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नैनीताल की रामलीला की एक विशेषता यह भी, यहां 41 वर्षों से रामकाज कर रहे हैं भीम व विमल

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      डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 13 अक्टूबर 2021। नैनीताल की रामलीला की कई अनूठी विशिष्टताएं हैं। इन्हीं में दो व्यक्तियों भीम सिंह कार्की व विमल चौधरी का जिक्र करना भी जरूरी है। भीम सिंह पिछले 41 वर्षों से मल्लीताल की रामलीला में रूप सज्जा का कार्य संभाल रहे हैं, जबकि करीब इतना ही […]

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नैनीताल: पुलिस कोतवाली के पास से पीएसी कर्मी की दिनदहाड़े मोटरसाइकिल चोरी

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      डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 9 अक्टूबर 2021। नगर के मल्लीताल क्षेत्र में पुलिस कोतवाली के पास एक पीएसी कर्मी की मोटरसाइकिल चोरी होने का मामला सामने आया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार पीएसी कर्मी रमेश सिंह […]

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सुखद समाचार: कुमाऊं की दानवीर जसुली दीदी की 170 वर्ष पुरानी विरासत का होने लगा संरक्षण…

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      -सुयालबाड़ी स्थित धर्मशाला का 34 लाख रुपए से किया जा रहा है सौंदर्यीकरण डॉ. नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 7 सितंबर 2021। जसुली शौक्याणी, जसुली दीदी व जसुली बुड़ी के नाम से विख्यात कुमाऊं की महान दानवीर महिला स्व. जसुली दताल की जनपद के सुयालबाड़ी में स्थित ऐतिहासिक धरोहर को पर्यटन स्थल के रूप में […]

रानीबाग में हुआ इतिहास, वर्तमान और आस्था का समागम, कत्यूरी वंशजों ने लगाये जागर, हुआ अभिनंदन

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      पहली बार देखें रानीबाग में उत्तरायणी पर कत्यूरी वंशजों द्वारा किया जाने वाला जियारानी का जागर : नवीन समाचार, नैनीताल, 15 जनवरी 2019। ‘जय जिया जय जिया’ के उदघोषों सोमवार यानी मकर संक्रांति की पहली रात रानीबाग स्थितबचित्रेश्वर घाट में गुंजायमान रही। इस दौरान रानीबाग में कत्यूरी राजाओं के वंशजों के जत्थे उमड़ते रहे और कड़ाके की […]

जागेश्वर मंदिर समूह बना कुमाऊं विवि का आधिकारिक प्रतीक

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      नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय ने सातवीं से 14वीं शताब्दी में बने देश के 12 ज्योर्तिलिंगों में से एक, 125 मंदिरों के जागेश्वर मंदिर समूह को अपना आधिकारिक प्रतीक चुन लिया है। विवि के कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल ने बताया कि काफी सोच-विचार के बाद कुमाऊं के सबसे बड़े मंदिर समूह व पहचान के रूप में जागेश्वर […]

भगवान राम की नगरी के समीप माता सीता का वन ‘सीतावनी’

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       देवभूमि कुमाऊं-उत्तराखंड में रामायण में सतयुग, द्वापर से लेकर त्रेता युग से जुड़े अनेकों स्थान मिलते हैं। इन्हीं में से एक है त्रेता युग में भगवान राम की धर्मपत्नी माता सीता के निर्वासन काल का आश्रय स्थल रहा वन क्षेत्र-सीतावनी, जो अपनी शांति, प्रकृति एवं पर्यावरण के साथ मनुष्य को गहरी आध्यात्मिकता के साथ मानो उसी […]