डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 2 अप्रैल 2026 (Mahabharata over Sanjay in UK Congress)। उत्तराखंड (Uttarakhand) की राजनीति में इन दिनों ‘संजय’ नाम का एक नया अध्याय जुड़ गया है, जिसने मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस (Congress) के भीतर ‘अंतर्कलह’ की ज्वाला को ‘महाभारत’ सा भड़का दिया है। रामनगर (Ramnagar) के पूर्व ब्लॉक प्रमुख संजय नेगी (Sanjay Negi) को पार्टी में सम्मिलित करने के प्रश्न पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत (Harish Rawat) के समर्थकों और विरोधियों के मध्य वाकयुद्ध (War of Words) छिड़ गया है।
इस विवाद ने न केवल कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी को सार्वजनिक कर दिया है, बल्कि आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों (Assembly Elections) से पूर्व पार्टी की एकजुटता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। प्रश्न उठ रहा है कि क्या एक स्थानीय नेता की सदस्यता का मुद्दा दिल्ली दरबार तक पहुँचकर प्रदेश नेतृत्व की चूलें हिला देगा?
नवीन समाचार को प्राप्त राजनीतिक गलियारों की चर्चाओं के अनुसार, इस पूरे विवाद का सूत्रपात दिल्ली (Delhi) में आयोजित एक सदस्यता समारोह से हुआ। जहाँ पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल और भीमलाल आर्य सहित छह नेताओं ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की, वहीं अंतिम क्षणों में संजय नेगी का नाम सूची से हटा दिया गया। चर्चा है कि इसी अपमान से क्षुब्ध होकर हरीश रावत ने 15 दिनों के ‘राजनैतिक अवकाश’ (Political Break) की घोषणा कर दी। हालांकि, बाद में उन्होंने इसे मात्र ‘विश्राम’ बताया, किंतु उनके समर्थकों ने इसे ‘हनुमान’ की पीड़ा बताकर शीर्ष नेतृत्व से हस्तक्षेप की मांग की है।
कुंजवाल का वार-हरक का पलटवार: “पार्टी किसी एक व्यक्ति से नहीं चलती”
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल (Govind Singh Kunjwal) ने इस मामले में कहा “हरीश रावत के बिना कांग्रेस की कल्पना असंभव है”, इस पर पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत (Harak Singh Rawat) ने अत्यंत आक्रामक रुख अपनाया है। हरक सिंह ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि किसी को भी यह भ्रम या अहंकार नहीं होना चाहिए कि उसके बिना पार्टी का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।
उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि हरीश रावत को राजनीति में सब कुछ प्राप्त हुआ है—वे ब्लॉक प्रमुख से लेकर मुख्यमंत्री तक रहे हैं, अब केवल प्रधानमंत्री (Prime Minister) का पद ही शेष है। हरक के अनुसार, दिल्ली की बैठक में किसी ने संजय के नाम का विरोध नहीं किया था, केवल प्रभारी कुमारी शैलजा (Kumari Selja) ने उन्हें दूसरे चरण में शामिल करने की बात कही थी।
कौन हैं संजय नेगी और क्यों हैं वे अपरिहार्य?
संजय नेगी रामनगर की राजनीति के बड़े खिलाड़ी माने जाते हैं। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में हरीश रावत ने संजय नेगी के लिए रामनगर की सीट छोड़ लालकुआं (Lalkuan) से चुनाव लड़ा, लेकिन कांग्रेस ने स्थानीय असंतोष को दरकिनार कर बाहरी प्रत्याशी बताए गए पूर्व सांसद डॉ. महेंद्र पाल को टिकट दे दिया, तो संजय नेगी ने निर्दलीय (Independent) चुनाव लड़कर लगभग 17,000 मत प्राप्त किए थे। इस ध्रुवीकरण के कारण कांग्रेस को रामनगर सीट गंवानी पड़ी।
इसके बाद संजय ने अपनी पत्नी को रामनगर की ब्लॉक प्रमुख (Block Pramukh) के रूप में चुनाव जितवा दिया और स्वयं ज्येष्ठ प्रमुख के पद पर विजयी हुए। संजय का दावा है कि उनके कांग्रेस में आने से रामनगर की सीट पार्टी की झोली में जाना सुनिश्चित है।
भाजपा ने कसा तंज: “सूत न कपास, जुलाहों में लट्ठम-लट्ठ”
कांग्रेस की इस आंतरिक कलह पर सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीखे चटकारे लिए हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट (Mahendra Bhatt) ने तंज कसते हुए कहा कि 2027 में विजय के स्वप्न देख रही कांग्रेस की स्थिति “सूत न कपास, जुलाहों में लट्ठम-लट्ठ” जैसी हो गई है। उन्होंने हरीश रावत के ‘संन्यास’ पर सहानुभूति जताते हुए कहा कि जब बबूल के पेड़ बोए हैं, तो आम की अपेक्षा करना व्यर्थ है। भट्ट ने दावा किया कि विचारहीन और नेतृत्वविहीन कांग्रेस से आने वाले समय में कई और बड़े नेता पलायन करेंगे।
सुलह की कोशिशें और फंसा हुआ राजनीतिक कांटा
दूसरी ओर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल (Ganesh Godyal) वर्तमान में ‘डैमेज कंट्रोल’ (Damage Control) में जुटे हैं। उन्होंने मीडिया को आश्वस्त किया कि हरीश रावत वरिष्ठ नेता हैं और उनकी बातों पर पार्टी फोरम (Party Forum) में विचार किया जाएगा। उन्होंने ‘नाराजगी’ की बात को नकारते हुए इसे आपसी संवाद से सुलझाने का भरोसा दिया है। हालांकि, पूर्व सांसद महेंद्र पाल (Mahendra Pal) और रणजीत सिंह रावत (Ranjeet Singh Rawat) द्वारा संजय नेगी की एंट्री का विरोध किए जाने से स्पष्ट है कि कांग्रेस के भीतर व्यक्तिगत हितों और गुटबाजी का संघर्ष अभी थमा नहीं है।
क्या कांग्रेस नेतृत्व समय रहते इस ‘महाभारत’ को रोक पाएगा या रामनगर की यह चिंगारी पूरे प्रदेश में पार्टी की संभावनाओं को झुलसा देगी? पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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