अगस्त–अक्टूबर 2025 के अध्ययन में सामने आया, कैंची धाम आने वाले अधिकांश श्रद्धालुओं का सच, कौन हैं, कहाँ से आते हैं और क्यों आते हैं….

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 6 जनवरी 2026 (Study on Devotees Came Kainchi)। उत्तराखंड के नैनीताल जनपद स्थित कैंची धाम में आने वाले श्रद्धालुओं को लेकर किया गया एक ताजा अध्ययन सामने आया है। यह स्पष्ट करता है कि यहां आने वाले अधिकांश लोग केवल बाबा नीब करौरी महाराज के दर्शन के उद्देश्य से ही पहुंच रहे हैं और आसपास के अन्य पर्यटन स्थलों तक नहीं जा रहे।
यह तथ्य इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे एक ओर कैंची धाम की वैश्विक आध्यात्मिक ख्याति सामने आती है, वहीं दूसरी ओर यह संकेत भी मिलता है कि क्षेत्रीय पर्यटन और स्थानीय रोजगार की संभावनाओं का पूरा लाभ अभी नहीं मिल पा रहा। अध्ययन के निष्कर्ष प्रशासन और पर्यटन नीति के लिए नई दिशा तय कर सकते हैं।
कैंची धाम को लेकर हुआ अर्थ एवं संख्या विभाग का विस्तृत अध्ययन क्या कहता है
पर्यटन विभाग के सहयोग से अर्थ एवं संख्या विभाग ने अगस्त, सितंबर और अक्टूबर 2025 के दौरान कैंची धाम आए तीन हजार श्रद्धालुओं पर आधारित अध्ययन किया। सर्वे के अनुसार 73.40 प्रतिशत श्रद्धालु केवल कैंची धाम तक ही सीमित रहे। उन्होंने नैनीताल, भवाली, भीमताल, मुक्तेश्वर, अल्मोड़ा, कौसानी, जागेश्वर या रानीखेत जैसे अन्य पर्यटन स्थलों का भ्रमण नहीं किया। यह आंकड़ा बताता है कि अधिकांश आगंतुकों का उद्देश्य पर्यटन नहीं बल्कि शुद्ध रूप से केवल बाबा नीब करौरी के आध्यात्मिक दर्शन करना है।
एक दिन में लौट जाने वालों की संख्या अधिक
अध्ययन में यह भी सामने आया कि 64.77 प्रतिशत श्रद्धालु एक ही दिन में दर्शन कर वापस लौट गये। केवल 22 प्रतिशत लोग ही होटल या होमस्टे में रुके। इससे स्थानीय होटल, होमस्टे और अन्य पर्यटन से जुड़े व्यवसायों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। क्या बेहतर सुविधाएं और योजनाबद्ध प्रचार से श्रद्धालुओं को कुछ समय रुकने के लिए प्रेरित किया जा सकता है। यह प्रश्न अब नीति निर्धारकों के सामने है।
श्रद्धालुओं की सामाजिक और भौगोलिक तस्वीर
युवा वर्ग और बाहरी राज्यों की अधिक भागीदारी
सर्वे के अनुसार 67.17 प्रतिशत श्रद्धालु 15 से 30 वर्ष की आयु वर्ग के हैं, यानी जेन-जी और युवा वर्ग की भागीदारी सबसे अधिक है। 26.03 प्रतिशत श्रद्धालु 30 से 45 वर्ष आयु वर्ग के हैं। कुल श्रद्धालुओं में 79 प्रतिशत पुरुष और 21 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं।
राज्यवार आंकड़ों के अनुसार 82.47 प्रतिशत श्रद्धालु उत्तराखंड के बाहर के राज्यों से आए, जबकि 17.33 प्रतिशत स्थानीय थे। इनमें सबसे अधिक 29.13 प्रतिशत उत्तर प्रदेश से, 13.04 प्रतिशत दिल्ली से और 11.37 प्रतिशत बिहार से आए। विदेशी श्रद्धालुओं की संख्या 0.20 प्रतिशत रही, जिनमें नेपाल और नीदरलैंड के अनुयायी शामिल हैं।
सुविधाओं को लेकर असंतोष के संकेत
पार्किंग, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल
अध्ययन में सुविधाओं को लेकर कई कमियां भी सामने आयीं। 74 प्रतिशत श्रद्धालु पार्किंग व्यवस्था से असंतुष्ट पाए गये। 58 प्रतिशत ने शौचालय और स्वच्छता सुविधाओं पर नाराजगी जताई। 54 प्रतिशत कचरा प्रबंधन और 52 प्रतिशत स्वास्थ्य सेवाओं से संतुष्ट नहीं थे। ये आंकड़े बताते हैं कि कैंची धाम में बढ़ती भीड़ के अनुपात में बुनियादी सुविधाओं का विकास अभी पर्याप्त नहीं है। इसका सीधा असर श्रद्धालुओं के अनुभव और क्षेत्र की छवि पर पड़ता है।
प्रशासन की तैयारी और आगे की योजना
सर्वे में यह स्पष्ट हुआ कि 95.3 प्रतिशत श्रद्धालु केवल आध्यात्मिक उद्देश्य से कैंची धाम पहुंचे और 99 प्रतिशत ने एक घंटे से कम समय में दर्शन किए। सबसे अधिक भीड़ पूर्वाह्न 11 बजे से शाम चार बजे के बीच रहती है।
पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल ने बताया कि इस सर्वे रिपोर्ट के आधार पर आगे की योजना तैयार की जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कैंची धाम की सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं और जून से 400 वाहनों की नई पार्किंग सुविधा शुरू करने की तैयारी है। इससे जाम, अव्यवस्था और असंतोष की स्थिति में सुधार आने की उम्मीद है।
कैंची धाम की आध्यात्मिक आस्था ने इसे विश्व मानचित्र पर विशेष स्थान दिलाया है। अब चुनौती यह है कि इस आस्था के साथ-साथ स्थानीय पर्यटन, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं का संतुलित विकास कैसे किया जाए।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।











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