वास्तु शास्त्र: घर में किस दिशा में क्या बनाएं, वास्तु दोष दूर करने के उपाय और घर में कौन सा रंग लगाएं….

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सुख-समृद्धि का मार्ग: घर के वास्तु दोष दूर करने हेतु अपनायें ये 7 सरल और प्रभावी उपाय

नवीन समाचार, आस्था डेस्क, 13 अप्रैल 2026 (Vastu Shastra-dos-Donts-Vastu Dosha)। वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) को जीवन की सुख-शांति और प्रगति का आधार माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, घर की बनावट, दिशा और वहां व्याप्त ऊर्जा का व्यक्ति के मानसिक एवं आर्थिक जीवन पर सीधा प्रभाव पड़ता है। कई बार कठिन परिश्रम के उपरांत भी अपेक्षित सफलता प्राप्त न होना या परिवार में निरंतर कलह बने रहने का मुख्य कारण अनजाने में हुए वास्तु दोष (Vastu Dosha) हो सकते हैं। ज्योतिष शास्त्र (Astrology) और वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ सूक्ष्म परिवर्तनों के माध्यम से इन नकारात्मक प्रभावों को दूर कर जीवन में सौभाग्य का संचार किया जा सकता है।

प्राप्त जानकारी और लोक मान्यताओं के अनुसार, घर में सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) के प्रवाह को सुनिश्चित करने हेतु निम्नलिखित सात उपाय अत्यंत कल्याणकारी माने गये हैं:

मुख्य द्वार पर गणपति और तुलसी का सानिध्य

गणेश जी को क्यों नहीं चढ़ाते हैं तुलसी | Why is Tulsi not Offered to Lord  Ganesha | Boldskyवास्तु शास्त्र के अनुसार, घर का मुख्य द्वार (Main Entrance) ऊर्जा के प्रवेश का प्राथमिक मार्ग होता है। यदि मुख्य द्वार पर कोई दोष हो, तो वहां भगवान गणेश (Lord Ganesha) की प्रतिमा को इस प्रकार स्थापित करना चाहिए कि उनकी पीठ दिखाई न दे। इसके साथ ही, प्रवेश द्वार के समीप पवित्र तुलसी (Tulsi) का पौधा लगाना नकारात्मकता को शमन करने में सहायक सिद्ध होता है। ध्यान रहे कि तुलसी के समीप स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाए।

स्वच्छता और संरचनात्मक सुधारों का महत्व

वास्तु विज्ञान (Vastu Science) में स्वच्छता को लक्ष्मी का वास माना गया है। घर के कोनों में धूल या मकड़ी के जाले होना आर्थिक अवरोधों का कारण बन सकता है। इसके अतिरिक्त, कुछ महत्वपूर्ण बिंदु इस प्रकार हैं:

  • बीम के दोष: वास्तु के अनुसार, छत के बीम (Beam) के नीचे शयन या बैठक अशुभ होती है। यदि स्थान परिवर्तन संभव न हो, तो वहां बांसुरी (Flute) टांगने से दोष का निवारण होता है।

  • जल का अपव्यय: घर में नल से पानी का रिसाव (Leakage) या दीवारों पर सीलन होना आर्थिक क्षति का प्रतीक माना जाता है। इसे तत्काल ठीक करवाना चाहिए।

  • ध्वनि दोष: दरवाजों या फर्नीचर से आने वाली चरमराहट की आवाज पारिवारिक तनाव को जन्म देती है, अतः इनमें समय-समय पर स्नेहक (Oil) डालना आवश्यक है।

सीढ़ियों और छत की स्वच्छता से खुलेगा प्रगति का मार्ग

घर की सीढ़ियां (Stairs) व्यक्ति की उन्नति का प्रतीक मानी जाती हैं। टूटी हुई या अशुद्ध सीढ़ियां प्रगति में बाधक होती हैं। इसी प्रकार, छत पर कबाड़ या अनुपयोगी सामान एकत्र करना मानसिक बोझ और अवरोध उत्पन्न करता है। स्वच्छ छत और व्यवस्थित सीढ़ियां घर में सकारात्मक ऊर्जा के स्थायित्व में सहायक होती हैं। इन सरल उपायों को अपनाकर व्यक्ति अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि के नवीन मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

