8वें वेतन आयोग के सम्मुख कर्मचारियों की हुंकार: रखीं पुरानी पेंशन सहित नौ सूत्रीय मांगों ने बदली वेतन संशोधन की दिशा

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नवीन समाचार, नई दिल्ली, 7 अप्रैल 2026 (Update on 8th Pay Commission Portal)। केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए ‘आठवें केंद्रीय वेतन आयोग’ (8th Central Pay Commission) के गठन के साथ ही भविष्य की आर्थिक सुरक्षा का मार्ग प्रशस्त होता दिखाई दे रहा है। कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि निकाय ‘जेसीएम’ (Joint Consultative Machinery) की ‘स्टाफ साइड’ (Staff Side) ने आयोग की कार्यप्रणाली और सुझाव आमंत्रण की प्रक्रिया को लेकर मोर्चा खोल दिया है।

कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि वेतन निर्धारण की प्रक्रिया केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि उनके जीवन स्तर और सेवा निवृत्ति के पश्चात के सम्मान से जुड़ी है। इस संदर्भ में प्रस्तुत नौ सूत्रीय मांग पत्र ने प्रशासनिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।

विभागीय सूत्रों और कर्मचारी संगठनों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्टाफ साइड के सचिव शिव गोपाल मिश्रा ने 1 अप्रैल 2026 को आयोग के सदस्य सचिव (Member Secretary) पंकज जैन को एक औपचारिक पत्र प्रेषित कर ज्ञापन (Memorandum) प्रस्तुत करने की वर्तमान पद्धति में आमूलचूल परिवर्तन की मांग की है। कर्मचारियों का तर्क है कि वर्तमान डिजिटल ढांचा और शब्द सीमा उनके व्यापक मुद्दों को समाहित करने में अपर्याप्त है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य वेतन आयोग (Pay Commission) के समक्ष प्रत्येक संवर्ग की समस्याओं को तर्कसंगत और विस्तृत रूप से प्रस्तुत करना है।

पुरानी पेंशन की बहाली और ज्ञापन प्रक्रिया में सरलीकरण की मांग

कर्मचारी संगठनों ने अपनी मांगों के केंद्र में ‘पुरानी पेंशन योजना’ (Old Pension Scheme-OPS) की पुनरावृत्ति को रखा है। इसके अतिरिक्त, जो नौ प्रमुख बिंदु शासन के सम्मुख रखे गए हैं, वे सीधे तौर पर वेतन, भत्तों और कार्यसंस्कृति को प्रभावित करते हैं:

  • विस्तृत अभिव्यक्ति हेतु शब्द सीमा में वृद्धि: वर्तमान में सुझावों हेतु निर्धारित 500 शब्दों की सीमा को बढ़ाकर 1000 शब्द करने का आग्रह किया गया है, ताकि जटिल विसंगतियों को स्पष्ट किया जा सके।

  • पुरानी पेंशन एवं एनपीएस/यूपीएस पर स्पष्टता: कर्मचारियों ने ‘राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली’ (National Pension System-NPS) और ‘एकीकृत पेंशन योजना’ (Unified Pension Scheme-UPS) की कमियों को दूर करते हुए पुरानी पेंशन की वापसी हेतु पृथक खंड की मांग की है।

  • महिला कार्मिकों हेतु विशेष प्रावधान: कार्यस्थल पर सुरक्षा, मातृत्व लाभ (Maternity Benefit) और ‘बाल्य देखभाल अवकाश’ (Child Care Leave-CCL) जैसे विषयों पर संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया गया है।

  • तकनीकी सुगमता और समय विस्तार: ज्ञापन जमा करने की अंतिम तिथि को 31 मई 2026 तक विस्तारित करने तथा ऑनलाइन फाइल अपलोड करने की क्षमता को 2 एमबी (MB) से बढ़ाकर 10 एमबी करने का प्रस्ताव दिया गया है।

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विभागवार चुनौतियां और भविष्य का रोडमैप

कर्मचारी संगठनों का मानना है कि प्रत्येक विभाग की कार्य प्रकृति भिन्न होती है, अतः ‘विभागवार सुझाव पेटिका’ (Departmental Suggestion Box) की सुविधा अनिवार्य होनी चाहिए। इससे रेलवे, डाक, रक्षा और अन्य महत्वपूर्ण सेवाओं के कर्मचारी अपनी विशिष्ट समस्याओं को आयोग के संज्ञान में ला सकेंगे। इसके अतिरिक्त, ईमेल और भौतिक प्रति (Hard Copy) के माध्यम से भी सुझाव स्वीकार करने की स्वतंत्रता मांगी गई है ताकि दूरस्थ क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारी भी अपनी सहभागिता सुनिश्चित कर सकें।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आठवां वेतन आयोग इन तार्किक मांगों को स्वीकार कर लेता है, तो यह सुशासन (Good Governance) और कर्मचारी कल्याण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम होगा। इससे न केवल वेतन विसंगतियों का प्रभावी निराकरण होगा, बल्कि सरकार और कर्मचारियों के मध्य विश्वास का वातावरण भी सुदृढ़ होगा। अब देखना यह है कि वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) और वेतन आयोग इन मांगों पर क्या रुख अपनाते हैं।

