मौसम के बदले मिजाज के पीछे कोरोना के साथ सूर्य की ‘खराब सेहत’, आगे 10 दिन में 10 डिग्री बढ़ सकता है पारा !

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-इस वर्ष पर्यावरण साफ होने के साथ सौर सक्रियता ‘सोलर मिनिमम’ में अपने सबसे निचले स्तर पर
नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 17 मई 2020। इस वर्ष गर्मियों के मई माह तक शीतकाल से चला आ रहा बारिश व ओलावृष्टि का क्रम जारी है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में तो अब भी बर्फबारी हो रही है, जबकि मैदानी क्षेत्रों में अपेक्षित गर्मी नहीं है। मौसम का यह बदला मिजाज चर्चा में है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके दो कारण हो सकते हैं। पहला कोरोना विषाणु की महामारी के कारण दुनिया भर में लागू लॉक डाउन की वजह से फैक्टरियों एवं वाहनों के काफी कम चलने से ग्रीन हाउस गैसों के कम उत्सर्जन से पर्यावरण में प्रदूषण का घटना एवं धरती के ऊपर ओजोन परत में सुधार आना, और दूसरे धरती पर ऊष्मा व ऊर्जा देने वाले सूर्य पर उसके 11 वर्षीय सोलर साइकिल यानी सौर चक्र के ‘सोलर मिनिमम’ यानी अपने निचले स्तर पर होना। उल्लेखनीय है कि सोलर मिनिमम को सूर्य की सेहत खराब होने के रूप में भी देखा जाता है, क्योंकि इससे सूर्य पर सौर भभूकाएं उठने की तीव्रता कम हो जाती है।
स्थानीय एरीज यानी आर्य भट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान के वरिष्ठ सौर वैज्ञानिक डा. वहाब उद्दीन के अनुसार मौसम को अनेक घटक प्रभावित करते हैं। इनमें प्राकृतिक कारणों के साथ ही मानवजनित कारण भी बड़ी भूमिका निभाते हैं। इस वर्ष लॉक डाउन की वजह से मानव जनित कारणों में काफी कमी आई है। इस कारण क्लोरो-फ्लोरो कार्बन, कार्बन डाई ऑक्साइड, कार्बन मोना ऑक्साइड व ओजोन आदि ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन काफी कम होने से धरतीवासियों की सबसे बड़ी चिता का कारण बनी ओजोन परत में सुधार आया है। वहीं दूसरी ओर सूर्य 2007 के आसपास अपनी सक्रियता के 11 वर्षीय सौर चक्र में शीर्ष पर रहने के बाद इधर अपने सबसे कम सक्रियता की स्थिति में है। मौसम में दिख रहे बदलाव का यह भी बड़ा कारण हो सकता है।

अगले 10 दिनों में 10 डिग्री सेल्सियस तक अधिक तापमान झेलेंगे मैदानी क्षेत्र

Pr.BS Kotliya
प्रो. बहादुर सिंह कोटलिया

नैनीताल। बदले मौसम पर दीर्घकालीन मौसम पर शोधरत कुमाऊं विश्वविद्यालय में यूजीसी के प्रोफेसर बहादुर सिंह कोटलिया का भी मानना है कि मानव जनित कारण मौसम का काफी प्रभावित करते हैं। बावजूद उनका मानना है कि वर्तमान मौसमी बदलाव के पीछे मानवजनित कारणों से अधिक प्राकृतिक कारण हैं। उन्होंने कहा कि मई के पहले पखवाड़े तक सक्रिय रहा पश्चिमी विक्षोभ अब समाप्त हो गया है। इसके बाद अगले दो-तीन दिनों में ही गर्मी बढ़ने वाली है और मैदानी क्षेत्रों में अगले 10 दिनों में तापमान में 10 डिग्री सेल्सियस तक तापमान बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि यह बढ़ा हुआ तापतान दक्षिण पश्चिमी मानसून के आने तक बना रह सकता है। अलबत्ता, पर्वतीय क्षेत्रों में हाल में हुई बारिश की वजह से मौजूद नमी तापमान को अधिक बढ़ने नहीं देगी। लिहाजा पहाड़ों पर मौसम खुशगवार रह सकता है।

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-पिछले पांच वर्ष से तारे की चमक में कमी आने से वैज्ञानिक जता रहे सुपरनोवा विस्फोट की आशंका, जिसके बाद कुछ समय के लिए खत्म होने से पहले सूर्य व चंद्रमा जैसा तीसरा सबसे चमकदार तारा जैसा नजर जाएगा आर्द्रा नक्षत्र
Ardra nakshtraनवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 20 फरवरी 2020। पृथ्वी से 700 प्रकाश वर्ष दूर एक आकाशगंगा में स्थित सूर्य से करीब 19 गुना भारी व नौ सौ गुना बड़े विशाल आकार वाले लाल रंग के तारे ‘बेटेल्गयूज’ (भारतीय नाम आर्द्रा नक्षत्र) पर दुनिया भर के खगोल वैज्ञानिकों की नजरें लगी हुई हैं। अभी यह सबसे अधिक चमक के मामले में आकाश गंगा का 11वां तारा है। लेकिन इधर पिछले पांच माह में इसकी चमक में 25 फीसद कमी आ गई है। वैज्ञानिकों का इस आधार पर ही मानना है कि जल्द ही सूपरनोवा विस्फोट के जरिये इसका अंत हो जाएगा। वहीं धार्मिक आधार पर देखें तो माता नंदा देवी के मेले का धार्मिक पक्ष निभाने वाले पंडित एवं शिक्षक भगवती प्रसाद जोशी कहते हैं कि धार्मिक तौर पर किसी नक्षत्र के समाप्त होने की परिकल्पना नहीं की गई है।

जानिये आर्द्रा नक्षत्र के बारे में:

आर्द्रा का अर्थ होता है नमी। आकाश मंडल में आर्द्रा छठवां नक्षत्र है। यह राहु का नक्षत्र है व मिथुन राशि में आता है। आर्द्रा नक्षत्र कई तारों का समूह न होकर केवल एक तारा है। यह आकाश में मणि के समान दिखता है। इसका आकार हीरे अथवा वज्र के रूप में भी समझा जा सकता है। कई विद्वान इसे चमकता हीरा तो कई इसे आंसू या पसीने की बूंद समझते हैं। आर्द्रा नक्षत्र मिथुन राशि में 6 अंश 40 कला से 20 अंश तक रहता है। जून माह के तीसरे सप्ताह में प्रातः काल में आर्द्रा नक्षत्र का उदय होता है। फरवरी माह में रात्रि 9 बजे से 11 बजे के बीच यह नक्षत्र शिरोबिंदु पर होता है। निरायन सूर्य 21 जून को आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करता है। इसे पृथ्वी पर नमी की मात्रा बढ़ने के रूप में भी देखा जाता है। ज्योतिष शास्त्र में 0 डिग्री से लेकर 360 डिग्री तक सारे नक्षत्रों का नामकरण इस प्रकार किया गया है-अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, अश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती। 28वां नक्षत्र अभिजीत है। राहु को आर्द्रा नक्षत्र का अधिपति ग्रह माना जाता है। आर्द्रा नक्षत्र के चारों चरण मिथुन राशि में स्थित होते हैं जिसके कारण इस नक्षत्र पर मिथुन राशि तथा इस राशि के स्वामी ग्रह बुध का प्रभाव भी रहता है।

इधर, स्थानीय एरीज यानी आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. बृजेश कुमार के अनुसार सुपरनोवा विस्फोट के दौरान विशाल ऊर्जा के विकिरण से इसकी चमक कुछ समय के लिए काफी अधिक बढ़ जाएगी। इसके बाद यह यात्रि में कुछ समय के लिए आसमान में सूर्य व चंद्रमा के बाद तीसरे सबसे अधिक चमकते हुए तारे के रूप में नजर आयेगा। यह अवधि एक-दो माह से चार माह तक की हो सकती है। वैज्ञानिकों के अनुसार बेटेल्गयूज मृग तारा समूह का 10 मिलियन वर्ष से कम पुराना तारा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके आकार के फैलने का सिलसिला लगभग 40 हजार साल पहले शुरू हो चुका था, जो अब विशाल आकार ले चुका है। इस तारे के बारे में वैज्ञानिकों को 1836 में पता चला था। तभी से इस तारे में वैज्ञानिक नजर रखे हुए हैं। यूरोपियन सदर्न आब्जर्वेटरी की वेरी लार्ज टेलीस्कोप इस पर नजर रखी जा रही है। इसके विस्फोट को लेकर निश्चित समय का आंकलन अभी नहीं किया जा सकता है।
बताया गया है कि किसी विशाल तारे में इस तरह का महाविस्फोट इससे पूर्व वर्ष 1006, 1054 व 1572 ईसवी सन मंे एवं आखिरी विस्फोट 1604 ईसवी सन में हुआ था। इसलिए सैकड़ों वर्षों में होने वाली इस दुर्लभ खगोलीय घटना को लेकर वैज्ञानिक काफी रोमांचित हैं। बेटेल्गयूज के विस्फोट से वैज्ञानिकों को पता चल सकेगा कि विस्फोट से पूर्व तारे की स्थिति क्या होती है। जिससे इस तरह के तारों के अंत समय की स्थिति के साथ आगे के अध्ययन में आसानी हो जाएगी।

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-14 जनवरी 2019 को हुए विशाल गामा किरणों के विष्फोट का देश के 20 देशों के वैज्ञानिकों के साथ किया स्पेन और पुणे की दूरबीनों से सफल प्रेक्षण
नवीन समाचार, नैनीताल, 20 नवंबर 2019। एरीज यानी आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान के दो वैज्ञानिकों डा. शशिभूषण पांडे एवं डा. कुंतल मिश्रा का शोध पत्र एक बार पुनः दुनिया की शीर्ष विज्ञान पत्रिका ‘नेचर’ पत्रिका के नवंबर माह के अंक में प्रकाशित हुआ है। दोनों वैज्ञानिकों का यह शोध पत्र ब्रह्मांड के सबसे बड़े-गामा किरणों के विष्फोट से संबंधित है, जिसका उन्होंने भारत के आईआईएसटी त्रिवेंद्रम की डा. एल रेसमी व उनके साथियों के साथ स्पेन और पुणे की दूरबीनों से गत 14 जनवरी 2019 को सफल प्रेक्षण किया।
बुधवार अपराह्न स्थानीय एरीज में आयोजित पत्रकार वार्ता में निदेशक डा. वहाब उद्दीन एवं डा. शशि भूषण पांडे व डा. कुंतल मिश्रा ने पत्रकार वार्ता में यह जानकारी दी। बताया कि 14 जनवरी को 22 सेकेंड के लिए गामा किरणों का विस्फोट जीआरबी 190114सी हुआ था। दुनिया के 20 देशों के वैज्ञानिक भी इसका प्रेक्षण कर रहे थे। बताया कि जीआरबी विस्फोट ब्रह्मांड के सर्वाधिक बड़े व भयावह विस्फोट होते हैं। गामा किरणों सबसे शक्तिशाली तरंगे होती हैं जो कि किसी लोहे के 26 इंच मोटे से मोटे कोलम से भी पार हो जाती हैं। इनकी तरंगदैर्ध्य परमाधु के आकार से भी छोटी होती है। लिहाजा ये इतनी घातक होती हैं कि परमाणु को भी अपनी ताकत से खत्म कर सकती हैं। यदि इनका रुख कभी किसी कारण पृथ्वी की ओर हो जाए तो इससे होने वाले नुकसान की कल्पना भी नहीं की जा सकती। इसलिए वैज्ञानिक इनके अध्ययन में जुटे हुए हैं। हालांकि 14 जनवरी को रिकार्ड हुआ गामा किरणों का विस्फोट ब्रह्मांड में पृथ्वी से 4.5 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर हुआ था। इससे पूर्व भी डा. पांडे व डा. मिश्रा का इससे अपेक्षाकृत छोटा जीआरबी 160625बी के विस्फोट का शोध भी नेचर पत्रिका में प्रकाशित हो चुका है। उन्होंने बताया कि ऐसे विस्फोट ब्रह्मांड में हर रोज करीब एक होते रहते हैं।

