताती हैं की निदेशक राकेश चतुर्वेदी की फिल्म घरोंदा डॉट कॉम में जासूस की भूमिका अदा की जिसमे यशपाल शमी विलेन के किरदार में थे। मनोज पाहवा कॉमेडियन विजेन्द्र काला और उज्जवल राणा भी फिल्म में मौजूद थे। उसके बाद निदेशक राकेश टाक की विधवा फिल्म में काम मिला जिसमे उन्होंने सेकंड लीड रोल निभाया और एक राजस्थानी फिल्म थी जोकि सती प्रथा पर थी। उसके बाद करियर को पंख मिलना शुरू हुआ और पाईड पाइपर फिल्म जिसे विवेक गोंडियाल ने निर्देशित किया जो एक हास्य फिल्म है, फिल्म में निर्मला राजपाल यादव की पत्नी का किरदार निभाया। वे छोटी क्षेत्रीय तमिल, बंगाली राजस्थानी फिल्म भी कर चुकी हैं। इसके अलावा सोनी टीवी के अनामिका का अमित ,जी टीवी के मेरी सासू मां, ऐसी दीवानगी देखी नहीं कहीं ,बिग मैजिक के बाल कृष्णा, स्टार टीवी के नमः, दूरदर्शन के बिटिया भाग्य से, यश राज बैनर की फिल्म सुई धागा में भी काम कर चुकी हैं।
निशा ने केंद्रीय विद्यालय मुक्तेश्वर से इण्टर करने के बाद नैनीताल डीएसबी कैंपस से बीकॉम किया।इसके साथ ही नैनीताल के युगमंच थिएटर से जुडी जहाँ जुहूर आलम, निर्मल पाण्डेय ,राजेश आर्य मंज़ूर हुसैन ,इदरीस मालिक ,कमल मालिक से काफी ज्ञान अर्जित किया व सभी ने उन्हें इस लाइन में करियर बनाने और उचित मार्ग दर्शन किया उसके बाद भारतेंदु नाट्य अकादमी से डिप्लोमा लिया और स्वर्ण पदक हासिल किया । कुछ दिन वही काम करने के बाद भारतीय फिल्म एंड टेली विजन इंस्टिट्यूट पुणे से एक्टिंग में पोस्ट ग्रेजुएशन किया और उसके बाद मेहनत और आत्मविश्वास से आगे की राह आसान होती गयी।
निर्मला का मानना है कि यदि कार्य पूरी मेहनत लगन से किया जाये तो ऊपर वाला भी साथ देता है उन्होंने बताया की मुक्तेश्वर अब बॉलीवुड में भी जाना जाने लगा है। कई फ़िल्मी हस्तियाँ यहाँ आने को आतुर रहती है। वही कई ने तो अपने घर भी यहीं बना लिए है। जिनमे नीना गुप्ता भी शामिल है। शो मैन सुभाष घई की किसना और कांची फिल्म ने नैनीताल जिले को अलग पहचान दिलाई है। अभिनेता हेमंत पाण्डेय के साथ जब उन्होंने बद्री फिल्म की शूटिंग की तो उत्तराखंड की ख़ूबसूरती और जग जाहिर हुई। इससे आने वाले समय में उत्तराखंड में फिल्म की शूटिंग के लिए कई और फिल्म डायरेक्टर उत्तराखंड का कूच करेंगे ,निर्मला कहती हैं अभिनेता सौरभ शुक्ला जहाँ उत्तराखंड की तारीफ करते नहीं थकते, वही अभिनेता संजय मिश्रा इन दिनों अपनी फिल्म की शूटिंग के लिए मुक्तेश्वर आये है। जबकि अभिनेता मनोज वाजपेई ने तो पूरा लॉकडाउन वाला दौर ही मुक्तेश्वर में अपने परिवार के साथ व्यतीत किया और अब वे यहाँ हर बार आने की इच्छा जताते हैं।
निर्मला ने बताया की आगामी 21 सितम्बर को लेकर ख़ासा खुश हैं क्योंकि जी टीवी के धारावाहिक ,गुड्डन तुमसे न हो पायेगा’ में उनकी एंट्री होने वाली है। गुड्डन तुमसे न हो पायेगा’ धारावाहिक अपने तीन सौ से अधिक कड़ी प्रसारित कर चूका है। और धारवाहिक के लीप इयर पूरे होने के चलते ज्यादातर किरदार बदल रहे हैं जिसमें उनका भी एक नेगेटिव एप्रोच लिए हास्य कलाकार का किरदार है। उन्होंने अपने दोस्तों व जानने वालों से अपील की है कि धारावाहिक जरुर देखें और उन्हें उसके बारे में जरुर बताएं।
आपको बताते चलें की निशा इन दिनों बतौर मुख्य कलाकार दूरदर्शन में वीकेंड पर रात आठ बजे प्रसारित होने वाले एक नए धारावाहिक ‘फिर सुबह होगी’ के लिए भी शूटिग कर रही हैं जिसमे उनके साथ जूनियर महमूद भी काम कर रहे हैं , वह एक भ्रष्ट नर्स की भूमिका में हैं जो किडनी गैंग से जुडी है , बताया की यह धारावाहिक आजकल अस्पतालों में चल रहे स्कैम को लेकर है।
बहरहाल निशा को लॉक डाउन के दौरान अपने घर से दूर रहने का मलाल जरुर है मगर वही खुश भी हैं कि कोरोना ने जहाँ कई लोगों का करियर लील लिया वही उनकी झोली में जीवन यापन करने के लिए काम की कोई कमी नहीं है।

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-खुर्पाताल में चल रही लघु फिल्म ‘जागते रहो’ की शूटिंग

Shootingनवीन समाचार, नैनीताल, 18 सितंबर 2020। जिला मुख्यालय के निकट खुर्पाताल में इन दिनों ‘जागते रहो’ नाम की लघु फिल्म की शूटिंग चल रही है। बताया गया है कि फिल्म की कहानी आदमखोर बाघ पर है, कि किन कारणों से बाघ आदमखोर बन रहे हैं और मानव-वन्य जीव संघर्ष का असली कारण व समाधान क्या है। अच्छी बात यह भी है कि इस एक लघु फिल्म में भी बड़ी संख्या में लोगों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शन का मौका तथा काम मिल रहा है।
‘नैनीताल फिल्म एंड आर्ट्स’ के बैनर तले अजय वीर पवार के निर्देशन में बन रही इस लघु फिल्म में वरिष्ठ कलाकार मंजूर हुसैन, डीके शर्मा, मिथिलेश पांडे, मनोज साह ‘टोनी’, शबनी राणा, बलजिंदर कौर, मुकेश धस्माना, रविंद्र रौतेला, आकाश नेगी, भूषण छाबड़ा, चारु तिवारी, दीपक सहदेव, अनवर रजा, अमित साह, पवन कुमार, विनीता यशस्वी, नीरज डालाकोटी, खुर्शीद हुसैन व बाल कलाकर शेजीन अहम भूमिकाओं में हैं। नगर के प्रसिद्ध छायाकार अमित साह प्रोडक्शन, नीरज डालाकोटी व मो. खुर्शीद हुसैन सह-निर्देशन, पवन कुमार कला निर्देशन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जबकि फिल्म की कहानी नगर निवासी रंगकर्मी दिलावर शिराज ने लिखी है व संगीत नदीम शिराज ने दिया है। कैमरे की जिम्मेदारी नगर की महिला छायाकार अदिति खुराना व अमर गौतम जबकि ड्रोन की जिम्मेदारी नितिन छाबड़ा संभाल रहे हैं। इनके अलावा तकनीकी टीम में प्रमोद प्रसाद व अदनान, मेक-अप व वेश-भूषा में अनवर रजा, प्रकाश व्यवस्था में सुनील कुमार, मोनू व अजय सहयोग कर रहे हैं। बताया गया है कि फिल्म की शूटिंग पूरी होने को है।

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-राज्य में फिल्म निर्माण में बताई संस्कृति के प्रसार एवं रोजगार की अपार संभावनाएं
Idrish Malikनवीन समाचार, नैनीताल, 16 सितंबर 2020। नैनीताल निवासी एनएसडी यानी राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के स्नातक एवं बॉलीवुड कलाकार इदरीश मलिक ने प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को खुला पत्र लिखकर राज्य में बॉलीवुड की तर्ज पर अपना ‘उत्तरावुड’ स्थापित करने के लिए सुझाव दिए है। इदरीश का कहना है कि एनएसडी में हर देश भर के केवल 20 छात्र निकलते हैं। उत्तराखंड और नैनीताल का सौभाग्य है कि यहां 40 से 50 एनएसडी स्नातक हैं, और इनमें से 19 नैनीताल के हैं। वह स्वयं वर्ष 2000 से नैनीताल में बीएम शाह ओपर एयर थियेटर की स्थापना कर देश भर के कलाकारों को बुलाकर बिना किसी सरकारी सहायता के हर वर्ष 15 मई से 30 जून तक ग्रीष्म नाट्य महोत्सव आयोजित कर रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा नगर में प्रेक्षागृह की स्थापना करने की घोषणा के बावजूद स्थापना न करने पर नाराजगी जताते हुए यहां के कलाकारों की उपेक्षा पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने सुझाव दिया है कि राज्य में हर ए व बी ग्रेड के होटल में राजस्थान, केरल व महाराष्ट्र आदि राज्यों की तर्ज पर सांस्कृतिक मंडलियों के कार्यक्रम आयोजित करने की अनिवार्यता करने, प्रदेश के दोनों मंडलों में लोग नाट्य, चित्रकला, फिल्म, संगीत आदि के लिए लाइब्रेरी व छात्रावास आदि सुविधाओं युक्त गुरुकुलों की स्थापना करने, इन गुरुकुलों से चार वर्ष का कोर्स कर निकलने वाले छात्रों को अस्थाई तौर पर कक्षा 6 से 12 तक के बच्चों को 6-6 माह के लिए दोनों मंडलों में संस्कृतियों का आदान-प्रदान करते हुए अपने विषय पढ़वाने, राज्य में हर 30 किमी में 20-30 सीटों वाले एवं मात्र 20, 30 या 50 रुपए शुल्क वाले 5000 छोटे सिनेमा हॉल बनाने तथा उनमें महाराष्ट्र सरकार की तर्ज पर अपनी संस्कृति व कहानियों पर स्थानीय फिल्में बनाकर दिखाने की व्यवस्था करने का सुझाव दिया है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 24 अगस्त 2020। उत्तराखंड की ऐतिहासिक घटनाओ पर ‘गदेरा’ नाम से निर्देशक योगेश वत्स के निर्देशन में एक वेब सिरीज बनने जा रही है। वेब सिरीज से जुड़े इशान खुराना ने बताया कि इस वेब सिरीज के लिए अगले तीन दिन 25, 26 व 27 अगस्त को नगर के सूखाताल स्थित देवदार लॉज में सुबह 11 से शाम आठ बजे तक ऑडीशन आयोजित होने जा रहे हैं। ऑडीशन में 35 से 60 वर्ष की अधिक उम्र भारतीय व यूरोपीय नजर आने वाले स्थानीय कलाकारों की अपेक्षा की गई है। उन्होंने दावा किया कि उत्तराखंड की ऐतिहासिक घटनाओं पर बनने वाली पहली फिल्म है जिसमें कुमाऊं और गढ़वाल की अंग्रेजी एवं गोरखा शासनकाल की कई पुरानी घटनाओं के संग्रह को पटकथा में पिरोया गया है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 11 अगस्त 2020। नगर निवासी सुप्रसिद्ध दिवंगत सिने कलाकार स्वर्गीय निर्मल पाण्डे की स्मृति में उनकी जयंती पर मुंबई में आयोजित फिल्म फेस्टिवल में नगर के ही ‘…का अंश’ प्रोडक्शन की अजय पवार द्वारा निर्देशित दो फिल्मों-चित्रकार और ‘मंटो‘श नींद’ को पुरस्कृत किया गया है। बताया गया है कि पहली फिल्म चित्रकार के लिए मुकेश धस्माना को सर्वश्रेष्ठ सह अभिनेता एवं दूसरी सआदत हसन मंटो की कहानी ‘सौ कैण्डल पावर का बल्ब’ पर आधारित फिल्म ‘मंटो‘स नींद’ में ‘डॉ मोहित सनवाल’ को सिनेमाटोग्राफी के लिए तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। फेस्टिवल में राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न फिल्मों ने प्रतिभाग किया व चयनित फिल्मों को राष्ट्रीय स्तर पर ऑनलाइन दिखाया गया।
बताया गया है कि अजय पवार द्वारा निर्देशित चित्रकार फिल्म एक ऐसे चित्रकार की कहानी है जिसकी अपनी महत्वकांक्षाएँ हैं। यह फिल्म रंगों की रंग बदलती और समाज के जटिल ताने बाने को रूबरू करवाती है। इन फिल्मों में वरिष्ठ रंगकर्मी मंजूर हुसैन, मिथिलेश पांडे, मुकेश धस्माना, दीपक सहदेव, अदिति खुराना, अनवर रजा, डॉ. मोहित सनवाल, मनोज साह टोनी, पवन कुमार, नीरज डालाकोटी, अमित साह, पुनीत कांत, प्रिंस परसाल, कार्तिक पंत व ललित मोहन आदि ने निर्माण में अपनी अहम भूमिका निभाई।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 15 जुलाई 2020। कला की नगरी के कलाकारों ने लॉक डाउन के दौरान कलाकारों के दुःख-दर्द, आर्थिक अभावों के कारण अकेलेपन व खासकर लॉक डाउन के दौरान उनकी समस्याओं की ओर किसी के भी ध्यान न देने पर ‘अंतर्द्वन्द्व’ नाम से फिल्म बनाई है। अच्छी बात यह है कि बिना किसी खर्च के यानी शून्य बजट में मोबाइल फोन से बनाई गई एवं मोबाइल पर ही एडिट की गयी यह फिल्म दिल्ली में आयोजित होने जा रहे निर्मल पांडे स्मृति फिल्मोत्सव में चयनित हो गई है। कलाकारों की पीड़ा को प्रदशित करने, उन्हें वर्तमान हालातों मंे आत्महत्या के स्तर पर पहुंचने की स्थितियों को प्रदर्शित करती इस लघु फिल्म को निर्माण ‘तृष्णा प्रोडक्शंस’ के बैनर तले लेखक, संगीत निर्देशक और निर्देशक अभिनेता रोहित वर्मा ने तैयार किया है। फिल्म में सिनेमेटोग्राफर व अभिनेता मो.जावेद हुसैन तथा नगर के छायाकार अमित साह के साथ ही थियेटर से काफी लम्बे समय से जुड़े अनवर रजा और कौशल साह भी विभिन्न भूमिकाओं में हैं। फिल्म के फिल्मोत्सव में चयनित होने पर नगर के स्थानीय कलाकारों ने हर्ष जताते हुए शुभकामनाएं भी दी हैं।

