उत्तराखंड के खनन क्षेत्र में ऐतिहासिक राजस्व वृद्धि: धामी सरकार ने पारदर्शी नीतियों से तोड़े आय के सभी कीर्तिमान

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नवीन समाचार, देहरादून, 6 अप्रैल 2026 (Historic Growth in UKs Mining Sector)। उत्तराखंड (Uttarakhand) में खनन क्षेत्र ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार पर अवैध खनन के काफी आरोप लगे। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने तो मुख्यमंत्री धामी को ‘खनन प्रिय मुख्यमंत्री, तक कहां लेकिन धामी सरकार ने खनन के क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। उत्तराखंड ने आर्थिक सुदृढ़ीकरण (Economic Strengthening) और सुशासन (Good Governance) की दिशा में राज्य सरकार ने एक अभूतपूर्व उपलब्धि प्राप्त की है।

मुख्यमंत्री (Chief Minister) पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) के नेतृत्व में प्रदेश के खनन विभाग (Mining Department) ने वित्तीय वर्ष (Financial Year) 2025-26 के लिए निर्धारित लक्ष्यों को पीछे छोड़ते हुए राजस्व अर्जन (Revenue Collection) का एक नया इतिहास रच दिया है। यह सफलता न केवल राज्य की वित्तीय स्थिति को सशक्त करेगी, बल्कि पारदर्शी नीतियों और तकनीकी हस्तक्षेप के माध्यम से अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के सरकारी संकल्प को भी सिद्ध करती है।

(Historic Growth in UKs Mining Sector उत्तराखंड ने खनन राजस्व में नया इतिहास रच दिया है। सिर्फ तीन महीनों में  ₹331 करोड़ का रिकॉर्ड राजस्व प्राप्त हुआ, जो पिछले वर्षों की तुलना ...विभागीय आंकड़ों और आधिकारिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड के खनन विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए निर्धारित 950 करोड़ रुपये के राजस्व लक्ष्य के विरुद्ध 1217 करोड़ रुपये का संग्रह किया है। इस कुल धनराशि में राजकोष (Treasury) के माध्यम से 1130 करोड़ रुपये, जिला खनिज फाउंडेशन न्यास (District Mineral Foundation Trust-DMF) से 80 करोड़ रुपये और राज्य खनिज अन्वेषण न्यास (State Mineral Exploration Trust-SMET) से 7 करोड़ रुपये का महत्वपूर्ण योगदान सम्मिलित है। उल्लेखनीय है कि गत वित्तीय वर्ष 2024-25 में भी विभाग ने 875 करोड़ रुपये के लक्ष्य के सापेक्ष 1041 करोड़ रुपये अर्जित कर अपनी कार्यकुशलता का परिचय दिया था।

एक दशक में दस गुना से अधिक की क्रांतिकारी वृद्धि

यदि राज्य में खनन से होने वाली आय के विगत आंकड़ों पर दृष्टि डालें, तो यह परिवर्तन अत्यंत क्रांतिकारी प्रतीत होता है। वर्ष 2012-13 में जहां इस क्षेत्र से मात्र 110 करोड़ रुपये की आय प्राप्त होती थी, वहीं वर्तमान में यह आंकड़ा 1200 करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है। मुख्यमंत्री ने खनिज नीति (Mineral Policy) और नियमावली (Rules) को सरल बनाकर वैध खनन गतिविधियों को प्रोत्साहित किया है।

इसके साथ ही अवैध खनन, अनधिकृत परिवहन (Illegal Transport) और भंडारण (Storage) पर कठोर दंडात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की गई है, जिससे राजकीय राजस्व की चोरी पर प्रभावी रोक लगी है। पट्टों (Lease) के आवंटन में पारदर्शिता (Transparency) लाने से व्यवस्था के प्रति जनविश्वास में भी वृद्धि हुई है।

तकनीकी नवाचार और डिजिटल निगरानी से मिली बड़ी सफलता

इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे आधुनिक तकनीक (Modern Technology) का समावेश एक मुख्य कारक रहा है। राज्य में ‘खनन डिजिटल रूपांतरण एवं निगरानी प्रणाली’ (Mining Digital Transformation and Surveillance System-MDTSS) के अंतर्गत चार मैदानी जनपदों में 45 ई-चेक गेट (e-Check Gates) स्थापित किए गए हैं। इन द्वारों पर स्वचालित नंबर प्लेट पहचान (Automatic Number Plate Recognition-ANPR) कैमरा, रेडियो आवृत्ति पहचान (Radio Frequency Identification-RFID) टैग और अन्य परिष्कृत उपकरण लगाए गए हैं।

इसके अतिरिक्त, खनिज प्रबंधन प्रणाली (Mineral Management System), ई-रवन्ना (e-Ravanna) और निगरानी प्रवर्तन प्रणाली (Surveillance Enforcement System) जैसे डिजिटल मंचों ने व्यवस्था को दोषमुक्त बनाया है। ई-रवन्ना प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने हेतु विशेष सुरक्षा विशेषताओं (Security Features) युक्त कागज़ का प्रयोग आरंभ किया गया है, जिससे फर्जीवाड़े की संभावनाओं को पूर्णतः समाप्त कर दिया गया है।

राष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड के सुधारों को मिला सम्मान

उत्तराखंड सरकार के इन सुधारवादी प्रयासों को राष्ट्रीय पटल पर भी विशेष मान्यता प्राप्त हुई है। 28 मार्च 2026 को नई दिल्ली (New Delhi) में आयोजित एक गरिमामय समारोह में राज्य की एमडीटीएसएस (MDTSS) और ई-रवन्ना सुरक्षा कागज़ परियोजनाओं को प्रतिष्ठित ‘स्कॉच स्वर्ण पुरस्कार’ (SKOCH Gold Award) से सम्मानित किया गया।

इसके अतिरिक्त, भारत सरकार के खान मंत्रालय (Ministry of Mines) ने लघु खनिज सुधारों (Minor Mineral Reforms) में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उत्तराखंड को ‘सी’ श्रेणी में द्वितीय स्थान प्रदान किया है, जिसके फलस्वरूप राज्य को 100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन धनराशि (Incentive Amount) भी प्राप्त हुई है। स्पष्ट है कि भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन और तकनीकी सशक्तिकरण के समन्वय ने उत्तराखंड को आर्थिक स्वावलंबन की नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।

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