नवीन समाचार, रुद्रपुर, 4 नवंबर 2026 (Who is AISA Chief Neha Bora from UK)। उत्तराखंड (Uttarakhand) के ऊधम सिंह नगर (Udham Singh Nagar) जनपद के खटीमा (Khatima) से संबंध रखने वाली एआईएसए (AISA) यानी ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (All India Students’ Association) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा (Neha Bora) इन दिनों राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा में हैं। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के साथ छात्र आंदोलनों और विपक्षी प्रदर्शनों में नजर आने वाली नेहा का एक पुराना वीडियो सामने आने के बाद ‘ब्राह्मणवाद से मुक्ति’ और मंदिरों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं के साथ ही विपक्षी गठबंधन के सहयोगी दलों के नेताओं ने भी उनकी टिप्पणी पर आपत्ति जताई है। आखिर उत्तराखंड के खटीमा से निकली नेहा बोरा कौन हैं, वह एआईएसए के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद तक कैसे पहुंचीं और उनके कौन-कौन से बयान पहले भी विवादों में रहे हैं?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नेहा का परिवार मूल रूप से पिथौरागढ़ (Pithoragarh) जनपद का निवासी है, जबकि नेहा का जन्म उत्तराखंड के खटीमा के बिगराबाग (Bigarabag) गांव में हुआ। बताया जाता है कि 1980 के दशक में उनका परिवार पिथौरागढ़ से खटीमा आकर बस गया था। उनके पिता भारतीय सेना (Indian Army) में कर्नल रहे हैं और माता गृहणी हैं। पिता की सैन्य सेवा के कारण नेहा का बचपन और शिक्षा देश के अलग-अलग शहरों में हुई।
खटीमा से दिल्ली के विश्वविद्यालयों तक पहुंचने का सफर
नेहा बोरा की उम्र 29 वर्ष बताई गई है। उनकी प्रारंभिक पढ़ाई पश्चिम बंगाल (West Bengal) के सिलीगुड़ी (Siliguri) में हुई। इसके बाद वह उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली (Delhi) पहुंचीं। उनकी शिक्षा को लेकर प्रकाशित समाचार रिपोर्टों में एक अंतर भी है। टाइम्स ऑफ इंडिया, एनडीटीवी और मनीकंट्रोल (Moneycontrol) की प्रोफाइलों में उन्हें दिल्ली विश्वविद्यालय (University of Delhi) के हिंदू कॉलेज (Hindu College) से समाजशास्त्र की स्नातक बताया गया है। वहीं आउटलुक की 19 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित विस्तृत प्रोफाइल में उनके अरबिंदो कॉलेज (Aurobindo College) से अंग्रेजी ऑनर्स की पढ़ाई करने का उल्लेख है।
स्नातक शिक्षा के बाद उन्होंने डॉ. बीआर आंबेडकर विश्वविद्यालय (Dr. B. R. Ambedkar University) से परास्नातक की पढ़ाई की। वर्तमान में वह जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (Jawaharlal Nehru University-JNU) के स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स (School of Arts and Aesthetics) में थिएटर एवं परफॉर्मेंस स्टडीज (Theatre and Performance Studies) विषय से पीएचडी शोधार्थी हैं।
उनकी छात्र राजनीति में सक्रियता की शुरुआत केवल राजनीतिक भाषणों से नहीं हुई। दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान उनकी रुचि थिएटर और सामाजिक विषयों पर आधारित नाटकों में बढ़ी। वह ‘मोक्ष’ (Moksha) नाम के थिएटर समूह से जुड़ीं। इसके बाद दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (Delhi-National Capital Region) में बस्तियों और मोहल्लों तक जाकर सामाजिक तथा राजनीतिक विषयों पर नाटक प्रस्तुत करने वाले ‘संगवारी’ (Sangwari) समूह के साथ काम किया।
वर्ष 2019 में नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act-CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (National Register of Citizens-NRC) के विरोध में हुए आंदोलनों के दौरान थिएटर और राजनीति से उनका जुड़ाव और बढ़ा। किसान आंदोलन के दौरान भी उन्होंने गीतों, नाटकों और सामूहिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भागीदारी की। इन गतिविधियों में नागरिकता, सामाजिक असमानता, अधिकारों और सत्ता से जुड़े प्रश्नों को उठाया गया।