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नवीन समाचार, नई दिल्ली, 12 मार्च 2026 (Update on 8th Pay Commission Portal)। केंद्र सरकार (Government Of India) के कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए महत्वपूर्ण प्रक्रिया शुरू हो गई है। 8वां केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission – 8th CPC) ने वेतन, भत्तों और पेंशन व्यवस्था में संभावित सुधारों को लेकर सुझाव आमंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आयोग ने कर्मचारियों, पेंशनरों, कर्मचारी संगठनों और विभिन्न सरकारी विभागों से कहा है कि वे अपने सुझाव ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भेज सकते हैं।

(Update On 8th Pay Commission Portal) 8th CPC Questionnaireआयोग के अनुसार सुझाव जमा करने की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। इच्छुक हितधारक 30 अप्रैल 2026 तक अपनी मांगें और सुझाव प्रस्तुत कर सकते हैं। यह प्रक्रिया आयोग की अंतिम सिफारिशें तैयार करने से पहले का महत्वपूर्ण चरण मानी जा रही है।

केवल ऑनलाइन पोर्टल से ही भेजे जा सकेंगे सुझाव

आयोग की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार सुझाव भेजने की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी। इसके लिए दो आधिकारिक पोर्टल निर्धारित किए गए हैं—

सुझाव भेजने के लिए उपयोगकर्ता को माईगव (MyGov) खाते में लॉग-इन करना होगा। यह लॉग-इन ई-मेल या मोबाइल नंबर के साथ ओटीपी (One Time Password – OTP) या पासवर्ड के माध्यम से किया जा सकेगा।

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आयोग ने स्पष्ट किया है कि पोर्टल के बाहर भेजे गए ई-मेल, कागजी ज्ञापन या पीडीएफ दस्तावेज स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

किन लोगों से मांगे गए सुझाव

इस प्रक्रिया में कई श्रेणियों के हितधारकों को शामिल किया गया है, जिनमें प्रमुख रूप से—

  • केंद्र सरकार के औद्योगिक और गैर-औद्योगिक कर्मचारी

  • अखिल भारतीय सेवाओं (All India Services) के अधिकारी

  • रक्षा बलों (Defence Forces) के सदस्य

  • केंद्र शासित प्रदेशों (Union Territories) के कर्मचारी

  • भारतीय लेखा एवं लेखा परीक्षा विभाग (Indian Audit And Accounts Department) के अधिकारी-कर्मचारी

  • सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court Of India) और कुछ उच्च न्यायालयों (High Courts) के कर्मचारी

  • संसद के कानूनों के तहत बने नियामक निकायों के कर्मचारी

  • पेंशनर संगठन (Pensioner Associations)

आयोग का कहना है कि इन वर्गों से प्राप्त सुझाव कर्मचारियों और पेंशनरों की अपेक्षाओं और समस्याओं को समझने में सहायक होंगे।

सुझाव भेजने के लिए चार श्रेणियां

ऑनलाइन पोर्टल पर सुझाव जमा करने के लिए चार अलग-अलग श्रेणियां बनाई गई हैं—

  • व्यक्तिगत / कर्मचारी / पेंशनर (Individual / Employee / Pensioner)

  • कर्मचारी संघ / यूनियन (Association / Union)

  • मंत्रालय / विभाग / केंद्र शासित प्रदेश (Ministry / Department / Union Territory)

  • न्यायिक अधिकारी (Judicial Officers)

इन श्रेणियों के माध्यम से अलग-अलग स्तरों से सुझाव एकत्र किए जाएंगे।

लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों पर पड़ेगा प्रभाव

8वां केंद्रीय वेतन आयोग लगभग 48 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और करीब 67 लाख पेंशनरों की वेतन संरचना, भत्तों और पेंशन व्यवस्था को प्रभावित करेगा।

इसलिए यह परामर्श प्रक्रिया आयोग की अंतिम रिपोर्ट तैयार करने से पहले का महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। सुझाव प्राप्त होने के बाद आयोग उनका अध्ययन करेगा और उसके आधार पर केंद्र सरकार को अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करेगा।

कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांगें

इस बीच विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने अपनी मांगें भी आयोग के समक्ष रखनी शुरू कर दी हैं। अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (All India Trade Union Congress – AITUC) ने आयोग के सामने 12 प्रमुख मांगें रखी हैं, जिनमें—

  • फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) को 3.0 करने की मांग

  • पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme – OPS) की बहाली

  • वार्षिक वेतन वृद्धि को 3 प्रतिशत से बढ़ाकर कम से कम 6 प्रतिशत करना

  • महंगाई भत्ता (Dearness Allowance – DA) की गणना के लिए नया सूत्र

  • अवकाश नकदीकरण (Leave Encashment) की सीमा 300 दिन से बढ़ाकर 450 दिन

  • कैशलेस चिकित्सा सुविधा (Cashless Medical Facility)

  • मासिक धर्म अवकाश (Menstrual Leave)

  • अधिक पितृत्व अवकाश (Paternity Leave)

  • जोखिम भत्ते (Risk Allowance) में वृद्धि

इसके अलावा कर्मचारी संगठनों ने केंद्र सरकार से लगभग 15 लाख रिक्त पदों को नियमित भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से भरने की भी मांग की है।

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विशेषज्ञों का मानना है कि आयोग द्वारा शुरू की गई यह सुझाव प्रक्रिया भविष्य में कर्मचारियों की वेतन संरचना और पेंशन प्रणाली में बड़े बदलावों का आधार बन सकती है।

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