नवीन समाचार, भराड़ीसैंण, 13 मार्च 2026 (UK Identify Cancer-Causing Chemicals)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के जनपद चमोली (Chamoli) स्थित ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण (Bhararisain) में चल रहे विधानसभा सत्र (Uttarakhand Legislative Assembly Session) के दौरान खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय सामने आया। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत (Dr. Dhan Singh Rawat) ने बताया कि खाद्य पदार्थों में मिलावट से उत्पन्न हो रहे कैंसर (Cancer) के खतरे को देखते हुए ऐसे रसायनों की पहचान के लिए विशेष नियमावली (Regulatory Framework) तैयार की जाएगी। इसके साथ ही प्रदेश भर में प्रत्येक माह खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच के लिए एक सप्ताह का विशेष अभियान चलाया जाएगा।
खाद्य पदार्थों में मौजूद प्रमुख कैंसर कारक रसायन
खाद्य पदार्थों में मौजूद रसायनों, जैसे नाइट्रेट्स/नाइट्राइट्स (प्रसंस्कृत मांस में), एक्रिलामाइड (जले हुए/तले हुए स्टार्च), बीपीए (डिब्बाबंद खाद्य), PAHs (धुएँ वाले मांस), और कृत्रिम रंगों (जैसे रेड 3, येलो 5) के सेवन से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। ये रसायन शरीर में डीएनए को नुकसान पहुँचाकर कैंसर कोशिकाओं के विकास को बढ़ाते हैं।
- नाइट्रेट और नाइट्राइट (Nitrates/Nitrites): प्रसंस्कृत मांस (बेकन, सॉसेज, हॉट डॉग) में परिरक्षक के रूप में, जो पेट और कोलोरेक्टल कैंसर का कारण बन सकते हैं।
- एक्रिलामाइड (Acrylamide): स्टार्चयुक्त खाद्य पदार्थों (आलू के चिप्स, टोस्ट, बिस्कुट) को बहुत उच्च तापमान पर पकाने या तलने से उत्पन्न होता है।
- पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (PAHs) और हेटेरोसाइक्लिक एमाइन (HCAs): मांस को सीधे आग पर ग्रिल या स्मोक करने पर उत्पन्न होते हैं।
- बिस्फेनॉल ए (BPA): डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों (Canned Foods) के रेजिन लाइनिंग में पाया जाता है, जो हार्मोनल असंतुलन करता है।
- कृत्रिम रंग (Artificial Colors): रेड 3 (Red 3), येलो 5 (Yellow 5) जैसे रंग, जो कैंडी और स्नैक्स में उपयोग होते हैं।
- एफ्लाटॉक्सिन (Aflatoxins): खराब भंडारण के कारण मूंगफली और अनाज में पनपने वाली फंगस (Fungus) से पैदा होते हैं।
- एसिटाल्डिहाइड (Acetaldehyde): शराब (Alcoholic Beverages) के सेवन से बनता है।
इन रसायनों के जोखिम को कम करने के लिए प्रसंस्कृत, डिब्बाबंद, और जले हुए भोजन के सेवन से बचना चाहिए। ताजे फल, सब्जियां और घर का बना ताजा खाना ही कैंसर के जोखिम को कम करने का सबसे अच्छा उपाय है।
खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए नई रणनीति
विधानसभा के प्रश्नकाल (Question Hour) के दौरान भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party – BJP) के विधायक बृजभूषण गैरोला (Brijbhushan Gairola) द्वारा उठाए गए प्रश्न के उत्तर में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राज्य में कैंसर के रोगियों की संख्या बढ़ने की चिंता सामने आ रही है। सरकार का मानना है कि खाद्य पदार्थों में मिलावट और हानिकारक रसायनों का उपयोग भी इसके संभावित कारणों में शामिल हो सकता है।
इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार खाद्य पदार्थों में उपयोग हो रहे ऐसे रसायनों को चिन्हित करने के लिए विस्तृत नियमावली तैयार करेगी, जिससे स्वास्थ्य के लिए खतरनाक तत्वों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके।
हर महीने चलेगा जांच अभियान
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि अब केवल त्योहारों के समय ही नहीं बल्कि नियमित रूप से खाद्य पदार्थों की जांच की जाएगी। इसके लिए प्रत्येक माह एक सप्ताह का विशेष अभियान चलाया जाएगा, जिसमें खाद्य सुरक्षा विभाग (Food Safety Department) द्वारा विभिन्न बाजारों और प्रतिष्ठानों से नमूने लेकर उनकी जांच की जाएगी।
इसके अतिरिक्त प्रदेश में लगने वाले पारंपरिक हाट बाजारों (Rural Haat Markets) में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की भी नमूना जांच की जाएगी, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में भी खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
देहरादून में बन रही खाद्य विश्लेषण प्रयोगशाला
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि खाद्य पदार्थों की जांच प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाने के लिए देहरादून (Dehradun) में खाद्य विश्लेषण प्रयोगशाला (Food Analysis Laboratory) का निर्माण किया जा रहा है। यह प्रयोगशाला 31 मार्च 2026 तक तैयार होने की संभावना है।
प्रयोगशाला के तैयार होने के बाद खाद्य नमूनों की जांच में तेजी आएगी और मिलावटी खाद्य पदार्थों के विरुद्ध कार्रवाई और प्रभावी हो सकेगी।
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया
खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग (Food Safety and Drug Administration – FDA) में 28 खाद्य सुरक्षा अधिकारियों (Food Safety Officers) के पदों पर भर्ती का प्रस्ताव उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (Uttarakhand Public Service Commission – UKPSC) को भेजा गया है।
जब तक इन पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक अन्य विभागों से प्रतिनियुक्ति (Deputation) के आधार पर अधिकारियों की तैनाती पर भी विचार किया जा रहा है।
निकायों को भी मिल सकता है नमूना जांच का अधिकार
विधानसभा में भाजपा विधायक विनोद चमोली (Vinod Chamoli) द्वारा उठाए गए प्रश्न के उत्तर में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि वर्तमान में खाद्य पदार्थों के नमूने केवल खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा लिए जाते हैं।
हालांकि भविष्य में नगर निकायों (Urban Local Bodies) को भी खाद्य पदार्थों के नमूने लेने और निरीक्षण का अधिकार देने पर नीतिगत निर्णय लिया जा सकता है, ताकि जांच व्यवस्था और व्यापक हो सके।
दो वर्षों में 330 नमूने फेल
स्वास्थ्य मंत्री ने सदन को जानकारी दी कि वर्ष 2023–24 और वर्ष 2024–25 के दौरान प्रदेश में कुल 3311 खाद्य नमूने जांच के लिए भेजे गए थे। इनमें से 330 नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। इन मामलों में संबंधित निर्माता और विक्रेताओं के विरुद्ध विधिक कार्रवाई (Legal Action) करते हुए अभियोग दर्ज किए गए हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल
विशेषज्ञों के अनुसार यदि खाद्य पदार्थों में मिलावट पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जाता है तो इससे कैंसर जैसे गंभीर रोगों के खतरे को कम किया जा सकता है। राज्य सरकार की यह पहल खाद्य सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और उपभोक्ता संरक्षण (Consumer Protection) की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
