नवीन समाचार, गैरसैंण, 12 मार्च 2026 (Bindukhatta-Land Ownership Rights)। उत्तराखंड (Uttarakhand) की ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण (Bhararisain) में चल रहे विधानसभा बजट सत्र के दौरान राज्य सरकार ने वन भूमि (Forest Land) पर दशकों से बसे परिवारों को भूमिधरी अधिकार (Land Ownership Rights) देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जानकारी दी है। संसदीय कार्य मंत्री सुबोध उनियाल (Subodh Uniyal) ने सदन में बताया कि बिंदुखत्ता (Bindukhatta) सहित विभिन्न क्षेत्रों में वन भूमि पर बसे लोगों को राहत देने के लिए विस्तृत नीति तैयार की जा रही है।
सरकार का उद्देश्य ऐसे वन क्षेत्रों को गैर आरक्षित वन भूमि (Non-Reserved Forest Land) घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करना है। इसके बाद इस प्रस्ताव के बारे में सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court Of India) और केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय (Ministry Of Environment, Forest And Climate Change – MoEFCC) को अवगत कराकर उनकी सहमति प्राप्त की जाएगी।
बिंदुखत्ता समेत कई क्षेत्रों के लिए नीति
सदन में जानकारी देते हुए संसदीय कार्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि बिंदुखत्ता और अन्य स्थानों पर वन भूमि में बसे गांवों को राजस्व ग्राम (Revenue Village) का दर्जा देने के विषय में सरकार गंभीरता से काम कर रही है। उन्होंने बताया कि कुछ गांवों को पहले ही राजस्व ग्राम का दर्जा दिया जा चुका है, जबकि अन्य मामलों में भी चरणबद्ध तरीके से निर्णय लिए जा रहे हैं।
इस उद्देश्य के लिए मंत्री की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है और अब तक इस समिति की पांच से अधिक बैठकें हो चुकी हैं।
वनाधिकार कानून के कारण पहले नहीं हो पाया समाधान
सुबोध उनियाल ने बताया कि बिंदुखत्ता के मामले में पहले भी सकारात्मक प्रयास किए गए थे, लेकिन वनाधिकार कानून (Forest Rights Act) के प्रावधानों के कारण यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। उस समय नियम यह था कि वन भूमि पर बसे लोगों को मालिकाना अधिकार तभी मिल सकता है, जब वे वर्ष 2005 से पहले वहां रहते हुए 75 वर्ष की अवधि पूरी कर चुके हों।
बिंदुखत्ता के निवासियों के मामले में वर्ष 2005 में यह अवधि लगभग 73 वर्ष ही पूरी हो रही थी, जिसके कारण उस समय यह पहल सफल नहीं हो सकी।
सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है मामला
मंत्री ने सदन में स्पष्ट किया कि यह विषय सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है और राज्य सरकार न्यायालय के निर्देशों के अनुसार ही आगे की कार्रवाई करेगी। उन्होंने यह भी बताया कि टिहरी बांध (Tehri Dam) परियोजना से विस्थापित लोगों को दी गई भूमि को गैर आरक्षित वन भूमि घोषित किया जा चुका है और आगे इसे राजस्व भूमि घोषित कर उन्हें भूमिधरी अधिकार दिए जाएंगे।
विपक्ष ने उठाए सवाल
सदन में इस विषय को कांग्रेस (Indian National Congress) के विधायकों ने नियम 58 के तहत उठाया। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य (Yashpal Arya) ने कहा कि राज्य के कई जिलों में दशकों से बसे लोगों को अतिक्रमणकारी बताकर हटाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि वन संरक्षण अधिनियम 1980 (Forest Conservation Act 1980) लागू होने से पहले से वन क्षेत्रों में रह रहे लोगों को भी बेदखली के नोटिस दिए जा रहे हैं। आर्य ने उदाहरण देते हुए कहा कि चमोली (Chamoli) जिले की पिंडर घाटी (Pindar Valley) में लगभग 800, देवाल (Dewal) में 473 और नारायणबगड़ (Narayanbagar) क्षेत्र में लगभग 800 परिवारों को वन विभाग द्वारा नोटिस जारी किए गए हैं।
कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन (Qazi Nizamuddin) ने भी कहा कि कई स्थानों पर नजूल भूमि (Nazul Land) पर गरीब परिवारों के घर तोड़ दिए जाते हैं, जबकि संपन्न लोग बड़े निर्माण कार्य कर लेते हैं।
बिन्दुखत्ता का इतिहास, भूगोल और वर्तमान स्थिति
नैनीताल जनपद के लालकुआँ क्षेत्र में स्थित बिन्दुखत्ता उत्तराखंड का एक प्रमुख कस्बा है। यह लालकुआँ तहसील मुख्यालय से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और अपने विशेष इतिहास तथा सामाजिक संरचना के कारण लंबे समय से चर्चा में रहा है।
बिन्दुखत्ता क्षेत्र के बिंदुखेड़ा इलाके में लगभग 200 लोगों का निवास लगभग 200 वर्षों से रहा है। इस क्षेत्र में वर्ष 1970 से एक प्राथमिक विद्यालय भी संचालित हो रहा है। सरकारी आंकड़ों की मानें तो यहाँ 1932 से वन भूमि पर बसासत शुरू हुई। उस समय पहाड़ी क्षेत्रों के लोग सर्दियों में पैदल चलकर यहां आते थे और गर्मियों में पुनः अपने मूल गांवों की ओर लौट जाते थे।
पूर्वकाल में यह क्षेत्र घने जंगलों से आच्छादित था। वर्ष 1978-79 के दशक में स्थानीय लोगों ने जंगल साफ कर यहां आवास और खेती के लिए भूमि विकसित करनी प्रारम्भ की। इसके बाद 1990 के दशक तक यह क्षेत्र एक कस्बे के रूप में विकसित होने लगा। चूंकि यहां बसासत सरकारी स्वीकृति के बिना हुई थी, इसलिए अधिकांश निवासियों के पास भूमि से संबंधित वैध अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं।
नगरपालिका बनने और वापस राजस्व ग्राम बनने की प्रक्रिया
12 दिसंबर 2014 को उत्तराखंड सरकार ने बिन्दुखत्ता को नगरपालिका घोषित करने की अधिसूचना जारी की थी। इसके बाद मार्च 2015 में इसे नगर पालिका परिषद का दर्जा भी दे दिया गया। हालांकि क्षेत्र के लोगों ने इसका व्यापक विरोध किया। नगर पालिका कार्यालय के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान भी बड़ी संख्या में लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद 6 सितंबर 2016 को तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने नगरपालिका का दर्जा वापस लेने और बिन्दुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने की घोषणा की।
भूगोल और जनसंख्या
बिन्दुखत्ता रिज़र्व वन क्षेत्र में स्थित है, इसलिए भारतीय जनगणना के आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। विभिन्न आकलनों के अनुसार यह क्षेत्र लगभग 36 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और इसकी जनसंख्या लगभग सवा लाख, यहाँ रहने वाले परिवारों कि संख्या लगभग 35 हजार और मतदाताओं की संख्या लगभग 40000 के आसपास बताई जाती है। स्थानीय स्तर पर यह भी माना जाता है कि यहां की आबादी का बड़ा हिस्सा पूर्व सैनिकों और सैनिक परिवारों से जुड़ा हुआ है, जिसके कारण इस क्षेत्र की सामाजिक संरचना भी विशेष रूप से सैन्य परंपरा से प्रभावित दिखाई देती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वन भूमि पर बसे परिवारों को भूमिधरी अधिकार देने की नीति लागू होती है तो इससे दशकों से भूमि अधिकार की समस्या झेल रहे हजारों परिवारों को राहत मिल सकती है और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी विकास की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
