नयी श्रम संहिता से कर्मचारियों को बड़ी राहत, नौकरी छोड़ने के 48 घंटों में देना होगा पूर्ण भुगतान

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नवीन समाचार, नई दिल्ली, 27 मार्च 2026 (New Labour Code in India)। भारत सरकार ने देश के करोड़ों श्रमिकों और कर्मचारियों के व्यापक हितों को सुरक्षित करने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। वर्तमान में प्रचलित 29 विभिन्न श्रम कानूनों (Labour Laws) को एकीकृत कर बनाए गए 4 नए श्रम कोड (Labour Codes) आगामी 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होने जा रहे हैं। इन नए नियमों के लागू होने से अनौपचारिक क्षेत्र (Informative Sector), गिग वर्कर्स (Gig Workers), प्रवासी मजदूरों और महिला कर्मचारियों को बेहतर वेतनमान, सामाजिक सुरक्षा (Social Security) और स्वास्थ्य सुरक्षा की पूर्ण गारंटी प्राप्त होगी।

(New Labour Code in India) न्यू लेबर कोड: नौकरी में ज्यादा छुट्टी लेने पर क्या कंपनी आपको देगी सजा,  यहां है जवाब | New Labour Code companies penalize you for taking too much  leave? Here answerभारत में पूर्व में लागू कानूनों की जटिलता और उनके संबंध में व्याप्त संशय को समाप्त करने के लिए सरकार ने इन्हें चार मुख्य संहिताओं में समाहित किया है। इनमें वेतन संहिता-2019 (Code on Wages), औद्योगिक संबंध संहिता-2020 (Industrial Relations Code), सामाजिक सुरक्षा संहिता-2020 (Code on Social Security) और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशा संहिता-2020 (OSHWC Code) सम्मिलित हैं। इन संहिताओं के माध्यम से ग्रेच्युटी (Gratuity) और पूर्ण एवं अंतिम भुगतान (Full and Final Settlement) की प्रक्रियाओं में क्रांतिकारी परिवर्तन किए गए हैं।

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वेतन और भुगतान प्रक्रिया में सुगमता

दो कार्यदिवसों में पूर्ण होगा अंतिम भुगतान

नए नियमों के अंतर्गत अब कंपनियों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे किसी भी कर्मचारी का ‘फुल एंड फाइनल सेटलमेंट’ उसकी सूचना अवधि (Notice Period) समाप्त होने के मात्र 2 दिनों के भीतर पूर्ण करें। वर्तमान व्यवस्था में इस प्रक्रिया में प्रायः 45 दिनों से अधिक का समय लगता है, जिससे नौकरी बदलने वाले कर्मचारियों को आर्थिक नियोजन (Financial Planning) में कठिनाई होती थी। अब त्यागपत्र देने, सेवामुक्त किए जाने या छंटनी (Layoff) की स्थिति में कंपनी को 48 घंटों के भीतर वेतन, अवकाश नकदीकरण (Leave Encashment), बोनस और ग्रेच्युटी का भुगतान करना होगा।

नियत अवधि कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी के लाभ

नियत अवधि (Fixed-term) या अनुबंध (Contract) पर कार्य करने वाले कर्मचारियों के लिए भी ग्रेच्युटी के नियमों में उदारता बरती गई है। जहाँ पहले ग्रेच्युटी पात्रता के लिए 5 वर्ष की निरंतर सेवा अनिवार्य थी, वहीं अब नए कोड में इसे घटाकर मात्र 1 वर्ष कर दिया गया है। इससे अल्पकालिक अनुबंधों पर कार्य करने वाले युवाओं को भी वित्तीय सुरक्षा प्राप्त होगी। इसके अतिरिक्त, कर-मुक्त (Tax-free) ग्रेच्युटी की सीमा को भी 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दिया गया है।