2017 में एआईएसए से जुड़ीं, 2023 में राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नेहा वर्ष 2017 में दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान ही एआईएसए से जुड़ गई थीं। वर्ष 2019 में डॉ. बीआर आंबेडकर विश्वविद्यालय में परास्नातक की पढ़ाई के दौरान वह परिसर से जुड़े कई मुद्दों पर सक्रिय रहीं। इनमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, छात्रावास के नियम, लैंगिक संवेदनशीलता और यौन उत्पीड़न संबंधी शिकायतों के निस्तारण जैसे विषय शामिल थे।
संगठन में उनकी जिम्मेदारियां धीरे-धीरे बढ़ीं। वह पहले डॉ. बीआर आंबेडकर विश्वविद्यालय में एआईएसए की इकाई सचिव बनीं। इसके बाद दिल्ली राज्य सचिव और फिर दिल्ली राज्य अध्यक्ष का दायित्व संभाला। वर्ष 2022 में वह जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय पहुंचीं और वर्ष 2023 तक संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गईं। इस प्रकार उनका सफर एक सामान्य सदस्य से परिसर स्तर, राज्य स्तर और फिर राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंचा।
क्या है एआईएसए
एआईएसए वामपंथी विचारधारा से जुड़ा छात्र संगठन है। इसका संबंध भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी लिबरेशन) (Communist Party of India-Marxist Leninist Liberation-CPI-ML Liberation) से है। यह कांग्रेस का छात्र संगठन नहीं है। इसलिए राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra) के साथ नेहा की तस्वीरें अथवा विपक्षी नेताओं के साथ उनकी राजनीतिक गतिविधियां उन्हें कांग्रेस का सदस्य नहीं बनातीं। नेहा ने स्वयं भी अपनी राजनीतिक दिशा को लेकर सीपीआई (एमएल) से जुड़ाव बनाए रखने की बात कही है।
23 दिन की भूख हड़ताल और राहुल गांधी के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता
नेहा बोरा की राष्ट्रीय पहचान वर्ष 2026 में नीट परीक्षा (NEET Examination) और प्रश्नपत्र लीक से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के दौरान तेजी से बढ़ी। दिल्ली के जंतर-मंतर (Jantar Mantar) पर उन्होंने एआईएसए के अन्य छात्र नेताओं मनीष (Manish) और आमीन (Aameen) के साथ 23 दिनों तक भूख हड़ताल की। प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
20 जुलाई को विपक्षी सांसदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अन्य प्रमुख लोगों की अपील के बाद तीनों छात्र नेताओं ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त की। इसके बाद 25 जुलाई को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने छात्र नेताओं के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता की। इस दौरान नेहा ने परीक्षा व्यवस्था और छात्रों के आंदोलनों से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। राहुल गांधी ने भी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई।
इसके बाद नेहा बोरा राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ विपक्ष के कई प्रदर्शनों में दिखाई दीं। समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के नेता अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) और तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) की नेता ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) सहित अन्य विपक्षी नेताओं के साथ भी उनकी तस्वीरें सामने आईं। इससे वह छात्र राजनीति के साथ विपक्षी आंदोलनों में भी पहचाना जाने वाला चेहरा बन गईं।
नेहा बोरा पर फेंकी गई स्याही