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-धनतेरस की पिछली शाम वाशिंगटन से हुई है न्यूट्रॉन स्टार्स के टकराने से गुरुत्वाकर्षण तरंगें निकलने की पहली बार घोषणा, एरीज के वैज्ञानिकों की भूमिका भी रही है इस खोज में
-इस खोज में एरीज के वैज्ञानिक डा. शशि भूषण पांडे और डा. कुंतल मिश्रा भी रहे हैं शामिल
-इसी माह ब्लेक होल्स के आपस में टकराने से संबंधित एक अन्य खोज पर मिला है इस वर्ष का नोबल पुरस्कार
नैनीताल। महान वैज्ञानिक आंइस्टीन ने अपने जीवन काल में पृथ्वी से करीब 13 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर अंतरिक्ष में होने वाली एक ‘बड़ी दीपावली’ की ओर सैद्धांतिक तौर पर इशारा किया था। उन्होंने कहा था कि दो ‘न्यूट्रॉन स्टार्स’ के आपस में टकराने से गुरुत्वाकर्षण तरंगें निकलती हैं, जोकि ‘स्पेस टाइम’ यानी अंतरिक्ष के समय की गणना को प्रभावित करती हैं। पहली बार वैज्ञानिकों ने आइंस्टीन की इस मान्यता की उपकरणों की मदद से पुष्टि कर दी है। बीती 16 अक्टूबर यानी धनतेरस की पिछली शाम अमेरिका के वाशिंगटन डीसी से इसकी घोषणा की गयी। गर्व करने वाली बात है कि इस सफलता में भारत और नैनीताल के एरीज के वैज्ञानिकों की भी भूमिका रही है। एरीज के दो वैज्ञानिक डा. शशि भूषण पांडे और डा. कुंतल मिश्रा भी इस परियोजना के अंतर्गत एक खास तरह की गुरुत्वाकर्षण तरंगों की खोज में शामिल रहे हैं। खास बात यह भी है कि ऐसी ही एक अन्य खोज, जिसमें इसी तरह दो ‘ब्लेक होल्स’ के आपस में टकराने से गुरुत्वाकर्षण तरंगें निकलने की पुष्टि हुई है, पर इसी माह इस वर्ष यानी 2017 का विज्ञान का दुनिया का सबसे बड़ा नोबल पुरस्कार दिया गया है। आगे एरीज में स्थापित एशिया की सबसे बड़ी 3.6 मीटर व्यास की ‘देवस्थल ऑप्टिकल टेलीस्कोप’ यानी ‘डॉट’ में भी इस सफलता की मुख्य सूत्रधार उपकरण ‘लाइगो’ के लगने की संभावना है, जिसके बाद एरीज इस दिशा में और अधिक बेहतर परिणाम दे सकता है।
इस संबंध में मंगलवार को एरीज के निदेशक डा. अनिल कुमार पांडेय ने पत्रकार वार्ता कर इस उपलब्धि की जानकारी दी। बताया कि न्यूट्रॉन स्टार्स तारों के जीवन पूरा होने के बाद शेष बचे अत्यधिक घनत्व वाले करीब 20 किमी व्यास के पिंड होते हैं। ये इतने भारी होते हैं कि इनकी एक चम्मच भर सामग्री माउंट एवरेस्ट से अधिक भारी होती है। इनके टकराने के बारे में अध्ययन लेजर तकनीक आधारित ‘अमेरिकी लेजर इंटरफेरमीटर गुरुत्वाकर्षण तरंग वेधशाला’ यानी लाइगो डिटेक्टर कहे जाने वाले उपकरणों से ही संभव होता है। यह लाइगो डिटेक्टर भारत में पुणे स्थित जॉइंट मीटर वेभ रेडियो टेलीस्कोप और लद्दाख स्थित हिमालयन चंद्रा टेलीस्कोप में लगे हैं। इनकी मदद से ही एरीज के दोनों वैज्ञानिकों ने इस खोज को करने में अपना योगदान दिया है। इनके अवलोकन में वैज्ञानिक सूर्य के द्रव्यमान के 1.1 से 1.6 गुना तक भारी इन खगोलीय पिंडों को 100 सेकेंड तक न्यूट्रॉन स्टार्स के रूप में चिन्हित कर सके। इनके टकराने से गामा किरणों का फ्लैश यानी एक तीव्र प्रकाश उत्पन्न हुआ जो पृथ्वी की कक्षाओं के उपग्रहों के द्वारा गुरुत्वाकर्षण तरंगों के आगमन के सापेक्ष दो सेकेंड तक देखा गया। यह इस बात का पहला निर्णायक प्रमाण है कि अक्सर उपग्रहों से नजर आने वाला अल्प अवधि का गामा विकीरण विस्फोट वास्तव में न्यूट्रॉन स्टार्स के टकराने से उत्पन्न होता है। इसका अनुमान एक शताब्दी पूर्व आइंस्टीन से लगाया था। इससे इस बात के संकेत भी मिले हैं कि गामा विकीरण के शक्तिशाली विस्फोटों से प्राप्त विलयनों में लोहे से ज्यादा घनत्व वाले सोना और सीसा जैसे तत्वों की 50 फीसद से अधिक मात्रा होती है। लिहाजा इस खोज से एरीज के वैज्ञानिकों में हर्ष की लहर है, और इसे मील का पत्थर और बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

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जर्मनी में कल की रात चांद ने यूं दिखाया रंग
जर्मनी में कल की रात चांद ने यूं दिखाया रंग

नवीन समाचार, नैनीताल, 19 फरवरी 2019। मंगलवार 19 फरवरी को भारतीय परंपरा के अनुसार माघ पूर्णिमा की रात आसमान में चांद कुछ खास स्वरूप में नजर आया। स्थानीय एरीज के खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार आज का चांद आम दिनों के मुकाबले 14 फीसद बड़ा और 30 फीसद अधिक चमकीला नजर आया। वैज्ञानिकों के मुताबिक पूर्णिमा के दिन चांद के के अपनी कक्षा में पृथ्वी का चक्कर लगाते हुए पृथ्वी के अपेक्षाकृत सबसे करीब आ जाने के कारण इसका आकार और रोशनी आम पूर्णिमा के चांद के मुकाबले काफी अधिक हो जाती है और इसे वैज्ञानिक भाषा में ‘सुपर स्नो मून’ कहा जा रहा है। सरोवरनगरी में बादलों की लुका-छिपी के बीच इसे खुली आंखों से देखा गया। खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए यह खास मौका रहा। बताया गया कि आगे ऐसा नजारा 2555 दिनों यानी करीब सात साल बाद 2026 में दिखाई देगा।
वैज्ञानिकों ने नासा के हवाले से बताया कि रात्रि 9 बजकर 23 मिनट पर चांद अपने सबसे बड़े व चमकीले बिहंगम स्वरूप में नजर आया, जब सूर्य चांद के ठीक 180 डिग्री यानी उल्टी दिशा में रहा होगा। बताया गया है कि फरवरी के माह में ऐसे बड़े व चमकीले दिखने वाले चांद को कई संस्कृतियों में सुपरमून तो दुनिया के कुछ देशों में इस खगोलीय घटना को स्ट्रॉम मून, हंगर मून व बोन मून भी कहा जाता है। इस दौरान समुद्री क्षेत्रों में आने वाले कुछ दिनों में ज्वार की स्थिति आने और ज्यादा ऊंची लहरें उठने की भी आशंका जताई जा रही है।

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वाशिंगटन। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का मार्स इनसाइट लैंडर यान सफलतापूर्वक मंगल की सतह पर उतारा गया। भारतीय समयानुसार सोमवार-मंगलवार की रात करीब 1:24 बजे इसे मंगल पर लैंड कराया गया। इनसाइट लैंडर यान को मंगल की रहस्यमयी दुनिया के बारे में जानकारी के लिए बनाया गया।वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि यह मंगल ग्रह के निर्माण की प्रक्रिया को समझने में मददगार होगा। इससे पृथ्वी से जुड़े नए तथ्य पता लगने की उम्मीद भी जताई जा रही है।

inside lander

जानकारी के मुताबिक, इनसाइट के लिए मंगल पर लैंडिंग में लगने वाला छह से सात मिनट का समय बेहद महत्वपूर्ण रहा। इस दौरान इसका पीछा कर रहे दोनों सैटेलाइट्स के जरिए दुनियाभर के वैज्ञानिकों की नजर इनसाइट लैंडर पर रहीं। इन दोनों सैटेलाइट्स का नाम डिज्नी के किरदानों पर रखा गया है- ‘वॉल ई’ और ‘ईव’। दोनों सैटेलाइट्स ने आठ मिनट में इनसाइट के मंगल पर उतरने की जानकारी धरती तक पहुंचा दी। नासा ने इस पूरे मिशन का लाइव कवरेज किया। इनसाइट से पहले 2012 में नासा के क्यूरियोसिटी यान ने मंगल पर लैंडिंग की थी।

मार्स इनसाइट लैंडर यान कैसे काम करेगा 
नासा का यह यान सिस्मोमीटर की मदद से मंगल की आंतरिक परिस्थितियों का अध्ययन करेगा। इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि मंगल ग्रह पृथ्वी से इतना अलग क्यों है।

इनसाइट लैंडर की खासियत

  • इनसाइट का पूरा नाम ‘इंटीरियर एक्सप्लोरेशन यूजिंग सिस्मिक इन्वेस्टिगेशंस’
  • मार्स इनसाइट लैंडर का वजन 358 किलो
  • सौर ऊर्जा और बैटरी से चलने वाला यान
  • 26 महीने तक काम करने के लिए डिजाइन किया गया
  • कुल 7000 करोड़ का मिशन
  • इस मिशन में यूएस, जर्मनी, फ्रांस और यूरोप समेत 10 से ज्यादा देशों के वैज्ञानिक शामिल
  • इसका मुख्य उपकरण सिस्मोमीटर (भूकंपमापी) है, जिसे फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी ने बनाया है। लैंडिंग के बाद ‘रोबोटिक आर्म’ सतह पर सेस्मोमीटर लगाएगा।
  • दूसरा मुख्य टूल ‘सेल्फ हैमरिंग’ है, जो ग्रह की सतह में ऊष्मा के प्रवाह को दर्ज करेगा।
  • इनसाइट की मंगल के वातावरण में प्रवेश के दौरान अनुमानित गति 12 हजार 300 मील प्रति घंटा रही।
  • इनसाइट प्रोजेक्ट के प्रमुख वैज्ञानिक ब्रूस बैनर्ट का कहना है कि यह एक टाइम मशीन है, जो यह पता लगाएगी कि 4.5 अरब साल पहले मंगल, धरती और चंद्रमा जैसे पथरीले ग्रह कैसे बने।

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-सूर्य पर धरती की ओर उभरा 8 लाख किमी चौड़ा ‘कोरोनल होल’ से खतरे की आशंका
-एरीज के सौर वैज्ञानिक के अनुसार सूर्य पर फिलहाल कोई सौर ज्वालाएं नहीं हैं
नवीन जोशी, नैनीताल। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने सूर्य के धरती की ओर की सतह पर बुधवार को आठ लाख किमी चौड़ा ‘कोरोनल होल’ यानी एक तरह का गड्ढा उभरने का दावा किया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इससे 2 विशाल जी-1 श्रेणी की सौर ज्वालाएं रिकॉर्ड की गयी हैं। नासा ने आशंका जताई है कि इन विशाल सौर ज्वालाओं की वजह से उठा ‘सौर तूफान’ धरती के चुंबकीय क्षेत्र से टकरा सकता है। इसके नतीजे काफी बुरे हो सकते हैं। इसके धरती के वायुमंडल से टकराने की वजह से उपग्रह अव्यवस्थित हो सकते हैं। इसकी वजह से व्यवसायिक उड़ानें प्रभावित हो सकती हैं, और जीपीएस सिस्टम भी अव्यवस्थित हो सकता है। यह भी आशंका जताई जा रही है कि इसकी वजह से दुनिया के अनेक हिस्सों में बिजली भी गुल हो सकती है।
अलबत्ता, एरीज के वरिष्ठ सौर वैज्ञानिक डा. वहाबउद्दीन का ‘कोरोनल होल’ के उभरने की बात को स्वीकार करते हुए इससे इतर कहना है कि इन दिनों सूर्य अपने 11 वर्ष के सौर सक्रियता चक्र में शांत स्थिति में है, और सौर सक्रियता अपने न्यूनतम स्तर पर है। उनका कहना है कि कोरोनल होल की वजह से काफी सौर हवाएं आ सकती हैं। हो सकता है कि इसकी तीव्रता अधिक हो, किंतु सूर्य पर काफी समय से कोई बड़ी सौर ज्वाला और कोई सौर धब्बा नजर नहीं दिखी है।