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नवीन समाचार, देहरादून, 20 जून 2020। उत्तराखंड सरकार जहां एक ओर कोरोना से बचाव और रोकथाम को लेकर सख्ती बरत रही है, वहीं अब अनलॉक की ओर भी धीरे-धीरे कदम बढ़ा रही है। इसी क्रम में राज्य में फिल्मों की शूटिंग के लिए दरवाजे खोल दिए गए हैं। उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद ने इसके लिए दिशा-निर्देश मानक प्रचालन कार्यविधि (एसओपी) तय किये हैं, जिन्हें राज्य के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने आज जारी कर दिया।

इसके मुताबिक सभी प्रोडक्शन यूनिट, फिल्म शूटिंग यूनिट या ऑडियो विजुअल सेक्टर्स के लोगों को कोरोना से बचाव एवं रोकथाम के लिए सभी जरूरी मानक दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा। मसलन 6 फीट की शारीरिक दूरी, मास्क पहनना, चेहरा ढकना, बार-बार साबुन से हाथ धोना, सैनिटाइज करना, सार्वजनिक स्थानों पर थूकने से परहेज करना और आरोग्य सेतु एप को यूनिट के सभी लोगों के मोबाइल फोन में इंस्टॉल करना अनिवार्य होगा। प्रोड्यूसर के लिए राज्य में प्रवेश से पहले या एक जिले से दूसरे जिले में जाने के क्रम में उत्तराखंड के आधिकारिक वेब पोर्टल (https://dsclservices.in/uttarakhand-migrant-registration.php) पर रजिस्ट्रेशन करना अनिवार्य होगा। प्रोडक्शन कंपनी या फिल्म शूटिंग यूनिट को महानिदेशक, सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग, उत्तराखंड के ऑफिस को सभी सुरक्षा मानकों और राज्य सरकार तथा भारत सरकार द्वारा निर्धारित एसओपी के अनुपालन के संबंध में अंडरटेकिंग देना अनिवार्य होगा। इसमें फिल्म प्रोडक्शन हाउस का नाम, सदस्यों की सूची, मोबाइल नंबर, कितने दिनों तक शूटिंग चलेगी और कहां-कहां होगी। इस दौरान कहां पर यूनिट के लोग ठहरेंगे और जहां पर शूटिंग होगी वहां यूनिट के लोग किस परिवहन माध्यम (कार, बस, ट्रेन या फ्लाइट) से यात्रा करेंगे, इन सब का ब्यौरा देना होगा।

इन सब का परीक्षण करने के बाद महानिदेशक, सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग, उत्तराखंड शूटिंग यूनिट को अनुमति देंगे, जिसे संबंधित जिला प्रशासन को दिखाना होगा। प्रोडक्शन कंपनी को एक नोडल अधिकारी के रूप में नियुक्त करना होगा, जो उस दौरान सभी गतिविधियों का डाटा प्रशासन के साथ साझा करेगा। यूनिट के लोगों को प्रतिदिन थर्मल स्क्रीनिंग करना अनिवार्य होगा। फिल्म यूनिट को किसी भी जोखिम क्षेत्र (कंटेनमेंट जोन) में ना तो शूटिंग करने की इजाजत होगी ना ही किसी जोखिम क्षेत्र से कोई व्यक्ति क्रू में शामिल हो सकेगा। प्रोडक्शन यूनिट के सभी लोगों को मास्क, हैंड ग्लव्स आदि पहनना अनिवार्य होगा। शूटिंग स्थल पर भीड़भाड़ इकट्ठा करने की मनाही होगी। अगर प्रोडक्शन यूनिट या फिल्म शूटिंग यूनिट के किसी व्यक्ति में कोरोना संक्रमण पाया जाता है तो इस बारे में जिला प्रशासन और स्वास्थ्य प्राधिकरण को यथाशीघ्र सूचित करना होगा। प्रोडक्शन यूनिट और फिल्म शूटिंग यूनिट को किसी भी स्थानीय व्यक्ति के साथ आसपास के इलाकों में बेवजह घूमने की इजाजत नहीं होगी। प्रोडक्शन यूनिट/फिल्म शूटिंग यूनिट में 65 साल से अधिक उम्र या गर्भवती महिला अथाव हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग से ग्रस्त, डायबिटीज तथा किसी भी गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को शामिल करने में की मनाही होगी। इस श्रेणी के लोग कार्यस्थल या शूटिंग सेट पर जा भी नहीं सकेंगे। अगर किन्ही विशेष परिस्थितियों में ऐसे लोगों को ले जाने की नौबत आती है तो इस बारे में जिला प्रशासन को पहले से सूचित करना अनिवार्य होगा। शूटिंग शुरू करने से पहले और खत्म करने के बाद उस स्थान और सेट के फर्नीचर, रेलिंग, काउंटर इत्यादि को सैनिटाइज करना अनिवार्य होगा। इनडोर शूटिंग के लिए अधिकतम 15 और आउटडोर शूटिंग के लिए 30 लोगों की अनुमति होगी। रसोई में भोजन पकाने के दौरान और खाना परोसने के दौरान भी सभी अनिवार्य सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा। शूटिंग या आवागमन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों को भी पहले और बाद में सैनिटाइज करना अनिवार्य होगा।

मुख्य सचिव ने कहा है कि फिल्म शूटिंग के दौरान उपरोक्त गतिविधियों की निगरानी के लिए आवश्यक तंत्र लगाने के मामले में सम्बन्धित जिला प्रशासन आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005, महामारी रोग अधिनियम, 1897 और आईपीसी की सम्बन्धित धाराओं के तहत इन दिशा-निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित कराएगा।

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नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 30 अप्रैल 2020। इरफान खान के बाद सिने अभिनेता ऋषि कपूर भी अचानक बृहस्पतिवार को दुनिया से विदा हो गये। वे नवंबर 2012 में यशराज बैनर्स की फिल्म औरंजजेब की शूटिंग के लिए नैनीताल आये थे और तीन दिन शूटिंग की थी। खास बात यह रही कि इस फिल्म की शूटिंग नैनीताल में जरूर होनी थी, लेकिन नैनीताल का जिक्र नहीं होना था, लेकिन प्रकृति के प्रेमी ऋषि को नैनीताल की खूबसूरती ने ऐसा प्रभावित किया कि उन्होंने नैनीताल की सुंदरता को फिल्म में शामिल करवाया।rishi kapoor

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6 नवंबर 2012 को नैनीताल में माल रोड से शूटिंग के दौरान गुजरते दिवंगत अभिनेता ऋषि कपूर।

यह खुलासा औरंगजेब फिल्म के निर्माण में प्रोडक्शन का जिम्मा संभालने वाले सगीर खान ने किया। सगीर ने बताया कि पांच नवंबर 2012 को ऋषि फिल्म यूनिट के साथ नैनीताल में पहुंचे और यहां मनु महारानी होटल में रुके थे। इसी दिन देर शाम उन्होंने नैनीताल घूमने की इच्छा जताई थी और सगीर के साथ ही मॉल रोड पर घूमने आये थे। यहां उन्होंने मॉल रोड पर क्लासिक होटल के नीचे एक फड़ से ठंड लगने पर मफलर और सरदार सन्स से कोई अन्य कपड़ा खरीदा। इस दौरान ही वे नैनीताल की खूबसूरती से ऐसे प्रभावित हुए और कहा कि नैनीताल की सुंदरता को फिल्म में जरूर होना चाहिए। इस पर ही 6 नवंबर की सुबह तड़के पांच से साढ़े पांच बजे के बीच नगर के दृश्य फिल्माये गये। वहीं सुबह करीब साढ़े 10 बजे वे स्वयं होटल से पीछे चलते कैमरों के साथ निकले और माल रोड होते हुए तल्लीताल पहुंचे और वहां से सीधे निकलने के बजाय गाड़ी कलेक्ट्रेट-राजभवन रोड की ओर मोड़कर वापस डीएसबी से मस्जिद तिराहे पर उतर गये और फिर नैनी सरोवर का दूसरा चक्कर भी लगाया। इस तरह वाहनों पर कैमरे लगाकर नैनी झील के गिर्द ऋषि कपूर के शहर में कार से गुजरने तथा लाल व नीली बत्ती लगी गाड़ियों को इस ओर से उस ओर दौड़ाते हुए सीन भी शूट किये गये। इस दौरान तड़के से लोअर माल रोड पर वाहनों का आवागमन बंद कर दिया गया था। फोटो खींचने पर भी पाबंदी थी। फोटो खींचने वालों के कैमरों से फोटो भी डिलीट कर दी जा रही थीं।
उल्लेखनीय है कि औरंगजेब फिल्म की शूटिंग मूलतः नगर के अयारपाटा क्षेत्र में एक कर्नल साहब की कोठी में हुई और होनी थी। फिल्म में इसे डीसीपी बने ऋषि की कोठी के रूप में ही दिखाया गया था। यहां ऋषि, तन्वी आजमी और अभिनेता अर्जुन कपूर के बीच कुछ दृश्य फिल्माये गये। नगर के दृश्यों को फिल्माने की कोइ्र योजना नहीं थी, परंतु ऋषि के कहने पर ही नगर के दृश्य फिल्माये गये थे।
उल्लेखनीय है कि फिल्म औरंगजेब अमिताभ स्टारर त्रिशूल फिल्म की रिमेक बताई जाती है। इस फिल्म में ऋषि ने खलनायक प्रेम चोपड़ा वाला किरदार निभाया था। इस फिल्म में निर्माता निर्देशक बोनी कपूर के बेटे अर्जुन कपूर और मलयालम अभिनेता पृथ्वीराज नायक तथा पाकिस्तानी अभिनेत्री सलमा आगा की पुत्री साशा आगा उर्फ जारा नायिका की भूमिका में थे, साथ ही जैकी श्राफ व अमृता सिंह भी फिल्म में विभिन्न भूमिकाओं में थे।

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d105912856Film Tussle of Wordsनवीन समाचार, नैनीताल, 2 मार्च 2020। नैनीताल की खूबसूरती ऐसी है कि इसे शब्दों में व्यक्त कर पाना मुश्किल है, परंतु एक बार कोई इसे दिल से निहार ले तो बिना शब्दों के भी सब कुछ बयां कर देती है। ऐसा ही कुछ यहां फिल्माई जा रही लघु फिल्म ‘टसल ऑफ वर्ड्स’ की कहानी भी है। सोमवार को नगर की विश्व प्रसिद्ध नैनी झील के किनारे माल रोड पर कुछ दृश्यों के साथ इस फिल्म की शूटिंग प्रारंभ हुई। भारतीय फिल्म जगत के शुरुआती मूक फिल्मों के दौर को यादों कराती इस फिल्म में नायिका प्राची बंसल एक लेखक के रूप में है, और यह फिल्म एक लेखक की उधेड़बुन को दिखाती है। फिल्म के लिए आज लोवर माल रोड पर नायिका के भागने, नैनी झील में नौकायन एवं रेस्टोरेंट में नास्ता करते हुए कुछ दृश्य फिल्माए गए।

Film Tussle of Words1फिल्म के निर्देशक बरेली यूपी निवासी मयंक श्रीवास्तव ने बताया कि फिल्म मुंबई बेस्ड प्रयांक प्रोडक्शन के लिए बनाई जा रही है। फिल्म में उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध सिने अभिनेता हेमंत पांडे के भाई जितेंद्र पांडे भी मुख्य भूमिका में हैं। मयंक इससे पहले कुमाऊं के रानीखेत में पद्मावत फिल्म के ‘घूमर’ और पीके फिल्म के ‘ठरकी छोकरो’ गीतों के गायक स्वरूप खान के म्यूजिक वीडियो गली में आज चांद निकला की शूटिंग कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि केवल पार्श्व संगीत के साथ करीब 16-17 मिनट की यह फिल्म फिल्मोत्सवों के लिए तैयार की जा रही है। फिल्म में कोई संवाद नहीं होंगे। वहीं नायिका प्राची ने बताया कि वे जी टीवी के चर्चित धारावाहिक कलीरे सहित कई विज्ञापन फिल्मों एवं म्यूजिक वीडियो में काम कर चुकी हैं।

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नवीन समाचार, बागेश्वर, 2 फरवरी 2020। देहरादून। एंड टीवी पर शुरू होने वाले ‘लाल इश्क’ (डेथ फॉर 15 मिनट्स) धारावाहिक में उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल के अल्मोड़ा जनपद की बेटी रूप दुर्गापाल ‘सुपर वुमेन’ सानिया के रोल में नजर आएंगी, और एक महाशक्ति के तौर पर महिलाओं को उनकी ताकत का अहसास कराएंगी।
उल्लेखनीय है कि रूप ने कलर्स मंे ‘बालिका वधु’ से अपनी अभिनय यात्रा प्रारंभ की थी और जीटीवी में ‘तुझसे है रबता’, सब टीवी में बालवीर, कलर्स में स्वरागिनी, सोनी पर कुछ रंग प्यार के, एंड टीवी पर गंगा और वारिस के साथ ही सीआईडी के दूसरे भाग सीआईएफ में डाक्टर साक्षी की भूमिका निभा चुकी हैं। बावजूद उन्हें लाल इश्क से काफी उम्मीद हैं। रूप इस धारावाहिक में सोनिया नाम के मुख्य किरदार में हैं, जो शुरुआत में एक आम लड़की है। एक हादसे में वह 15 मिनट के लिए मर जाती हैं और उन्हें मृत्यु का अनुभव (नियर डेथ एक्सपीरियंस) होता है। इससे उसके पति, सास और ससुर परेशान हो जाते हैं लेकिन कुछ देर बाद वह जिंदा हो जाती है। फिर पता चलता है कि उसका ब्लड ग्रुप सुपर पावर है। उसके परिवार के पहले भी लोगों का ब्लड ग्रुप सुपर पावर रहा है। ये लड़की एक हैवान को भी खत्म करती है। समाज में जो बुरे लोग हैं। उनको खत्म करने के लिए काम करती है।

