कुमाऊं विश्वविद्यालय में अब मूल उपाधियों के लिए ऑनलाइन ही होंगे आवेदन, छह नवंबर से बदलेगी प्रक्रिया
नवीन समाचार, नैनीताल, 2 नवंबर 2026 (Kumaun University-Education News)। उत्तराखंड के नैनीताल स्थित कुमाऊं विश्वविद्यालय ने मूल उपाधियों के लिए आवेदन प्रक्रिया को ऑनलाइन करने का निर्णय लिया है। विश्वविद्यालय के दो नवंबर 2026 को जारी कार्यालय आदेश के अनुसार छह नवंबर से मूल उपाधियों के लिए ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। हालांकि, जिन डिप्लोमा पाठ्यक्रमों और उपाधियों के लिए फिलहाल ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध नहीं है, उनके लिए 30 नवंबर तक ऑफलाइन आवेदन किए जा सकेंगे। एक दिसंबर से सभी उपाधियों और डिप्लोमा प्रमाणपत्रों के लिए केवल ऑनलाइन आवेदन ही स्वीकार होंगे।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव की ओर से जारी आदेश में परीक्षा एवं उपाधि अनुभाग के संबंधित कर्मचारियों को नई व्यवस्था के अनुरूप आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं। इस बदलाव से विद्यार्थियों को आवेदन के लिए विश्वविद्यालय के कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम होगी और आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से संचालित हो सकेगी।
प्रो. रितेश शाह को तीन वर्ष के शोध के लिए यूजीसी-आईआईएएस एसोसिएटशिप
उत्तराखंड के नैनीताल स्थित कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर के इतिहास विभाग के प्रोफेसर एवं कुलसचिव प्रो. रितेश शाह को इतिहास विषय में शोध कार्य के लिए शिमला स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी (IIAS) में यूजीसी-आईआईएएस एसोसिएटशिप मिली है। इस उपलब्धि पर सोमवार को इतिहास विभाग में उनका स्वागत एवं अभिनंदन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस एसोसिएटशिप के अंतर्गत प्रो. शाह तीन वर्ष तक उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की जल संरक्षण प्रणालियों पर शोध करेंगे।
इस अवसर पर विभागाध्यक्ष प्रो. संजय कुमार टम्टा एवं विभागीय सदस्यों ने पुष्पगुच्छ भेंटकर उन्हें शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में प्रो. सावित्री कैड़ा जंतवाल, प्रो. संजय घिल्डियाल, पर्यटन विभागाध्यक्ष प्रो. अशोक कुमार, डॉ. मनोज सिंह बाफिला, डॉ. भुवन चंद शर्मा, डॉ. पूरन अधिकारी, डॉ. हरदयाल जलाल, डॉ. शिवराज कपकोटी, डॉ. वीरेंद्र पाल, अनूप कुमार और डॉ. भुवन आर्य सहित इतिहास विभाग के शोधार्थी उपस्थित रहे।
डीएसबी परिसर में पुस्तक दान महोत्सव, विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन के लिए किया प्रेरित
उत्तराखंड के नैनीताल स्थित कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर में सोमवार को उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी के सौजन्य से पुस्तक दान महोत्सव आयोजित किया गया। मोबाइल और इंटरनेट के बढ़ते प्रभाव के बीच पुस्तकों के प्रति घटती रुचि को देखते हुए आयोजित इस कार्यक्रम में प्रतिष्ठित लेखकों की पुस्तकें वितरित की गईं। विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन और गुणवत्तापूर्ण साहित्य पढ़ने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट ने कहा कि इंटरनेट पर उपलब्ध प्रत्येक जानकारी की प्रामाणिकता सुनिश्चित नहीं होती, जबकि पुस्तकें लेखन, संपादन और प्रूफरीडिंग की प्रक्रिया से गुजरने के बाद प्रकाशित होती हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में प्रामाणिक पुस्तकों और मूल स्रोतों का विशेष महत्व है।
उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहानी ने कहा कि इंटरनेट और पुस्तकें ज्ञान प्राप्ति के पूरक माध्यम हैं। विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन के साथ नोट्स तैयार करने की आदत भी विकसित करनी चाहिए।
