नवीन समाचार, नैनीताल, 24 मार्च 2026 (High Court Intervenes in Love Marriage)। उत्तराखंड (Uttarakhand) उच्च न्यायालय (High Court) ने में प्रेम विवाह से जुड़े एक विवादित प्रकरण में महत्वपूर्ण अंतरिम राहत देते हुए प्रेमी युवक की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। यह मामला बालिग-नाबालिग के विवाद, पारिवारिक आपत्ति और कानून के बीच संतुलन का उदाहरण बनता दिख रहा है। और माना जा रहा है कि ऐसे मामलों में सहमति और आयु के प्रश्न न्यायिक निर्णय का आधार बनते रहेंगे।
नैनीताल स्थित उत्तराखंड उच्च न्यायालय (Uttarakhand High Court) से प्राप्त जानकारी के अनुसार न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल (Justice Rakesh Thapliyal) की एकलपीठ ने हरिद्वार (Haridwar) जनपद के रोशनाबाद (Roshanabad) निवासी विकास उर्फ काला (Vikas alias Kala) द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की। याचिकाकर्ता ने अपने विरुद्ध दर्ज अभियोग को निरस्त करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग उच्च न्यायालय से की थी।
“सहमति से विवाह या कानून का उल्लंघन—केंद्र में उम्र का विवाद”
मंदिर में विवाह, परिवार की आपत्ति से बढ़ा विवाद
याचिका में कहा गया कि विकास और प्रिया (Priya) एक-दूसरे को पसंद करते हैं और उन्होंने 1 मार्च 2026 को हरिद्वार रोशनाबाद स्थित शिव मंदिर (Shiv Temple) में आपसी सहमति से विवाह किया।
पिता की शिकायत, नाबालिग होने का आरोप
इस पर लड़की के पिता द्वारा थाना रानीपुर (Ranipur Police Station) में शिकायत दर्ज कराई गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि विवाह के समय लड़की नाबालिग थी और उसे बहला-फुसलाकर विवाह किया गया। इसी आधार पर युवक के विरुद्ध अभियोग पंजीकृत किया गया।
“दोनों बालिग”—याचिकाकर्ता का दावा और दस्तावेज
याचिकाकर्ता ने न्यायालय में प्रस्तुत अभिलेखों में लड़की की जन्म तिथि 4 फरवरी 2008 तथा अपनी जन्म तिथि 20 अक्टूबर 1995 बताते हुए दोनों को बालिग बताया। साथ ही लड़की की ओर से न्यायालय में शपथपत्र (Affidavit) प्रस्तुत कर यह कहा गया कि विवाह उसकी सहमति से हुआ है।
कोर्ट का अंतरिम आदेश: गिरफ्तारी पर रोक, जांच में सहयोग जरूरी
न्यायालय ने सभी पक्षों की प्रारंभिक सुनवाई के बाद अगली तिथि तक युवक की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक (Interim Stay on Arrest) लगा दी है। साथ ही निर्देश दिया गया कि याचिकाकर्ता जांच में सहयोग करेगा।
राज्य सरकार और पिता से मांगी गई आपत्ति
न्यायालय ने राज्य सरकार (State Government) और लड़की के पिता को नोटिस जारी कर इस प्रकरण में अपनी आपत्ति प्रस्तुत करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला
यह प्रकरण सहमति आधारित विवाह, आयु निर्धारण, पारिवारिक अधिकार और दण्ड प्रक्रिया के बीच संतुलन का महत्वपूर्ण उदाहरण है। क्या ऐसे मामलों में दस्तावेजी प्रमाण और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्राथमिकता मिलेगी?
आगे क्या प्रभाव संभव
अगली सुनवाई में न्यायालय आयु संबंधी प्रमाण, सहमति और आरोपों की वैधता पर विचार करेगा। इसका असर भविष्य में ऐसे विवादों के निस्तारण और कानून की व्याख्या पर पड़ सकता है। पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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