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-लक्सर के मूल निवासी हैं बाल कलाकार यज्ञ भसीन, नैनीताल में कार्यरत रहे यज्ञ के माता व पिता

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फिल्म पंगा के पोस्टर में अन्य कलाकारों के साथ बाल कलाकार यज्ञ भसीन।

नवीन समाचार, नैनीताल, 25 दिसंबर 2019। आगामी 24 जनवरी को रिलीज होने वाली हिंदी फीचर फिल्म पंगा का देवभूमि उत्तराखंड और नैनीताल से खास संबंध निकल आया है। कंगना रानावत, जस्सी गिल, नीना गुप्ता, पंकज त्रिपाठी और ऋचा चड्ढा अभिनीत इस फिल्म में एक कविता फिल्म के विषय को स्पष्ट करती है। वह कविता है-‘जो सपने देखते हैं वो सो नहीं पाते, उन्हें पूरा किये बिना बेचैन रहते हैं। जो सपने देखते हैं वो गिरते हैं, रुकते हैं, वो कमर कसते हैं, हर लिमिट फांद कर बढ़ते हैं। जो सपने देखते हैं वही खुद से मिलते हैं, अपनी दुनिया बदलते हैं और हर सपना सच करते हैं। जो सपने देखते हैं वो पंगा लेते हैं, हर बंधन से, हर रुकावट से, नामुमकिन से, खुद से, जोर लगा के पंगा लेते हैं।’

दिलचस्प बात यह भी है कि ‘पंगा’ फिल्म में प्रमुख चरित्र के रूप में नजर आने वाले व इसके विभिन्न पोस्टरों में मौजूद बाल कलाकार यज्ञ भसीन की खुद की कहानी इस कविता और फिल्म की थीम से पूरी तरह से मेल खाती है। बाल कलाकार यज्ञ भसीन का देवभूमि उत्तराखंड और नैनीताल नगर से सीधा संबंध है।यज्ञ का परिवार मूलतः उत्तराखंड के लक्सर (हरिद्वार) से है। यज्ञ का जन्म लक्सर में ही हुआ है। यज्ञ के जन्म के तीन माह बाद ही यज्ञ के पिता दीपक भसीन का चयन उत्तराखंड उच्च न्यायालय नैनीताल में सेक्शन अफसर के पद पर हो गया, लिहाजा उनका परिवार नैनीताल आ गया। दीपक यहां वर्ष 2014 से 2017 तक कार्यरत रहे, जबकि यज्ञ की माता सोनिया भसीन इस दौरान मल्लीताल स्थित हेड पोस्ट ऑफिस रोड पर रेडियन्स ब्यूटी सैलून के नाम से ब्यूटी पार्लर चलाने लगीं। इसी दौरान यज्ञ की प्रतिभा और अभिनय क्षमता दीपक और सोनिया को नजर आ गई तो उन्होंने यज्ञ को बॉलीवुड में अभिनेता बनाने की ठान ली, और अपने करियर से ‘पंगा’ ले लिया। यज्ञ के पिता हाई कोर्ट की अपनी प्रथम श्रेणी की नौकरी और मां ने अपना ब्यूटी पार्लर का चलता हुआ व्यवसाय त्याग कर सीधे बॉलीवुड को रुख किया और 2017 में सीधे मुंबई पहुंच गए। 2 साल के कठिन संघर्ष और बिना किसी गॉड फादर के आज यज्ञ भसीन फॉक्स स्टार स्टूडियोज के बैनर तले आ रही हिंदी फिल्म ‘पंगा’ से अपने अभिनय जीवन की शुरुआत करने जा रहा है। माता पिता का अपने बालक में अभिनय क्षमता और हुनर को आंक कर अपने पूरे करियर को दांव पर लगा देना किसी पंगे से कम नहीं है।

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-स्मैक के दुष्प्रभावों पर नगर के युवाओं ने बनाई फिल्म जहर
नवीन समाचार, नैनीताल, 4 दिसंबर 2019।
समाज में तेजी से बढ़ रहे स्मैक के नशे के युवा पीढ़ी, परिवार व समाज पर पड़ रहे दुष्प्रभावों को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से नगर के युवाओं ने ‘जहर’ नाम से एक लघु फिल्म का निर्माण किया है। बुधवार को इस फिल्म को प्रेस को दिखाया गया। फिल्म के निर्माता ‘प्रारंभ प्रोडेक्शन’ के निर्देशक प्रिंस परसाल ने बताया कि यह फिल्म नैनीताल व उत्तराखण्ड में बढ़ रहे नशे खास कर स्मैक के सेवन और उससे होने वाले दुष्परिणामों को दर्शाती है। फिल्म का उद्देश्य युवाओं को नशे की गलत लत से छुटकारा पाने के लिए जागरूक करना है।

देखें फ़िल्म ज़हर :

बताया गया कि फिल्म नगर की एक सत्य घटना पर आधारित है। उल्लेखनीय है कि बीते वर्ष नगर में एक युवक के स्मैक का लती हो जाने पर उसके भाई ने स्मैक के तस्कर की हत्या कर दी थी। इस फिल्म का कथानक भी कुछ ऐसा ही है। मूल फिल्म में नशे के तस्कर को काफी भद्दी गालियों का प्रयोग करते दिखाया गया है, जो काफी खलता है, अलबत्ता फिल्म स्क्रीनिंग के दौरान गालियों को म्यूट किया गया। फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में मोहम्मद सोहेल, गौरव सिलोरियाल, अमित साह, पवन कुमार, शबनी राणा, बलजिंदर कौर हैं। फिल्म के निर्माण में दक्ष प्रसाद, धैर्य बिष्ट आदि ने तकनीकी टीम में तथा राजेश साह, मोहित सनवाल, अजय वीर पावर, सगीर खान ने सहयोग दिया है। 

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-मुंबई में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने गत दिनों किया था वृद्धों के अकेलेपन को प्रदर्शित करती फिल्म का शुभारंभ, फिल्म में निर्देशक सहित कई लोग नैनीताल से
Film Poonam 2नवीन समाचार, नैनीताल, 18 अक्तूबर 2019। एक दौर में छोटे पर्दें के चर्चित जासूसी धारावाहिक व्योमकेश बख्शी के मुख्य किरदार रजित कपूर और छोटे परदे के ही चर्चित धारावाहिक ‘कहानी घर-घर की’ की तृष्णा यानी मीता वशिष्ठ के बीच इन दिनों सरोवरनगरी में प्रेम चल रहा है। हम बात यहां फिल्माई जा रही फिल्म ‘पूनम’ की कर रहे हैं, जिसमें मीता पूनम के मुख्य किरदार में और रजित सूरज के किरदार में हैं। शुक्रवार को दोनों के बीच हिमालय दर्शन, नैनी झील, कैनेडी पार्क, बोट स्टेंड व हनुमान गढ़ी सहित कई स्थानों पर एक युगल गीत ‘सुनो दिल की बात कहता है, दिल जो कहता है-वही कहता हूं, ओ मेरी पूनम’ गीत के कई प्रणय दृश्य फिल्माए गए। इस दौरान रजित सहारा देकर मीता को नौकायन के लिए ले जाते, फिर स्वयं नाव खेते दिखाई देते हैं। बाद में मीता भी नाव खेने में उनकी मदद करती है और दोनों जीवन नैया को साथ पार ले जाते नजर आते हैं।

फिल्म की निर्मात्री शिल्पी दास चौहान ने बताया कि हिंदी व अंग्रेजी में बन रही फिल्म पूनम वृद्धों के अकेलेपन को प्रदर्शित करने वाली बेहद भावनात्मक व मार्मिक कहानी पर आधारित है। आज लोगों के पास अपने वृद्ध माता-पिता के लिए समय नहीं है। ऐसे में अकेले वृद्ध किसी से भावनात्मक रूप से जुड़ते हैं तो सामाजिक बंदिशें उन्हें इसकी इजाजत भी नहीं देती है। इसी कश्मकश को यह फिल्म प्रदर्शित करती है। फिल्में में रजित व मीता 1960-70 के दशक में एक-दूसरे से प्रेम करते हैं, परंतु शादी नहीं कर पाते। अब बुजुर्ग हो जाने पर एक दिन वे अनायास ही मिल जाते हैं तो पुरानी यादें ताजा हो आती हैं। इन्हीं दृश्यों को यहां फिल्माया जा रहा है। फिल्म की पूरी शूटिंग नैनीताल में ही होने जा रही है। खास बात यह भी है कि फिल्म का औपचारिक शुभारंभ गत 22 सितंबर को मुंबई में महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने किया था, और फिल्म में पटकथा लेखन व निर्देशन की जिम्मेदारी नैनीताल के सेंट जोसफ कॉलेज के छात्र रहे कई अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फिल्म मेकर संजय सनवाल संभाल रहे है, तथा इसी विद्यालय के छात्र रहे मुंबई के विदित तनवर फिल्म में संगीत दे रहे हैं। इनके अलावा भी फिल्म में नगर के प्रमोद प्रसाद सहायक निर्देशक, उदित साह स्टिल फोटोग्राफी में योगदान दे रहे हैं। साथ ही नगर के मदन मेहरा, अलिक्जा नदीम व मनोज आदि भी प्रोडक्शन से जुड़े हैं। इस प्रकार फिल्म का नैनीताल से खास जुड़ाव रहने वाला है।

यह भी पढ़ें : नैनीताल से पढ़े लेखक, निर्देशक, गीतकार, यहीं पूरी शूटिंग, कोश्यारी ने किया शुभारंभ, नैनीताल के लिए खास रहने वाली है ‘पूनम’..

नवीन समाचार, नैनीताल, 5 अक्टूबर 2019। कभी फिल्मकारों की पसंदीदा रही सरोवरनगरी एवं आसपास के क्षेत्रों में इसी माह समाज में बुजुर्गों की उपेक्षा के संजीदा विषय को लेकर ‘पूनम’ नाम की एक हिंदी-अंग्रेजी फिल्म की पूरी शूटिंग होने जा रही है। खास बात यह भी है कि फिल्म का औपचारिक शुभारंभ गत 22 सितंबर को मुंबई में महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने किया है, और फिल्म में पटकथा लेखन व निर्देशन की जिम्मेदारी नैनीताल के सेंट जोसफ कॉलेज के छात्र रहे कई अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फिल्म मेकर संजय सनवाल संभाल रहे है, तथा इसी विद्यालय के छात्र रहे मुंबई के विदित तनवर फिल्म में संगीत दे रहे हैं। इस प्रकार फिल्म का नैनीताल से खास जुड़ाव रहने वाला है। फिल्में प्रसिद्ध अभिनेता रजित कपूर व मीता वशिष्ठ की प्रमुख भूमिका है। फिल्म के गीतकार अमर ठाकुर, डीओपी कृष्ण एकताथ मोठे व एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूशर अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त अनिल कुमार पी हैं।

Poonam
फिल्म पूनम का मुंबई में शुभारंभ करते महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी।

फिल्म की निर्मात्री शिल्पी दास चौहान ने बताया कि वह लंबे समय से बुजुर्गों पर कार्य कर रही हैं। उनकी फिल्म उन बुजुर्गों की व्यथा पर आधारित है, जिन्होंने 60-70 के दशक में अपने बच्चों को बड़ी कठिनाई से पाला-पोशा और अच्छा मुकाम दिलाया, किंतु आज उन्होंने अपनी व्यस्तताओं की बात कह उन्हें एकाकी जीवन जीने को छोड़ दिया है।

यह भी पढ़ें : फिल्म फेस्टिवलों के लिए नैनीताल में बनी लघु फिल्म ‘पापा का आशीष’ का हुआ विमोचन

Papa ka ashish
फिल्म पापा का आशीष का एक दृश्य।

नवीन समाचार, नैनीताल, 14 अक्टूबर 2019। नगर में सोमवार को मघुबन आर्ट्स की लघु फिल्म ‘पापा का आशीष’ का प्रेम प्रीमियर आयोजित हुआ। देश-दुनिया के विभिन्न फिल्म फेस्टिवलों के लिए बनी डा. मोहित सनवाल द्वारा लिखित व निर्देशत इस लघु फिल्म की मुख्य ‘प्रॉपर्टी’ फिल्म के उम्रदराज नायक (अनिल घिल्डियाल) को शादी के समय ससुराल से दहेज में मिला स्कूटर व आखिर तक खुद की ओर ध्यान खींचता बहन (शबनी राणा) की ससुराल में रहने वाला साला (कौशल साह जगाती है। अनिल खटारा हो चुके स्कूटर को बेच देते हैं, लेकिन बाद में अहसास होता है कि उसके कागजातों में नामांतरण तो हुआ नहीं। सो वे अपने मित्र (संदीपन विमलकांत नागर) के साथ स्कूटर को किसी तरह उसे खरीदने वाले पड़ोसी (डीके शर्मा), मैकेनिक (अजय पवार व मुकेश धस्माना), कबाड़ी (मनोज साह टोनी), बूचड़ (अमित साह) व चोर (पवन कुमार) आदि के पास तलाशते हैं, और स्कूटर को बेची हुई कीमत से अधिक में वापस पाने में सफल रहते हैं, परंतु स्कूटर को वापस लाने का पूरा क्रेडिट अपनी बहन के सामने साला ले लेता है। नैनीताल नगर व आसपास की लोकेशन्स में ही फिल्माई गई फिल्म में कैमरा नगर की छायाकार अदिति खुराना ने बखूबी संभाला है, और एडिटिंग किंशुक पांडे व समर बेलवाल ने की है। निर्माण में कविता सनवाल, अंकित शांडिल्य, मौलिक सनवाल, विनीता यशस्वी, प्रिंस परसाल, सुनील कुमार, दीपक सहदेव, नीरज डालाकोटी व पुनीत कांत आदि ने भी उल्लेखनीय योगदान दिया है। प्रीमियर में वयोवृद्ध रंगकर्मी केपी साह सहित फिल्म से जुड़े सभी लोग मौजूद रहे।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 5 अक्टूबर 2019। कभी फिल्मकारों की पसंदीदा रही सरोवरनगरी एवं आसपास के क्षेत्रों में इसी माह समाज में बुजुर्गों की उपेक्षा के संजीदा विषय को लेकर ‘पूनम’ नाम की एक हिंदी-अंग्रेजी फिल्म की पूरी शूटिंग होने जा रही है। खास बात यह भी है कि फिल्म का औपचारिक शुभारंभ गत 22 सितंबर को मुंबई में महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने किया है, और फिल्म में पटकथा लेखन व निर्देशन की जिम्मेदारी नैनीताल के सेंट जोसफ कॉलेज के छात्र रहे कई अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फिल्म मेकर संजय सनवाल संभाल रहे है, तथा इसी विद्यालय के छात्र रहे मुंबई के विदित तनवर फिल्म में संगीत दे रहे हैं। इस प्रकार फिल्म का नैनीताल से खास जुड़ाव रहने वाला है। फिल्में प्रसिद्ध अभिनेता रजित कपूर व मीता वशिष्ठ की प्रमुख भूमिका है। फिल्म के गीतकार अमर ठाकुर, डीओपी कृष्ण एकताथ मोठे व एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूशर अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त अनिल कुमार पी हैं।

