नवीन समाचार, देहरादून, 26 फरवरी 2026 (Uttarakhands First Modern Madrasa)। उत्तराखंड (Uttarakhand) की राजधानी देहरादून (Dehradun) में राज्य सरकार ने प्रदेश के पहले आधुनिक मदरसे को मान्यता देकर शिक्षा के क्षेत्र में नया प्रयोग शुरू किया है। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम मॉडर्न मदरसा (Dr. APJ Abdul Kalam Modern Madrasa) में नर्सरी से कक्षा आठ तक अंग्रेजी माध्यम के साथ धार्मिक और आधुनिक शिक्षा एक साथ दी जाएगी, जिससे विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास माना जा रहा है।
देहरादून के मुस्लिम कॉलोनी, लक्खीबाग (Muslim Colony, Lakkhibagh) क्षेत्र में स्थापित इस मदरसे को मुख्य शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार ढौंडियाल (Vinod Kumar Dhoundiyal) द्वारा पांच वर्ष की मान्यता प्रदान की गई है। यहां 300 से अधिक छात्र-छात्राओं को एक साथ दीनी और आधुनिक शिक्षा दी जाएगी। शिक्षा का संचालन शिक्षा का अधिकार अधिनियम (Right to Education Act) के प्रावधानों के अनुरूप नि:शुल्क किया जाएगा।
क्या हैं इस आधुनिक मदरसे की प्रमुख विशेषताएं
इस पहल को राज्य में मदरसों के आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं—
एनसीईआरटी (NCERT) आधारित पाठ्यक्रम लागू
नर्सरी से कक्षा आठ तक अंग्रेजी माध्यम में अध्ययन
कुरान के साथ गणित, विज्ञान, हिंदी, अंग्रेजी और कंप्यूटर शिक्षा
अरबी के साथ वैकल्पिक भाषा के रूप में संस्कृत शिक्षण
लगभग 50 लाख रुपये की लागत से वक्फ बोर्ड द्वारा निर्माण
शिक्षा पूर्णतः निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा कानून के अनुरूप
सेवानिवृत्त सैनिकों द्वारा शारीरिक प्रशिक्षण और अनुशासन शिक्षा
वक्फ बोर्ड की आगे की योजना
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड (Uttarakhand Waqf Board) के अध्यक्ष शादाब शम्स (Shadab Shams) ने इसे व्यापक योजना का पहला चरण बताया है। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य बच्चों को धार्मिक शिक्षा के साथ आधुनिक तकनीकी भी ज्ञान देना है, ताकि वे प्रतिस्पर्धी युग में पीछे न रहें। बोर्ड की योजना हरिद्वार (Haridwar), ऊधमसिंह नगर (Udham Singh Nagar) और नैनीताल (Nainital) सहित अन्य जिलों में भी इसी मॉडल पर मदरसों का विस्तार करने की है। वर्ष के अंत तक 8 से 10 मदरसों के आधुनिकीकरण का लक्ष्य रखा गया है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल
विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम अल्पसंख्यक शिक्षा, कौशल विकास और डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा दे सकता है। यदि मॉडल सफल रहता है तो यह राज्य की शिक्षा नीति, सामाजिक समावेशन और मानव संसाधन विकास पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। साथ ही यह पारंपरिक धार्मिक संस्थानों को आधुनिक शिक्षा ढांचे से जोड़ने का एक प्रयोग भी माना जा रहा है।
फिलहाल विभागीय निगरानी में नए सत्र से यहां प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने की तैयारी है। पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।














