EnglishInternational Phonetic Alphabet – SILInternational Phonetic Alphabet – X-SAMPASystem input methodCTRL+MOther languagesAbronAcoliадыгэбзэAfrikaansअहिराणीajagbeBatak AngkolaአማርኛOboloالعربيةঅসমীয়াаварتۆرکجهᬩᬮᬶɓasaáBatak Tobawawleбеларускаябеларуская (тарашкевіца)Bariروچ کپتین بلوچیभोजपुरीभोजपुरीẸdoItaŋikomBamanankanবাংলাབོད་ཡིག།bòo pìkkàbèromबोड़ोBatak DairiBatak MandailingSahap Simalunguncakap KaroBatak Alas-KluetbuluburaብሊንMə̀dʉ̂mbɑ̀нохчийнchinook wawaᏣᎳᎩکوردیAnufɔЧăвашлаDanskDagbaniдарганdendiDeutschDagaareThuɔŋjäŋKirdkîडोगरीDuáláÈʋegbeefịkẹkpeyeΕλληνικάEnglishEsperantoفارسیmfantseFulfuldeSuomiFøroysktFonpoor’íŋ belé’ŋInternational Phonetic AlphabetGaगोंयची कोंकणी / Gõychi Konknni𐌲𐌿𐍄𐌹𐍃𐌺𐌰 𐍂𐌰𐌶𐌳𐌰ગુજરાતીfarefareHausaעבריתहिन्दीछत्तीसगढ़ी𑢹𑣉𑣉HoHrvatskiհայերենibibioBahasa IndonesiaIgboIgalaгӀалгӀайÍslenskaawainAbꞌxubꞌal PoptiꞌJawaꦗꦮქართული ენაTaqbaylit / ⵜⴰⵇⴱⴰⵢⵍⵉⵜJjuадыгэбзэ (къэбэрдеибзэ)KabɩyɛTyapkɛ́nyáŋGĩkũyũҚазақшаភាសាខ្មែរಕನ್ನಡ한국어kanuriKrioकॉशुर / 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प्रशासन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण निर्णय सामने आया है। उच्च न्यायालय ने दीवानी अदालत की न्यायाधीश (सीनियर डिवीजन) रही दीपाली शर्मा (Judge Deepali Sharma) की बर्खास्तगी को रद्द करते हुए उन्हें सेवा की निरंतरता और वरिष्ठता सहित बहाल करने के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह माना जाएगा कि दीपाली शर्मा को कभी सेवा से हटाया ही नहीं गया था। साथ ही, अदालत ने निर्देश दिया कि मध्यवर्ती अवधि के लिए वह अवशेष लाभों (Back Benefits) के 50 प्रतिशत की हकदार भी होंगी और इससे उनकी वरिष्ठता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह फैसला न्यायिक सेवा, निष्पक्ष जांच और विधिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।यहाँ क्लिक कर सीधे संबंधित को पढ़ें Toggleन्यायालय का आदेश और जांच प्रक्रिया की खामियां2018 की शिकायत से शुरू हुआ मामला, 2020 में सेवा समाप्ति का प्रस्तावछापेमारी की अनुमति को लेकर सवाल, टीम की तैनाती पर भी टिप्पणीबाल श्रम नहीं, बल्कि आचरण नियमों के आधार पर तैयार किए गए आरोपमानव पक्ष: सेवा, सम्मान और न्याय की कसौटीTags (Deepali Sharma Reinstatement) :Like this:Relatedन्यायालय का आदेश और जांच प्रक्रिया की खामियांइस प्रकरण की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जी नरेंद्र (Chief Justice G Narendra) और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय (Justice Subhash Upadhyay) की खंडपीठ (Division Bench) में हुई। अदालत ने उपलब्ध अभिलेखों (Records) की गहन समीक्षा के बाद जांच प्रक्रिया में “महत्वपूर्ण कमियां” पाईं। न्यायालय के अनुसार, मामले की मुख्य गवाह किशोरी और उसके पिता—दोनों ने दीपाली शर्मा के विरुद्ध लगाए गए आरोपों से इनकार किया था और कहा था कि उनके साथ उचित व्यवहार किया गया।यह भी पढ़ें : नैनी झील में नौकायन के दौरान महिला ने झील में छलांग लगाई, नाव चालकों की सतर्कता से बची जानअदालत ने यह भी माना कि जांच के आधार पर दीपाली शर्मा को हटाने जैसा कठोर कदम उठाने से पहले प्रक्रिया का पूर्णतः विधिसम्मत होना आवश्यक था। क्या किसी न्यायिक अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई में प्रक्रिया ही प्रश्नों के घेरे में आ जाए, तो निर्णय कितना टिकाऊ रह जाता है—यह सवाल इस फैसले के बाद केंद्र में आ गया है।