Poonam
फिल्म पूनम का मुंबई में शुभारंभ करते महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी।

फिल्म की निर्मात्री शिल्पी दास चौहान ने बताया कि वह लंबे समय से बुजुर्गों पर कार्य कर रही हैं। उनकी फिल्म उन बुजुर्गों की व्यथा पर आधारित है, जिन्होंने 60-70 के दशक में अपने बच्चों को बड़ी कठिनाई से पाला-पोशा और अच्छा मुकाम दिलाया, किंतु आज उन्होंने अपनी व्यस्तताओं की बात कह उन्हें एकाकी जीवन जीने को छोड़ दिया है।

यह भी पढ़ें : मतदाता जागरूकता प्रतियोगिता में आकाश, मदन, वैभव, नीतेश, पंचम व अम्तुल्स ने जीते पुरस्कार

नवीन समाचार, नैनीताल, 9 अप्रैल 2019। जिला प्रशासन के द्वारा मतदाता जागरूकता कार्यक्रम-स्वीप के तहत आयोजित लघु फिल्म एवं गीत प्रतियोगिताओं में नैनीताल के युवाओं की रचनात्मकता ने पुरस्कार हासिल किये हैं। लघु फिल्म प्रतियोगिता में हल्द्वानी के आकाश नेगी ने पहला, नैनताल के मदन मेहरा ने दूसरा व वैभव जोशी ने तीसरा जबकि गीत प्रतियोगिता में हल्द्वानी के नीतेश बिष्ट ने पहला, पंचम कुमार ने दूसरा और नैनीताल के अम्तुल्स पब्लिक स्कूल ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है।

प्रथम पुरस्कार प्राप्त फिल्म :

द्वितीय पुरस्कार प्राप्त फिल्म :

तृतीय पुरस्कार प्राप्त फिल्म : वैभव जोशी

प्रथम पुरस्कार जीतने वाले आकाश नेगी ने बताया कि उनकी फिल्म में अफसरों के पीछे अपना मतदाता पहचान पत्र बनाने के लिए भागते एक भिखारी के माध्यम से हर एक वोट की कीमत बताई गयी है। वहीं मदन मेहरा की ‘मतदान यानी राष्ट्र सम्मान’ की थीम पर बनी फिल्म में कहा गया है कि हमें मतदान के दिन छुट्टी मनाने नहीं जाना चाहिए। हम मौन रहकर धृतराष्ट्रों को सत्ता देते हैं। वहीं नगर के सेंट जोसफ कॉलेज के 11वीं कक्षा के छात्र वैभव जोशी की फिल्म ‘एक वोट की कीमत’ में स्वयं वैभव ने एक साथ तीन दोस्तों के चरित्र निभाकर इतिहास में एक वोट की वजह से हुए बड़े बदलावों की जानकारी देते हुए एक वोट की कीमत को बताया है। बताया गया है कि लघु फिल्म प्रतियोगिता में 8 एवं गीत प्रतियोगिता में 23 प्रविष्टियां आयी थीं। लघु फिल्म प्रतियोगिता में विजेताओं को क्रमशः 10, 7.5 एवं 5 हजार एवं गीत प्रतियोगिता के विजेताओं को 6, 4 एवं 2 हजार के पुरस्कार दिये जाएंगे। विजेताओं का चयन जिले के सीडीओ विनीत कुमार की अगुवाई में निर्णायकों-व्यापक जोशी, घनश्याम भट्ट व डा. प्रभा पंत ने चयन किया। प्रतियोगिता के संचालन में स्वीप के प्रभारी अधिकारी राजेश कुमार, विमल पांडेय, सुरेश अधिकारी, ललित पांडेय व गौरी शंकर कांडपाल की प्रमुख भूमिका रही है।

यह भी पढ़ें : एफटीआईआई का स्मार्टफोन से फिल्म बनाने का प्रशिक्षण नैनीताल में, इच्छुक हैं तो आज ही करें आवेदन

नवीन समाचार, नैनीताल, 13 मार्च 2019। आगामी अप्रैल माह में एफटीआईआई यानी फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के तत्वावधान में स्मार्टफोन से फिल्म निर्माण की प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित होने जा रही है। कार्यशाला के स्थानीय समन्वयक राजेश साह व शालिनी साह ने बताया कि तीन से नौ अप्रैल के बीच मुख्यालय में हरमिटेज परिसर में स्थित यूजीसी एचआरडीसी में रितेश तकसंदे के निदेशन में यह कार्यशाला आयोजित हेागी। कार्यशाला के आवेदन करने की आखिरी तिथि 18 मार्च है। कार्यशाला में पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा। अधिक जानकारी www.ftiindia.com तथा ftiiskift@gmail.com पर तथा मोबाइल नंबर 9410544524 व 9411344136 पर ली जा सकती है।

यह भी पढ़ें : इस पाठ्यक्रम के लिए जापान से भी प्रतिभागी पहुंच गये, पर नहीं पहुँच पाए तो उत्तराखंड से…

  • एफटीआईआई के 23 दिवसीय स्क्रीन एक्टिंग फाउंडेशन कोर्स में पहुंचे 9 राज्यों के प्रतिभागी

FTII Screen Acting Foundation Courceनैनीताल, 6 अगस्त 2018। कुमाऊं मंडल मुख्यालय में सोमवार को एफटीआईआई यानी फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान पुणे के तत्वावधान में स्थानीय हिमासीफ के तत्वावधान में आगामी 28 अगस्त तक चलने वाले 23 दिवसीय स्क्रीन एक्टिंग फाउंडेशन कोर्स प्रारंभ हो गया। इस पाठ्यक्रम में देश भर के 9 राज्यों के 1 छात्रा सहित कुल 11 प्रतिभागी पहुंचे हैं। पाठ्यक्रम में एक मूलतः राजस्थान निवासी प्रतिभागी देवांश मदान वास्तव में जापान से यहां पहुंचे हैं, परन्तु पाठ्यक्रम में उपलब्ध 24 में से 13 सीटें खाली रह जाने के बावजूद मेजबान राज्य उत्तराखंड से एक भी प्रतिभागी इस पाठ्यक्रम में प्रतिभाग नहीं कर रहा है। इस पर आयोजकों में भी नाराजगी स्पष्ट दिखाई दी। हिमासीफ की शालिनी साह ने कहा कि नैनीताल में यह पाठ्यक्रम इसलिये आयोजित कराया गया, ताकि यहां के बच्चों को भी इसका लाभ मिले। वहीं एफटीआईआई से आये प्रशिक्षकों ने भी इस पर अफसोस जताया। लेकिन इसे पाठ्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों के लिए सुखद बताया कि उन्हें सीखने के लिए अधिक समय मिल पायेगा। कम प्रतिभागियों के आने का एक कारण पाठ्यक्रम की फीस काफी अधिक (₹ 25,000) होना भी बताया जा रहा है।

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नैनीताल (Crime Nainital): अचानक खुलेआम महिला पर झपटा युवक और गले से सोने की चेन छीन ली….

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प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था उत्तराखंड के जागेश्वर व आदि कैलाश-ॐ पर्वत जरूर जायें, जानें सड़क व हेलिकाप्टर से इस यात्रा की पूरी 1-1 जानकारी….

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नवीन समाचार, नैनीताल, 14 दिसंबर 2023 (Kailash-Aadi Kailash-Om Parvat KMVN-Heli Yatra)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गत 12 अक्टूबर 2023 को उत्तराखंड के जागेश्वर व आदि कैलाश की यात्रा के बाद देश भर के श्रद्धालुओं में इन गंतव्यों के प्रति खासा जोश है। इधर आदि कैलाश व ॐ पर्वत के लिए हेलिकाप्टर सेवा भी शुरू की … Read more

भीमताल झील में (Jheel men) मिला 15 दिनों से गायब वन क्षेत्राधिकारी हरीश चंद्र पांडे का शव…

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(Suicide Attempt) दुष्कर्म पीड़िता ने न्यायालय परिसर में गटक लिया जहर….

Suicide Attempt

Nainital News October 2023 : नैनीताल के आज के चुनिंदा ‘नवीन समाचार’

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Nainital News October 2023

(Youth committed suicide) पत्नी से विवाद के बाद 23 वर्षीय युवक ने की आत्महत्या, 2 वर्ष पूर्व ही हुई थी शादी, 1 वर्ष का बेटा भी है…

Youth committed suicide

दान’वीर’ सिंह ‘मालदार’: उत्तराखंड के पहले अरबपति-‘टिंबर किंग ऑफ इंडिया’, ब्राजील तक फैला कारोबार, फिल्म भी बनी, लेकिन अंत….

नवीन समाचार, नैनीताल, 12 दिसंबर 2023 (Pahad ke Bete)। आज हम आपको उत्तराखंड के एक ऐसे बेटे के बारे में बताने जा रहे हैं जो था तो एक घी बेचने वाले सामान्य से पिता का बेटा, लेकिन अपने असाधारण कौशल से वह अंग्रेजी दौर में ‘टिंबर किंग ऑफ इंडिया’ और उत्तराखंड का पहला अरबपति ‘मालदार’ कहलाया। देखें उत्तराखंड के पहले अरबपति देश के टिंबर किंग के उत्थान व अवसान की रोमांचक कहानी…

उसका कारोबार भारत के साथ ब्राजील में भी फैला। अपने नाम के पहले शब्द ‘दान’ को उन्होंने ‘दानवीर’ के रूप में भी बदला। उनके नाम पर उनसे ही कर्ज लेकर फिल्म भी बनी। लेकिन अंग्रेजी सरकार में मिली उनकी कामयाबी देश की आजादी के बाद ताश के पत्तों की तरह मिट्टी में मिल गयी। पूरी कहानी बड़ी ही दिलचस्प है।

उत्तराखण्ड के अरबपति दान सिंह 'मालदार' की कहानी - Kafal Tree1906 में जन्म ठाकुर दान सिंह बिष्ट के बारे में कहा जाता है कि वह कुमाऊं, उत्तराखंड के एक सर्वाधिक धनी-मालदार व्यक्ति होने के साथ दानवीर व परोपकारी व्यक्ति भी थे। वह उत्तराखंड के पहले अरबपति थे। लकड़ी के व्यापार में उनकी महारत के चलते उन्हें ‘टिबंर किंग ऑफ इंडिया’ कहा जाता था। उनकी संपत्ति भारत के साथ ही नेपाल तक थी।

वह एक ऐसी शख्सियत थे जिन्होंने गरीबी से उठ कर अपना उद्योग का साम्राज्य खड़ा किया। एक दो नहीं बल्कि व्यापार के कई क्षेत्रों में अपनी ऐसी छाप छोड़ी कि अंग्रेजी हुकूमत भी उनकी कद्रदान हो गई थी। लेकिन बदलते वक्त के साथ उनके खड़े किये साम्राज्य को ऐसी सरकारी दीमक लगी कि उनके जाते ही उनका नाम भी इतिहास के पन्नों में कहीं दब गया।

कहते हैं कि दान सिंह बिष्ट के पूर्वज मूलतः नेपाल के बैतड़ी जिले के थे लेकिन बाद में वे पिथौरागढ़ के क्वीतड़ गांव में आकर बस गए। उनके पिता देव सिंह बिष्ट उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जनपद में झूलाघाट में देश की आजादी से पहले अपनी छोटी सी दुकान में घी बेचा करते थे। 1906 में क्वीतड़ गांव में ही देव सिंह के घर दान सिंह नाम के असाधारण बेटे ने जन्म लिया।

जब दान सिंह की उम्र 12 साल रही होगी तभी उन्होंने लकड़ी का व्यापार करने वाले एक ब्रिटिश व्यापारी के साथ बर्मा यानी आज के म्यांमार जाने का फैसला किया। बर्मा में दान सिंह ने लकड़ी के व्यापार की बारीकियों को सीखा, इसी के बल पर उन्होंने बाद में ‘टिबंर किंग आफ इंडिया’ की उपाधि प्राप्त की।

हालांकि बर्मा से लौटने के बाद दान सिंह ने अपने पिता के साथ घी बेचने का काम किया। इसी बीच उनके पिता ने उनके साथ मिलकर एक ब्रिटिश कंपनी से बेरीनाग में एक चाय का बगान खरीद लिया और दान सिंह को चाय बागान की पूरी जिम्मेदारी सोंप दी। कहते हैं कि उस दौर में भारत ही नहीं बल्कि विश्व के चाय व्यापार में चीन का एकछत्र राज था।

दान सिंह ने चीन की चाय तैयार करने प्रक्रिया का अध्ययन किया और इसी के आधार पर अपनी चाय का उत्पादन शुरू किया। कहते हैं कि एक समय ऐसा आया जब बेरीनाग की चाय के जायके की प्रसिद्धि चीन की चाय को भी पीछे छोड़ पूरी दुनिया में फैलने लगी और बेरीनाग की चाय सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि ब्रिटेन और चीन में भी अपने स्वाद का डंका बजाने लगी।

चाय के व्यापार में सफल होने के बाद उन्होंने 1924 में ब्रिटिश इंडियन कॉपरेशन लिमिटेड नामक कंपनी से नैनीताल के ब्रेवरी-बीरभट्टी के पास शराब की भट्टी खरीदी और अपने पिता और अपने लिए बंगला, कार्यालय व कर्मचारियों के रहने के लिए आवासों का निर्माण करवाया। इस इलाके को बाद में ‘बिष्ट स्टेट’ के नाम से जाना जाने गया।

