नवीन समाचार, रुद्रपुर, 18 फरवरी 2026 (Attempt of Child Marriage)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के ऊधमसिंह नगर (Udham Singh Nagar) जनपद के किच्छा (Kichha) क्षेत्र के अंजनिया (Anjaniya) गांव में प्रशासन ने एक संभावित बाल विवाह को समय रहते रुकवा दिया। 15 वर्ष 11 माह आयु की किशोरी का विवाह हरियाणा के 27 वर्षीय युवक से कराया जा रहा था, जिसे पुलिस और स्वयंसेवी संस्था की संयुक्त कार्रवाई से रोक दिया गया। यह हस्तक्षेप इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बाल विवाह निषेध कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और किशोरियों के अधिकार संरक्षण से सीधे जुड़ा है।
कैसे सामने आया मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार बीती रात्रि स्वयंसेवी संस्था इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल डेवलपमेंट (Institute Of Social Development-ISD) को सूचना मिली कि ग्राम अंजनिया में नाबालिग किशोरी का विवाह कराया जा रहा है। सूचना मिलते ही आईएसडी की परियोजना निदेशक बिंदुवासिनी (Binduvasini) पुलिस के साथ मौके पर पहुंचीं।
जांच के दौरान परिजनों से आयु संबंधी अभिलेख मांगे गये, लेकिन वे संतोषजनक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके बाद जूनियर हाईस्कूल (Junior High School) के अभिलेखों की जांच की गयी, जिसमें किशोरी की आयु 15 वर्ष 11 माह पाई गयी। पुष्टि होते ही प्रशासन ने विवाह प्रक्रिया तत्काल रुकवा दी और बारात को वापस भेज दिया।
किशोरी को संरक्षण, परिजनों की काउंसलिंग
आईएसडी के अध्यक्ष डॉ. अमित कुमार श्रीवास्तव (Amit Kumar Srivastava) ने बताया कि किशोरी को वन स्टॉप सेंटर (One Stop Center) में सुरक्षित रखा गया है। दोनों पक्षों के परिजनों को आगे की काउंसलिंग के लिए बाल कल्याण समिति (Child Welfare Committee) के समक्ष प्रस्तुत किया गया है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह कार्रवाई
बाल विवाह निषेध अधिनियम (Prohibition Of Child Marriage Act) के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु की बालिका का विवाह दंडनीय अपराध है। विशेषज्ञों के अनुसार समय रहते ऐसे मामलों पर रोक लगना किशोरियों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। क्या ग्रामीण क्षेत्रों में आयु सत्यापन की व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है? यह प्रश्न भी इस घटना के बाद उठ रहा है।
आयोजनकर्ताओं को भी चेतावनी
आईएसडी निदेशक बिंदुवासिनी ने बताया कि विवाह की तैयारी पूरे स्तर पर की गयी थी और कार्यक्रम की वीडियोग्राफी करायी गयी है। मौके पर मौजूद बैंड, बाजा और कैटरिंग से जुड़े लोगों को निर्देश दिया गया कि भविष्य में किसी भी वैवाहिक अनुबंध से पहले वर-वधू की वैध आयु का सत्यापन अवश्य करें।
प्रशासन ने संकेत दिया है कि प्रकरण की वैधानिक समीक्षा जारी है और आवश्यक होने पर आगे विधिक कार्रवाई की जाएगी। पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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