नवीन समाचार, देहरादून, 30 जनवरी 2026 (US Hate Speech Report)। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून (Dehradun) से सामने आई एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट ने देश की राजनीति और सामाजिक विमर्श में नई बहस छेड़ दी है। अमेरिका (United States of America) के वॉशिंगटन डीसी (Washington DC) स्थित एक गैर-सरकारी संस्थान द्वारा जारी ‘रिपोर्ट 2025, हेट स्पीच इवेंट्स इन इंडिया’ (Report 2025, Hate Speech Events in India) में उत्तराखंड (Uttarakhand) के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) को नफरती भाषण देने वाले नेताओं की सूची में पहले स्थान पर रखा गया है।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में देशभर में कुल 1,318 प्रत्यक्ष नफरती भाषण दर्ज किए गए, जो वर्ष 2023 की तुलना में 97 प्रतिशत और 2024 की तुलना में 13 प्रतिशत अधिक बताए गए हैं। देखें संबंधित वीडिओ :
रिपोर्ट का आधार और दावा
यह रिपोर्ट वॉशिंगटन डीसी स्थित ‘सेंटर फ़ॉर स्टडी ऑफ़ ऑर्गेनाइज़्ड हेट’ (Center for Study of Organized Hate – CSOH) द्वारा तैयार की गई है, जिसे संस्था अपने ‘द इंडिया हेट लैब’ (The India Hate Lab) प्रोजेक्ट का हिस्सा बताती है। सीएसओएच स्वयं को एक गैर-लाभकारी और गैर-पक्षपातपूर्ण थिंक टैंक बताता है, जिसका उद्देश्य धर्म, जाति, नस्ल, राष्ट्रीयता, लिंग या पहचान के आधार पर संगठित नफरत का अध्ययन और प्रतिरोध करना है।
रिपोर्ट में संयुक्त राष्ट्र (United Nations) की रूपरेखा के आधार पर हेट स्पीच की परिभाषा तय की गई है, जिसके अनुसार कोई भी भाषण, लेखन या आचरण यदि किसी समुदाय या व्यक्ति को उसकी पहचान के आधार पर अपमानित करता है या भेदभाव को बढ़ावा देता है, तो उसे नफरती भाषण माना गया है।
आंकड़े और राज्यवार स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार 2025 में दर्ज 1,318 नफरती भाषणों में से 98 प्रतिशत मामलों में निशाने पर मुस्लिम और ईसाई अल्पसंख्यक समुदाय रहे। मुस्लिम समुदाय को 1,156 मामलों में और ईसाई समुदाय को 162 मामलों में लक्षित किया गया, जिसमें ईसाइयों के खिलाफ घटनाओं में 41 प्रतिशत वृद्धि का दावा किया गया है।
राज्यवार आंकड़ों में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में 266, महाराष्ट्र (Maharashtra) में 193, मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में 172, उत्तराखंड में 155 और दिल्ली (Delhi) में 76 घटनाएँ दर्ज की गईं। रिपोर्ट का यह भी दावा है कि 88 प्रतिशत घटनाएँ भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) शासित राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में हुईं, जबकि विपक्ष शासित सात राज्यों में कुल 154 घटनाएँ दर्ज की गईं।
नेताओं की सूची और धामी पर टिप्पणी
रिपोर्ट में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को 71 कथित नफरती भाषणों के साथ पहले स्थान पर रखा गया है। उनके बाद प्रवीण तोगड़िया (Pravin Togadia) को 46 और अश्विनी उपाध्याय (Ashwini Upadhyay) को 35 भाषणों के साथ सूची में शामिल किया गया है। सूची में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) नौवें और यति नरसिंहानंद सरस्वती (Yati Narsinghanand Saraswati) दसवें स्थान पर बताए गए हैं।
रिपोर्ट में यह भी टिप्पणी की गई है कि मुख्यमंत्री धामी की कथित बयानबाज़ी के पीछे “राजनीतिक असुरक्षा” एक कारण हो सकती है। रिपोर्ट का दावा है कि बेरोज़गारी आंदोलन और अंकिता भंडारी हत्याकांड जैसे मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ‘लव जिहाद’, ‘लैंड जिहाद’ और ‘मज़ार जिहाद’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया।
भारतीय जनता पार्टी की प्रतिक्रिया
भारतीय जनता पार्टी ने इस रिपोर्ट को सिरे से खारिज किया है। उत्तराखंड से राज्यसभा सांसद और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट (Mahendra Bhatt) ने इसे विदेशी संस्थाओं द्वारा देश में भ्रम फैलाने का प्रयास बताया। उनका कहना है कि देवभूमि उत्तराखंड के मूल स्वरूप को बनाए रखने के लिए सरकार ने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) और जबरन धर्मांतरण विरोधी कानून जैसे कदम उठाए हैं, जिन्हें नफरत के चश्मे से देखना अनुचित है।
चयनात्मक दृष्टि पर सवाल
इस रिपोर्ट को लेकर एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि इसमें हिंदुओं के विरुद्ध कही गई बातों और घटनाओं का पूर्णतः अभाव दिखाई देता है। आलोचकों का कहना है कि तमिलनाडु (Tamil Nadu) और केरल (Kerala) जैसे राज्यों में हिंदू समाज के विरुद्ध दिए गए बयानों तथा पश्चिम बंगाल (West Bengal) में हिंदुओं के खिलाफ हुई हिंसक घटनाओं का रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख नहीं है। इसी प्रकार हिंदुओं के विरुद्ध कथित भड़काऊ बयान देने वाले उदयनिधि स्टालिन (Udhayanidhi Stalin) और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) और किसी एक भी मुस्लिम नेता के नाम का उल्लेख तक नहीं किया गया, जिससे रिपोर्ट पर एकतरफा दृष्टिकोण का आरोप लग रहा है।
उदयनिधि स्टालिन का मामला और न्यायिक दृष्टिकोण
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन (M. K. Stalin) के पुत्र और राज्य के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन द्वारा सितंबर 2023 में चेन्नई में दिए गए सनातन धर्म विरोधी बयान को मद्रास उच्च न्यायालय (Madras High Court) की मदुरै पीठ (Madurai Bench) ने जनवरी 2026 में ‘हेट स्पीच’ माना था। न्यायालय ने कहा था कि सनातन धर्म को समाप्त करने जैसी भाषा नरसंहार (Genocide) या सांस्कृतिक नरसंहार (Cultricide) का संकेत दे सकती है।
अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि तमिलनाडु में मूल वक्ता के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जबकि प्रतिक्रिया देने वालों पर अभियोग दर्ज किए गए, जो कानून के दुरुपयोग की ओर संकेत करता है। इसके बावजूद उदयनिधि स्टालिन का नाम भी इस रिपोर्ट में नहीं है।
व्यापक विमर्श की आवश्यकता
विशेषज्ञों का मानना है कि नफरती भाषण जैसे संवेदनशील विषय पर यदि रिपोर्टें चयनात्मक दृष्टि से तैयार की जाएँगी, तो इससे सामाजिक सौहार्द के बजाय ध्रुवीकरण को बढ़ावा मिल सकता है। ऐसे में सभी समुदायों, राज्यों और राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े मामलों का समान और निष्पक्ष मूल्यांकन आवश्यक माना जा रहा है।
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