किंग आफ टिंबर के नाम से मशहूर हुए दान सिंह ने अविभाजित भारत में जम्मू कश्मीर, लाहौर, पठानकोट से वजीराबाद तक लकड़ी की बल्लियों की विशाल मंड़ियां स्थापित करने के बाद अपने लकड़ी के व्यापार को कश्मीर से लेकर बिहार व नेपाल तक फैलाया। अपने व्यापार द्वारा उन्होंने उत्तराखंड के साथ साथ देश के अन्य क्षेत्रों के लगभग 6000 लोगों को रोजगार दिया।

इस तरह देखते ही देखते घी बेचने वाले का बेटा दान सिंह बिष्ट अब दान सिंह मालदार बन चुके थे। उन्होंने धीरे धीरे पिथौरागढ़ के अलावा टनकपुर, हल्द्वानी, नैनीताल, मेघालय, असाम तथा नेपाल के बर्दिया और काठमांडू तक में अपनी संपत्तियां खरीदीं और अपने बुद्धि-कौशल और व्यापार के बारे में अपनी सोच से अंग्रेजों तक को अपना कायल कर लिया था। इस दौरान उनकी दोस्ती जिम कॉर्बेट सहित जाने माने ब्रिटिश लोगों से हो गई थी।

दान सिंह उस समय काफी चर्चा में आए थे जब 1945 में उन्होंने मुरादाबाद के राजा गजेन्द्र सिंह की अंग्रेजों द्वारा कर्ज के कारण जब्त की गयी संपत्ति को 2,35,000 रुपये में खरीद लिया था। बताया जाता है कि मालदार यह नहीं चाहते थे कि यह संपत्ति किसी अंग्रेज के कब्जे में जाए इसलिए उन्होंने इसे खरीद लिया। उनका उद्योग जगत का साम्राज्य देश की सीमा से बाहर ब्राजील सहित दूसरे देशों में भी फैलने लग गया था।

खास बात यह भी थी कि अपनी इस अमीरी को उन्होंने केवल खुद पर ही नहीं खर्च किया बल्कि इसकी मदद से उन्होंने अपने नाम के साथ दानवीर भी जोड़ लिया। आजादी के बाद जन कल्याण के लिए उन्होंने कई स्कूल, अस्पताल और खेल के मैदान बनवाए ताकि देश के बच्चे पढ़-लिखकर आगे बढ़ सकें। उन्होंने 1951 में नैनीताल के तत्कालीन वेलेजली गर्ल्स स्कूल को खरीद कर इसका पुनःनिर्माण कराया और अपने पिता स्वर्गीय देव सिंह बिष्ट के नाम से यहां एक कॉलेज की शुरुआत की।

कहते हैं कि इस कॉलेज के लिए उन्होंने उन दिनों 15 लाख मूल्य की 12 एकड़ से अधिक जमीन और 5 लाख रुपये दान में दिए थे। इसी कॉलेज में तब उनके स्वर्गीय पिता देव सिंह बिष्ट के नाम से आगरा विश्वविद्यालय का डीएसबी कॉलेज और बाद में कुमाऊं विश्वविद्याालय का मुख्य परिसर डीएसबी परिसर बना।

इसके अलावा उन्होंने पिथौरागढ़ में अपनी मां और पिता के नाम से सरस्वती देव सिंह उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का निर्माण किया। इस विद्यालय के पास की जमीन खरीद कर एक खेल के मैदान भी बनवाया। इसके अलावा उन्होंने अपनी मां के नाम पर छात्रों के लिए श्रीमती सरस्वती बिष्ट छात्रवृत्ति बंदोबस्ती ट्रस्ट की शुरुआत भी की। इस ट्रस्ट ने द्वितीय विश्वयुद्ध में पिथौरागढ़ के शहीद हुए सैनिकों के बच्चों को पढ़ने के लिए छात्रवृति प्रदान की।

दान सिंह ने बहुत धन संपत्ति अर्जित की, बहुत दान किये लेकिन आज उनके नाम से ज्यादा लोग परिचित नहीं हैं। इसकी वजह ये है कि उनके निधन के बाद उनका कोई पुत्र नहीं था और उनके वारिसों में एका नहीं रहा। उनकी कम्पनी डीएस बिष्ट एंड संस ने वर्ष 1956 में किच्छा में ‘बिष्ट इंडस्ट्रियल कारपोरेशन लिमिटेड’ नाम से एक शुगर मिल शुरू करने के लिए लाइसेंस लिया था।

उन्हें उम्मीद थी कि भारत सरकार किच्छा शुगर मिल के लिए मुर्शिदाबाद से लायी जा रही मशीनरी को किच्छा लाने में छूट मिल जाएगी। लेकिन उनके इस सपने पर पानी तब फिर गया जब कलकत्ता के बंदरगाह में जहाज में लदी इस मशीनरी को जहाज से नीचे उतारने की अनुमति नहीं दी गई।

मशीनरी इतनी महंगी थी कि दोबारा इसे खरीदने के लिए उन्हें कर्ज उठाना पड़ा लेकिन इसके बावजूद वह एक दिन भी किच्छा शुगर मिल को चला नही पाए। स्थिति ये हो गई कि उन्हें इस शुगर मिल के शेयर बेचने पड़े। यही घटना मालदार के तनाव और फिर उनकी बीमारी की वजह बनी।

इस तरह मालदार दान सिंह बिष्ट 10 सितंबर सन 1964 को इस दुनिया को अलविदा कह गए। कारण यह भी था कि अंग्रेजी हुकूमत ने जहां उनकी व्यापार कौशलता को सम्मान दिया था लेकिन भारत की आजादी के बाद अपनी ही देश की सरकार ने उन्हें कम आंका।

दान सिंह बिष्ट के कोई बेटा नहीं था और उनकी बेटियां कम उम्र की थीं जिस वजह से उनके बाद उनकी कंपनी डीएस बिष्ट एंड संस की जिम्मेदारी उनके छोटे भाई मोहन सिंह बिष्ट और उनके बेटों ने संभाली। लेकिन किसी में भी दान सिंह जैसी व्यापारिक कौशलता नहीं थी जिस वजह से उनका खड़ा किया हुआ विशाल व्यापार साम्राज्य सिमटता चला गया और एक समाप्त हो गया।

Dan Singh Bisht उल्लेखनीय कि दान सिंह के जीवन पर जगमणि पिक्चर्स द्वारा एक हिंदी फिल्म भी बनाई गई थी। मालदार नामक इस फिल्म ने हिमालायी हिस्सों में धूम मचाने के साथ साथ पूरे भारत में बहुत अच्छा कारोबार किया था। खास बात यह भी थी कि दान सिंह के जीवन पर आधारित इस फिल्म को बनाने के लिए दान सिंह से ही 70,000 रुपये उधार लिए गए थे। (Pahad ke Bete)

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यह भी पढ़ें : (Pahad ke Bete) 4 दिन के प्रवास के बाद नैनीताल से रवाना हुये धौनी…

नवीन समाचार, नैनीताल, 20 नवंबर 2023 (Pahad ke Bete) । भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान (Pahad ke Bete) महेंद्र सिंह धौनी सोमवार को अपने चार दिवसीय नैनीताल प्रवास के बाद परिवार सहित वापस लौट गये हैं। बताया गया है कि यहां से पंतनगर के लिये निकले हैं, जहां से वह हवाई मार्ग से आगे अपने गंतव्य को जायेंगे। उल्लेखनीय है कि धौनी यहां गत 17 नवंबर से रह रहे थे। (Pahad ke Bete)

'जिस सुकून के लिए पहाड़ आए वह साकार हुआ, उत्तराखंड में एक सप्ताह रुकने के बाद बोले MS Dhoniउल्लेखनीय है कि धौनी ने रविवार को यहीं अपनी धर्मपत्नी साक्षी का जन्म दिन मनाया और भारत एवं आस्ट्रेलिया के बीच खेला गया क्रिकेट विश्व कप का फाइनल मुकाबला भी देखा। देखें वीडिओ :

नैनीताल प्रवास के बाद से लौटे धोनीइस बीच साक्षी ने नगर की आराध्य देवी माता नयना के मंदिर में बेटी जीवा सहित दर्शन कर आर्शीवाद लिया और नैनी झील में नौकायन किया। इसके अलावा जन्मदिन के अवसर पर धौनी, उनकी पत्नी एवं बेटी आदि ने नगर के एक सैलून में अपने बाल भी बनवाये। (Pahad ke Bete)

IMG 20231120 WA0003.jpgइस दौरान उनका कहना था कि वह विश्व कप के फाइनल मुकाबले की संवेदनशीलता के दृष्टिगत मीडिया में कुछ भी कहने से बच रहे थे। इधर सोमवार को वह पूर्वाह्न करीब 11 बजे नगर से प्रस्थान कर गये। बताया गया है कि पंतनगर से उनकी आगे की उड़ान है। (Pahad ke Bete)

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यह भी पढ़ें : (Pahad ke Bete) धौनी पहुंचे नैनीताल, गूगल की वजह से हुये परेशान

नवीन समाचार, नैनीताल, 17 नवंबर 2023 (Pahad ke Bete)। क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में भारतीय टीम की कप्तानी करते हुये देश को तीनों प्रारूपों के विश्व कप जिताने वाले (Pahad ke Bete) पूर्व भारतीय क्रिकेटर महेंद्र सिंह धौनी शुक्रवार को नैनीताल पहुंचे।

Screenshot 2023 11 17 15 59 27 202 com.whatsapp editपूरी तरह से अपने नैनीताल आगमन को गुप्त रखने का प्रयास करने के बावजूद (Pahad ke Bete) धौनी नगर के प्रवेश द्वार-लेक ब्रिज चुंगी पर ही पहचान लिये गये, लेकिन स्वयं गूगल मैप के भरोसे चलने की वजह से नगर की संकरी सड़कों पर भटकते रहे। आखिर मीडिया कर्मियों ने उन्हें सही रास्ता बताया और वह पंगोट की ओर रवाना हो गये। बताया गया है कि धौनी की पत्नी साक्षी का जन्मदिन 19 नवंबर को है, और धौनी का 20 नवंबर को पंतनगर से लौटने का कार्यक्रम बताया जा रहा है। लिहाजा वह यहीं अपनी पत्नी का जन्मदिन मना सकते हैं। (Pahad ke Bete)

प्राप्त जानकारी के अनुसार (Pahad ke Bete) धौनी पंजाब के नंबर की ऑडी एवं फॉच्यूनर सहित चार कारों के काफिले के साथ अपराह्न करीब सवा दो तल्लीताल लेक ब्रिज चुंगी से मल्लीताल की ओर लोवर मॉल रोड से गुजरे। इस दौरान मॉल रोड पर काफी भीड़ थी। उन्हें संभवतया पंगोट-किलबरी की ओर जाना था। लेकिन सही रास्ते की जगह वह मनु महारानी तिराहे से पहले उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के आवास की ओर चले गये।

वहां से वापस लौटकर पुनः वह गलत दिशा में एटीआई की ओर और वहां केएमवीएन के मुख्यालय की ओर और वहां से फिर से लौटकर एटीआई से पॉलीटेक्निक के पैदल मार्ग की ओर चले गये। वहां मीडिया कर्मियों ने उन्हें रोककर उनका गंतव्य पूछा। उनके पंगोट बताने पर उन्हें सही मार्ग पर वापस मनु महारानी तिराहे से बारापत्थर का मार्ग बताया गया। इसके बाद वह अपने गंतव्य को रवाना हुये। इस दौरान उन्होंने मीडिया कर्मियों के साथ फोटो खिंचवाये लेकिन धन्यवाद जताने के अलावा कोई औपचारिक बात नहीं की। (Pahad ke Bete)

इससे पहले (Pahad ke Bete) धौनी के कैंची धाम में बाबा नीब करौरी के दर्शनों का कार्यक्रम भी बताया जा रहा था, किंतु नैनीताल आते हुये उनके द्वारा कैंची धाम में बाबा नीब करौरी के दर्शन किये जाने की बात सामने नहीं आयी है। गौरतलब है कि इस दौरान मॉल रोड व अन्य स्थानों पर सैलानी एवं आम लोग उन्हें पहचान कर उनके साथ फोटो खींचने की गुहार लगाते रहे, किंतु उन्होंने अपनी गाड़ी का शीशा नहीं खोला और किसी के साथ फोटो भी नहीं खिंचवाये। लोग उनकी गाड़ी के पीछे भागते रहे। (Pahad ke Bete)

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यह भी पढ़ें : (Pahad ke Bete) 20 साल बाद अपने पैतृक गांव पहुंचे महेंद्र सिंह धौनी..