सामाजिक सुरक्षा का विस्तार और दंड के प्रावधान

गिग वर्कर्स और असंगठित क्षेत्र को कवच

पहली बार नए कोड्स के माध्यम से गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स (जैसे खाद्य वितरण कर्मी या चालक) को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया गया है। इनके लिए स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance), दुर्घटना कवर और सामाजिक सुरक्षा लाभ सुनिश्चित किए गए हैं। नियोक्ताओं को अब कर्मचारी जमा संबद्ध बीमा योजना (EDLI Scheme) में वेतन का 0.65% योगदान करना होगा, जिससे कर्मचारियों को जीवन और विकलांगता कवरेज (Disability Coverage) प्राप्त होगा।

क्या होते हैं गिग वर्कर्स

गिग वर्कर्स (Gig Workers) वे स्वतंत्र कर्मचारी या फ्रीलांसर होते हैं जो किसी कंपनी के साथ पारंपरिक पूर्णकालिक कर्मचारी के रूप में नहीं, बल्कि अल्पकालिक, अस्थायी या प्रोजेक्ट-आधारित अनुबंध पर काम करते हैं। इन्हें ‘ऑन-डिमांड’ (On Demand) या प्लेटफॉर्म वर्कर (Plateform Workers) भी कहते हैं, जो ओला/उबर ड्राइवर, स्विगी/ज़ोमैटो डिलीवरी बॉय, या फ्रीलांस ग्राफिक डिजाइनर की तरह अपनी सुविधा अनुसार काम करते हैं।

विलंब पर देय होगा भारी ब्याज

नियमों के उल्लंघन को रोकने के लिए सरकार ने कड़े आर्थिक दंड के प्रावधान भी किए हैं। यदि कोई नियोक्ता ग्रेच्युटी भुगतान में 30 दिनों से अधिक का विलंब करता है, तो उसे 10% वार्षिक ब्याज की दर से भुगतान करना होगा। यह नियम निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों (Private and Public Sectors) पर समान रूप से लागू होगा। यद्यपि कंपनियों के लिए दो दिनों के भीतर लेखांकन (Accounting), विभागवार अनापत्ति प्रमाण पत्र (Clearance) और कर कटौती (Tax Deduction) की प्रक्रियाओं को पूर्ण करना एक बड़ी चुनौती होगी, किंतु डिजिटल प्रणालियों के माध्यम से इसे सुगम बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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यह भी पढ़ें : नयी श्रम संहिता के नियम जारी, वेतन संरचना से लेकर ग्रेच्युटी तक गणना का पूरा खाका स्पष्टनयी श्रम संहिता

नवीन समाचार, नई दिल्ली, 5 जनवरी 2026 (New Labour Code in India)। देश की राजधानी दिल्ली से देशभर के कामकाजी लोगों के लिए वेतन, भत्ते, भविष्य निधि और ग्रेच्युटी से जुड़ी एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आयी है। केंद्र सरकार के नए लेबर कोड्स यानी नयी श्रम संहिता के तहत श्रम मंत्रालय ने ड्राफ्ट नियमों को सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी कर दिया है।

इन नियमों और साथ में जारी प्रश्नोत्तर के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया है कि नई व्यवस्था में वेतन की परिभाषा क्या होगी, 50 प्रतिशत का नियम कैसे लागू होगा और ग्रेच्युटी की गणना किस आधार पर की जायेगी। इसका सीधा असर देश के करोड़ों वेतनभोगी कर्मचारियों, संविदा और नियत वहाँ पर कार्यरत कर्मचारियों के साथ-साथ कंपनियों की लागत संरचना पर भी पड़ेगा।

नयी श्रम संहिता का संदर्भ और उद्देश्य

चार कोड्स में समेटे गये पुराने कानून

(New Labour Code in India) भारत के नए श्रम कानूनी ढाँचे का एक समीक्षात्मक विश्लेषणउल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को समेकित कर चार नए लेबर कोड्स नयी श्रम संहिता बनाई हैं, जिनमें वेतन संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां संहिता शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य श्रम कानूनों को सरल बनाना, परिभाषाओं में एकरूपता लाना और कर्मचारियों को अधिक सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है। अब तक अलग-अलग कानूनों में वेतन की अलग परिभाषाएं होने से भ्रम की स्थिति बनी रहती थी, जिसे दूर करने का प्रयास इन कोड्स के माध्यम से किया गया है।