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अखबारों की पीडीएफ कॉपी बनाना व सोशल मीडिया पर फैलाना अवैध, हो सकती है कार्रवाई : आईएनएस

नवीन समाचार, नई दिल्ली, 2 अप्रैल 2020। लॉकडाउन के दौर में समाचार पत्र लोगों के घरों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। समाचार पत्रों के कोरोना संक्रमण पर भी पाठकों में संशयपूर्ण स्थिति बनी है। ऐसे में अनेक समाचार पत्रों ने पहले स्वयं ही अपने ह्वाट्सएप वर्जन-पीडीएफ फॉर्मेट में जारी किये और अपने संवाददाताओं एवं … Read more

कब खत्म होगा कोरोना, ‘लाइफ साइकिल कर्व्स’ से किया जा रहा है दावा

नवीन समाचार, नैनीताल, 27 अप्रैल 2020। पिछले एक माह से भी अधिक समय से लॉक डाउन में घरों पर सिमटे देश-विश्व वासियों को एक ही यक्ष प्रश्न कुरेद रहा है कि कोरोना की यह महामारी कब खत्म होगी। ऐसे में एक वेबसाइट सामने आई है जो ‘लाइफ साइकिल कर्व्स’ के आधार पर शिक्षा एवं शोध … Read more

नैनीताल के हरदा बाबा-अमेरिका के बाबा हरिदास

डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 21 अप्रैल 2023। (Harda Baba of Nainital – Baba Haridas of America) सरोवरनगरी नैनीताल का साधु-संतों से सदियों से, वस्तुतः अपनी स्थापना से ही अटूट रिस्ता रहा है। इस नगर का पौराणिक नाम ‘त्रिऋषि सरोवर’ ही इसलिये है, क्योंकि इसकी स्थापना सप्तऋषियों में गिने जाने वाले तीन ऋषियों … Read more

‘लॉक डाउन’ से नैनी लेक हुई ‘अप’, सुधरी पारिस्थितिकी

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-15 वर्षों के सर्वाधिक स्तर पर पहुंचा नैनी झील का जल स्तर, पारदर्शिता भी बढ़ी

नवीन समाचार, नैनीताल, 20 अप्रैल 2020। कोरोना की वैश्विक महामारी के दृष्टिगत देश भर में लागू लॉक डाउन मानो प्रकृति का मानव के साथ स्वयं को भी उसके मूल स्वभाव में लौटाने की कोशिश हो। इन दिनों जहां मानव ग्लोबलाइजेशन के साथ बेतहाशा बढ़ी आवश्यकताओं के बिना बेहद सीमित संसाधनों में जीने की अपनी पुरानी आदतों में लौट रहा है, वहीं प्रकृति भी मानो मानवीय हस्तक्षेप घटने से अपना आत्म शुद्धि कर रही है। प्रकृति का स्वर्ग कही जाने वाली सरोवरनगरी नैनीताल की विश्व प्रसिद्ध नैनी झील भी इसकी बानगी है।

झील नियंत्रण के प्राप्त जानकारी के अनुसार नैनी झील का जल स्तर अंग्रेजों द्वारा तय पैमाने पर सोमवार को 6 फिट पांच इंच रिकार्ड किया गया, जबकि इससे पूर्व केवल वर्ष 2005 में आज के दिन झील का जल स्तर 6 फिट 6 इंच यानी अब से बेहतर था। यानी नैनी झील जल स्तर के मामले में पिछले 15 वर्षों के सर्वश्रेष्ठ स्तर पर है। यह आंकड़ा भी उल्लेखनीय है कि लॉक डाउन लागू होने के लिए 22 मार्च को झील के जल स्तर में मात्र 7 इंच की कमी आई है। यानी करीब तीन दिन में झील का पानी एक इंच गिर रहा है, जबकि पिछले वर्षों में इन दिनों आधा इंच जल स्तर रोज गिरता था। उल्लेखनीय है कि नैनी झील के पानी का ही नगर में पेयजल सहित सभी तरह से उपयोग होता है। यानी नगर में जल के उपयोग एवं वाष्पीकरण तथा जल के क्षरण आदि कारणों में पिछले एक माह में कमी आयी है। वहीं एक दौर में नैनी झील के दो तिहाई हिस्से में ऑक्सीजन की मात्रा शून्य हो जाने यानी झील के दो तिहाई हिस्से में जल-जीवन मृत हो जाने के बाद वर्ष 2007 में एयरेशन के जरिये नैनी झील को ‘डायलिसिस’ की तरह कृत्रिम ऑक्सीजन चढ़ाने वाले नैनीताल जिला विकास प्राधिकरण के परियोजना प्रबंधन चंद्रमौलि साह ने बताया कि लॉक डाउन के दौरान प्राधिकरण नैनी झील की सफाई का कार्य नहीं कर पा रहा है। यहां तक कि नैनी झील के बीच में नौका ले जाकर झील की गुणवत्ता भी नहीं मापी जा रही है, फिर भी झील के किनारे किये गये ऐसे मापन के अनुसार झील में पारदर्शिता करीब पूर्व की करीब डेढ़ मीटर से बढ़कर 2.5 मीटर तक हो गयी है। वहीं झील के पानी में ऑक्सीजन की मात्रा 7.5 के स्तर पर बनी हुई है। वहीं नगर के पर्यावरणविद् डा. अजय रावत ने नैनी झील की पारदर्शिता एवं सफाई में स्वतः सुधार होने की बात कही है। उन्होंने दावा किया कि झील में पारदर्शिता पहले ऊपरी सतह से सात मीटर की गहराई तक स्थित एपीलिनियन तक ही थी, जबकि अब सात से नौ मीटर की गहराई पर स्थित थर्मोलाइन तक हो गयी है, और इस गहराई तक मछलियों का आवागमन भी हो गया है, जो कि पहले केवल एपीलिनियन में था। इसके अलावा भी नैनी झील के किनारे ठंडी सड़क क्षेत्र में इन दिनो मानव की गतिविधियां घट जाने की वजह से गुलदार एवं उसके शावकों के साथ ही घुरल, काकड़, कलीज फीजेंट सहित अनेक पशु-पक्षी भी नजर आ रहे हैं। इसे भी नैनी झील एवं नगर की पारिस्थितिकी में हुए परिवर्तन का परिणाम माना जा रहा है।

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यूएन से स्वीकृत हुई नैनी झील के पानी की सतत निगरानी के लिए परियोजना
-बैथीमेट्री विश्लेषण से पहली बार तैयार हुई नैनी झील की कॉन्टूर मैपिंग, झील की अधिकतम गहराई में 2.4 मीटर की गिरावट
-आगे एनआईएच से झील के आन्तरिक जल स्रोतों का सर्वे भी कराया जायेगा
Naini Lake Reportनवीन समाचार, नैनीताल, 10 फरवरी 2020। डीएम सविन बंसल प्रयासों से नैनी झील के दीर्घकालिक संरक्षण एवं आंतरिक प्रोफाईल किये जाने हेतु आईआरएस संस्थान इसरो देहरादून के वैज्ञानिकों के द्वारा नवम्बर माह के द्वितीय सप्ताह में इसकी अर्न्तजलीय संरचना, जैव विविधिता स्थिति एवं पारिस्थिक तंत्र, पेयजल शुद्धता के नवंबर माह के द्वितीय सप्ताह में किये गए विस्तृत विश्लेषण एवं परीक्षण का परिणाम काफी सुखद रहा है। डीएम बंसल ने सोमवार को जिला कार्याालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि ने नैनी झील की पहली बार तैयार कॉन्टूर मैपिंग के अनुसार झील की गहराई न्यूनतम 4 से सात मीटर, अधिकमत 24.6 मीटर तथा औसतन 9 मीटर प्राप्त हुई तथा पानी का टीडीएस 300 से 700 मिली ग्राम प्रति लीटर प्राप्त हुआ जो पानी की अच्छी गुणवत्ता को दर्शाता है। पानी का डीओ अधिकतम 7.5 मिलीग्राम प्रति लीटर व न्यूनतम 6-7 मिली ग्राम प्रतिलीटर मिला। आगे इसरो के माध्यम से प्रतिवर्ष मानसून से पहले व मानसून के बाद वर्ष में दो बार झील के पानी का परीक्षण कराया जायेगा। उल्लेखनीय है कि नैनी झील की गहराई 27 मीटर बताई जाती रही है। इस आधार पर लगता है कि झील की गहराई 2.4 मीटर घट गई है, जोकि चिंताजनक स्थिति है। किंतु ध्यान रखना होगा कि पूर्व में झील की गहराई अन्य विधियों से मापी गई है। इस परीक्षण के बाद यूएन द्वारा नैनी झील के पानी की सतत् निगरानी हेतु परियोजना स्वीकृत कर दी गयी है।

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डीएम सविन बंसल

डीएम ने बताया कि नैनी झील में किये गए बैथीमेट्री विश्लेषण कार्य के अन्तर्गत जल की गहराई की मैपिंग-लेक बैड प्रोफाईलिंग, झील का विस्तृत जल गुणवत्ता विश्लेषण, पीएच लेवल, डीओ, टीडीएस, क्लोरीन, टर्बिडिटी, सेलेनिटी आदि परीक्षण किये गये। उन्होंने बताया कि इन परीक्षणों में इसरो वैज्ञानिकों की टीम द्वारा पहली बार नैनी झील की 78 हजार बिंदुओं की गहराई मापते हुए कॉन्टूर लेक प्रोफाईल तैयार कर रिपोर्ट दी है, और झील के पानी की गुणवत्ता के आकड़ों को पहली बार जीआईएस प्रोफाईल पर प्रदर्शित करते हुए झील के विभिन्न स्थानों पर पानी की गुणवत्ता का मानचित्रीकरण किया गया है। इसरो के वैज्ञानिकों द्वारा सर्वे के उपरान्त डाटा उपलब्ध कराया गया, जिसे जिला प्रशासन के जीआईएस सेल द्वारा परिशोधन करके महत्वपूर्ण परिणाम ज्ञात किये गये।

यह होगा यूएन की स्वीकृत परियोजना में

नैनीताल। डीएम श्री बंसल ने बताया कि बैथीमेट्री स्टडी परिणामों को यूएनडीपी को उनके द्वारा प्रस्ताव बनाकर भेजा गया। फलस्वरूप यूएन द्वारा झील के पानी की सतत् निगरानी हेतु परियोजना स्वीकृत कर दी गयी है। जिसका अतिशीघ्र क्रियान्वयन किया जायेगा। उन्होंने कहा कि किसी झील का साइंटिफिक एवं प्रामाणिक डाटा उपलब्ध कराये जाने पर यूएन द्वारा भारत में पहली बार किसी झील की स्टडी प्रोजेक्ट लिया गया है। यूएन द्वारा वित्तीय एवं तकनीकी कार्य निःशुल्क किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट लगभग 55 लाख रूपये का होगा, जिसका शीघ्र एमओयू भी किया जायेगा। यूएन द्वारा झील के दोनो छोर (तल्लीताल मल्लीताल) पर जहां पेयजल हेतु पम्प लगे हैं, पर पानी की गुणवत्ता की माप हेतु सेंसर लगाये जायेंगे साथ ही जनता को झील के पानी की गुणवत्ता की जानकारी देने हेतु तल्लीताल गॉधी मूर्ति के पास पानी की गुणवत्ता प्रदर्शित करने के लिए मॉनीटर-एलईडी लगाया जायेगा। जिलाधिकारी श्री बंसल ने बताया कि इसके बाद एनआईएच से झील के आन्तरिक जल स्रोतों का सर्वे भी कराया जायेगा।