नवीन समाचार, अल्मोड़ा, 15 नवंबर 2023 (Pahad ke Bete)। अपने कॅरियर की बुलंदियों पर कभी पैतृक गांव व प्रदेश का नाम न लेने वाले भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान (Pahad ke Bete) महेंद्र सिंह धोनी आखिर अपने कॅरियर के अवसान पर ही सही, 20 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद अपने पैतृक गांव पहुंच गये हैं।

(Pahad ke Bete) धोनी अपनी पत्नी साक्षी धोनी व बेटी जीवा के साथ बुधवार को अपने गांव ल्वाली अल्मोड़ा पहुंचे हैं। गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने उनका स्वागत किया गया। धोनी व उनकी पत्नी ने गांव में मंदिरों में ईष्ट देव की पूजा अर्चना की। देखें वीडिओ :

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अपने उज्ज्वल करियर के चरम पर रहते कभी यहां आना तो दूर उत्तराखंड का नाम भी नहीं लेने वाले महेंद्र सिंह धौनी पूरे 20 वर्ष बाद अपने अल्मोड़ा उत्तराखंड स्थित गांव ल्वाली आए.. तब आए जब पिता के बाद चाचा भी गांव छोड़कर हल्द्वानी वासी हो चुके हैं.. मौसी को कहना पड़ा, ‘मैं तुम्हारी मौसी हूं। चाहे जितने बड़े हो जाओ, पैर तो छूने पड़ेंगे..,’ तब थोड़ा सा झुके, पता नहीं, पैर छुए भी या नहीं, पर मौसी ने जरूर गले से लगा लिया.. पूरे गांव ने स्वागत किया… महिलाओं ने साक्षी के शादी के 10 साल बाद पहली बार ससुराल आने पर ‘च्यूडे परखे’, 101 रुपए का ‘पीठ्या’ भी लगाया.. और वह तो रात भी ‘घर’ नहीं, नाटाडोल के एक ‘होमस्टे’ में बिता गए बल…. हां घर की ‘देली’ पर पत्नी संग खींची फोटो को जरूर वायरल करा गए…

आज दोपहर करीब 11 बजे (Pahad ke Bete) महेंद्र सिंह धोनी गांव पहुंचे। उनके गांव पहुंचने पर ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। ग्रामीणों ने गांव की सड़क में धोनी व उनकी पत्नी का पारंपरिक तरीके से ‘च्यूड़े परखकर’ स्वागत किया। जिसके बाद धोनी ग्रामीणों के साथ अपने पैतृक आवास पहुंचे। (Pahad ke Bete)

इस दौरान गांव और क्षेत्र के युवा क्रिकेट की बारीकियां सीखने के लिए (Pahad ke Bete) धोनी के पास पहुंच गए। बच्चे (Pahad ke Bete) धोनी से कहने लगे हम भी आपकी तरह क्रिकेटर बनना चाहते हैं। (Pahad ke Bete) धोनी ने उनकी हौसला अफजाई की। ग्राम प्रधान दिनेश सिंह धोनी ने बताया कि (Pahad ke Bete) महेंद्र सिंह धोनी व उनकी पत्नी साक्षी गांव पहुंचे है। उन्होंने गांव के हरज्यू मंदिर में पूजा अर्चना की। फिलहाल वह दूसरे मंदिर में पूजा अर्चना कर रहे हैं। ऐसे में ग्रामीण यह कहते भी सुने जा रहे थे कि धौनी को आखिर गांव के ग्राम देवता व कुलदेवता गांव बुलाने में सफल रहे।

ग्राम प्रधान दिनेश सिंह धोनी ने यह भी बताया कि (Pahad ke Bete) महेंद्र सिंह धोनी इससे पहले अपने परिजनों के साथ 2003 में गांव आए थे। 20 साल बाद वह दोबारा गांव आए है। उन्होंने बताया कि इस दौरान ग्रामीणों की धोनी से काफी मुद्दों पर बातचीत भी हुई। (Pahad ke Bete)

(Pahad ke Bete) महेंद्र सिंह धोनी व उनकी पत्नी के गांव पहुंचने पर ग्रामीणों में हर्ष का माहौल है। ग्रामीणों व युवाओं ने उनके साथ जमकर तस्वीरें खींची। बताया गया है कि वह बीती रात नाटाडोल में एक होमस्टे में ठहरे हुए थे। (Pahad ke Bete)

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यह भी पढ़ें : Pahad ke Bete-1 : अब भारतीय क्रिकेटर (Pahad ke Bete) महेंद्र धौनी भी बाबा नीब करौरी के दर पर, लेकिन नहीं कर सके दर्शन… आगे क्या है कार्यक्रम ?

नवीन समाचार, नैनीताल, 15 नवंबर 2023 (Pahad ke Bete)। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान (Pahad ke Bete) महेंद्र सिंह धोनी अपनी पत्नी साक्षी, बेटी जीवा और अपने कुछ दोस्तों के साथ नैनीताल जनपद पहुंचे हैं। बताया जा रहा है कि धोनी कल कैंची धाम पहुंचे थे, लेकिन दर्शन नहीं कर पाये।

वह अब आज सपरिवार कैंची धाम में बाबा नीब करौरी महाराज के दर्शन कर सकते हैं, और इसके बाद अल्मोड़ा जनपद के लमगड़ा क्षेत्र में स्थित अपने पैतृक गांव ल्वाली भी जा सकते हैं। बताया जा रहा है कि वह अगले 5 दिन यहीं रहेंगे और यहीं अपनी पत्नी साक्षी का जन्मदिन भी मनायेंगे।

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पंतनगर एयरपोर्ट पर धौनी एवं धौनी की पत्नी द्वारा डाली गयी तस्वीर।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पूर्व भारतीय क्रिकेटर (Pahad ke Bete) महेंद्र सिंह धोनी अपनी पत्नी साक्षी, बेटी जीवा और कुछ खास दोस्तों के साथ मंगलवार सुबह इंडिगो की फ्लाइट से पंतनगर एयरपोर्ट पहुंचे। उन्होंने परिवार के साथ एयरपोर्ट पर करीब आधा घंटे का समय बिताया। इस दौरान उन्होंने एयरपोर्ट कर्मियों के साथ फोटो भी खिंचवाई। बाद में कार से नैनीताल स्थित विश्व प्रसिद्ध बाबा श्री नीब करौरी महाराज के के दर्शनों के लिए नैनीताल जनपद स्थित कैंची धाम पहुंचे।

किंतु यहां अत्यधिक भीड़ को देखते हुये अल्मोड़ा की ओर आगे बढ़ गये। हालांकि उनके नैनीताल स्थित मेस आर्मी गेस्ट हाउस में रुकने की भी चर्चायें हैं, लेकिन पुष्टि नहीं हो रही है।

गौरतलब है कि (Pahad ke Bete) धौनी के उत्तराखंउ आने का खुलासा उनकी पत्नी साक्षी धौनी द्वारा संभवतया रानीबाग के पास से नैनीताल, रानीखेत व भीमताल की दूरियां लिखे बोर्ड का फोटो डालने से हुआ। हालांकि बाद में उनकी पंतनगर एयरपोर्ट की तस्वीर भी सामने आयी। अलबत्ता उनके बारे में पूरी तरह से पुख्ता कोई सूचना नहीं है।

अल्मोड़ा एवं नैनीताल जनपद की पुलिस भी उनके बारे में मीडिया में आ रही खबरों के अनुसार कयास लगा रही है। नैनीताल की तल्लीताल, भवाली, अल्मोड़ा व लमगड़ा पुलिस खबरों पर ही नजर रखे हुये हैं, और उनके दौरे को निजी दौरा बताते हुये उनके बारे में किसी भी जानकारी से पूरी तरह से इंकार कर रही है।

बताया गया है कि 20 नवंबर को इंडिगो की फ्लाइट से (Pahad ke Bete) धौनी की परिवार सहित वापसी की टिकट बुक है। इस दौरान धोनी की पत्नी साक्षी का 19 नवंबर को जन्मदिन है। माना जा रहा है कि धोनी ने पत्नी का जन्मदिन मनाने के लिए उत्तराखंड को चुना है।

उल्लेखनीय है कि (Pahad ke Bete) धोनी का पैतृक गांव अल्मोड़ा में है। उनके पिता पान सिंह 40 साल पहले अपना पैतृक गांव छोड़ रोजगार के लिए रांची चले गए और तब से वहीं रहते हैं। हालांकि पान सिंह धार्मिक आयोजनों में गांव में आते हैं। (Pahad ke Bete) धोनी को यज्ञोपवीत संस्कार पैतृक गांव ल्वाली में ही हुआ। अलबत्ता अब धोनी के चाचा घनपत सिंह भी गांव में नहीं रहते हैं। वह भी चार वर्ष पूर्व गांव से पलायन कर हल्द्वानी बस गए हैं। धौनी का परिवार इससे पहले वर्ष 2004 में गांव आया था।

भारतीय क्रिकेट टीम को विश्व कप समेत आई.सी.सी.पुरुष टी-20 विश्व कप और आई.सी.सी.चैंपियंस ट्रॉफी तीनों जिताने वाले विकिट कीपर और धुरंदर बल्लेबाज कप्तान ऑनरेरी (Pahad ke Bete) ले.कर्नल महेंद्र सिंह धौनी महेंद्र सिंह धौनी अपने कुमाऊं के निजी दौरे में पहुंचे हैं। दोपहर में दिल्ली से पंतनगर एयरपोर्ट में उतरे जहां एयरपोर्ट अथॉरिटी के हैड ने उनसे मुलाकात की और फ़ोटो खिंचवाया। इसके बाद बेहद सख्त सुरक्षा व्यवस्था के बीच कुछ बच्चों ने भी धौनी के साथ फोटो खिंचवाया। 

अपनी पत्नी साक्षी धौनी और मित्रों के साथ पहुंचे (Pahad ke Bete) महेंद्र पहाड़ों की ठंड को देखते हुए जैकिट भी साथ लाए थे। पीठ में बैग टांगे (Pahad ke Bete) धौनी एयरपोर्ट से अपनी सफेद ऑडी के लिए निकले। पंजाब नंबर की धौनी की गाड़ी के साथ चार सफेद अन्य गाड़िया भी सुरक्षाकर्मियों की चल रही थी। धौनी का कारवां सीधे भवाली से गुजरते हुए कैंचीं धाम के समीप पहुंचा। बताया जा रहा है कि वहां भीड़ भाड़ को देखते हुए धौनी लौट आए। 

यह भी है कि (Pahad ke Bete) धौनी ने कभी एक बार भी स्वयं को उत्तराखंड का निवासी नहीं बताया है, इससे धौनी को लेकर उत्तराखंड के लोगों में एक तरह की बड़ी नाराजगी भी है।

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यह भी पढ़ें (Pahad ke Bete) : सुबह का सुखद समाचार : नैनीताल की एक सहित उत्तराखंड की 5 हस्तियों को सरकार देगी उत्तराखंड गौरव सम्मान

नवीन समाचार, देहरादून, 7 नवंबर 2022 (Pahad ke Bete) उत्तराखंड सरकार इस वर्ष से एक नई पहल करने जा रही है। इस पहल के तहत सरकार ने ‘उत्तराखंड गौरव सम्मान पुरस्कार के लिए पांच हस्तियों का नाम चुना है।

त्तराखंड सरकार के सामान्य प्रशासन के सचिव विनोद कुमार सुमन द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि देवभूमि उत्तराखंड में उत्तराखंड गौरव सम्मान पुरस्कार वर्ष 2022 के लिए समिति द्वारा पांच हस्तियों को चुना गया है।

इनमें भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (Pahad ke Bete) अजीत कुमार डोभाल, भारतीय फिल्म जगत से कवि, लेखक, गीतकार एवं वर्तमान में भारतीय फिल्म सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष (Pahad ke Bete) प्रसून जोशी, पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ यानी सेनाध्यक्ष (Pahad ke Bete) स्वर्गीय जनरल बिपिन रावत, प्रदेश के दिवंगत जनकवि, लेखक, लोक गीतकार (Pahad ke Bete)  स्वर्गीय गिरीश चंद्र तिवारी ‘गिर्दा’ तथा साहित्यकार व पत्रकार (Pahad ke Bete) स्वर्गीय वीरेन डंगवाल को उत्तराखंड गौरव सम्मान वर्ष 2022 के लिए चयनित किया गया है।

यह भी पढ़ें : गौरवान्वित हुआ नैनीताल-उत्तराखंड, पहाड़ के बेटे (Pahad ke Bete) ब्रिगेडियर अजय सिंह नेगी को दूसरी बार राष्ट्रपति का विशिष्ट सेवा पदक

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 26 जनवरी 2022। इस वर्ष गणतंत्र दिवस पर गढ़वाल राइफल्स के ब्रिगेडियर (Pahad ke Bete) अजय सिंह नेगी को दूसरी बार राष्ट्रपति के विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया है। ब्रिगेडियर नेगी का नैनीताल से खास रिश्ता है।

8 फरवरी 1966 को जन्मे (Pahad ke Bete) ब्रिगेडियर अजय सिंह नेगी का परिवार नैनीताल के आल्मा कॉटेज क्षेत्र में रहता है। उनके पिता स्वर्गीय भगवत सिंह नेगी राजकीय पॉलिटेक्निक नैनीताल में यांत्रिक प्रशिक्षक और माता बसंती नेगी नगर के स्नोभ्यू स्थित विद्यालय में शिक्षिका थीं। उनकी पढ़ाई यहीं हुई।

उन्होंने नगर के भारतीय शहीद सैनिक विद्यालय से 1980 में हाई स्कूल और 1982 में इंटरमीडिएट प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण किया और फिर यहीं डीएसबी परिसर से 1984 में बीएससी की। इस दौरान वह एनसीसी से भी जुड़े थे और सीनियर अंडर ऑफिसर भी रहे। स्कूल और कॉलेज के दिनों में वह हॉकी, क्रिकेट और फुटबॉल भी खेलते थे। यहां एमएससी करने के दौरान ही 1985 में उनका चयन सीडीएस परीक्षा के माध्यम से आईएमए के लिए हुआ।

वर्तमान में दिल्ली में तैनात (Pahad ke Bete) ब्रिगेडियर नेगी अपने साढ़े तीन दशक के सेवाकाल के दौरान उन्होंने जम्मू कश्मीर में कारगिल लद्दाख के साथ ही अन्य सेक्टर में कई सैन्य अभियानों का नेतृत्व करते हुए न केवल आतंकियों का सफाया किया बल्कि मणिपुर सहित अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में भी कई संगठनों को भारी नुकसान पहुंचाया। इन्हीं उपलब्धियों के कारण उन्हें दूसरी बार राष्ट्रपति के विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें : नैनीताल से जुड़े दो लेखकों-(Pahad ke Bete) देवेंद्र मेवाड़ी व नमिता गोखले को मिले साहित्य अकादमी पुरस्कार

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 30 दिसंबर 2021 (Pahad ke Bete) वर्ष 2021 के साहित्य अकादमी पुरस्कार दो ऐसे लेखकों को मिले हैं, जो नैनीताल से संबंधित हैं। केंद्रीय साहित्य अकादमी ने नैनीताल के कालाआगर गांव में जन्मे, पले व बढ़े बाल-विज्ञान लेखक (Pahad ke Bete) देवेंद्र मेवाड़ी को उनके नाटक ‘नाटक नाटक में विज्ञान’ के लिए बाल साहित्य पुरस्कार तथा नैनीताल में पली, बढ़ी व पढ़ी अंग्रेजी लेखिका नमिता गोखले को उनके अंग्र्रेजी उपन्यास ‘थिंग्स टु लिव बिहाइंड’ के लिए अंग्रेजी साहित्य की श्रेणी में यह पुरस्कार देने की घोषणा की है।

