नवीन समाचार, नैनीताल, 14 मार्च 2026 (Nainital Literature Festival Day-2)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के नैनीताल (Nainital) के समीप चारखेत (Charkhet) स्थित कांस्या रिज़ॉर्ट माउंटेन मैजिक (Kansya Resort Mountain Magic) में आयोजित नैनीताल लिटरेचर फेस्टिवल (Nainital Literature Festival 2026) के दूसरे दिन साहित्य, राजनीति, तकनीक, सिनेमा और कला से जुड़े विषयों पर व्यापक चर्चा हुई। इस दौरान प्रसिद्ध लेखक और ब्रांड विशेषज्ञ सुहेल सेठ (Suhel Seth) ने पहाड़ के सामाजिक और प्रशासनिक मुद्दों पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें यह देखकर शर्म आती है कि पहाड़ के लोग अपने मुद्दों पर खुलकर आवाज नहीं उठाते।
उन्होंने कहा कि जो नैनीताल उन्होंने अपने छात्र जीवन में, नैनीताल के सेंट जोसफ कॉलेज से पढ़ाई के दौरान देखा था और आज का नैनीताल है, दोनों में बहुत बड़ा अंतर दिखाई देता है। उन्होंने यह भी कहा कि नैनीताल की वर्तमान स्थिति चिंताजनक है और स्थानीय समाज को अपने शहर और पहाड़ से जुड़े मुद्दों पर अधिक मुखर होना चाहिए।
साहित्यिक आयोजनों में ज्वलंत मुद्दों पर भी हो चर्चा
सुहेल सेठ ने कहा कि साहित्यिक सम्मेलनों को केवल साहित्य तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समाज और देश में चल रही प्रमुख समस्याओं पर भी खुलकर चर्चा होनी चाहिए।
उन्होंने उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की शासन व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड (Uttarakhand) सरकार को वहां के प्रशासनिक मॉडल से सीख लेनी चाहिए। उनके इस बयान को कार्यक्रम के दौरान उपस्थित श्रोताओं ने गंभीरता से सुना और इस पर चर्चा भी हुई।
दिन की शुरुआत पुस्तक विमोचन से
कार्यक्रम के दूसरे दिन की शुरुआत प्रख्यात लेखक प्रोफेसर पुष्पेश पंत (Prof. Pushpesh Pant) की पुस्तक “नैनीताला नैनीताला” (Nainitala Nainitala) के विमोचन से हुई। इस अवसर पर पुष्पेश पंत, इंदु पांडे (Indu Pandey) और कविता पांडे (Kavita Pandey) ने नैनीताल की सांस्कृतिक स्मृतियों, सामाजिक परिवेश और समय के साथ हुए परिवर्तनों पर विचार साझा किए।
महाकाव्यों और साहित्य पर संवाद
“In the Shadows of the Epics” सत्र में अल्का पांडे (Alka Pandey) और शालिनी मोदी (Shalini Modi) ने अपर्णा कांदा (Aparna Kanda) के साथ भारतीय महाकाव्यों के कम चर्चित पात्रों पर चर्चा करते हुए उनके दृष्टिकोण से नई व्याख्याएँ प्रस्तुत कीं।
“The Accused” सत्र में लेखिका वसुंधरा (Vasundhara) ने अवकीरत छाबड़ा दयाल (Avkirit Chhabra Dayal) के साथ संवाद में अपनी पुस्तक और अपराध कथाओं के मनोवैज्ञानिक आयामों पर चर्चा की।
महिलाओं के अनुभवों और संभावनाओं पर चर्चा
“Her Unmapped Realms” सत्र में गीतअर्श कौर (Geet Arsh Kaur), मधुरीता आनंद (Madhurita Anand) और सुभाषिनी अली (Subhashini Ali) ने महिलाओं के अनुभवों, संघर्षों और सामाजिक सीमाओं से परे उनकी संभावनाओं पर विचार रखे।
इस दौरान पूर्व सांसद और लेखिका सुभाषिनी अली ने कहा कि देश में भाषायी विभाजन को दूर करने की आवश्यकता है और साहित्यिक आयोजनों को आम जनता के लिए अधिक जनप्रिय बनाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आज का युवा समानता के मुद्दों पर सक्रिय है और रोजगार, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University Grants Commission – UGC) तथा परीक्षा पत्र लीक जैसे विषयों पर आवाज उठा रहा है।
तकनीक, राजनीति और सिनेमा पर विचार
“Brand India” सत्र में सुहेल सेठ ने देविका अरोड़ा (Devika Arora) के साथ बातचीत में भारत की वैश्विक पहचान और बाजार में ब्रांड निर्माण से जुड़े विषयों पर चर्चा की।
इसके बाद “Nehru to Narendra” सत्र में अनिरुद्ध गुप्ता (Anirudh Gupta) और समीर संधीर (Sameer Sondhi) ने भूपेंद्र चौबे (Bhupendra Chaubey) के साथ भारतीय राजनीति के विभिन्न दौरों पर अपने अनुभव साझा किए।
तकनीक आधारित “AI Frontiers” सत्र में अनिरुद्ध गुप्ता, गुरचरण दास (Gurcharan Das) और मधुरीता आनंद ने परीक्षित भार्गव (Parikshit Bhargava) के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) के संभावित प्रभावों और उससे जुड़े नैतिक प्रश्नों पर चर्चा की।
कविता और नृत्य से हुआ समापन
सिनेमा पर केंद्रित “The Hyderabad Connection” सत्र में फिल्मकार नागेश कुकुनूर (Nagesh Kukunoor) ने अपर्णा कांदा के साथ अपने फिल्म निर्माण के अनुभव साझा किए।
कविता सत्र “Voices in Verse” में अमिताभा बागची (Amitabha Bagchi), अमिताभ एस. बघेल (Amitabh S. Baghel), अशोक पांडे (Ashok Pandey), जेरी पिंटो (Jerry Pinto) और मुराद अली (Murad Ali) ने अपनी रचनाओं के माध्यम से कविता की विविध अभिव्यक्तियाँ प्रस्तुत कीं।
दूसरे दिन का समापन “त्रिशक्ति” नृत्य प्रस्तुति से हुआ, जिसमें वैष्णवी नाट्य केंद्र (Vaishnavi Natya Kendra) की वी. सृजना (V. Srijana) और कीर्ति श्री (Kirti Shri) ने कलरिपयट्टू (Kalaripayattu) और भरतनाट्यम (Bharatanatyam) के संगम से अनूठी प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम का संचालन देव्यानी (Devyani) और हरनमन सिंह (Harnaman Singh) ने किया। पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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