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-360 डिग्री पर घूमने वाले 4 पीटीजेड तथा 9 स्थिर कैमरों ने कार्य करना किया प्रारंभ
नवीन समाचार, नैनीताल, 27 दिसंबर 2019। सरोवरनगरी में अब रात्रि में भी नालों में गंदगी डालने वालों व नियम विरुद्ध क्रियाकलापों को अंजाम देने वाले अब प्रशासन की नजरों में होंगे। सरोवर नगरी में 13 नाइट विजन मोड वाले यानी रात्रि में भी साफ देखने वाले सीसीटीवी कैमरे चलने शुरू हो गए हैं। इनमें से चार कैमरे पीटीजेड यानी यानी‘पैन टिल्ट जूम’ प्रकार के हैं जो कि 360 डिग्री पर घूम सकते हैं और इनसे प्राप्त चित्रों को किसी छोटे स्थान पर जूम भी किया जा सकता है। यह इतने ताकतवर हैं कि तल्लीताल में लगे पीटीजेड कैमरे से नैना पीक पर मौजूद सैलानियों के क्रियाकलापों को साफ देखा जा सकता है। पीडीजेड कैमरे तल्लीताल में गांधी प्रतिमा के पास, मल्लीताल गुरुद्वारा परिसर, बीडी पांडे अस्पताल के पास और चीना बाबा मंदिर के पास ऐसे स्थानों पर लगाए गए हैं, कि इनसे पूरे शहर में नजर रखी जा सकती है। जबकि नौ अन्य कैमरे बोट हाउस क्लब मल्लीताल, तल्लीताल रिक्शा स्टैंड के पीछे नाला नंबर एक, सात नंबर से आने वाले नाला नंबर 20, बीडी पांडे अस्पताल के पास, चीना बाबा के पास स्थित नाला नंबर 23 में लगाए गए हैं। इन कैमरों के वीडियो फुटेज पर आपदा कंट्रोल रूम एवं कोतवाली मल्लीताल में बड़ी स्क्रीनों से नजर रखी जा रही है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 10 नवंबर 2019। डीएम सविन बंसल के विशेष प्रयासों से इसरो के वैज्ञानिकों का एक दल बीते शनिवार से बैथीमेट्री सर्वे के तहत सोनार पद्धति से नैनी झील का तकनीकी अध्ययन कर रहा है। इस अध्ययन के तहत वैज्ञानिकों के द्वारा अत्याधुनिक यंत्रों के माध्यम से विभिन्न स्थानों पर नैनी झील की गहराई नापी जा रही है। साथ ही झील की तलहटी में पड़े मलबे व अन्य पदार्थों का भी अध्ययन किया जा रहा है। इस अध्ययन में नैनी झील की चिंताजनक तस्वीर भी दिखाई दे रही है।

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वैज्ञानिकों को अध्ययन में नैनी झील के कई हिस्सों में काफी गंदगी एवं नैनी झील की औसत गहराई पर चिंताजनक तस्वीर दिखाई दी है। डीएम बंसल ने वैज्ञानिकों के हवाले से बताया कि पाषाण देवी मंदिर के समीप से मध्य तक क्षेत्रफल में झील की गहराई सर्वाधिक है। वहीं अभी तक झील की विधिवत तकीनीकी मैपिंग न होने के कारण अभी यह जानकारी नहीं है कि झील में कितना मलवा जमा है। लेकिन इस अध्ययन के बाद यह जानकारी रहेगी किए झील में कितना मलवा समा रहा है। उसी के हिसाब से तकनीकी कार्यवाही भी की जायेगी।

नैनी झील के संरक्षण के लिए बनेगी विशेष कार्य योजना
नैनीताल। डीएम सविन बंसल ने बताया कि नैनी झील को रिचार्ज करने वाले नालों की सफाई के साथ ही जाली लगाने का काम किया जा रहा है। साथ ही सूखाताल झील के पानी से बरसात में नैनी झील रिचार्ज करने के लिए विशेष कार्य योजना बनाई गई है। आगे सूखाताल में गड्ढे बनाए जायेंगे ताकि बरसात का पानी जमा हो और नैनी झील रिचार्ज होती रहे। इसके साथ ही सूखाताल व उसके आसपास के क्षेत्रों में वृक्षारोपण भी किया जाएगा ताकि वृक्षों के माध्यम से भी वर्षा जल सूखाताल में संकलित हो सके।

डीएम ने स्वयं देखीं वैज्ञानिकों की गतिविधियां
डीएम श्री बंसल ने रविवार को वैज्ञानिकों के साथ नैनी झील में भ्रमण कर वैज्ञानिकों द्वारा किए जा रहे तकनीकी कार्यों का मौका मुआयना किया और उनसे बात भी की। श्री बंसल ने बताया कि वैज्ञानिकों का विशेष दल पहली बार नैनी झील का इस तरह का अध्ययन कर रहा है। खास बात यह भी है कि इस महत्वपूर्ण सर्वे कार्य के लिए इसरो द्वारा किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जा रहा है। अध्ययन के तहत वैज्ञानिकों ने सोनार सिस्टम के माध्यम से नैनी झील की गहराई का जीपीएस के जरिये मानचित्रण किया, साथ ही वैज्ञानिकों के द्वारा झील में मौजूद ठोस अपशिष्ट, पीएच मान आदि के साथ ही झील के पानी की गुणवत्ता, अवसादन तथा सूचकांक का भी अध्ययन वैज्ञानिकों द्वारा किया जा रहा है। श्री बंसल ने बताया कि इसरो के वैज्ञानिक अध्ययन के उपरांत प्रशासन को झील के संबंध में रिपोर्ट आख्या प्रस्तुत करेंगे जिसे शासन को भेजा जाएगा तथा झील के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु धनरशि अवमुक्त कराने के लिए अनुश्रवण भी किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान इसरो के वरिष्ठ वैज्ञानिक वैभव गर्ग, वैज्ञानिक पंकज, इंजीनियर नमन, अभिषेक, ईशान, एसडीएम विनोद कुमार, सीओ विजय थापा आदि मौजूद रहे।

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नैनी झील में सोनार तकनीकी पर कार्य करने वाली जीपीएस युक्त ईको बोट के जरिये बैथीमैट्री विश्लेषण का अवलोकन करते डीएम सविन बंसल।

नवीन समाचार, नैनीताल, 9 नवंबर 2019। उत्तराखण्ड राज्य के 20वें स्थापना दिवस पर डीएम सविन बंसल की पहल पर राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान रुड़की के वैज्ञानिकों द्वारा नैनीझील का बैथीमैट्री विश्लेषण कार्य प्रारम्भ किया गया।
इस मौके पर श्री बंसल ने कहा कि नैनी झील झील के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए बैथीमेट्री कार्य आवश्यक है। इसके लिए विशेष प्रयास कर राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान रुड़की के वैज्ञानिकों के माध्यम से बैथीमैट्री विश्लेषण कार्य पहली बार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बैथीमैट्री विशलेषण के जरिये नैनी झील की प्रकृति तथा पानी की सतह के नीचे पानी की आंतरिक संरचनाओं मे हुए परिवर्तन, झील के दीर्घकालीन संरक्षण, झील की जल संग्रहण क्षमता विकास तथा ईको सिस्टम को बनाए रखने हेतु वैज्ञानिक द्वारा सघन अध्ययन किया जायेगा।
उन्होंने बताया कि देश-दुनिया में विख्यात नैनी झील की प्रकृति, पानी की सतह के नीचे की संरचनाओं, लैंड टोपोग्राफी, लेक फ्लोर एवं अन्य तकनीकी विषयों को ज्ञात करने के लिए बैथीमैट्री विशलेषण अति आवश्यक है। इसके लिए जलविज्ञान संस्थान रुड़की के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. वैभव गर्ग के नेतृत्व में 5 सदस्यीय तकनीकी टीम कार्य करेगी जो झील के विश्लेषण कार्य हेतु जीपीएस युक्त ईको बोट एवं सोनार तकनीकी पर कार्य करने वाले अन्य सहवर्ती उपकरणों के साथ कार्य करेगी। कहा कि विश्लेषण रिपोर्ट के आधार पर झील के संरक्षण हेतु सभी आवश्यक कदम उठाए जायेंगे। इस अवसर पर सीडीओ विनीत कुमार, एडीएम एसएस जंगपांगी, कैलाश सिंह टोलिया, एसडीएम विनोद कुमार, एआरटीओ विमल पांडे, ईओ एके वर्मा, जिला पर्यटन विकास अधिकारी अरविंद गौड़ आदि अधिकारी उपस्थित रहे।

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-ब्रिटिशकालीन रेगुलेशन गेटों की जगह अत्याधुनिक स्कॉडा तकनीक से नये गेट व जल स्तर प्रदर्शित करने का प्रबंध लगेगा
-तल्लीताल-मल्लीताल सहित चार नालों में कूड़ा-कचरा डालने वालों पर नजर रखने के लिए लगेंगे सीसीटीवी कैमरे

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नवीन समाचार, नैनीताल, 13 अक्टूबर 2019। सरोवर नगरी नैनीताल के सर्वप्रमुख आकर्षण नैनी झील के लिए अरसे बाद बड़े कार्य होने जा रहे हैं। झील में पानी के नियंत्रण के लिए अंग्रेजी दौर में बने डांठ यानी गेटों की जगह नये आधुनिक स्कॉडा तकनीक से संचालित गेटों के निर्माण हेतु डीएम सविन बंसल के प्रयासों से शासन ने 78.05 लाख की स्वीकृति प्रदान कर दी है। झील में पानी कम होने पर नये गेटों का निर्माण किया जाएगा। नये गेटों में झील का जल स्तर डिजिटल तरीके से प्रदर्शित करने का प्रबंध भी किया जाएगा। इसके साथ ही डीएम बंसल ने अपनी विवेकाधीन कोष से नैनी झील के चार प्रमुख नालों-नाला नंबर 1, 20, 21 व 23 तथा मल्लीताल नैना देवी मंदिर व बोट हाउस क्लब के समीप तथा तल्लीताल में महात्मा गांधी जी की मूर्ति के पास नालों व झील में कूड़ा डालने वालों पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी लगाने के लिए 15 लाख रुपए की धनराशि जारी कर दी है।

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डीएम सविन बंसल

डीएम श्री बंसल ने बताया कि नैनी झील के लिए जिला प्रशासन ने अभिनव डिजिटल पहल की कार्य योजना तैयार की है। नैनी झील के गेटांे पर मानसून काल में झील का स्तर बढने पर पानी की निकासी ब्रिटिशकालीन शासनकाल मे स्थापित मैकैनिकल व्हील के माध्यम से काफी कठिनाई से करनी पड़ती है। इसलिए जुलाई प्रथम सप्ताह में स्कॉडा सिस्टम से लेक ब्रिज के अपस्ट्रीम मे नये गेटों के निर्माण एवं पुराने गेटों के मरम्मत के लिए प्रस्ताव तैयार कर धनराशि उपलब्ध कराने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। इस पर शासन से 78.05 लाख की धनराशि अवमुक्त कर दी गई है। यह महत्वपूर्ण तकनीकी कार्य सिचाई विभाग की यांत्रिकी शाखा रुडकी द्वारा कराया जा रहा है। वहीं झील में पानी लाने वाले नालों से आने वाले अपशिष्ट को रोकने के लिए सीसी कैमरो के माध्यम से निगरानी हेतु उन्होंने अपने विवेकाधीन कोष से 15 लाख रुपए स्वीकृत कर दिये हैं। यह कैमरे दिन रात ऐसे लोगो की निगरानी करेगे जो नालों मे चोरी छुपे कूड़ा-कचरा आदि गंदगी डालते हैं। इन कैमरों के ऑनलाइन अनुश्रवण हेतु कलेक्ट्रेट स्थित जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र तथा सिचाई खंड नैनीताल मे नियंत्रण कक्ष स्थापित किये जायेगेे जो कि कैमरों की रिकार्डिग की मानिटरिंग करेंगे।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 29 अगस्त 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया व न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने प्रो. अजय रावत की जनहित याचिका को अंतिम रूप से निस्तारित करते हुए नैनीताल जिला प्रशासन को नैनीताल के सूखाताल, शेर का डांडा व सात नम्बर के जोन एक व दो में आने वाले क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने के तथा पर्यटकों व स्थानीय जनता की सुविधा के अनुसार यातायात नियंत्रित करने व इस कार्य में आईआईटी दिल्ली की सलाह लेने, अवैध रूप से भवन निर्माण करने वालों पर कानूनी कार्यवाही करने के निर्देश भी शासन-प्रशासन को दिए हैं। अलबत्ता, कोर्ट कमिश्नर अनिल जोशी को छूट दी है कि यदि कोर्ट के आदेशों की अवहेलना होती है तो वे कोर्ट को अवगत करा सकते हैं। साथ ही हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को आदेश दिया है कि इस आदेश की प्रति नैनीताल के डीएम को आवश्यक कार्यवाही के लिए भेजें।
कोर्ट ने प्रो. रावत की याचिका में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार की विशेषज्ञ कमेटी द्वारा नैनीताल को इको सेंसेटिव जोन घोषित करने की संस्तुति के अनुसार सरकार को निर्देश देने की अपील पर कहा कि ऐसा निर्देश वन व पर्यावरण मंत्रालय स्वयं दे सकता है। कमेटी ने यह संस्तुति मार्च मार्च 2003 में की थी। प्रो. रावत की दूसरी प्रार्थना जिसमें नैनीताल में बड़े स्तर पर हो रहे अवैध निर्माणों को रोकने व दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की गई थी, के संदर्भ में कोर्ट ने सचिव आपदा प्रबंधन उत्तराखंड को निर्देश दिया है कि वे दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करें।