नेहा बोरा पर स्याही फेंकने की घटना 7 अगस्त 2026 को झारखंड की राजधानी रांची में हुई थी। यह घटना तब घटी जब वे ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और अन्य छात्र संगठनों के साथ मिलकर झारखंड विधानसभा की ओर विरोध मार्च निकाल रही थीं। छात्र और नौकरी के अभ्यर्थी झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और JSSC CGL भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, धांधली और भ्रष्टाचार के खिलाफ पिछले 14 दिनों से प्रदर्शन कर रहे थे। नेहा बोरा छात्रों के इस आंदोलन का समर्थन करने रांची पहुंची थीं।
हमलावर की पहचान: मार्च जब बिरसा चौक के पास पहुंचा, तब अमरनाथ पांडे नाम के एक 26 वर्षीय युवक (जो हजारीबाग का रहने वाला बताया गया) ने नेहा बोरा के चेहरे पर काली स्याही फेंक दी। मौके पर मौजूद छात्रों ने उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। स्याही फेंकने वाले व्यक्ति ने नेहा बोरा पर ‘देशविरोधी’ होने और उमर खालिद का समर्थन करने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की थी।
नेहा बोरा की प्रतिक्रिया: चेहरे पर स्याही लगे होने के बावजूद नेहा बोरा ने अपना भाषण और मार्च जारी रखा। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीर साझा करते हुए कहा, “मैं इस स्याही को गर्व के साथ पहनती हूं (I wear this ink with pride)” । उन्होंने आरोप लगाया कि यह हमला बीजेपी-आरएसएस (BJP-RSS) के लोगों द्वारा छात्र आंदोलन को डराने और दबाने के लिए कराया गया था।
मुख्य चुनाव आयुक्त के विरोध में भी सक्रिय रहीं
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) के विरुद्ध और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर हुए प्रदर्शनों में भी नेहा सक्रिय रहीं। 10 अक्टूबर को दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janta Party-CJP) और छात्र संगठनों की ओर से आयोजित प्रदर्शन में वह शामिल हुईं। पुलिस ने उन्हें कई अन्य प्रदर्शनकारियों के साथ हिरासत में लिया, हालांकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।
12 अक्टूबर को विपक्षी गठबंधन के नेताओं के साथ सर्वोच्च न्यायालय की ओर निकाले गए मार्च में भी नेहा राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ दिखाई दीं। इसके बाद एक नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित विपक्षी प्रदर्शन का भी उन्होंने समर्थन किया और लोगों से इसमें शामिल होने की अपील की। इस तरह वह मतदाता सूची, चुनाव आयोग की भूमिका और विपक्ष के साझा आंदोलनों से जुड़े कई प्रदर्शनों में सक्रिय बनी रहीं।
ब्राह्मणवादी व्यवस्था और मंदिरों पर पुराने वीडियो से नया विवाद
नेहा बोरा का ताजा विवाद 3 नवंबर को भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी (Pradeep Bhandari) की ओर से सामाजिक माध्यम एक्स (X) पर साझा किए गए एक पुराने वीडियो के बाद शुरू हुआ। वीडियो की मूल तारीख और आयोजन का पूरा विवरण सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है। इसमें नेहा महिलाओं, गरीबों, शोषितों और कमजोर वर्गों की स्थिति पर बात करते हुए ब्राह्मणवादी व्यवस्था की आलोचना करती सुनाई देती हैं।
वीडियो में वह कहती हैं कि इस व्यवस्था में गरीबों, शोषितों, पशुओं और महिलाओं को अधीनता तथा उत्पीड़न के योग्य माना जाता है। वह आगे ब्राह्मण महिलाओं की सुरक्षा का उल्लेख करते हुए मंदिरों में पुजारियों द्वारा दुष्कर्म किए जाने की बात कहती हैं और उन्नाव (Unnao) तथा कठुआ (Kathua) की घटनाओं का संदर्भ देती हैं। उन्होंने अपनी बात में तुलसीदास (Tulsidas) की रामचरितमानस (Ramcharitmanas) की एक चौपाई का भी उल्लेख किया।
इस टिप्पणी पर भाजपा ने नेहा को निशाना बनाया। प्रदीप भंडारी ने उन्हें राहुल गांधी की राजनीति का चेहरा बताते हुए आरोप लगाया कि उनकी टिप्पणी हिंदू धार्मिक संस्थाओं और आस्थाओं को निशाना बनाती है। भाजपा नेता गौरव भाटिया (Gaurav Bhatia) ने भी पुजारियों और धार्मिक संस्थाओं के बारे में इस तरह की सामान्यीकृत टिप्पणी पर आपत्ति जताई।
INDI-A में नेहा के कारण दरार !
