(Nainital-Leopard Killed Women Update on 22 Year old girl Missing from house
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नवीन समाचार, नैनीताल 27 फरवरी 2024 (Leoperd increased by 34 percent in last 15 years)। उत्तराखंड में कमोबेश हर रोज गुलदारों द्वारा मानवों पर हमलों की घटनाएं सामने आ रही हैं। इन हमलों के पीछे सबसे बड़ी वजह गुलदारों की लगातार बढ़ रही संख्या है। पिछले 16 सालों में प्रदेश में गुलदार चार गुना बढ़ गए हैं। जो आने वाले वक्त में इंसानों के लिए बड़े खतरे की घंटी है।

वन विभाग के अनुसार प्रदेश में 2008 में गुलदारों की संख्या का आकलन किया गया था। तब राज्य में 2335 गुलदार पाए गए थे। जबकि 15 वर्ष बाद 2023 में गुलदारों की गणना की गई, तो गुलदारों की संख्या 3115 पाई गई है। यानी पिछले 15 साल में प्रदेश में गुलदार की संख्या करीब 34 फीसदी बढ़ गई है। गुलदारों की संख्या में सबसे अधिक वृद्धि पौड़ी, देहरादून, मसूरी, अल्मोड़ा, नैनीताल, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में दर्ज की गई है।

गुलदारों ने पिछले वर्ष 18 लोगों की जान ली (Leoperd increased by 34 percent in last 15 years)

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50 से अधिक गुलदार हैं कैद (Leoperd increased by 34 percent in last 15 years)

उत्तराखंड में आदमखोर हो चुके या अपंग हो चुके 50 से अधिक गुलदार विभिन्न रेस्क्यू सेंटर व चिड़ियाघरों में कैद हैं। जिनको कभी जंगल में नहीं छोड़ा जाएगा। जबकि पिछले पांच सालों में करीब 20 से अधिक गुलदारों का नरभक्षी घोषित होने के बाद मार डाला गया है।

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बाघों की संख्या बढ़ने से जंगलों से दूर हो रहे गुलदार (Leoperd increased by 34 percent in last 15 years)

वन्यजीव विशेषज्ञों की मानें तो जहां बाघ रहता है, उसके आसपास गुलदार नहीं रहते। आंकड़ों के अनुसार बाघों वाले क्षेत्रों में गुलदार की संख्या एक हजार से भी कम आंकी गई है, जो कि इस बात का प्रमाण है। जंगलों में बाघों की संख्या भी राज्य में लगातार बढ़ रही है। इस कारण जंगलों में इनका आधिपत्य होता जा रहा है। जो गुलदारों को जंगलों से बाहर कर आबादी के आसपास धकेल रहा है। इससे गुलदारों के साथ मानव का संघर्ष बढ़ रहा है।

गुलदारों को राज्य के बाहर भेजने की भी उठ रही मांग (Leoperd increased by 34 percent in last 15 years)

उत्तराखंड में गुलदारों की संख्या के साथ इनके द्वारा मानवों की जान लेने की घटनाएं बढ़ने के दृष्टिगत गुलदारों को प्रदेश से बाहर अन्य प्रदेशों-देशों, वहां के चिड़ियाघरों आदि में ले जाने की मांग भी उठ रही हैं। कहा जा रहा है कि जब दूसरे देशों से देश में चीतों को लाया जा सकता है तो गुलदारों को राज्य से बाहर क्यों नहीं ले जाया जा सकता है। वहीं कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि वास्तव में गुलदार मानव बस्तियों में नहीं आ रहे, बल्कि मानव वन्य जीवों के क्षेत्र में अपने लालच की वजह से हस्तक्षेप कर रहा है, और जान गंवाकर इसकी कीमत भुगत रहा है। (Leoperd increased by 34 percent in last 15 years)

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By डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार

‘डॉ.नवीन जोशी, वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार, 'कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले पत्रकार' एवं मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 140 मिलियन यानी 1.40 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।

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