(Pahad ke Bete) उल्लेखनीय है कि देवेंद्र मेवाड़ी का जन्म 7 मार्च 1944 को उत्तराखंड के नैनीताल जनपद के कालाआगर गांव में एक किसान-पशुपालक किशन सिंह मेवाड़ी के घर में हुआ था। पहाड़ की चोटी के इस गांव के लोग गर्मियों के छह माह यहां और सर्दियों के छह माह ककोड़ गांव में बिताते थे। इसलिए इन दोनों स्थानों पर प्रारंभिक से लेकर इंटर तक की शिक्षा के बाद देवेंद्र ने नैनीताल के डीएसबी परिसर से वनस्पति विज्ञान में एमएससी व हिंदी में एमए तथा बाद में राजस्थान विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया।

(Pahad ke Bete) 73 वर्षीय देवेंद्र मेवाड़ी ‘मेरी यादों का पहाड़’ जैसी चर्चित आत्मकथात्मक संस्मरण एवं बच्चों को किस्सागोई के अंदाज में विज्ञान की बारीकियों को सरल शब्दों में किस्सा गोई द्वारा अनूठे अंदाज में समझाने के लिए प्रसिद्ध हैं।

उन्होंने बच्चों के लिए सौर मंडल की सैर, विज्ञान और हम, विज्ञाननामा, मेरी विज्ञान डायरी, मेरी प्रिय विज्ञान कथाएं, फसलें कहें कहानी, सूरज के आंगन में, सौरमंडल की सैर, विज्ञान बारहमासा, विज्ञान जिनका ऋणी है और पशुओं की प्यारी दुनिया सहित बीस से अधिक पुस्तकों का संपादन किया है।

(Pahad ke Bete) वहीं नमिता गोखले की बात करें तो उनके नाना सीडी पांडे राज्यसभा के सांसद थे और चिड़ियाघर रोड पर बक स्कूल के पास रहते थे। नैनीताल के सेंट मेरीज कॉन्वेंट कॉलेज से वह नमिता पंत के नाम से पढ़ी हैं। उन्होंने महाराष्ट्र के कानून मंत्री एचआर गोखले के पुत्र से विवाह किया, जिसके बाद वह नमिता गोखले हो गईं।

उन्हें जिस पुस्तक पर पुरस्कार मिला है, उसका लोकार्पण 2015 में नैनीताल के प्रसादा भवन में आयोजित हुए कुमाऊं लिटरेरी फेस्टिवल में अल्मोड़ा के मूल निवासी जेएनयू के पूर्व प्रोफेसर पुष्पेश पंत के हाथों हुआ था।

(Pahad ke Bete) पंत ने इस पुस्तक का हिंदी अनुवाद भी किया था। वह हिमालयन इकोज से भी जुड़ी हैं और यहां आती रहती हैं। बताया गया है उनके साहित्य अकादमी पुरस्कार जीतने वाले उपन्यास की विषयवस्तु देश के पहले स्वतंत्रता संग्राम के दौर के नैनीताल और कुमाऊं से ही संबंधित है। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़ें (Pahad ke Bete) : देश के प्रख्यात भूगर्भ शास्त्री, कुमाऊं विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति पद्मविभूषण प्रो. वल्दिया का देहावसान

नवीन समाचार, नैनीताल, 29 सितंबर 2020। देश के प्रख्यात भूगर्भ शास्त्री पर्यावरणविद् पद्मविभूषण व पद्मश्री तथा कुमाऊं विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति (Pahad ke Bete) प्रो. खड्ग सिंह वल्दिया का मंगलवार को 85 वर्ष की आयु में असामयिक निधन हो गया। उनके निधन के समाचार से कुमाऊं विश्वविद्यालय, प्रो. वल्दिया द्वारा

(Pahad ke Bete) यहां स्थापित भूविज्ञान विभाग में शोक की लहर छा गई है। उनके निधन पर कूटा यानी कुमाऊं विश्वविद्यालय शिक्षक संघ की ओर से अध्यक्ष प्रो. ललित तिवारी, महासचिव डा. सुचेतन साह, डा. विनय कुमार, डा. दीपक कुमार, डा. दीपिका गोस्वामी के साथ ही प्रो. राजीव उपाध्याय, डा. बीएस कोटलिया, डा. आशीष तिवारी व विधान चौधरी आदि ने गहरा दुःख व्यक्त किया है।

(Pahad ke Bete) उल्लेखनीय है कि प्रो. वल्दिया मूलतः पिथौरागढ़ जनपद के निवासी हैं, और वर्तमान में बंगलुरू में ही रहते थे। परंतु उनका नैनीताल नगर में भी लांग व्यू क्षेत्र में आवास है, जहां वह अक्सर गर्मियों में आते रहते थे।

भूगर्भविद्, वैज्ञानिक पद्म भूषण (Pahad ke Bete) खड्ग सिंह वल्दिया का जीवन परिचय

माताः श्रीमती नन्दा वल्दिया, पिताः स्व. देव सिंह वल्दिया, जन्मतिथि: 20 मार्च 1937, जन्म स्थान: कलौ (म्यामार), पैतृक गाँव: घंटाकरण जिला-पिथौरागढ़, पारिवारिक स्थिति- एक विवाहित पुत्र, शिक्षा: एमएससी., पीएचडी

प्रमुख उपलब्धियाँ : 1965-66 में अमेरिका के जान हापकिन्स विश्वविद्यालय के ‘पोस्ट डाक्टरल’अध्ययन और फुलब्राइट फैलो। 1969 तक लखनऊ विवि में प्रवक्ता। राजस्थान विवि, जयपुर में रीडर। 1973-76 तक वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियॉलॉजी में वरिष्ट वैज्ञानिक अधिकारी। 1976 से 1995 तक कुमाऊँ विश्वविद्यालय में विभिन्न पदों पर रहे।

1981 में कुमाऊँ विवि के कुलपति तथा 1984 और 1992 में कार्यवाहक कुलपति रहे। 1995 से जवाहरलाल नेहरू सेन्टर फार एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च केन्द्र बंगलौर में प्रोफेसर हैं। मध्य हिमालय की भूवैज्ञानिक संरचना से सम्बन्धित अनेक महत्वपूर्ण अध्ययनों के अध्येता।

(Pahad ke Bete) उल्लेखनीय कार्य के लिए 1976 में ‘शांतिस्वरूप भटनागर पुरस्कार’ से सम्मानित। जियॉलाजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया द्वारा ‘रामाराव गोल्ड मैडल’। 1977-78 में यूजीसी द्वारा राष्ट्रीय प्रवक्ता सम्मान। राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी द्वारा ‘एसके मित्रा एवार्ड’ और डीएन वाडिया मैडल। 1997 में भारत सरकार द्वारा ‘नेशनल मिनरल अवार्ड एक्सीलेंस’।

दो दर्जन से अधिक विशेषज्ञों की राष्ट्रीय समितियों, परिषदों, कमेटियों के सदस्य हैं। 1983 में प्रधानमंत्री की वैज्ञानिक सलाहकार समिति के सदस्य और योजना आयोग की अनेक उप समितियों के सदस्य रहे। 2 फरवरी से 2003 इन्सा के राष्ट्रीय प्रोफेसर।

हिमालय की ऐतिहासिक व भूगर्भीय परतें खोलने में रहा है (Pahad ke Bete) प्रो. वल्दिया का बड़ा योगदान

-पहाड़ पर मैग्नेसाइट, खड़िया आदि खनिजों की खोज, प्रदेश में बांधों के निर्माण, राज्य के भू-क्षरण संभावित क्षेत्रों की पहचान व बचाव पर रहा है व्यापक कार्य
-कुमाऊं विवि के डीएसबी परिसर में भूविज्ञान विभाग की स्थापना और इसे सेंटर फॉर एडवांस्ड स्टडीज के स्तर तक पहुंचाने में रहा है अप्रतिम योगदान

(Pahad ke Bete) नवीन जोशी, नैनीताल। मंगलवार को 85 वर्ष की उम्र में दिवंगत हुए ख्यातिलब्ध भूविज्ञानी, शिक्षाविद्, लेखक और पर्यावरणविद् (Pahad ke Bete) प्रो. खड्ग सिंह वल्दिया का देश के साथ ही उत्तराखंड के लिए कई बड़े उल्लेखनीय कार्य किए हैं।

(Pahad ke Bete) हिमालय पर्वत के स्थान पर करीब दो करोड़ वर्ष पूर्व टेथिस महासागर की उपस्थिति होने, और लघु हिमालय के पहाड़ों की संस्तरिकी के अन्य पहाड़ों से इतर उल्टा यानी कम उम्र पहाड़ों के नीचे और अधिक पुराने पहाड़ों के उनके ऊपर होने जैसी अनूठी बातों को दुनिया के समक्ष लाने का श्रेय उन्हें ही दिया जाता है।

(Pahad ke Bete) उत्तराखंड में मैग्नेसाइट तथा खड़िया व स्लेट आदि खनिजों की उपस्थिति से भी उन्होंने दुनिया को रूबरू करवाया, तथा यहां की कमजोर भू संरचना के मद्देनजर भूधंसाव व भूक्षरण संभावित स्थानों की पहचान तथा इनसे बचने के उपाय एवं इनके बीच बांधों के निर्माण पर उनका अप्रतिम योगदान रहा है। कुमाऊं विवि में उनके द्वारा स्थापित भूविज्ञान विभाग आज उच्चानुशील केंद्र (सेंटर फॉर एडवांस्ड स्टडीज) के स्तर तक पहुंच गया है।

(Pahad ke Bete) 20 मार्च 1937 में प्रदेश के पिथौरागढ़ जिले में जन्मे (Pahad ke Bete) वल्दिया के बारे में बताया जाता है कि वह छात्र जीवन से ही नए शोधों व खोजों में लगे रहते थे। 1976 में कुमाऊं विवि के तत्कालीन डीएसबी संगठक महाविद्यालय में मात्र 39 वर्ष की आयु में प्रोफेसर बनने से पूर्व ही वह राजस्थान विवि उदयपुर व वाडिया इंस्टिट्यूट देहरादून में उपनिदेशक रह चुके हैं।

तथा 1959 में लखनऊ विवि से एमएससी करने और वहीं प्रवक्ता बन जाने के दौरान ही उन्होंने पिथौरागढ़ की चंडाक पहाड़ी व गंगोलीहाट क्षेत्रों में ‘स्ट्रोमेटोलाइट्स” नाम के एक प्रकार के शैवाल की पहचान कर उसके आधार पर करीब दो करोड़ वर्ष पूर्व हिमालय के पहाड़ों की जगह हजारों मीटर गहरा टेथिस महासागर होने की परिकल्पना कर उसकी विकास यात्रा का अध्ययन करने लगे थे।

1961-62 में 25 वर्ष की उम्र से ही उनके शोध पत्र देशी-विदेशी विज्ञान पत्रिकाओं में प्रकाशित होने लगे थे। वे ही पहाड़ों में मैग्नेसाइट खनिज की उपलब्धता को दुनिया के समक्ष अपने शोध पत्रों के माध्यम से लाए, जिसके बाद पिथौरागढ़ व अल्मोड़ा में इसकी फैक्टरियां लगीं।

नैनीताल की नैनी झील के अलावा कश्मीर की डल व भोपाल की झीलों में हुए संरक्षण के कार्य उन्हीं के शोधों के परिणामस्वरूप बताए जाते हैं। डीएसबी में 1975 में बने भूविज्ञान विभाग में अपने शोध छात्रों के साथ इकलौते कक्ष के वर्षा के दौरान पानी चूने के कारण छाते लेकर शोध कार्य करने के दौर से

लेकर 2012 में इसे उच्चानुशील केंद्र बनाने तक को उनके विभाग के लोग उन्हीं का योगदान बताने में नहीं झिझकते। 1995 तक वह कुमाऊं विवि में कार्यरत रहे, तथा इस दौरान भूविज्ञान विभागाध्यक्ष तथा कुमाऊं विवि के कार्यकारी कुलपति भी रहे।

प्रधानमंत्री के वैज्ञानिक सलाहकारों की समिति के सदस्य, विज्ञान के क्षेत्र के बड़े पुरस्कार जीएस मोदी, हिंदी सेवी सम्मान एवं पद्मश्री (2007) सम्मानों से वह पूर्व में ही नवाजे जा चुके हैं। वर्तमान में जवाहर लाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च में कार्यरत प्रो. वल्दिया अभी बीते वर्ष तक भी भी पहाड़ से जुड़े हुए थे। वह हर वर्ष गर्मियों में यहां एलपीएस के पास स्थित अपने आवास पर रहने आते थे, तथा पिथौरागढ़ जिले में बच्चों में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए कार्यशालाएं आयोजित करते थे।

द्वितीय विश्व युद्ध के बम धमाकों में खोई श्रवण शक्ति

नैनीताल। शुरुआती जीवन में बेहद अभावों में रहकर भी ऊंचाई पर पहुंचे (Pahad ke Bete) प्रो. वल्दिया के दादा म्यांमार (तत्कालीन वर्मा) में राजधानी रंगून के पास कलावा नाम के स्थान पर कार्यरत थे। बताया जाता है कि 1942 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान द्वारा रंगून पर की गई भीषण बमबारी के धमाकों की वजह से उनकी श्रवण शक्ति काफी क्षींण हो गई।

प्रो. वल्दिया की कुछ प्रमुख बातें

-भारतीय महाद्वीप एशिया महाद्वीप को हर वर्ष 54 सेमी की दर से उत्तर दिशा की ओर धकेल रहा है।
-हिमालय के पहाड़ प्रतिवर्ष 18 मिमी की दर से ऊपर उठ रहे हैं।
-नेपाल के पहाड़ तीन से पांच मिमी प्रतिवर्ष की दर से ऊपर उठ रहे हैं।
-छोटे भूकंपों से ही भूगर्भ के भीतर की ऊर्जा बाहर निकलती रहती है, तथा अंदर का तनाव कुृछ हद तक कम होता रहता है।

-प्रकृति मानव के विकास के बीच नहीं आ रही वरन मानव प्रकृति के बीच आ रहा है, इस कारण केदारनाथ जैसी आपदाएं आ रही हैं।                                                                                          -नदियां वर्षों बाद वापस अपने मार्ग पर लौट कर आती हैं, इसलिए नदियों के करीब मानव को प्रतिरोध या अपनी बस्तियां, सड़क आदि नहीं बनानी चाहिए।