इससे पूर्व डीएसबी परिसर के निदेशक प्रो. संजय पंत ने अतिथियों का स्वागत किया और कुलसचिव प्रो. रितेश शाह ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन विजिटिंग प्रोफेसर डॉ. ललित तिवारी ने किया। पुस्तक दान के लिए प्रो. लोहानी को विश्वविद्यालय परिवार की ओर से प्रशस्ति पत्र भेंट किया गया। दोनों कुलपतियों को शॉल ओढ़ाकर और गणेश जी की प्रतिमा भेंटकर सम्मानित किया गया।
महोत्सव का शुभारंभ राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान एवं कुलगीत के साथ हुआ। अतिथियों ने ठाकुर देव सिंह बिष्ट की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर पुष्प अर्पित किए।
राष्ट्रीय ड्रोन शिविर में एनसीसी उत्तराखंड निदेशालय ने हासिल कीं तीन उपलब्धियां
तमिलनाडु में 23 अक्टूबर से तीन नवंबर 2026 तक आयोजित ऑल इंडिया इंटर डायरेक्टरेट ड्रोन शिविर में एनसीसी उत्तराखंड निदेशालय ने तीन उपलब्धियां हासिल की हैं। निदेशालय को शैक्षणिक प्रदर्शन में प्रथम, नवाचार श्रेणी में द्वितीय तथा शिविर की समग्र रैंकिंग में तृतीय स्थान मिला है। इस शिविर में कुमाऊं विश्वविद्यालय के दो कैडेट्स ने उत्तराखंड निदेशालय का प्रतिनिधित्व किया।
इनमें लीडिंग कैडेट नेहा छिमवाल (आईटीईपी विभाग) और पेटी ऑफिसर कैडेट अमन कुमार (एमएससी प्रथम वर्ष) शामिल रहे। दोनों कैडेट्स की उपलब्धि पर कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (कर्नल) सतपाल सिंह बिष्ट ने उन्हें बधाई दी।
उन्होंने कहा कि भविष्य में ड्रोन तकनीक रक्षा, आपदा प्रबंधन, कृषि और पर्यावरण संरक्षण सहित अनेक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान देगी। विश्वविद्यालय के कुलसचिव एवं एनसीसी अधिकारी प्रो. (ले.) रितेश शाह ने भी कैडेट्स की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी तकनीकी गतिविधियां विद्यार्थियों में नवाचार, नेतृत्व और व्यावहारिक कौशल विकसित करती हैं।
इस उपलब्धि पर एनसीसी कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन मृदुल शाह, एग्जीक्यूटिव ऑफिसर राकेश रावत, डीएसबी परिसर निदेशक प्रो. संजय पंत और अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. चंद्रकला रावत ने भी दोनों कैडेट्स को बधाई दी।
तबला वादन की घराना परंपराओं और लयकारी से रूबरू हुए डीएसबी परिसर के विद्यार्थी
उत्तराखंड के नैनीताल स्थित कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर के संगीत विभाग में सोमवार को ‘एकल तबला वादन में लय एवं लयकारी का प्रयोग’ विषय पर व्याख्यान-प्रदर्शन आयोजित किया गया। राजस्थान संगीत संस्थान, जयपुर के सहायक प्राध्यापक एवं आकाशवाणी के ए ग्रेड कलाकार डॉ. पवन सेम ने तबला वादन की प्रस्तुति देकर विद्यार्थियों को भारतीय शास्त्रीय संगीत की विभिन्न तालों और घराना परंपराओं से परिचित कराया।
इंदौर के तबला गुरु पंडित विलास खरगोनकर के शिष्य डॉ. सेम ने दिल्ली, अजराड़ा और पंजाब घरानों की वादन शैलियों का प्रदर्शन किया। उन्होंने विभिन्न तालों में लयकारी और तबला वादन की तकनीकी बारीकियां भी समझाईं।
संगीत विभागाध्यक्ष डॉ. रवि जोशी ने कहा कि भारतीय शास्त्रीय संगीत की परंपराओं के संरक्षण और युवा पीढ़ी को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में ऐसे आयोजन महत्वपूर्ण हैं।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रो. ललित तिवारी, प्रो. एलएस लोधियाल, डॉ. पवन सेम और डॉ. रवि जोशी ने दीप प्रज्वलित कर किया। संचालन शोध छात्रा कोमल पाठक ने किया। इस अवसर पर प्रो. लज्जा भट्ट, प्रो. अनिल बिष्ट, प्रो. जिबू साहू, डॉ. कपिल खुल्बे, डॉ. कुबेर गिनती, डॉ. दीपक मेलकानी, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. गगनदीप होठी, डॉ. पूजा जोशी, डॉ. पंकज भट्ट, डॉ. अलंकार महतोलिया, डॉ. संध्या यादव और डॉ. लक्ष्मी धस्माना सहित शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