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नवीन आलेख, 27 सितम्बर 2025 (Vastu Shastra-dos-Donts-Vastu Dosha and Colors)वास्तु शास्त्र भारतीय संस्कृति की एक प्राचीन विद्या है, जिसका उद्देश्य मानव जीवन को प्रकृति, पंचतत्व (आकाश, जल, वायु, अग्नि और पृथ्वी) और दिशाओं के साथ सामंजस्य स्थापित करना है। घर, भवन या कार्यस्थल का निर्माण करते समय यदि वास्तु नियमों का पालन किया जाए तो वहां सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे स्वास्थ्य, समृद्धि और सुख-शांति बनी रहती है। वहीं, वास्तु दोष होने पर मानसिक तनाव, आर्थिक हानि और असफलताएं मिल सकती हैं। आइए जानते हैं किस दिशा में क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए और अगर वास्तु दोष हो जाए तो उसे दूर करने के सरल उपाय क्या हैं।

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किस दिशा में क्या करें और क्या न करें


🔹 पूर्व दिशा

  • क्या करें:

    • घर का मुख्य द्वार, खिड़कियां या पूजा स्थल पूर्व दिशा में होना शुभ माना जाता है।

    • रसोईघर में गैस चूल्हा या अग्नि से जुड़ी वस्तुएं पूर्व में रखें।

  • क्या न करें:

    • शौचालय या भारी सामान पूर्व दिशा में न रखें, इससे स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं।


🔹 पश्चिम दिशा

  • क्या करें:

    • पश्चिम दिशा में जल का स्थान (ओवरहेड टैंक) रखा जा सकता है।

    • बच्चों का अध्ययन कक्ष भी पश्चिम दिशा में लाभकारी होता है।

  • क्या न करें:

    • घर का मुख्य द्वार पश्चिम दिशा में न हो तो बेहतर है।

    • पश्चिम में रसोईघर रखने से बचें।


🔹 उत्तर दिशा

  • क्या करें:

    • धन, तिजोरी और वित्तीय लेन-देन से जुड़ी वस्तुएं उत्तर दिशा में रखें।

    • अध्ययन और कार्यालय (ऑफिस) कार्य के लिए उत्तर दिशा उपयुक्त मानी गई है।

  • क्या न करें:

    • उत्तर दिशा में शयनकक्ष या भारी सामान रखने से बचें।

    • यहां शौचालय बनाने से आर्थिक संकट आ सकता है।


🔹 दक्षिण दिशा

  • क्या करें:

    • मुख्य शयनकक्ष दक्षिण दिशा में रखना उचित होता है।

    • घर का सबसे वरिष्ठ सदस्य दक्षिण दिशा के कमरे में रहे तो स्थिरता आती है।

  • क्या न करें:

    • दक्षिण दिशा में मुख्य द्वार या पूजा स्थल रखना अशुभ है।

    • इस दिशा में जल का स्रोत न रखें।


🔹 ईशान कोण (उत्तर-पूर्व)

  • क्या करें:

    • यह दिशा पूजा, ध्यान और अध्ययन के लिए सर्वश्रेष्ठ है।

    • जल का स्रोत (कुआं, हैंडपंप या टंकी) यहां रखें।

  • क्या न करें:

    • ईशान कोण में शयनकक्ष या शौचालय न बनाएं।


🔹 अग्नि कोण (दक्षिण-पूर्व)

  • क्या करें:

    • रसोईघर और अग्नि संबंधी कार्यों के लिए यह दिशा सर्वश्रेष्ठ है।

  • क्या न करें:

    • यहां शयनकक्ष बनाने से पति-पत्नी के बीच तनाव बढ़ सकता है।


🔹 नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम)

  • क्या करें:

    • घर का भारी सामान और मुख्य शयनकक्ष यहां रखना अच्छा होता है।

  • क्या न करें:

    • यहां जल स्रोत (बोरिंग, टंकी आदि) बिल्कुल न रखें।


🔹 वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम)

  • क्या करें:

    • अतिथि कक्ष या भंडार गृह यहां रख सकते हैं।

    • वायु संचार के लिए यह दिशा उपयुक्त है।

  • क्या न करें:

    • इस दिशा में रसोईघर या पूजा स्थल बनाना शुभ नहीं माना जाता।


👉 संक्षेप में, वास्तु शास्त्र जीवन में संतुलन और ऊर्जा का प्रवाह बनाए रखने की विद्या है। यदि घर या कार्यालय बनाते समय इन मूलभूत नियमों का पालन किया जाए तो वहां सकारात्मकता, स्वास्थ्य और सफलता का संचार होता है।

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का निर्माण कैसे करें? | Vaastu Shastr Ke Anusar  Ghar Kaise Bnayen?

