नवीन समाचार, नैनीताल, 24 मार्च 2026 (High Court News 24 March 2026)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के नैनीताल (Nainital) स्थित उच्च न्यायालय (High Court) ने टीएचडीसी (THDC) के शेयर विवाद को लेकर दायर जनहित याचिका (Public Interest Litigation) पर सुनवाई करते हुए सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने याचिका को पोषणीय न मानते हुए निस्तारित कर दिया और याचिकाकर्ताओं पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। यह फैसला न केवल न्यायिक प्रक्रिया की गंभीरता को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि बिना ठोस आधार के जनहित याचिकाओं पर अब न्यायालय सख्ती से विचार कर रहा है।
न्यायालय ने खारिज की याचिका और क्या है पूरा मामला
याचिकाकर्ता भूपेंद्र सिंह (Bhupendra Singh) एवं अन्य ने भारत सरकार (Government of India) के उस निर्णय को चुनौती दी थी, जिसमें टीएचडीसी के शेयरों में बदलाव की प्रक्रिया अपनाई गई थी। याचिका में तर्क दिया गया था कि कंपनी अधिनियम 2013 (Companies Act 2013) की धारा 14 के प्रावधानों का पालन किए बिना एकतरफा निर्णय लिया गया, जो न्यायसंगत नहीं है। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया कि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच टीएचडीसी में 25 प्रतिशत हिस्सेदारी का विवाद पहले से ही सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में विचाराधीन है।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता (Manoj Kumar Gupta) और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय (Subhash Upadhyay) की खंडपीठ ने इन तथ्यों के बावजूद यह पाया कि याचिका विधिक रूप से टिकाऊ नहीं है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। परिणामस्वरूप याचिका की पोषणीयता पर सवाल उठाते हुए याचिका को निस्तारित व खारिज करते हुए याचिकाकर्ताओं को राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (State Legal Services Authority) में 10 हजार रुपये जमा करने के निर्देश दिए गए।
जनहित याचिकाओं पर सख्ती क्यों जरूरी
न्यायालय का यह निर्णय एक व्यापक संदेश देता है कि जनहित याचिका का उद्देश्य वास्तविक सार्वजनिक हित होना चाहिए, न कि केवल प्रक्रियात्मक चुनौती। क्या इस तरह के निर्णय भविष्य में न्यायालयों पर अनावश्यक बोझ कम करने में मदद करेंगे? यह सवाल महत्वपूर्ण है, क्योंकि न्याय व्यवस्था की गति और विश्वसनीयता सीधे ऐसे मामलों से प्रभावित होती है।
अन्य मामला : पुनर्नियुक्ति विवाद में विश्वविद्यालय पर कोर्ट की टिप्पणी
अल्मोड़ा विश्वविद्यालय (Almora University) के विधि संकाय (Law Faculty) में अतिथि शिक्षक प्रियंका (Priyanka) की पुनर्नियुक्ति न होने के मामले में हाईकोर्ट ने विभागाध्यक्ष के रवैये को प्रथम दृष्टया भेदभावपूर्ण और प्रतिशोधात्मक माना। न्यायालय ने विश्वविद्यालय से दो दिन में आवश्यक निर्देश प्राप्त करने को कहा और अगली सुनवाई 1 अप्रैल तय की।
दून विश्वविद्यालय नियुक्ति विवाद में कोर्ट के निर्देश
दून विश्वविद्यालय (Doon University) में सहायक प्रोफेसर (Assistant Professor) की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने याचिका निस्तारित कर दी। साथ ही निर्देश दिए कि विश्वविद्यालय तीन माह के भीतर लंबित प्रत्यावेदन का निस्तारण करे और निर्णय से पहले संबंधित पक्ष को भी सुनवाई का अवसर दिया जाए।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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