उत्तराखंड के निजी विद्यालयों में प्रवेश के लिए डोनेशन लेने पर सख्ती, नियम तोड़ने पर मान्यता होगी रद्द

नवीन समाचार, देहरादून, 6 जनवरी 2026 (Strictness for Donation in Schools)। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण और सख्त संदेश सामने आया है। प्रदेश में संचालित किसी भी बोर्ड के निजी विद्यालय यदि दाखिले के नाम पर डोनेशन या चंदा लेते पाये गये, तो उनकी मान्यता रद कर दी जायेगी। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि निजी विद्यालय केवल वही शुल्क वसूल कर सकेंगे, जो शासन की ओर से निर्धारित है।
इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने प्रदेश के सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किये हैं। यह निर्णय अभिभावकों पर पड़ रहे आर्थिक दबाव और शिक्षा के व्यवसायीकरण पर रोक लगाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
लगातार मिल रही शिकायतों के बाद कार्रवाई
सीबीएसई और आइसीएसई विद्यालयों पर विशेष नजर
माध्यमिक शिक्षा निदेशक की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (Central Board of Secondary Education) और भारतीय विद्यालय प्रमाणपत्र परीक्षा परिषद (Council for the Indian School Certificate Examinations) से संबद्ध निजी विद्यालयों के विरुद्ध लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। इन शिकायतों में दाखिले के समय अवैध रूप से डोनेशन या अतिरिक्त धनराशि वसूलने की बात सामने आयी है। इसी के आधार पर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, नई दिल्ली द्वारा 18 अक्टूबर 2018 को जारी अधिसूचना के अनुरूप कार्रवाई करने के निर्देश दिये गये हैं।
शुल्क निर्धारण को लेकर स्पष्ट नियम
संचालन व्यय तक ही सीमित रहेगी फीस
अधिसूचना में यह स्पष्ट किया गया है कि विद्यालय केवल अपने संचालन व्यय की पूर्ति तक ही शुल्क ले सकेंगे। निर्देशों के अनुसार कोई भी विद्यालय या उसकी प्रबंधन समिति विद्यार्थियों के दाखिले के उद्देश्य से प्रति व्यक्ति कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं ले सकेगी। फीस की वसूली केवल शिक्षा विभाग की ओर से निर्धारित शीर्षों के अंतर्गत ही की जायेगी। इससे यह सुनिश्चित किया जायेगा कि अभिभावकों से मनमानी वसूली न हो और शिक्षा सभी के लिए सुलभ बनी रहे।
बिना अनुमति शुल्क संशोधन पर रोक
आदेश में यह भी कहा गया है कि शुल्क में किसी भी प्रकार का संशोधन सक्षम प्राधिकारी या निर्धारित प्रक्रिया की पूर्व स्वीकृति के बिना नहीं किया जा सकेगा। यदि कोई विद्यालय इस नियम का उल्लंघन करता है, तो उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जायेगी। शिक्षा विभाग का मानना है कि फीस में पारदर्शिता से विद्यालयों और अभिभावकों के बीच विश्वास बढ़ेगा।
सरकारी नियम सभी पर समान रूप से लागू-फीस विनियमन अधिनियम का पालन अनिवार्य
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि राज्य या केंद्र सरकार की ओर से फीस विनियमन को लेकर बनाए गये सभी अधिनियम और नियम सीबीएसई से संबद्ध विद्यालयों पर भी समान रूप से लागू होंगे। इसका अर्थ है कि कोई भी निजी विद्यालय अपने बोर्ड का हवाला देकर नियमों से बच नहीं सकेगा। यह निर्णय निजी विद्यालयों की जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वार्षिक सूचना रिपोर्ट अनिवार्य-15 सितंबर तक वेबसाइट पर अपलोड करना होगा विवरण
निदेशक के निर्देशों के अनुसार प्रत्येक विद्यालय को अपनी वार्षिक व्यापक सूचना रिपोर्ट तैयार कर हर वर्ष 15 सितंबर से पहले विद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। इस रिपोर्ट में विद्यालय का नाम, पता, संपर्क विवरण, संबद्धता की स्थिति, अवसंरचना, शैक्षणिक कैलेंडर, शिक्षकों की योग्यता और प्रशिक्षण, शैक्षणिक एवं खेल उपलब्धियां, पीटीए गतिविधियां तथा विद्यार्थियों की संख्या जैसी सभी आवश्यक जानकारियां शामिल करनी होंगी। इससे विद्यालयों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आयेगी और अभिभावकों को सही जानकारी मिल सकेगी।
उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी-मान्यता रद करने तक का प्रावधान
शिक्षा विभाग ने साफ चेतावनी दी है कि यदि कोई विद्यालय इन नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करते हुए मान्यता रद की जायेगी। विभाग का कहना है कि शिक्षा को लाभ का माध्यम बनाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। यह निर्णय निजी विद्यालयों को अनुशासन में रखने और विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करने के उद्देश्य से लिया गया है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।











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