🔹 वास्तु दोष दूर करने के उपाय

  • घर के मुख्य द्वार पर स्वस्तिक या ओम् का चिन्ह बनाएं।

  • घर में प्रतिदिन दीपक जलाएं और घंटी बजाएं

  • नकारात्मक ऊर्जा हटाने के लिए नमक-पानी का पोछा लगाएं।

  • घर में तुलसी का पौधा लगाएं और नियमित रूप से जल चढ़ाएं।

  • दरारें और टूट-फूट को तुरंत ठीक कराएं।

  • यदि रसोई और शौचालय एक साथ हैं तो बीच में लकड़ी की पट्टी या पर्दा लगाएं।

  • आर्थिक प्रगति के लिए उत्तर दिशा में कुबेर की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।

  • ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) को साफ-सुथरा और हल्का रखें।


👉 वास्तु शास्त्र केवल भवन निर्माण की तकनीक नहीं, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और संतुलन बनाए रखने का मार्ग है। यदि घर या कार्यालय बनाते समय दिशाओं का ध्यान रखा जाए और छोटे-छोटे उपाय किए जाएं तो न केवल वास्तु दोष दूर होते हैं, बल्कि सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और सफलता भी प्राप्त होती है।

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👉 वास्तु शास्त्र उपाय: यदि घर पूर्वमुखी न होकर पश्चिम, उत्तर या दक्षिणमुखी हो तो क्या करें 

वास्तु शास्त्र में घर का मुख्य द्वार पूर्व या उत्तर दिशा में होना सर्वश्रेष्ठ माना गया है, क्योंकि इन दिशाओं से सकारात्मक ऊर्जा और सूर्य की किरणें घर में प्रवेश करती हैं। लेकिन व्यावहारिक परिस्थितियों में हर किसी को पूर्वमुखी घर मिलना संभव नहीं होता। कई बार घर पश्चिम, उत्तर या दक्षिणमुखी भी होते हैं। ऐसे में वास्तु दोष उत्पन्न हो सकते हैं। यदि आपके घर का मुख्य द्वार पूर्व की जगह किसी अन्य दिशा में है तो वास्तु शास्त्र में कुछ सरल उपाय बताए गये हैं जिनसे इन दोषों को कम या समाप्त किया जा सकता है।


पश्चिममुखी घर के लिए उपाय

  • पश्चिममुखी घर में मुख्य द्वार उत्तर-पश्चिम (वायव्य कोण) में बनवाना श्रेष्ठ माना जाता है।

  • घर के मुख्य द्वार पर श्री यंत्र या वास्तु पुरुष की प्रतिमा लगाना शुभ होता है।

  • मुख्य दरवाजे के ऊपर सिद्ध स्वस्तिक, ऊँ या त्रिशूल का चिह्न अंकित करना चाहिए।

  • सूर्यास्त की ऊर्जा को संतुलित करने के लिए घर के पूर्व दिशा में प्रकाश की व्यवस्था करें।


उत्तरमुखी घर के लिए उपाय

  • उत्तरमुखी घर मुख्यतः धन और करियर की प्रगति का प्रतीक होता है, लेकिन दरवाजा यदि गलत स्थान पर हो तो दोष पैदा करता है।

  • दरवाजे को ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) के पास रखने से शुभ फल मिलता है।

  • घर के उत्तर भाग में गंदगी या भारी वस्तुएँ न रखें, इससे आर्थिक प्रगति रुकती है।

  • धन संबंधित बाधाएँ दूर करने के लिए उत्तर दिशा में कुबेर यंत्र स्थापित करना चाहिए।


दक्षिणमुखी घर के लिए उपाय

  • दक्षिणमुखी घर को सामान्यतः अशुभ माना जाता है, लेकिन यदि वास्तु अनुसार बदलाव किये जाएँ तो यह भी शुभ हो सकता है।

  • मुख्य द्वार दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) में होने पर सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

  • घर के अंदर दक्षिण दिशा में भारी वस्तुएँ रखें और उत्तर दिशा को हल्का रखें।

  • मुख्य द्वार के ऊपर हनुमान जी की गदा या रुद्राक्ष माला लगाने से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।

  • नियमित रूप से घर के मुख्य द्वार पर गौमूत्र छिड़कना और गंगा जल का छिड़काव करना लाभकारी होता है।


सामान्य उपाय (सभी दिशाओं के लिए)

