नवीन समाचार, अल्मोड़ा, 9 अप्रैल 2026 (Almora-State Government Seizes Land)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के अल्मोड़ा (Almora) जनपद अंतर्गत सल्ट (Syalt) तहसील से भूमि क्रय नियमों के उल्लंघन और जालसाजी का एक अत्यंत गंभीर प्रकरण प्रकाश में आया है। यहाँ कूट रचित (Forged) दस्तावेजों और फर्जी विवाह प्रमाणपत्र (Marriage Certificate) का उपयोग कर भूमि क्रय करने के आरोपितों पर विधि सम्मत कठोर कार्यवाही की गई है। भूमि को उत्तराखंड राज्य सरकार में निहित कर दिया गया है। इस घटना ने उत्तराखंड में बाहरी व्यक्तियों द्वारा भूमि क्रय करने की वैधानिक प्रक्रिया और नियमों की प्रभावशीलता पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
अल्मोड़ा जनपद की भतरौंजखान (Bhitarounjkhan) पुलिस और राजस्व विभाग (Revenue Department) से प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिल्ली (Delhi) के लाजपत नगर (Lajpat Nagar) निवासी चार व्यक्तियों ने षड्यंत्र रचकर ग्राम बन्दरान बिष्ट (Bandran Bisht) में भूमि खरीदी थी। शिकायतकर्ता दलजीत सिंह (Daljit Singh) ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि आरोपितों ने न केवल उनकी माता के नाम दर्ज भूमि के समीप तारबाड़ को क्षति पहुँचाई, बल्कि राजस्व अभिलेखों में हेरफेर कर और गलत तथ्यों के आधार पर विक्रय पत्र (Sale Deed) निष्पादित कराया। जाँच में यह तथ्य भी उभरकर आया कि आरोपितों ने उत्तराखंड भूमि क्रय नियम (Uttarakhand Land Purchase Rules) की धारा 154 का स्पष्ट उल्लंघन किया है।
फर्जी विवाह प्रमाणपत्र और प्रशासनिक जाँच की परतें
इस प्रकरण की गंभीरता तब और बढ़ गई जब राजस्व विभाग की जाँच में विवाह की तिथियों को लेकर दो भिन्न-भिन्न प्रमाणपत्रों का अनावरण (Disclosure) हुआ। आरोपित दंपति ने उत्तराखंड के कड़े भूमि कानूनों से बचने के लिए अपनी वैवाहिक स्थिति और विवाह की वास्तविक तिथि को छुपाने का प्रयास किया।
राजस्व अभिलेखों के अनुसार, आरोपितों ने आर्य समाज मंदिर (Arya Samaj Mandir), जनकपुरी (Janakpuri) से सत्यापित एक प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया जिसमें विवाह की तिथि 16 जनवरी 2018 अंकित थी। इसके विपरीत, सरकारी पंजीकरण प्रमाणपत्र (Government Registration Certificate) में यही तिथि 16 जनवरी 2019 दर्ज पाई गई। कूट रचित दस्तावेजों के माध्यम से पति-पत्नी होने के तथ्य को छुपाकर अलग-अलग नामों से भूमि क्रय करना राज्य के भूमि व्यवस्था अधिनियम का खुला उल्लंघन माना गया है।
न्यायालय का कड़ा निर्णय और भूमि का सरकारीकरण
मामले की विस्तृत जाँच और साक्ष्यों के आधार पर कुमाऊं (Kumaon) आयुक्त दीपक रावत (Deepak Rawat) ने विवादित भूमि को तत्काल राज्य सरकार में निहित (Vested in State Government) करने और आरोपितों के विरुद्ध अभियोग (Case) पंजीकृत करने के आदेश दिए। इसी क्रम में न्यायालय असिस्टेंट कलेक्टर (Assistant Collector), प्रथम श्रेणी, अल्मोड़ा ने अपना ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है।
न्यायालय ने उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950 (UPZALR Act 1950) की धारा 154 (4) (1) क के उल्लंघन के फलस्वरुप आरोपित गौरव पुनियानी (Gaurav Puniyani) द्वारा क्रय की गई 0.020 हेक्टेयर भूमि को उत्तराखंड राज्य सरकार में निहित कर दिया है। न्यायालय ने तहसीलदार (Tehsildar) सल्ट को निर्देशित किया है कि वह भूमि का नक्शा बनाकर उस पर राज्य सरकार का अधिकार प्राप्त करें और राजस्व अभिलेखों में आवश्यक अमलदरामद (Entry) सुनिश्चित करें।
आरोपितों पर विधिक शिकंजा और सामाजिक प्रभाव
भतरौंजखान पुलिस ने दिल्ली निवासी चार आरोपितों—गौरव पुनियानी, डॉली मुंजाल (Dolly Munjal), भरत मुंजाल (Bharat Munjal) और नलिनी सचदेवा (Nalini Sachdeva)—के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 468 (जालसाजी) और 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत किया है।
इस घटना के बाद से क्षेत्र के स्थानीय निवासियों में भूमि सुरक्षा को लेकर सजगता बढ़ी है। प्रशासन की इस त्वरित कार्यवाही ने उन लोगों के लिए कड़ा संदेश दिया है जो फर्जीवाड़े के माध्यम से देवभूमि की संपत्तियों को हड़पने का प्रयास करते हैं। क्या आने वाले समय में राजस्व विभाग सभी बाहरी भूमि सौदों का इसी प्रकार सूक्ष्म परीक्षण (Micro Scrutiny) करेगा? यह कार्यवाही राज्य में सख्त भूमि कानून (Land Law) की आवश्यकता को और अधिक पुख्ता करती है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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