-विदेश रोजगार प्रकोष्ठ से युवाओं के लिए नए अवसर, बजट में कौशल विकास, स्वरोजगार और पलायन रोकथाम पर विशेष जोर
नवीन समाचार, देहरादून, 10 मार्च 2026 (Foreign Employment Cell for Youth)। उत्तराखंड (Uttarakhand) की राजधानी देहरादून (Dehradun) में वित्तीय वर्ष 2026–27 के बजट के माध्यम से राज्य के युवाओं को रोजगार और कौशल विकास से जोड़ने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की गई है। सरकार ने युवाओं के लिए विदेश में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से “विदेश रोजगार प्रकोष्ठ” (Overseas Employment Cell) का गठन किया है, जिसके लिए 3.73 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। इस पहल के बाद राज्य के युवाओं को विदेश में नौकरी के लिए निजी एजेंटों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और वे सरकारी व्यवस्था के माध्यम से सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से रोजगार प्राप्त कर सकेंगे।
उल्लेखनीय है कि 2 दिन पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने भी उत्तराखंड के युवाओं को देश का “जिगर का टुकड़ा” बताते हुए उनके कौशल और क्षमता की सराहना की थी। इसी पृष्ठभूमि में राज्य सरकार की यह नई पहल युवाओं के लिए नए अवसरों का मार्ग खोलने वाली मानी जा रही है।
कौशल विकास और रोजगार योजनाओं पर जोर
इसके अतिरिक्त सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल विकास योजना (Pandit Deendayal Upadhyaya Grameen Kaushal Vikas Yojana) के लिए 62.29 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है।
इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को अपने घर के आसपास ही औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (Industrial Training Institute – ITI), पॉलिटेक्निक (Polytechnic), उच्च शिक्षण संस्थानों (Higher Education Institutions) या स्थानीय उद्योगों में कौशल प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का विस्तार
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना (Mukhyamantri Swarojgar Yojana) की सफलता को देखते हुए इसका विस्तारित संस्करण “मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना–02” प्रारम्भ किया है।
इस योजना के अंतर्गत अब तक पांच हजार से अधिक ग्रामीण बेरोजगार युवाओं को वाहन, होम-स्टे (Homestay), कुटीर उद्योग (Cottage Industry), दुकान संचालन और अन्य व्यवसायों के लिए अधिकतम 26 लाख रुपये तक का ऋण प्राप्त हुआ है।
सरकार ने इस योजना के लिए 60 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है, जिससे स्वरोजगार को और प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
युवा और नवाचार के लिए अन्य प्रावधान
राज्य के युवाओं के भविष्य निर्माण के लिए बजट में कई अन्य योजनाओं को भी शामिल किया गया है—
मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना (Mukhyamantri Yuva Bhavishya Nirman Yojana) – 10 करोड़ रुपये
पलायन रोकथाम योजना (Migration Prevention Initiative) – 10 करोड़ रुपये
शिक्षा मित्रों के मानदेय के लिए – 10 करोड़ रुपये
स्टार्टअप वेंचर फंड (Startup Venture Fund) – 25 करोड़ रुपये
उत्तराखंड इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन (Uttarakhand Industries Welfare Association) के अध्यक्ष सुनील उनियाल (Sunil Uniyal) का कहना है कि यह बजट युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर तैयार करने में सहायक सिद्ध हो सकता है।
पलायन रोकने और प्रवासियों की वापसी पर ध्यान
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में लंबे समय से पलायन एक गंभीर सामाजिक और आर्थिक चुनौती बना हुआ है। पलायन निवारण आयोग (Migration Prevention Commission) की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में अब तक 1726 गांव पूरी तरह निर्जन हो चुके हैं, जबकि कई गांवों में आबादी बेहद कम रह गई है।
सरकार का कहना है कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं की कमी के कारण लोग बेहतर अवसरों की तलाश में गांव छोड़ रहे हैं। इस समस्या को देखते हुए सरकार ने गांवों में आजीविका के अवसर बढ़ाने और प्रवासियों की घर वापसी को प्रोत्साहित करने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना और मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही हैं।
‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ से स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा
राज्य सरकार ने “हाउस ऑफ हिमालयाज” (House Of Himalayas) नामक पहल के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने का प्रयास भी शुरू किया है। यह एक अम्ब्रेला ब्रांड (Umbrella Brand) है, जिसके तहत राज्य के पारंपरिक उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।
इस पहल का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups) और महिलाओं की आय बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित करना भी है।
सीमावर्ती गांवों के विकास पर विशेष ध्यान
चीन (China) और नेपाल (Nepal) की सीमा से सटे उत्तराखंड के कई गांव भी पलायन की समस्या से प्रभावित हैं। पलायन निवारण आयोग की रिपोर्ट के अनुसार निर्जन हो चुके गांवों में 26 सीमावर्ती गांव शामिल हैं।
इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटन और साहसिक पर्यटन (Adventure Tourism) के माध्यम से रोजगार के अवसर विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया है।
केंद्र सरकार के वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम (Vibrant Villages Programme) के तहत चीन सीमा से लगे राज्य के 51 गांवों के लिए 40 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। उत्तरकाशी (Uttarkashi) के जादूंग (Jadung) सहित कई गांवों में आधारभूत सुविधाओं के विकास पर भी कार्य प्रस्तावित है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो सकती है और पहाड़ों से होने वाले पलायन को भी काफी हद तक रोका जा सकता है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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