2018 की शिकायत से शुरू हुआ मामला, 2020 में सेवा समाप्ति का प्रस्ताव यह पूरा प्रकरण वर्ष 2018 में एक गुमनाम शिकायत (Anonymous Complaint) के बाद शुरू हुआ था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि हरिद्वार (Haridwar) में दीवानी न्यायालय की न्यायाधीश (सीनियर डिवीजन) के रूप में तैनाती के दौरान दीपाली शर्मा ने एक 14 वर्षीय नाबालिग किशोरी को अपने घर में घरेलू काम के लिए रखा, उसके स्वास्थ्य की उपेक्षा की और उसे शारीरिक नुकसान पहुंचाया। इसके बाद जांच हुई और उत्तराखंड उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ (Full Court) ने 14 अक्टूबर 2020 को उनकी सेवाएं समाप्त करने का प्रस्ताव पारित किया। आगे चलकर इस संबंध में शासनादेश (Government Order) भी जारी किया गया था।नवंबर 2020 में नौ न्यायाधीशों की पूर्ण पीठ के प्रस्ताव और उसके बाद जारी शासनादेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई। इसके बाद खंडपीठ ने पूरे मामले के रिकॉर्ड का परीक्षण किया।छापेमारी की अनुमति को लेकर सवाल, टीम की तैनाती पर भी टिप्पणीअदालत ने रिकॉर्ड के आधार पर पाया कि 2018 में हरिद्वार स्थित जजेस कॉलोनी (Judges Colony) में दीपाली शर्मा के आधिकारिक आवास पर की गई छापेमारी (Raid) के लिए तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ (KM Joseph) से कोई पूर्व स्वीकृति (Prior Approval) प्राप्त नहीं की गई थी। न्यायालय ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई अनुमोदन उपलब्ध नहीं है।यह भी पढ़ें : उत्तराखंड में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने की नई योजना, हर जिले में 2 पर्यटन गाँव बनेंगे और होम स्टे पर विशेष ध्यान‘नवीन समाचार’ की ओर से पाठकों से विशेष अपील:3 जून 2009 से संचालित उत्तराखंड का सबसे पुराना डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘नवीन समाचार’ अपने आरंभ से ही उत्तराखंड और देश-दुनिया की सटीक, निष्पक्ष और जनहित से जुड़ी खबरें आप तक पहुँचाने का प्रयास करता आ रहा है। हिंदी में विशिष्ट लेखन शैली हमारी पहचान है। हमारा उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक आवाज को मजबूती से सामने लाना, स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता देना और हिंदी पत्रकारिता को जीवित रखना है। हमारे प्रत्येक समाचार एक लाख से अधिक लोगों तक और हर दिन लगभग 10 लाख बार पहुंचते हैं। आज के समय में स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता को बनाए रखना आसान नहीं है। डिजिटल मंच पर समाचारों के संग्रह, लेखन, संपादन, तकनीकी संचालन और फील्ड रिपोर्टिंग में निरंतर आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता होती है। ‘नवीन समाचार’ किसी बड़े कॉर्पोरेट या राजनीतिक दबाव से मुक्त रहकर कार्य करता है, इसलिए इसकी मजबूती सीधे-सीधे पाठकों के सहयोग से जुड़ी है। ‘नवीन समाचार’ अपने सम्मानित पाठकों, व्यापारियों, संस्थानों, सामाजिक संगठनों और उद्यमियों से विनम्र अपील करता है कि वे विज्ञापन के माध्यम से हमें आर्थिक सहयोग प्रदान करें। आपका दिया गया विज्ञापन न केवल आपके व्यवसाय या संस्थान को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँचाएगा, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता को भी सशक्त बनाएगा। अग्रिम धन्यवाद। इसके अतिरिक्त, अदालत ने इस बात पर भी प्रश्न उठाए कि एक महिला न्यायिक अधिकारी के आवास पर छापेमारी के लिए 18 से 20 अधिकारियों की टीम तैनात करने की आवश्यकता क्यों पड़ी। आसपास कई न्यायाधीशों के आवास होने के बावजूद कोई स्वतंत्र गवाह कदाचार की पुष्टि के लिए सामने नहीं आया—यह तथ्य भी अदालत के सामने निर्णायक रूप में आया।