सूखाताल व संवेदनशील पहाड़ियों में हो रहे अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने के साथ ही यातायात को लेकर भी दिये बड़े निर्देश
हाईकोर्ट ने कुमाऊं आयुक्त, डीएम नैनीताल व प्राधिकरण सचिव को सूखाताल व संवेदनशील पहाड़ियों में हो रहे अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने के निर्देश दिए हैं। लेकिन सुरक्षित स्थानों में आवासीय घर बनाने की अनुमति देने हेतु कोर्ट ने छूट भी दी है। वहीं यातायात नियंत्रण के लिए कोर्ट ने डीएम व एसएसपी को कई निर्देश दिए हैं, जिसके तहत नैनीताल में 25 सीट से अधिक क्षमता का वाहन लाने की अनुमति न देने, शहर से बाहर छोटे होटल खोलने व होम स्टे योजना लागू करने, शहर से बाहर सेटेलाइट पार्किंग बनाने, माल रोड में आपातकालीन सेवा को छोड़ अन्य भारी वाहनों का प्रवेश निषिद्ध करने, अपर माल रोड में सीजन में शायं 6 से 9 बजे तक व ऑफ सीजन में 6 से 8 बजे तक यातायात बंद रखने को कहा है। इसके साथ ही कोर्ट ने नैनीताल के लिए नए टैक्सी परमिट जारी करने पर रोक लगा रखी है परंतु यदि वाहन पुराना या खटारा हो जाता है तो आरटीओ चाहे तो उसे नया परमिट जारी कर सकता है। इसके अलावा नैनी झील में सीवर की गंदगी जाने से रोकने, घोड़ों की लीद को झील में न जाने देने, नालों में मलवा न फेंकने, पेड़ों के अवैध कटान को गम्भीर अपराध मानने के निर्देश भी दिए हैं।

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-सभी नालों के मुहानों पर 6 फिट ऊंची जालियां एवं नगर में चार एसटीपी बनेंगे
Kumaon Commissioner Rajiv Rautelaनवीन समाचार, नैनीताल, 27 अगस्त 2019। नैनी झील में आने वाले पानी की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए दो बड़े कदम उठाए जाएंगे। पहला, सभी नालों के नैनी झील में गिरने वाले सिरों पर लगभग 6 फीट ऊंची जालियां लगायी जायेंगी, ताकि कूड़ा और मलबा उनमें आकर फंस जाए और झील में न जाने पाए। दूसरे नगर की सीवर लाइनें उफनकर उनकी गंदगी झील में न जाए, इस हेतु नगर में चार एसटीपी यानी सीवर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किये जाएंगे। मंगलवार को नगर की अंग्रेजी दौर में गठित हिल साइड सेफ्टी कमेटी की बैठक लेते हुए मंडलायुक्त राजीव रौतेला ने एसटीपी हेतु शहर के चार स्थानों- कैपिटल सिनेमा, मेट्रोपोल होटल, स्टैट बैंक के पास, रेमजे होस्पीटल के समीप एसटीपी बनाये जाने हेतु भूमि चयन प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए।
इस दौरान आयुक्त श्री रौतेला ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा नैनी झील के साथ ही सूखाताल के संरक्षण एवं विकास के लिए पांच करोड़ रुपए की धनराशि स्वीकृत एवं इसमें से डेढ़ करोड़ रुपए अवमुक्त कर दिये गये है। उन्होंने अधिशासी अभियंता सिंचाई हरीश चंद्र भारती को कार्यों को प्रारंभ करने के निर्देश दिए। बैठक में कमेटी के सदस्यों के द्वारा नैनी झील की दीवारों की मरम्मत का सुझाव भी दिया गया, जिस पर अधिशासी अभियंता ने बताया कि 41 करोड़ का प्रस्ताव शासन में भेजा गया है। बैठक में पर्यावरणविद डा. अजय रावत, राजीव लोचन शाह, सुदर्शन शाह, अनूप शाह, जीएल शाह, नीरज जोशी व कमल जगाती आदि ने भी महत्वपूर्ण सुझाव दिये। बैैठक में डीएम सविन बंसल, वन संरक्षक तेजस्वनी पाटिल धकाते, डीएफओ टीआर बीजु लाल, लोनिवि के एसई डीएस नबियाल, सिंचाई विभाग के पीएस पतियाल, पेयजल निगम के ईई जीएस तोमर व लोनिवि के डीएस बसनाल आदि मौजूद रहे। गौरतलब है कि नगर में एसटीपी निर्मित करने के लिए ग्रीन ट्रिब्यूनल से अल्टीमेटम मिला हुआ है। इसके बिना नगर के होटलों को बंद करने की नौबत आ सकती है। अलबत्ता, नैनी झील किनारे प्रस्तावित एसटीपी की गंदगी का कोई अंश नैनी झील में जाकर उसके पानी को दूषित न कर दे, यह देखना होगा।

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-भीमताल झील के बांध की सुरक्षा दीवारों में दरारें आने व पानी रिसने की की गई थी शिकायत

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1895 भीमताल

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p style=”text-align: justify;”>नवीन समाचार, नैनीताल, 19 अगस्त 2019। जनपद की भीमताल सरोवर की सुरक्षा दीवारों में पिछले कुछ वर्षों से आई दरारों पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने संज्ञान लिया है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस संबंध में की गयी शिकायत को उत्तराखंड के मुख्य सचिव को संदर्भित कर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है। इसके बाद प्रदेश के मुख्य सचिव ने सिचाई विभाग के सचिव से मामले में नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा है।
इस मामले में भीमताल के सामाजिक कार्यकर्ता पूरन ब्रजवासी ने गत 16 जून को प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था। ब्रजवासी का कहना था कि 1880 में भीमताल झील के पानी को बांधने के लिए बने बांध की दीवारें 139 वर्षों से झील को रोके हुए हैं, किंतु अब ये जवाब देने लगी हैं। इन दीवारों से पानी रिसने लगा है। पिछले वर्षों में यह मामला काफी प्रमुखता से उठा किंतु झील का स्वामित्व रखने वाले सिंचाई विभाग बांध की कमजोरी को नजर अंदाज कर देता है। इसलिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनकी दूसरी बार जीत की बधाई देते हुए भीमताल नगर व झील के अस्तित्व को देखते हुए झील के बांध की दीवारों का पुर्ननिर्माण करने की मांग की थी।

शिकायत के निदान की व्यवस्था में खोट

नैनीताल। सामान्यतया लोग उच्च से उच्च पदों तक अपनी शिकायत को पहुंचाते हुए यह विश्वास रखते हैं कि उनकी समस्याओं का निदान हो जाएगा। इसी विश्वास के साथ प्रदेश के मुख्यमंत्री, राज्यपाल व देश के प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति आदि से शिकायतें की जाती हैं। लेकिन देखने में आता है कि कितने ही उच्च पद तक शिकायत किये जाने के बाद उसकी जांच अन्ततः उन्ही निचले स्तर के अधिकारियों के स्तर से की जाती है, जो निचले स्तर पर की जाने वाली शिकायतों की जांच भी करते हैं, और कई बार ऊपर की गई शिकायतों के मामलों की जांच भी पूर्व में निचले स्तर पर की गयी शिकायतों पर कर चुके होते हैं। ऐसे में जांच रिपोर्ट वही आती है, जो पहले आई थी, और शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो पाती है। अब देखने वाली बात होगी कि पूर्व में भीमताल झील को कोई खतरा न बताने वाला सिचाई विभाग अब प्रधानमंत्री के स्तर पर की गयी शिकायत के बाद क्या रिपोर्ट देता है।

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p style=”text-align: justify;”>नवीन समाचार, नैनीताल, 30 जुलाई 2019। डीएम सविन बंसल के आदेशों की कड़ी में एसडीएम विनोद कुमार ने नगर के निकट की सरिताताल झील एवं इसके आस-पास फैली गंदगी की सफाई न किये जाने पर सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता के खिलाफ सीआरपीसी यानी भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 133 के तहत कार्रवाई की है। एसडीएम श्री कुमार ने बताया कि सरिताताल व इसके आसपास फैली गंदगी के बाबत तहसीलदार की जांच आख्या के आधार पर सिंचाई खंड नैनीताल के अधिशासी अभियंता विरुद्ध सीआरपीसी की धारा 133 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए आवश्यक कार्यवाही की गई है। अधिशासी अभियंता सिंचाई को आदेशित किया गया है कि वह सरिताताल एवं आस-पास की तत्काल सफाई सुनिश्चित करें एवं शपथ पत्र द्वारा अवगत करायें कि वहां पूर्ण रूप से सफाई कर ली गई है अथवा 5 अगस्त को प्रातः 11 बजे उनके-परगना मजिस्ट्रेट नैनीताल के न्यायालय में स्वयं उपस्थित होकर बतायें कि क्यों न उनके विरूद्ध सीआरपीसी की धारा 133 के तहत अंतिम कार्रवाई कर दी जाए। आगे यदि न्यायालय उनके द्वारा की गयी कार्रवाई व जवाब से संतुष्ट नहीं होता तो उनके विरुद्ध सीआरपीसी की धारा 188 के तहत दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।
उल्लेखनीय है कि गत 18 जुलाई को डीएम सविन बंसल ने स्वयं सरिताताल का निरीक्षण किया था, और सीआरपीसी की धारा 133 के तहत कार्रवाई करने की चेतावनी दी थी। इधर उन्होंने पुनः सोमवार की सुबह भी झील का निरीक्षण किया और पाया कि झील व उसके आस-पास अभी भी गंदगी फैली हुई है। यानी अधिकारियों ने डीएम के आदेश हवा में उड़ा दिये। इस पर डीएम ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए एसडीएम विनोद कुमार को 133 सीआरपीसी के अंतर्गत कार्यवाही करने के निर्देश दिए थे। इस पर एसडीएम ने तहसीलदार की जांच आख्या मंगाई, जिसमें बताया गया है कि ग्राम कुरपाखा स्थित सरिताताल में अत्यधिक मात्रा में कूड़ा-कचरा, काई, प्लास्टिक एवं मलवा आदि पड़ा है, तथा ताल के समीप स्थित शौचालय भी गंदगी से भरा पड़ा है। इससे झील के पानी पर निर्भर ग्राम कुरपाखा, मंगोली, गहलना, बजून एवं बेलुआखान वासियों के स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ने और महामारी फैलने की संभावना है।

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-नैनीताल के संरक्षण एवं विकास हेतु ‘मथन’ चिया द्वारा व्याख्यान आयोजित

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डा. पुष्किन फर्त्याल स्मृति व्याख्यान माला में वक्ताओं को सम्मानित करते डीएम सविन बंसल।

