नवीन समाचार, नई दिल्ली, 31 मार्च 2026 (Women ahead in Wage Growth Rate)। भारत के श्रम बाजार (Labor Market) से महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण (Economic Empowerment) को लेकर एक अत्यंत उत्साहजनक और युगांतरकारी समाचार प्राप्त हुआ है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (Ministry of Statistics and Programme Implementation) द्वारा जारी ताज़ा ‘पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे’ (Periodic Labour Force Survey-PLFS) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, कैलेंडर वर्ष 2025 में नौकरियों की सभी प्रमुख श्रेणियों में महिलाओं की आय वृद्धि की दर (Income Growth Rate) पुरुषों की तुलना में अधिक रही है। यह प्रतिवेदन (Report) दर्शाता है कि महिलाएं अब न केवल पारंपरिक घरेलू उत्तरदायित्वों से बाहर निकल रही हैं, बल्कि व्यावसायिक जगत में भी अपनी धाक जमा रही हैं।
‘नवीन समाचार’ को मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों (Sources) से प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025 के दौरान वेतनभोगी नौकरियों (Salaried Jobs), स्वरोजगार (Self-employment) और आकस्मिक मजदूरी (Casual Labour) की तीनों श्रेणियों में महिलाओं की आय में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। आंकड़ों का विश्लेषण (Analysis) करने पर ज्ञात होता है कि जहां पुरुषों की वेतन वृद्धि एक निश्चित सीमा पर स्थिर रही, वहीं महिलाओं ने अपनी आय में अधिक तीव्रता से वृद्धि दर्ज की है।
वेतन वृद्धि के आंकड़ों में महिलाओं का वर्चस्व
सांख्यिकी मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में वेतनभोगी नौकरियों में महिलाओं की आय में 7.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि इसी श्रेणी में पुरुषों की आय मात्र 5.8 प्रतिशत बढ़ी। स्वरोजगार के क्षेत्र में यह अंतर और भी स्पष्ट है, जहाँ महिलाओं की कमाई में 8.8 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जबकि पुरुषों के लिए यह आंकड़ा 8 प्रतिशत रहा। सबसे महत्वपूर्ण अंतर आकस्मिक मजदूरी में देखा गया, जहाँ महिलाओं की आय 5.4 प्रतिशत बढ़ी, जबकि पुरुषों की श्रेणी में 0.2 प्रतिशत की गिरावट (Decline) दर्ज की गई है।
क्या यह वृद्धि आय की असमानता (Income Inequality) को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम है? यद्यपि वृद्धि दर उत्साहजनक है, किंतु वास्तविक आय के संदर्भ में अभी भी एक विशाल अंतराल (Gap) विद्यमान है। आंकड़ों के अनुसार, वेतनभोगी नौकरियों में महिलाएं अभी भी पुरुषों की कुल आय का केवल 76 प्रतिशत ही अर्जित कर पाती हैं। आकस्मिक मजदूरी में यह अनुपात 69 प्रतिशत है, जो वर्ष 2024 के 66 प्रतिशत की तुलना में थोड़ा बेहतर हुआ है।
रोजगार की गुणवत्ता और बदलता स्वरूप
पीएलएफएस (PLFS) के सर्वेक्षण में एक और सकारात्मक पक्ष ‘वेतनभोगी नौकरियों’ के अनुपात में वृद्धि है। उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार (High Quality Employment) के प्रतीक माने जाने वाले इस क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी वर्ष 2024 के 16.6 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 18.2 प्रतिशत हो गई है। यह वृद्धि दर्शाती है कि अधिक महिलाएं अब सामाजिक सुरक्षा (Social Security) और अन्य लाभों से युक्त औपचारिक क्षेत्र (Formal Sector) से जुड़ रही हैं। इसके विपरीत, स्वरोजगार में महिलाओं का हिस्सा 66.5 प्रतिशत से घटकर 64.2 प्रतिशत रह गया है, जो इस बात का संकेत है कि महिलाएं अब जोखिम भरे असंगठित कार्यों के स्थान पर सुरक्षित नौकरियों को प्राथमिकता दे रही हैं।
स्वरोजगार में चुनौतियां और भविष्य की राह
सर्वेक्षण के अनुसार, महिलाओं की स्थिति स्वरोजगार (Self-employment) के क्षेत्र में सर्वाधिक चुनौतीपूर्ण बनी हुई है, जहाँ वे पुरुषों की तुलना में मात्र 36 प्रतिशत ही कमा पा रही हैं। इसका मुख्य कारण महिलाओं का लघु और कुटीर उद्योगों (Small Scale Industries) में अधिक सक्रिय होना और बड़े व्यावसायिक उपक्रमों (Business Ventures) तक उनकी सीमित पहुंच हो सकता है। सरकार की ‘मुद्रा योजना’ (Mudra Yojana) और ‘स्टैंड-अप इंडिया’ (Stand-up India) जैसी नीतियों का उद्देश्य इस खाई को पाटना है।
आगामी समय में, कार्यस्थल पर लैंगिक संवेदीकरण (Gender Sensitization) और समान कार्य के लिए समान वेतन (Equal Pay for Equal Work) के विधिक प्रावधानों के कठोर अनुपालन से इस स्थिति में और सुधार की आशा है। सांख्यिकी मंत्रालय का यह प्रतिवेदन नीति निर्धारकों (Policy Makers) के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश है कि महिला कार्यबल (Female Workforce) को कौशल विकास (Skill Development) और वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) से जोड़कर विकसित भारत (Viksit Bharat) के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।















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