विवाद केवल भाजपा तक सीमित नहीं रहा। समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय (Rajeev Rai) ने कहा कि किसी जाति, समुदाय, धर्म अथवा क्षेत्र के बारे में इस तरह का व्यापक बयान देना उचित नहीं है। उनके अनुसार, हर धर्म में अच्छे और बुरे दोनों तरह के लोग होते हैं, इसलिए किसी पूरे समुदाय के बारे में सामान्य धारणा नहीं बनाई जानी चाहिए।
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) (Shiv Sena-Uddhav Balasaheb Thackeray) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी (Priyanka Chaturvedi) ने भी वीडियो में कही गई बातों को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। स्वयं को ब्राह्मण महिला बताते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि क्या जाति और धर्म को लेकर इस तरह की अपमानजनक भाषा उचित है। उन्होंने कहा कि वामपंथ हो या दक्षिणपंथ, किसी भी तरह की कट्टर सोच देश के लिए नुकसानदेह है। हालांकि उन्होंने नेहा से बातचीत करने की इच्छा भी जताई और कहा कि वह युवा तथा प्रतिभाशाली हैं, उन्हें अपनी ऊर्जा का अधिक रचनात्मक उपयोग करना चाहिए।
इस बीच सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के एक अधिवक्ता ने नेहा बोरा के विरुद्ध पुलिस शिकायत देने का दावा किया है। शिकायत में उनके बयान को सामाजिक सौहार्द प्रभावित करने वाला बताया गया है। हालांकि शिकायत दिए जाने और प्राथमिकी दर्ज होने में अंतर है। उपलब्ध समाचार रिपोर्टों में इस शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज होने की पुष्टि नहीं की गई है।
सेना पर टिप्पणी से भी उठ चुका है विवाद
नेहा बोरा की टिप्पणियों को लेकर यह पहला विवाद नहीं है। अगस्त 2026 में भारतीय सेना की व्यवस्था पर उनकी टिप्पणी भी चर्चा का विषय बनी थी। उन्होंने सेना में अधिकारियों और अन्य रैंकों के जवानों के बीच आवास, भोजनालय और स्विमिंग पूल जैसी सुविधाओं की अलग-अलग व्यवस्था का उल्लेख करते हुए इसे ‘क्रमबद्ध असमानता’ बताया था।
उनकी टिप्पणी पर सोशल मीडिया में कई लोगों ने आपत्ति जताई। आलोचकों का कहना था कि सेना में पद और रैंक के अनुसार आवास तथा अन्य सुविधाओं की अलग व्यवस्था संगठनात्मक ढांचे का हिस्सा है। सेवानिवृत्त वायुसेना अधिकारी फ्लाइट लेफ्टिनेंट अनूप वर्मा (Retired Flight Lieutenant Anoop Verma) ने भी उनके दावे को गलत सूचना फैलाने वाला बताया। इस विवाद में नेहा के अपने सैन्य परिवार और पिता की राजनीतिक विचारधारा को लेकर दिए गए पुराने बयान भी चर्चा में आए।
नेहा ने अपने एक साक्षात्कार में बताया था कि उनका परिवार भाजपा समर्थक विचारधारा वाला रहा है और उनके घर में देशभक्ति को बहुत महत्व दिया जाता है। उन्होंने अपने पिता के साथ वैचारिक मतभेदों का भी उल्लेख किया था। सेना पर उनकी टिप्पणी को लेकर उनके व्यक्तिगत अनुभवों और सेना की संस्थागत व्यवस्था के बीच अंतर को लेकर भी बहस हुई।
बांग्लादेश के छात्र आंदोलन पर संदेश को लेकर भी हुई थी आलोचना
अक्टूबर 2026 में बांग्लादेश (Bangladesh) के छात्र आंदोलन को लेकर भेजे गए उनके एक वीडियो संदेश पर भी राजनीतिक विवाद हुआ था। 13 अक्टूबर को उन्होंने बांग्लादेश के सोशलिस्ट स्टूडेंट्स फ्रंट (Socialist Students’ Front-SSF) के छठे राष्ट्रीय सम्मेलन को संदेश भेजा था। इसमें उन्होंने कहा था कि भारत में दिखाई दे रहे जेन-जी (Gen Z) आंदोलन की शुरुआत बांग्लादेश से हुई और वहां के युवाओं ने भारत के युवाओं को रास्ता दिखाया है। उन्होंने दोनों देशों के युवाओं के बीच एकजुटता और आंदोलनों से सीखने की बात कही थी।