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p style=”text-align: justify;”>नवीन समाचार, नैनीताल, 29 जुलाई 2019। चिया यानी सेन्ट्रल हिमालयन इन्वायरमेन्ट एसोसियेशन नैनीताल के तत्वावधान में संस्था के पूर्व अधिशासी निदेशक स्वर्गीय डा. पुश्किन फर्त्याल की स्मृति में कुमाऊं विश्वविद्यालय के हरमिटेज सभागार में आयोजित व्याख्यान में स्थानीय विधायक संजीव आर्य ने वर्षा जल संरक्षण को आंदोलन के रूप में विकसित करने पर जोर दिया और नगर के शिक्षण संस्थानों, होटलों एवं अन्य बड़े संस्थानों से इसकी पहल करने का अपील की, ताकि नैनी झील पर निर्भरता कम की जा सके। साथ ही उन्होंने नगर में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के न होने के प्रति ध्यान आकर्षित किया। कहा कि सर्वोच्च न्यायालय व एनजीटी के आदेशों पर नगर में एसटीपी की स्थापना के लिए कुछ ही माह बचे हैं। अन्यथा नगर के होटलों व शिक्षण संस्थानों आदि के बंद होने की नौबत भी आ सकती है।
आयोजन में मूलतः प्रदेश के पर्वतीय शहरों की कैरीइंग कैपेसिटी यानी वहन क्षमता पर चर्चा की गयी। कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. केएस राणा ने कहा कि सभी समस्याओं की मूल समस्या अधिक जनसंख्या की है, और जनसंख्या को नियंत्रित किये जाने में सभी समस्याओं का समाधान निहित है। व्याख्यान के प्रथम सत्र में जीबीपीएनआईएचईएसडी के लिए वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. सुब्रत शर्मा व डा. रंजन जोशी ने पर्वतीय पर्यटन स्थल की वहन क्षमता पर उपस्थित लोगों परिचर्चा की। डीएम सविन बसंल ने कहा कि अतिक्रमण पर रोक लगाने के लिए नियमित कार्य किये जाने की जरूरत बताई। प्रो. अजय रावत ने नगर के संरक्षण के लिए पुरानी झीलों के संरक्षण के लिए बने वेटलेंड नोटिफिकेशन को लागू करने एवं नगर के विकास कार्यों में नगर की भूगर्भीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखे जाने की आवश्यकता जताई। प्रो. शेखर पाठक ने हिमालयी क्षेत्र एवं उत्तराखण्ड के परिप्रेक्ष्य में बताया कि प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों से सौ वर्ष पूर्व ही शुरू हो गया था। कहा कि पलायन रोके बिना सुनियोजित दिशा-नीति नही बनायी जा सकती है, जिससे वहन क्षमता को केन्द्रित करके पलायन की गति पर नियन्त्रण लग सकता है। चिया के अधिशासी निदेशक डा. पंकज तिवारी ने अतिथियों का स्वागत एवं अभिनन्दन किया तथा चिया द्वारा किये जा रहे कार्यो से अवगत कराया वहीं वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं चिया के सचिव डा. सुब्रत शर्मा ने कार्यक्रम के मुख्य बिन्दुओं पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में कुमाऊं विवि के यूजीसी-एचआरडीसी के निदेशक प्रो. बीएल साह, प्रो. ललित तिवारी, प्रो. राजीव उपाध्याय, प्रो. जीएल शाह, प्रो. डीएस कार्की, डा. सुचेतन शाह, डा. हरदयाल सिंह जलाल, चिया के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एके पंत, पूर्व सचिव प्रो. सीसी पंत, विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि, प्रधानाचार्य, नगर पालिका के सभासद एवं स्व. डा. फर्त्याल की पुत्री महिका फर्त्याल भी उपस्थित रही। आयोजन में दीपा उपाध्याय, प्रताप नगरकोटी, कुंदन बिष्ट, डा. प्रताप ढैला, डा. अमित मित्तल, नरेन्द्र बिष्ट, धीरज जोशी, कृष्ण कुमार टम्टा, विनीता वर्मा, अनिल कनवाल राम सिंह एवं नीमा रौतेला द्वारा सहयोग किया।

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p style=”text-align: justify;”>-रुद्रप्रयाग, तिलवाड़ा व मुनि की रेती नगर निकायों से हुई खुले कूड़ेदान हटाने की शुरुआत
-प्रदेश के शहरी विकास सचिव शैलेश बगौली ने बताया-आगे नैनीताल सहित प्रदेश के अन्य निकायों से भी खुले कूड़े दान हटाने की है योजना

Dust bin Free
रुद्रप्रयाग में कूड़ेदानों को हटाते नगर पालिका कर्मी।

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p style=”text-align: justify;”>नवीन जोशी, नैनीताल, 21 जुलाई 2019। शहर अपने कूड़े से अधिक अपने खुले कूड़ेदानों से अधिक गंदे होते हैं। पूरे शहर को साफ कर कूड़ेदान स्वयं शहर के सबसे गंदे बन जाते हैं। लेकिन अब यह स्थिति बदलने जा रही है। राज्य सरकार की योजना शहरों को खुले कूड़े दानों से मुक्त करने की है। प्रदेश के शहरी विकास सचिव शैलेश बगौली ने बताया कि योजना की शुरुआत हो गयी है। योजना के तहत प्रदेश के रुद्रप्रयाग जिला मुख्यालय सहित जनपद के अन्य निकाय अच्छा कार्य कर रहे हैं। आगे नैनीताल सहित प्रदेश के सभी नगर निकायों को कूड़ेदानों से मुक्त करने की है।
उन्होंने बताया कि शुक्रवार को रुद्रप्रयाग नगर पालिका से 10 एवं इसी जनपद की तिलवाड़ा नगर पंचायत के वार्ड संख्या 2, 3 एवं 4 से कूड़ेदान हटा लिये गये हैं। इसी तरह टिहरी जिले की मुनि की रेती नगर निकाय ने भी बेहतर कार्य किया है। इसके बाद केवल शहरों में चुनिंदा स्थानों पर अच्छे छोटे कूड़ेदान ही रखे जाएंगे, जिनमें घूमते हुए लोग छोटी गंदगी ही डाल पाएंगे।

घर से कूड़ा एकत्रीकरण एवं पृथक्करण से आएगी खुले कूड़ेदान मुक्त होने की शुरुआत

Shailesh Bagauli
प्रदेश के शहरी विकास सचिव शैलेश बगौली।

नैनीताल। शहरी विकास सचिव श्री बगौली ने बताया कि शहरों को खुले कूड़ेदानों से मुक्त कराने की शुरुआत घर-घर में कूड़ा एकत्र करने और गीले व सूखे कूड़े को एकत्र करने से होगी। लोग अपने कूड़े को अपने घर पर ही गीले व सूखे कूड़े में विभक्त करके रखेंगे, तथा नगर निकाय के कर्मचारी इस विभक्त कूड़े को अलग-अलग अपने साथ ले जाएंगे। इससे कूड़े को खुले कूड़ेदानों में डालने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। बताया कि रुद्रप्रयाग के डीएम ने इस दिशा में बेहतरीन कार्य करते हुए अपने अधिकारियों की वार्डों में लोगों को जागरूक करने के लिए ड्यूटी लगाई, जिससे यह सफलता मिली है। आगे उन्होंने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों से योजना के लिए इसी तरह का सहयोग देकर शहरों को खुले कूड़ेदान व गंदगी मुक्त करने में अपना योगदान देने के निर्देश भी दिये हैं।

नैनीताल में भी हुई घर से कूड़ा एकत्रीकरण की शुरुआत

नैनीताल। प्रदेश की दूसरी सबसे पुरानी नगर पालिका नैनीताल में पूर्व में श्री बगौली के डीएम रहते ही शुरू हुई ‘मिशन बटरफ्लाई’ योजना की सफलता एवं बाद में ‘एटुजेड’ कंपनी की विफलता के बाद एक बार पुनः घर से कूड़ा एकत्रीकरण व पृथक्करण योजना की शुरुआत हो गयी है। योजना के तहत इन दिनों शहर के विभिन्न वार्डों में गीले व सूखे कूड़े के लिए अलग-अलग छोटे कूड़ेदान बांटे जा रहे हैं। अलबत्ता अभी कूड़ा घर से ले जाने का कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है।

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p style=”text-align: justify;”>-डीएम ने नैनी झील का निरीक्षण करते हुए पर सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता तथा अधिशासी अभियंता को अनुशासनात्मक तथा विभागीय कार्यवाही की चेतावनी दी
-नैनी झील के जल स्तर को मापने व नियंत्रण के लिए स्वचालित प्रणाली लगाने के भी दिये आदेश
Lake nirikshan DMनवीन समाचार, नैनीताल, 12 जुलाई 2019। डीएम सविन बंसल ने शुक्रवार सुबह नैनी झील तथा नालों का निरीक्षण करते हुए नगर के मल्लीताल स्थित सबसे बड़े नाला नंबर 23 में गंदगी पाये जाने पर सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता तथा अधिशासी अभियंता को तीन दिन के भीतर नगर के सभी नालों की सफाई दुरुस्त करने के निर्देश दिये हैं। और ऐसा न करने पर अनुशासनात्मक तथा विभागीय कार्यवाही की चेतावनी दी है। कहा कि यदि ठेकेदार द्वारा सफाई व्यवस्था में हीलाहवाली की जा रही है तो तत्काल ठेका निरस्त कर हुए ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट करें। उन्होंने तल्लीताल में झील से पानी की निकासी एवं झील के स्तर की मॉनीटरिंग के लिए लेक लेवल मैनुअल गेज-पुली सिस्टम के स्थान पर ऑटो मॉनीटरिंग तथा नियंत्रण के लिए ऑटोमैटेड स्काडा सिस्टम स्थापित करने को कहा, ताकि झील के जल स्तर तथा गेट को स्वचालित तरीके से ऑपरेट किया जा सके।
इसके साथ ही उन्होंने बरसात के दौरान झील की प्रतिदिन सुबह व शाम दो बार नियमित सफाई करने, नैना देवी मंदिर के पास ठंडी सड़क क्षेत्र में झील की क्षतिग्रस्त दीवार की मरम्मत के लिए तत्काल आगणन बनाकर प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिये। उन्होंने नालों, झील एवं आस-पास के क्षेत्रों की सफाई व्यवस्था की निगरानी के लिए जिला विकास प्राधिकरण के सचिव हरबीर सिंह तथा एसडीएम विनोद कुमार को नोडल अधिकारी नामित किया। निरीक्षण के दौरान एडीएम एसएस जंगपांगी, हरबीर सिंह, विनोद कुमार, ईई सिचाई हरीश चंद्र सिंह, डीएस बसनाल सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

नये सिस्टम से खुलेगी नालों की सफाई की पोल

नैनीताल। डीएम सविन बंसल ने दोहराया कि नगर के नालों की वास्तविक निगरानी के लिए ‘वाईफाई एनेबल्ड ऑल वेदर हाई रिजुलेशन सीसीटीवी कैमरे’ स्थापित किए जा रहे हैं। इनसे सिंचाई विभाग तथा नगर पालिका द्वारा की जा रही सफाई व्यवस्था की वास्तविकता सामने आएगी, लापरवाही पाए जाने पर इन विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यह भी पढ़ें : नालों में कूड़ा डालने वालों पर नजर रखने के लिए ड्रोन कैमरे का हुआ सफल परीक्षण…

नवीन समाचार, नैनीताल, 7 जुलाई 2019। डीएम सविन बंसल की पहल पर नैनीताल नगर में नालों पर कूड़ा-मलवा डालने वालों पर आधुनिक तरीके से नजर रखने की कड़ी में रविवार को ड्रोन कैमरे का परीक्षण किया गया। बताया जा रहा है कि नगर के मल्लीताल स्थित मस्जिद तिराहा के पास वाले नगर के सबसे बड़े नाला नंबर 23 व बीडी पांडे जिला चिकित्सालय के पास के नाला नंबर 20-21 पर डीजेआई कंपनी की ओर से ड्रोन कैमरे की करीब 10 मिनट की सफल परीक्षण उड़ानें हुईं। बताया जा रहा है कि आगे इसी कंपनी के माध्यम से नगर के सभी नालों पर कूड़ा डालने वालों, अतिक्रमण करने वालों आदि पर इसी तरह ड्रोन कैमरों से नजर रखी जा सकती है।

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p style=”text-align: justify;”>-बलियानाला क्षेत्र में भूस्खलन पर नजर रखने को भी लगेंगे वाईफाई युक्त हाई रिजुलेशन ऑल वेदर सीसीटीवी कैमरे
नवीन समाचार, नैनीताल, 6 जुलाई 2019। नैनीताल की विश्व प्रसिद्ध नैनी झील के लिए सकारात्मक खबर है। नैनीताल नगर में नालों में कूड़ा, मलवा डालने वालों व अतिक्रमण करने वालों और नगर पालिका तथा सिंचाई विभाग द्वारा की जाने वाली नालों की सफाई व्यवस्था पर पैनी नजर बनाए रखने के लिए संवेदनशील स्थानों पर तीसरी ऑख के रूप में ‘वाईफाई युक्त हाई रिजुलेशन ऑल वेदर सीसीटीवी कैमरे’ लगाये जाने की कवायद शुरू कर दी गई हैं। डीएम सविन बंसल ने बताया कि इन कैमरों की प्रतिदिन मोनीटरिंग एवं पर्यवेक्षण करने के लिए जिला कन्ट्रोल रूम तथा एलडीए में कन्ट्रोल डिसप्ले लगाते हुए प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी। नालों में कूड़ा डालने वालों के चालान करते हुए आपदा अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत कड़ी कार्यवाही की जाएगी।
श्री बंसल ने नैनीताल झील को नगर की जीवर रेखा एवं इसमें गिरने वाले नालों को झील की धमनियां बताते हुए नालों में कूड़ा एवं मलवा डालने तथा अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि नैनीताल शहर में स्थित विभिन्न नालों के अलग-अलग स्थानों पर कूड़ा तथा भवन निर्माण सामाग्री तथा मलवा डाले जाने से वर्षा के दौरान नालियॉ अवरूद्ध होने से बहाव सड़क एवं पहाड़ियों से होते हुए परिसम्पत्तियों को नुकसान पहुंचता है, जिससे जान-माल के नुकसान की संभावना बनी रहती है। विगत वर्षो में नालों के बहाव अवरूद्ध होने के कारण आपदा जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई थी ,जिससे माल रोड पर भारी मलवा जमा होने से माल रोड धंस गई थी तथा जन-जीवन एवं यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ था तथा इसके पुर्नस्थापना में काफी समय एवं धन भी व्यय हुआ था। उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे नालों एवं झील के विभिन्न स्थानों पर सीसीटीवी लगाने हेतु ऐसे स्थान चुनें जहां से नालों की रियल टाईम मॉनीटरिंग एवं पर्यवेक्षण किया जा सके। उन्होंने बताया कि अतिसंवेदनशील बलियानाला के ‘स्लोप क्रोनिक डेवलपमेंट मोनीटरिंग’ एवं प्रतिकूल स्थिति पर पैनी नजर रखते हुए प्रतिकूल स्थिति में रेस्पोंस टाईम कम करने के लिए भी तीसरी ऑख के रूप में वाईफाई इनेबल्ड हाई रिजुलेशन ऑल वेदर सीसीटीवी कैमरे सहायक होंगे।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 19 जनवरी, 2019। सरोवरनगरी नैनीताल की वैश्विक पहचान बनाने वाली नैनी झील में इसके जलागम क्षेत्र की पानी की बूंद-बूंद को लाने और इसमें आई हर बूंद को बचाकर इसे संरक्षित करने के लिए उत्तराखंड हाईकोर्ट ने नैनीताल नगर में छतों से गिरने वाले बारिश के पानी को सीवर लाइन में डालने के मामले को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने जल संस्थान को नगर में चिह्नित ऐसे 215 मामलों में दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति नारायण सिंह धानिक की संयुक्त खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। नैनीताल नगर के सामाजिक कार्यकर्ता कमल त्रिपाठी ने इस मामले में जनहित याचिका दायर की है। सुनवाई के दौरान याची के अधिवक्ता विपुल शर्मा ने कोर्ट में बताया कि नगर के कई भवनों के छतों का पानी सीवर से जोड़ कर रखा गया है। इसके चलते नगर में होने वाली बारिश का साफ पानी नैनी झील में जाने के बजाय नगर से बाहर चला जाता है। वहीं सीवर लाइन पर इसके दबाव के कारण माल रोड सहित कई अन्य स्थानों पर सीवर लाइन ओवर फ्लो होकर गंदा पानी नैनीझील में जाता है,जो सही नहीं है। सुनवाई के दौरान जल संस्थान की ओर से कोर्ट में बताया गया कि ऐसे भवनों का सर्वे किया गया है। जिसमें 215 मामले सामने आए हैं। इनमें निजी और सरकारी भवन शामिल हैं। इस पर कोर्ट ने सख्त नारजगी व्यक्त करते हुए जल संस्थान से सभी भवनों के सीवर से संयोजन हटाने के कहा और इसके लिए दो सप्ताह का समय दिया है।

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-बदले जाएंगे अंग्रेजों के जमाने में बने झील के डांट (गेट), तल्लीताल में लगेगा बड़ा इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले बोर्ड, वर्षा जल संग्रहण का पूरा प्रबंध भी होगा

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p style=”text-align: justify;”>नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 19 जनवरी, 2019। सरोवरनगरी नैनीताल की वैश्विक पहचान बनाने वाली नैनी झील में इसके जलागम क्षेत्र की पानी की बूंद-बूंद को लाने और इसमें आई हर बूंद को बचाकर इसे संरक्षित करने के लिए सिचाई विभाग ने करीब 17 करोड़ रुपये की लागत से नैनी झील को बचाने का मास्टर प्लान तैयार किया गया है। इस बजट से नगर के बरसाती पानी को झील में लाने, झील की सफाई करने, नालों के मुहानों की मरम्मत, झील के किनारों की मरम्मत एवं झील में पानी घोलने की पहले से चल रही एरिएशन की प्रक्रिया को और बेहतर किया जाएगा। इस बाबत विस्तृत प्रस्ताव पर शुक्रवार को देहरादून शासन की वित्त व्यय समिति की बैठक भी हो चुकी है।
सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता एमसी पांडेय ने इस बाबत विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि योजना के अंतर्गत नैनीताल नगर के नैनी झील के जगागम क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पूरे क्षेत्र का वर्षा जल संग्रहण का प्रबंधन किया जाएगा। इसके तहत नैनी झील में पानी लाने वाले सभी 64 नालों का रिस्टोरेशन, इस हेतु शहर के घरों की छतों में गिरने वाले बरसाती पानी को नालों से जोड़ने, ताकि उनका पानी झील में पहुंचे उनके झील में पहुंचने वाले मुहानों का सुधार, सूखाताल में बरसात के पानी को रोक कर इसे झील के रूप में स्थापित करने के कार्य भी किये जाएंगे। वहीं शुक्रवार की देहरादून में हुई बैठक से लौटे अधीक्षण अभियंता नरेंद्र सिंह पतियाल ने कहा कि इसी माह 23 जनवरी को होने वाली अगली बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने की पूरी उम्मीद है।

झील को जल स्तर मांपने और प्रदशित करने का सिस्टम भी बदलेगा

नैनीताल। योजना के तहत नैनी झील के जल स्तर को मापने और इसे प्रदर्शित करने की मौजूदा व्यवस्था भी पूरे एक करोड़ रुपये खर्च कर बदली जाएगी। उल्लेखनीय है कि अब तक चल रही अंग्रेजी दौर की व्यवस्था के तहत संभवतया उस दौर के सबसे निचले स्तर को शून्य स्तर माना जाता है, जबकि नैनी झील की गहराई करीब 27 मीटर मानी जाती है। ऐसे में झील का जल स्तर शून्य बताये जाने के दौरान भी झील में 20 मीटर से अधिक जल होता है और इसे शून्य कहे जाने से भ्रमपूर्ण स्थिति भी बनती है। वहीं जल स्तर को बताने के लिए भी अंग्रेजी दौर की ही अंकों को लटकाने की व्यवस्था है। इनमें से अधिकांश अंक हवा में उड़कर गायब भी हो चुके हैं। वहीं सिचाई विभाग के मुख्य अभियंता एमसी पांडे ने बताया कि नयी व्यवस्था के तहत झील के आधार से जल स्तर की माप की जाएगी और इसे तल्लीताल डांठ, फांसी गधेरा अथवा किसी अन्य ऐसे सुविधाजनक स्थान पर लगाया जाएगा जहां से नगर के आम लोग एवं सैलानी झील के स्तर, पानी की गुणवत्ता आदि के बारे में जान सकें, एक विशाल इलेक्ट्रॉनिक बोर्ड के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। इस बोर्ड में नगर के तापमान, बारिश, आर्द्रता आदि के बारे में जानकारियां प्रदर्शित की जाएंगी।

सात करोड़ में बनेता भरा सूखाताल

नैनीताल। योजना के तहत सात करोड़ रुपये में सूखाताल को झील के रूप में विकसित एवं पुर्नस्थापित किया जाएगा। इसके लिये क्षेत्र के सूखाताल के बेड की सफाई कर इसकी गहराई इसके मूल स्तर तक बढ़ाई जाएगी एवं इसके जलागम क्षेत्र के नालों को सूखाताल से जोड़ा जाएगा, ताकि बरसात में यह झील भर जाए, और आगे पूर्व की तरह लंबे समय तक नैनी झील को रिसाव के जरिये पानी पहुचाकर रिचार्ज करते रहें।

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p style=”text-align: justify;”>Plasticनैनीताल, 23 सितंबर 2018। ईश्वर प्रदत्त प्रकृति से अधिक शक्तिमान कुछ भी नहीं। मनुष्य एक-दूसरे को, शासन-प्रशासन भले जनता और न्यायालय को बेवकूफ बना लें, किंतु ईश्वर और उसके अंग प्रकृति की आंखों में धूल नहीं झोंक सकते। रविवार को भी कुछ ऐसा ही हुआ। नगर में हुई बारिश के बाद नैनी झील ने नगर की सफाई व्यवस्था और प्रशासन के पॉलीथीन उन्मूलन के प्रयासों की पूरी तरह से पोल-खोल कर रख दी। नैनी झील की सतह पर इतनी अधिक मात्रा में प्लास्टिक उभर कर आ गयी कि कई लोगों से देखी न जा सकी। ऐसे में कुछ नाविकों ने ही बिना (बिना अखबारनवीसों को सूचना दिये या पहले से किसी कभी लक्ष्य पूरा न किये जाने के लिये चलाये जाने वाले प्रशासनिक अभियानों की तरह कोई घोषणा किये) झील की सतह पर इकट्ठा हुई प्लास्टिक को झील से हटाया।
Plastic1उल्लेखनीय है कि नगरवासी और प्रशासनिक जिम्मेदार विभाग इस वर्ष मानवीय हरकतों-प्लास्टिक इत्यादि के कारण नालों-नालियों के चोक होने से लोवर माल रोड के नैनी झील में समाने और उधर बेरोकटोक निर्माणों की वजह से पानी के रिसाव से बलियानाला के रईस होटल क्षेत्र में हुए अब तक के सबसे बड़े भूस्खलन के बावजूद अपनी हरकतों से कोई सबक नहीं ले रहे हैं। इसकी परिणति-कीमत भविष्य में किस रूप में नगर को चुकानी पड़ सकती है, इसका किसी को अंदाजा भी नहीं है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 7 अप्रैल 2020। सरोवरनगरी में सुबह तड़के कुछ संदिग्ध देखे जाने से हड़कंप मच गया। इनमें से करीब सात लोग सीसीटीवी कैमरों में भी कैद हो गए। बताया गया कि यह लोग नगर की अपेक्षाकृत कम आवाजाही वाली ठंडी सड़क के रास्ते तल्लीताल से मल्लीताल आये और नैना देवी मंदिर के पास … Read more

