उत्तराखंड के विद्यालय में ‘भूत के मंदिर’ पर बवाल: छात्रों से अवैध वसूली और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोपों के बाद शासन सख्त

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नवीन समाचार, बागेश्वर, 4 अप्रैल 2026 (Uproar over Ghost Temple-GIC Kausani)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के बागेश्वर (Bageshwar) जनपद के अंतर्गत राजकीय इंटर कॉलेज कौसानी (GIC Kausani) में विद्यालय परिसर के भीतर ‘भूत का मंदिर’ (Ghost Temple) बनाए जाने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। इस प्रकरण के सामने आते ही शिक्षा विभाग (Education Department) में हड़कंप मच गया है। विद्यालय प्रशासन पर न केवल अंधविश्वास को बढ़ावा देने, बल्कि छात्रों से अवैध धन उगाही और गंभीर वित्तीय अनियमितताओं (Financial Irregularities) के आरोप भी लगे हैं, जिसके पश्चात मुख्य शिक्षा अधिकारी (CEO) ने जांच के आदेश निर्गत कर दिए हैं।

Uttarakhand: School in Kausani builds 'Ghost Temple' with student  donations, sparks probe over superstition | India News - News9liveनवीन समाचार को शिक्षा विभाग के आधिकारिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, विद्यालय परिसर में लगभग 25 हजार रुपये की व्यय राशि से एक ‘भूत मंदिर’ का निर्माण कराया गया। स्थानीय मान्यताओं और चर्चाओं के अनुसार, जिस स्थान पर यह निर्माण हुआ, वहां पूर्व में किसी व्यक्ति की अकाल मृत्यु हुई थी। इस निर्माण हेतु विद्यालय के प्रत्येक छात्र से 100-100 रुपये की कथित ‘अवैध वसूली’ की गई। कुल 218 छात्रों से एकत्रित धनराशि और शिक्षकों के योगदान के बावजूद कुल लगभग 25 हजार रुपये सेबेहद छोटे से मंदिर के निर्माण कार्य की गुणवत्ता और आकार पर अभिभावकों ने प्रश्न चिह्न खड़े किए हैं।

नियमों के विरुद्ध सफाई शुल्क और मानदेय में गबन के आरोप

(Uproar over Ghost Temple-GIC Kausani) उत्तराखंड में शिक्षा के मंदिर में 'भूत का मंदिर', अब हो रहा बवाल; बैठी  जांंच - kausani ghost temple row education dept orders probe
बच्चों से वसूली कर 25 हजार रुपये से बना छोटा सा ‘भूत का मंदिर’

अभिभावक संघ (Parents Teachers Association) और स्थानीय निवासियों ने विद्यालय प्रबंधन पर कई अन्य गंभीर आरोप भी मढ़े हैं। आरोप है कि दिसंबर 2025 से ही छात्रों से प्रतिमाह 50 रुपये ‘सफाई शुल्क’ (Cleaning Fee) वसूला जा रहा है, जबकि शिक्षा के अधिकार (RTE) के नियमों के अंतर्गत कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों से किसी भी प्रकार का शुल्क लेना पूर्णतः प्रतिबंधित है। विडंबना यह है कि विद्यालय में सफाई कर्मचारी की नियुक्ति फरवरी 2026 में हुई, किंतु शुल्क की वसूली दिसंबर से ही प्रारंभ कर दी गई थी, जो सीधे तौर पर वित्तीय भ्रष्टाचार की ओर संकेत करता है।

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इसके अतिरिक्त, विद्यालय प्रशासन पर कोविड-19 (Covid-19) काल के दौरान ऑनलाइन प्रशिक्षण (Online Training) हेतु विभाग से प्राप्त 11 हजार रुपये की धनराशि डकारने का भी आरोप है। शिक्षकों का दावा है कि उन्हें सत्र 2024-25 की बोर्ड परीक्षाओं (Board Examinations) की ड्यूटी का मानदेय (Honorarium) भी अब तक प्राप्त नहीं हुआ है। प्रधानाचार्य ताजबर सिंह (Tajbar Singh) ने इन आरोपों पर सफाई देते हुए कहा कि मंदिर और सफाई हेतु धनराशि अभिभावकों की सहमति से ली गई थी, हालांकि उन्होंने अन्य वित्तीय गड़बड़ियों को अपने कार्यकाल से पूर्व का मामला बताया है।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया और आगे की विधिक कार्यवाही

मुख्य शिक्षा अधिकारी (Chief Education Officer) विनय कुमार (Vinay Kumar) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) गरुड़ को विस्तृत जांच (Investigation) की जिम्मेदारी सौंपी है। शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार, किसी भी सरकारी शिक्षण संस्थान में धार्मिक या अंधविश्वास से जुड़े निर्माण हेतु छात्रों से धन एकत्र करना विधिक अपराध की श्रेणी में आता है। यदि जांच में वित्तीय गबन और पद के दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो संबंधित उत्तरदायी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्यवाही (Punitive Action) सुनिश्चित की जाएगी।

उम्मीद की जा रही है कि शिक्षा विभाग द्वारा की जा रही यह त्वरित जांच और विधिक कार्यवाही (Legal Action) भविष्य में सरकारी विद्यालयों में इस प्रकार की अनियमितताओं और अंधविश्वास जनित गतिविधियों को रोकने में सफल होगी। शासन-प्रशासन को अब शिक्षण संस्थानों में पारदर्शी ऑडिट (Audit) और अभिभावक-शिक्षक बैठकों के विधिक अनुपालन हेतु कड़े दिशा-निर्देश जारी करने होंगे ताकि छात्रों के हितों की रक्षा की जा सके।

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