ड्राफ्ट नियम सार्वजनिक क्यों किये गये

Ministry of Labour and Employment ने ड्राफ्ट नियमों को सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया है। वेतन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े नियमों पर 45 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी गयी हैं, जबकि औद्योगिक संबंधों से जुड़े नियमों के लिए 30 दिन का समय तय किया गया है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब तक नए नियम औपचारिक रूप से अधिसूचित नहीं हो जाते, तब तक पुराने नियम लागू रहेंगे, बशर्ते वे नए कोड्स के विरुद्ध न हों।

वेतन की नई परिभाषा और 50 प्रतिशत नियम

वेतन में क्या शामिल और क्या बाहर

ड्राफ्ट के अनुसार वेतन में मूल वेतन, महंगाई भत्ता और रिटेनिंग भत्ता शामिल होंगे। इसके साथ ही 50 प्रतिशत का नियम लागू किया गया है, जिसके अनुसार किसी कर्मचारी की कुल पारिश्रमिक राशि में वेतन का हिस्सा कम से कम 50 प्रतिशत होना चाहिए। यदि भत्तों का हिस्सा इससे अधिक है, तो अतिरिक्त राशि को वेतन में जोड़ दिया जायेगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कंपनियां बहुत कम मूल वेतन दिखाकर भविष्य निधि और ग्रेच्युटी जैसी वैधानिक देनदारियों से बच न सकें।

ड्राफ्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन, ईएसओपी, वैरिएबल पे, रीइंबर्समेंट और अवकाश नकदीकरण को वेतन का हिस्सा नहीं माना जायेगा।

ग्रेच्युटी और ओवरटाइम से जुड़े अहम बदलाव

ग्रेच्युटी की गणना और लागू तिथि

नई व्यवस्था में ग्रेच्युटी अंतिम आहरित वेतन के आधार पर दी जायेगी, न कि केवल मूल वेतन पर। चूंकि वेतन की परिभाषा में 50 प्रतिशत नियम लागू होगा, इसलिए कई कर्मचारियों की ग्रेच्युटी राशि बढ़ सकती है। ड्राफ्ट के अनुसार यह प्रावधान 21 नवंबर 2025 से प्रभावी माना जायेगा। जो कर्मचारी इस तिथि के बाद सेवा समाप्त करेंगे, उन्हें ग्रेच्युटी नई व्यवस्था के तहत मिलेगी।

वहीं फिक्स्ड टर्म पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए यह एक बड़ा बदलाव है, क्योंकि अब इन्हें एक वर्ष की सेवा के बाद ही ग्रेच्युटी का अधिकार मिलेगा। इस संबंध में जारी स्पष्टीकरण में Institute of Chartered Accountants of India ने भी कंपनियों को लेखांकन के स्तर पर सावधानी बरतने की सलाह दी है।

ओवरटाइम और कार्य परिस्थितियां

ड्राफ्ट नियमों में यह प्रावधान किया गया है कि सप्ताह में 48 घंटे से अधिक कार्य कराने पर दोगुनी मजदूरी देनी होगी। लगातार 10 दिनों से अधिक कार्य नहीं कराया जा सकेगा और इसके बदले विश्राम दिवस देना अनिवार्य होगा। कुछ क्षेत्रों में 40 वर्ष से अधिक आयु के कर्मचारियों के लिए वार्षिक स्वास्थ्य परीक्षण, क्रेच सुविधा न होने पर बच्चों के लिए निर्धारित धनराशि और अंतरराज्यीय प्रवासी श्रमिकों के लिए यात्रा मद जैसे प्रावधान भी जोड़े गये हैं।

कुल मिलाकर नए लेबर कोड्स का उद्देश्य वेतन संरचना को अधिक पारदर्शी बनाना और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना है। हालांकि प्रारंभिक चरण में कर्मचारियों की हाथ में आने वाली धनराशि में बड़ा अंतर न दिखे, लेकिन दीर्घकाल में भविष्य निधि और ग्रेच्युटी जैसे लाभ अधिक सुदृढ़ होंगे।

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