राजनीतिक दलों-जन संगठनों ने कोरोना से बचाव के लिए मुख्यमंत्री को भेजे सुझाव

-लॉक डाउन व कर्फ्यू को जरूरी बताते हुए गरीबों को दो सप्ताह की मदद, हर परिवार को एक माह का राशन आदि मांगें उठाईंनवीन समाचार, नैनीताल, 25 मार्च 2020। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर 21 दिन के ‘लॉक डाउन’ में व्यवस्थाओं में और बेहतरी के लिए विभिन्न जनवादी संगठनों एवं राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों … Read more

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उत्तराखंड मुक्त विवि में राज्यपाल द्वारा दिया गया कुलपति स्वर्ण पदक विवाद में, अधिक अंक वाली छात्रा के होते कम अंक वाले छात्र को देने का आरोप

नवीन समाचार, नैनीताल, 3 दिसंबर 2019। उत्तराखंड मुक्त विवि के पांचवे दीक्षांत समारोह में दीक्षांत कुमार को पूरे विवि में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने पर कुलपति स्वर्ण पदक एवं योग विषय में स्वर्ण पदक दिया गया। लेकिन विवि द्वारा दिये गये यह पदक विवादों में आ गए हैं। योग विज्ञान की ही एक छात्रा डा. … Read more

उत्तराखंड की पहाड़ियों में 3 अक्तूबर से होगा भारत-कजाकिस्तान की सेनाओं का संयुक्त सैन्य अभ्यास

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American armyनवीन समाचार, नैनीताल, 27 सितंबर 2019। भारत तथा कज़ाकिस्तान की सेनाओं के संयुक्त सेैन्य अभ्यास ‘काज़िंद-2019’ का आयोजन 3 अक्टूबर 2019 से 15 अक्टूबर 2019 के बीच उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में किया जायेगा। दोनों देषों के 100 सैनिकों की टुकड़ी इस संयुक्त युद्धाभ्यास में हिस्सा लेगी। इस दौरान वे विभिन्न सैन्य ऑपरेशनों एवं आतंकवाद विरोधी जवाबी कार्रवाई के अनुभवों को एक दूसरे से साझा करेगें। शुक्रवार को प्रेस को जारी विज्ञप्ति के जरिये सेना की प्रवक्ता ने बताया कि संयुक्त सैन्य अभ्यास काज़िंद-2019 एक वार्षिक कार्यक्रम है जो दोनों देशों में बारी-बारी से आयोजित किया जाता है। कज़ाकिस्तान के साथ आयोजित होने वाले इस सैन्य अभ्यास को वैश्विक आतंकवाद के बदलते परिदृष्य में एक महत्वपूर्ण सैन्य अभ्यास बताया गया है। कंपनी स्तर पर आयोजित होनेवाले इस सैन्य अभ्यास का उद्देश्य पहाड़ी क्षेत्रांे में आतंकवाद विरोधी ऑपरेशनों को अंजाम देना है। सैन्य अभ्यास के दौरान वैश्विक आतंकवाद और हाइब्रिड युद्ध के उभरते रूझानों के विभिन्न पहलुओं को वर्तमान समय के साथ-साथ वैश्विक परिदृष्यों में समकालीन प्रभावों के कारण भी शामिल किया गया है। साथ ही उम्मीद जताई गई है कि यह संयुक्त सैन्य अभ्यास दोनों देशों के बीच आपसी रक्षा सहयोग को बढ़ाने के साथ ही द्विपक्षीय संबंधों को प्रगाढ बनाने में मददगार सिद्ध होगा।

यह भी पढ़ें : ऐसा क्या हुआ कि भारतीय सेना के साथ युद्धाभ्यास के बाद ‘शांति’ की बात करने लगे अमेरिकी जनरल ?

-अमेरिकी जनरल ने जताई भारतीय सेना के साथ अंतरराष्ट्रीय शांति मिशन में काम करने की चाह

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p style=”text-align: justify;”>नवीन समाचार, रानीखेत, 29 सितंबर 2018। भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण अभ्यास-2018 का शनिवार को एक भव्य समारोह के साथ चौबटिया (उत्तराखंड) में समापन हो गया। इस मौके पर अमेरिकी जनरल ने कहा कि वह पिछले दो सप्ताह से चल रहे प्रक्षिक्षण से काफी संतुष्ट व प्रसन्न हैं। यकीनन भारतीय सेना विश्व की सर्वश्रेष्ठ सेनाओं में से एक है और युद्ध अभ्यास 2018 पूरी तरह से सफल सिद्ध हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में अमेरिकी सेना भारतीय सेना के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय शांति मिशन में काम करना चाहेगी। वहीं सैन्य अभ्यास में शामिल गरुड़ डिवीजन के कमांडर मेजर जनरल कविंद्र सिंह ने कहा कि यह युद्ध अभ्यास अति लाभप्रद सिद्ध हुआ है जिसमें दोनों देशों की सेनाओं ने अंतरराष्ट्रीय शांति मिशन में एक साथ काम करने की काबिलियत में सक्षमता हासिल की है।
समापन अवसर पर दोनों देशों की सैन्य दलों ने शानदार परेड की, जिसकी सलामी अमेरिकी सेना के मेजर जनरल विलियम ग्राहम, डिप्टी कमांडिंग जनरल 1 कोर तथा भारतीय सेना से गरुड़ डिवीजन कमांडर मेजर जनरल कविन्द्र सिंह ने संयुक रुप से ली। समुद्र तल से तकरीबन सात हजार फीट की ऊँचाई पर घने जंगलों में पिछले दो सप्ताह से दोनों पक्षों द्वारा आतंकवाद विरोधी अभियानों जैसे कि रेड, कॉर्डन और खोज-बचाव आदि के लिए अभ्यास किया गया। आतंकवादियों की निगरानी, ट्रैकिंग और पहचान, लड़ाई के लिए विशेषज्ञ हथियार का उपयोग, आईईडी तटस्थ करने और प्रभावी संचार स्थापित करने के लिए कला उपकरणों के उपयोग पर भी जोर दिया गया। भारतीय व अमेरिकी सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस परेड को देखा।
गौरतलब है कि भारतीय सेना की 15 गढ़वाल राइफल्स व अमेरिका से 1-23 इन्फैंट्री रेजीमेंट ने फील्ड ट्रेनिंग अभ्यास तथा कमांड पोस्ट अभ्यास में भारतीय सेना की गरूड डिवीजन तथा अमेरिकी सेना की सातवीं इन्फैंट्री डिवीजन ने भाग लिया, तथा 14 डोगरा व 13 सिख ने भी दिया।

नैनीताल की खूबसूरती देख लड़ना भूल बैठी अमेरिकी सेना !

नैनीताल, 23 सितंबर 2018। चौबटिया-रानीखेत में भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य युद्धाभयास-2008 के लिए आई अमेरिकी सेना प्रकृति के स्वर्ग कही जाने वाली सरोवरनगरी नैनीताल की प्राकृतिक खूबसूरती के आकर्षण में ऐसी खोई कि युद्ध और युद्धाभ्यास भूल बैठी। दो वर्ष पूर्व भी नैनीताल आये अमेरिकी सेना के कुछ सैनिकों के दिलो-दिमाग पर शायद नैनीताल की खूबसूरती का ऐसा असर था कि वे पहाड़ों की रानी कहे जाने वाले रानीखेत और डिलीसियस सेब की नगरी चौबटिया छोड़ रविवार का समय निकालकर नैनीता आ गये और यहां इस दौरान हो रही भारी बारिश के बावजूद अमेरिकी सैनिकों व सैन्य अधिकारियों ने अमेरिकी जनरल विलियम ग्राहम की अगुवाई में नगर का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने नगर की शान माल रोड के साथ ही नैनी झील, भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत उच्च स्थलीय प्राणि उद्यान यानी नैनीताल चिड़ियाघर और मल्लीताल स्थित गुरुद्वारा गुरुसिंह सभा सहित अनेक अन्य स्थानों पर यहां की खूबसूरत वादियों का लुप्त उठाया और यहां की संस्कृति की झलक भी देखी, तथा इसकी काफी प्रशंसा की। भ्रमण के दौरान भारतीय सेना की ओर से चौबटिया 99 ब्रिगेड के कर्नल हर्ष मिश्रा व अन्य लोग भी उनके साथ रहे। विदित हो रानीखेत चौबटिया में भारत-अमेरिका का 14वां संयुक्त युद्धाभ्यास पिछली 16 सितंबर से चल रहा है जो 29 सितंबर तक चलेगा। संयुक्त युद्धाभ्यास कार्यक्रम में अमेरिकी सेना के 350 सैनिक व सैन्य अधिकारीयो का दल प्रतिभाग कर रहा है। रविवार को वे भारत की सांस्कृतिक झलक देखने के लिए नैनीताल पहुंचे थे।

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नवीन समाचार, चौबटिया, रानीखेत 16 सितंबर 2018। भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास-2018 का शुरूआती समारोह आज उत्तराखंड के चौबटिया में आयोजित किया गया । इस समारोह की शुरूआत राष्ट्रगान – ‘जन गण मन ….’ एवं ‘द स्टार स्पैन्गल्ड बैनर’ के साथ हुई। इस अवसर पर दोनों देशों के झंडे फहराये गये। भारतीय एवं अमेरिकी सैनिक एक दूसरे के साथ खड़े रहे तथा समारोह के दौरान दोनों देशों के दो वरिष्ठ सैन्यधिकारियों को रस्मी सैल्यूट दिये

Indo American Yuddhabhyas1इस संयुक्त युद्धाभ्यास में अमेरिकी सेना की ओर से प्रथम इंफैन्ट्री बटालियन, 23 इंफैन्ट्री रेजिमेन्ट, 2 स्ट्राइकर ब्रिगेड कॉम्बैट टीम, 7 इंफैन्ट्री डिविजन ने प्रतिनिधित्व किया जबकि भारतीय सेना की ओर से कांगो ब्रिगेड, गरूड़ डिविजन, सूर्या कमान ने प्रतिनिधित्व किया। इस अवसर पर गरूड़ डिविजन के जनरल ऑफीसर कमांडिंग ने अमेरिकी सैनिकों का स्वागत किया तथा उन्होंने अपने उद्घाटन भाशण में भारत और अमेरिका की इस प्रकार की साझेदारी को प्रजातंत्र, स्वतंत्रता, समानता एवं न्याय को दोनों देशों के लिए मूल्यवान बताया।

इस दो सप्ताह तक चलनेवाले सैन्य युद्धाभ्यास में अमेरिकी सेना तथा भारतीय सेना के सूर्या कमान की ओर से बराबर संख्या में सैन्य टुकड़ियॉं हिस्सा ले रही हैं। इस युद्धाभ्यास के दौरान जवाबी एवं आतंकवाद विरोधी कार्रवाईयों से निपटने की उनकी कार्यकुशलता तथा तकनीकी कौशल देखने को मिलेगा। इस युद्धाभ्यास में दोनों देशों की सेनाओं की ओर से निगरानी तथा ट्रेकिंग, उपकरण, आतंकवादियों से निपटने के लिए विशेष हथियारों, विस्फोटक और आईईडी डिटेक्टर्स अथवा नवीनतम संचार उपकरणों का प्रयोग किया जायेगा। दोनों देश संयुक्त रूप से किसी प्रकार के खतरों से निपटने के लिए एक सुविकसित कुशल ड्लि को अमल में लाकर योजनाबद्ध तरीके से प्रशिक्षण लेगें जिसे संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के लिए आयोजित ऑपरेशनों में प्रयोग किया जा सके। दोनों देशों के सैन्य विशेषज्ञ पारस्परिक लाभ हेतु विविध विषयों पर एक दूसरे के अनुभवों को साझा करने के लिए विचार-विमर्श भी करेगें।

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उत्तराखंड में एक वरिष्ठ अधिकारी को जबरन किया सेवानिवृत्त, अपनी तरह का पहला मामला

नवीन समाचार, नैनीताल, 19 सितंबर 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने पहली बार कार्य में लेटलतीफी सहित अन्य कारणों से एक वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी को 50 वर्ष की आयु में जबरन सेवानिवृत्ति दे दी है। हाई कोर्ट की स्थापना के बाद किसी वरिष्ठ न्यायिक अफसर को जबरन रिटायर करने का यह पहला मामला है। हाई कोर्ट … Read more