भाजपा ने इस संदेश को बांग्लादेश जैसी राजनीतिक उथल-पुथल भारत में दोहराने की इच्छा से जोड़कर नेहा की आलोचना की थी। हालांकि पूरे संदेश में नेहा ने लोकतांत्रिक अधिकारों, मतदाता अधिकारों, धार्मिक कट्टरवाद, शिक्षा के निजीकरण और विश्वविद्यालयों में विचारों की स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर एकजुटता जताई थी। बाद में सफाई भी दी गई कि उन्होंने भारत में बांग्लादेश जैसी हिंसक स्थिति पैदा करने की सीधी अपील नहीं की थी।
नेहा ने 21 अक्टूबर को जारी अपने स्पष्टीकरण में भी कहा था कि उनके संदेश का आशय लोकतंत्र और मानवाधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे युवाओं के साथ एकजुटता जताना था, न कि किसी हिंसक अथवा अराजक आंदोलन का समर्थन करना।
योगी आदित्यनाथ पर टिप्पणी और राहुल गांधी को लेकर पोस्ट भी चर्चा में रही
सितंबर 2026 में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के गोरखपुर (Gorakhpur) में आयोजित जेन-जी महाजुटान कार्यक्रम में नेहा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) पर तीखी टिप्पणी की थी। उन्होंने प्रदेश सरकार पर अल्पसंख्यकों और दलितों के विरुद्ध बुलडोजर कार्रवाई करने का आरोप लगाया तथा मुख्यमंत्री के लिए ‘गुंडा’ और ‘दंगाई’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। इस बयान पर उत्तर प्रदेश के मंत्रियों और भाजपा नेताओं ने आपत्ति जताई। रिपोर्टों के अनुसार, इस टिप्पणी के संबंध में गोरखपुर के तीन थानों में शिकायतें भी दी गई थीं।
अक्टूबर में राहुल गांधी को लेकर उनकी एक सोशल मीडिया पोस्ट भी चर्चा में आई। नेहा ने लिखा था कि कुछ जनप्रतिनिधि लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपना काम कर रहे हैं, जबकि दूसरे अपने दिन गिन रहे हैं। कुछ कांग्रेस समर्थकों ने इसे राहुल गांधी के योगदान को कमतर दिखाने वाली टिप्पणी समझा। वहीं कुछ अन्य लोगों ने इसका अर्थ राहुल गांधी की ओर संकेत करते हुए उनकी प्रशंसा के रूप में लिया। इस पोस्ट पर कांग्रेस समर्थकों और अन्य सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के बीच बहस हुई।
छात्र नेता के रूप में पहचान, लेकिन कांग्रेस से अलग संगठन
नेहा बोरा की यात्रा खटीमा से दिल्ली के विश्वविद्यालयों, थिएटर समूहों और छात्र आंदोलनों तक पहुंची है। वर्ष 2017 में एआईएसए से जुड़ने के बाद उन्होंने परिसर और दिल्ली राज्य स्तर पर संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालीं और वर्ष 2023 में राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं। वर्ष 2026 में नीट परीक्षा, चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े आंदोलनों के कारण उनकी पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और बढ़ी।
राहुल गांधी के साथ उनकी मौजूदगी के कारण उन्हें कांग्रेस के करीब माना जा रहा है, लेकिन संगठनात्मक रूप से एआईएसए और कांग्रेस अलग हैं। एआईएसए का संबंध सीपीआई (एमएल) लिबरेशन से है और नेहा ने भी सार्वजनिक रूप से अपनी राजनीतिक दिशा को इसी संगठन से जुड़ा बताया है। ताजा विवाद में भाजपा के साथ विपक्षी गठबंधन के सहयोगी दलों की असहमति ने उनके बयान को व्यापक राजनीतिक बहस का विषय बना दिया है।
खटीमा से निकलकर राष्ट्रीय छात्र राजनीति में पहचान बनाने वाली नेहा बोरा के सामने अब एक ओर संगठनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाने और दूसरी ओर अपने बयानों पर उठ रहे सवालों का सामना करने की चुनौती है। आने वाले दिनों में यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि वह इस ताजा विवाद पर अपना पक्ष किस तरह रखती हैं और उनका संगठन इस बहस पर क्या प्रतिक्रिया देता है।
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डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
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