बाल श्रम नहीं, बल्कि आचरण नियमों के आधार पर तैयार किए गए आरोपन्यायालय ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि दीपाली शर्मा के विरुद्ध आरोप बाल श्रम (Child Labour) से संबंधित नहीं माने गए, बल्कि उत्तराखंड सरकारी सेवक नियम, 2002 (Uttarakhand Government Servants Rules, 2002) के अंतर्गत निष्ठा और कार्य-आचरण से जुड़े विषय के रूप में तैयार किए गए थे। अदालत के अनुसार घरेलू काम के लिए बच्चों को नियोजित करने से संबंधित विशिष्ट नियमों (Specific Rules) को लागू नहीं किया गया था।इस निष्कर्ष के बाद अदालत ने 14 अक्टूबर 2020 के पूर्ण न्यायालय (Full Court) के प्रस्ताव और उसके बाद जारी सेवा समाप्ति के शासनादेश को रद्द कर दिया। अदालत ने निर्देश दिए कि दीपाली शर्मा को सेवा की निरंतरता और वरिष्ठता सहित बहाल किया जाए, तथा बीच की अवधि के बकाया लाभों का 50 प्रतिशत भुगतान किया जाए।यह भी पढ़ें : लक्सर नगर पालिका ने आरटीआई के जवाब में विकास कार्यों की जगह गोलगप्पों की रेट लिस्ट भेजी, सोशल मीडिया पर हुई वायरलमानव पक्ष: सेवा, सम्मान और न्याय की कसौटीयह निर्णय केवल एक अधिकारी की बहाली नहीं है, बल्कि यह न्यायिक व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्षता और प्रक्रिया की अनिवार्यता को भी रेखांकित करता है। किसी भी शिकायत पर कार्रवाई आवश्यक हो सकती है, लेकिन क्या वह कार्रवाई पूरी तरह विधिक कसौटी पर खरी उतरती है—यह उतना ही जरूरी प्रश्न है। ऐसे फैसले न्यायिक सेवा में कार्यरत अधिकारियों के मनोबल, सेवा सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़े रहते हैं।अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बहाली के बाद सेवा लाभों के भुगतान और अन्य औपचारिक प्रक्रियाएं कितनी तेजी से पूरी होती हैं और इस फैसले का भविष्य में न्यायिक सेवा के मामलों पर क्या व्यापक प्रभाव पड़ता है।पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।नैनीताल जनपद में हाल के दिनों में हुई अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ी पूरी रिपोर्ट यहाँ क्लिक करके पढ़ी जा सकती है। इसी तरह पिथौरागढ़ के समाचारों के लिए यहाँ👉, अल्मोड़ा के समाचारों के लिए यहाँ👉, बागेश्वर के समाचारों के लिए यहाँ👉, चंपावत के समाचारों के लिए यहाँ👉, ऊधमसिंह नगर के समाचारों के लिए यहाँ👉, देहरादून के समाचारों के लिए यहाँ👉, उत्तरकाशी के समाचारों के लिए यहाँ👉, पौड़ी के समाचारों के लिए यहाँ👉, टिहरी जनपद के समाचारों के लिए यहाँ👉, चमोली के समाचारों के लिए यहाँ👉, रुद्रप्रयाग के समाचारों के लिए यहाँ👉, हरिद्वार के समाचारों के लिए यहाँ👉और उत्तराखंडसे संबंधित अन्य समाचार पढ़ने के लिये यहां👉 क्लिक करें।आज के अन्य एवं अधिक पढ़े जा रहे उत्तराखंड के नवीनतम अपडेट्स-‘नवीन समाचार’ पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। यहां क्लिक कर हमारे व्हाट्सएप चैनल से, फेसबुक ग्रुप से, गूगल न्यूज से यहाँ, एक्स से, थ्रेड्स चैनल से, टेलीग्राम से, कुटुंब एप से और डेलीहंट से जुड़ें। अमेजॉन पर सर्वाधिक छूटों के साथ खरीददारी करने के लिए यहां क्लिक करें। यदि आपको लगता है कि ‘नवीन समाचार’ अच्छा कार्य कर रहा है तो हमें यहाँ क्लिक करके सहयोग करें..। Tags (Deepali Sharma Reinstatement) : Deepali Sharma Reinstatement, Uttarakhand High Court Orders Reinstatement