मोदी से विज्ञान जगत में निराशा, पर आशा बाकी: पद्मभूषण वल्दिया

-उत्तराखंड की बजाय कर्नाटक की ओर से पुरस्कार मिलने के सवाल को टाल गए
नैनीताल। अभी हाल में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के हाथों देश का तीसरा सर्वाेच्च पद्मभूषण पुरस्कार प्राप्त करने वाले भू वैज्ञानिक (Pahad ke Bete) प्रो. खड्ग सिंह वल्दिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से देश के विज्ञान जगत में निराशा का माहौल है। विज्ञान जगत को ना तो सरकार से दिशा-निर्देश ही प्राप्त हो रहे हैं, और ना अपेक्षित आर्थिक सहायता ही मिल पा रही है।

पीएम मोदी ने स्वयं भी जो घोषणाएं की थीं, वह भी पूरी नहीं हो रही हैं। विज्ञान से जुड़े अनेक संस्थानों में एक-डेढ़ वर्ष से निदेशक व महानिदेशकों की नियुक्ति तक नहीं हो रही है। अलबत्ता, उन्होंने जोड़ा कि वह आशावादी हैं कि मोदी के नेतृत्व में जिस तरह देश अन्य दिशाओं में तेजी से आगे बढ़ रहा है, उसी तरह विज्ञान जगत के लिए भी ‘अच्छे दिन” आएंगे।

(Pahad ke Bete) प्रो. वल्दिया रविवार (12.04.2015) को मुख्यालय में मीडिया कर्मियों के सवालों के जवाब दे रहे थे। उन्होंने 14 वर्षों में उत्तराखंड के नियोजन से भी स्वयं को असंतुष्ट बताया। अलबत्ता उत्तराखंड के बजाय कर्नाटक की ओर से पद्मभूषण हेतु नाम जाने पर सीधे तौर पर तो कुछ नहीं कहा,

और स्वयं के वर्ष में चार माह उत्तराखंड में ही कार्य करने व यहां के लोगों की शुभकामनाओं से एक साधन विहीन व्यक्ति (स्वयं) को सम्मान मिलने की बात कही, लेकिन उनकी जुबां से यह दर्द भी बाहर आया कि जिसे समाज ने भुला दिया था, उसे पुरस्कार के योग्य समझा गया।

हिमालयी क्षेत्र के लिए उन्होंने आपदाओं का सामना करने के लिए नीतियां बनाने व उनका ठीक से क्रियान्वयन करने, जल प्रवाह को बढ़ाने के लिए पहाड़ों पर भी बिना देर किए बड़े पैमाने पर वर्षा जल संग्रहण के प्रयास करने तथा वन संपदा के संरक्षण को स्थानीय जन समुदाय से जोड़ने की आवश्यकता जताई।

प्रो. वल्दिया के दो आलेख:

1. अपने आप नहीं आ रही, बुलाई जा रही हैं आपदाएं !

नवीन जोशी, समय लाइव, नैनीताल। दैवीय आपदा के बारे में जहां धारी देवी की मूर्ति को उनके स्थान से हटाने और प्रदेश में बड़ी जलविद्युत परियोजनाएं बनाने जैसे अनेक कारण गिनाए जा रहे हैं, वहीं भू-वैज्ञानिकों का स्पष्ट मत है कि आपदाएं स्वयं नहीं आ रही हैं, वरन बुलाई जा रही हैं। आपदा मनुष्य के पास नहीं आ रहीं, वरन मनुष्य आपदा के पास स्वयं जा रहा है।

दूसरे विश्व में बहुचर्चित ग्लोबल वार्मिग का सर्वाधिक असर पहाड़ों पर हो रहा है।भू-वैज्ञानिक पद्मश्री प्रो. खड्ग सिंह वल्दिया के अनुसार करीब दो करोड़ वर्ष पुराना हिमालय दुनिया का युवा पहाड़ कहा जाता है। अपने दौर के महासमुद्र टेथिस की कमजोर बुनियाद पर जन्मा हिमालय आज भी  युवाओं की तरह ऊंचा उठ रहा है। उन्होंने बताया कि भारतीय भू-प्लेट हर वर्ष करीब 55 मिमी की गति से उत्तर दिशा की ओर बढ़ रही है। ऐसे में ऊंचे उठते पहाड़ अपने गुरुत्व केंद्र को संयत रखने की कोशिश में अतिरिक्त भार को नीचे गिराते रहते हैं।

दूसरी ओर पानी अपनी प्रकृति के अनुसार इसे नीचे की ओर मैदानों से होते हुए समुद्र में मिलाता रहता है। ऐसे में ऊंचे उठते पहाड़ों और नीचे की ओर बहते पानी के बीच हमेशा से एक तरह की जंग चल रही है, और पहाड़ कमजोर होते जा रहे हैं। नदियों के किनारे की रेत, राख, कंकड़-पत्थर व बालू आदि की भूमि पर अच्छी कृषि होने के साथ ही इसके कमजोर होने और कम श्रम से ही कार्य हो जाने के लालच में पहाड़ पर अधिकतर सड़कें नदियों के किनारे ही बनाई जाती हैं।

सड़कों से पानी को हटाने का प्रबंध भी नहीं किया जाता, इस कारण यहां लगातार पानी के रिसते जाने और वाहनों के भार से भूस्खलन होते जाते हैं। सड़कों के किनारे ही बाजार, दुकानें आदि व्यापारिक गतिविधियां विकसित होती हैं। यहां तक कि नदियों के पूर्व में रहे प्रवाह क्षेत्रों में भी भवन बन गए हैं, और गत दिनों आई जल पल्रय में देखें तो सर्वाधिक नुकसान नदियों के किनारे के क्षेत्रों और सड़क के नदी की ओर के भवनों को ही पहुंचा है।

प्रो. खड्ग सिंह वल्दिया का कहना है कि पहाड़ पर अतिवृष्टि, भूस्खलन और बाढ़ का होना सामान्य बात है, लेकिन इनसे होने वाला नुकसान इस बात पर निर्भर करता है कि वह कितनी बड़ी आबादी के क्षेत्रों में होता है। आबादी क्षेत्रों में निर्बाध रूप से निर्माण हो रहे हैं। सरकार जियोलॉजिकल सव्रे आफ इंडिया की रिपोटरे की भी अनदेखी करती रही है।

 नदियों के छूटे पाटों में यह भुलाकर भवन बन गए हैं कि वह वापस अपने पूर्व मार्ग (फ्लड वे) में नहीं लौटेंगी। लेकिन इस बार ऐसा ही हुआ, और अकल्पनीय नुकसान हुआ। वहीं केदारनाथ मंदिर इस लिए बच गया कि यह मंदाकिनी नदी के पूर्वी और पश्चिमी पथों के बीच ग्लेशियरों द्वारा छोड़ी गई जमीन-वेदिका (टैरेस) पर बना हुआ है, जबकि अन्य निर्माण नदी के पूर्व पथों पर बने थे। (राष्ट्रीय सहारा, दिल्ली संस्करण, जून 29, 2013,शनिवार, पेज-15)

2. हर वर्ष दो सेमी तक ऊपर उठ रहे हैं हम

-एशिया को 54 मिमी प्रति वर्ष उत्तर की ओर धकेल रहा है भारत

नवीन जोशी, नैनीताल। शीर्षक पड़ कर हैरत में न पड़ें । बात हिमालय क्षेत्र के पहाड़ों की हो रही है। शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार प्राप्त प्रख्यात भू वैज्ञानिक पद्मश्री प्रो. केएस वाल्दिया का कहना है कि भारतीय प्रायद्वीप एशिया को 54 मिमी की दर से हर वर्ष उत्तर की आेर धकेल रहा है। इसके प्रभाव में हिमालय के पहाड़ प्रति वर्ष 18 मिमी तक ऊंचे होते जा रहे हैं।  

प्रो. वल्दिया ने कहना है कि भारतीय प्रायद्वीपीय प्लेट 54 मिमी से चार मिमी कम या अधिक की दर से उत्तर दिशा की ओर सरक रही है, इसका दो तिहाई प्रभाव तो बाकी देश पर पड़ता है, लेकिन सवाधिक एक तिहाई प्रभाव यानी 18 मिमी से दो मिमी कम या अधिक हिमालयी क्षेत्र में पड़ता है। मुन्स्यारी से आगे तिब्बतन—हिमालयन थ्रस्ट पर भारतीय व तिब्बती प्लेटों का टकराव होता है।

कहा कि यह बात जीपीएस सिस्टम से भी सिद्ध हो गई है। उत्तराखंड के बाबत उन्होंने कहा कि यहां यह दर 18 से 2 मिमी प्रति वर्ष की है। कहा कि न केवल हिमालय वरन शिवालिक पर्वत श्रृंखला की ऊंचाई भी बढ़ रही है। उन्होंने नेपाल के पहाड़ों के तीन से पांच मिमी तक ऊंचा उठने की बात कही। 

उत्तराखंड के बाबत उन्होंने बताया कि यहां मैदानों व शिवालिक के बीच हिमालयन फ्रंटल थ्रस्ट, शिवालिक व मध्य हिमालय के बीच मेन बाउंड्री थ्रस्ट (एमबीटी), तथा मध्य हिमालय व उच्च हिमालय के बीच मेन सेंट्रल थ्रस्ट (एमसीटी) जैसे बड़े भ्रंस मौजूल हैं। इनके अलावा भी नैनीताल से अल्मोड़ा की ओर बढ़ते हुए रातीघाट के पास रामगढ़ थ्रस्ट, काकड़ीघाट के पास अल्मोड़ा थ्रस्ट सहित मुन्स्यारी के पास सैकड़ों की संख्या में सुप्त एवं जागृत भ्रंस मौजूद हैं। हिमालय की ओर आगे बढ़ते हुए यह भ्रंस संकरे होते चले जाते हैं।

लेकिन भू गर्भ में ऊर्जा आशंकाओं से कम

नैनीताल। प्रो. वल्दिया का यह खुलासा पहाड़ वासियों के लिये बेहद सुकून पहुंचाने वाला हो सकता है। अब तक के अन्य वैज्ञानिकों के दावों से इतर प्रो. वल्दिया का मानना है कि छोटे भूकंपों से भी पहाड़ में भूकंप की संभावना कम हो रही है। जबकि अन्य वैज्ञानिकों का दावा है कि 1930 से हिमालय के पहाड़ों में कोई भूकंप न आने से भूगर्भ में इतनी अधिक मात्रा में ऊर्जा का तनाव मौजूद है जो आठ से अधिक मैग्नीट्यूड के भूकंप से ही मुक्त हो सकता है।

इसके विपरीत प्रो.वाल्दिया का कहना है कि हिमालय में सर्वाधिक भूकंप आते रहते हैं। इनकी तीव्रता भले कम हो, लेकिन इस कारण भूगर्भ से ऊर्जा निकलती जा रही है। इसलिये भूगर्भ में उतना तनाव नहीं है, जितना कहा जा रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रकृति मां की तरह है, वह कभी किसी का नुकसान नहीं करती। भूकंप व भूस्खलन अनादि काल से आ रहे हैं।

इधर जो नुकसान हो रहा है वह इसलिये नहीं कि प्राकृतिक आपदाएं आबादी क्षेत्र में आ रही हैं, वरन मनुष्य ने आपदाओं के स्थान पर आबादी बसा ली हैं। कहा कि वैज्ञानिक व परंपरागत सोच के साथ ही निर्माण करें तो आपदाओं से बच सकते हैं। सड़कों के निर्माण में भू वैज्ञानिकों की रिपोर्ट न लिये जाने पर उन्होंने नाराजगी दिखाई।

अपरदन बढऩे का है खतरा 

नैनीताल। पहाड़ों के ऊंचे उठने के लाभ—हानि के बाबत पूछे जाने पर कुमाऊं विवि के भू विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. चारु चंद्र पंत का कहना है कि इस कारण पहाड़ों पर अपरदन बढ़ेगा। यानी भू क्षरण व भूस्खलनों में बढ़ोत्तरी हो सकती है। पहाड़ों के ऊंचे उठते जाने से उनके भीतर हरकत होती रहेगी। वह बताते हैं कि इस कारण ही विश्व की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट की ऊंचाई 8,848 मीटर से दो मीटर बढ़कर 8,850 मीटर हो गई है। यह जलवायु परिवर्तन का भी कारक हो सकता है ।

यह भी पढ़ें : नैनीताल के बेटे के नेतृत्व में सिक्किम की अनछुवी चोटी को छूने निकले आईटीबीपी के 34 जांबाज

नवीन समाचार, नैनीताल, 14 2018। भारत तिब्बत सीमा पुलिस के 34 पर्वतारोहियों का एक दल शुक्रवार को सिक्किम के लिंगडुम, गैंगटॉक से अब तक किसी के द्वारा भी फतह न की जा सकी 6,270 मीटर ऊंची चोटी को छूने के लिए निकला है। खास बात यह है कि इस ’ईस्टर्न फ्रंटियर माउंटेनियरिंग एक्सपेडीशन-आईटीवीपी विजय’ दल का नेतृत्व नैनीताल निवासी आईटीबीपी के डिप्टी कमांडेंट परीक्षित साह कर रहे हैं। साथ ही इस दल में नैनीताल के एक अन्य पर्वतारोही सुमित साह भी हैं।

आईटीबीपी के डीआईजी केडी द्विवेदी ने उन्हें आईटीबीपी का ध्वज प्रदान कर इस बेहद कठिन मिशन के लिए रवाना किया है। दल के सदस्यों को इस मिशन के लिए उत्तराखंड के ऑली में पिछले 30 दिनों से कड़ा प्रशिक्षण दिया जा रहा था। बताया गया है कि पूर्वी हिमालय की यह चोटी तकनीकी रूप से अत्यंत कठिन प्राकृतिक चोटी है।

उल्लेखनीय है कि परीक्षित नगर के सेंट जोसफ कॉलेज के छात्र रहे हैं, और वर्तमान में आईटीबीपी की हल्दूचौड़ यूनिट में कार्यरत हैं। उनके दादा स्वर्गीय पूरन लाल साह नगर के अपने समय के अच्छे खिलाड़ी और ‘रेंजर साहब’ के नाम प्रसिद्ध रहे हैं।

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