  • घर के मुख्य द्वार को हमेशा साफ और रोशनी से युक्त रखें।

  • दरवाजे पर तोरण और आम या अशोक के पत्तों की सजावट शुभ मानी जाती है।

  • घर में तुलसी का पौधा उत्तर-पूर्व दिशा में लगाना चाहिए।

  • रोज सुबह और शाम दीपक जलाकर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करें।


✅ इन उपायों से किसी भी दिशा में बने घर के वास्तु दोष को कम किया जा सकता है और घर में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। 

👉 वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के किस हिस्से में कौन सा रंग लगाएं, जानें घर में रंगों का महत्व और सही चुनाव

आपके घर का रंग कैसा होना चाहिए ? वास्तु के अनुरूप कहां कैसे रंग करें ? बैठक  कक्ष ( Drawing Room ) का रंग कैसा होना चाहिए ? – ज्योतिष उपायवास्तु शास्त्र में रंगों का विशेष महत्व बताया गया है। रंग न केवल घर की सुंदरता बढ़ाते हैं बल्कि मानसिक शांति, स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा को भी प्रभावित करते हैं। यदि घर में वास्तु अनुसार उचित रंगों का प्रयोग किया जाए तो जीवन में उन्नति और सौहार्द की संभावना बढ़ जाती है।


🔹 शयनकक्ष (Bedroom)

  • हल्का गुलाबी, हल्का नीला, क्रीम या हल्का हरा रंग शुभ रहता है।

  • ये रंग मानसिक शांति, दांपत्य जीवन में मधुरता और प्रेम की भावना को बढ़ाते हैं।

  • गहरे या चमकदार लाल और काले रंग का प्रयोग शयनकक्ष में नहीं करना चाहिए।


🔹 बैठक कक्ष (Drawing Room / Living Room)

  • हल्का पीला, हल्का हरा और आसमानी नीला रंग बैठने की जगह के लिए श्रेष्ठ माना गया है।

  • ये रंग मेहमानों के साथ संबंधों में आत्मीयता और घर के वातावरण में सौहार्द लाते हैं।

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🔹 रसोईघर (Kitchen)

  • गुलाबी, हल्का लाल और नारंगी रंग रसोई के लिए शुभ माने गये हैं।

  • ये रंग ऊर्जा और उत्साह बढ़ाते हैं तथा भोजन को स्वादिष्ट और पचाने योग्य बनाते हैं।

  • काला या गहरा नीला रंग रसोई में नहीं लगाना चाहिए।


🔹 पूजा कक्ष (Pooja Room)

  • हल्का पीला, हल्का नारंगी और सफेद रंग पूजा स्थल के लिए सर्वश्रेष्ठ है।

  • ये रंग शुद्धता, पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।


🔹 बच्चों का कक्ष (Kids Room)

  • हल्का हरा, आसमानी नीला और हल्का पीला रंग बच्चों के लिए शुभ माने जाते हैं।

  • ये रंग रचनात्मकता, एकाग्रता और उत्साह को बढ़ाते हैं।


🔹 स्नानघर (Bathroom)

  • हल्का नीला, सफेद और समुद्री हरा रंग स्नानघर के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।

  • ये रंग ताजगी और शांति का अहसास कराते हैं।


🔹 मुख्य द्वार और बाहरी दीवारें

  • बाहरी दीवारों के लिए सफेद, हल्का पीला या हल्का क्रीम रंग उपयुक्त है।

  • मुख्य द्वार को गहरे भूरे या लकड़ी के प्राकृतिक रंग में रखना शुभ होता है।


❌ किन रंगों से बचें (Vastu Shastra-dos-Donts-Vastu Dosha and Colors)

  • घर में अधिक काला, गहरा भूरा या बहुत गहरे लाल रंग का उपयोग न करें।

  • ये रंग नकारात्मकता, तनाव और असामंजस्य को बढ़ा सकते हैं।


✅ वास्तु शास्त्र कहता है कि हल्के और प्राकृतिक रंग सदैव घर में सकारात्मकता, शांति और सुख-समृद्धि को बढ़ाते हैं।

यदि घर के वास्तु शास्त्र को लेकर आपके कोई प्रश्न हैं तो कमेंट बॉक्स में लिखें। हम प्रयास करेंगे कि आपके प्रश्नों के जवाब दे सकें।

(अस्वीकरण: इस समाचार में दी गई जानकारी धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित है, जिसका उद्देश्य केवल सूचना प्रदान करना है।)

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