Of Deepali Sharma, Civil Judge Senior Division Dismissal Cancelled High Court, Deepali Sharma Service Continuity And Seniority Restoration, High Court Order 50 Percent Back Benefits Judge Case, Investigation Lapses Found In Judicial Officer Inquiry, Full Court Resolution 14 October 2020 Quashed, Government Order Termination Set Aside Uttarakhand, Raid Approval KM Joseph Judges Colony Haridwar Issue, Uttarakhand Government Servants Rules 2002 Conduct Case, Nainital High Court Latest Judiciary Decision, #UttarakhandNews #NainitalNews #UttarakhandHighCourt #HighCourtOrder #JudiciaryNews #CivilJudge #ServiceRestoration #LegalUpdate #GovernmentOrder #HindiNewsShare this: Click to share on Facebook (Opens in new window) Facebook Click to share on X (Opens in new window) X Click to share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading...Related Post navigationपेपर लीक के बाद अब अंकिता भंडारी प्रकरण की भी सीबीआई जांच की संस्तुति, सीएम धामी के 10 प्रमुख निर्णय फिर चर्चा में किलबरी–पंगूट मार्ग पर दो गुलदार की खाल सहित वन्यजीव तस्कर गिरफ्तार, वन विभाग व एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई
डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 10 जनवरी 2026 (Deepali Sharma Reinstatement)। उत्तराखंड के नैनीताल स्थित उत्तराखंड उच्च न्यायालय (Uttarakhand High Court) से न्याय और प्रशासन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण निर्णय सामने आया है। उच्च न्यायालय ने दीवानी अदालत की न्यायाधीश (सीनियर डिवीजन) रही दीपाली शर्मा (Judge Deepali Sharma) की बर्खास्तगी को रद्द करते हुए उन्हें सेवा की निरंतरता और वरिष्ठता सहित बहाल करने के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह माना जाएगा कि दीपाली शर्मा को कभी सेवा से हटाया ही नहीं गया था। साथ ही, अदालत ने निर्देश दिया कि मध्यवर्ती अवधि के लिए वह अवशेष लाभों (Back Benefits) के 50 प्रतिशत की हकदार भी होंगी और इससे उनकी वरिष्ठता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह फैसला न्यायिक सेवा, निष्पक्ष जांच और विधिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।यहाँ क्लिक कर सीधे संबंधित को पढ़ें Toggleन्यायालय का आदेश और जांच प्रक्रिया की खामियां2018 की शिकायत से शुरू हुआ मामला, 2020 में सेवा समाप्ति का प्रस्तावछापेमारी की अनुमति को लेकर सवाल, टीम की तैनाती पर भी टिप्पणीबाल श्रम नहीं, बल्कि आचरण नियमों के आधार पर तैयार किए गए आरोपमानव पक्ष: सेवा, सम्मान और न्याय की कसौटीTags (Deepali Sharma Reinstatement) :Like this:Relatedन्यायालय का आदेश और जांच प्रक्रिया की खामियांइस प्रकरण की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जी नरेंद्र (Chief Justice G Narendra) और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय (Justice Subhash Upadhyay) की खंडपीठ (Division Bench) में हुई। अदालत ने उपलब्ध अभिलेखों (Records) की गहन समीक्षा के बाद जांच प्रक्रिया में “महत्वपूर्ण कमियां” पाईं। न्यायालय के अनुसार, मामले की मुख्य गवाह किशोरी और उसके पिता—दोनों ने दीपाली शर्मा के विरुद्ध लगाए गए आरोपों से इनकार किया था और कहा था कि उनके साथ उचित व्यवहार किया गया।यह भी पढ़ें : नैनी झील में नौकायन के दौरान महिला ने झील में छलांग लगाई, नाव चालकों की सतर्कता से बची जानअदालत ने यह भी माना कि जांच के आधार पर दीपाली शर्मा को हटाने जैसा कठोर कदम उठाने से पहले प्रक्रिया का पूर्णतः विधिसम्मत होना आवश्यक था। क्या किसी न्यायिक अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई में प्रक्रिया ही प्रश्नों के घेरे में आ जाए, तो निर्णय कितना टिकाऊ रह जाता है—यह सवाल इस फैसले के बाद केंद्र में आ गया है।2018 की शिकायत से शुरू हुआ मामला, 2020 में सेवा समाप्ति का प्रस्ताव यह पूरा प्रकरण वर्ष 2018 में एक गुमनाम शिकायत (Anonymous Complaint) के बाद शुरू हुआ था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि हरिद्वार (Haridwar) में दीवानी न्यायालय की न्यायाधीश (सीनियर डिवीजन) के रूप में तैनाती के दौरान दीपाली शर्मा ने एक 14 वर्षीय नाबालिग किशोरी को अपने घर में घरेलू काम के लिए रखा, उसके स्वास्थ्य की उपेक्षा की और उसे शारीरिक नुकसान पहुंचाया। इसके बाद जांच हुई और उत्तराखंड उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ (Full Court) ने 14 अक्टूबर 2020 को उनकी सेवाएं समाप्त करने का प्रस्ताव पारित किया। आगे चलकर इस संबंध में शासनादेश (Government Order) भी जारी किया गया था।नवंबर 2020 में नौ न्यायाधीशों की पूर्ण पीठ के प्रस्ताव और उसके बाद जारी शासनादेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई। इसके बाद खंडपीठ ने पूरे मामले के रिकॉर्ड का परीक्षण किया।छापेमारी की अनुमति को लेकर सवाल, टीम की तैनाती पर भी टिप्पणीअदालत ने रिकॉर्ड के आधार पर पाया कि 2018 में हरिद्वार स्थित जजेस कॉलोनी (Judges Colony) में दीपाली शर्मा के आधिकारिक आवास पर की गई छापेमारी (Raid) के लिए तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ (KM Joseph) से कोई पूर्व स्वीकृति (Prior Approval) प्राप्त नहीं की गई थी। न्यायालय ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई अनुमोदन उपलब्ध नहीं है।यह भी पढ़ें : उत्तराखंड में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने की नई योजना, हर जिले में 2 पर्यटन गाँव बनेंगे और होम स्टे पर विशेष ध्यान‘नवीन समाचार’ की ओर से पाठकों से विशेष अपील:3 जून 2009 से संचालित उत्तराखंड का सबसे पुराना डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘नवीन समाचार’ अपने आरंभ से ही उत्तराखंड और देश-दुनिया की सटीक, निष्पक्ष और जनहित से जुड़ी खबरें आप तक पहुँचाने का प्रयास करता आ रहा है। हिंदी में विशिष्ट लेखन शैली हमारी पहचान है। हमारा उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक आवाज को मजबूती से सामने लाना, स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता देना और हिंदी पत्रकारिता को जीवित रखना है। हमारे प्रत्येक समाचार एक लाख से अधिक लोगों तक और हर दिन लगभग 10 लाख बार पहुंचते हैं। आज के समय में स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता को बनाए रखना आसान नहीं है। डिजिटल मंच पर समाचारों के संग्रह, लेखन, संपादन, तकनीकी संचालन और फील्ड रिपोर्टिंग में निरंतर आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता होती है। ‘नवीन समाचार’ किसी बड़े कॉर्पोरेट या राजनीतिक दबाव से मुक्त रहकर कार्य करता है, इसलिए इसकी मजबूती सीधे-सीधे पाठकों के सहयोग से जुड़ी है। ‘नवीन समाचार’ अपने सम्मानित पाठकों, व्यापारियों, संस्थानों, सामाजिक संगठनों और उद्यमियों से विनम्र अपील करता है कि वे विज्ञापन के माध्यम से हमें आर्थिक सहयोग प्रदान करें। आपका दिया गया विज्ञापन न केवल आपके व्यवसाय या संस्थान