नैनीताल : धारी ब्लॉक में तीन महिलाओं की मौत के बाद दो गुलदार पिंजरे में कैद, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस

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डॉ. नवीन जोशी @  नवीन समाचार, नैनीताल, 14 जनवरी 2026 (Nainital-2 Leopards Trapped)। उत्तराखंड के नैनीताल (Nainital) जनपद के धारी (Dhari) विकासखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष के बीच वन विभाग को बड़ी सफलता मिली है। क्षेत्र में लगातार हमले कर भय का कारण बने दो गुलदार (Leopard) पिंजरे में कैद कर लिये गये हैं। बीते 15 दिनों के भीतर तीन महिलाओं की मृत्यु के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश और असुरक्षा का माहौल था। ऐसे में दो गुलदारों के पकड़े जाने से स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है, हालांकि विभाग ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा दृष्टि से गश्ती और निगरानी अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।

धारी क्षेत्र में कैसे पकड़े गये दो गुलदार

(Nainital-2 Leopards Trapped)वन विभाग (Forest Department) के अनुसार धारी क्षेत्र में हमलावर वन्यजीवों को पकड़ने के लिए व्यापक अभियान चलाया गया था। इसके तहत संभावित ठिकानों पर 10 से अधिक पिंजरे लगाए गये और 50 से अधिक कैमरा ट्रैप (Camera Trap) सक्रिय किये गये। साथ ही विभागीय गश्ती दलों को लगातार जंगल और आबादी से लगे इलाकों में तैनात किया गया था, ताकि गुलदारों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके।

उप प्रभागीय वनाधिकारी (Sub Divisional Forest Officer) ममता चंद (Mamta Chand) ने बताया कि एक गुलदार तल्ली दीनी (Talli Deeni) के समीप लगाए गये पिंजरे में कैद हुआ, जबकि दूसरा गुलदार उस क्षेत्र से पकड़ा गया जहां मवेशियों पर हमलों की घटनाएं सामने आ रही थीं। दोनों को रानीबाग (Ranibagh) स्थित बचाव केंद्र (Rescue Centre) लाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पकड़े गये गुलदारों के नमूने (Sample) मृतकों से मिलान के लिए भेजे जाएंगे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हमलों में शामिल वन्यजीव यही थे या नहीं।

15 दिनों में तीन महिलाओं की मृत्यु से बढ़ा तनाव

धारी क्षेत्र और आसपास के ग्रामीण इलाकों में पिछले कुछ सप्ताह से गुलदारों की सक्रियता बढ़ने की बात सामने आ रही थी। ग्रामीणों के अनुसार महिलाएं जब जंगल से चारा और लकड़ी लेने जाती थीं, तब गुलदारों के हमले की घटनाएं हो रही थीं। तीन घटनाओं ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया था।

जानकारी के अनुसार—

  • 26 दिसंबर को धारी क्षेत्र के दीनी तल्ली (Deeni Talli) में हेमा बरगली (Hema Bargali) पर गुलदार ने हमला कर उनकी मृत्यु कर दी।

  • 30 दिसंबर को खन्स्यू (Khansyoo) क्षेत्र के चमोली गांव (Chamoli Village) में चारा और लकड़ी लेने गई एक महिला गुलदार के हमले में मृत्यु का शिकार हुईं।

  • 11 जनवरी को धारी विकासखंड में एक महिला पर हमला हुआ और गुलदार उन्हें जंगल की ओर घसीट ले गया। बाद में महिला का शव बरामद हुआ।

इन घटनाओं के बाद ग्रामीण लगातार कार्रवाई की मांग कर रहे थे। कई गांवों में विरोध, नाराजगी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर दबाव भी बढ़ा था।

मानव-वन्यजीव संघर्ष में सुरक्षा क्यों बनी बड़ी चुनौती

धारी, भीमताल (Bhimtal), ओखलकांडा (Okhalkanda) जैसे क्षेत्रों में जंगल और आबादी के बीच दूरी कम है। खेत, चारागाह और जल-स्रोत आसपास होने के कारण ग्रामीणों का जंगल की ओर आना-जाना बना रहता है। ऐसे में गुलदार जैसे वन्यजीवों की गतिविधि बढ़ते ही सीधे जनजीवन प्रभावित होता है। यह केवल भय का विषय नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सुरक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य तक पर असर डालने वाली स्थिति है।

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क्या यह समस्या केवल वन विभाग की कार्रवाई से हल हो जाएगी, या दीर्घकालिक नीति की जरूरत है? विशेषज्ञों के अनुसार मानव-वन्यजीव संघर्ष में त्वरित पकड़ के साथ-साथ सतत निगरानी, जागरूकता, प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षित रास्ते और सामुदायिक सहयोग भी जरूरी है।

प्रशासन और वन विभाग की प्रतिक्रिया, आगे क्या होगा

वन विभाग ने कहा है कि दोनों गुलदारों को बचाव केंद्र में सुरक्षित रखा जाएगा और परीक्षण के बाद आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि क्षेत्र में पिंजरे और कैमरा ट्रैप की निगरानी बनी रहेगी तथा गश्ती दल संवेदनशील गांवों में लगातार सक्रिय रहेंगे।

ग्रामीणों की मांग है कि जिन इलाकों में महिलाएं रोजमर्रा के कार्यों के लिए जंगल जाती हैं, वहां सुरक्षा व्यवस्था और सतर्कता बढ़ाई जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। प्रशासन स्तर पर भी स्थिति पर नजर रखते हुए लोगों से सावधानी बरतने और अकेले जंगल की ओर न जाने की अपील की जा रही है।

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