नवीन समाचार, देहरादून, 19 मार्च 2026 (Jaunsar-Bawar Rule of only 3 Ornaments)। उत्तराखंड (Uttarakhand) की राजधानी देहरादून (Dehradun) से करीब 135 किलोमीटर दूर स्थित जौनसार बावर (Jaunsar Bawar) क्षेत्र के कन्दाड़ (Kandar) और इन्द्रोली (Indroli) गांवों ने एक ऐसा सामाजिक निर्णय लागू किया है, जिसने परंपरा और समानता को नया आयाम दिया है। यहां अक्टूबर 2025 में लिया गया निर्णय अब भी पूरी तरह लागू है, जिसके अनुसार शादी और मांगलिक आयोजनों में महिलाएं केवल सोने के तीन आभूषण ही पहन सकती हैं। इस नियम के उल्लंघन पर 50 हजार रुपये दंड का प्रावधान रखा गया है, और अब तक गांव में इसका सख्ती से पालन भी हुआ है।
सामाजिक समानता और परंपरा संरक्षण का अनोखा प्रयास
जौनसार बावर क्षेत्र अपनी विशिष्ट जनजातीय संस्कृति, लोक कला और परंपराओं के लिए जाना जाता है। यहां के लोगों को पांडवों (Pandavas) का वंशज माना जाता है और सामाजिक निर्णय सामूहिक सहमति से लेने की परंपरा पुरानी है। इसी क्रम में 30 अक्टूबर 2025 को ग्राम पंचायत कन्दाड़ (Gram Panchayat Kandar) की बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया कि शादी समारोहों में महिलाओं द्वारा केवल तीन आभूषण—मंगलसूत्र, कान के झुमके और नाक की फूली—ही पहने जाएंगे।
इस निर्णय का प्रमुख उद्देश्य सामाजिक समानता स्थापित करना बताया गया। ग्रामीणों के अनुसार पहले आर्थिक रूप से सक्षम परिवारों की महिलाएं अधिक गहने पहनती थीं, जिससे कमजोर वर्ग के परिवार स्वयं को पीछे महसूस करते थे। बढ़ती महंगाई और सोने के ऊंचे दामों ने भी इस निर्णय को प्रेरित किया।
नियम का पालन और सामाजिक प्रभाव
अक्टूबर 2025 से फरवरी 2026 तक कन्दाड़ और इन्द्रोली गांवों में तीन शादियां सम्पन्न हुईं—दो कन्दाड़ और एक इन्द्रोली में। इन सभी आयोजनों में महिलाओं ने एक समान तीन आभूषण पहनकर निर्णय का सम्मान किया। ग्राम प्रधान अरविंद सिंह चौहान (Arvind Singh Chauhan) के अनुसार गांव में इस नियम का पूरी निष्ठा से पालन हो रहा है और समाज में सकारात्मक संदेश गया है।
ग्रामीण तिलक सिंह रावत (Tilak Singh Rawat) ने बताया कि हाल ही में उनके परिवार में पोते की शादी हुई, जिसमें सभी महिलाओं ने समान गहने पहने। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि गांव की किसी युवती की शादी बाहर होती है तो ससुराल पक्ष द्वारा दिए गए गहने वहां पहन सकती है। साथ ही दहेज के रूप में केवल सीमित वस्तुएं—पांच बर्तन, लकड़ी का संदूक, रजाई और गद्दा—ही दिए जाते हैं।
समाज सुधार की निरंतर परंपरा
ग्रामीण टीकम सिंह रावत (Tikam Singh Rawat) के अनुसार यह पहला अवसर नहीं है जब गांव ने सामाजिक सुधार के लिए निर्णय लिया हो। इससे पहले भी जंगलों के कटान पर रोक, स्वच्छता अभियान, प्रत्येक परिवार में शौचालय निर्माण और विवाह समारोह में घी परोसने पर रोक जैसे निर्णय लागू किए गए हैं।
व्यापक सराहना और भविष्य की दिशा
इस पहल की सराहना केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) और गढ़वाल (Garhwal) क्षेत्र से आए लोगों ने भी की है। ग्रामीण अर्जुन सिंह (Arjun Singh) के अनुसार अन्य क्षेत्रों के लोग भी इस मॉडल को अपनाने पर विचार कर रहे हैं।
इन्द्रोली गांव के कुवंर सिंह देव माली (Kunwar Singh Dev Mali) ने कहा कि महंगाई के इस दौर में सभी के लिए महंगे आभूषण पहनना संभव नहीं है, इसलिए यह निर्णय सामाजिक संतुलन बनाए रखने में सहायक है।
आगे क्या हो सकता है?
ग्रामीणों ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में नशे, विशेषकर अंग्रेजी शराब (Alcohol) के उपयोग पर भी सामूहिक निर्णय लिया जा सकता है। इस दिशा में जल्द बैठक आयोजित होने की संभावना है।
यह पहल केवल आर्थिक असमानता को कम करने का प्रयास नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, परंपरा संरक्षण और सामुदायिक निर्णय व्यवस्था का उदाहरण भी बन रही है। क्या अन्य गांव भी इस तरह के निर्णय अपनाएंगे? यह देखने वाला विषय होगा। पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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