को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँचाएगा, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता को भी सशक्त बनाएगा। अग्रिम धन्यवाद। इसके अतिरिक्त, अदालत ने इस बात पर भी प्रश्न उठाए कि एक महिला न्यायिक अधिकारी के आवास पर छापेमारी के लिए 18 से 20 अधिकारियों की टीम तैनात करने की आवश्यकता क्यों पड़ी। आसपास कई न्यायाधीशों के आवास होने के बावजूद कोई स्वतंत्र गवाह कदाचार की पुष्टि के लिए सामने नहीं आया—यह तथ्य भी अदालत के सामने निर्णायक रूप में आया।बाल श्रम नहीं, बल्कि आचरण नियमों के आधार पर तैयार किए गए आरोपन्यायालय ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि दीपाली शर्मा के विरुद्ध आरोप बाल श्रम (Child Labour) से संबंधित नहीं माने गए, बल्कि उत्तराखंड सरकारी सेवक नियम, 2002 (Uttarakhand Government Servants Rules, 2002) के अंतर्गत निष्ठा और कार्य-आचरण से जुड़े विषय के रूप में तैयार किए गए थे। अदालत के अनुसार घरेलू काम के लिए बच्चों को नियोजित करने से संबंधित विशिष्ट नियमों (Specific Rules) को लागू नहीं किया गया था।इस निष्कर्ष के बाद अदालत ने 14 अक्टूबर 2020 के पूर्ण न्यायालय (Full Court) के प्रस्ताव और उसके बाद जारी सेवा समाप्ति के शासनादेश को रद्द कर दिया। अदालत ने निर्देश दिए कि दीपाली शर्मा को सेवा की निरंतरता और वरिष्ठता सहित बहाल किया जाए, तथा बीच की अवधि के बकाया लाभों का 50 प्रतिशत भुगतान किया जाए।यह भी पढ़ें : लक्सर नगर पालिका ने आरटीआई के जवाब में विकास कार्यों की जगह गोलगप्पों की रेट लिस्ट भेजी, सोशल मीडिया पर हुई वायरलमानव पक्ष: सेवा, सम्मान और न्याय की कसौटीयह निर्णय केवल एक अधिकारी की बहाली नहीं है, बल्कि यह न्यायिक व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्षता और प्रक्रिया की अनिवार्यता को भी रेखांकित करता है। किसी भी शिकायत पर कार्रवाई आवश्यक हो सकती है, लेकिन क्या वह कार्रवाई पूरी तरह विधिक कसौटी पर खरी उतरती है—यह उतना ही जरूरी प्रश्न है। ऐसे फैसले न्यायिक सेवा में कार्यरत अधिकारियों के मनोबल, सेवा सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़े रहते हैं।अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बहाली के बाद सेवा लाभों के भुगतान और अन्य औपचारिक प्रक्रियाएं कितनी तेजी से पूरी होती हैं और इस फैसले का भविष्य में न्यायिक सेवा के मामलों पर क्या व्यापक प्रभाव पड़ता है।पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।नैनीताल जनपद में हाल के दिनों में हुई अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ी पूरी रिपोर्ट यहाँ क्लिक करके पढ़ी जा सकती है। इसी तरह पिथौरागढ़ के समाचारों के लिए यहाँ👉, अल्मोड़ा के समाचारों के लिए यहाँ👉, बागेश्वर के समाचारों के लिए यहाँ👉, चंपावत के समाचारों के लिए यहाँ👉, ऊधमसिंह नगर के समाचारों के लिए यहाँ👉, देहरादून के समाचारों के लिए यहाँ👉, उत्तरकाशी के समाचारों के लिए यहाँ👉, पौड़ी के समाचारों के लिए यहाँ👉, टिहरी जनपद के समाचारों के लिए यहाँ👉, चमोली के 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Government Order Termination Set Aside Uttarakhand, Raid Approval KM Joseph Judges Colony Haridwar Issue, Uttarakhand Government Servants Rules 2002 Conduct Case, Nainital High Court Latest Judiciary Decision, #UttarakhandNews #NainitalNews #UttarakhandHighCourt #HighCourtOrder #JudiciaryNews #CivilJudge #ServiceRestoration #LegalUpdate #GovernmentOrder #HindiNews