तीन विद्यालयों के विद्यार्थियों को प्रकृति रिसाइक्लिंग प्राइवेट लिमिटेड ने वितरित किए स्कूल बैग
उत्तराखंड के नैनीताल में प्रकृति रिसाइक्लिंग प्राइवेट लिमिटेड की ओर से सोमवार को नगर के तीन विद्यालयों के विद्यार्थियों को स्कूल बैग वितरित किए गए। स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सहयोग से संस्था ने नगर पालिका ऑडिट स्कूल, नगर पालिका जूनियर हाईस्कूल और वैभरली स्कूल में कार्यक्रम आयोजित कर विद्यार्थियों को बैग दिए।
नगर पालिका ऑडिट स्कूल में प्रधानाचार्य रोशन आरा, ज्योति मेहरा और चम्पा आर्या की उपस्थिति में बैग वितरित किए गए। नगर पालिका जूनियर हाईस्कूल में प्रधानाचार्य सुशीला टम्टा सहित आलोक जोशी, सुनीता राणा, रचना बिष्ट और सुनीता पांडे मौजूद रहे। वैभरली स्कूल में प्रधानाचार्य रजनी चौधरी, पुष्पा बिष्ट और केवल भट्ट की उपस्थिति में विद्यार्थियों को बैग दिए गए।
कार्यक्रम में भाजपा के वरिष्ठ नेता अरविंद पड़ियार, सभासद भगवत रावत, भूपेंद्र बिष्ट, शैलेन्द्र बर्गली और संतोष कुमार सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने विद्यार्थियों को मन लगाकर पढ़ने के लिए प्रेरित किया और हरसंभव सहायता का भरोसा दिया। विद्यालयों के प्रधानाचार्यों, शिक्षकों और जनप्रतिनिधियों ने संस्था का आभार जताया।
हिमनद झीलों से संभावित आपदा के जोखिम कम करने पर कार्यशाला, 120 प्रतिभागियों ने किया मंथन
उत्तराखंड के नैनीताल स्थित डॉ. आरएस टोलिया उत्तराखंड प्रशासनिक अकादमी में हिमनदों की झीलों के फटने से उत्पन्न बाढ़ (ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी जीएलओएफ) के जोखिम और प्रबंधन रणनीतियों पर कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें विशेषज्ञों ने हिमनद झीलों की निगरानी, संवेदनशील क्षेत्रों के वैज्ञानिक आकलन और पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित करने पर जोर दिया। कार्यशाला में विभिन्न विभागों एवं संस्थानों के 120 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
कार्यशाला का शुभारंभ आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग के अपर सचिव प्रकाश चंद्रा, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के मेजर जनरल सुधीर बहल, पद्मश्री अनूप साह, डॉ. शेखर पाठक और अकादमी के संयुक्त निदेशक डॉ. महेश कुमार ने संयुक्त रूप से किया।
प्रकाश चंद्रा ने बताया कि हिमनद झीलों का वैज्ञानिक अध्ययन और जोखिम आकलन किया जा रहा है। संवेदनशील क्षेत्रों में पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित करने की दिशा में भी कार्य चल रहा है। मेजर जनरल सुधीर बहल ने सिक्किम में हिमनद झील फटने से आई आपदा के अनुभव साझा किए। उन्होंने ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए समय पर चेतावनी, त्वरित प्रतिक्रिया और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को जरूरी बताया।
कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान, भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (आईआईआरएस), केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई), जीबी पंत विश्वविद्यालय और कुमाऊं विश्वविद्यालय सहित विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञों ने विचार रखे। इसमें हिमनद झीलों की पहचान एवं निगरानी, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और आपदा प्रबंधन के उपायों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मंजू पांडे ने किया।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।















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