ज्योलीकोट दूषित पेयजल मामले में हाईकोर्ट सख्त, 29 सितंबर को फिर व्यक्तिगत रूप से पेश होंगे डीएम-सीएमओ सहित अधिकारी
नवीन समाचार, नैनीताल, 22 सितंबर 2026 (High Court News 22 September 2026)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के नैनीताल (Nainital) जनपद के ज्योलीकोट (Jyolikote) और आसपास के गांवों में दूषित पेयजल से फैली जलजनित बीमारियों के मामले में उच्च न्यायालय (High Court) ने सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को नैनीताल के जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, उत्तराखंड जल संस्थान के महाप्रबंधक और उत्तराखंड पेयजल निगम के कुमाऊं मंडल के मुख्य अभियंता व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में पेश हुए। न्यायालय ने सभी संबंधित अधिकारियों को 29 सितंबर को अगली सुनवाई में भी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।
यह मामला पहले भी उच्च न्यायालय की निगरानी में है और दूषित पेयजल के नमूनों में जीवाणु पाए जाने के बाद न्यायालय ने प्रशासन से जवाब मांगा था। न्यायालय ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित नौ सदस्यीय समिति से अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी भी अगली सुनवाई में प्रस्तुत करने को कहा है। न्यायालय ने यह भी पूछा कि जब क्षेत्र के ग्राम प्रधानों ने पेयजल की शुद्धता को लेकर संबंधित अधिकारियों से शिकायत की थी, तब शिकायतों पर क्या कार्रवाई की गई और संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया।
29 सितंबर को फिर होगी अधिकारियों की व्यक्तिगत पेशी
न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के साथ समिति द्वारा की गई कार्रवाई का पूरा विवरण प्रस्तुत करने को कहा है। इसमें दूषित पेयजल की समस्या से निजात दिलाने के लिए उठाए गए कदम, पेयजल की गुणवत्ता की निगरानी और प्रभावित क्षेत्रों में की गई व्यवस्थाओं की जानकारी शामिल होगी।
ज्योलीकोट और आसपास के गांजा, वीरभट्टी, छीणा, बेलुवाखान तथा सरियाताल क्षेत्र में दूषित पेयजल से जलजनित बीमारियां फैलने और दो लोगों की मृत्यु के बाद मामला उच्च न्यायालय पहुंचा था। पूर्व में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत जांच में पेयजल के नमूनों को लेकर गंभीर सवाल सामने आए थे।
हाईकोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता भुवन पोखरिया को पुलिस शिकायत प्राधिकरण जाने को कहा
नैनीताल। उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकल पीठ ने सामाजिक कार्यकर्ता भुवन पोखरिया की ओर से पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें निष्पक्ष जांच और कार्रवाई के लिए राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण, देहरादून में शिकायत दर्ज कराने को कहा है।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन एसएसपी प्रहलाद नारायण मीणा, एएसपी प्रकाश चंद्र, एलआईयू निरीक्षक पंकज उप्रेती और पूर्व सीओ दीपशिखा अग्रवाल ने बिना पर्याप्त साक्ष्य एवं अभिलेखों के उच्च न्यायालय में गलत और कूटरचित रिपोर्ट प्रस्तुत की। याचिकाकर्ता के अनुसार इस रिपोर्ट के कारण उनके और उनके परिवार की निजता के अधिकार का उल्लंघन हुआ तथा उन्हें मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।
न्यायालय ने याचिकाकर्ता को पुलिस शिकायत प्राधिकरण में शिकायत दर्ज कराने का निर्देश देते हुए कहा कि यदि प्राधिकरण की जांच या कार्रवाई से वह संतुष्ट नहीं होते हैं तो वे दोबारा उच्च न्यायालय का रुख कर सकते हैं।
याचिकाकर्ता के अनुसार उन्होंने इससे पहले सूचना का अधिकार (RTI) के तहत एसएसपी कार्यालय से रिपोर्ट से संबंधित साक्ष्य और दस्तावेज मांगे थे, लेकिन रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए जाने के बाद उन्होंने उच्च न्यायालय का रुख किया।
भीमताल इंटर कॉलेज के खेल मैदान में पार्किंग का टेंडर हाईकोर्ट ने किया निरस्त, जानें क्यों लिया फैसला
नैनीताल। उच्च न्यायालय ने नैनीताल जनपद के भीमताल (Bhimtal) स्थित लीलावती पंत हेरिटेज इंटर कॉलेज के खेल मैदान में जिला विकास प्राधिकरण की ओर से प्रस्तावित दो मंजिला पार्किंग के टेंडर को निरस्त कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने मामले से जुड़ी जनहित याचिका की सुनवाई के बाद इसे निस्तारित कर दिया।
सुनवाई के दौरान शिक्षा विभाग की ओर से न्यायालय को बताया गया कि संबंधित भूमि विभाग के स्वामित्व में है और जिला विकास प्राधिकरण ने उसकी अनुमति के बिना पार्किंग निर्माण का टेंडर जारी किया था। याचिका में यह भी कहा गया था कि खेल मैदान में पार्किंग बनने से विद्यार्थियों की खेल गतिविधियां प्रभावित होंगी।
ऐतिहासिक खेल मैदान को लेकर दायर हुई थी जनहित याचिका
भीमताल निवासी महेंद्र सिंह सूर्या ने जनहित याचिका दायर कर कहा था कि ऐतिहासिक खेल मैदान को पार्किंग में बदलने से विद्यार्थियों की खेल गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। याचिकाकर्ता के अनुसार इस मैदान में प्रशिक्षण प्राप्त कर कई खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके हैं।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया था कि अधिकारियों और अभिभावकों पर खेल मैदान को पार्किंग के लिए उपलब्ध कराने का दबाव बनाया जा रहा था। सुनवाई के दौरान शिक्षा विभाग द्वारा भूमि पर अपना स्वामित्व और जिला विकास प्राधिकरण की ओर से बिना अनुमति टेंडर जारी किए जाने की जानकारी दिए जाने के बाद न्यायालय ने टेंडर निरस्त कर दिया।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।

यह मामला पहले भी उच्च न्यायालय की निगरानी में है और दूषित पेयजल के नमूनों में जीवाणु पाए जाने के बाद न्यायालय ने प्रशासन से जवाब मांगा था। न्यायालय ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित नौ सदस्यीय समिति से अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी भी अगली सुनवाई में प्रस्तुत करने को कहा है। न्यायालय ने यह भी पूछा कि जब क्षेत्र के ग्राम प्रधानों ने पेयजल की शुद्धता को लेकर संबंधित अधिकारियों से शिकायत की थी, तब शिकायतों पर क्या कार्रवाई की गई और संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया।